
मिडिल ईस्ट की आग अब बुझने के बजाय और फैलती जा रही है। एक तरफ ईरान के साथ सीधा टकराव है, तो दूसरी तरफ लेबनान में इजराइल की जमीनी कार्रवाई। महज कुछ ही दिनों में सैकड़ों मौतें और लेबनान की 20% जमीन का खाली होना इस बात की गवाही दे रहा है कि यह युद्ध अब केवल हमास या हिजबुल्लाह तक सीमित नहीं है।
क्या बेंजामिन नेतन्याहू अपने ‘अल्टीमेट गोल’ यानी ‘ग्रेटर इजराइल’ (Eretz Yisrael Hashlema) की ओर बढ़ रहे हैं?
📍 आखिर क्या है ‘ग्रेटर इजराइल’?
ग्रेटर इजराइल का विचार कोई नया नहीं है, बल्कि यह दशकों पुरानी एक विचारधारा है। इसके तहत इजराइल की सीमाओं को वर्तमान से कहीं अधिक विस्तार देने की कल्पना की गई है। कट्टरपंथी विचारधारा और ऐतिहासिक धार्मिक दावों के आधार पर, इसके दायरे में ये इलाके शामिल हो सकते हैं:
- संपूर्ण फिलिस्तीन: वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी का पूर्ण विलय।
- दक्षिणी लेबनान: जहाँ वर्तमान में इजराइली सेना बफर जोन बनाने के नाम पर आगे बढ़ रही है।
- सीरिया का हिस्सा: गोलन हाइट्स से आगे का क्षेत्र।
- जॉर्डन और मिस्र के कुछ हिस्से: ऐतिहासिक निल से फरात (Nile to Euphrates) की अवधारणा के तहत।
🚀 नेतन्याहू का ‘न्यू ऑर्डर’ और UN का नक्शा
हाल ही में संयुक्त राष्ट्र (UN) में नेतन्याहू ने एक नक्शा दिखाया था, जिसमें उन्होंने मिडिल ईस्ट को दो हिस्सों में बांटा: The Blessing (आशीर्वाद) और The Curse (अभिशाप)। उनका यह न्यू ऑर्डर तीन मुख्य स्तंभों पर टिका है:
- प्रतिरोध का अंत: नेतन्याहू का मानना है कि जब तक हमास (गाजा), हिजबुल्लाह (लेबनान) और हूतियों (यमन) का अस्तित्व है, इजराइल कभी सुरक्षित नहीं रह सकता।
- स्थायी बफर जोन: लेबनान में जमीन खाली कराने का अर्थ है कि इजराइल अपनी उत्तरी सीमा पर एक ऐसी पट्टी बनाना चाहता है जहाँ केवल उसका नियंत्रण हो।
- ईरान को चुनौती: ग्रेटर इजराइल के रास्ते में ईरान सबसे बड़ी बाधा है। सीधे ईरान पर हमले करके नेतन्याहू उस प्रॉक्सी नेटवर्क को जड़ से खत्म करना चाहते हैं।
⚖️ दुनिया के लिए इसके क्या मायने हैं?
यदि युद्ध का दायरा इसी तरह बढ़ता रहा और नक्शे बदले गए, तो इसके परिणाम भयावह हो सकते हैं:
- क्षेत्रीय संप्रभुता का संकट: लेबनान और सीरिया जैसे संप्रभु देशों के अस्तित्व पर सवाल खड़े हो जाएंगे।
- मानवीय त्रासदी: लाखों लोगों का विस्थापन केवल मिडिल ईस्ट ही नहीं, बल्कि यूरोप और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी भारी दबाव डालेगा।
- महाशक्तियों का टकराव: यदि ईरान इस युद्ध में पूरी तरह कूदता है, तो अमेरिका और रूस का परोक्ष या प्रत्यक्ष रूप से शामिल होना अनिवार्य हो जाएगा, जो विश्व युद्ध III की आहट हो सकती है।
लेबनान में इजराइल की बढ़ती ताकत और जमीनी कब्जा यह संकेत दे रहा है कि युद्ध अब सिर्फ आत्मरक्षा (Self-defense) तक सीमित नहीं रह गया है। यह नक्शे बदलने की जंग बनती जा रही है। नेतन्याहू का न्यू ऑर्डर सफल होगा या यह क्षेत्र को एक अनंत अंधकार में धकेल देगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।
आपकी क्या राय है? क्या बेंजामिन नेतन्याहू वाकई ग्रेटर इजराइल के सपने को हकीकत में बदल पाएंगे? या यह कदम इजराइल के लिए ही आत्मघाती साबित होगा? कमेंट्स में अपनी राय जरूर लिखें।
❓ Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1: ‘ग्रेटर इजराइल’ (Eretz Yisrael Hashlema) का क्या अर्थ है?
A: यह एक विचारधारा है जो मानती है कि इजराइल की सीमाएं ऐतिहासिक और धार्मिक आधार पर वर्तमान से कहीं अधिक बड़ी होनी चाहिए, जिसमें फिलिस्तीन, दक्षिणी लेबनान और सीरिया के हिस्से शामिल हों।
Q2: बेंजामिन नेतन्याहू का ‘न्यू ऑर्डर’ (New Order) क्या है?
A: नेतन्याहू के ‘न्यू ऑर्डर’ का अर्थ है मिडिल ईस्ट से ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों (हमास, हिजबुल्लाह, हूती) का सफाया करना और इजराइल के पक्ष में एक नया सुरक्षा ढांचा तैयार करना।
Q3: लेबनान में इजराइल की जमीनी कार्रवाई का क्या प्रभाव पड़ा है?
A: इस कार्रवाई के कारण लेबनान की लगभग 20% भूमि खाली हो गई है, सैकड़ों लोगों की जान गई है और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं, जिससे एक बड़ा मानवीय संकट पैदा हो गया है।
Q4: क्या यह युद्ध विश्व युद्ध (World War III) का रूप ले सकता है?
A: विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान और इजराइल के बीच सीधा टकराव बढ़ता है और अमेरिका व रूस जैसे देश इसमें शामिल होते हैं, तो यह वैश्विक संघर्ष में बदल सकता है।