दरभंगा: अधूरी रह गई सोशल मीडिया वाली प्रेम कहानी, शादी से 9 दिन पहले मंगेतर की मौत, दुल्हन अस्पताल में

Darbhanga Road Accident Bahera Ibrahimpur

दरभंगा (बहेड़ा): खुशियों की शहनाइयां बजने से पहले ही एक घर में मातम छा गया। दरभंगा जिले के बहेड़ा थाना क्षेत्र के इब्राहिमपुर में एक भीषण सड़क हादसे ने न केवल दो परिवारों के सपनों को तोड़ दिया, बल्कि एक प्रेम कहानी का भी दुखद अंत कर दिया। एक अनियंत्रित ट्रैक्टर ने स्कूटी सवार मंगेतर जोड़े को जोरदार टक्कर मार दी, जिसमें युवक की मौके पर ही मौत हो गई।

बाजार से लौटते समय हुआ हादसा

​मृतक की पहचान राकेश कुमार दास (20 वर्ष) के रूप में हुई है, जो देवराम अमेठी पंचायत के नमती गांव के निवासी सुरेश दास के पुत्र थे। जानकारी के अनुसार, राकेश की शादी आगामी 26 अप्रैल को होने वाली थी। शादी की तैयारियों और खरीदारी के लिए वह अपनी मंगेतर के साथ बाजार गए थे। वापस लौटने के दौरान इब्राहिमपुर के पास सामने से आ रहे एक ट्रैक्टर ने उनकी स्कूटी को रौंद दिया।

सोशल मीडिया पर शुरू हुई थी प्रेम कहानी

​परिजनों ने बताया कि राकेश और उनकी मंगेतर के बीच पिछले दो वर्षों से प्रेम संबंध था। दोनों की पहली मुलाकात सोशल मीडिया के जरिए हुई थी। धीरे-धीरे यह दोस्ती प्यार में बदली और फिर दोनों के परिवारों ने उनकी शादी पर सहमति दे दी। जिस रिश्ते को वे सात जन्मों के बंधन में बांधने वाले थे, वह शादी से महज 9 दिन पहले इस सड़क हादसे की भेंट चढ़ गया।

घटना के मुख्य बिंदु:

  • मौत: राकेश कुमार दास की मौके पर ही मौत।
  • घायल: मंगेतर की स्थिति अत्यंत नाजुक, बेनीपुर अनुमंडलीय अस्पताल में इलाज जारी।
  • फरार आरोपी: टक्कर मारने के बाद ट्रैक्टर चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया।
  • पुलिस कार्रवाई: बहेड़ा थाना पुलिस ने ट्रैक्टर को जब्त कर लिया है और शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया है।

गांव में पसरा सन्नाटा

​इस घटना के बाद से नमती गांव में शोक की लहर है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। जो घर शादी के गीतों से गूंजने वाला था, वहां अब सिर्फ चीख-पुकार सुनाई दे रही है। पुलिस फिलहाल फरार ट्रैक्टर चालक की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है।

बिहार जनगणना 2027: आज से सेल्फ इन्यूमरेशन शुरू, जानिए आपके लिए क्या है खास?

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पटना: बिहार में भविष्य की योजनाओं और विकास का खाका तैयार करने के लिए जनगणना 2027 का शंखनाद हो गया है। आज, 17 अप्रैल 2026 से, जनगणना का पहला चरण शुरू हो रहा है, जो पूरी तरह डिजिटल और जन-भागीदारी पर आधारित है।

1. क्या है Self Enumeration (स्व-गणना)?

सरकार ने इस बार नागरिकों को बड़ी राहत दी है। अब आपको जनगणना कर्मी के घर आने का इंतज़ार करने या उनके सामने घंटों बैठने की ज़रूरत नहीं है। आप खुद अपने मोबाइल या कंप्यूटर से सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इसे ही सेल्फ इन्यूमरेशन कहा गया है।

2. उन 33 सवालों में क्या होगा?

ऑनलाइन फॉर्म भरते समय आपसे कुल 33 प्रश्न पूछे जाएंगे। रिसर्च के अनुसार, इन जानकारियों को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा गया है:

  • परिवार की जानकारी: सदस्यों के नाम, उम्र, वैवाहिक स्थिति और शिक्षा।
  • आवास की स्थिति: घर कच्चा है या पक्का, कमरों की संख्या और स्वामित्व।
  • सुविधाएं और संपत्ति: पीने के पानी का स्रोत, बिजली, शौचालय, और घर में मौजूद वाहन या गैजेट्स (जैसे मोबाइल, लैपटॉप)।

3. यह प्रक्रिया क्यों महत्वपूर्ण है?

  • सटीक डेटा: जब आप खुद जानकारी भरते हैं, तो गलती की गुंजाइश कम होती है।
  • योजनाओं का लाभ: आपकी दी गई जानकारी के आधार पर ही तय होगा कि आपके क्षेत्र में कितने स्कूल, अस्पताल या सड़कों की ज़रूरत है।
  • गोपनीयता: सरकार का दावा है कि पोर्टल पर दी गई सभी जानकारियां पूरी तरह सुरक्षित और कॉन्फिडेंशियल रहेंगी।

4. आपको क्या करना होगा?

  1. पोर्टल पर जाएं: जनगणना की आधिकारिक वेबसाइट (जो आज लाइव हुई है) पर लॉग इन करें।
  2. रजिस्ट्रेशन: अपने मोबाइल नंबर और आधार (यदि अनिवार्य हो) के जरिए रजिस्टर करें।
  3. फॉर्म भरें: परिवार के मुखिया समेत सभी सदस्यों की जानकारी दर्ज करें।
  4. Reference Number: फॉर्म जमा करने के बाद एक संदर्भ संख्या (Reference Number) मिलेगी, जिसे संभाल कर रखें। बाद में जब प्रगणक (Enumerator) आपके घर आएंगे, तो उन्हें बस यह नंबर दिखाना होगा और आपकी प्रक्रिया पूरी मान ली जाएगी।

बिहार की यह जनगणना केवल गिनती नहीं, बल्कि राज्य के अगले दशक का भविष्य तय करने वाली प्रक्रिया है। आज से शुरू हुई ऑनलाइन सुविधा का लाभ उठाकर आप न केवल समय बचा सकते हैं, बल्कि राज्य के विकास में अपना सक्रिय योगदान भी दे सकते हैं।

नीतीश युग का ऐतिहासिक समापन: अंतिम कैबिनेट में दिखा दो महापुरुषों का आपसी सम्मान और विकास का अटूट संकल्प

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पटना: बिहार के राजनीतिक इतिहास में कुछ जोड़ियाँ ऐसी होती हैं जो सत्ता के लिए नहीं, बल्कि राज्य के नवनिर्माण के लिए बनी होती हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और ऊर्जा क्षेत्र के चाणक्य कहे जाने वाले बिजेंद्र प्रसाद यादव की जोड़ी उन्हीं में से एक है। मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए नीतीश कुमार की यह ‘अंतिम कैबिनेट बैठक’ न केवल एक औपचारिक विदाई थी, बल्कि बिहार को अंधेरे से उजाले की ओर ले जाने वाले दो महापुरुषों के सफर का गौरवशाली उत्सव भी थी।

बिजेंद्र यादव ने एक निष्ठावान साथी के रूप में हर मुश्किल समय में साथ निभाया। आज राजनीति में उनका कद और सम्मान दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है, जिसे देखते हुए नीतीश कुमार ने भी मुस्कुराते हुए कहा है— ‘बस, इसी तरह देखते रहिए’।

नीतीश का विजन और विजेंद्र का अनुभव: बिहार की प्रगति के दो पहिए

​आज जब कैबिनेट की बैठक समाप्त हुई, तो हर किसी की आँखें उन यादों से नम थीं, जिन्होंने पिछले दो दशकों में बिहार की सूरत बदली है।

  • बिजली क्रांति के नायक बिजेंद्र यादव: बिजेंद्र प्रसाद यादव का नाम बिहार के इतिहास में उस व्यक्ति के रूप में दर्ज होगा जिसने राज्य के कोने-कोने तक बिजली पहुँचाई। उनके कुशल प्रबंधन और कड़ी मेहनत का ही परिणाम है कि आज बिहार का कोई भी गाँव अंधेरे में नहीं है। ‘लालटेन’ से ‘एलईडी’ तक का यह सफर बिजेंद्र बाबू के अटूट परिश्रम के बिना संभव नहीं था।
  • सुशासन के पर्याय नीतीश कुमार: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जिस साहस के साथ बिहार में कानून का राज स्थापित किया और बुनियादी ढाँचे (सड़क, पुल, स्कूल) का जाल बिछाया, उसने राज्य को एक नई वैश्विक पहचान दी। महिला सशक्तिकरण और ‘न्याय के साथ विकास’ उनके शासन की मुख्य पहचान रही।
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सम्मान की एक अनूठी मिसाल

​आज के दौर में जहाँ राजनीति में केवल खींचतान दिखती है, वहीं नीतीश कुमार और बिजेंद्र यादव के बीच का आपसी सम्मान देखने लायक था। मुख्यमंत्री ने सदैव बिजेंद्र बाबू के अनुभव को प्राथमिकता दी, तो वहीं बिजेंद्र यादव ने एक निष्ठावान साथी के रूप में हर मुश्किल समय में नीतीश कुमार का साथ निभाया। यह तालमेल शायद ही अब भारतीय राजनीति में फिर कभी देखने को मिले।

बिहार करेगा सादर नमन

​यह केवल एक सरकार का अंत नहीं, बल्कि एक स्वर्णिम युग का ठहराव है। बिहार की जनता हमेशा याद रखेगी कि कैसे इन दो नेताओं ने अपने व्यक्तिगत हितों को पीछे छोड़कर राज्य के विकास को सर्वोपरि रखा।

नीतीश कुमार का संकल्प और विजेंद्र यादव का कर्म; बिहार हमेशा ऋणी रहेगा इन दो महापुरुषों का।

​मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार की इस अंतिम कैबिनेट बैठक के साथ ही एक अध्याय समाप्त हुआ है, लेकिन उनके द्वारा किए गए विकास कार्य आने वाली पीढ़ियों का मार्ग प्रशस्त करते रहेंगे। बिहार अपने इन दोनों सपूतों को उनके निस्वार्थ प्रयासों के लिए कोटि-कोटि नमन करता है!

भारत-नेपाल सीमा पर टैक्स की मार: रोटी-बेटी के रिश्तों में क्यों आ रही है आर्थिक दीवार?

₹200 बाइक और ₹600 कार... क्या आम आदमी अब नेपाल की यात्रा कर पाएगा

भारत और नेपाल के बीच का रिश्ता केवल दो देशों की सीमाओं का नहीं है, बल्कि यह सदियों पुराना रोटी-बेटी का संबंध है। लेकिन पिछले कुछ समय से नेपाल सरकार द्वारा भारतीय वाहनों पर लगाया गया भारी-भरकम प्रवेश शुल्क (Entry Fee) इस पवित्र रिश्ते और आपसी व्यापार की कमर तोड़ रहा है।

अन्यायपूर्ण शुल्क ढांचा

​वर्तमान में नेपाल सरकार भारतीय वाहनों से जो शुल्क वसूल रही है, वह किसी भी दृष्टिकोण से संतुलित नहीं है:

  • दोपहिया वाहन (Bike): ₹200 प्रतिदिन
  • चार पहिया वाहन (Car): ₹600 प्रतिदिन

​कल्पना कीजिए, यदि कोई भारतीय नागरिक अपने निजी वाहन से 5 दिनों के लिए नेपाल जाता है, तो उसे केवल प्रवेश शुल्क के रूप में ₹3000 तक चुकाने पड़ रहे हैं। यह एक मध्यमवर्गीय पर्यटक और सीमावर्ती व्यापारियों के लिए बहुत बड़ा आर्थिक बोझ है।

एकतरफा नियम: समानता कहाँ है?

​अन्तर्राष्ट्रीय संबंधों का सबसे बुनियादी नियम होता है— पारस्परिकता (Reciprocity)

जब भारत में नेपाली नंबर प्लेट के वाहनों को बिना किसी प्रतिदिन के शुल्क के आने-जाने की अनुमति है, तो नेपाल की तरफ से यह एकतरफा वसूली क्यों?

भारत ने हमेशा बड़े भाई की भूमिका निभाते हुए सीमाएं खुली रखी हैं, लेकिन नेपाल के इस नए वित्तीय नियमों से सीमावर्ती इलाकों (जैसे मधुबनी, रक्सौल, जोगबनी) के लोगों में भारी आक्रोश है।

पर्यटन और व्यापार पर संकट

  1. धार्मिक पर्यटन: अयोध्या से पशुपतिनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह शुल्क एक बाधा बन गया है।
  2. स्थानीय बाजार: सीमा के दोनों ओर के बाजार एक-दूसरे पर निर्भर हैं। भारी टैक्स के कारण छोटे व्यापारियों की आवाजाही कम हो गई है, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है।
  3. पारिवारिक रिश्ते: सीमावर्ती क्षेत्रों में शादियां और रिश्तेदारियां आम हैं। अब रिश्तेदारों से मिलने जाने के लिए भी ‘टैक्स’ देना पड़ रहा है।

मांग: समाधान की जरूरत

​ स्थानीय लोगों का शासन और प्रशासन से दो मुख्य मांगें:

  1. समान नियम लागू हों: या तो भारत सरकार भी नेपाली वाहनों पर समान शुल्क लागू करे, या फिर नेपाल इस शुल्क को तुरंत वापस ले।
  2. टैक्स-फ्री कॉरिडोर: कम से कम 10-20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्थानीय निवासियों के लिए आवाजाही पूरी तरह टैक्स फ्री की जाए।

भारत-नेपाल संबंध केवल कागजी संधियों पर नहीं, बल्कि आपसी विश्वास पर टिके हैं। आर्थिक लाभ के लिए इस विश्वास को दांव पर लगाना उचित नहीं है। नेपाल सरकार को इस जनविरोधी फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए ताकि हमारी साझी संस्कृति और व्यापार फलता-फुलता रहे।

बिहार पंचायत चुनाव 2026: निर्वाचन आयोग ने जारी किया प्रपत्र-1 के प्रकाशन का शेड्यूल, जानें पूरी समय-सारणी

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Bihar Panchayat Election 2026: बिहार में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission, Bihar) ने प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए प्रपत्र-1 (Prapatra-1) के प्रकाशन के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश और समय-सारणी जारी कर दी है।

आयोग के सचिव मुकेश कुमार सिन्हा द्वारा सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को भेजे गए पत्र के अनुसार, वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की जनसंख्या और सीमा का निर्धारण किया जाएगा।

क्यों खास है इस बार का प्रपत्र-1?

नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा कई ग्रामीण क्षेत्रों को नगर निकायों (नगर परिषद/नगर पंचायत) में शामिल किया गया है। इसके कारण कई पंचायतों की जनसंख्या और भौगोलिक स्थिति में बदलाव आया है। इसी को ध्यान में रखते हुए आयोग ने नए सिरे से प्रपत्र-1 तैयार करने का निर्णय लिया है।

मुख्य बातें:

  • यह पूरी प्रक्रिया Digital माध्यम से संपन्न होगी।
  • जनसंख्या के आंकड़े वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर होंगे।
  • इसका मुख्य उद्देश्य आरक्षण (Reservation) का सही निर्धारण करना है।

प्रपत्र-1 के प्रकाशन की महत्वपूर्ण तिथियां (Schedule)

आयोग द्वारा जारी समय-सारणी के अनुसार, प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में पूरी होगी:

कार्यक्रमनिर्धारित तिथि
प्रपत्र-1 का प्रारूप प्रकाशन27 अप्रैल 2026
आपत्तियां दर्ज करने की अवधि27 अप्रैल से 11 मई 2026 तक
आपत्तियों का निष्पादन (Disposal)27 अप्रैल से 14 मई 2026 तक
अपील वादों का निष्पादन18 मई से 22 मई 2026 तक
प्रपत्र-1 का अंतिम प्रकाशन25 मई 2026
जिला गजट में प्रकाशन29 मई 2026

अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम

आयोग BSWAN के माध्यम से विभिन्न प्रमंडलों के अधिकारियों (DPRO, BDO, IT Manager आदि) को ऑनलाइन प्रशिक्षण देगा:

  • 13 अप्रैल: पटना और तिरहुत प्रमंडल।
  • 16 अप्रैल: मगध, भागलपुर और मुंगेर प्रमंडल।
  • 17 अप्रैल: पूर्णिया, कोशी, दरभंगा और सारण प्रमंडल।

आम जनता की जानकारी के लिए प्रारूप का प्रकाशन निम्नलिखित स्थानों पर किया जाएगा:

  1. ग्राम पंचायत/पंचायत समिति सदस्य के लिए: ग्राम पंचायत कार्यालय और प्रखंड (Block) कार्यालय।
  2. जिला परिषद सदस्य के लिए: प्रखंड कार्यालय, अनुमंडल कार्यालय और जिला पदाधिकारी का कार्यालय।
  3. ऑनलाइन: राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर।

आपत्ति कैसे दर्ज करें?

यदि किसी नागरिक को जनसंख्या के आंकड़ों या क्षेत्र निर्धारण पर कोई आपत्ति है, तो वे निर्धारित अवधि (27 अप्रैल से 11 मई) के भीतर संबंधित प्राधिकृत पदाधिकारी के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। आपत्तियों की जांच के बाद ही अंतिम सूची का प्रकाशन किया जाएगा।

बिहार पंचायत चुनाव 2026 की यह शुरुआती प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी के आधार पर भविष्य में सीटों का आरक्षण तय होगा। यदि आपकी पंचायत का कुछ हिस्सा शहर में शामिल हुआ है, तो आपको प्रपत्र-1 के प्रकाशन के समय अपने वार्ड की स्थिति की जांच जरूर करनी चाहिए।

यह भी पढ़ें:बिहार निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट

Bihar Panchayat Chunav 2026

State Election Commission Bihar Notification

Panchayat Election Prapatra-1 Publication

Bihar Panchayat Election Reservation List 2026

Bihar Panchayat Election News in Hindi

बिहार बोर्ड 11वीं नामांकन 2026: OFSS के जरिए आवेदन शुरू, जानें महत्वपूर्ण तिथियां और प्रक्रिया

OFSS बिहार बोर्ड कक्षा 11वीं ऑनलाइन नामांकन 2026 आवेदन प्रक्रिया की जानकारी स्मार्टफोन स्क्रीन पर

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने शैक्षणिक सत्र 2026-28 के लिए कक्षा 11वीं (इंटरमीडिएट) में नामांकन की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू कर दी है। राज्य के उच्च माध्यमिक विद्यालयों और इंटर कॉलेजों में प्रवेश के लिए छात्र आज से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

इस वर्ष नामांकन प्रक्रिया में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिन्हें आवेदन करने से पहले समझना छात्रों के लिए आवश्यक है।

📈 मुख्य आंकड़े: एक नजर में

बिहार बोर्ड ने इस बार राज्य भर के शिक्षण संस्थानों की सूची और सीटों का विवरण जारी कर दिया है:

विवरणसंख्या/जानकारी
कुल शिक्षण संस्थान10,003
कुल उपलब्ध सीटें17.50 लाख से अधिक
आवेदन का माध्यमऑनलाइन (OFSS पोर्टल)
आवेदन शुल्क₹350
विकल्पों की संख्यान्यूनतम 10, अधिकतम 20 संस्थान

🗓️ महत्वपूर्ण तिथियां (Important Dates)

  • आवेदन शुरू होने की तिथि: 8 अप्रैल, 2026
  • आवेदन की अंतिम तिथि: 18 अप्रैल, 2026
  • विदेशी नागरिक/प्रवासी भारतीय छात्रों के लिए: 2 मई तक

🛠️ आवेदन कैसे करें? (Step-by-Step Process)

नामांकन के लिए छात्रों को OFSS (Online Facilitation System for Students) पोर्टल का उपयोग करना होगा:

  1. वेबसाइट पर जाएं: सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट www.ofssbihar.net पर जाएं।
  2. दस्तावेज पढ़ें: आवेदन करने से पहले समिति द्वारा जारी ‘सामान्य आवेदन पत्र’ (Common Application Form) और ‘सामान्य सूची पत्र’ को ध्यान से पढ़ें।
  3. कट-ऑफ चेक करें: छात्र पिछले वर्ष (2025) की कट-ऑफ लिस्ट देखकर अपने अंकों के अनुसार कॉलेजों का चयन करें।
  4. कॉलेज चयन: आप कम से कम 10 और ज्यादा से ज्यादा 20 कॉलेजों/स्कूलों का विकल्प चुन सकते हैं।
  5. शुल्क भुगतान: आवेदन शुल्क ₹350 जमा करना अनिवार्य है, इसके बिना आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

नोट: इस बार डिग्री कॉलेजों (Degree Colleges) को इंटर नामांकन की सूची से हटा दिया गया है। अब नामांकन केवल उच्च माध्यमिक विद्यालयों और इंटर कॉलेजों में ही होगा।

🎓 डॉ. अंबेडकर आवासीय विद्यालयों में भी अवसर

अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) कल्याण विभाग द्वारा संचालित 46 डॉ. भीमराव अंबेडकर आवासीय विद्यालयों में भी कक्षा 11वीं के लिए नामांकन शुरू हो गया है।

  • विशेषताएं: चयनित छात्रों को नि:शुल्क नामांकन के साथ रहना, खाना और यूनिफॉर्म की सुविधा मुफ्त मिलेगी।
  • चयन का आधार: कक्षा 10वीं के अंकों के आधार पर मेरिट लिस्ट बनेगी।
  • आवेदन की अवधि: 8 अप्रैल से 27 अप्रैल तक।
  • नामांकन प्रक्रिया: 15 मई से 25 मई तक चलेगी।

💡 छात्रों के लिए जरूरी टिप्स

  • ऑफलाइन आवेदन नहीं: ध्यान रखें कि आवेदन केवल ऑनलाइन मोड में ही स्वीकार किए जाएंगे। ऑफलाइन आवेदन का कोई प्रावधान नहीं है।
  • सोच-समझकर चुनें विकल्प: कॉलेज चुनते समय अपनी प्राथमिकता और पिछले साल के कट-ऑफ का मिलान जरूर करें ताकि पहली सूची में ही नाम आने की संभावना बढ़ जाए।
  • मोबाइल नंबर और ईमेल: आवेदन के समय अपना सक्रिय मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी ही दें ताकि बोर्ड की ओर से आने वाले अपडेट्स मिस न हों।

भ्रष्टाचार का हाई वोल्टेज: लाइनमैन से बना करोड़पति, आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के रडार पर दरभंगा का ओम प्रकाश

दरभंगा करोड़पति लाइनमैन ओम प्रकाश आलीशान मकान जांच
प्रतीकात्मक चित्र (AI द्वारा निर्मित)

दरभंगा। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही ‘जीरो टॉलरेंस’ की मुहिम के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बिजली विभाग के बहादुरपुर सेक्शन में तैनात एक साधारण सा लाइनमैन, ओम प्रकाश, आज अपनी अकूत संपत्ति और आलीशान जीवनशैली के कारण आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के निशाने पर है। आरोप है कि लाइनमैन की वर्दी की आड़ में ओम प्रकाश ने लाइजनिंग और उगाही का ऐसा साम्राज्य खड़ा किया, जिसने उसे रातों-रात करोड़पति बना दिया।

लाइनमैन की आड़ में ‘सिंडिकेट’ का संचालन

सूत्रों के मुताबिक, ओम प्रकाश केवल बिजली के खंभों तक सीमित नहीं था। विभाग के भीतर उसकी पहचान एक ऐसे ‘लाइजनर’ के रूप में थी, जो बड़े अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच सेतु का काम करता था। आरोप है कि वह बिजली विभाग के बड़े पदाधिकारियों के लिए उगाही और लाइजनिंग (Liaisoning) का सारा खेल मैनेज करता था। इसी प्रभाव का इस्तेमाल कर उसने ठेकेदारी और अवैध वसूली के जरिए करोड़ों की काली कमाई जमा की है।

दोनार गंज का ‘सफेद महल’ चर्चा का केंद्र

दरभंगा शहर के दोनार गंज इलाके में स्थित ओम प्रकाश का आलीशान मकान इन दिनों पूरे शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक लाइनमैन के वेतन से इतना भव्य और कीमती मकान बनाना नामुमकिन माना जा रहा है। स्थानीय लोगों और विभागीय सूत्रों की मानें तो यह मकान भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ा है। EOU की टीम अब इस संपत्ति के साथ-साथ अन्य निवेशों का भी ब्योरा खंगाल रही है।

EOU की रडार पर बड़ा नेटवर्क

आर्थिक अपराध इकाई को शक है कि ओम प्रकाश महज एक मोहरा है। इसके पीछे बिजली विभाग के कई बड़े सफेदपोश अधिकारियों का हाथ हो सकता है। जांच के केंद्र में मुख्य रूप से ये बिंदु हैं:

  • अवैध ठेकेदारी: क्या सरकारी पद पर रहते हुए उसने अपने करीबियों के नाम पर ठेके लिए?
  • लाइजनिंग का खेल: किन-किन बड़े अधिकारियों तक उगाही की रकम पहुंचाई जाती थी?
  • बेनामी संपत्ति: दरभंगा और उसके आसपास अन्य कितनी संपत्तियां ओम प्रकाश और उसके परिजनों के नाम पर हैं?

जीरो टॉलरेंस के तहत होगी कार्रवाई

राज्य सरकार और विभाग ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। ओम प्रकाश के खिलाफ सबूत जुटाए जा रहे हैं और जल्द ही उसकी संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है। इस खुलासे के बाद बिजली विभाग के गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है, क्योंकि जांच की आंच कई वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच सकती है।

“साधारण वेतन पाने वाला एक लाइनमैन आखिर कैसे करोड़ों का मालिक बन गया? यह जांच का विषय है। आर्थिक अपराध इकाई इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचेगी।” – (विभागीय सूत्र)

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी प्राप्त सूत्रों और सोशल मीडिया पर प्रसारित सूचनाओं पर आधारित है। संबंधित विभाग या आर्थिक अपराध इकाई (EOU) द्वारा जांच अभी जारी है। किसी भी व्यक्ति पर लगे आरोपों की पुष्टि केवल कानूनी प्रक्रिया और अदालत के माध्यम से ही संभव है। हमारा उद्देश्य केवल सूचना साझा करना है, किसी की छवि को धूमिल करना नहीं।

UPSC 2025 Result: आरक्षण का फायदा लेकर EWS, OBC, SC, ST और जनरल से कितने अभ्यर्थियों ने बाजी मारी, देखें पूरी लिस्ट

आरक्षण का फायदा लेकर EWS, OBC, SC, ST और जनरल से कितने अभ्यर्थियों ने बाजी मारी, देखें पूरी लिस्ट

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित कर दिया है। इस साल भी देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में युवाओं ने अपनी मेहनत और लगन से सफलता का परचम लहराया है। रिजल्ट के साथ ही यह चर्चा भी तेज है कि किस श्रेणी (Category) से कितने उम्मीदवारों का चयन हुआ है।

​क्या आप जानते हैं कि इस साल कुल 958 उम्मीदवारों की सिफारिश की गई है? आइए जानते हैं जनरल, ईडब्ल्यूएस, ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के उम्मीदवारों के चयन का पूरा गणित।

कैटेगरी वाइज सिलेक्शन: किस वर्ग के कितने उम्मीदवार?

​यूपीएससी द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न श्रेणियों के तहत चयनित उम्मीदवारों का विवरण नीचे दी गई तालिका में देख सकते हैं:

श्रेणी (Category)चयनित उम्मीदवारों की संख्या
सामान्य (General)317
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)306
अनुसूचित जाति (SC)158
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS)104
अनुसूचित जनजाति (ST)73
कुल (Total)958

(नोट: कुल 1087 रिक्तियों के सापेक्ष फिलहाल 958 उम्मीदवारों की सिफारिश की गई है।)

UPSC 2025 के टॉपर्स की लिस्ट

​इस साल राजस्थान के अनुज अग्निहोत्री ने ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल कर पूरे देश में नाम रोशन किया है। टॉप 10 उम्मीदवारों की सूची इस प्रकार है:

  1. अनुज अग्निहोत्री (AIR 1)
  2. राजेश्वरी सुवे एम (AIR 2)
  3. आकांश ढुल (AIR 3)
  4. राघव झुनझुनवाला
  5. ईशान भटनागर
  6. ज़िनिया अरोड़ा
  7. ए आर राजाह मोहैदीन
  8. पक्षल सेकेट्री
  9. आस्था जैन
  10. उज्जवल प्रियंक

वैकेंसी और सर्विस का विवरण

​यूपीएससी ने इस बार भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय विदेश सेवा (IFS), और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) सहित अन्य केंद्रीय सेवाओं के लिए रिक्तियां निकाली थीं। पदों का विवरण कुछ इस प्रकार है:

  • IAS: 180 पद
  • IFS: 55 पद
  • IPS: 150 पद
  • Central Services (Group A): 507 पद
  • Group B Services: 195 पद

रिजर्व लिस्ट का प्रावधान

​आयोग ने मुख्य सूची के अलावा 258 उम्मीदवारों की एक समेकित आरक्षित सूची (Reserve List) भी तैयार की है। इसमें जनरल (129), ईडब्ल्यूएस (26), ओबीसी (86), एससी (08) और एसटी (06) के उम्मीदवार शामिल हैं। यदि मुख्य सूची से पद रिक्त रहते हैं, तो इन उम्मीदवारों को मौका मिल सकता है।

​यूपीएससी 2025 के परिणाम बताते हैं कि मेहनत और सही दिशा में प्रयास किया जाए, तो किसी भी पृष्ठभूमि से आने वाला अभ्यर्थी सफलता प्राप्त कर सकता है। आरक्षित वर्गों (OBC, SC, ST, EWS) के अभ्यर्थियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है, वहीं जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों ने भी कड़े मुकाबले में अपनी जगह बनाई है।

मधुबनी में सड़क निर्माण की नई क्रांति: FDR तकनीक से PMGSY-3 की सड़कों का कायाकल्प

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बिहार के मधुबनी जिले में ग्रामीण बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूत करने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) फेज-3 के तहत जिले में पहली बार अत्याधुनिक FDR (Full Depth Restoration) तकनीक का उपयोग कर सड़कों का निर्माण किया जा रहा है।

यह तकनीक न केवल सड़कों को अधिक टिकाऊ बना रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम मानी जा रही है। आइए जानते हैं क्या है यह तकनीक और मधुबनी के ग्रामीणों को इससे क्या लाभ मिलने वाला है।

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​टी-28 बेलहा से खुटौना तक सड़क का

मधुबनी जिले के खुटौना प्रखंड में टी-28 बेलहा से ललमनियां होते हुए प्रखंड मुख्यालय तक जाने वाली 15.350 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इस परियोजना की खास बातें निम्नलिखित हैं:

  • कुल लंबाई: 15.350 किमी।
  • प्रगति: लगभग 6.450 किमी हिस्से में पीसीसी और पुल-पुलिया का कार्य पूर्ण।
  • शेष कार्य: 8.900 किमी में डामरीकरण (Blacktopping) का कार्य अत्याधुनिक मशीनों से जारी।
  • ट्रायल प्रोजेक्ट: यह दरभंगा-कोसी प्रमंडल का पहला ट्रायल प्रोजेक्ट है, जिसे भविष्य के लिए मॉडल माना जा रहा है।
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क्या है FDR (Full Depth Restoration) तकनीक?

साधारण भाषा में कहें तो FDR पुरानी सड़क को उखाड़कर फेंकने के बजाय उसे ‘रिसाइकिल’ करने की एक प्रक्रिया है।

  • पुरानी सामग्री का उपयोग: इसमें विशेष मशीनों द्वारा पुरानी सड़क की परतों को पीस दिया जाता है।
  • स्टेबलाइजेशन: पिसी हुई सामग्री में सीमेंट, चूना या अन्य स्टेबलाइजर मिलाए जाते हैं।
  • मजबूत आधार: इस मिश्रण को वापस बिछाकर भारी रोलरों से दबाया जाता है, जिससे एक बेहद मजबूत ‘बेस लेयर’ तैयार होती है।
  • अंतिम परत: इसके ऊपर डामर या कंक्रीट की अंतिम परत डाली जाती है।
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FDR तकनीक के फायदे (Benefits of FDR Technology)

  • अत्यधिक टिकाऊ: यह तकनीक सड़क की नींव को इतना मजबूत बना देती है कि भारी वाहनों का दबाव सहना आसान हो जाता है।
  • लागत में कमी: पुरानी निर्माण सामग्री का पुन: उपयोग होने के कारण नई सामग्री (गिट्टी, मिट्टी) की जरूरत कम पड़ती है, जिससे लागत घटती है।
  • पर्यावरण के अनुकूल: नई खदानों से पत्थर निकालने की जरूरत कम होती है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों की बचत होती है।
  • समय की बचत: पारंपरिक तरीकों की तुलना में इस तकनीक से सड़क निर्माण काफी तेजी से पूरा होता है।
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स्थानीय विकास को मिलेगी नई रफ्तार

खुटौना और आसपास के ग्रामीणों के लिए यह सड़क किसी लाइफलाइन से कम नहीं है। बेहतर कनेक्टिविटी से स्वास्थ्य, शिक्षा और व्यापारिक गतिविधियों में सुधार होगा। निर्माण एजेंसी NKSP Infra Pvt. Ltd. के निर्देशक फिरोज यादव के अनुसार, इस तकनीक से बनी सड़कें लंबे समय तक चलेंगी और इन्हें बार-बार मरम्मत की आवश्यकता नहीं होगी।

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मधुबनी में FDR तकनीक का यह सफल प्रयोग बिहार के अन्य जिलों के लिए एक मिसाल पेश करेगा। अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो आने वाले समय में राज्य की सभी ग्रामीण सड़कों को इसी आधुनिक और किफायती तकनीक से बनाया जा सकता है।

दरभंगा में भूचाल: 70 ब्राह्मणों पर लगा ‘हरिजन एक्ट’! मजदूरी मांगने पर दलित परिवार के साथ जो हुआ, कांप जाएगी रूह!

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दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र के हरिनगर गांव में एक बड़ी घटना सामने आई है। मजदूरी का बकाया पैसा मांगने को लेकर हुए विवाद ने जातीय हिंसा का रूप ले लिया। पीड़ित दलित परिवार का आरोप है कि गांव के 70 नामजद ब्राह्मणों और सैकड़ों अज्ञात लोगों ने उनके घर पर धावा बोल दिया। भीड़ पर घर की महिलाओं के साथ बदसलूकी, मारपीट और लाखों की संपत्ति लूटने का आरोप लगाया गया है।

इस मामले में पीड़ित असर्फी पासवान (पिता स्व. सरयुग पासवान) के बयान पर कुशेश्वरस्थान थाने में 70 नामजद (ज्यादातर झा और मिश्र उपनाम वाले) और 100-150 अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और SC/ST एक्ट की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

क्या है पूरा मामला?

पीड़ित असर्फी पासवान द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार, विवाद की जड़ 5 साल पुरानी मजदूरी का बकाया है। पीड़ित के बेटे ने आरोपी हेमकांत झा के यहां मजदूरी की थी, जिसका भुगतान नहीं किया गया था।

  • 30/01/2026: इसी बकाये को लेकर गांव में पंचायत बुलाई गई थी, जिसमें दोनों पक्षों के बीच कहा-सुनी हुई।
  • 31/01/2026 (घटना का दिन): अगली सुबह करीब 7:00 बजे, जब पीड़ित का लड़का विक्रम पासवान सब्जी खरीदकर घर लौट रहा था, तभी आरोपियों ने उसे घेर लिया।

लाठी-डंडे और लोहे की रॉड से हमला

आवेदन में कहा गया है कि हेमकांत झा, शिवजी झा, श्रीनाथ झा, फुलकांत झा, मनोज मिश्र समेत करीब 70 नामजद लोग लाठी, डंडा, लोहे की रॉड, खंती, फरसा और ईंट-पत्थर से लैस होकर आए। आरोप है कि जाति सूचक गालियां देते हुए उन्होंने विक्रम पासवान को दौड़ाया और घर में घुसकर उसे खींच लिया। भीड़ ने विक्रम को अधमरा कर दिया। जब उसके भाई राजगीर पासवान, अविनाश पासवान और अन्य बचाने आए, तो उन्हें भी पत्थरों और रॉड से मारकर घायल कर दिया गया।

महिलाओं से अभद्रता और लूटपाट का आरोप

  • महिलाओं पर हमला: जब घर की महिलाएं (रामतारा देवी और पोती कोमल कुमारी) बीच-बचाव करने आईं, तो उनके साथ मारपीट की गई और कपड़े फाड़ दिए गए। आरोप है कि कोमल कुमारी की कमर पर लाठी मारकर हड्डी तोड़ दी गई।
  • लूटपाट: भीड़ ने घर में रखा 2 लाख रुपये नकद (जो पोती की शादी के लिए रखे थे), सोने-चांदी के जेवर, एलसीडी, फ्रिज और मोबाइल लूट लिए।
  • तोड़फोड़: घर के बाहर खड़ी 4 मोटरसाइकिलों को चकनाचूर कर दिया गया और पीड़ित के “मिथिलांचल ढाबा” (होटल) में भी तोड़फोड़ और लूटपाट की गई।

जाते वक्त आरोपियों ने धमकी दी कि अगर वे गांव में रहे, तो पूरे परिवार को जान से मार दिया जाएगा।

पुलिस कार्रवाई

कुशेश्वरस्थान पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की है। थाना अध्यक्ष को दिए गए आवेदन पर SI अंकित चौधरी ने मामला दर्ज कर लिया है और वे स्वयं इसकी जांच कर रहे हैं।

दर्ज किए गए केस का विवरण:

  • केस नंबर: Kusheshwarsthan PS Case No. 22/26
  • दिनांक: 31/01/2026
  • धाराएं (BNS): 126(2), 115(2), 109(1), 118(2), 117(2), 74, 303(2), 324(5), 329(4), 191(1)(3), 190, 61(2)
  • SC/ST (POA) Act: 3(1)(r), 3(1)(s), 3(2)

पुलिस ने घायलों को इलाज के लिए भेज दिया है और मामले की छानबीन शुरू कर दी है।