विधानसभा चुनाव परिणाम: पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में NDA की जीत पर दी बधाई

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पटना: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के प्रदर्शन पर खुशी जाहिर की है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए विजयी उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं को बधाई दी।

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में अटूट विश्वास

​पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने संदेश में कहा कि इन राज्यों के चुनाव परिणाम बताते हैं कि जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व पर एक बार फिर अपना पूर्ण विश्वास व्यक्त किया है। उन्होंने इसे विकास की जीत बताते हुए कहा:

​यह जनादेश पश्चिम बंगाल, असम एवं पुडुचेरी में विकास, सुशासन और जनकल्याण के कार्यों को नई गति प्रदान करेगा।

सुशासन और विकास का एजेंडा

​नीतीश कुमार, जो स्वयं बिहार में सुशासन के मॉडल के लिए जाने जाते हैं, इस बात पर जोर दिया कि जनता अब केवल खोखले वादों के बजाय धरातल पर होने वाले विकास कार्यों को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन क्षेत्रों में एनडीए की सरकारें आने वाले समय में जनहित और बुनियादी ढांचे के सुधार के लिए मजबूती से काम करेंगी।

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राजनीतिक गलियारों में हलचल

​पूर्व मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। जानकारों का मानना है कि नीतीश कुमार का यह संदेश एनडीए के भीतर एकजुटता को और मजबूत करेगा और विकास के साझा एजेंडे को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।

बड़ी खबर: सुपौल के मरौना प्रखंड में होगा सड़कों और पुलों का जाल, उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने दी हरी झंडी

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सुपौल/पटना: बिहार के उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने सुपौल जिले के मरौना प्रखंड की जनता को एक बड़ी सौगात दी है। उपमुख्यमंत्री के निर्देश पर उनके आप्त सचिव वीरेंद्र कुमार ने ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) को मरौना प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में 11 महत्वपूर्ण सड़कों और पुलों के निर्माण के लिए पत्र जारी कर त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

इन प्रमुख योजनाओं को मिली मंजूरी:

​जारी किए गए आधिकारिक पत्र (पत्रांक 172, दिनांक 27/04/2026) के अनुसार, जनहित में निम्नलिखित कार्यों को अति आवश्यक बताया गया है:

  1. तिलयुगा बलान नदी पर पुल: मरौना-निर्मली पथ के योदराही वार्ड नंबर-02 से उत्तर तिलयुगा बलान नदी पर एच.एल. ब्रिज (HL Bridge) और पहुंच पथ का निर्माण।
  2. भलुआही सुरक्षा बांध से कुसगौल: भलुआही सुरक्षा बांध से कुसगौल होते हुए कबरी बांध तक सड़क और पुल का निर्माण।
  3. 8 किलोमीटर लंबी सड़क: मरौना उत्तर के कारारही वार्ड नंबर 10 से मुख्य सड़क राम विलास सिंह के घर से होते हुए कमरैल सीमा तक सड़क निर्माण।
  4. लालपुर से सोहनपुर मार्ग: निर्मली-मरौना मुख्य मार्ग पर लालपुर से सोहनपुर को जोड़ने वाली सड़क में तिलयुगा नदी पर पुल का निर्माण।
  5. महादलित टोलों का जुड़ाव: परसौनी वार्ड नंबर 0-10 महादलित टोला से पंचायत सरकार भवन होते हुए मंगासिहौल वार्ड नंबर 12 तक सड़क निर्माण।
  6. गंनौरा और मधुबनी सीमा: गंनौरा कोरयानी टोला वाया मधुबनी सीमा सड़क में बलान नदी पर पुल का निर्माण।
  7. गंनौरा से महोलिया टोला: गंनौरा वार्ड 04 मुख्य सड़क से महादलित बस्ती और IOCL गैस गोदाम होते हुए महोलिया टोला तक पक्की सड़क।
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विकास की ओर बढ़ते कदम

​इस पत्र के माध्यम से उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण इलाकों में कनेक्टिविटी सुधारना सरकार की प्राथमिकता है। इन पुलों और सड़कों के बन जाने से मरौना प्रखंड के हजारों ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा होगी, खासकर बरसात के समय में तिलयुगा और बलान नदी के कारण होने वाली परेशानियां खत्म होंगी।

​ग्रामीण कार्य विभाग के नोडल ऑफिसर ने भी इस पर अपनी मुहर लगा दी है और संबंधित कार्यपालक अभियंता को आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रेषित कर दिया गया है।

पटना विश्वविद्यालय में प्रतिभा का कत्ल! गोल्ड मेडलिस्ट टॉपर को ही कर दिया PhD से बाहर, आखिर किसके इशारे पर हुआ यह खेल?

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शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले पटना विश्वविद्यालय (Patna University) से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शैक्षणिक शुचिता और प्रशासन की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला पटना लॉ कॉलेज के एलएलएम (LLM) टॉपर पवन कुमार यादव से जुड़ा है, जिन्हें विश्वविद्यालय ने खुद गोल्ड मेडल से नवाजा, लेकिन जब पीएचडी (PhD) नामांकन की बारी आई, तो उन्हें सिस्टम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

कौन हैं पवन कुमार यादव?

रोहतास जिले के रहने वाले पवन कुमार यादव एक मेधावी छात्र हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की और उसके बाद पटना लॉ कॉलेज के सत्र 2022-24 में 80.19% अंकों के साथ पूरे विभाग में टॉप किया। दीक्षांत समारोह की तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि तत्कालीन राज्यपाल डॉ. आरिफ मोहम्मद खान और कुलपति प्रो. अजय कुमार सिंह ने उन्हें स्वर्ण पदक (Gold Medal) और उपाधि देकर सम्मानित किया था।

क्या है दांधली का पूरा आरोप?

हैरानी की बात यह है कि जो छात्र अपने विभाग का गोल्ड मेडलिस्ट है और नेट (NET) क्वालीफाइड भी है, उसे ही पीएचडी नामांकन लिस्ट से बाहर कर दिया गया। आरोप है कि एलएलएम विभाग और पटना विश्वविद्यालय ने नामांकन प्रक्रिया में भारी अनियमितता बरती है। शिकायत के मुताबिक, पवन की ही कैटेगरी में उनसे काफी कम प्रतिशत अंक वाले छात्रों का नामांकन ले लिया गया, लेकिन टॉपर को दरकिनार कर दिया गया।

अब सवाल यह उठता है कि क्या यह महज एक तकनीकी खामी है या फिर इसके पीछे जातीय दुर्भावना और प्रतिभा का गला घोंटने की कोई गहरी साजिश है? आखिर एक स्वर्ण पदक विजेता छात्र को अपने हक के लिए दर-दर क्यों भटकना पड़ रहा है?

गोल्ड मेडलिस्ट छात्र के साथ इस तरह का व्यवहार न केवल छात्र का मनोबल तोड़ता है, बल्कि पूरे विश्वविद्यालय की साख पर धब्बा लगाता है। भूमि न्यूज़ लाइव इस मामले की तह तक जाएगा और जब तक पवन को न्याय नहीं मिलता, हम इस खबर को प्रमुखता से उठाते रहेंगे।

बने रहिए भूमि न्यूज़ लाइव के साथ, सच्चाई हम दिखाएंगे।

⛽ पेट्रोल पंप पर सिर्फ 0 देखना काफी नहीं! तेल डलवाते समय ऐसे होता है आपके साथ खेल, इन 5 बातों का रखें खास ख्याल

Petrol Pump Fuel Purity Test and Meter Reading Fraud Awareness

आज के दौर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ऐसे में जब हम फ्यूल स्टेशन पर जाते हैं, तो हमारा पूरा ध्यान केवल मीटर के शून्य (0) पर होता है। जैसे ही कर्मचारी जीरो दिखाता है, हम निश्चिंत हो जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि असली खेल जीरो के बाद शुरू होता है?

पेट्रोल पंपों पर ठगी का तरीका अब बदल चुका है। मिलावटी तेल या गलत तरीके से फ्यूल भरने से न सिर्फ आपकी जेब पर असर पड़ता है, बल्कि आपकी गाड़ी का कीमती इंजन भी समय से पहले दम तोड़ सकता है।

1. क्वांटिटी (मात्रा) का खेल: नोज़ल पर रखें नजर

मीटर में 0 देखना जरूरी है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। तेल भरते समय ध्यान दें कि सेल्समैन ने नोज़ल को आपकी गाड़ी की टंकी में ठीक से लॉक किया है या नहीं।

  • सावधानी: अगर कर्मचारी बार-बार नोज़ल के हैंडल को दबा रहा है या बीच में रोक रहा है, तो समझ लीजिए कि तेल की मात्रा में हेर-फेर हो रही है। रुक-रुक कर तेल भरने से पाइप में हवा का दबाव बनता है, जिससे मीटर तो तेज भागता है लेकिन तेल कम निकलता है।

2. फ्यूल की शुद्धता: फिल्टर पेपर टेस्ट (Filter Paper Test)

सिर्फ मात्रा ही नहीं, तेल की क्वालिटी भी मायने रखती है। मिलावटी पेट्रोल आपके इंजन को अंदर से खोखला कर सकता है। भारत में हर ग्राहक को फिल्टर पेपर टेस्ट करने का कानूनी अधिकार है।

  • कैसे करें: पेट्रोल पंप कर्मचारी से एक सफेद फिल्टर पेपर मांगें और उस पर पेट्रोल की कुछ बूंदें डालें।
  • नतीजा: अगर पेट्रोल उड़ने के बाद पेपर पर कोई गहरा दाग रह जाता है, तो समझ लीजिए पेट्रोल मिलावटी है। शुद्ध पेट्रोल पूरी तरह उड़ जाता है और पेपर साफ रहता है।

3. 5 लीटर टेस्ट: यह आपका अधिकार है

अगर आपको लगता है कि मीटर में 10 लीटर दिख रहा है लेकिन गाड़ी में कम तेल गया है, तो आप क्वांटिटी टेस्ट की मांग कर सकते हैं। नियम के अनुसार, हर पेट्रोल पंप पर सरकारी मुहर लगा हुआ 5 लीटर का माप (Measuring Jar) होना अनिवार्य है। आप उसमें तेल डलवाकर चेक कर सकते हैं कि मशीन सही माप दे रही है या नहीं।

4. ध्यान भटकना मतलब जेब कटना

अक्सर पेट्रोल पंपों पर कर्मचारी आपको बातों में उलझा देते हैं या किसी और स्कीम के बारे में बताने लगते हैं। इसी बीच वे मीटर में हेर-फेर या रीडिंग जंप करवा देते हैं।

  • टिप: जब तक आपकी गाड़ी में तेल भरा जा रहा है, अपना पूरा ध्यान डिस्प्ले और नोज़ल पर रखें। किसी के भी कहने पर अपना ध्यान न भटकाएं।

5. बिल मांगना न भूलें

ज्यादातर लोग तेल डलवाने के बाद बिल नहीं लेते। डिजिटल ज़माने में भी पक्का बिल या ई-रसीद लेना बहुत जरूरी है।

  • क्यों जरूरी है: अगर बाद में आपकी गाड़ी के इंजन में मिलावट की वजह से खराबी आती है, तो बिना बिल के आप कोई भी कानूनी शिकायत दर्ज नहीं करा पाएंगे। बिल आपके पास मौजूद सबसे बड़ा सबूत है।

सावधानी ही बचाव है। अगली बार जब आप पेट्रोल पंप पर जाएं, तो खुद को सिर्फ 0 तक सीमित न रखें। क्वांटिटी (मात्रा) + क्वालिटी (शुद्धता) दोनों की जांच करें। आपकी थोड़ी सी जागरूकता आपको आर्थिक नुकसान और गाड़ी की बड़ी मरम्मत (Repairing) से बचा सकती है।

बड़ी खबर: सीएम सम्राट चौधरी को जान से मारने की धमकी देने वाला आरोपी गुजरात से गिरफ्तार, मुंगेर पुलिस की बड़ी कार्रवाई

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पटना/मुंगेर: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को फोन पर जान से मारने की धमकी देने के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। मुंगेर पुलिस की एक विशेष टीम ने तकनीकी सर्विलांस की मदद से आरोपी को गुजरात के साणंद से धर दबोचा है। पकड़े गए आरोपी की पहचान बिहार के बांका जिले के रहने वाले शेखर यादव के रूप में हुई है।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी शेखर यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सीधे फोन कर जान से मारने की धमकी दी थी। सूबे के मुखिया को धमकी मिलने की खबर से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंगेर पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की और उस मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर डाला जिससे कॉल आई थी।

गुजरात में छिपा था आरोपी

पुलिस को जांच के दौरान पता चला कि आरोपी बिहार से बाहर गुजरात में छिपा हुआ है। मुंगेर पुलिस की स्पेशल टीम तुरंत गुजरात रवाना हुई और स्थानीय पुलिस की मदद से साणंद इलाके में छापेमारी कर शेखर यादव को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने वह मोबाइल फोन भी बरामद कर लिया है, जिसका इस्तेमाल धमकी देने के लिए किया गया था।

ट्रांजिट रिमांड पर लाया जा रहा बिहार

मुंगेर पुलिस आरोपी को गुजरात की स्थानीय अदालत में पेश कर ट्रांजिट रिमांड पर लेकर बिहार आ रही है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि बिहार पहुँचने के बाद आरोपी से कड़ी पूछताछ की जाएगी।

पूछताछ में होंगे बड़े खुलासे

पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आखिर शेखर यादव ने मुख्यमंत्री को धमकी क्यों दी? इसके पीछे उसकी कोई निजी खुन्नस थी या वह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है? मुख्यमंत्री की सुरक्षा से जुड़ा मामला होने के कारण एजेंसियां हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही हैं।

बिहार जनगणना 2027: आज से सेल्फ इन्यूमरेशन शुरू, जानिए आपके लिए क्या है खास?

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पटना: बिहार में भविष्य की योजनाओं और विकास का खाका तैयार करने के लिए जनगणना 2027 का शंखनाद हो गया है। आज, 17 अप्रैल 2026 से, जनगणना का पहला चरण शुरू हो रहा है, जो पूरी तरह डिजिटल और जन-भागीदारी पर आधारित है।

1. क्या है Self Enumeration (स्व-गणना)?

सरकार ने इस बार नागरिकों को बड़ी राहत दी है। अब आपको जनगणना कर्मी के घर आने का इंतज़ार करने या उनके सामने घंटों बैठने की ज़रूरत नहीं है। आप खुद अपने मोबाइल या कंप्यूटर से सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इसे ही सेल्फ इन्यूमरेशन कहा गया है।

2. उन 33 सवालों में क्या होगा?

ऑनलाइन फॉर्म भरते समय आपसे कुल 33 प्रश्न पूछे जाएंगे। रिसर्च के अनुसार, इन जानकारियों को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा गया है:

  • परिवार की जानकारी: सदस्यों के नाम, उम्र, वैवाहिक स्थिति और शिक्षा।
  • आवास की स्थिति: घर कच्चा है या पक्का, कमरों की संख्या और स्वामित्व।
  • सुविधाएं और संपत्ति: पीने के पानी का स्रोत, बिजली, शौचालय, और घर में मौजूद वाहन या गैजेट्स (जैसे मोबाइल, लैपटॉप)।

3. यह प्रक्रिया क्यों महत्वपूर्ण है?

  • सटीक डेटा: जब आप खुद जानकारी भरते हैं, तो गलती की गुंजाइश कम होती है।
  • योजनाओं का लाभ: आपकी दी गई जानकारी के आधार पर ही तय होगा कि आपके क्षेत्र में कितने स्कूल, अस्पताल या सड़कों की ज़रूरत है।
  • गोपनीयता: सरकार का दावा है कि पोर्टल पर दी गई सभी जानकारियां पूरी तरह सुरक्षित और कॉन्फिडेंशियल रहेंगी।

4. आपको क्या करना होगा?

  1. पोर्टल पर जाएं: जनगणना की आधिकारिक वेबसाइट (जो आज लाइव हुई है) पर लॉग इन करें।
  2. रजिस्ट्रेशन: अपने मोबाइल नंबर और आधार (यदि अनिवार्य हो) के जरिए रजिस्टर करें।
  3. फॉर्म भरें: परिवार के मुखिया समेत सभी सदस्यों की जानकारी दर्ज करें।
  4. Reference Number: फॉर्म जमा करने के बाद एक संदर्भ संख्या (Reference Number) मिलेगी, जिसे संभाल कर रखें। बाद में जब प्रगणक (Enumerator) आपके घर आएंगे, तो उन्हें बस यह नंबर दिखाना होगा और आपकी प्रक्रिया पूरी मान ली जाएगी।

बिहार की यह जनगणना केवल गिनती नहीं, बल्कि राज्य के अगले दशक का भविष्य तय करने वाली प्रक्रिया है। आज से शुरू हुई ऑनलाइन सुविधा का लाभ उठाकर आप न केवल समय बचा सकते हैं, बल्कि राज्य के विकास में अपना सक्रिय योगदान भी दे सकते हैं।

बिहार में पोर्टफोलियो का बंटवारा: सम्राट चौधरी सुपर सीएम की भूमिका में, विजय चौधरी और बिजेन्द्र यादव को मिली बड़ी जिम्मेदारी

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पटना: बिहार सरकार ने नई कैबिनेट के बीच विभागों का बँटवारा कर दिया है। बुधवार, 15 अप्रैल 2026 को जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शासन पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखते हुए गृह, सामान्य प्रशासन और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों सहित कुल 29 मंत्रालयों की जिम्मेदारी अपने पास रखी है।

​राज्य में दो उप-मुख्यमंत्री बनाए गए हैं— विजय कुमार चौधरी और बिजेन्द्र प्रसाद यादव। राज्यपाल के आदेश से जारी इस अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि वे सभी विभाग जो किसी अन्य मंत्री को आवंटित नहीं हैं, वे मुख्यमंत्री के अधीन रहेंगे।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास भारी-भरकम पोर्टफोलियो

​मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सबसे अधिक विभागों की जिम्मेदारी संभाली है। उनके पास गृह, सामान्य प्रशासन, मंत्रिमंडल सचिवालय, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, पथ निर्माण, नगर विकास एवं आवास, पंचायती राज, और राजस्व एवं भूमि सुधार जैसे जनता से सीधे जुड़े विभाग रहेंगे। इसके अलावा उद्योग, खान एवं भूतत्व, और पर्यटन जैसे विभाग भी उन्हीं के पास हैं।

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उप-मुख्यमंत्रियों को मिली अहम जिम्मेदारी

​कैबिनेट में शक्ति संतुलन बनाए रखते हुए दोनों उप-मुख्यमंत्रियों को भी महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो दिए गए हैं:

  • विजय कुमार चौधरी (उप-मुख्यमंत्री): इन्हें जल संसाधन, संसदीय कार्य, भवन निर्माण, परिवहन, ग्रामीण विकास और उच्च शिक्षा जैसे 10 विभागों की कमान सौंपी गई है।
  • बिजेन्द्र प्रसाद यादव (उप-मुख्यमंत्री): इन्हें वित्त, ऊर्जा, योजना एवं विकास, मद्य निषेध, और समाज कल्याण सहित कुल 8 विभागों का जिम्मा मिला है।

प्रशासनिक आदेश जारी

​यह आदेश भारत के संविधान के अनुच्छेद 166(3) के तहत राज्यपाल की सहमति के बाद मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत द्वारा जारी किया गया है। सरकार के इस कदम से स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी विकास और कानून-व्यवस्था से जुड़े प्रमुख मोर्चों का नेतृत्व स्वयं करेंगे, जबकि अनुभवी साथियों को बुनियादी ढांचे और आर्थिक नियोजन की जिम्मेदारी दी गई है।

राजभवन में जब जय-वीरू की जोड़ी ने बटोरी सुर्खियां, बिजय चौधरी बने गूगल मैप और मिल गई नजरें

Bijendra Yadav and Nitish Kumar smiling at Raj Bhavan Patna

पटना। बिहार की राजनीति में 14 अप्रैल 2026 का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। एक तरफ नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर सबको चौंकाया, तो दूसरी तरफ राजभवन में हुए शपथ ग्रहण समारोह में दोस्ती और भरोसे का एक ऐसा वीडियो सामने आया जिसने सबका दिल जीत लिया। यह कहानी है बिजेंद्र प्रसाद यादव और नीतीश कुमार की, जिसमें विजय कुमार चौधरी ने तड़का लगा दिया।

शपथ ली, हस्ताक्षर किए… फिर शुरू हुई तलाश

सफेद कुर्ते-पाजामे में सजे बिजेंद्र प्रसाद यादव जैसे ही मंच पर शपथ लेने पहुंचे, पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। शपथ पूरी हुई, उन्होंने कागजों पर दस्तखत किए और फिर जो हुआ वह किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था। विजेंद्र बाबू अपनी जगह पर ठिठक गए। वे अपनी गर्दन घुमाकर इधर-उधर देखने लगे। प्रोटोकॉल कहता है कि शपथ के बाद मुख्यमंत्री का अभिवादन करना होता है, लेकिन विजेंद्र यादव को भीड़ में अपने पुराने दोस्त नीतीश कुमार नजर नहीं आ रहे थे।

विजय चौधरी का ‘इशारा’ और खिलखिला उठे नीतीश

बिजेंद्र यादव की यह बेचैनी वहां पास ही बैठे विजय कुमार चौधरी की नजरों से नहीं छुपी। विजय चौधरी ने तुरंत मोर्चा संभाला और मुस्कुराते हुए इशारों-इशारों में बिजेंद्र बाबू को रास्ता दिखाया। उन्होंने हाथ से इशारा किया— “साहब वहां बैठे हैं!”

विजय चौधरी का इशारा मिलते ही बिजेंद्र यादव की नजरें नीतीश कुमार से जा टकराईं। जैसे ही नजर से नजर मिली, दोनों नेताओं के चेहरे पर एक ऐसी चमक और मुस्कान आई जैसे सालों बाद दो बिछड़े दोस्त मिले हों। बिजेंद्र यादव ने प्रणाम किया और नीतीश कुमार ने भी बड़े प्यार से उनका अभिवादन स्वीकार किया।

दोस्ती की वो केमिस्ट्री, जो कुर्सी से ऊपर है

बिहार की राजनीति में नीतीश, बिजेंद्र और विजय चौधरी की यह तिकड़ी दशकों पुरानी है। सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि:

  • बिजेंद्र यादव: वो अटूट विश्वास जो नीतीश के साथ हर तूफान में खड़ा रहा।
  • विजय चौधरी: वो संकटमोचक जो हमेशा पुल का काम करते हैं।

क्यों वायरल हो रहा है यह पल?

राजनीति अक्सर कड़वाहट और दांव-पेंच के लिए जानी जाती है। ऐसे में राजभवन के गंभीर माहौल के बीच यह अजब-गजब वाकया बताता है कि पद आते-जाते रहते हैं, लेकिन जो साथ संघर्षों में बना रहता है, वही असली दौलत है।

​Elected बनाम Selected: तेजस्वी यादव का सम्राट चौधरी पर तीखा हमला, विकास के आंकड़ों पर घेरा

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पटना: बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के साथ ही वार-पलटवार का दौर तेज हो गया है। बीजेपी नेता सम्रट चौधरी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक बेहद तल्ख और कटाक्षपूर्ण पोस्ट साझा की है। तेजस्वी ने सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनने पर बधाई तो दी, लेकिन उनके कार्यकाल की चुनौतियों और बिहार की मौजूदा स्थिति को लेकर सरकार को आईना दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

निर्वाचित और चयनित का राजनीतिक खेल

​तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट की शुरुआत में ही नीतीश कुमार को Elected (निर्वाचित) और सम्राट चौधरी को Selected (चयनित) मुख्यमंत्री बताकर बड़ा राजनीतिक कटाक्ष किया। उन्होंने सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार को गद्दी से उतारने की उनकी प्रतिज्ञा पूर्ण करने पर बधाई दी, लेकिन साथ ही यह भी संकेत दिया कि वे जनता के सीधे जनादेश से नहीं बल्कि गठबंधन की जोड़-तोड़ से इस कुर्सी तक पहुँचे हैं।

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नीति आयोग के आंकड़ों से सरकार को घेरा

​तेजस्वी ने बिहार के पिछड़ेपन का मुद्दा उठाते हुए 21 वर्षों के NDA शासन पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने नए मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि बिहार आज भी कई राष्ट्रीय मानकों पर सबसे निचले पायदान पर है। तेजस्वी ने अपने पोस्ट में निम्नलिखित प्रमुख मुद्दों का जिक्र किया:

  • शिक्षा और स्वास्थ्य: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था का भारी अभाव।
  • अर्थव्यवस्था: निवेश की कमी, आय में गिरावट और खपत के घटते आंकड़े।
  • बेरोजगारी और पलायन: युवाओं को नौकरी न मिलना और राज्य से लगातार होता पलायन।
  • विधि व्यवस्था: राज्य में ध्वस्त हो चुकी कानून व्यवस्था और असुरक्षा का माहौल।

‘बिहारी स्वाभिमान’ को बताया सर्वोच्च

​तेजस्वी यादव ने सम्राट चौधरी को सचेत करते हुए कहा कि वे “बाहरियों के दिशा-निर्देशों” के आगे बिहारियों के स्वाभिमान को गिरवी न रखें। उनका इशारा स्पष्ट रूप से केंद्र सरकार के हस्तक्षेप की ओर था। उन्होंने आशा व्यक्त की कि मुख्यमंत्री बिहार की उन्नति और शांति के लिए सशक्त तरीके से काम करेंगे।

प्रादुर्भाव से समाजवादी श्री सम्राट चौधरी जी को पुनः हार्दिक शुभकामनाएं।तेजस्वी यादव

सियासी गलियारों में हलचल

​सम्राट चौधरी, जिन्होंने कभी नीतीश कुमार को सत्ता से हटाने तक अपना साफा (मुरेठा) न खोलने की कसम खाई थी, अब खुद मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन हैं। ऐसे में तेजस्वी यादव का यह पोस्ट न केवल एक चुनौती है, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए विपक्ष के एजेंडे की एक झलक भी है। अब देखना यह होगा कि नई सरकार इन तीखे सवालों का जवाब अपने काम से किस तरह देती है।

बिजली क्षेत्र के भीष्म पितामह बिजेंद्र यादव का कद बढ़ा, आज सम्राट कैबिनेट में लेंगे डिप्टी सीएम पद की शपथ

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पटना: बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बनी नई सरकार में, बिहार को अंधेरे से उजाले की ओर ले जाने वाले बिजेंद्र प्रसाद यादव को उनके समर्पण का बड़ा इनाम मिलने जा रहा है। आज सुबह 10:50 बजे, वे सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली कैबिनेट में उपमुख्यमंत्री (Deputy CM) पद की शपथ लेंगे।

बिहार के ऊर्जा पुरुष का नया सफर

​बिजेंद्र प्रसाद यादव को बिहार में बिजली सुधारों का जनक माना जाता है। एक दौर था जब बिहार में बिजली के दर्शन दुर्लभ थे, लेकिन बिजेंद्र यादव के ऊर्जा मंत्री रहते बिहार ने लालटेन युग को पीछे छोड़कर LED युग में कदम रखा। गांव-गांव तक बिजली पहुँचाने और जर्जर तारों को बदलने की उनकी मुहिम ने उन्हें राज्य का सबसे भरोसेमंद चेहरा बना दिया है।

36 वर्षों का अटूट विश्वास

  • लगातार प्रतिनिधित्व: बिजेंद्र यादव 1990 से लगातार सुपौल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतते आ रहे हैं।
  • अनुभव का खजाना: करीब 36 वर्षों से सत्ता के शीर्ष पर रहने वाले यादव ने ऊर्जा, वित्त, और वाणिज्य कर जैसे भारी-भरकम विभागों को बखूबी संभाला है।
  • साफ-सुथरी छवि: अपनी कर्मठता और ईमानदार छवि के कारण वे हर गुट और गठबंधन में स्वीकार्य रहे हैं।

आज होगा शपथ ग्रहण

​सुपौल की जनता और बिहार के प्रशासनिक हल्कों में इस खबर से भारी उत्साह है। सम्राट चौधरी के साथ उपमुख्यमंत्री के रूप में उनकी ताजपोशी यह संकेत देती है कि नई सरकार उनके प्रशासनिक अनुभव का लाभ उठाकर बिहार के विकास की गति को और तेज करना चाहती है।

बिहार के हर घर को रोशन करने वाले दिग्गज नेता अब सरकार के सारथी की भूमिका में नजर आएंगे।