पटना विश्वविद्यालय में प्रतिभा का कत्ल! गोल्ड मेडलिस्ट टॉपर को ही कर दिया PhD से बाहर, आखिर किसके इशारे पर हुआ यह खेल?

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शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले पटना विश्वविद्यालय (Patna University) से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शैक्षणिक शुचिता और प्रशासन की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला पटना लॉ कॉलेज के एलएलएम (LLM) टॉपर पवन कुमार यादव से जुड़ा है, जिन्हें विश्वविद्यालय ने खुद गोल्ड मेडल से नवाजा, लेकिन जब पीएचडी (PhD) नामांकन की बारी आई, तो उन्हें सिस्टम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

कौन हैं पवन कुमार यादव?

रोहतास जिले के रहने वाले पवन कुमार यादव एक मेधावी छात्र हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की और उसके बाद पटना लॉ कॉलेज के सत्र 2022-24 में 80.19% अंकों के साथ पूरे विभाग में टॉप किया। दीक्षांत समारोह की तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि तत्कालीन राज्यपाल डॉ. आरिफ मोहम्मद खान और कुलपति प्रो. अजय कुमार सिंह ने उन्हें स्वर्ण पदक (Gold Medal) और उपाधि देकर सम्मानित किया था।

क्या है दांधली का पूरा आरोप?

हैरानी की बात यह है कि जो छात्र अपने विभाग का गोल्ड मेडलिस्ट है और नेट (NET) क्वालीफाइड भी है, उसे ही पीएचडी नामांकन लिस्ट से बाहर कर दिया गया। आरोप है कि एलएलएम विभाग और पटना विश्वविद्यालय ने नामांकन प्रक्रिया में भारी अनियमितता बरती है। शिकायत के मुताबिक, पवन की ही कैटेगरी में उनसे काफी कम प्रतिशत अंक वाले छात्रों का नामांकन ले लिया गया, लेकिन टॉपर को दरकिनार कर दिया गया।

अब सवाल यह उठता है कि क्या यह महज एक तकनीकी खामी है या फिर इसके पीछे जातीय दुर्भावना और प्रतिभा का गला घोंटने की कोई गहरी साजिश है? आखिर एक स्वर्ण पदक विजेता छात्र को अपने हक के लिए दर-दर क्यों भटकना पड़ रहा है?

गोल्ड मेडलिस्ट छात्र के साथ इस तरह का व्यवहार न केवल छात्र का मनोबल तोड़ता है, बल्कि पूरे विश्वविद्यालय की साख पर धब्बा लगाता है। भूमि न्यूज़ लाइव इस मामले की तह तक जाएगा और जब तक पवन को न्याय नहीं मिलता, हम इस खबर को प्रमुखता से उठाते रहेंगे।

बने रहिए भूमि न्यूज़ लाइव के साथ, सच्चाई हम दिखाएंगे।

बिहार: रोहतास के स्कूल में मीट कांड! क्या बच्चों का धर्म भ्रष्ट करने की रची जा रही है गहरी साजिश?

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रोहतास (बिहार): भारत में इन दिनों ऐसी घटनाओं की बाढ़ सी आ गई है जो न केवल मन को विचलित करती हैं, बल्कि हमारी आस्था और संस्कृति पर भी सीधा प्रहार करती हैं। ताज़ा मामला बिहार के रोहतास जिले के रामडीह से सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। एक सरकारी स्कूल में मिड-डे मील (MDM) के दौरान बच्चों को कथित तौर पर मांस परोसे जाने की खबर ने सनसनी फैला दी है।

आखिर रामडीह के स्कूल में क्या हुआ?

​जानकारी के अनुसार, रोहतास के एक सरकारी स्कूल के MDM में गाय मांस देने की दावा किया गया। जैसे ही यह खबर अभिभावकों तक पहुँची, स्कूल में हंगामा खड़ा हो गया। सवाल यह उठता है कि जिस जगह को ‘शिक्षा का मंदिर’ कहा जाता है, वहाँ इस तरह की ‘नापाक’ हरकत कैसे मुमकिन है? क्या यह महज प्रशासन की लापरवाही है या इसके पीछे कोई गहरा धार्मिक षडयंत्र?

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एक के बाद एक: धर्म पर प्रहार की कड़ियां

​यह कोई इकलौती घटना नहीं है। आज देश के कोने-कोने से ऐसी खबरें आ रही हैं जो इशारा करती हैं कि हिंदू समाज की आस्था को निशाना बनाया जा रहा है:

  • दोस्ती के नाम पर धोखा: कहीं दोस्ती का झांसा देकर गौ-मांस खिलाया जा रहा है, तो कहीं भावनाओं के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
  • पढ़े-लिखे लोगों का ब्रेनवाश: हैरानी की बात तो यह है कि अब आईटी कंपनियों (IT Companies) में काम करने वाले उच्च-शिक्षित लोग भी इस कट्टरपंथ की चपेट में हैं। वहां भी धर्म परिवर्तन (Conversion) के रैकेट सक्रिय होने की खबरें चिंता का विषय हैं।
  • शिक्षण संस्थानों को निशाना: बच्चों के कोमल मन पर बचपन से ही इस तरह की चीजें थोपकर क्या उनके संस्कारों को मिटाने की कोशिश की जा रही है?

​क्या भारत को कट्टरपंथ की आग में झोंकने की तैयारी है?

​भारत अपनी सहिष्णुता के लिए जाना जाता है, लेकिन इसे कमजोरी समझने की भूल की जा रही है। एक सोची-समझी रणनीति के तहत बहुसंख्यक समाज की मान्यताओं को आहत किया जा रहा है। चाहे वह खान-पान के माध्यम से हो या लव-जिहाद और धर्मांतरण के जरिए, मकसद सिर्फ एक ही नजर आता है—भारत की सनातन संस्कृति को भीतर से खोखला करना।

सवाल यह है कि आखिर यह सिलसिला कब थमेगा? क्या प्रशासन और सरकारें इन कट्टरपंथियों पर नकेल कसने में नाकाम साबित हो रही हैं?

​रोहतास की यह घटना एक अलार्म (Warning) है। अगर आज हम चुप रहे, तो कल यह हमारे घरों के भीतर तक पहुँच जाएगा। प्रशासन को चाहिए कि वह रामडीह मामले की निष्पक्ष जांच करे और जो भी इस ‘धर्म भ्रष्ट’ करने के खेल में शामिल है, उसे ऐसी सजा दी जाए कि दोबारा कोई ऐसी हिमाकत न कर सके।

आपकी क्या राय है?

क्या आपको भी लगता है कि यह एक सोची-समझी साजिश है? क्या प्रशासन इन कट्टरपंथियों को रोकने में सक्षम है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें और इस लेख को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।

मेधावी छात्र-छात्राओं के लिए खुशखबरी: फुलपरास (मधुबनी) में आयोजित होगा अनुमंडल स्तरीय प्रतिभा सम्मान समारोह 2026

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फुलपरास, मधुबनी: शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के प्रोत्साहन के लिए बिहार के मधुबनी जिले के फुलपरास में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन होने जा रहा है। विमल देव कृष्ण समग्र विकास संस्थान के तत्वावधान में इस वर्ष भी ‘अनुमंडल स्तरीय प्रतिभा सम्मान समारोह 2026’ आयोजित किया जाएगा।

​यह समारोह प्रतिभावान छात्र-छात्राओं की मेहनत को सम्मानित करने और उन्हें भविष्य के लिए प्रेरित करने का एक सुनहरा अवसर है।

कार्यक्रम का विवरण

​संस्थान द्वारा यह आयोजन इंटरनेशनल वर्कर्स डे (श्रमिक दिवस) के अवसर पर किया जा रहा है:

  • दिनांक: 1 मई 2026 (शुक्रवार)
  • समय: दोपहर 02:00 बजे से
  • स्थान: फुलपरास, मधुबनी (बिहार) – 847409

सम्मान के लिए पात्रता

​इस सम्मान समारोह में भाग लेने के लिए निम्नलिखित मानदंडों को पूरा करने वाले छात्र-छात्राएं पात्र होंगे:

  1. ​विद्यार्थी ने इस वर्ष मैट्रिक (10th) या इंटर (12th) की परीक्षा उत्तीर्ण की हो।
  2. ​बिहार बोर्ड (BSEB) या सीबीएसई (CBSE) में कम से कम 80 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हों।

Registration Process

​कार्यक्रम में शामिल होने और सम्मान प्राप्त करने के लिए छात्र-छात्राओं को पूर्व-पंजीकरण (Registration) कराना अनिवार्य है। पंजीकरण की अंतिम तिथि 28 अप्रैल 2026 (शाम 5:00 बजे तक) निर्धारित की गई है।

रजिस्ट्रेशन के लिए आवश्यक दस्तावेज:

  • ​आधार कार्ड की फोटोकॉपी (व्हाट्सएप्प पर)
  • ​एडमिट कार्ड की फोटोकॉपी
  • ​मोबाइल नंबर

कैसे करें आवेदन?

इच्छुक छात्र-छात्राएं संस्थान के सचिव रुपेश कुमार के व्हाट्सएप नंबर 9431481103 पर अपने दस्तावेज भेजकर अपना पंजीकरण सुनिश्चित करा सकते हैं।

आयोजक का संदेश

​संस्थान के सचिव रुपेश कुमार ने बताया कि “विमल देव कृष्ण समग्र विकास संस्थान” सदैव मेधावी छात्रों को आगे बढ़ाने के लिए संकल्पित रहा है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और अनुमंडल स्तर के छात्रों में छिपी प्रतिभा को समाज के सामने लाना है।

नोट: समय सीमा का ध्यान रखें और 28 अप्रैल तक अपना रजिस्ट्रेशन जरूर पूरा कर लें।

मुजफ्फरपुर: फर्जी प्रमाणपत्र पर बहाल हेडमास्टर बर्खास्त, जिले के शिक्षकों में मचा हड़कंप

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मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में शिक्षा विभाग ने फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की है। मोतीपुर प्रखंड के जनता उच्च माध्यमिक विद्यालय, महवल कुआही के प्रभारी प्रधानाध्यापक संजय कुमार यादव को फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी पाने के आरोप में सेवा से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है। इस कड़ी कार्रवाई के बाद जिले भर में फर्जी दस्तावेजों के सहारे बहाल हुए शिक्षकों के बीच खौफ का माहौल व्याप्त हो गया है।

जांच में खुली पोल: गुवाहाटी विश्वविद्यालय का प्रमाण पत्र निकला जाली

​जानकारी के मुताबिक, संजय कुमार यादव की नियुक्ति जिला परिषद शिक्षक के रूप में हुई थी। योग्यता और अनुभव के आधार पर उन्हें विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। हालांकि, उनके शैक्षणिक दस्तावेजों, विशेष रूप से बीएड (B.Ed.) प्रमाणपत्र की प्रामाणिकता को लेकर विभाग को संदेह हुआ।

​मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा कार्यालय ने असम के गुवाहाटी विश्वविद्यालय से संपर्क किया और प्रमाणपत्र के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच के बाद लिखित पुष्टि की कि संबंधित प्रमाणपत्र उनके रिकॉर्ड में कहीं दर्ज नहीं है और यह पूरी तरह से जाली है।

स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं, सीधे हुई बर्खास्तगी

​प्रमाणपत्र के फर्जी पाए जाने के बाद, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) ने बीते 8 अप्रैल को संजय कुमार यादव से इस मामले पर स्पष्टीकरण मांगा था। बताया जा रहा है कि आरोपी शिक्षक द्वारा दिया गया जवाब न तो तथ्यात्मक था और न ही संतोषजनक। साक्ष्यों और विश्वविद्यालय की रिपोर्ट के आधार पर जिला शिक्षा पदाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें सेवामुक्त करने का आदेश जारी कर दिया।

आगे की कार्रवाई और अन्य मामलों पर नजर

​प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह केवल बर्खास्तगी तक सीमित नहीं रहेगा। फर्जीवाड़े के इस मामले में नियमानुसार प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने और अब तक प्राप्त वेतन की वसूली जैसी कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

​इस घटना ने शिक्षा विभाग को सतर्क कर दिया है। विभाग ने संकेत दिए हैं कि फर्जी बहाली से जुड़े अन्य संदिग्ध मामलों की जांच भी तेज कर दी गई है। आने वाले दिनों में कई और शिक्षकों पर गाज गिर सकती है जो फर्जी डिग्री के सहारे सरकारी सेवा का लाभ ले रहे हैं।

​यह कार्रवाई राज्य सरकार की उस मुहिम का हिस्सा है, जिसमें शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है। मुजफ्फरपुर की यह घटना उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो फर्जी दस्तावेजों के जरिए सिस्टम में सेंध लगाने की कोशिश करते हैं।

महंगी किताबों का शोर या महंगाई का सच? शिक्षा क्षेत्र में निजी प्रकाशकों की भूमिका पर उठते सवाल

संस्कार भारती ग्लोबल स्कूल फुलपरास डॉ. विजय रंजन इंटरव्यू

मधुबनी (फुलपरास): जैसे ही मार्च और अप्रैल का महीना आता है, अभिभावकों और सोशल मीडिया पर एक ही चर्चा सबसे ऊपर होती है—निजी स्कूलों की महंगी किताबें। सोशल मीडिया पर अक्सर दावे किए जाते हैं कि ₹50 की किताब ₹500 में बेची जा रही है। इस मुद्दे की गहराई को समझने के लिए ‘भूमि न्यूज़ लाइव’ के पत्रकार कार्तिक कुमार ने मिथिला क्षेत्र के तेजी से बढ़ते स्कूल ‘संस्कार भारती ग्लोबल स्कूल, फुलपरास’ के संस्थापक डॉ. विजय रंजन से खास बातचीत की।

NCERT की उपलब्धता और सिस्टम की चुनौती

​चर्चा के दौरान डॉ. विजय रंजन ने स्पष्ट किया कि किताबों के खेल में केवल स्कूलों को दोषी ठहराना सही नहीं है। उन्होंने कुछ प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला:

  • उपलब्धता का संकट: डॉ. रंजन के अनुसार, NCERT की किताबें मांग के अनुपात में काफी कम छपती हैं। जब सरकारी तंत्र समय पर किताबें उपलब्ध नहीं करा पाता, तब स्कूलों को निजी प्रकाशकों की ओर रुख करना पड़ता है।
  • समय पर वितरण: उन्होंने याद दिलाया कि सीबीएसई ने पहले स्कूलों से छात्रों का डेटा मांगा था ताकि किताबें पहुंचाई जा सकें, लेकिन वह योजना धरातल पर सफल नहीं रही।

महंगाई या मुनाफाखोरी?

​सोशल मीडिया पर वायरल दावों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 20 सालों में सुई से लेकर हवाई जहाज तक, हर चीज़ के दाम 10 गुना बढ़े हैं।

​”जब सब्जी, बस किराया और बिजली की दरें बढ़ रही हैं, तो प्रिंटिंग कॉस्ट, मैनपावर और पेपर की कीमत भी बढ़ी है। ₹200 की किताब जिसे बच्चा 12 महीने पढ़ता है, वह मुद्दा बन जाती है, जबकि लोग अन्य शौक पर इससे कहीं ज्यादा खर्च कर देते हैं।”

प्रशासन और सनसनीखेज पत्रकारिता पर सवाल

​डॉ. रंजन ने बिना किसी रिसर्च या सर्वे के ‘शिक्षा माफिया’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर बिना यह जांचे कि NCERT की कमी क्यों है, केवल स्कूलों को निशाना बनाना गलत है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को एक ठोस डेटाबेस तैयार करना चाहिए ताकि हर बच्चे तक सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंच सके।

भूमि न्यूज़ लाइव की इस रिपोर्ट से यह साफ है कि किताबों की कीमतों का मुद्दा जितना सरल दिखता है, उतना है नहीं। यह बढ़ती महंगाई, संसाधनों की कमी और सिस्टम की विफलता का एक मिला-जुला नतीजा है। ‘भूमि न्यूज़ लाइव’ प्रशासन से यह अपील करता है कि केवल सनसनी फैलाने के बजाय इस समस्या के बुनियादी कारणों पर ध्यान दिया जाए।

बिहार बोर्ड 11वीं नामांकन 2026: OFSS के जरिए आवेदन शुरू, जानें महत्वपूर्ण तिथियां और प्रक्रिया

OFSS बिहार बोर्ड कक्षा 11वीं ऑनलाइन नामांकन 2026 आवेदन प्रक्रिया की जानकारी स्मार्टफोन स्क्रीन पर

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने शैक्षणिक सत्र 2026-28 के लिए कक्षा 11वीं (इंटरमीडिएट) में नामांकन की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू कर दी है। राज्य के उच्च माध्यमिक विद्यालयों और इंटर कॉलेजों में प्रवेश के लिए छात्र आज से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

इस वर्ष नामांकन प्रक्रिया में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिन्हें आवेदन करने से पहले समझना छात्रों के लिए आवश्यक है।

📈 मुख्य आंकड़े: एक नजर में

बिहार बोर्ड ने इस बार राज्य भर के शिक्षण संस्थानों की सूची और सीटों का विवरण जारी कर दिया है:

विवरणसंख्या/जानकारी
कुल शिक्षण संस्थान10,003
कुल उपलब्ध सीटें17.50 लाख से अधिक
आवेदन का माध्यमऑनलाइन (OFSS पोर्टल)
आवेदन शुल्क₹350
विकल्पों की संख्यान्यूनतम 10, अधिकतम 20 संस्थान

🗓️ महत्वपूर्ण तिथियां (Important Dates)

  • आवेदन शुरू होने की तिथि: 8 अप्रैल, 2026
  • आवेदन की अंतिम तिथि: 18 अप्रैल, 2026
  • विदेशी नागरिक/प्रवासी भारतीय छात्रों के लिए: 2 मई तक

🛠️ आवेदन कैसे करें? (Step-by-Step Process)

नामांकन के लिए छात्रों को OFSS (Online Facilitation System for Students) पोर्टल का उपयोग करना होगा:

  1. वेबसाइट पर जाएं: सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट www.ofssbihar.net पर जाएं।
  2. दस्तावेज पढ़ें: आवेदन करने से पहले समिति द्वारा जारी ‘सामान्य आवेदन पत्र’ (Common Application Form) और ‘सामान्य सूची पत्र’ को ध्यान से पढ़ें।
  3. कट-ऑफ चेक करें: छात्र पिछले वर्ष (2025) की कट-ऑफ लिस्ट देखकर अपने अंकों के अनुसार कॉलेजों का चयन करें।
  4. कॉलेज चयन: आप कम से कम 10 और ज्यादा से ज्यादा 20 कॉलेजों/स्कूलों का विकल्प चुन सकते हैं।
  5. शुल्क भुगतान: आवेदन शुल्क ₹350 जमा करना अनिवार्य है, इसके बिना आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

नोट: इस बार डिग्री कॉलेजों (Degree Colleges) को इंटर नामांकन की सूची से हटा दिया गया है। अब नामांकन केवल उच्च माध्यमिक विद्यालयों और इंटर कॉलेजों में ही होगा।

🎓 डॉ. अंबेडकर आवासीय विद्यालयों में भी अवसर

अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) कल्याण विभाग द्वारा संचालित 46 डॉ. भीमराव अंबेडकर आवासीय विद्यालयों में भी कक्षा 11वीं के लिए नामांकन शुरू हो गया है।

  • विशेषताएं: चयनित छात्रों को नि:शुल्क नामांकन के साथ रहना, खाना और यूनिफॉर्म की सुविधा मुफ्त मिलेगी।
  • चयन का आधार: कक्षा 10वीं के अंकों के आधार पर मेरिट लिस्ट बनेगी।
  • आवेदन की अवधि: 8 अप्रैल से 27 अप्रैल तक।
  • नामांकन प्रक्रिया: 15 मई से 25 मई तक चलेगी।

💡 छात्रों के लिए जरूरी टिप्स

  • ऑफलाइन आवेदन नहीं: ध्यान रखें कि आवेदन केवल ऑनलाइन मोड में ही स्वीकार किए जाएंगे। ऑफलाइन आवेदन का कोई प्रावधान नहीं है।
  • सोच-समझकर चुनें विकल्प: कॉलेज चुनते समय अपनी प्राथमिकता और पिछले साल के कट-ऑफ का मिलान जरूर करें ताकि पहली सूची में ही नाम आने की संभावना बढ़ जाए।
  • मोबाइल नंबर और ईमेल: आवेदन के समय अपना सक्रिय मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी ही दें ताकि बोर्ड की ओर से आने वाले अपडेट्स मिस न हों।

विदाई की बेला में नम हुईं आंखें: बलनी मेहथ स्कूल के स्वर्ण युग की सूत्रधार प्रधानाध्यापिका अहल्या सेवानिवृत्त

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झंझारपुर (मधुबनी): शिक्षा के प्रति समर्पण और बेदाग छवि की मिसाल बनीं प्रधानाध्यापिका अहल्या के सम्मान में मध्य विद्यालय, बलनी मेहथ में आयोजित विदाई समारोह एक ऐतिहासिक पल बन गया। करीब 14 वर्षों के लंबे और गौरवशाली कार्यकाल के बाद जब अहल्या ने विद्यालय से अंतिम विदाई ली, तो उनकी आँखें भर आईं। यह दृश्य देख वहां मौजूद सैकड़ों छात्रों और ग्रामीणों का गला भी भर आया।

विकास की पर्याय बनीं अहल्या: संकुल से प्लस-टू तक का सफर

अहल्या का कार्यकाल बलनी मेहथ स्कूल के लिए ‘स्वर्ण युग’ माना जाएगा। उन्हीं के नेतृत्व में न केवल विद्यालय मध्य विद्यालय से उत्क्रमित प्लस टू हाई स्कूल बना, बल्कि उन्हीं के समय में इस विद्यालय को ‘संकुल’ (Cluster) का दर्जा प्राप्त हुआ। वे स्वयं संकुल संचालक के रूप में अन्य विद्यालयों का मार्गदर्शन करती रहीं। उनके अनुशासन और कार्यकुशलता का ही परिणाम था कि 2012 से 2026 तक के लंबे सफर में उन पर कभी कोई सवाल नहीं उठा।

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एक दशक से अधिक का बेदाग सफर

​श्रीमती अहल्या ने 14 फरवरी 2012 को इस विद्यालय में अपना योगदान दिया था। तब से लेकर 31 मार्च 2026 तक, उन्होंने अपना पूरा कार्यकाल इसी एक स्कूल को समर्पित कर दिया। उनके कुशल नेतृत्व में ही यह मध्य विद्यालय से ‘उत्क्रमित प्लस टू हाई स्कूल’ के रूप में विकसित हुआ। विशेष बात यह रही कि वे न केवल इस हाई स्कूल की पहली हेडमास्टर बनीं, बल्कि उन्होंने ही इसका उद्घाटन भी किया था। वर्ष 2015 से 2026 तक प्रधानाध्यापिका के पद पर रहते हुए उन पर प्रशासन या समाज की ओर से कोई दाग नहीं लगा, जो उनकी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का प्रमाण है।

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राकेश कुमार ने संभाली नई जिम्मेदारी

उनकी सेवानिवृत्ति के पश्चात, 1 अप्रैल 2026 से विद्यालय के प्रधानाध्यापक पद का प्रभार राकेश कुमार ने संभाल लिया है। समारोह के दौरान अहल्या ने उन्हें अपनी शुभकामनाएं दीं और विद्यालय के निरंतर विकास की कामना की।

दूर-दराज से पहुंचे पुराने साथी: गुरु-शिष्य परंपरा की दिखी मिसाल

इस समारोह की सबसे खास बात यह रही कि जो शिक्षक यहाँ से तबादला कराकर दूर जा चुके थे, वे भी अपनी पूर्व प्रधानाध्यापिका को सम्मान देने खिंचे चले आए।

​गया के सिद्धार्थ नारायण और भागलपुर की रंजीता कुमारी, जो यहाँ से ट्रांसफर लेकर जा चुकी हैं, विशेष रूप से समारोह में शामिल हुईं।

​उत्तर प्रदेश के शिक्षक प्रदीप कुमार, जो वर्तमान में यूपी बॉर्डर के पास कार्यरत हैं, उन्होंने भी लंबी दूरी तय कर इस विदाई समारोह में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। यह अहल्या देवी के प्रति उनके सहकर्मियों के प्रेम और सम्मान को दर्शाता है।

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जनप्रतिनिधियों और गणमान्य लोगों का लगा तांता

समारोह में शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ पंचायत के प्रतिनिधियों ने भी शिरकत की। कार्यक्रम में सरपंच के साथ-साथ अन्य प्रमुख लोग भी उपस्थित रहे।

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उपस्थित प्रमुख व्यक्ति एवं शिक्षक:

प्रवीण कुमार प्रभाकर (BPRO सह BEO, झंझारपुर), जितेन्द्र झा (मुखिया), रामाकान्त चतुर्वेदी (संचालक), शंभू नाथ झा (समन्वयक), प्रफुल्ल कुमार सिंह, अनिल कुमार झा, मनोज कुमार सिंह, घनश्याम ठाकुर, बच्चन पासवान, विद्यापति, रमेश कुमार ठाकुर, रास बिहारी कामत, रणधीर सिंह, उपेंद्र ना. शर्मा, अरुण कुमार भंडारी, किशोर पासवान, कौशिक आलम, जितेंद्र पाल, प्रफुल्ल सिंह, लेखपाल कौशल यादव, नीलू कुमारी, शालू कुमारी, महालक्ष्मी कुमारी, मुकेश कुमार, दिनेश झा, त्रिवेणी पंडित और विद्यानंद पासवान, सोहन चौपाल, जितेंद्र पाल, सीमा दास एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

समारोह में बलनी मेहथ संकुल के साथ-साथ कोठिया संकुल के शिक्षकों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि अहल्या मैडम का जाना विद्यालय के लिए एक युग के अंत जैसा है, जिन्होंने शिक्षा के स्तर को सुधारने में अपनी पूरी ऊर्जा लगा दी।

BSEB Bihar Board 10th Result 2026: क्या आज जारी होगा मैट्रिक का रिजल्ट? जानें लेटेस्ट अपडेट

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बिहार बोर्ड (BSEB) एक बार फिर इतिहास रचने की दहलीज पर है। इंटरमीडिएट (12वीं) का रिजल्ट 23 मार्च को सफलतापूर्वक घोषित करने के बाद, अब बिहार विद्यालय परीक्षा समिति मैट्रिक यानी 10वीं के नतीजों को लेकर अपनी अंतिम तैयारी में जुट गई है।

​अगर आप भी इस साल मैट्रिक की परीक्षा में शामिल हुए हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

रिजल्ट को लेकर क्या है ताजा अपडेट?

​बोर्ड के विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन (Copy Evaluation) का कार्य पूरी तरह संपन्न हो चुका है। वर्तमान में टॉपर्स के वेरिफिकेशन और इंटरव्यू की प्रक्रिया चल रही है।

नोट: बिहार बोर्ड की यह खास परंपरा है कि रिजल्ट जारी करने से पहले टॉप-10 में आने वाले मेधावी छात्रों का फिजिकल वेरिफिकेशन किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य परीक्षा की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को बनाए रखना है।

कब घोषित होंगे नतीजे?

​पिछले साल (2025) के आंकड़ों पर नजर डालें तो मैट्रिक का रिजल्ट 29 मार्च को दोपहर 12:15 बजे जारी किया गया था। इस साल भी उम्मीद जताई जा रही है कि बोर्ड मार्च के आखिरी हफ्ते (संभवतः 30 या 31 मार्च) तक नतीजे घोषित कर देगा। हालांकि, सोशल मीडिया पर चर्चा है कि बोर्ड आज भी चौंकाने वाला फैसला ले सकता है।

एक नजर परीक्षा के आंकड़ों पर

विवरणआंकड़े
परीक्षा की तिथि15 फरवरी से 23 फरवरी 2026
कुल परीक्षार्थीलगभग 16 लाख से अधिक
रिजल्ट की संभावित तिथि30-31 मार्च 2026
आधिकारिक वेबसाइटresults.biharboardonline.com

रिजल्ट कैसे चेक करें? (Step-by-Step Guide)

​जैसे ही रिजल्ट का लिंक एक्टिव होगा, छात्र नीचे दिए गए चरणों का पालन कर अपना स्कोरकार्ड देख सकते हैं:

  1. ​बिहार बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
  2. ​होमपेज पर ‘Annual Secondary Examination Result 2026’ के लिंक पर क्लिक करें।
  3. ​अपना Roll Code और Roll Number दर्ज करें।
  4. ​कैप्चा कोड भरकर ‘View’ बटन पर क्लिक करें।
  5. ​आपका रिजल्ट स्क्रीन पर दिख जाएगा, इसे भविष्य के लिए डाउनलोड या प्रिंट कर लें।

छात्रों के लिए जरूरी सलाह

अफवाहों से बचें: केवल आधिकारिक घोषणा पर ही विश्वास करें।

एडमिट कार्ड तैयार रखें: रिजल्ट देखते समय हड़बड़ी न हो, इसलिए अपना एडमिट कार्ड पास रखें।

मार्कशीट की जानकारी: ऑनलाइन डाउनलोड की गई मार्कशीट प्रोविजनल होगी। आपकी ओरिजिनल मार्कशीट और सर्टिफिकेट कुछ दिनों बाद आपके संबंधित स्कूल से प्राप्त होंगे।

बिहार बोर्ड मैट्रिक रिजल्ट 2026: डायरेक्ट लिंक सूची

​रिजल्ट जारी होते ही भारी ट्रैफिक के कारण आधिकारिक वेबसाइट स्लो हो सकती है, इसलिए आप इन वैकल्पिक लिंक्स का उपयोग कर सकते हैं:

वेबसाइट का नामडायरेक्ट लिंक (क्लिक करें)
BSEB Official Portalresults.biharboardonline.com
BSEB Main Websitebiharboardonline.bihar.gov.in
Secondary Result Linksecondary.biharboardonline.com
India Results (Third Party)bihar.indiaresults.com

डिजिटल इंडिया में 16 वर्षों से बंद पड़ा है यह स्कूल, ग्रामीणों ने शुरू किया आमरण अनशन

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खुटौना (मधुबनी): शिक्षा के अधिकार की बातें कागजों पर भले ही सुनहरी लगें, लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ और ही बयां करती है। खुटौना प्रखंड के चतुर्भुज पिपराही पंचायत स्थित खिलही के नोनिया टोल में पिछले 16 वर्षों से बंद पड़े प्राथमिक विद्यालय को फिर से शुरू करवाने के लिए ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया है। प्रशासन की बेरुखी से नाराज ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।

प्रमुख के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू

​विद्यालय के अस्तित्व को बचाने और बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए खुटौना के पूर्व प्रमुख सह वर्तमान पंचायत समिति सदस्य संजीव भिंडवार के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू किया गया है। यह आंदोलन उसी बंद पड़े विद्यालय के परिसर में शुरू किया गया है, जो कभी बच्चों की खिलखिलाहट से गूंजता था।

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क्यों फूटा ग्रामीणों का आक्रोश?

​आंदोलनकारियों का कहना है कि विद्यालय बंद होने के कारण सबसे ज्यादा मार गरीब परिवारों और छोटे बच्चों पर पड़ रही है।

प्रशासनिक अनदेखी: ग्रामीणों के अनुसार, शिक्षा विभाग के अधिकारियों को बार-बार सूचित करने के बाद भी अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

दूरी की समस्या: बच्चों को प्राथमिक शिक्षा के लिए लंबी दूरी तय कर दूसरे गांवों में जाना पड़ता है।

सुरक्षा का डर: छोटे बच्चों को दूर भेजने में अभिभावक हमेशा आशंकित रहते हैं।

​जब तक विद्यालय को पुनः चालू करने के लिए विभाग की ओर से कोई ठोस लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक हमारा अनशन जारी रहेगा। यह बच्चों के भविष्य का सवाल है।

संजीव भिंडवार, आंदोलनकारी नेतृत्वकर्ता

अनशन पर बैठे 12 सत्याग्रही

​इस आंदोलन में संजीव भिंडवार के साथ कुल 12 लोग आमरण अनशन पर बैठे हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • ​रामेश्वर महतो, रामकृष्ण महतो, विष्णु देव महतो, यशोधर महतो।
  • ​रविंद्र महतो, शोभित महतो, सूर्य नारायण महतो, जुगत लाल महतो।
  • ​रामस्वरूप महतो, राम प्रकाश महतो और बलराम महतो।

क्षेत्र में चर्चा का विषय

​जैसे-जैसे अनशन का समय बढ़ रहा है, आस-पास के गांवों के लोगों का समर्थन भी बढ़ता जा रहा है। भारी संख्या में ग्रामीण अनशन स्थल पर पहुंचकर एकजुटता दिखा रहे हैं। अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया शिक्षा विभाग इस जन आक्रोश के बाद जागता है या नोनिया टोल के बच्चों का भविष्य अंधेरे में ही रहेगा।

एडमिट कार्ड बना मजाक! कैंडिडेट की फोटो की जगह छपी कुत्ते की तस्वीर, सोशल मीडिया पर वायरल

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बिहार की शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली अक्सर अपनी अजीबोगरीब गलतियों की वजह से सुर्खियों में रहती है। ताजा मामला एक बार फिर सिस्टम पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है, जहाँ एक छात्र के एडमिट कार्ड (Admit Card) पर उसकी तस्वीर की जगह एक कुत्ते की फोटो छाप दी गई।

यह मामला सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग विभाग की लापरवाही का जमकर मजाक उड़ा रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, यह घटना बिहार के एक प्रतिष्ठित संस्थान की परीक्षा से जुड़ी बताई जा रही है। एक अभ्यर्थी ने जब अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड किया, तो वह दंग रह गया। कार्ड पर छात्र के नाम, पिता का नाम और अन्य विवरण तो सही थे, लेकिन ‘प्रोफाइल फोटो’ वाले कॉलम में छात्र की जगह एक कुत्ते का चेहरा नजर आ रहा था।

हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर चूक पर किसी भी स्तर (डाटा एंट्री से लेकर वेरिफिकेशन तक) पर ध्यान नहीं दिया गया और एडमिट कार्ड जारी कर दिया गया।

सोशल मीडिया पर उड़ रहा मजाक

जैसे ही इस एडमिट कार्ड का स्क्रीनशॉट इंटरनेट पर आया, यूजर्स ने बिहार के परीक्षा बोर्ड और संबंधित विभाग को आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया।

  • मीम्स की बाढ़: लोग कमेंट्स में लिख रहे हैं कि “बिहार में कुछ भी मुमकिन है।”
  • सिस्टम पर सवाल: शिक्षाविदों का मानना है कि इस तरह की गलतियां न केवल छात्र का मनोबल गिराती हैं, बल्कि परीक्षा की गंभीरता को भी खत्म करती हैं।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे कारनामे

बिहार में एडमिट कार्ड पर किसी सेलेब्रिटी या जानवर की फोटो छपना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी कई बार एडमिट कार्ड्स पर:

  1. बॉलीवुड अभिनेत्रियों (सनी लियोन, प्रियंका चोपड़ा) की तस्वीरें।
  2. भगवान गणेश की फोटो।
  3. यहाँ तक कि राजनेताओं की फोटो भी देखी जा चुकी हैं।

विभाग की सफाई

मामला तूल पकड़ने के बाद संबंधित विभाग ने इसे तकनीकी खराबी या डाटा एंट्री ऑपरेटर की लापरवाही करार दिया है। हालांकि, छात्र के लिए यह किसी मानसिक परेशानी से कम नहीं है, क्योंकि एडमिट कार्ड में सुधार के लिए उसे अब दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहाँ हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बात कर रहे हैं, वहां इस तरह की मानवीय और तकनीकी गलतियां सिस्टम की जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती हैं।

क्या आपको लगता है कि इस तरह की गलतियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।