विशेष रिपोर्ट: खुटौना में PHED और बिजली विभाग की ‘जुगलबंदी’ से सरकार को करोड़ों का चूना..?

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टोका फंसाकर चल रहा नल-जल: खुटौना में PHED विभाग की सरेआम डकैती, क्या सो रहा है प्रशासन?

खुटौना, मधुबनी। बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं भ्रष्टाचार और विभागीय सांठगांठ की भेंट कैसे चढ़ती हैं, इसका ज्वलंत उदाहरण मधुबनी जिले के खुटौना प्रखंड में देखने को मिल रहा है। ताज़ा मामला PHED विभाग (झंझारपुर प्रमंडल) द्वारा पंचायतों में नल-जल योजना के संचालन के लिए खुलेआम की जा रही बिजली चोरी का है।

क्या है पूरा मामला?

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सुबोध कुमार के दावों ने विभाग में खलबली मचा दी है। प्रखंड के चतुर्भुज पिपराही गाँव सहित कई पंचायतों में PHED विभाग द्वारा बिना किसी वैध बिजली कनेक्शन के “टोका” फंसाकर मोटरों का संचालन किया जा रहा है।

वीडियो में PHED के कामगारों को यह स्वीकार करते सुना जा सकता है कि वे कनीय अभियंता (JE), PHED खुटौना के निर्देश पर अवैध तरीके से बिजली का उपयोग कर रहे हैं। हैरत की बात यह है कि इसी वीडियो में बिजली विभाग के JE भी PHED के मुंशी को बिजली चोरी की बात कहते सुने जा रहे हैं, लेकिन कोई कानूनी कार्रवाई करने के बजाय मामला आपसी “समझौते” जैसा प्रतीत होता है।

राजस्व क्षति का बड़ा खेल

जानकारों का मानना है कि यह केवल एक प्रखंड का मामला नहीं बल्कि पूरे प्रमंडल में फैला एक बड़ा सिंडिकेट हो सकता है।

  • करोड़ों की चपत: नल-जल योजनाओं के लिए आवंटित बिजली बजट का पैसा आखिर किसकी जेब में जा रहा है?
  • सड़कों की बर्बादी: कामगारों का कहना है कि वे बिजली चोरी के साथ-साथ सड़क तोड़ने का काम भी विभागीय निर्देश पर कर रहे हैं।
  • विभागीय मिलीभगत: बिजली विभाग के अधिकारी चोरी पकड़ने के बावजूद प्राथमिकी (FIR) दर्ज क्यों नहीं कर रहे? क्या यह करोड़ों के राजस्व की बंदरबांट का हिस्सा है?

जनता की गाढ़ी कमाई पर डाका

एक तरफ बिजली विभाग आम जनता पर बकाया होने पर तुरंत कनेक्शन काट देता है और “टोका” फंसाने पर भारी जुर्माना लगाता है। वहीं दूसरी ओर, एक सरकारी विभाग (PHED) द्वारा खुलेआम बिजली चोरी करना सुशासन के दावों पर सवालिया निशान खड़ा करता है।

यह गंभीर जांच का विषय है। अगर सरकारी विभाग ही बिजली चोरी करेंगे, तो आम जनता से ईमानदारी की उम्मीद कैसे की जा सकती है? हम इस मामले को जिलाधिकारी और सतर्कता विभाग तक ले जाएंगे। — सुबोध कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता

निष्कर्ष और मांग: यह मामला जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। क्या जिलाधिकारी मधुबनी और PHED के उच्च अधिकारी इस ‘करोड़ों के खेल‘ पर संज्ञान लेंगे? जनता की मांग है कि:

  • खुटौना की सभी पंचायतों में PHED कनेक्शनों की उच्च स्तरीय जांच हो।
  • दोषी अधिकारियों और बिचौलियों पर अविलंब प्राथमिकी दर्ज की जाए।
  • राजस्व की हुई क्षति का आकलन कर संबंधित अधिकारियों के वेतन से इसकी वसूली हो।

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