
रोहतास (बिहार): भारत में इन दिनों ऐसी घटनाओं की बाढ़ सी आ गई है जो न केवल मन को विचलित करती हैं, बल्कि हमारी आस्था और संस्कृति पर भी सीधा प्रहार करती हैं। ताज़ा मामला बिहार के रोहतास जिले के रामडीह से सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। एक सरकारी स्कूल में मिड-डे मील (MDM) के दौरान बच्चों को कथित तौर पर मांस परोसे जाने की खबर ने सनसनी फैला दी है।
आखिर रामडीह के स्कूल में क्या हुआ?
जानकारी के अनुसार, रोहतास के एक सरकारी स्कूल के MDM में गाय मांस देने की दावा किया गया। जैसे ही यह खबर अभिभावकों तक पहुँची, स्कूल में हंगामा खड़ा हो गया। सवाल यह उठता है कि जिस जगह को ‘शिक्षा का मंदिर’ कहा जाता है, वहाँ इस तरह की ‘नापाक’ हरकत कैसे मुमकिन है? क्या यह महज प्रशासन की लापरवाही है या इसके पीछे कोई गहरा धार्मिक षडयंत्र?

एक के बाद एक: धर्म पर प्रहार की कड़ियां
यह कोई इकलौती घटना नहीं है। आज देश के कोने-कोने से ऐसी खबरें आ रही हैं जो इशारा करती हैं कि हिंदू समाज की आस्था को निशाना बनाया जा रहा है:
- दोस्ती के नाम पर धोखा: कहीं दोस्ती का झांसा देकर गौ-मांस खिलाया जा रहा है, तो कहीं भावनाओं के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
- पढ़े-लिखे लोगों का ब्रेनवाश: हैरानी की बात तो यह है कि अब आईटी कंपनियों (IT Companies) में काम करने वाले उच्च-शिक्षित लोग भी इस कट्टरपंथ की चपेट में हैं। वहां भी धर्म परिवर्तन (Conversion) के रैकेट सक्रिय होने की खबरें चिंता का विषय हैं।
- शिक्षण संस्थानों को निशाना: बच्चों के कोमल मन पर बचपन से ही इस तरह की चीजें थोपकर क्या उनके संस्कारों को मिटाने की कोशिश की जा रही है?
क्या भारत को कट्टरपंथ की आग में झोंकने की तैयारी है?
भारत अपनी सहिष्णुता के लिए जाना जाता है, लेकिन इसे कमजोरी समझने की भूल की जा रही है। एक सोची-समझी रणनीति के तहत बहुसंख्यक समाज की मान्यताओं को आहत किया जा रहा है। चाहे वह खान-पान के माध्यम से हो या लव-जिहाद और धर्मांतरण के जरिए, मकसद सिर्फ एक ही नजर आता है—भारत की सनातन संस्कृति को भीतर से खोखला करना।
सवाल यह है कि आखिर यह सिलसिला कब थमेगा? क्या प्रशासन और सरकारें इन कट्टरपंथियों पर नकेल कसने में नाकाम साबित हो रही हैं?
रोहतास की यह घटना एक अलार्म (Warning) है। अगर आज हम चुप रहे, तो कल यह हमारे घरों के भीतर तक पहुँच जाएगा। प्रशासन को चाहिए कि वह रामडीह मामले की निष्पक्ष जांच करे और जो भी इस ‘धर्म भ्रष्ट’ करने के खेल में शामिल है, उसे ऐसी सजा दी जाए कि दोबारा कोई ऐसी हिमाकत न कर सके।
आपकी क्या राय है?
क्या आपको भी लगता है कि यह एक सोची-समझी साजिश है? क्या प्रशासन इन कट्टरपंथियों को रोकने में सक्षम है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें और इस लेख को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।