चीन, रूस और ईरान का बड़ा एक्शन: ट्रम्प के खिलाफ साउथ अफ्रीका में नेवल ड्रिल | Ankit Awasthi Sir’s Analysis

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Ankit Awasthi Sir's Analysis

दुनिया की जियोपॉलिटिक्स (Geopolitics) में एक नया और गंभीर मोड़ आया है। चीन, रूस, ईरान और साउथ अफ्रीका ने मिलकर अटलांटिक महासागर में अपनी ताकत दिखानी शुरू कर दी है। साउथ अफ्रीका के केप टाउन (Cape Town) के पास इन देशों के जंगी जहाज (Warships) इकट्ठा हुए हैं।

हाल ही में अंकित अवस्थी सर ने अपने वीडियो में इसका विस्तार से विश्लेषण किया है। उनका कहना है कि यह नेवल ड्रिल, जिसका नाम “विल फॉर पीस 2026” (Will for Peace 2026) रखा गया है, सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और अमेरिका की नीतियों के खिलाफ एक मोर्चा है।

​​1. विल फॉर पीस 2026: क्या है यह नेवल ड्रिल?

इस साल पहली बार ब्रिक्स प्लस (BRICS Plus) देश (भारत और ब्राजील को छोड़कर) एक संयुक्त नौसैनिक अभ्यास कर रहे हैं। इस ड्रिल का मुख्य मकसद अटलांटिक महासागर में अपने व्यापारिक रास्तों (Trade Routes) को सुरक्षित करना है।

वीडियो विश्लेषण के मुताबिक:

  • यह अभ्यास साउथ अफ्रीका के केप टाउन और साइमन्स टाउन (Simon’s Town) के पास हो रहा है।
  • ​इसमें रूस, चीन, ईरान और साउथ अफ्रीका की नौसेनाएं हिस्सा ले रही हैं।
  • ​इस ड्रिल को करने का मुख्य कारण यह डर है कि अमेरिका भविष्य में इनके जहाजों को रोक सकता है।

2. इन देशों ने अमेरिका के खिलाफ मोर्चा क्यों खोला?

अंकित अवस्थी सर ने बताया कि पिछले कुछ समय में अमेरिका ने अटलांटिक ओशन में कई कार्रवाई की हैं:

  • जहाजों को रोकना: अमेरिका ने ईरान के ‘बेला 1’ जहाज और रूस के कई जहाजों को वेनेजुएला जाने से रोका था। अमेरिका ने एक रूसी जहाज को “शैडो फ्लीट” (Shadow Fleet) बताकर जब्त भी कर लिया था।
  • ट्रेड रूट का डर: चीन और रूस को डर है कि अगर अमेरिका ने ‘केप ऑफ गुड होप’ (Cape of Good Hope) वाला रास्ता ब्लॉक कर दिया, तो उनका यूरोप और बाकी दुनिया से व्यापार रुक जाएगा।
  • ट्रम्प का डर: डोनाल्ड ट्रम्प के आक्रामक रवैये और ईरान में सत्ता परिवर्तन (Regime Change) की कोशिशों ने इन देशों को एक साथ आने पर मजबूर कर दिया है।

​​3. साउथ अफ्रीका और ट्रम्प का टकराव

​​​साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और डोनाल्ड ट्रम्प के रिश्ते अच्छे नहीं हैं। ट्रम्प ने पहले रामफोसा की बेइज्जती की थी और अब G20 मीटिंग्स को लेकर भी दोनों देशों में तनाव है। साउथ अफ्रीका को लगता है कि अमेरिका अगला निशाना उन्हें बना सकता है, इसलिए वह रूस और चीन के साथ अपना सैन्य गठबंधन मजबूत कर रहा है।

4. भारत इस ड्रिल में शामिल क्यों नहीं है?

  • गुटनिरपेक्ष नीति (Non-Aligned Policy): भारत कभी भी किसी “सैन्य गठबंधन” (Military Alliance) का हिस्सा नहीं बनता। चाहे वह अमेरिका का ‘नाटो’ (NATO) हो या रूस-चीन का यह नया ग्रुप।
  • एंटी-वेस्ट नहीं है भारत: भारत ब्रिक्स को एक आर्थिक समूह (Economic Group) मानता है, अमेरिका विरोधी समूह नहीं। भारत अपने रिश्ते अमेरिका के साथ खराब नहीं करना चाहता।
  • रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy): भारत अपनी लड़ाई खुद लड़ता है और किसी ग्रुप में शामिल होकर किसी तीसरे देश (जैसे अमेरिका) से दुश्मनी मोल नहीं लेना चाहता।

यह नेवल ड्रिल दुनिया को दिखा रही है कि अमेरिका के खिलाफ एक नया धड़ा (Faction) तैयार हो रहा है। जहां रूस, चीन और ईरान खुलकर अमेरिका को चुनौती दे रहे हैं, वहीं भारत ने समझदारी दिखाते हुए अपनी “रणनीतिक स्वायत्तता” बनाए रखी है और खुद को इस विवाद से दूर रखा है।

वीडियो स्रोत (Credit):

इस आर्टिकल की पूरी जानकारी अंकित अवस्थी सर के वीडियो विश्लेषण पर आधारित है। आप पूरा वीडियो नीचे दिए गए लिंक पर देख सकते हैं:

वीडियो टाइटल: Finally! China & Russia Opens Front Against Trump | World Politics Analysis

चैनल: Apni Pathshala – Civil Services

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