अफसरों की नाक के नीचे ‘गायब’ हो गई 21 एकड़ जमीन, सच्चाई जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे

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मुजफ्फरपुर (बिहार): बिहार में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और भू-माफियाओं की सक्रियता का एक बड़ा मामला सामने आया है। मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर अंचल में प्रशासन की नाक के नीचे 21 एकड़ सरकारी जमीन को कागजों में हेरफेर कर निजी (रैयती) घोषित कर दिया गया। ताज्जुब की बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारी ‘सोते’ रहे।

21 acres government land scam in Muzaffarpur Meenapur block Bhomi News Live

क्या है पूरा मामला?

मामला मीनापुर अंचल के मदारीपुर कर्ण मौजे का है। यहाँ करीब 21 एकड़ सरकारी जमीन, जो कभी खतियान में दर्ज थी, उसे धीरे-धीरे 150 से अधिक लोगों के नाम पर दर्ज (जमाबंदी) कर दिया गया। शुरुआत एक-दो नामों से हुई और देखते ही देखते करोड़ों की सरकारी जमीन पर निजी मालिकाना हक जता दिया गया। यहाँ तक कि इस जमीन पर कई मकान भी बन चुके हैं।

एक युवक की सजगता ने खोली पोल

इस बड़े भूमि घोटाले का खुलासा गांव के ही एक युवक अमरेंद्र कुमार ने किया। अमरेंद्र ने खुद अनजाने में इसी जमीन का एक हिस्सा (29 डिसमिल) खरीदा था। जब उन्हें पता चला कि यह जमीन सरकारी है, तो उन्होंने पीछे हटने के बजाय व्यवस्था को सुधारने की ठानी।

उन्होंने लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम (Public Grievance Redressal Act) का सहारा लिया और लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी।

DM का सख्त एक्शन

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी (DM) प्रणव कुमार ने सख्त रुख अपनाया है।

  • BLDR एक्ट के तहत कार्रवाई: DM ने करोड़ों की इस जमीन को वापस सरकारी खाते में लाने के लिए डीसीएलआर (DCLR) पूर्वी को बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम (BLDR Act) के तहत कार्रवाई का आदेश दिया है।
  • रिपोर्ट में खुलासा: अपर समाहर्ता की जांच में पाया गया कि कैडस्ट्रल सर्वे में यह जमीन सरकारी थी, लेकिन रिविजनल सर्वे के बाद भू-माफियाओं और भ्रष्ट कर्मचारियों की मिलीभगत से इसे निजी व्यक्तियों के नाम कर दिया गया।

मुख्य बिंदु:

  • स्थान: मदारीपुर कर्ण, मीनापुर अंचल, मुजफ्फरपुर।
  • कुल जमीन: 21 एकड़।
  • प्रभावित पक्ष: 150 से अधिक अवैध जमाबंदी।
  • कानूनी जरिया: लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत द्वितीय अपील।

निष्कर्ष: यह मामला दर्शाता है कि यदि आम नागरिक जागरूक हो और सूचना के अधिकार या लोक शिकायत जैसे कानूनों का सही इस्तेमाल करे, तो बड़े से बड़े भ्रष्टाचार को उजागर किया जा सकता है। अब देखना यह है कि प्रशासन कितनी जल्दी इस जमीन को वापस सरकारी कब्जे में लेता है और दोषी अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है।

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