Home Blog Page 11

लौकहा: हाजी मो. हामिद रजा की पहल पर फ्री मेडिकल कैंप आयोजित, डॉ. अलख ने किया सैकड़ों मरीजों का मुफ्त इलाज

लौकहा (मधुबनी): जनसेवा की मिसाल पेश करते हुए लौकहा के प्रमुख समाजसेवी हाजी मो. हामिद रजा के सौजन्य से एक दिवसीय निःशुल्क चिकित्सा शिविर (Free Medical Camp) का सफल आयोजन किया गया। यह शिविर नूरी मस्जिद के पास स्थित उनके निजी आवास ‘आशियाना भवन’ में संपन्न हुआ।

​डॉ. अलख ने दी अपनी विशेषज्ञ सेवाएं

इस कैंप में क्षेत्र के सुप्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. अलख ने अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने कैंप में आए मरीजों की स्वास्थ्य जांच की और उन्हें उचित परामर्श दिया। डॉ. अलख की विशेषज्ञता का लाभ उठाने के लिए सुबह से ही लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

निःशुल्क जांच के साथ मुफ्त दवाइयों का वितरण

इस मेडिकल कैंप की सबसे खास बात यह रही कि यहाँ परामर्श के साथ-साथ मरीजों को मुफ्त दवाइयां (Free Medicines) भी वितरित की गईं। हाजी मो. हामिद रजा के इस प्रयास से उन गरीब परिवारों को बड़ी राहत मिली, जो आर्थिक कारणों से बेहतर इलाज और महंगी दवाइयां खरीदने में असमर्थ थे।

समाजसेवी हाजी मो. हामिद रजा का संकल्प

आयोजन के बारे में बात करते हुए हाजी मो. हामिद रजा ने कहा कि, “इंसानियत की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव को देखते हुए हमने डॉ. अलख के सहयोग से यह छोटा सा प्रयास किया है ताकि जरूरतमंदों को उनके घर के पास ही बेहतर इलाज मिल सके।”

स्थानीय लोगों में खुशी की लहर

​नूरी मस्जिद के पास आयोजित इस कैंप में लौकहा और आसपास के गांवों से आए बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों ने स्वास्थ्य लाभ लिया। स्थानीय ग्रामीणों ने हाजी मो. हामिद रजा और डॉ. अलख के इस नेक कार्य की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज के पिछड़े तबके को नई उम्मीद मिलती है।

स्वस्थ जीवन के 100 अनमोल नियम: आयुर्वेद का खजाना (100 Ayurveda Tips for Healthy Life)

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अपनी जड़ों और आयुर्वेद के उन नियमों को भूलते जा रहे हैं जो हमारे पूर्वजों को स्वस्थ रखते थे। नीचे दिए गए नियम न केवल शरीर को रोगों से बचाते हैं, बल्कि मन को भी शांत और प्रसन्न रखते हैं।

1. रोग, दोष और त्रिदोष (वात, पित्त, कफ)

आयुर्वेद के अनुसार शरीर तीन प्रकृतियों पर आधारित है। इनके असंतुलन से ही बीमारियाँ होती हैं:

  • वात (वायु): इसकी अधिकता से नींद कम आती है और शरीर में दर्द रहता है। मालिश से वात शांत होता है।
  • पित्त (गर्मी): पित्त के असर में एकाग्रता और पढ़ाई अच्छी होती है। निद्रा और गाय का घी पित्त को शांत करते हैं।
  • कफ: कफ के प्रभाव में व्यक्ति में प्रेम भाव अधिक होता है, लेकिन आलस्य भी बढ़ता है। आँखों के अधिकांश रोग (मोतियाबिंद, ग्लूकोमा) कफ के कारण होते हैं।

2. खान-पान के सुनहरे नियम

  • पानी पीने का सही तरीका: कभी भी खड़े होकर पानी न पिएं, इससे किडनी और जोड़ों पर बुरा असर पड़ता है। ताम्बे के बर्तन का पानी सुबह नंगे पाँव खड़े होकर न पिएं।
  • बर्तनों का महत्व: लोटे का सतही तनाव (Surface Tension) कम होता है, जो स्वास्थ्य के लिए शुभ है। गिलास के बजाय लोटे का पानी प्राथमिकता दें।
  • भोजन का समय: सुबह के नाश्ते में फल, दोपहर में दही और रात को दूध का सेवन उत्तम है। रात में भारी प्रोटीन (दाल, राजमा, पनीर) से बचें।
  • चीनी का त्याग: चीनी में सल्फर होता है जो शरीर के लिए हानिकारक है। गुड़ और शहद का प्रयोग करें क्योंकि इनमें प्राकृतिक फ्रुक्टोज होता है जो आसानी से पच जाता है।

3. कमियों से होने वाले रोग और उपचार

  • लकवा: शरीर में सोडियम की कमी के कारण।
  • दमा/अस्थमा: सल्फर की कमी के कारण। नारियल का सेवन इसमें लाभकारी है।
  • कूबड़ निकलना: फास्फोरस की कमी।
  • जुकाम: सुबह जूस पीते समय उसमें काला नमक और अदरक जरूर मिलाएं।
  • मिर्गी: दौरे के समय अमोनिया या चूने की गंध सुंघाना फायदेमंद होता है।

4. दैनिक दिनचर्या और वास्तु

  • जागने का समय: प्रातः 4 बजे जागना सर्वोत्तम है। जो सूर्योदय के बाद उठते हैं, उनकी बड़ी आँत मल को चूसने लगती है, जिससे बीमारियाँ बढ़ती हैं।
  • सोने की दिशा: हमेशा दायीं करवट से उठें। पेट के बल सोने से हर्निया और प्रोस्टेट जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • स्नान: हाई बीपी में नहाने के पानी में थोड़ा नमक मिलाएं। स्नान से पूर्व पेशाब जाने से रक्तचाप नियंत्रित रहता है।

5. विशेष आयुर्वेदिक सुझाव

  • चूना: यह बालों को मजबूत करता है, आंखों की रोशनी बढ़ाता है और हेपेटाइटिस (A से E) में भी सहायक है।
  • त्रिफला: इसे ‘अमृत’ माना गया है जो वात, पित्त और कफ तीनों को संतुलित करता है।
  • लार (Saliva): यह दुनिया की सबसे महंगी दवा है, इसे व्यर्थ न थूकें। सुबह की बासी लार आंखों और त्वचा के लिए गुणकारी है।
  • RO वाटर: RO का पानी अपनी गुणवत्ता स्थिर नहीं रखता, संभव हो तो कुएं या बारिश का शुद्ध पानी पिएं।

6. मानसिक स्वास्थ्य और स्वभाव

चिंता, क्रोध और ईर्ष्या शरीर में गलत हार्मोन्स पैदा करते हैं, जिससे कब्ज, थायराइड और रक्तचाप की समस्या होती है। आयुर्वेद मानता है कि जो बीमारी अंदर से आती है, उसका समाधान भी अंदर (जीवनशैली सुधार) से ही होना चाहिए।

निष्कर्ष

प्रकृति ने हमें स्वस्थ रहने के सभी साधन दिए हैं। यदि हम अपनी दिनचर्या में इन छोटे-छोटे बदलावों को अपनाते हैं, तो हम न केवल बीमारियों से बच सकते हैं बल्कि एक ऊर्जावान जीवन जी सकते हैं।

“योग, भोग और रोग ये तीन अवस्थाएं हैं। चुनाव आपका है कि आप किस मार्ग पर चलना चाहते हैं।”


अस्वीकरण: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी गंभीर बीमारी की स्थिति में विशेषज्ञ चिकित्सक या आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य लें।