पटना विश्वविद्यालय में प्रतिभा का कत्ल! गोल्ड मेडलिस्ट टॉपर को ही कर दिया PhD से बाहर, आखिर किसके इशारे पर हुआ यह खेल?

0

शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले पटना विश्वविद्यालय (Patna University) से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शैक्षणिक शुचिता और प्रशासन की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला पटना लॉ कॉलेज के एलएलएम (LLM) टॉपर पवन कुमार यादव से जुड़ा है, जिन्हें विश्वविद्यालय ने खुद गोल्ड मेडल से नवाजा, लेकिन जब पीएचडी (PhD) नामांकन की बारी आई, तो उन्हें सिस्टम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

कौन हैं पवन कुमार यादव?

रोहतास जिले के रहने वाले पवन कुमार यादव एक मेधावी छात्र हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की और उसके बाद पटना लॉ कॉलेज के सत्र 2022-24 में 80.19% अंकों के साथ पूरे विभाग में टॉप किया। दीक्षांत समारोह की तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि तत्कालीन राज्यपाल डॉ. आरिफ मोहम्मद खान और कुलपति प्रो. अजय कुमार सिंह ने उन्हें स्वर्ण पदक (Gold Medal) और उपाधि देकर सम्मानित किया था।

क्या है दांधली का पूरा आरोप?

हैरानी की बात यह है कि जो छात्र अपने विभाग का गोल्ड मेडलिस्ट है और नेट (NET) क्वालीफाइड भी है, उसे ही पीएचडी नामांकन लिस्ट से बाहर कर दिया गया। आरोप है कि एलएलएम विभाग और पटना विश्वविद्यालय ने नामांकन प्रक्रिया में भारी अनियमितता बरती है। शिकायत के मुताबिक, पवन की ही कैटेगरी में उनसे काफी कम प्रतिशत अंक वाले छात्रों का नामांकन ले लिया गया, लेकिन टॉपर को दरकिनार कर दिया गया।

अब सवाल यह उठता है कि क्या यह महज एक तकनीकी खामी है या फिर इसके पीछे जातीय दुर्भावना और प्रतिभा का गला घोंटने की कोई गहरी साजिश है? आखिर एक स्वर्ण पदक विजेता छात्र को अपने हक के लिए दर-दर क्यों भटकना पड़ रहा है?

गोल्ड मेडलिस्ट छात्र के साथ इस तरह का व्यवहार न केवल छात्र का मनोबल तोड़ता है, बल्कि पूरे विश्वविद्यालय की साख पर धब्बा लगाता है। भूमि न्यूज़ लाइव इस मामले की तह तक जाएगा और जब तक पवन को न्याय नहीं मिलता, हम इस खबर को प्रमुखता से उठाते रहेंगे।

बने रहिए भूमि न्यूज़ लाइव के साथ, सच्चाई हम दिखाएंगे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here