बड़ी खबर: सुपौल के मरौना प्रखंड में होगा सड़कों और पुलों का जाल, उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने दी हरी झंडी

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सुपौल/पटना: बिहार के उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने सुपौल जिले के मरौना प्रखंड की जनता को एक बड़ी सौगात दी है। उपमुख्यमंत्री के निर्देश पर उनके आप्त सचिव वीरेंद्र कुमार ने ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) को मरौना प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में 11 महत्वपूर्ण सड़कों और पुलों के निर्माण के लिए पत्र जारी कर त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

इन प्रमुख योजनाओं को मिली मंजूरी:

​जारी किए गए आधिकारिक पत्र (पत्रांक 172, दिनांक 27/04/2026) के अनुसार, जनहित में निम्नलिखित कार्यों को अति आवश्यक बताया गया है:

  1. तिलयुगा बलान नदी पर पुल: मरौना-निर्मली पथ के योदराही वार्ड नंबर-02 से उत्तर तिलयुगा बलान नदी पर एच.एल. ब्रिज (HL Bridge) और पहुंच पथ का निर्माण।
  2. भलुआही सुरक्षा बांध से कुसगौल: भलुआही सुरक्षा बांध से कुसगौल होते हुए कबरी बांध तक सड़क और पुल का निर्माण।
  3. 8 किलोमीटर लंबी सड़क: मरौना उत्तर के कारारही वार्ड नंबर 10 से मुख्य सड़क राम विलास सिंह के घर से होते हुए कमरैल सीमा तक सड़क निर्माण।
  4. लालपुर से सोहनपुर मार्ग: निर्मली-मरौना मुख्य मार्ग पर लालपुर से सोहनपुर को जोड़ने वाली सड़क में तिलयुगा नदी पर पुल का निर्माण।
  5. महादलित टोलों का जुड़ाव: परसौनी वार्ड नंबर 0-10 महादलित टोला से पंचायत सरकार भवन होते हुए मंगासिहौल वार्ड नंबर 12 तक सड़क निर्माण।
  6. गंनौरा और मधुबनी सीमा: गंनौरा कोरयानी टोला वाया मधुबनी सीमा सड़क में बलान नदी पर पुल का निर्माण।
  7. गंनौरा से महोलिया टोला: गंनौरा वार्ड 04 मुख्य सड़क से महादलित बस्ती और IOCL गैस गोदाम होते हुए महोलिया टोला तक पक्की सड़क।
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विकास की ओर बढ़ते कदम

​इस पत्र के माध्यम से उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण इलाकों में कनेक्टिविटी सुधारना सरकार की प्राथमिकता है। इन पुलों और सड़कों के बन जाने से मरौना प्रखंड के हजारों ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा होगी, खासकर बरसात के समय में तिलयुगा और बलान नदी के कारण होने वाली परेशानियां खत्म होंगी।

​ग्रामीण कार्य विभाग के नोडल ऑफिसर ने भी इस पर अपनी मुहर लगा दी है और संबंधित कार्यपालक अभियंता को आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रेषित कर दिया गया है।

पटना विश्वविद्यालय में प्रतिभा का कत्ल! गोल्ड मेडलिस्ट टॉपर को ही कर दिया PhD से बाहर, आखिर किसके इशारे पर हुआ यह खेल?

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शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले पटना विश्वविद्यालय (Patna University) से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शैक्षणिक शुचिता और प्रशासन की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला पटना लॉ कॉलेज के एलएलएम (LLM) टॉपर पवन कुमार यादव से जुड़ा है, जिन्हें विश्वविद्यालय ने खुद गोल्ड मेडल से नवाजा, लेकिन जब पीएचडी (PhD) नामांकन की बारी आई, तो उन्हें सिस्टम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

कौन हैं पवन कुमार यादव?

रोहतास जिले के रहने वाले पवन कुमार यादव एक मेधावी छात्र हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की और उसके बाद पटना लॉ कॉलेज के सत्र 2022-24 में 80.19% अंकों के साथ पूरे विभाग में टॉप किया। दीक्षांत समारोह की तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि तत्कालीन राज्यपाल डॉ. आरिफ मोहम्मद खान और कुलपति प्रो. अजय कुमार सिंह ने उन्हें स्वर्ण पदक (Gold Medal) और उपाधि देकर सम्मानित किया था।

क्या है दांधली का पूरा आरोप?

हैरानी की बात यह है कि जो छात्र अपने विभाग का गोल्ड मेडलिस्ट है और नेट (NET) क्वालीफाइड भी है, उसे ही पीएचडी नामांकन लिस्ट से बाहर कर दिया गया। आरोप है कि एलएलएम विभाग और पटना विश्वविद्यालय ने नामांकन प्रक्रिया में भारी अनियमितता बरती है। शिकायत के मुताबिक, पवन की ही कैटेगरी में उनसे काफी कम प्रतिशत अंक वाले छात्रों का नामांकन ले लिया गया, लेकिन टॉपर को दरकिनार कर दिया गया।

अब सवाल यह उठता है कि क्या यह महज एक तकनीकी खामी है या फिर इसके पीछे जातीय दुर्भावना और प्रतिभा का गला घोंटने की कोई गहरी साजिश है? आखिर एक स्वर्ण पदक विजेता छात्र को अपने हक के लिए दर-दर क्यों भटकना पड़ रहा है?

गोल्ड मेडलिस्ट छात्र के साथ इस तरह का व्यवहार न केवल छात्र का मनोबल तोड़ता है, बल्कि पूरे विश्वविद्यालय की साख पर धब्बा लगाता है। भूमि न्यूज़ लाइव इस मामले की तह तक जाएगा और जब तक पवन को न्याय नहीं मिलता, हम इस खबर को प्रमुखता से उठाते रहेंगे।

बने रहिए भूमि न्यूज़ लाइव के साथ, सच्चाई हम दिखाएंगे।

बिहार में पोर्टफोलियो का बंटवारा: सम्राट चौधरी सुपर सीएम की भूमिका में, विजय चौधरी और बिजेन्द्र यादव को मिली बड़ी जिम्मेदारी

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पटना: बिहार सरकार ने नई कैबिनेट के बीच विभागों का बँटवारा कर दिया है। बुधवार, 15 अप्रैल 2026 को जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शासन पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखते हुए गृह, सामान्य प्रशासन और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों सहित कुल 29 मंत्रालयों की जिम्मेदारी अपने पास रखी है।

​राज्य में दो उप-मुख्यमंत्री बनाए गए हैं— विजय कुमार चौधरी और बिजेन्द्र प्रसाद यादव। राज्यपाल के आदेश से जारी इस अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि वे सभी विभाग जो किसी अन्य मंत्री को आवंटित नहीं हैं, वे मुख्यमंत्री के अधीन रहेंगे।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास भारी-भरकम पोर्टफोलियो

​मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सबसे अधिक विभागों की जिम्मेदारी संभाली है। उनके पास गृह, सामान्य प्रशासन, मंत्रिमंडल सचिवालय, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, पथ निर्माण, नगर विकास एवं आवास, पंचायती राज, और राजस्व एवं भूमि सुधार जैसे जनता से सीधे जुड़े विभाग रहेंगे। इसके अलावा उद्योग, खान एवं भूतत्व, और पर्यटन जैसे विभाग भी उन्हीं के पास हैं।

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उप-मुख्यमंत्रियों को मिली अहम जिम्मेदारी

​कैबिनेट में शक्ति संतुलन बनाए रखते हुए दोनों उप-मुख्यमंत्रियों को भी महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो दिए गए हैं:

  • विजय कुमार चौधरी (उप-मुख्यमंत्री): इन्हें जल संसाधन, संसदीय कार्य, भवन निर्माण, परिवहन, ग्रामीण विकास और उच्च शिक्षा जैसे 10 विभागों की कमान सौंपी गई है।
  • बिजेन्द्र प्रसाद यादव (उप-मुख्यमंत्री): इन्हें वित्त, ऊर्जा, योजना एवं विकास, मद्य निषेध, और समाज कल्याण सहित कुल 8 विभागों का जिम्मा मिला है।

प्रशासनिक आदेश जारी

​यह आदेश भारत के संविधान के अनुच्छेद 166(3) के तहत राज्यपाल की सहमति के बाद मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत द्वारा जारी किया गया है। सरकार के इस कदम से स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी विकास और कानून-व्यवस्था से जुड़े प्रमुख मोर्चों का नेतृत्व स्वयं करेंगे, जबकि अनुभवी साथियों को बुनियादी ढांचे और आर्थिक नियोजन की जिम्मेदारी दी गई है।

राजभवन में जब जय-वीरू की जोड़ी ने बटोरी सुर्खियां, बिजय चौधरी बने गूगल मैप और मिल गई नजरें

Bijendra Yadav and Nitish Kumar smiling at Raj Bhavan Patna

पटना। बिहार की राजनीति में 14 अप्रैल 2026 का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। एक तरफ नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर सबको चौंकाया, तो दूसरी तरफ राजभवन में हुए शपथ ग्रहण समारोह में दोस्ती और भरोसे का एक ऐसा वीडियो सामने आया जिसने सबका दिल जीत लिया। यह कहानी है बिजेंद्र प्रसाद यादव और नीतीश कुमार की, जिसमें विजय कुमार चौधरी ने तड़का लगा दिया।

शपथ ली, हस्ताक्षर किए… फिर शुरू हुई तलाश

सफेद कुर्ते-पाजामे में सजे बिजेंद्र प्रसाद यादव जैसे ही मंच पर शपथ लेने पहुंचे, पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। शपथ पूरी हुई, उन्होंने कागजों पर दस्तखत किए और फिर जो हुआ वह किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था। विजेंद्र बाबू अपनी जगह पर ठिठक गए। वे अपनी गर्दन घुमाकर इधर-उधर देखने लगे। प्रोटोकॉल कहता है कि शपथ के बाद मुख्यमंत्री का अभिवादन करना होता है, लेकिन विजेंद्र यादव को भीड़ में अपने पुराने दोस्त नीतीश कुमार नजर नहीं आ रहे थे।

विजय चौधरी का ‘इशारा’ और खिलखिला उठे नीतीश

बिजेंद्र यादव की यह बेचैनी वहां पास ही बैठे विजय कुमार चौधरी की नजरों से नहीं छुपी। विजय चौधरी ने तुरंत मोर्चा संभाला और मुस्कुराते हुए इशारों-इशारों में बिजेंद्र बाबू को रास्ता दिखाया। उन्होंने हाथ से इशारा किया— “साहब वहां बैठे हैं!”

विजय चौधरी का इशारा मिलते ही बिजेंद्र यादव की नजरें नीतीश कुमार से जा टकराईं। जैसे ही नजर से नजर मिली, दोनों नेताओं के चेहरे पर एक ऐसी चमक और मुस्कान आई जैसे सालों बाद दो बिछड़े दोस्त मिले हों। बिजेंद्र यादव ने प्रणाम किया और नीतीश कुमार ने भी बड़े प्यार से उनका अभिवादन स्वीकार किया।

दोस्ती की वो केमिस्ट्री, जो कुर्सी से ऊपर है

बिहार की राजनीति में नीतीश, बिजेंद्र और विजय चौधरी की यह तिकड़ी दशकों पुरानी है। सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि:

  • बिजेंद्र यादव: वो अटूट विश्वास जो नीतीश के साथ हर तूफान में खड़ा रहा।
  • विजय चौधरी: वो संकटमोचक जो हमेशा पुल का काम करते हैं।

क्यों वायरल हो रहा है यह पल?

राजनीति अक्सर कड़वाहट और दांव-पेंच के लिए जानी जाती है। ऐसे में राजभवन के गंभीर माहौल के बीच यह अजब-गजब वाकया बताता है कि पद आते-जाते रहते हैं, लेकिन जो साथ संघर्षों में बना रहता है, वही असली दौलत है।

​Elected बनाम Selected: तेजस्वी यादव का सम्राट चौधरी पर तीखा हमला, विकास के आंकड़ों पर घेरा

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पटना: बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के साथ ही वार-पलटवार का दौर तेज हो गया है। बीजेपी नेता सम्रट चौधरी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक बेहद तल्ख और कटाक्षपूर्ण पोस्ट साझा की है। तेजस्वी ने सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनने पर बधाई तो दी, लेकिन उनके कार्यकाल की चुनौतियों और बिहार की मौजूदा स्थिति को लेकर सरकार को आईना दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

निर्वाचित और चयनित का राजनीतिक खेल

​तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट की शुरुआत में ही नीतीश कुमार को Elected (निर्वाचित) और सम्राट चौधरी को Selected (चयनित) मुख्यमंत्री बताकर बड़ा राजनीतिक कटाक्ष किया। उन्होंने सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार को गद्दी से उतारने की उनकी प्रतिज्ञा पूर्ण करने पर बधाई दी, लेकिन साथ ही यह भी संकेत दिया कि वे जनता के सीधे जनादेश से नहीं बल्कि गठबंधन की जोड़-तोड़ से इस कुर्सी तक पहुँचे हैं।

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नीति आयोग के आंकड़ों से सरकार को घेरा

​तेजस्वी ने बिहार के पिछड़ेपन का मुद्दा उठाते हुए 21 वर्षों के NDA शासन पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने नए मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि बिहार आज भी कई राष्ट्रीय मानकों पर सबसे निचले पायदान पर है। तेजस्वी ने अपने पोस्ट में निम्नलिखित प्रमुख मुद्दों का जिक्र किया:

  • शिक्षा और स्वास्थ्य: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था का भारी अभाव।
  • अर्थव्यवस्था: निवेश की कमी, आय में गिरावट और खपत के घटते आंकड़े।
  • बेरोजगारी और पलायन: युवाओं को नौकरी न मिलना और राज्य से लगातार होता पलायन।
  • विधि व्यवस्था: राज्य में ध्वस्त हो चुकी कानून व्यवस्था और असुरक्षा का माहौल।

‘बिहारी स्वाभिमान’ को बताया सर्वोच्च

​तेजस्वी यादव ने सम्राट चौधरी को सचेत करते हुए कहा कि वे “बाहरियों के दिशा-निर्देशों” के आगे बिहारियों के स्वाभिमान को गिरवी न रखें। उनका इशारा स्पष्ट रूप से केंद्र सरकार के हस्तक्षेप की ओर था। उन्होंने आशा व्यक्त की कि मुख्यमंत्री बिहार की उन्नति और शांति के लिए सशक्त तरीके से काम करेंगे।

प्रादुर्भाव से समाजवादी श्री सम्राट चौधरी जी को पुनः हार्दिक शुभकामनाएं।तेजस्वी यादव

सियासी गलियारों में हलचल

​सम्राट चौधरी, जिन्होंने कभी नीतीश कुमार को सत्ता से हटाने तक अपना साफा (मुरेठा) न खोलने की कसम खाई थी, अब खुद मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन हैं। ऐसे में तेजस्वी यादव का यह पोस्ट न केवल एक चुनौती है, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए विपक्ष के एजेंडे की एक झलक भी है। अब देखना यह होगा कि नई सरकार इन तीखे सवालों का जवाब अपने काम से किस तरह देती है।

बिहार की सियासत में सम्राट का राज: RJD से सफर शुरू कर कैसे बिहार के 24वें मुख्यमंत्री बने सम्राट चौधरी?

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पटना: बिहार की राजनीति में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। कद्दावर नेता और भाजपा के फायरब्रैंड चेहरे सम्राट चौधरी अब बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की कमान संभालने जा रहे हैं। एक समय लालू यादव की ‘पाठशाला’ से राजनीति का ककहरा सीखने वाले सम्राट का मुख्यमंत्री की कुर्सी तक का सफर बेहद दिलचस्प और संघर्षपूर्ण रहा है।

1. विरासत में मिली सियासत, पिता रहे दिग्गज नेता

​सम्राट चौधरी का जन्म 16 नवंबर 1968 को हुआ। उन्हें राजनीति विरासत में मिली है। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार की राजनीति के वह दिग्गज नाम हैं, जिनकी गिनती कभी लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के बेहद करीबियों में होती थी। सम्राट ने अपने पिता के सानिध्य में ही राजनीति की बारीकियां सीखीं, लेकिन आज वे उसी लालू परिवार के सबसे प्रखर विरोधी माने जाते हैं।

2. 19 की उम्र में मंत्री और फिर बर्खास्तगी का वो चर्चित विवाद

​सम्राट चौधरी के नाम एक ऐसा रिकॉर्ड दर्ज है जो शायद ही किसी और के पास हो। 1999 में राबड़ी देवी की सरकार में उन्हें कृषि राज्य मंत्री बनाया गया था। उस समय उनकी उम्र महज 19 साल बताई गई थी।

  • विवाद: कम उम्र में मंत्री बनने पर संवैधानिक संकट खड़ा हो गया।
  • कार्रवाई: तत्कालीन राज्यपाल सूरजभान ने उम्र के दस्तावेजों में विसंगति (फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी) पाए जाने पर उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने का आदेश दिया था। स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट और सरकारी कागजों में उम्र को लेकर भारी अंतर पाया गया था।

3. विचारधाराओं का सफर: RJD से JDU और फिर भाजपा

​सम्राट चौधरी ने सत्ता के शीर्ष तक पहुँचने के लिए एक लंबी दूरी तय की है:

  • आरजेडी: राजनीति की शुरुआत लालू प्रसाद यादव की पार्टी से की।
  • जेडीयू: बाद में नीतीश कुमार के साथ आए और 2014 में जीतन राम मांझी की सरकार में मंत्री रहे।
  • भाजपा: साल 2018 में उन्होंने भाजपा का दामन थामा, जहाँ उनकी आक्रामकता ने उन्हें जल्द ही प्रदेश अध्यक्ष और फिर उपमुख्यमंत्री के पद तक पहुँचाया।

4. कर्पूरी ठाकुर के बाद रचा नया इतिहास

​बिहार की राजनीति में एक मिथक रहा है कि उपमुख्यमंत्री कभी मुख्यमंत्री नहीं बन पाता। सम्राट चौधरी ने इस मिथक को तोड़ दिया है। जननायक कर्पूरी ठाकुर के बाद सम्राट चौधरी बिहार के दूसरे ऐसे नेता हैं, जो डिप्टी सीएम से सीधे सीएम की कुर्सी तक पहुँचे हैं। यह उपलब्धि उनके बढ़ते कद और भाजपा आलाकमान के उन पर भरोसे को दर्शाती है।

5. व्यक्तिगत जीवन पर एक नज़र

  • जन्म: 16 नवंबर 1968 (वर्तमान उम्र 57 वर्ष)
  • माता-पिता: माता पार्वती देवी और पिता शकुनी चौधरी।
  • परिवार: पत्नी ममता कुमारी, एक बेटा और एक बेटी।

​सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना बिहार में ‘लव-कुश’ समीकरण और पिछड़ों की राजनीति में भाजपा की एक बड़ी जीत माना जा रहा है। अपनी ‘मुरैठा’ (पगड़ी) की कसम को लेकर चर्चा में रहने वाले सम्राट अब बिहार की विकास यात्रा को किस दिशा में ले जाते हैं, इस पर पूरे देश की नज़र रहेगी।

बिहार का सियासी समीकरण बदला: खरमास खत्म होते ही नीतीश की विदाई, जानें कौन बनेगा नया CM?

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पटना: बिहार की राजनीति के लिए आज 14 अप्रैल, 2026 का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं, जिसके बाद राज्य में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली सरकार के गठन का रास्ता साफ हो जाएगा।

आज के घटनाक्रम का पूरा शेड्यूल

​बिहार सचिवालय और राजभवन के गलियारों में हलचल तेज है। आज के कार्यक्रम कुछ इस प्रकार हैं:

  • कैबिनेट की अंतिम बैठक: सुबह 11:00 बजे नीतीश कुमार अपनी आखिरी कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
  • इस्तीफे का समय: माना जा रहा है कि दोपहर 3:30 बजे नीतीश कुमार राजभवन जाकर राज्यपाल को अपना त्यागपत्र सौंप देंगे।
  • भाजपा विधायक दल की बैठक: दोपहर 2:00 बजे भाजपा विधायकों की अहम बैठक होगी, जिसमें नए नेता के नाम पर मुहर लगेगी।
  • एनडीए की संयुक्त बैठक: शाम 4:00 बजे NDA के सभी घटक दलों की बैठक होगी, जिसमें औपचारिक रूप से नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान किया जाएगा।

कौन होगा बिहार का अगला मुख्यमंत्री?

​सूत्रों के अनुसार, भाजपा ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पर्यवेक्षक बनाकर पटना भेजा है। मुख्यमंत्री पद की रेस में ये नाम सबसे आगे हैं:

  1. सम्राट चौधरी: वर्तमान उपमुख्यमंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता।
  2. नित्यानंद राय: केंद्रीय गृह राज्य मंत्री।
  3. निशांत कुमार: नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के भी नई सरकार में उपमुख्यमंत्री के रूप में शामिल होने की प्रबल संभावना है।

कल हो सकता है शपथ ग्रहण

​नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह कल, 15 अप्रैल को सुबह 11:00 बजे आयोजित होने की संभावना है। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।

विशेष नोट: नीतीश कुमार ने हाल ही में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली है। वे अब दिल्ली की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। आज अंबेडकर जयंती और खरमास की समाप्ति के अवसर पर इस बड़े बदलाव को अंजाम दिया जा रहा है।

पटना: बापू सभागार में तेजस्वी यादव ने भरा हुंकार, कहा- पान समाज के हक और अधिकार के लिए लड़ते रहेंगे

तेजस्वी यादव पटना के बापू सभागार में पान सम्मान सह IIP स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान मंच से जनता को संबोधित करते हुए।

पटना। बिहार की राजधानी पटना के बापू सभागार में आज पान सम्मान सह IIP स्थापना दिवस कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव शामिल हुए। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए आयोजक आईपी गुप्ता को बधाई और शुभकामनाएँ दीं।

डबल इंजन सरकार पर बोला हमला

​कार्यक्रम को संबोधित करते हुए तेजस्वी यादव ने सत्ताधारी बीजेपी-जेडीयू सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि “बिहार की डबल इंजन सरकार अपने अहंकार में डूबी हुई है और पान समाज के संवैधानिक अधिकारों का हनन कर रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार वंचितों की आवाज़ दबाने का काम कर रही है।

लालू प्रसाद यादव के संघर्षों को किया याद

​तेजस्वी यादव ने राष्ट्रीय जनता दल की विचारधारा को रेखांकित करते हुए कहा कि आदरणीय लालू प्रसाद यादव जी ने हमेशा से वंचित, उपेक्षित, गरीब और उत्पीड़ित समुदायों के लिए न्याय, समता और उत्थान की लड़ाई लड़ी है। आरजेडी हमेशा से पिछड़ों और दलितों की ढाल रही है।

तांती-ततवा और पान समाज की एकजुटता पर जोर

​कार्यक्रम के दौरान तेजस्वी यादव ने पान समाज के सर्वांगीण विकास का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा:

​”हम सभी एकजुट होकर तांती-ततवा और पान समाज की उन्नति, समृद्धि और हक की लड़ाई लड़ते रहेंगे। जब तक इस समाज को उनका पूरा अधिकार नहीं मिल जाता, हमारा संघर्ष जारी रहेगा।”

प्रमुख बिंदु:

  • आयोजन: पान सम्मान सह IIP स्थापना दिवस।
  • स्थान: बापू सभागार, पटना।
  • मुख्य संदेश: पान समाज की एकजुटता और अधिकारों की रक्षा।
  • राजनीतिक संदेश: वंचितों के विकास के लिए आरजेडी प्रतिबद्ध।

​बापू सभागार में मौजूद हजारों की भीड़ ने तेजस्वी यादव के संबोधन का तालियों के साथ स्वागत किया, जो पान समाज के बीच आरजेडी की बढ़ती पैठ को दर्शाता है।

बिहार के उपभोक्ताओं के लिए खुशखबरी: 1 अप्रैल से सस्ती होगी बिजली, ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने दी जानकारी

पटना: बिहार के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। राज्य सरकार और बिहार विद्युत विनियामक आयोग (BERC) ने नए वित्तीय वर्ष में बिजली की दरों में बढ़ोतरी न करने का फैसला लिया है। ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने स्पष्ट किया है कि सरकार आम जनता पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ने देगी।

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आयोग ने खारिज किया बिजली कंपनियों का प्रस्ताव

​बिहार की बिजली कंपनियों (NBPDCL और SBPDCL) ने इस वर्ष 35 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी का प्रस्ताव आयोग के सामने रखा था। हालांकि, लंबी जनसुनवाई और उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए, आयोग के अध्यक्ष आमिर सुभानी और उनकी टीम ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

​ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव का बयान

​बिजली दरों पर प्रतिक्रिया देते हुए ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि:

​”हमारी सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के हर घर तक सस्ती और निर्बाध बिजली पहुंचे। हमने बिजली कंपनियों के घाटे की भरपाई के लिए ₹15,792 करोड़ की सब्सिडी का प्रावधान किया है ताकि आम आदमी के बिल में कोई बढ़ोतरी न हो।”

1 अप्रैल से क्या-क्या बदलेगा?

  1. स्लैब का विलय: ग्रामीण और शहरी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पहले जो दो अलग-अलग स्लैब (0-100 यूनिट और 100 से अधिक) हुआ करते थे, अब उन्हें एक कर दिया गया है।
  2. सस्ती होगी बिजली: स्लैब के एक होने से उन उपभोक्ताओं को सीधा फायदा होगा जिनकी खपत 100 यूनिट से अधिक है, क्योंकि उनके लिए प्रति यूनिट दर अब कम हो जाएगी।
  3. कृषि और कुटीर ज्योति: किसानों और ‘कुटीर ज्योति’ कनेक्शन वाले गरीब परिवारों के लिए पुरानी दरें ही प्रभावी रहेंगी।

​सब्सिडी का बढ़ता आंकड़ा

​ऊर्जा विभाग द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी में हर साल बढ़ोतरी की जा रही है, जिसका विवरण नीचे दिया गया है:

वित्तीय वर्षसब्सिडी की राशि (करोड़ में)
2023-24₹13,114 करोड़
2024-25₹15,343 करोड़
2025-26₹15,792 करोड़

ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के नेतृत्व में बिहार बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर है। 1 अप्रैल से लागू होने वाली ये नई दरें न केवल आम आदमी की जेब बचाएंगी, बल्कि राज्य की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती देंगी।

​बिजली चोरी रोकने और स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने के अभियान में भी तेजी लाई जा रही है ताकि भविष्य में दरें और भी कम की जा सकें।

बिहार में बड़ी कार्रवाई: महिला अधिकारी ₹12,000 रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, दफ्तर में ही Vigilance ने दबोचा

Nalanda BPRO Anushka arrested by Bihar Vigilance team for taking bribe

पटना/नालंदा: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘नीतीश सरकार’ के जीरो टॉलरेंस अभियान के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Investigation Bureau) ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। नालंदा जिले के नगरनौसा प्रखंड में तैनात एक महिला अधिकारी को रिश्वत लेते हुए उनके अपने ही कार्यालय कक्ष से गिरफ्तार किया गया है।

मामला क्या है?

​गिरफ्तार आरोपी की पहचान अनुष्का के रूप में हुई है, जो नगरनौसा प्रखंड (नालंदा) में प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी (BPRO) के पद पर तैनात थीं। निगरानी विभाग की टीम ने शुक्रवार (20 मार्च, 2026) को उन्हें 12,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा।

“छठ घाट निर्माण की सामग्री का भुगतान करने के बदले मांगी गई थी घूस”

शिकायतकर्ता ने खोली पोल

​खबर के अनुसार, अजय कुमार (निवासी: खपुरा, नगरनौसा) ने निगरानी विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी। अजय कुमार ने बताया कि उन्होंने छठ घाट के निर्माण के लिए निर्माण सामग्री की आपूर्ति की थी। इस सामग्री के बकाया भुगतान (Payment Clearance) के बदले में अधिकारी श्रीमती अनुष्का द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही थी।

Nalanda BPRO Anushka arrested by Bihar Vigilance team for taking bribe

कैसे बिछाया गया जाल?

​शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने मामले का सत्यापन कराया। आरोप सही पाए जाने पर पुलिस उपाध्यक्ष श्री पवन कुमार-II के नेतृत्व में एक विशेष धावादल (Raid Team) का गठन किया गया। शुक्रवार को जैसे ही अजय कुमार ने अधिकारी को रिश्वत के पैसे दिए, टीम ने उन्हें उनके चैंबर में ही दबोच लिया।

2026 में भ्रष्टाचार पर ‘निगरानी’ का प्रहार (Statistics)

​निगरानी विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल भ्रष्टाचार के खिलाफ यह 34वीं प्राथमिकी (FIR) है।

  • कुल ट्रैप केस: 29
  • रंगे हाथ गिरफ्तार अभियुक्त: 23
  • कुल बरामद राशि: ₹8,84,000

अगर आपसे भी कोई मांगे रिश्वत, तो यहाँ करें शिकायत:

​निगरानी ब्यूरो ने जनता से अपील की है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाएं। आप इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:

  • लैंडलाइन: 0612-2215030, 2215036
  • हेल्पलाइन: 0612-2215344
  • मोबाइल/व्हाट्सएप: 9473494167, 7765953261
  • ईमेल: spvig-bih@nic.in