BHU PhD Admission में ‘जातिगत’ खेल? JRF पास ST छात्र को मिले सिर्फ 3 नंबर, तो टॉपर को 100/100! इंटरव्यू के नाम पर भेदभाव का आरोप

वाराणसी/पटना: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU), जिसे शिक्षा का मंदिर कहा जाता है, एक बार फिर अपनी प्रवेश प्रक्रिया को लेकर सवालों के घेरे में है। सोशल मीडिया पर BHU के हिंदी विभाग की PhD प्रवेश परीक्षा (सत्र 2025-26) की एक लिस्ट वायरल हो रही है, जिसने पूरी एडमिशन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

इस लिस्ट में जो दिख रहा है, वह सिर्फ नंबरों का अंतर नहीं, बल्कि इंटरव्यू के नाम पर चल रहे संभावित ‘खेल’ और एक होनहार छात्र के भविष्य के साथ खिलवाड़ की कहानी बयां करता है।

क्या है पूरा मामला?

वायरल हो रही तस्वीर BHU के हिंदी विभाग के ‘JRF Mode’ में चयनित अभ्यर्थियों की सूची है। इसमें दो छात्रों के अंकों के बीच जमीन-आसमान का अंतर लोगों को हैरान कर रहा है:

  1. जनरल कैटेगरी (क्रम संख्या 1): विवेक कुमार को 100.000 इंडेक्स मार्क्स मिले हैं। यानी साक्षात्कार (Interview) में पूरे में पूरे अंक।
  2. ST कैटेगरी (क्रम संख्या 8): रवि कुमार राणा को मात्र 3.797 इंडेक्स मार्क्स मिले हैं।

JRF स्कॉलर को 100 में से सिर्फ 3 नंबर?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस छात्र (रवि कुमार राणा) ने भारत सरकार की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक JRF (Junior Research Fellowship) पास की हो, वह इंटरव्यू में इतना कमजोर कैसे हो सकता है कि उसे न्यूनतम अंक भी न मिलें?

पीड़ित पक्ष और सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों के अनुसार:

  • छात्र के पास केंद्रीय विश्वविद्यालय से मास्टर्स की डिग्री है।
  • उसने ऑल इंडिया लिखित परीक्षा पास करके मास्टर्स में दाखिला लिया था।
  • वह UGC द्वारा आयोजित JRF क्वालिफाइड है, जो उसकी अकादमिक योग्यता (Merit) का सबसे बड़ा प्रमाण है।
  • उसने फॉर्म भरने की न्यूनतम योग्यता (50% मार्क्स) भी पूरी की थी।

बावजूद इसके, इंटरव्यू पैनल ने उसे 3.797 अंक देकर रेस से बाहर कर दिया। वहीं, टॉपर को 100 में से 100 अंक मिलना किसी “चमत्कार” या “कृपा” से कम नहीं लग रहा। क्या किसी भी मौखिक परीक्षा में कोई 100% परफेक्ट हो सकता है?

इंटरव्यू बना भेदभाव का हथियार?

आरोप लगाया जा रहा है कि इंटरव्यू (साक्षात्कार) का इस्तेमाल अब सिर्फ ‘अपने लोगों’ को अंदर लाने और ‘वंचित वर्गों’ को बाहर करने के लिए किया जा रहा है।

वरिष्ठ पत्रकारों और बुद्धिजीवियों का कहना है, “जो 100 प्रतिशत दिख रहा है, हो सकता है वह किसी प्रोफेसर की वंश का चिराग हो। लेकिन सवाल यह है कि एक क्षणिक साक्षात्कार से उस शोधार्थी (ST छात्र) के साथ कम अंक देकर जो भेदभाव किया गया, उसका जिम्मेदार कौन है?”

आज भी काटे जा रहे हैं ‘एकलव्य’ के अंगूठे

इस घटना ने द्रोणाचार्य और एकलव्य की पौराणिक कथा की याद दिला दी है। अंतर बस इतना है कि अब अंगूठा नहीं मांगा जाता, बल्कि इंटरव्यू में कलम की नोक से 3 से 5 नंबर देकर भविष्य काट दिया जाता है।

अक्सर यह नैरेटिव (दुष्प्रचार) फैलाया जाता है कि आदिवासी या आरक्षित वर्ग के लोग पढ़ते नहीं हैं। लेकिन जब वे JRF निकालकर अपनी योग्यता साबित करते हैं, तो सिस्टम उन्हें इंटरव्यू रूम में हरा देता है।

UGC Act क्यों जरूरी है?

यह घटना बताती है कि UGC Act और रोस्टर नियमों का कड़ाई से पालन क्यों जरूरी है। अगर यूनिवर्सिटीज को इंटरव्यू में मनमानी करने की छूट मिलेगी, तो JRF जैसी कठिन परीक्षा पास करने वाले गरीब और आदिवासी छात्रों का प्रोफेसर बनने का सपना कभी पूरा नहीं होगा।

बड़ा सवाल: क्या BHU प्रशासन इस विसंगति (Discrepancy) की जांच करवाएगा? या फिर मेरिट की हत्या कर दी जाएगी?

Author: KARTIK KUMAR

कार्तिक कुमार(Kartik Kumar) एक समर्पित मीडिया पेशेवर हैं जो वर्तमान में Bhoomi News Live में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। डिजिटल मीडिया के बदलते स्वरूप और समाचारों के प्रति अपनी गहरी समझ के साथ, वे जनता तक सटीक, समयबद्ध और प्रभावशाली कहानियाँ पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। कार्तिक पत्रकारिता की अखंडता (Journalistic Integrity) और सिद्धांतों के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं। वे जटिल घटनाओं और आम जनता के बीच की दूरी को पाटने का प्रयास करते हैं, ताकि समुदाय स्थानीय और राष्ट्रीय विकास के प्रति जागरूक रहे। हाई-प्रेशर न्यूज़ एनवायरनमेंट में काम करते हुए भी, कार्तिक का दृष्टिकोण "पीपल-फर्स्ट" (जनता प्रथम) रहता है, जहाँ वे सत्यता और गति के बीच संतुलन बनाए रखते हैं।

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