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बड़ी खबर: झंझारपुर-लौकाहा रेल खंड की समय सारणी में बड़ा बदलाव, यहाँ देखें नया टाइम टेबल

पूर्व मध्य रेलवे (ECR) ने यात्रियों की सुविधा को देखते हुए झंझारपुर – लौकाहा बाजार – झंझारपुर पैसेंजर ट्रेनों के समय में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। यदि आप इस रूट पर नियमित यात्रा करते हैं, तो नई समय सारणी को नोट कर लें, क्योंकि पुरानी समय सारणी अब मान्य नहीं होगी।

​यह नया शेड्यूल 1 जनवरी 2026 से प्रभावी रूप से लागू कर दिया जाएगा।

​​🚂 झंझारपुर से लौकाहा बाजार (गाड़ी संख्या 55503)

झंझारपुर से सुबह के समय प्रस्थान करने वाली ट्रेन का नया समय चार्ट नीचे दिया गया है:

झंझारपुर (प्रस्थान)04:05 AM
झंझारपुर बाजार हॉल्ट04:15 AM
महरैल04:23 AM
चन्देश्वरस्थान04:33 AM
वाचस्पतली नगर04:43 AM
बड़हारा04:56 AM
सरदार वल्लभ भाई पटेल हॉल्ट05:03 AM
खुटौना05:12 AM
लौकाहा बाजार (आगमन)05:35 AM

🚂 लौकाहा बाजार से झंझारपुर (गाड़ी संख्या 55504)

लौकाहा से सुबह वापसी के लिए ट्रेन का नया समय इस प्रकार रहेगा:

लौकाहा बाजार (प्रस्थान)06:30 AM
खुटौना06:47 AM
सरदार वल्लभ भाई पटेल हॉल्ट06:55 AM
बड़हारा07:02 AM
वाचस्पतली नगर07:16 AM
चन्देश्वरस्थान07:26 AM
महरैल07:36 AM
झंझारपुर बाजार हॉल्ट07:43 AM
झंझारपुर (आगमन)08:00 AM

🚂 झंझारपुर से लौकाहा बाजार: दोपहर की ट्रेन (गाड़ी संख्या 55501)

झंझारपुर से दोपहर में प्रस्थान करने वाली ट्रेन अब नए निर्धारित समय पर चलेगी:

झंझारपुर (प्रस्थान) सरदार 02:35 PM
झंझारपुर बाजार हॉल्ट02:45 PM
महरैल02:53 PM
चन्देश्वरस्थान03:03 PM
वाचस्पतली नगर 03:17 PM
बड़हारा03:30 PM
वल्लभ भाई पटेल हॉल्ट03:37 PM
खुटौना03:42 PM
लौकाहा बाजार (आगमन) 04:05 PM

🚂 लौकाहा बाजार से झंझारपुर: शाम की ट्रेन (गाड़ी संख्या 55502)

लौकाहा बाजार से वापस झंझारपुर आने के लिए शाम की ट्रेन का समय इस प्रकार रहेगा:

लौकाहा बाजार (प्रस्थान) 05:00 PM
खुटौना05:17 PM
सरदार वल्लभ भाई पटेल हॉल्ट05:25 PM
बड़हारा05:32 PM
वाचस्पतली नगर 05:46 PM
चन्देश्वरस्थान05:56 PM
महरैल06:06 PM
झंझारपुर बाजार हॉल्ट06:13 PM
झंझारपुर (आगमन) 06:30 PM

यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट:

  1. बदलाव की वजह: रेलवे ने परिचालन संबंधी कारणों और यात्रियों की मांग को देखते हुए समय में यह सुधार किया है।
  2. प्रभावी तिथि: यह नया टाइम टेबल 01 जनवरी 2026 की सुबह से लागू हो जाएगा।
  3. कनेक्टिविटी: दोपहर की ट्रेन (55501) और शाम की वापसी ट्रेन (55502) से उन लोगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा जो बाजार या दफ्तर के काम से यात्रा करते हैं।

सलाह: किसी भी तकनीकी समस्या या अंतिम समय में बदलाव की जानकारी के लिए यात्री NTES ऐप या रेलवे के हेल्पलाइन नंबर 139 पर संपर्क कर सकते हैं।

अररिया संग्राम थाना में एसपी योगेन्द्र कुमार ने लगाया ‘जनता दरबार’, मौके पर ही हुआ शिकायतों का निपटारा

मधुबनी/झंझारपुर: बिहार के मधुबनी जिले के अररिया संग्राम थाना में पुलिस और जनता के बीच की दूरी कम करने के उद्देश्य से एक विशेष ‘संवाद कार्यक्रम‘ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता मधुबनी के पुलिस अधीक्षक (SP) योगेन्द्र कुमार ने की।

इस संवाद कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों की समस्याओं को सीधे सुनना और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को अधिक पारदर्शी बनाना था।

त्वरित न्याय: मौके पर हुआ शिकायतों का निष्पादन

एसपी योगेन्द्र कुमार ने खुद एक-एक कर फरियादियों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को विस्तार से सुना। इस दौरान भूमि विवाद, आपसी रंजिश और लंबित मामलों से जुड़ी कई शिकायतें सामने आईं।

कार्यक्रम की मुख्य बातें:

  • त्वरित कार्रवाई: एसपी ने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए और कई शिकायतों का ऑन-द-स्पॉट (त्वरित) निपटारा किया।​
  • महिला सुरक्षा: महिलाओं की शिकायतों को प्राथमिकता दी गई और उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया गया।​
  • पारदर्शिता: एसपी ने स्पष्ट किया कि पुलिसिंग में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पुलिस और जनता के बीच बेहतर समन्वय

संवाद कार्यक्रम के दौरान एसपी योगेन्द्र कुमार ने लोगों से अपील की कि वे निडर होकर अपनी बात पुलिस के सामने रखें। उन्होंने कहा कि “पुलिस जनता की सेवा के लिए है और इस तरह के संवाद कार्यक्रमों से लोगों का पुलिस पर विश्वास बढ़ता है।”

​”हमारा उद्देश्य है कि किसी भी फरियादी को न्याय के लिए भटकना न पड़े। अररिया संग्राम थाना में आयोजित इस कार्यक्रम का लक्ष्य लंबित मामलों को सुलझाना और अपराध नियंत्रण में जनता का सहयोग प्राप्त करना है।” – योगेन्द्र कुमार, एसपी मधुबनी

अधिकारियों को सख्त निर्देश

एसपी ने थाना प्रभारी और अन्य पुलिस कर्मियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि थाने में आने वाले हर व्यक्ति के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए और उनकी शिकायतों को गंभीरता से दर्ज कर जांच की जाए। उन्होंने केस डायरी और अन्य अभिलेखों के रख-रखाव का भी जायजा लिया।

निष्कर्ष:

अररिया संग्राम थाना में आयोजित इस जन संवाद कार्यक्रम की स्थानीय लोगों ने काफी सराहना की है। लोगों का मानना है कि एसपी के सीधे हस्तक्षेप से न केवल न्याय मिलने की प्रक्रिया तेज हुई है, बल्कि पुलिस के प्रति आम जन का नजरिया भी सकारात्मक हुआ है।

30 दिसंबर 1943: वह ऐतिहासिक दिन जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने पहली बार फहराया था ‘आजाद भारत’ का तिरंगा

भारत की आजादी का जिक्र आते ही हमारे जहन में 15 अगस्त 1947 की तस्वीर उभरती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आधिकारिक आजादी से करीब साढ़े तीन साल पहले ही भारत के एक हिस्से पर तिरंगा फहरा दिया गया था? वह ऐतिहासिक तारीख थी 30 दिसंबर 1943।​

आज के इस लेख में हम जानेंगे कि कैसे नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में तिरंगा फहराकर ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला दी थी।

पोर्ट ब्लेयर के ‘जिमखाना ग्राउंड’ की वह ऐतिहासिक गर्जना

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की ‘आजाद हिंद फौज’ (INA) ने जापान के सहयोग से अंडमान और निकोबार द्वीपों को अंग्रेजों के कब्जे से मुक्त करा लिया था। 30 दिसंबर 1943 को पोर्ट ब्लेयर के जिमखाना ग्राउंड (जिसे अब ‘नेताजी स्टेडियम’ कहा जाता है) में नेताजी ने पहली बार भारतीय धरती पर तिरंगा फहराया।

द्वीपों को मिला नया नाम: ‘शहीद’ और ‘स्वराज’

तिरंगा फहराने के बाद नेताजी ने केवल वहां शासन नहीं संभाला, बल्कि उन द्वीपों को भारतीय पहचान दी। उन्होंने:​

  • अंडमान द्वीप का नाम बदलकर ‘शहीद द्वीप‘ रखा।​
  • निकोबार द्वीप का नाम बदलकर ‘स्वराज द्वीप‘ रखा।

​यह इस बात का प्रतीक था कि भारत अब दासता की बेड़ियाँ तोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।

​क्यों महत्वपूर्ण है यह दिन? (Historical Significance)

  • पहली स्वतंत्र सरकार: यह भारत की पहली ‘आरजी हुकुमत-ए-आजाद हिंद’ (स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार) की घोषणा का व्यावहारिक रूप था।
  • ब्रिटिश सत्ता को चुनौती: अंडमान में तिरंगा फहराना इस बात का संकेत था कि ब्रिटिश साम्राज्य का अंत अब निकट है।
  • मनोवैज्ञानिक जीत: इस घटना ने मुख्य भूमि भारत के क्रांतिकारियों और जनता में एक नई ऊर्जा का संचार किया।

सेलुलर जेल और बलिदान की याद

नेताजी का अंडमान दौरा केवल ध्वजारोहण तक सीमित नहीं था। उन्होंने वहां की कुख्यात सेलुलर जेल (काला पानी) का भी दौरा किया, जहाँ वीर सावरकर जैसे महान क्रांतिकारियों को अमानवीय यातनाएं दी गई थीं। उन्होंने वहां शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और आजादी के संकल्प को और मजबूत किया।

निष्कर्ष:

30 दिसंबर का दिन हमें याद दिलाता है कि आजादी हमें केवल अहिंसक आंदोलनों से ही नहीं, बल्कि आजाद हिंद फौज के वीरों के रक्त और नेताजी के अडिग साहस से भी मिली है। आज जब हम आजाद भारत की हवा में सांस ले रहे हैं, तो हमें उन संघर्षों को कभी नहीं भूलना चाहिए।

जय हिंद! जय भारत! 🇮🇳

लौकहा: हाजी मो. हामिद रजा की पहल पर फ्री मेडिकल कैंप आयोजित, डॉ. अलख ने किया सैकड़ों मरीजों का मुफ्त इलाज

लौकहा (मधुबनी): जनसेवा की मिसाल पेश करते हुए लौकहा के प्रमुख समाजसेवी हाजी मो. हामिद रजा के सौजन्य से एक दिवसीय निःशुल्क चिकित्सा शिविर (Free Medical Camp) का सफल आयोजन किया गया। यह शिविर नूरी मस्जिद के पास स्थित उनके निजी आवास ‘आशियाना भवन’ में संपन्न हुआ।

​डॉ. अलख ने दी अपनी विशेषज्ञ सेवाएं

इस कैंप में क्षेत्र के सुप्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. अलख ने अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने कैंप में आए मरीजों की स्वास्थ्य जांच की और उन्हें उचित परामर्श दिया। डॉ. अलख की विशेषज्ञता का लाभ उठाने के लिए सुबह से ही लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

निःशुल्क जांच के साथ मुफ्त दवाइयों का वितरण

इस मेडिकल कैंप की सबसे खास बात यह रही कि यहाँ परामर्श के साथ-साथ मरीजों को मुफ्त दवाइयां (Free Medicines) भी वितरित की गईं। हाजी मो. हामिद रजा के इस प्रयास से उन गरीब परिवारों को बड़ी राहत मिली, जो आर्थिक कारणों से बेहतर इलाज और महंगी दवाइयां खरीदने में असमर्थ थे।

समाजसेवी हाजी मो. हामिद रजा का संकल्प

आयोजन के बारे में बात करते हुए हाजी मो. हामिद रजा ने कहा कि, “इंसानियत की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव को देखते हुए हमने डॉ. अलख के सहयोग से यह छोटा सा प्रयास किया है ताकि जरूरतमंदों को उनके घर के पास ही बेहतर इलाज मिल सके।”

स्थानीय लोगों में खुशी की लहर

​नूरी मस्जिद के पास आयोजित इस कैंप में लौकहा और आसपास के गांवों से आए बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों ने स्वास्थ्य लाभ लिया। स्थानीय ग्रामीणों ने हाजी मो. हामिद रजा और डॉ. अलख के इस नेक कार्य की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज के पिछड़े तबके को नई उम्मीद मिलती है।

स्वस्थ जीवन के 100 अनमोल नियम: आयुर्वेद का खजाना (100 Ayurveda Tips for Healthy Life)

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अपनी जड़ों और आयुर्वेद के उन नियमों को भूलते जा रहे हैं जो हमारे पूर्वजों को स्वस्थ रखते थे। नीचे दिए गए नियम न केवल शरीर को रोगों से बचाते हैं, बल्कि मन को भी शांत और प्रसन्न रखते हैं।

1. रोग, दोष और त्रिदोष (वात, पित्त, कफ)

आयुर्वेद के अनुसार शरीर तीन प्रकृतियों पर आधारित है। इनके असंतुलन से ही बीमारियाँ होती हैं:

  • वात (वायु): इसकी अधिकता से नींद कम आती है और शरीर में दर्द रहता है। मालिश से वात शांत होता है।
  • पित्त (गर्मी): पित्त के असर में एकाग्रता और पढ़ाई अच्छी होती है। निद्रा और गाय का घी पित्त को शांत करते हैं।
  • कफ: कफ के प्रभाव में व्यक्ति में प्रेम भाव अधिक होता है, लेकिन आलस्य भी बढ़ता है। आँखों के अधिकांश रोग (मोतियाबिंद, ग्लूकोमा) कफ के कारण होते हैं।

2. खान-पान के सुनहरे नियम

  • पानी पीने का सही तरीका: कभी भी खड़े होकर पानी न पिएं, इससे किडनी और जोड़ों पर बुरा असर पड़ता है। ताम्बे के बर्तन का पानी सुबह नंगे पाँव खड़े होकर न पिएं।
  • बर्तनों का महत्व: लोटे का सतही तनाव (Surface Tension) कम होता है, जो स्वास्थ्य के लिए शुभ है। गिलास के बजाय लोटे का पानी प्राथमिकता दें।
  • भोजन का समय: सुबह के नाश्ते में फल, दोपहर में दही और रात को दूध का सेवन उत्तम है। रात में भारी प्रोटीन (दाल, राजमा, पनीर) से बचें।
  • चीनी का त्याग: चीनी में सल्फर होता है जो शरीर के लिए हानिकारक है। गुड़ और शहद का प्रयोग करें क्योंकि इनमें प्राकृतिक फ्रुक्टोज होता है जो आसानी से पच जाता है।

3. कमियों से होने वाले रोग और उपचार

  • लकवा: शरीर में सोडियम की कमी के कारण।
  • दमा/अस्थमा: सल्फर की कमी के कारण। नारियल का सेवन इसमें लाभकारी है।
  • कूबड़ निकलना: फास्फोरस की कमी।
  • जुकाम: सुबह जूस पीते समय उसमें काला नमक और अदरक जरूर मिलाएं।
  • मिर्गी: दौरे के समय अमोनिया या चूने की गंध सुंघाना फायदेमंद होता है।

4. दैनिक दिनचर्या और वास्तु

  • जागने का समय: प्रातः 4 बजे जागना सर्वोत्तम है। जो सूर्योदय के बाद उठते हैं, उनकी बड़ी आँत मल को चूसने लगती है, जिससे बीमारियाँ बढ़ती हैं।
  • सोने की दिशा: हमेशा दायीं करवट से उठें। पेट के बल सोने से हर्निया और प्रोस्टेट जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • स्नान: हाई बीपी में नहाने के पानी में थोड़ा नमक मिलाएं। स्नान से पूर्व पेशाब जाने से रक्तचाप नियंत्रित रहता है।

5. विशेष आयुर्वेदिक सुझाव

  • चूना: यह बालों को मजबूत करता है, आंखों की रोशनी बढ़ाता है और हेपेटाइटिस (A से E) में भी सहायक है।
  • त्रिफला: इसे ‘अमृत’ माना गया है जो वात, पित्त और कफ तीनों को संतुलित करता है।
  • लार (Saliva): यह दुनिया की सबसे महंगी दवा है, इसे व्यर्थ न थूकें। सुबह की बासी लार आंखों और त्वचा के लिए गुणकारी है।
  • RO वाटर: RO का पानी अपनी गुणवत्ता स्थिर नहीं रखता, संभव हो तो कुएं या बारिश का शुद्ध पानी पिएं।

6. मानसिक स्वास्थ्य और स्वभाव

चिंता, क्रोध और ईर्ष्या शरीर में गलत हार्मोन्स पैदा करते हैं, जिससे कब्ज, थायराइड और रक्तचाप की समस्या होती है। आयुर्वेद मानता है कि जो बीमारी अंदर से आती है, उसका समाधान भी अंदर (जीवनशैली सुधार) से ही होना चाहिए।

निष्कर्ष

प्रकृति ने हमें स्वस्थ रहने के सभी साधन दिए हैं। यदि हम अपनी दिनचर्या में इन छोटे-छोटे बदलावों को अपनाते हैं, तो हम न केवल बीमारियों से बच सकते हैं बल्कि एक ऊर्जावान जीवन जी सकते हैं।

“योग, भोग और रोग ये तीन अवस्थाएं हैं। चुनाव आपका है कि आप किस मार्ग पर चलना चाहते हैं।”


अस्वीकरण: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी गंभीर बीमारी की स्थिति में विशेषज्ञ चिकित्सक या आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य लें।