बिहार में आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मियों के लिए न्याय का नया सवेरा: सुप्रीम कोर्ट और पटना हाईकोर्ट के 2025 के बड़े फैसले

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पटना | भूमि न्यूज़ लाइव: बिहार के लाखों संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए न्यायपालिका ने ऐतिहासिक बदलाव किए हैं। सुप्रीम कोर्ट और पटना हाईकोर्ट के 2025 के नवीनतम आदेशों ने अब सरकार और निजी एजेंसियों की मनमानी पर रोक लगा दी है।

1. समान काम, समान वेतन (Equal Pay for Equal Work)

केस: स्टेट ऑफ पंजाब बनाम जगजीत सिंह (विस्तारित आदेश 2025) कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि आउटसोर्स कर्मचारी नियमित स्टाफ जैसा ही काम कर रहे हैं, तो वे न्यूनतम वेतनमान (Basic + DA) के हकदार हैं। उन्हें केवल न्यूनतम मजदूरी देकर शोषण नहीं किया जा सकता।

2. स्थायी प्रकृति का काम (Perennial Nature of Work)

केस: सुप्रीम कोर्ट (अगस्त 2025 निर्देश) अदालत ने कहा कि जो काम ‘बारहमासी’ या स्थायी हैं (जैसे क्लर्क, ड्राइवर, डाटा एंट्री ऑपरेटर, सफाई कर्मी), उन्हें सालों-साल आउटसोर्सिंग पर नहीं रखा जा सकता। सरकार को इन पदों पर नियमित बहाली की दिशा में कदम उठाना होगा।

3. अनुभव को मान्यता और बोनस अंक

केस: पटना हाईकोर्ट (CWJC 1981/2025) बिहार के संदर्भ में यह सबसे बड़ा आदेश है। अब सरकारी बहाली में:

अनुभवी कर्मियों को उम्र सीमा (Age Relaxation) में विशेष छूट मिलेगी।

संविदा/आउटसोर्स कर्मियों को अनुभव का वेटेज (Bonus Marks) मिलेगा।

प्रति वर्ष अनुभव के लिए 5 अंक (अधिकतम 25 अंक) का लाभ दिया जाएगा।

4. नियमितीकरण (Regularisation) का नया आधार

केस: पटना हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट (2025 विश्लेषण) कोर्ट ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी थी और वह 10 वर्षों से अधिक सेवा दे चुका है, तो केवल ‘आउटसोर्स’ लेबल लगाकर उसे नियमितीकरण के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

  • वेतन: पद के न्यूनतम पे-स्केल की गारंटी।
  • अनुभव: नियमित बहाली में प्राथमिकता और बोनस अंक।
  • सुरक्षा: बिना ठोस कारण और नोटिस के काम से हटाने पर रोक।

बिहार में आउटसोर्सिंग व्यवस्था अक्सर भ्रष्टाचार और शोषण का अड्डा बनी रही है। लेकिन न्यायपालिका के इन कड़े फैसलों ने बेलट्रॉन (BELTRON) से लेकर स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य विभागो में कार्यरत लाखों युवाओं को एक नई ताकत दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बिहार सरकार इन फैसलों को जमीन पर कितनी तेजी से उतारती है।- कार्तिक कुमार

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