पटना: बिहार के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। राज्य सरकार और बिहार विद्युत विनियामक आयोग (BERC) ने नए वित्तीय वर्ष में बिजली की दरों में बढ़ोतरी न करने का फैसला लिया है। ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने स्पष्ट किया है कि सरकार आम जनता पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ने देगी।

आयोग ने खारिज किया बिजली कंपनियों का प्रस्ताव
बिहार की बिजली कंपनियों (NBPDCL और SBPDCL) ने इस वर्ष 35 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी का प्रस्ताव आयोग के सामने रखा था। हालांकि, लंबी जनसुनवाई और उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए, आयोग के अध्यक्ष आमिर सुभानी और उनकी टीम ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव का बयान
बिजली दरों पर प्रतिक्रिया देते हुए ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि:
”हमारी सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के हर घर तक सस्ती और निर्बाध बिजली पहुंचे। हमने बिजली कंपनियों के घाटे की भरपाई के लिए ₹15,792 करोड़ की सब्सिडी का प्रावधान किया है ताकि आम आदमी के बिल में कोई बढ़ोतरी न हो।”
1 अप्रैल से क्या-क्या बदलेगा?
- स्लैब का विलय: ग्रामीण और शहरी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पहले जो दो अलग-अलग स्लैब (0-100 यूनिट और 100 से अधिक) हुआ करते थे, अब उन्हें एक कर दिया गया है।
- सस्ती होगी बिजली: स्लैब के एक होने से उन उपभोक्ताओं को सीधा फायदा होगा जिनकी खपत 100 यूनिट से अधिक है, क्योंकि उनके लिए प्रति यूनिट दर अब कम हो जाएगी।
- कृषि और कुटीर ज्योति: किसानों और ‘कुटीर ज्योति’ कनेक्शन वाले गरीब परिवारों के लिए पुरानी दरें ही प्रभावी रहेंगी।
सब्सिडी का बढ़ता आंकड़ा
ऊर्जा विभाग द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी में हर साल बढ़ोतरी की जा रही है, जिसका विवरण नीचे दिया गया है:
| वित्तीय वर्ष | सब्सिडी की राशि (करोड़ में) |
|---|---|
| 2023-24 | ₹13,114 करोड़ |
| 2024-25 | ₹15,343 करोड़ |
| 2025-26 | ₹15,792 करोड़ |
ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के नेतृत्व में बिहार बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर है। 1 अप्रैल से लागू होने वाली ये नई दरें न केवल आम आदमी की जेब बचाएंगी, बल्कि राज्य की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती देंगी।
बिजली चोरी रोकने और स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने के अभियान में भी तेजी लाई जा रही है ताकि भविष्य में दरें और भी कम की जा सकें।