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HMT Ranibagh Factory: देश का वक्त बताने वाली कंपनी कैसे हुई बर्बाद? एक विश्लेषण

रानीबाग उत्तराखंड में बंद पड़ी एचएमटी घड़ी की फैक्ट्री - HMT Watch Factory Ranibagh Closed

रानीबाग, उत्तराखण्ड। आज यहाँ एचएमटी (HMT) की जो फैक्ट्री खड़ी है, वह किसी भुतहा इमारत से कम नहीं लगती। विडंबना देखिए, जो कंपनी कभी पूरे भारत का ‘वक्त’ बताती थी, आज उसका खुद का वक्त थम चुका है। यह वही एचएमटी है जिसकी घड़ी कलाई पर बांधने के लिए लोगों को सालों इंतज़ार करना पड़ता था और सिफारिशें लगानी पड़ती थीं।

लेकिन आखिर ऐसा क्या हुआ कि देश का गौरव मानी जाने वाली यह कंपनी मिट्टी में मिल गई? क्या यह सिर्फ सरकार की गलती थी या कहानी कुछ और है?

वो दौर, जब HMT का सिक्का चलता था

एक समय था जब एचएमटी भारत सरकार का सबसे प्रतिष्ठित उपक्रम था। कंपनी के पास देश के सर्वश्रेष्ठ डिज़ाइनर और इंजीनियर थे। शादी-ब्याह में एचएमटी की घड़ी देना शान की बात मानी जाती थी। डिमांड इतनी ज्यादा थी और सप्लाई इतनी कम कि बाज़ार में इसका एकछत्र राज (Monopoly) था।

समय बदला, लेकिन HMT नहीं बदली

एचएमटी की बर्बादी का सबसे बड़ा कारण था- बदलाव को स्वीकार न करना। जब पूरी दुनिया ‘क्वार्ट्ज़ टेक्नोलॉजी’ (Quartz Technology) यानी बैटरी वाली घड़ियों की तरफ बढ़ रही थी, एचएमटी का मैनेजमेंट अपनी ज़िद पर अड़ा था। उनका मानना था कि वे केवल चाभी भरने वाली (Mechanical) घड़ियाँ ही बनाएंगे। ग्राहकों को भगवान मानने के बजाय उन्हें केवल इंतज़ार करवाया जाता था।

भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन का दीमक

स्थानीय लोगों और पुराने जानकारों के मुताबिक, कंपनी के अंदर भ्रष्टाचार भी चरम पर था।

  • ब्लैक मार्केटिंग: ग्राहकों को घड़ी के लिए ब्लैक में पैसा देना पड़ता था।
  • चोरी की कहानियाँ: रानीबाग फैक्ट्री के बारे में एक चर्चित किस्सा है कि कर्मचारी घड़ी के पुर्जे प्लास्टिक के डिब्बों में बंद करके पीछे बहने वाले नाले में फेंक देते थे, जिसे उनके रिश्तेदार आगे जाकर निकाल लेते थे और बाहर बेचते थे। हालांकि यह आधिकारिक तौर पर सिद्ध नहीं है, लेकिन यह उस समय की सरकारी कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान है।

जब टाटा ने दी दस्तक (The Entry of Titan)

फिर एंट्री हुई टाटा की ‘टाइटन’ (Titan) कंपनी की। टाइटन ने बाज़ार की नब्ज पकड़ी। उन्होंने डिसाइड किया कि वे केवल इलेक्ट्रॉनिक (क्वार्ट्ज़) घड़ी बनाएंगे और उसे एक ‘फैशन’ की तरह बेचेंगे।

एचएमटी को लगा कि वह सरकारी कंपनी है, इसलिए कोई प्राइवेट कंपनी उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी। लेकिन टाइटन ने एचएमटी के ही रिटायर्ड अधिकारियों और इंजीनियरों को अपने साथ जोड़ा। नतीजा यह हुआ कि 50 साल पुरानी एचएमटी की बादशाहत मात्र एक साल में हिल गई। देखते ही देखते टाइटन नंबर वन बन गई और एचएमटी को पूछने वाला कोई न बचा।

जो समय के साथ नहीं चलता…

आज रानीबाग की यह बंद फैक्ट्री एक गवाह है। यह गवाह है इस बात की कि चाहे आप कितने भी बड़े क्यों न हों, अगर आप समय के साथ नहीं चलेंगे और ग्राहकों का सम्मान नहीं करेंगे, तो पतन निश्चित है।

अब्दुल अली, एक-एक करके करो, नहीं तो मेरी बेटी मर जाएगी– बांग्लादेश की वो काली रात जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया

Purnima Rani Shil Case 2001 Bangladesh Violence against Hindus

इतिहास में कुछ तारीखें ऐसी होती हैं जो कैलेंडर के पन्नों पर नहीं, बल्कि पीड़ितों की रूह पर लिखी जाती हैं। 8 अक्टूबर 2001 की रात बांग्लादेश के सिराजगंज में जो हुआ, वह केवल एक परिवार के साथ हुआ अपराध नहीं था, बल्कि पूरी मानवता के माथे पर लगा एक कलंक था। यह कहानी है उस माँ की बेबसी की, जिसने अपनी 14 साल की बेटी की जान बचाने के लिए बलात्कारियों से ऐसी भीख मांगी, जिसे सुनकर पत्थर भी पिघल जाए।

वो काली रात: 8 अक्टूबर 2001 बांग्लादेश में चुनाव परिणाम आने के बाद अल्पसंख्यकों (विशेषकर हिंदुओं) पर अत्याचारों का दौर शुरू हो चुका था। सिराजगंज के उल्लापाड़ा में अनिल चंद्र शील अपने परिवार, पत्नी और दो बेटियों (पूर्णिमा और 6 वर्षीय छोटी बेटी) के साथ रहते थे। उनका एकमात्र “गुनाह” यह था कि वे एक हिंदू परिवार थे और अपनी पुश्तैनी जमीन पर रह रहे थे।

उस रात, अब्दुल अली, अल्ताफ हुसैन, हुसैन अली और उनके साथियों सहित लगभग 10-12 उन्मादी भीड़ ने अनिल चंद्र के घर पर धावा बोल दिया। यह भीड़ राजनीतिक संरक्षण में थी और उनका मकसद सिर्फ जमीन हड़पना नहीं, बल्कि “काफिरों” को सबक सिखाना था।

माँ की वो चीख: “एक-एक करके करो…” दरिंदों ने घर में घुसते ही अनिल चंद्र को बुरी तरह पीटा और रस्सियों से बांध दिया। इसके बाद उनकी नज़र 14 साल की मासूम पूर्णिमा पर पड़ी। जब इन वहशी भेड़ियों ने बच्ची को नोचना शुरू किया, तो सामने खड़ी बेबस माँ की ममता तड़प उठी।

उसे एहसास हो गया था कि इन राक्षसों को रोका नहीं जा सकता। अपनी बेटी को मौत से बचाने के लिए, उस माँ ने अपनी आत्मा को मारते हुए वो शब्द कहे जो आज भी दुनिया को झकझोर देते हैं:

“अब्दुल अली, मेरी बच्ची छोटी है… एक-एक करके करो, वरना वो मर जाएगी।”

यह वाक्य किसी भी सभ्य समाज के मुंह पर एक तमाचा है। लेकिन हवस में अंधे उन दरिंदों पर इसका कोई असर नहीं हुआ। उन्होंने माँ-बाप के सामने ही बच्चियों की अस्मत को तार-तार कर दिया।

नफरत की राजनीति और न्याय की लड़ाई इस घटना के पीछे की मानसिकता केवल व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं थी, बल्कि सांप्रदायिक नफरत थी। हमलावरों ने जाते समय धमकी दी कि कोई उनकी मदद नहीं करेगा। यह घटना 2001 के बांग्लादेशी चुनावों के बाद हिंदुओं पर हुए सुनियोजित हमलों का सबसे भयानक चेहरा बन गई।

फैसला और हकीकत इस अमानवीय कृत्य के बाद पूर्णिमा और उनका परिवार टूटा नहीं, बल्कि न्याय के लिए लड़ा। हालांकि न्याय मिलने में एक दशक लग गया, लेकिन 4 मई 2011 को बांग्लादेश के एक ट्रिब्यूनल ने इस मामले में 11 आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

अनिल चंद्र के परिवार के साथ जो हुआ, वह हमें याद दिलाता है कि जब राजनीति और धर्म का गलत इस्तेमाल होता है, तो इंसान जानवर बन जाता है। पूर्णिमा रानी शील का मामला आज भी एक दस्तावेज है—अत्याचार का, लेकिन साथ ही साथ उस साहस का भी, जिसने अन्याय के खिलाफ हार नहीं मानी।

सरदार पटेल पर वो जानलेवा हमला, जिसे इतिहास की किताबों ने भुला दिया: भावनगर 1939 की पूरी कहानी

Sardar Patel Bhavnagar Attack 1939

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। हम सभी जानते हैं कि उन्होंने 562 रियासतों का विलय कर अखंड भारत का निर्माण किया, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि राष्ट्र निर्माण के इस सफर में उन पर कई बार जानलेवा हमले भी हुए।

आज हम बात कर रहे हैं 14 मई 1939 की उस भयावह घटना की, जब भावनगर में सरदार पटेल की जान लेने की कोशिश की गई थी।

भावनगर की वो रक्तरंजित दोपहर

14 और 15 मई 1939 को भावनगर राज्य प्रजा परिषद का पाँचवाँ अधिवेशन आयोजित होना था। सरदार पटेल इस अधिवेशन की अध्यक्षता करने के लिए भावनगर पहुंचे थे। रेलवे स्टेशन से शहर तक एक विशाल शोभायात्रा निकाली गई। सरदार पटेल एक खुली जीप में सवार होकर जनता का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे।

जैसे ही जुलूस खार गेट चौक के पास स्थित नगीना मस्जिद के करीब पहुँचा, अचानक मस्जिद के भीतर से हथियारों से लैस एक भीड़ बाहर निकली। हमलावरों के हाथों में तलवारें, छुरे और भाले थे और उनका सीधा निशाना सरदार पटेल थे।

बच्छुभाई पटेल और जाधवभाई मोदी: दो ढाल, जिन्होंने खुद को कुर्बान कर दिया

जब हमलावर जीप की ओर लपके, तो वहां मौजूद दो बहादुर युवकों — बच्छुभाई पटेल और जाधवभाई मोदी — ने भांप लिया कि सरदार की जान खतरे में है। बिना एक पल की देरी किए, दोनों युवक सरदार पटेल के सामने ढाल बनकर खड़े हो गए।

  • बच्छुभाई पटेल: उन्होंने हमलावरों के वार सीधे अपने शरीर पर झेले और मौके पर ही शहीद हो गए।
  • जाधवभाई मोदी: वे गंभीर रूप से घायल हुए और अस्पताल में उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

इन दो वीरों के बलिदान के कारण ही सरदार पटेल सुरक्षित बच सके। आज भी भावनगर में उस स्थान पर इन दोनों शहीदों की प्रतिमाएं उनकी बहादुरी की याद दिलाती हैं।

अदालत का फैसला: किसे मिली फांसी और किसे उम्रकैद?

ब्रिटिश काल के दौरान इस घटना की गहन जांच हुई और विशेष न्यायालय का गठन किया गया। जांच में खुलासा हुआ कि यह हमला सरदार पटेल द्वारा कोलकाता में मुस्लिम लीग की नीतियों के खिलाफ दिए गए भाषणों का प्रतिशोध लेने के लिए किया गया था।

कुल 57 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से मुख्य अपराधियों को कड़ी सजा दी गई:

  1. आजाद अली – फांसी की सजा
  2. रुस्तम अली सिपाही – फांसी की सजा

इसके अलावा, 15 अन्य अपराधियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई गई, जिनमें कासिम दोसा घांची, लतीफ मियां काजी और मोहम्मद करीम सैनिक जैसे नाम शामिल थे।

इतिहास की किताबों से गायब क्यों है यह घटना?

अक्सर सवाल उठाया जाता है कि महात्मा गांधी की हत्या करने वाले का नाम तो हर बच्चा जानता है, लेकिन सरदार पटेल के हत्या के प्रयास और उनके लिए प्राण न्यौछावर करने वाले बच्छुभाई और जाधवभाई का नाम मुख्यधारा के इतिहास से क्यों गायब है?

आलोचकों का मानना है कि आजादी के बाद की सरकारों ने चुनिंदा घटनाओं को ही प्रमुखता दी, जिसके कारण सरदार पटेल जैसे राष्ट्रनायकों के संघर्ष के कई पन्ने धूल फांकते रह गए।

निष्कर्ष:

सरदार पटेल पर हुआ यह हमला केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं था, बल्कि भारत की अखंडता और एकता के विचार पर हमला था। बच्छुभाई और जाधवभाई का बलिदान हमें सिखाता है कि राष्ट्र के नायकों की रक्षा के लिए आम जनता ने भी कितनी बड़ी कीमतें चुकाई हैं।

यह हमारा कर्तव्य है कि हम इस सत्य को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाएं।

L.N.J. कॉलेज झंझारपुर: खेल सामग्री आवंटन में भेदभाव का आरोप, MSU छात्र नेताओं के साथ धक्का-मुक्की, 13 से भूख हड़ताल की चेतावनी

झंझारपुर: स्थानीय ललित नारायण जनता (L.N.J.) महाविद्यालय में 8 जनवरी को खेल सामग्री के वितरण को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। महाविद्यालय प्रशासन और खेल विभाग के कर्मचारियों पर छात्रों के साथ भेदभाव और अभद्रता करने का गंभीर आरोप लगा है। इस घटना के बाद कैंपस का माहौल तनावपूर्ण हो गया है।

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना उस वक्त हुई जब महाविद्यालय के कुछ छात्र खेलने के लिए खेल विभाग में सामग्री (Sports Kit) लेने पहुंचे। छात्रों का आरोप है कि खेल विभाग के कर्मचारियों ने नियम का हवाला देते हुए उनसे सामग्री के बदले 10 छात्रों का आईडेंटिटी कार्ड (ID Card) जमा करने की मांग की।

विवाद तब गहरा गया जब छात्रों ने देखा कि उसी समय महाविद्यालय के कुछ प्रोफेसरों के निजी बच्चों को बिना किसी कड़े नियम के खेल सामग्री दे दी गई और वे उसे लेकर घर जा रहे थे।

स्टाफ पर अभद्रता और धमकी देने का आरोप

जब छात्रों ने इस दोहरे रवैये पर सवाल उठाया, तो आरोप है कि खेल विभाग के स्टाफ ने जवाब देने के बजाय छात्र नेताओं के साथ बदसलूकी शुरू कर दी। मिथिला स्टूडेंट यूनियन (MSU) का कहना है कि स्टाफ ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया और कहा, “जहाँ जाना है जाओ, गला पकड़ के बाहर फेंक देंगे।”

वायरल हो रहे वीडियो में भी तीखी नोकझोंक देखी जा सकती है। आरोप है कि इस दौरान महाविद्यालय प्रभारी कुंदन भारती के साथ भी धक्का-मुक्की की गई। MSU ने इसे शिक्षक मर्यादा और शैक्षणिक वातावरण पर गहरा आघात बताया है।

MSU ने दिया 3 दिन का अल्टीमेटम

इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए मिथिला स्टूडेंट यूनियन ने कॉलेज प्रशासन को चेतावनी दी है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि छात्रों के साथ भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

यूनियन ने मांग की है कि:

  • ​पूरे मामले की 3 दिनों के भीतर निष्पक्ष जाँच हो।
  • ​दोषी प्रोफेसर और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की चेतावनी

MSU ने ऐलान किया है कि यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो वे 13 जनवरी से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने के लिए बाध्य होंगे। संगठन ने कहा है कि इसकी पूरी जिम्मेदारी महाविद्यालय प्रशासन की होगी और छात्रों के सम्मान की लड़ाई आखिरी दम तक लड़ी जाएगी।

Lalu Yadav Bharat Ratna: लालू यादव को ‘भारत रत्न’ देने की मांग पर सियासी भूचाल, BJP नेता ने दिया अब तक का सबसे बड़ा बयान

Patna | बिहार की राजनीति में एक बार फिर ‘भारत रत्न’ को लेकर घमासान छिड़ गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) द्वारा अपने सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) के लिए देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ की मांग करने के बाद एनडीए (NDA) और भाजपा (BJP) नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। इस मांग पर पलटवार करते हुए भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने इसे बिहार की जनता का अपमान बताया है।

क्या है पूरा मामला?

आरजेडी पूर्व विधायक सह JJD नेता तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) का कहना है कि लालू यादव ने गरीबों और पिछड़ों को आवाज दी है, इसलिए वे इस सम्मान के असली हकदार हैं।

BJP का तीखा हमला: ‘लूट रत्न’ मिलना चाहिए

आरजेडी की इस मांग पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। बिहार के उपमुख्यमंत्री और भाजपा नेता विजय कुमार सिन्हा (Vijay Kumar Sinha) ने इस मांग को सिरे से खारिज करते हुए बड़ा बयान दिया है।

भाजपा नेताओं ने कहा कि जिस व्यक्ति ने बिहार को अपराध, भ्रष्टाचार और नरसंहारों के लिए बदनाम किया, उनके लिए भारत रत्न की मांग करना हास्यास्पद है।

  • विजय कुमार सिन्हा का बयान: उन्होंने कहा, “भ्रष्टाचार के मामले में सजायाफ्ता व्यक्ति के लिए भारत रत्न की मांग करना संविधान और जनभावना का अपमान है। जिन्होंने बिहार को लूटा, उन्हें ‘भारत रत्न’ नहीं बल्कि ‘लूट रत्न’ या ‘भ्रष्टाचार रत्न’ मिलना चाहिए।”

JDU ने भी साधा निशाना

जेडीयू (JDU) के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने भी आरजेडी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि लालू यादव को कोर्ट ने चारा घोटाले में दोषी माना है। ऐसे में आरजेडी नेताओं द्वारा भारत रत्न की मांग करना “मानसिक दिवालियापन” को दर्शाता है। एनडीए नेताओं का कहना है कि यह मांग केवल राजनीतिक स्टंट है।

  • मेरे पिता जी गरीबों के मसीहा हैं। जिस तरह कर्पूरी ठाकुर जी को सम्मान मिला, उसी तरह लालू जी भी ‘भारत रत्न’ के असली हकदार हैं। उन्होंने बिहार को आवाज दी है। जो लोग आज विरोध कर रहे हैं, वो कल खुद ही उन्हें सम्मान देंगे।- तेज प्रताप यादव, लालू यादव के बड़े पुत्र

बिहार में आगामी चुनावों और सियासी समीकरणों को देखते हुए यह विवाद और बढ़ने की उम्मीद है। एक तरफ आरजेडी अपने ‘सामाजिक न्याय’ के एजेंडे को धार दे रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा ‘भ्रष्टाचार’ के मुद्दे पर लालू परिवार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है।

यह मांग ऐसे समय उठी है जब दिल्ली कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब केस में लालू परिवार पर आरोप तय करने का आदेश दिया है

चीन, रूस और ईरान का बड़ा एक्शन: ट्रम्प के खिलाफ साउथ अफ्रीका में नेवल ड्रिल | Ankit Awasthi Sir’s Analysis

Ankit Awasthi Sir's Analysis

दुनिया की जियोपॉलिटिक्स (Geopolitics) में एक नया और गंभीर मोड़ आया है। चीन, रूस, ईरान और साउथ अफ्रीका ने मिलकर अटलांटिक महासागर में अपनी ताकत दिखानी शुरू कर दी है। साउथ अफ्रीका के केप टाउन (Cape Town) के पास इन देशों के जंगी जहाज (Warships) इकट्ठा हुए हैं।

हाल ही में अंकित अवस्थी सर ने अपने वीडियो में इसका विस्तार से विश्लेषण किया है। उनका कहना है कि यह नेवल ड्रिल, जिसका नाम “विल फॉर पीस 2026” (Will for Peace 2026) रखा गया है, सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और अमेरिका की नीतियों के खिलाफ एक मोर्चा है।

​​1. विल फॉर पीस 2026: क्या है यह नेवल ड्रिल?

इस साल पहली बार ब्रिक्स प्लस (BRICS Plus) देश (भारत और ब्राजील को छोड़कर) एक संयुक्त नौसैनिक अभ्यास कर रहे हैं। इस ड्रिल का मुख्य मकसद अटलांटिक महासागर में अपने व्यापारिक रास्तों (Trade Routes) को सुरक्षित करना है।

वीडियो विश्लेषण के मुताबिक:

  • यह अभ्यास साउथ अफ्रीका के केप टाउन और साइमन्स टाउन (Simon’s Town) के पास हो रहा है।
  • ​इसमें रूस, चीन, ईरान और साउथ अफ्रीका की नौसेनाएं हिस्सा ले रही हैं।
  • ​इस ड्रिल को करने का मुख्य कारण यह डर है कि अमेरिका भविष्य में इनके जहाजों को रोक सकता है।

2. इन देशों ने अमेरिका के खिलाफ मोर्चा क्यों खोला?

अंकित अवस्थी सर ने बताया कि पिछले कुछ समय में अमेरिका ने अटलांटिक ओशन में कई कार्रवाई की हैं:

  • जहाजों को रोकना: अमेरिका ने ईरान के ‘बेला 1’ जहाज और रूस के कई जहाजों को वेनेजुएला जाने से रोका था। अमेरिका ने एक रूसी जहाज को “शैडो फ्लीट” (Shadow Fleet) बताकर जब्त भी कर लिया था।
  • ट्रेड रूट का डर: चीन और रूस को डर है कि अगर अमेरिका ने ‘केप ऑफ गुड होप’ (Cape of Good Hope) वाला रास्ता ब्लॉक कर दिया, तो उनका यूरोप और बाकी दुनिया से व्यापार रुक जाएगा।
  • ट्रम्प का डर: डोनाल्ड ट्रम्प के आक्रामक रवैये और ईरान में सत्ता परिवर्तन (Regime Change) की कोशिशों ने इन देशों को एक साथ आने पर मजबूर कर दिया है।

​​3. साउथ अफ्रीका और ट्रम्प का टकराव

​​​साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और डोनाल्ड ट्रम्प के रिश्ते अच्छे नहीं हैं। ट्रम्प ने पहले रामफोसा की बेइज्जती की थी और अब G20 मीटिंग्स को लेकर भी दोनों देशों में तनाव है। साउथ अफ्रीका को लगता है कि अमेरिका अगला निशाना उन्हें बना सकता है, इसलिए वह रूस और चीन के साथ अपना सैन्य गठबंधन मजबूत कर रहा है।

4. भारत इस ड्रिल में शामिल क्यों नहीं है?

  • गुटनिरपेक्ष नीति (Non-Aligned Policy): भारत कभी भी किसी “सैन्य गठबंधन” (Military Alliance) का हिस्सा नहीं बनता। चाहे वह अमेरिका का ‘नाटो’ (NATO) हो या रूस-चीन का यह नया ग्रुप।
  • एंटी-वेस्ट नहीं है भारत: भारत ब्रिक्स को एक आर्थिक समूह (Economic Group) मानता है, अमेरिका विरोधी समूह नहीं। भारत अपने रिश्ते अमेरिका के साथ खराब नहीं करना चाहता।
  • रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy): भारत अपनी लड़ाई खुद लड़ता है और किसी ग्रुप में शामिल होकर किसी तीसरे देश (जैसे अमेरिका) से दुश्मनी मोल नहीं लेना चाहता।

यह नेवल ड्रिल दुनिया को दिखा रही है कि अमेरिका के खिलाफ एक नया धड़ा (Faction) तैयार हो रहा है। जहां रूस, चीन और ईरान खुलकर अमेरिका को चुनौती दे रहे हैं, वहीं भारत ने समझदारी दिखाते हुए अपनी “रणनीतिक स्वायत्तता” बनाए रखी है और खुद को इस विवाद से दूर रखा है।

वीडियो स्रोत (Credit):

इस आर्टिकल की पूरी जानकारी अंकित अवस्थी सर के वीडियो विश्लेषण पर आधारित है। आप पूरा वीडियो नीचे दिए गए लिंक पर देख सकते हैं:

वीडियो टाइटल: Finally! China & Russia Opens Front Against Trump | World Politics Analysis

चैनल: Apni Pathshala – Civil Services

Jhanjharpur News: वीबी जी राम जी योजना में राम के नाम से विपक्ष को लग रही मिर्ची NDA ने गिनाई खूबियां

भाजपा

झंझारपुर (मधुबनी): भाजपा जिला कार्यालय झंझारपुर में एनडीए (NDA) की ओर से आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्षी दलों पर जमकर निशाना साधा गया। भाजपा जिला अध्यक्ष बच्चा बाबू कामत ने कहा कि विपक्ष के पास अब कोई मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए उनका एकमात्र कार्य सिर्फ विरोध करना रह गया है।

प्रेस वार्ता के दौरान केंद्र सरकार की नई पहल ‘वीबी जी राम जी’ (विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण) कार्यक्रम पर चर्चा करते हुए एनडीए नेताओं ने इसे गेम चेंजर बताया।

​’राम’ के नाम से विपक्ष को परेशानी

भाजपा जिला अध्यक्ष बच्चा बाबू कामत ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि विपक्षी दल अब ‘वीबी जी राम जी’ कार्यक्रम का विरोध सिर्फ इसलिए कर रहे हैं क्योंकि इसमें भगवान ‘राम’ का नाम जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, “योजना के नाम में राम शब्द देखकर विपक्ष को मिर्ची लग रही है, जबकि यह योजना गरीबों के कल्याण के लिए है।”

मनरेगा से बेहतर: अब 125 दिन काम की गारंटी

योजना की खूबियों को गिनाते हुए श्री कामत ने बताया कि पहले मनरेगा के तहत 100 दिनों के रोजगार का प्रावधान था, लेकिन ‘वीबी जी राम जी’ के तहत अब इसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी को और मजबूत करेगा।

सप्ताहिक भुगतान और प्रशासनिक व्यय में वृद्धि

प्रेस कॉन्फ्रेंस में रालोमो (RLM) के जिला अध्यक्ष रंजीत कामत ने विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को दूर किया। उन्होंने कहा:

  • विपक्ष इस योजना का गलत प्रचार कर रहा है।
  • ​योजना में प्रशासनिक व्यय को 6% से बढ़ाकर 9% कर दिया गया है।
  • ​मजदूरों का साप्ताहिक भुगतान (Weekly Payment) अनिवार्य रूप से तय किया गया है, जिससे श्रमिकों को आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

विकसित भारत 2047 का लक्ष्य

भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अनुरंजन झा ने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य गांवों और गरीबों को सबल बनाना है। यह पहल भारत को 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी। वहीं, हम पार्टी (HAM) की जिला अध्यक्ष विमला देवी ने भी इस नए कानून का स्वागत किया।

ये रहे उपस्थित

इस मौके पर भाजपा जिला अध्यक्ष बच्चा बाबू कामत, रालोमो जिला अध्यक्ष रंजीत कामत, हम पार्टी जिला अध्यक्ष विमला कुमारी, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अनुरंजन झा एवं सत्यनारायण अग्रवाल, भाजपा महिला प्रकोष्ठ जिला अध्यक्ष कामिनी देवी, दीपक कुमार झा, संदीप दास, पंकज चौधरी, ललन कान्त मिश्रा, विप्लेश ठाकुर, कुमार राजा, बजरंगी दास, प्रदीप ठाकुर, संजय राय, ललन पासवान, वरुण ठाकुर और दीपु मंडल समेत एनडीए के कई वरिष्ठ कार्यकर्ता उपस्थित थे।

गर्भवती करो और 13 लाख ले जाओ- बिहार में ऑल इंडिया प्रेग्नेंट जॉब के नाम पर चल रहे गंदे खेल का भंडाफोड़

नवादा: बिहार के नवादा जिले में पुलिस ने साइबर ठगी के एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसका तरीका सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे। ‘ऑल इंडिया प्रेग्नेंट जॉब सर्विस’ (All India Pregnant Job Service) के नाम पर यह गिरोह बेरोजगार युवाओं को अमीर महिलाओं को गर्भवती करने का ऑफर देता था और बदले में लाखों रुपये का लालच देकर ठगी करता था। पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर दो लोगों को गिरफ्तार किया है।

क्या है पूरा मामला?

साइबर अपराधी अब ठगी के लिए शर्मनाक तरीके अपना रहे हैं। सोशल मीडिया पर एक विज्ञापन तेजी से वायरल हो रहा था, जिसमें दावा किया गया था कि “अगर आप निःसंतान महिलाओं को गर्भवती करते हैं, तो आपको 10 लाख से 13 लाख रुपये तक मिलेंगे।”

इस विज्ञापन को ‘बेबी बर्थ सर्विस’ या ‘प्रेग्नेंट जॉब’ का नाम दिया गया था। इसमें कहा जाता था कि कई अमीर घरों की महिलाएं बच्चे की चाहत रखती हैं और जो पुरुष उनकी मदद करेंगे, उन्हें मुंहमांगी रकम दी जाएगी।

कैसे बनाते थे शिकार? (Modus Operandi)

  • रजिस्ट्रेशन का झांसा: जैसे ही कोई व्यक्ति लालच में आकर दिए गए नंबर पर कॉल या मैसेज करता, उसे सबसे पहले 799 रुपये की रजिस्ट्रेशन फीस जमा करने को कहा जाता था।
  • सिक्योरिटी मनी: रजिस्ट्रेशन के बाद ठग भरोसे में लेने के लिए फर्जी आईडी कार्ड और एग्रीमेंट भेजते थे। फिर ‘सिक्योरिटी मनी’, ‘मेडिकल चेकअप’ और ‘होटल चार्ज’ के नाम पर 5,000 से 20,000 रुपये तक वसूल लिए जाते थे।
  • नंबर ब्लॉक: पैसे ट्रांसफर होते ही ठग अपना मोबाइल नंबर बंद कर देते थे या पीड़ित को ब्लॉक कर देते थे।

नवादा पुलिस की बड़ी कार्रवाई

नवादा के पुलिस अधीक्षक (SP) अभिनव धीमान को इस गिरोह के बारे में गुप्त सूचना मिली थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।

तकनीकी सर्विलांस की मदद से पुलिस ने हिसुआ थाना क्षेत्र के मनवां गांव में छापेमारी की। वहां से पुलिस ने दो साइबर अपराधियों को रंगे हाथों पकड़ा। इनके पास से पुलिस ने कई एंड्रॉइड मोबाइल फोन, प्रिंटर और ठगी में इस्तेमाल होने वाले डेटा बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह बिहार के अलावा अन्य राज्यों के लोगों को भी अपना शिकार बना रहा था।

सावधान: ऐसी कोई ‘जॉब’ नहीं होती

पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे ऐसे लुभावने विज्ञापनों के चक्कर में न पड़ें। ‘प्रेग्नेंट जॉब सर्विस’ पूरी तरह से एक फ्रॉड है। इंटरनेट पर पैसे कमाने का शॉर्टकट ढूंढना आपको भारी पड़ सकता है। अगर आपको ऐसा कोई विज्ञापन दिखे, तो तुरंत साइबर सेल या नजदीकी थाने में इसकी सूचना दें।

केंद्रीय विद्यालय झंझारपुर का पहला सत्र अप्रैल से शुरू, शिक्षा के क्षेत्र में खुलेगा नया अध्याय

झंझारपुर: शिक्षा के क्षेत्र में झंझारपुर और आसपास के निवासियों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है। केंद्रीय विद्यालय झंझारपुर (Kendriya Vidyalaya Jhanjharpur) में शिक्षा का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। विद्यालय प्रशासन और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, विद्यालय का पहला शैक्षणिक सत्र (First Academic Session) इसी साल अप्रैल माह से शुरू होने जा रहा है।

इस घोषणा के बाद से ही क्षेत्र के अभिभावकों और छात्रों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। यह विद्यालय न केवल झंझारपुर बल्कि पूरे मिथिला क्षेत्र के लिए शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी सौगात साबित होगा।

उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा अब घर के पास

केंद्रीय विद्यालय अपने उच्च शैक्षणिक मानकों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पूरे देश में जाने जाते हैं। KV Jhanjharpur के खुलने से अब यहाँ के बच्चों को उच्च गुणवत्ता की केंद्रीय शिक्षा (Central Education) प्राप्त करने के लिए बड़े शहरों या दूर-दराज के इलाकों में नहीं जाना पड़ेगा।

अप्रैल से सत्र शुरू होने का सीधा मतलब है कि स्थानीय छात्र अब सीबीएसई (CBSE) पाठ्यक्रम आधारित आधुनिक शिक्षा अपने ही इलाके में प्राप्त कर सकेंगे।

अभिभावकों और छात्रों में भारी उत्साह

विद्यालय का सत्र अप्रैल से शुरू होने की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई है। अभिभावकों का कहना है कि यह उनके बच्चों के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

  • सस्ती और अच्छी शिक्षा: केंद्रीय विद्यालय में कम फीस में बेहतरीन सुविधाएं और शिक्षा मिलती है।
  • सर्वांगीण विकास: यहाँ पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद और अन्य गतिविधियों पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है।

झंझारपुर के लिए एक बड़ी उपलब्धि

  • विद्यालय का नाम: केंद्रीय विद्यालय झंझारपुर (KV Jhanjharpur)
  • सत्र शुरू होने का समय: अप्रैल (आगामी सत्र)
  • लाभ: स्थानीय छात्रों को गुणवत्तापूर्ण केंद्रीय शिक्षा
  • बोर्ड: सीबीएसई (CBSE)

जल्द ही नामांकन (Admission) से जुड़ी विस्तृत जानकारी और आधिकारिक अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है। अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे ताजा अपडेट के लिए आधिकारिक घोषणाओं पर नजर बनाए रखें।

झंझारपुर JPL-2026 का शानदार आगाज: बेनीपट्टी बुल्स ने फुलपरास फाल्कन को 22 रनों से हराया, निशांत बने मैन ऑफ द मैच

झंझारपुर (मधुबनी): अनुमंडल मुख्यालय स्थित ललित कर्पूरी स्टेडियम में शुक्रवार को क्रिकेट का महाकुंभ ‘जेपीएल-2026’ (JPL-2026) का भव्य आगाज हुआ। टूर्नामेंट के उद्घाटन मैच में बेनीपट्टी बुल्स ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फुलपरास फाल्कन को 22 रनों से हराकर विजयी शुरुआत की।

एसडीएम ने फीता काटकर किया उद्घाटन

टूर्नामेंट का विधिवत उद्घाटन झंझारपुर के एसडीएम कुमार गौरव ने फीता काटकर किया। इस अवसर पर खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए एसडीएम श्री गौरव ने कहा:

​”खेल हमेशा खेल भावना से ही खेला जाना चाहिए। इसमें न किसी की हार होती है और न ही जीत। इस तरह के आयोजनों से ग्रामीण खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने का मौका मिलता है, जिससे वे भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए क्वालीफाई कर सकें।”

उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में एसडीपीओ सुबोध कुमार सिन्हा और प्रिंसिपल अनीता रानी भट्ट भी मौजूद रहीं। जेपीएल क्रिकेट टूर्नामेंट के अध्यक्ष बबलू शर्मा ने अतिथियों का मिथिला की परंपरा के अनुसार पाग और दोपटा पहनाकर भव्य स्वागत किया।

मैच का रोमांच: निशांत के 96 रन पड़े भारी

टूर्नामेंट का पहला मुकाबला बेनीपट्टी बुल्स (Benipatti Bulls) और फुलपरास फाल्कन (Phulparas Falcon) के बीच खेला गया।

  • टॉस और बल्लेबाजी: फुलपरास फाल्कन ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया।
  • बेनीपट्टी की पारी: पहले बल्लेबाजी करते हुए बेनीपट्टी की टीम ने निर्धारित ओवरों में 149 रन का सम्मानजनक स्कोर खड़ा किया। टीम की ओर से निशांत ने धुआंधार बल्लेबाजी करते हुए सर्वाधिक 96 रन बनाए।
  • बेनीपट्टी की पारी: पहले बल्लेबाजी करते हुए बेनीपट्टी की टीम ने निर्धारित ओवरों में 149 रन का सम्मानजनक स्कोर खड़ा किया। टीम की ओर से निशांत ने धुआंधार बल्लेबाजी करते हुए सर्वाधिक 96 रन बनाए।

स्कोरबोर्ड पर एक नजर (Match Highlights)

  • विजेता: बेनीपट्टी बुल्स (22 रनों से जीत)
  • मैन ऑफ द मैच: निशांत (96 रन, बेनीपट्टी)
  • बेस्ट बॉलर (फुलपरास): रौनक कुमार (5 विकेट झटके)
  • बेस्ट बॉलर (बेनीपट्टी): चंदन कुमार (3 विकेट झटके)

मैच के अंत में बेनीपट्टी के खिलाड़ी निशांत को उनकी आक्रामक बल्लेबाजी (96 रन) के लिए ‘मैन ऑफ द मैच’ चुना गया। आयोजन समिति के अध्यक्ष बबलू शर्मा ने उन्हें सम्मानित किया। स्टेडियम में दर्शकों की भारी भीड़ ने मैच का लुत्फ उठाया।