वर्ल्ड चैंपियन कप्तान सूर्या के खिलाफ झा जी का जहरीला वार: क्या 242 रन बनाने के बाद भी सूर्या को भैंस चराने जाना चाहिए?

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नई दिल्ली/अहमदाबाद: टीम इंडिया ने 2026 टी-20 वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास रच दिया है। सूर्यकुमार यादव अब महेंद्र सिंह धोनी और रोहित शर्मा के उस एलीट क्लब में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने भारत को अपनी कप्तानी में विश्व विजेता बनाया। लेकिन, इस ऐतिहासिक जीत के जश्न के बीच सोशल मीडिया पर एक अलग ही ‘जंग’ छिड़ गई है।

​हाल ही में सोशल मीडिया पर ‘झा जी’ जैसे कुछ आलोचकों ने सूर्यकुमार यादव की कप्तानी और उनकी पृष्ठभूमि को लेकर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की है। एक वायरल पोस्ट में उन्हें “भैंस चराने भेजने” तक की बात कही गई है। सवाल यह है कि क्या यह आलोचना खेल पर आधारित है या इसके पीछे कोई गहरी सामाजिक कुंठा छिपी है?

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​आँकड़ों की जुबानी: सूर्या का ‘विराट’ प्रदर्शन

​अगर हम पिछले विश्व कप विजेताओं के प्रदर्शन से तुलना करें, तो सूर्या के आँकड़े उनकी काबिलियत पर मुहर लगाते हैं:

  • एमएस धोनी (2007): 154 रन (भारत बना चैंपियन)
  • रोहित शर्मा (2024): 257 रन (भारत बना चैंपियन)
  • सूर्यकुमार यादव (2026): 242 रन (भारत बना चैंपियन)

​9 पारियों में 242 रन बनाने वाले कप्तान पर जब उंगलियां उठती हैं, तो यह साफ हो जाता है कि समस्या उनके ‘बल्ले’ से नहीं, बल्कि उनकी ‘पहचान’ से है।

​प्रदर्शन बनाम मानसिकता: क्यों निशाने पर हैं सूर्या?

​क्रिकेट जानकारों का मानना है कि जब तथाकथित रसूखदार पृष्ठभूमि के खिलाड़ी फ्लॉप होते हैं, तो अक्सर “खराब फॉर्म” कहकर उन्हें छोड़ दिया जाता है। लेकिन जैसे ही अन्य तबके से आने वाला कोई खिलाड़ी सफलता के शिखर पर पहुँचता है, तो उसकी छोटी सी चूक को भी मुद्दा बना दिया जाता है।

विशेषज्ञ की राय: “सूर्या ने अपनी कप्तानी में न सिर्फ वर्ल्ड कप जीता, बल्कि टीम में एक ऐसा माहौल बनाया जहाँ हर खिलाड़ी सुरक्षित महसूस करता है। उनके खिलाफ इस तरह की भाषा खेल की समीक्षा नहीं, बल्कि व्यक्तिगत द्वेष है।”

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​”झा जी” के बयान पर भड़का फैंस का गुस्सा

​सोशल मीडिया पर सूर्यकुमार यादव के समर्थन में भी लहर चल पड़ी है। फैंस का कहना है कि सूर्या ने अपनी मेहनत से दुनिया के नंबर-1 टी-20 बल्लेबाज का खिताब हासिल किया है। किसी की जाति या पृष्ठभूमि को लेकर उसे अपमानित करना न केवल शर्मनाक है, बल्कि यह खेल की भावना के भी खिलाफ है।

​चमक बरकरार रहेगी

​सूर्यकुमार यादव के लिए यह सिर्फ एक शुरुआत है। वर्ल्ड कप की ट्रॉफी हाथ में लेकर उन्होंने उन तमाम आलोचकों के मुँह पर ताला जड़ दिया है जो उन्हें कमतर आंक रहे थे। सूर्या की चमक उन लोगों की आँखों में चुभ सकती है जिनकी सोच संकीर्ण है, लेकिन करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों के लिए वह एक असली ‘सुपरस्टार’ हैं।

खामेनेई की मौत और भारत में विधवा विलाप: क्या यह केवल शोक है या कुछ और?

खामेनेई की मौत और भारत में 'विधवा विलाप': क्या यह केवल शोक है या कुछ और?

हाल ही में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद भारत के कुछ हिस्सों और सोशल मीडिया के गलियारों में शोक की एक अजीब लहर देखी गई। दुःख व्यक्त करना मानवीय स्वभाव है, लेकिन जब यह दुःख उन लोगों की तरफ से आता है जिन्होंने हमेशा भारत के हितों के विरुद्ध रुख अपनाया हो, तो सवाल उठना लाजिमी है।

भारत विरोध का पुराना इतिहास

खामेनेई और ईरान के नेतृत्व ने समय-समय पर भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने की कोशिश की है। अगर हम इतिहास के पन्ने पलटें, तो कड़वी यादें साफ दिखाई देती हैं:

  • कश्मीर और पाकिस्तान का राग: 2017 में खामेनेई ने कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का खुलकर साथ दिया और दुनिया भर के मुस्लिम नेताओं को भारत के खिलाफ एकजुट होने की अपील की।
  • अनुच्छेद 370 पर बयानबाजी: 2019 में जब भारत ने अपनी संप्रभुता का इस्तेमाल करते हुए धारा 370 को हटाया, तो ईरान ने इसके खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया दी।
  • दिल्ली दंगे और CAA: 2020 में दिल्ली दंगों के दौरान उकसावे वाले बयान हों या CAA को ‘मुस्लिम विरोधी’ बताना, खामेनेई प्रशासन ने हमेशा भारत के आंतरिक फैसलों पर उंगली उठाई।

आश्चर्य की बात यह है कि जो ईरान खुद को मुस्लिमों का मसीहा बताता था, उसने अपनी सत्ता बचाने के लिए सऊदी अरब और UAE जैसे मुस्लिम देशों पर ही ड्रोन हमले करने से परहेज नहीं किया।

‘बहादुरी’ के तमगे और भारतीय राजनीति

सबसे विचलित करने वाली बात यह है कि खामेनेई को ‘शेर’ और ‘महान योद्धा’ जैसे विशेषण केवल कुछ कट्टरपंथियों द्वारा नहीं, बल्कि भारत की मुख्यधारा की राजनीति के पढ़े-लिखे नेताओं द्वारा दिए जा रहे हैं। यह वही नेतृत्व है जो भारत के अपने वीरों पर तो मौन रहता है, लेकिन विदेशी ताकतों के लिए पलकें बिछाए खड़ा रहता है।

गाँव की वो कहानी और आज का मंजर

भारत में खामनेई के लिए इस तरह का “विधवा विलाप” देखकर मुझे मेरे गाँव की एक पुरानी घटना याद आती है।

गाँव में एक युवक की अचानक मृत्यु हो गई। पूरा परिवार सदमे में था। तभी अचानक दूसरे गाँव की एक लड़की आई और शव के पास बैठकर ऐसी दहाड़ें मारकर रोने लगी कि खुद घरवाले भी हैरान रह गए। कोई नहीं जानता था कि उसका रिश्ता क्या है। बाद में पता चला कि उस रुदन के पीछे ‘अवैध प्रेम’ और ‘गर्भवती’ होने का रहस्य छिपा था। उसका रोना तो समझ आता था क्योंकि उसका निजी स्वार्थ और भविष्य उस युवक से जुड़ा था।

लेकिन सवाल यह है… भारत में जो लोग झुंड के झुंड बनाकर छाती पीट रहे हैं, उनका खामेनेई से क्या रिश्ता है? क्या यह केवल धार्मिक सहानुभूति है, या फिर इसके पीछे भी वही ‘गाँव वाली कहानी’ की तरह कोई गहरा वैचारिक और राजनीतिक स्वार्थ छिपा है?

किसी की मृत्यु पर संवेदना व्यक्त करना शिष्टाचार हो सकता है, लेकिन जिस व्यक्ति ने हमेशा आपके देश की अखंडता और निर्णयों को चुनौती दी हो, उसे अपना ‘नायक’ बनाना आत्म-सम्मान पर चोट है। यह “रुदन” श्रद्धा कम और राजनीतिक एजेंडा ज्यादा नजर आता है।

BPSC TRE 4.0: बिहार के युवाओं के लिए खुशखबरी! 44 हजार पदों पर होगी भर्ती, 85% सीटें बिहारी अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित

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  • कुल पद: 44,000 (कक्षा 1 से 12 तक)
  • विज्ञापन: फरवरी अंत या मार्च की शुरुआत में संभव
  • बड़ा बदलाव: 85% सीटें बिहार के मूल निवासियों के लिए आरक्षित
  • आरक्षण: महिलाओं को 35% से 50% तक विशेष छूट

बिहार में सरकारी शिक्षक बनने का सपना देख रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। शिक्षा विभाग ने BPSC TRE-4 (Teacher Recruitment Exam) की तैयारी तेज कर दी है। विभाग ने सभी जिलों से रिक्तियों का ब्योरा जुटा लिया है और जल्द ही 44 हजार नए शिक्षकों की बहाली प्रक्रिया शुरू होने वाली है।

इस बार की भर्ती प्रक्रिया में सबसे बड़ा बदलाव डोमिसाइल नीति (Domicile Policy) को लेकर किया गया है, जिससे बिहार के स्थानीय छात्रों को सीधा फायदा मिलेगा।

कब आएगा विज्ञापन? (BPSC TRE 4.0 Notification Date)

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, शिक्षा विभाग आरक्षण रोस्टर क्लियर करके प्रस्ताव जल्द ही सामान्य प्रशासन विभाग को भेजेगा। वहां से मंजूरी मिलते ही अधियाचना बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) को भेजी जाएगी। उम्मीद जताई जा रही है कि फरवरी के अंतिम सप्ताह या मार्च की शुरुआत में TRE-4 का विज्ञापन जारी कर दिया जाएगा।

कितने पदों पर होगी भर्ती? (Vacancy Details)

इस चरण में कुल 44,000 पदों पर नियुक्ति की जाएगी। रिक्तियों को दो मुख्य वर्गों में बांटा गया है:

  • कक्षा 9 से 12 (High & Plus 2 Schools): लगभग 25,000 पद
  • कक्षा 1 से 8 (Primary & Middle Schools): करीब 19,000 पद

डोमिसाइल नीति में बड़ा बदलाव: बिहार वासियों की बल्ले-बल्ले

TRE-4 की सबसे खास बात यह है कि इस बार ‘बिहारी फर्स्ट’ की नीति अपनाई जा रही है।

  1. 85% सीटें आरक्षित: कुल रिक्तियों में से 85% सीटें विशेष रूप से बिहार के मूल निवासियों के लिए आरक्षित रहेंगी।
  2. बाहरी छात्रों के लिए केवल 15%: अन्य राज्यों के अभ्यर्थी या वे अभ्यर्थी जिन्होंने बिहार के बाहर से मैट्रिक-इंटर की डिग्री ली है, वे केवल शेष 15% सीटों पर ही दावा कर सकेंगे।

यह कदम बिहार के उन युवाओं के लिए गेम-चेंजर साबित होगा जो पिछले चरणों में कुछ अंकों से चूक गए थे।

महिलाओं के लिए आरक्षण (Women Reservation)

बिहार सरकार ने महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देते हुए इस भर्ती में भी महिलाओं को विशेष लाभ दिया है:

  • कक्षा 1 से 5 तक: 50% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित।
  • अन्य कक्षाओं में: 35% आरक्षण का लाभ मिलेगा।

शिक्षा व्यवस्था में होगा सुधार

पिछले तीन चरणों (TRE-1, 2, और 3) में बीपीएससी ने रिकॉर्ड 2 लाख 27 हजार शिक्षकों की नियुक्ति की है। TRE-4 के पूरा होने पर राज्य में सरकारी शिक्षकों की कुल संख्या 6 लाख 40 हजार हो जाएगी।

इसका सीधा असर स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता पर पड़ेगा। वर्तमान में राज्य में शिक्षक-छात्र अनुपात 1:29 है (29 छात्रों पर एक शिक्षक), जो इस भर्ती के बाद सुधरकर 1:27 हो जाएगा।

विधानसभा चुनाव और रोस्टर क्लियरेंस के कारण भर्ती प्रक्रिया में थोड़ी देरी जरूर हुई, लेकिन अब विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में है। बिहार के युवाओं के लिए यह सरकारी नौकरी पाने का एक सुनहरा अवसर है। अभ्यर्थी अपनी तैयारी जारी रखें, क्योंकि विज्ञापन आते ही परीक्षा की घड़ी नजदीक आ जाएगी।

क्राइम अपडेट: ओझौल में हुई लूट का खुलासा, पुलिस ने लूटी गई बाइक और मोबाइल के साथ 3 को दबोचा

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मधुबनी (भैरवस्थान): जिले की भैरवस्थान थाना पुलिस ने 19 जनवरी को HDFC बैंक के सेल्स ऑफिसर के साथ हुई लूट की घटना का सफल उद्भेदन कर लिया है। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और गुप्त सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए घटना में शामिल तीन अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से लूटी गई मोटरसाइकिल, मोबाइल और घटना में प्रयुक्त बाइक भी बरामद कर ली गई है।

क्या थी पूरी घटना?

​घटना 19 जनवरी 2026 की है। वादी ब्रजेश कुमार (25 वर्ष), जो HDFC बैंक झंझारपुर में सेल्स ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं, अपनी पल्सर 220cc बाइक (MP04AM-8214) से क्षेत्र भ्रमण पर थे। दोपहर करीब 1:00 बजे जब वे रामखेतारी गांव से ग्राहक से मिलकर कमला तटबंध होते हुए झंझारपुर लौट रहे थे, तभी ओझौल के पीछे पानी टंकी के पास एक बाइक पर सवार तीन अपराधियों ने उन्हें ओवरटेक किया।

​अपराधियों ने हथियार का भय दिखाकर ब्रजेश कुमार को रोका और उनकी बाइक सहित मोबाइल (जिसमें दो सिम कार्ड लगे थे) छीनकर फरार हो गए। इस संबंध में भैरवस्थान थाना में काण्ड संख्या- 13/26 दर्ज किया गया था।

​पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी

​घटना के बाद पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और मुखबिरों के नेटवर्क को सक्रिय किया। 31 जनवरी 2026 को पुलिस को सूचना मिली कि अपराधी पश्चिमी कमला तटबंध पर ग्राम गढ़िया के पास मौजूद हैं। पुलिस टीम ने घेराबंदी कर तीनों अपराधियों को धर दबोचा।

​पूछताछ के दौरान गिरफ्तार अभियुक्तों ने घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है। पुलिस ने उनकी निशानदेही पर लूटी गई बाइक और मोबाइल बरामद कर लिया है।

गिरफ्तार अपराधियों का विवरण

​गिरफ्तार किए गए अपराधियों की पहचान निम्नलिखित रूप में हुई है:

  • ​विक्रम कुमार (19 वर्ष): पिता- गौरी चौधरी, सा०- झंझारपुर, वार्ड नं०- [वार्ड नंबर], थाना- झंझारपुर।
  • ​धीरज कुमार पाठक उर्फ नटवर (21 वर्ष): पिता- दयानंद पाठक, सा०- जलसैन, थाना- रूद्रपुर।
  • ​राकेश कुमार (19 वर्ष): पिता- शिवनाथ राय, सा०- झंझारपुर (राय जी टोला), वार्ड नं० 04।

​आपराधिक इतिहास:

गिरफ्तार अभियुक्त राकेश कुमार का पूर्व में भी आपराधिक इतिहास रहा है। वह झंझारपुर थाना काण्ड संख्या- 55/25 (धारा- 126(2)/115(2)/109/351(2)/352 BNS 2023) में भी आरोपी रहा है। पुलिस अन्य अभियुक्तों के आपराधिक इतिहास को खंगाल रही है।

​बरामद सामान की सूची

​पुलिस ने अपराधियों के पास से निम्नलिखित सामान जब्त किया है:

  • ​लूटी गई मोटरसाइकिल (Pulsar 220 cc) – 01
  • ​घटना को अंजाम देने में प्रयुक्त मोटरसाइकिल – 01
  • ​मोबाइल फोन – 03

आगे की कार्रवाई

​पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों और संपर्कों का पता लगाने में जुटी है। सभी गिरफ्तार अभियुक्तों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जा रहा है।

मधुबनी: विकास या विनाश? PHED विभाग द्वारा करोड़ों की नई सड़कों को तोड़ने पर बवाल, SP से सहयोग की गुहार, विजिलेंस जाँच की मांग

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​मधुबनी: जिले के खुटौना प्रखंड में विकास कार्यों के बीच आपसी समन्वय की भारी कमी और भ्रष्टाचार की बू आ रही है। मामला ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) और PHED (लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग) के बीच ठन गया है। आरोप है कि RWD द्वारा नई तकनीक से बनाई गई करोड़ों की सड़कों को PHED विभाग द्वारा अवैध रूप से तोड़ा जा रहा है, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुँच रहा है।

FIR दर्ज नहीं होने से बढ़ा मनोबल

जानकारी के मुताबिक, ग्रामीण कार्य विभाग ने अपनी सड़कों को बचाने के लिए स्थानीय थाने में FIR के लिए लिखित आवेदन भी दिया था। लेकिन पुलिस द्वारा मामला दर्ज नहीं किए जाने के कारण संवेदकों और PHED अधिकारियों का मनोबल बढ़ गया है। स्थिति यह है कि अब कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग (फुलपरास) ने पत्र के माध्यम से मधुबनी एसपी (SP Madhubani) से हस्तक्षेप करने और पुलिस बल का सहयोग मांगा है।

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रात के अंधेरे में चल रहा है ‘खेल’?

सामाजिक कार्यकर्ता सुबोध कुमार ने इस पूरे मामले में बड़े भ्रष्टाचार की आशंका जताई है। उनका कहना है, “विभाग द्वारा बार-बार पत्र लिखने और मीडिया में खबरें आने के बावजूद, PHED झंझारपुर के अधिकारी बाज नहीं आ रहे हैं। अब यह काम रात के अंधेरे में चोरी-छिपे किया जा रहा है, जो संदेह पैदा करता है।”

​सुबोध कुमार ने आरोप लगाया है कि यह सब कुछ एडवांस पेमेंट के खेल के कारण हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि PHED के इंजीनियर और संवेदक की मिलीभगत से करोड़ों का भुगतान पहले ही कर दिया गया है, जिसे सही ठहराने के लिए हड़बड़ी में सड़कों को तोड़ा जा रहा है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की निगरानी विभाग (Vigilance Inquiry) से जाँच कराने की मांग की है।

प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग

इस मामले में अब सबकी निगाहें मधुबनी के जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) पर टिकी हैं। क्या प्रशासन दो विभागों की इस लड़ाई में सरकारी संपत्ति को बर्बाद होने से बचा पाएगा?

ऐतिहासिक क्षण: मधुबनी बना देश का नंबर 1 – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने डीएम आनंद शर्मा को किया सम्मानित

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नई दिल्ली/मधुबनी: बिहार के मधुबनी जिले ने लोकतंत्र के महापर्व में अपनी उत्कृष्टता साबित करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर इतिहास रच दिया है। भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) द्वारा आयोजित 16वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर मधुबनी जिले को ‘प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण’ (Training & Capacity Building) की श्रेणी में देश भर में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है।

यह उपलब्धि न केवल मधुबनी प्रशासन की कार्यकुशलता को दर्शाती है, बल्कि यह समूचे बिहार राज्य के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण है।

राष्ट्रपति के हाथों मिला सम्मान

​नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में आयोजित एक भव्य समारोह में, भारत की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने मधुबनी के जिलाधिकारी सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी, श्री आनंद शर्मा को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया। इस दौरान भारतीय लोकतंत्र की मजबूती और निर्वाचन प्रक्रिया में उत्कृष्ट योगदान देने वाले अधिकारियों की सराहना की गई।

मधुबनी क्यों बना ‘नंबर 1’?

मधुबनी जिले को यह सम्मान अनायास ही नहीं मिला है। इसके पीछे जिला निर्वाचन तंत्र की कड़ी मेहनत और नवाचार शामिल हैं। इस पुरस्कार के मुख्य आधार रहे:

  • नवाचारपूर्ण प्रशिक्षण (Innovative Training): चुनाव कर्मियों और मतदाताओं को जागरूक करने के लिए नई तकनीकों और विधियों का प्रयोग।
  • सतत क्षमतावर्धन (Continuous Capacity Building): चुनावी प्रक्रिया को त्रुटिहीन बनाने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों का निरंतर कौशल विकास।
  • उत्कृष्ट टीमवर्क (Excellent Teamwork): जिला प्रशासन के हर विभाग का एक साथ मिलकर लोकतंत्र को मजबूत करने का प्रयास।

लोकतंत्र के लिए प्रेरणा

मधुबनी की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि सही योजना और समर्पण के साथ काम किया जाए, तो सुदूर स्थित जिले भी राष्ट्रीय पटल पर अपनी पहचान बना सकते हैं। जिला निर्वाचन पदाधिकारी श्री आनंद शर्मा के नेतृत्व में मधुबनी की टीम ने जो मानक स्थापित किए हैं, वे अब देश के अन्य जिलों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगे।

यह सम्मान मधुबनी जिला निर्वाचन तंत्र द्वारा किए गए नवाचारपूर्ण प्रशिक्षण, सतत क्षमतावर्धन एवं उत्कृष्ट टीमवर्क की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान है।

बिहार के लिए गर्व का दिन

इस पुरस्कार ने बिहार का मान पूरे देश में बढ़ाया है। यह जीत लोकतंत्र की जीत है और इस बात का संकेत है कि बिहार प्रशासनिक दक्षता और चुनावी प्रबंधन में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। मधुबनी वासियों के लिए आज का दिन उत्सव से कम नहीं है।

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झंझारपुर JPL-2026 का शानदार आगाज: बेनीपट्टी बुल्स ने फुलपरास फाल्कन को 22 रनों से हराया, निशांत बने मैन ऑफ द मैच

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झंझारपुर (मधुबनी): अनुमंडल मुख्यालय स्थित ललित कर्पूरी स्टेडियम में शुक्रवार को क्रिकेट का महाकुंभ ‘जेपीएल-2026’ (JPL-2026) का भव्य आगाज हुआ। टूर्नामेंट के उद्घाटन मैच में बेनीपट्टी बुल्स ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फुलपरास फाल्कन को 22 रनों से हराकर विजयी शुरुआत की।

एसडीएम ने फीता काटकर किया उद्घाटन

टूर्नामेंट का विधिवत उद्घाटन झंझारपुर के एसडीएम कुमार गौरव ने फीता काटकर किया। इस अवसर पर खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए एसडीएम श्री गौरव ने कहा:

​”खेल हमेशा खेल भावना से ही खेला जाना चाहिए। इसमें न किसी की हार होती है और न ही जीत। इस तरह के आयोजनों से ग्रामीण खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने का मौका मिलता है, जिससे वे भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए क्वालीफाई कर सकें।”

उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में एसडीपीओ सुबोध कुमार सिन्हा और प्रिंसिपल अनीता रानी भट्ट भी मौजूद रहीं। जेपीएल क्रिकेट टूर्नामेंट के अध्यक्ष बबलू शर्मा ने अतिथियों का मिथिला की परंपरा के अनुसार पाग और दोपटा पहनाकर भव्य स्वागत किया।

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मैच का रोमांच: निशांत के 96 रन पड़े भारी

टूर्नामेंट का पहला मुकाबला बेनीपट्टी बुल्स (Benipatti Bulls) और फुलपरास फाल्कन (Phulparas Falcon) के बीच खेला गया।

  • टॉस और बल्लेबाजी: फुलपरास फाल्कन ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया।
  • बेनीपट्टी की पारी: पहले बल्लेबाजी करते हुए बेनीपट्टी की टीम ने निर्धारित ओवरों में 149 रन का सम्मानजनक स्कोर खड़ा किया। टीम की ओर से निशांत ने धुआंधार बल्लेबाजी करते हुए सर्वाधिक 96 रन बनाए।
  • बेनीपट्टी की पारी: पहले बल्लेबाजी करते हुए बेनीपट्टी की टीम ने निर्धारित ओवरों में 149 रन का सम्मानजनक स्कोर खड़ा किया। टीम की ओर से निशांत ने धुआंधार बल्लेबाजी करते हुए सर्वाधिक 96 रन बनाए।

स्कोरबोर्ड पर एक नजर (Match Highlights)

  • विजेता: बेनीपट्टी बुल्स (22 रनों से जीत)
  • मैन ऑफ द मैच: निशांत (96 रन, बेनीपट्टी)
  • बेस्ट बॉलर (फुलपरास): रौनक कुमार (5 विकेट झटके)
  • बेस्ट बॉलर (बेनीपट्टी): चंदन कुमार (3 विकेट झटके)

मैच के अंत में बेनीपट्टी के खिलाड़ी निशांत को उनकी आक्रामक बल्लेबाजी (96 रन) के लिए ‘मैन ऑफ द मैच’ चुना गया। आयोजन समिति के अध्यक्ष बबलू शर्मा ने उन्हें सम्मानित किया। स्टेडियम में दर्शकों की भारी भीड़ ने मैच का लुत्फ उठाया।

आंखों की रोशनी कैसे बढ़ाएं? कारण, लक्षण और सुरक्षित घरेलू उपाय (पूरा गाइड)

आंखों की रोशनी कैसे बढ़ाएं कारण लक्षण और सुरक्षित घरेलू उपाय

आज की आधुनिक जीवनशैली में आँखों की रोशनी कम होना एक आम समस्या बन गई है। घंटों कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठना, मोबाइल का अत्यधिक उपयोग, पोषक तत्वों की कमी और तनाव इसके मुख्य कारण हैं। विटामिन A की कमी और आनुवंशिकता (Genetics) भी कम उम्र में चश्मा लगने की बड़ी वजह हैं।

यदि आप भी आँखों की कमजोरी या बढ़ते हुए चश्मे के नंबर से परेशान हैं, तो यहाँ कुछ प्रभावी घरेलू उपचार दिए जा रहे हैं जो आपकी दृष्टि (Eyesight) को सुधारने में मदद कर सकते हैं।

आँखों की रोशनी कम होने के मुख्य कारण

  • पोषक तत्वों का अभाव: आहार में विटामिन A की कमी।
  • डिजिटल स्ट्रेन: घंटों कंप्यूटर, टीवी या मोबाइल का उपयोग।
  • जीवनशैली: तनाव, काम का दबाव और नींद की कमी।
  • अन्य कारक: प्रदूषण, धूल, संक्रमण और केमिकल युक्त हेयर डाई का उपयोग।

आँखों की ज्योति बढ़ाने के रामबाण घरेलू नुस्खे

1. बादाम, सौंफ और मिश्री का मिश्रण

यह नुस्खा आँखों के लिए सबसे प्रसिद्ध माना जाता है।

  • विधि: 7 बादाम, 5 ग्राम मिश्री और 5 ग्राम सौंफ को मिलाकर चूर्ण बना लें। रात को सोने से पहले इसे गुनगुने दूध के साथ लें।
2. देसी घी का प्रयोग

आयुर्वेद में गाय का घी आँखों के लिए अमृत समान है।

  • विधि: रात को सोने से पहले पैर के तलवों और कनपटी पर गाय के घी से मालिश करें। नियमित रूप से जलनेति करना भी अत्यंत लाभकारी है।

3. तांबे के बर्तन का पानी

  • विधि: एक लीटर पानी को तांबे के जग में रात भर रखें और सुबह खाली पेट इस पानी को पिएं। यह शरीर के साथ-साथ आँखों की नसों को भी शक्ति देता है।

4. फिटकरी और गुलाब जल

  • विधि: चने के दाने जितनी फिटकरी को भूनकर (सेंककर) 100 ग्राम गुलाब जल में डालें। रात को सोते समय इसकी 4-5 बूंदें आँखों में डालें और पुतलियों को घुमाएं। यह मोतियाबिंद में भी राहत देता है।

आँखों के लिए कुछ अन्य महत्वपूर्ण टिप्स

  • आंवले का सेवन: आंवले का मुरब्बा दिन में दो बार खाएं या आंवले के पानी से आँखें धोएं।
  • हथेलियों की सिकाई (Palming): तनाव दूर करने के लिए हथेलियों को आपस में रगड़कर आँखों पर रखें।
  • मुँह की लार (Saliva): सुबह उठकर बिना कुल्ला किए मुँह की लार को आँखों में काजल की तरह लगाएं। (यह 6 महीने तक नियमित करने पर लाभ देता है)।
  • अखरोट का तेल: आँखों के आसपास अखरोट के तेल की मालिश करने से चश्मा हटाने में मदद मिलती है।
  • आई एक्सरसाइज: आँखों को क्लॉकवाइज (Clockwise) और एंटी-क्लॉकवाइज घुमाएं।

क्या खाएं और किनसे बचें..?

क्या करें/खाएंकिनसे बचें
अंगूर, केला और गन्ने का रस लें।केमिकल युक्त हेयर डाई और शैम्पू।
7 से 9 घंटे की गहरी नींद लें।देर रात तक जागना।
रोजाना पर्याप्त पानी पिएं।धूल और सीधे तेज धूप।

नोट: आंखों की रोशनी कमजोर होना आज एक सामान्य समस्या बन चुकी है। सही आदतें, संतुलित आहार और नियमित जांच से हम आंखों को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकते हैं। किसी भी गंभीर समस्या में तुरंत नेत्र चिकित्सक से संपर्क करें।

अस्वीकरण (Disclaimer):

महत्वपूर्ण सूचना: इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और सामान्य ज्ञान के उद्देश्य से है। यह किसी भी पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। यहाँ बताए गए घरेलू नुस्खे और तरीके पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। आँखों जैसी संवेदनशील इंद्रिय के मामले में, कोई भी प्रयोग करने से पहले या अपनी स्थिति के अनुसार किसी योग्य नेत्र रोग विशेषज्ञ (Ophthalmologist) या आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। किसी भी उपाय से होने वाले लाभ या हानि के लिए यह वेबसाइट या लेखक जिम्मेदार नहीं होंगे।

मधुबनी: दोस्तों की जांबाजी! CCTV की मदद से खुद खोज निकाली चोरी हुई बाइक, चोर को पकड़कर किया पुलिस के हवाले

मधुबनी, बिहार: आज के दौर में जहाँ लोग अक्सर सामान चोरी होने के बाद उम्मीद छोड़ देते हैं, वहीं मधुबनी के कुछ युवाओं ने अपनी सूझबूझ और एकता से एक मिसाल पेश की है। 12 दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद, पीड़ित और उसके दोस्तों ने न केवल चोरी हुई बाइक का सुराग लगाया, बल्कि चोर को रंगे हाथों पकड़कर सलाखों के पीछे पहुँचाया।

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क्या है पूरा मामला?

घटना की शुरुआत 17 दिसंबर 2025 को हुई थी। बाबुबरही थाना क्षेत्र के बेरल निवासी पप्पू कुमार सिंह अपने निजी काम से मधुबनी मुख्य डाकघर (Head Post Office) आए थे। उन्होंने अपनी सफेद रंग की अपाचे बाइक (नंबर: BR 32 AF 8473) बैंक के बाहर खड़ी की थी। दोपहर करीब 12:45 बजे जब वे वापस लौटे, तो उनकी बाइक वहां से गायब थी।

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CCTV फुटेज बना सबसे बड़ा हथियार

बाइक चोरी होने के बाद पप्पू कुमार सिंह ने तुरंत नगर थाना, मधुबनी में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कांड संख्या 598/25 दर्ज की और एसआई (SI) राजकिशोर राम को जांच सौंपी।

इस बीच, पीड़ित ने हार नहीं मानी और घटनास्थल के आसपास के CCTV फुटेज खंगाले। फुटेज में चोर का चेहरा और चोरी करने का तरीका साफ नजर आ रहा था। पप्पू ने यह फुटेज अपने दोस्तों के साथ साझा की और खुद भी चोर की तलाश में जुट गए।

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बीच सड़क पर फिल्मी अंदाज में पकड़ा गया चोर

ठीक 12 दिन बाद, यानी 29 दिसंबर 2025 को पप्पू और उनके करीब 8 दोस्तों की मेहनत रंग लाई। मधुबनी के V-Mart और पोस्ट ऑफिस के बीच उन्होंने उसी युवक को देखा जो CCTV फुटेज में नजर आया था। दोस्तों ने बिना देर किए उसे चारों तरफ से घेर लिया और पकड़ लिया।

घटना की सूचना तुरंत नगर थाना पुलिस को दी गई। थाना प्रभारी मनोज कुमार सिंह की उपस्थिति में चोर को पुलिस के सुपुर्द किया गया।

कड़ी सजा की मांग

पप्पू कुमार सिंह ने पुलिस को एक ताजा आवेदन देकर मांग की है कि पकड़े गए आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए और उनकी बाइक जल्द से जल्द बरामद कराई जाए। इस साहसी कार्य में पप्पू के साथ चंदन कुमार, रंजीत सिंह, राधे कुमार और अन्य दोस्तों ने अहम भूमिका निभाई।