कोसी के ‘विश्वकर्मा’ बिजेंद्र प्रसाद यादव: सुपौल में विकास की रफ्तार, मधुबनी के नेताओं के लिए आईना?

2

बिहार की राजनीति में नेताओं की कमी नहीं है, लेकिन ‘काम करने वाले’ और ‘सिर्फ नाम करने वाले’ नेताओं के बीच का अंतर कोसी और मिथिलांचल के विकास को देखकर समझा जा सकता है। सुपौल के कद्दावर नेता और बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव (Bijendra Prasad Yadav) को लोग यूं ही ‘कोसी का विश्वकर्मा’ नहीं कहते।

हाल ही में 13 जनवरी 2026 को हुई बिहार कैबिनेट की बैठक ने यह साबित कर दिया है कि अगर नेता में इच्छाशक्ति हो, तो विकास फाइलों में नहीं अटकता। वहीं दूसरी तरफ, मधुबनी (मिथिलांचल) जैसे जिले हैं, जहां बड़े-बड़े दिग्गज नेता होने के बावजूद विकास की वह लकीर नहीं खींची जा सकी जो सुपौल में दिखती है।

एक पत्र और 45 दिनों में काम तमाम: विजेंद्र यादव का ‘सुपौल मॉडल’

बिजेंद्र यादव की कार्यशैली का सबसे बड़ा प्रमाण हमारे पास मौजूद दस्तावेज़ हैं। विकास कार्यों को लेकर उनकी तत्परता देखिए:

  1. दिसंबर 2025 में लिखा पत्र: 1 दिसंबर 2025 को मंत्री विजेंद्र यादव ने बिहार के पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन को दो अलग-अलग पत्र लिखे। उन्होंने सुपौल में मझारी चौक से कुनौली बाजार (नेपाल बॉर्डर) और थरबिटिया रेलवे स्टेशन से गणपतगंज तक की जर्जर सड़कों को पथ निर्माण विभाग द्वारा अधिग्रहित कर चौड़ीकरण करने का आग्रह किया ।
  2. जनवरी 2026 में कैबिनेट की मुहर: पत्र लिखे जाने के मात्र 43 दिनों के भीतर, 13 जनवरी 2026 की कैबिनेट बैठक में इन दोनों योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति मिल गई।

इसे कहते हैं राजनीतिक कद और काम करने का जज्बा। जिस फाइल को पटना के सचिवालय में सरकने में सालों लगते हैं, बिजेंद्र प्रसाद यादव के एक पत्र पर वह महीने भर में धरातल पर उतर आती है।

कैबिनेट से पास हुई 187 करोड़ की दो बड़ी सौगातें

13 जनवरी 2026 को कैबिनेट ने सुपौल के लिए खजाना खोल दिया:

  • प्रोजेक्ट 1: सुपौल पथ प्रमंडल के अंतर्गत मझारी चौक (NH-27) से कुनौली बाजार (नेपाल बॉर्डर) तक (लम्बाई 25.353 कि०मी०)। इसके चौड़ीकरण व मजबूतीकरण के लिए ₹126.23 करोड़ की मंजूरी मिली है । मंत्री जी ने अपने पत्र में इसे “राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण” बताया था ।
  • प्रोजेक्ट 2: थरबिटिया रेलवे स्टेशन से गणपतगंज वाया सिंगआवन, श्रीपुर पथ। इसके लिए ₹61.44 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है । इस सड़क से जाम की समस्या खत्म होगी और कनेक्टिविटी बेहतर होगी ।

मधुबनी और मिथिलांचल: बड़े नेता, लेकिन विकास कहां?

अब तस्वीर का दूसरा पहलू देखिए। कोसी नदी के उस पार सुपौल चमक रहा है, लेकिन इस पार मिथिलांचल का हृदय कहा जाने वाला मधुबनी (Madhubani) आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है।

मधुबनी जिले ने राज्य और केंद्र को कई बड़े कद्दावर नेता दिए हैं। लेकिन धरातल पर स्थिति यह है कि जर्जर सड़कें, जाम और जलजमाव यहां की नियति बन चुकी है। सुपौल में जहां “रेल-रोड कनेक्टिविटी” और “नेपाल बॉर्डर रोड” जैसे प्रोजेक्ट्स पर मिशन मोड में काम हो रहा है, वहीं मधुबनी में आज भी कई परियोजनाएं शिलान्यास के बाद दम तोड़ देती हैं।

सवाल जो जनता पूछ रही है:

  • क्या मधुबनी के नेताओं का कद पटना में इतना बड़ा नहीं है कि वे अपने क्षेत्र के लिए फंड ला सकें?
  • बिजेंद्र प्रसाद यादव जैसा ‘इच्छाशक्ति’ वाला नेतृत्व मिथिलांचल के अन्य जिलों में क्यों नदारद है?
  • सुपौल का रोड नेटवर्क आज बिहार के बेहतरीन नेटवर्क में से एक है, जबकि मधुबनी की सड़कें बदहाल क्यों हैं?

विकास के लिए चाहिए ‘विजेंद्र’ जैसी दृष्टि

सुपौल का विकास इस बात का गवाह है कि नेता अगर चाहे तो अपने क्षेत्र का कायाकल्प कर सकता है। मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने साबित किया है कि उम्र सिर्फ एक नंबर है, असली ऊर्जा काम करने की नीयत में होती है। कोसी क्षेत्र में हो रहा यह ऐतिहासिक कार्य यकीनन उन्हें ‘कोसी का विश्वकर्मा’ की उपाधि के योग्य बनाता है।

अब वक्त आ गया है कि मधुबनी और बाकी मिथिलांचल के नेता सुपौल मॉडल से सीख लें, वरना जनता अब “नाम” नहीं, “काम” का हिसाब मांगेगी।

जुड़े रहें भूमि न्यूज़ लाइव (Bhoomi News Live) के साथ, बेबाक खबरों के लिए।

2 COMMENTS

  1. इस खबर को इतना शेयर करें कि यह मधुबनी के सोए हुए नेताओं तक पहुंचे। उन्हें भी पता चले कि पड़ोस में ‘विकास’ किसे कहते हैं। जनता अब काम का हिसाब मांग रही है! 🔥🗣️

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here