बड़ी खबर: सुपौल के मरौना प्रखंड में होगा सड़कों और पुलों का जाल, उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने दी हरी झंडी

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सुपौल/पटना: बिहार के उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने सुपौल जिले के मरौना प्रखंड की जनता को एक बड़ी सौगात दी है। उपमुख्यमंत्री के निर्देश पर उनके आप्त सचिव वीरेंद्र कुमार ने ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) को मरौना प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में 11 महत्वपूर्ण सड़कों और पुलों के निर्माण के लिए पत्र जारी कर त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

इन प्रमुख योजनाओं को मिली मंजूरी:

​जारी किए गए आधिकारिक पत्र (पत्रांक 172, दिनांक 27/04/2026) के अनुसार, जनहित में निम्नलिखित कार्यों को अति आवश्यक बताया गया है:

  1. तिलयुगा बलान नदी पर पुल: मरौना-निर्मली पथ के योदराही वार्ड नंबर-02 से उत्तर तिलयुगा बलान नदी पर एच.एल. ब्रिज (HL Bridge) और पहुंच पथ का निर्माण।
  2. भलुआही सुरक्षा बांध से कुसगौल: भलुआही सुरक्षा बांध से कुसगौल होते हुए कबरी बांध तक सड़क और पुल का निर्माण।
  3. 8 किलोमीटर लंबी सड़क: मरौना उत्तर के कारारही वार्ड नंबर 10 से मुख्य सड़क राम विलास सिंह के घर से होते हुए कमरैल सीमा तक सड़क निर्माण।
  4. लालपुर से सोहनपुर मार्ग: निर्मली-मरौना मुख्य मार्ग पर लालपुर से सोहनपुर को जोड़ने वाली सड़क में तिलयुगा नदी पर पुल का निर्माण।
  5. महादलित टोलों का जुड़ाव: परसौनी वार्ड नंबर 0-10 महादलित टोला से पंचायत सरकार भवन होते हुए मंगासिहौल वार्ड नंबर 12 तक सड़क निर्माण।
  6. गंनौरा और मधुबनी सीमा: गंनौरा कोरयानी टोला वाया मधुबनी सीमा सड़क में बलान नदी पर पुल का निर्माण।
  7. गंनौरा से महोलिया टोला: गंनौरा वार्ड 04 मुख्य सड़क से महादलित बस्ती और IOCL गैस गोदाम होते हुए महोलिया टोला तक पक्की सड़क।
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विकास की ओर बढ़ते कदम

​इस पत्र के माध्यम से उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण इलाकों में कनेक्टिविटी सुधारना सरकार की प्राथमिकता है। इन पुलों और सड़कों के बन जाने से मरौना प्रखंड के हजारों ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा होगी, खासकर बरसात के समय में तिलयुगा और बलान नदी के कारण होने वाली परेशानियां खत्म होंगी।

​ग्रामीण कार्य विभाग के नोडल ऑफिसर ने भी इस पर अपनी मुहर लगा दी है और संबंधित कार्यपालक अभियंता को आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रेषित कर दिया गया है।

बिजली क्षेत्र के भीष्म पितामह बिजेंद्र यादव का कद बढ़ा, आज सम्राट कैबिनेट में लेंगे डिप्टी सीएम पद की शपथ

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पटना: बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बनी नई सरकार में, बिहार को अंधेरे से उजाले की ओर ले जाने वाले बिजेंद्र प्रसाद यादव को उनके समर्पण का बड़ा इनाम मिलने जा रहा है। आज सुबह 10:50 बजे, वे सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली कैबिनेट में उपमुख्यमंत्री (Deputy CM) पद की शपथ लेंगे।

बिहार के ऊर्जा पुरुष का नया सफर

​बिजेंद्र प्रसाद यादव को बिहार में बिजली सुधारों का जनक माना जाता है। एक दौर था जब बिहार में बिजली के दर्शन दुर्लभ थे, लेकिन बिजेंद्र यादव के ऊर्जा मंत्री रहते बिहार ने लालटेन युग को पीछे छोड़कर LED युग में कदम रखा। गांव-गांव तक बिजली पहुँचाने और जर्जर तारों को बदलने की उनकी मुहिम ने उन्हें राज्य का सबसे भरोसेमंद चेहरा बना दिया है।

36 वर्षों का अटूट विश्वास

  • लगातार प्रतिनिधित्व: बिजेंद्र यादव 1990 से लगातार सुपौल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतते आ रहे हैं।
  • अनुभव का खजाना: करीब 36 वर्षों से सत्ता के शीर्ष पर रहने वाले यादव ने ऊर्जा, वित्त, और वाणिज्य कर जैसे भारी-भरकम विभागों को बखूबी संभाला है।
  • साफ-सुथरी छवि: अपनी कर्मठता और ईमानदार छवि के कारण वे हर गुट और गठबंधन में स्वीकार्य रहे हैं।

आज होगा शपथ ग्रहण

​सुपौल की जनता और बिहार के प्रशासनिक हल्कों में इस खबर से भारी उत्साह है। सम्राट चौधरी के साथ उपमुख्यमंत्री के रूप में उनकी ताजपोशी यह संकेत देती है कि नई सरकार उनके प्रशासनिक अनुभव का लाभ उठाकर बिहार के विकास की गति को और तेज करना चाहती है।

बिहार के हर घर को रोशन करने वाले दिग्गज नेता अब सरकार के सारथी की भूमिका में नजर आएंगे।

सुपौल रेलवे लाइन: विकास की हकीकत बनाम क्रेडिट की सियासत – एक दस्तावेजी पड़ताल

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विकास, विश्वास और ‘क्रेडिट’ का प्रयास: सोशल मीडिया के शोर में गुम होती हकीकत

“विकास होना, विकास के लिये कार्य करना एवं विकास के लिये सतत प्रयास करना सराहनीय, प्रशंसनीय एवं अनुकरणीय कार्य है। परन्तु कुछ लोगों की विशेषता है, उस कार्य को अपने नाम पर घोषित कराने का…”

बिहार के कोसी क्षेत्र, विशेषकर सुपौल में ललितग्राम-बीरपुर नई रेल लाइन (22 किमी) की स्वीकृति के बाद उपजा ताजा राजनीतिक परिदृश्य इन पंक्तियों को अक्षरशः चरितार्थ करता है। विकास एक सतत प्रक्रिया है, लेकिन विडंबना यह है कि आज यह ‘सतत प्रयास’ के बजाय ‘तत्काल श्रेय’ लेने की होड़ में बदल गया है।

सोशल मीडिया: दावों का बाजार

जैसे ही रेलवे बोर्ड से इस बहुप्रतीक्षित परियोजना की फाइल आगे बढ़ी, सोशल मीडिया पर ‘क्रेडिट’ लेने की एक वर्चुअल दौड़ शुरू हो गई। यह दौड़ दिलचस्प है क्योंकि इसमें एक ही काम के कई ‘पिता’ सामने आ रहे हैं। बिना किसी का नाम लिए, अगर हम सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पोस्ट्स पर नज़र डालें, तो स्थिति हास्यास्पद लगती है:

  • दावा नंबर 1: सोशल मीडिया के एक कोने में पोस्ट तैर रही है— “जो कहा, वो कर के दिखाया!”। दावा किया जा रहा है कि यह व्यक्तिगत प्रयासों का फल है और वर्षों के संघर्ष का परिणाम है।
  • दावा नंबर 2: वहीं, दूसरे डिजिटल गलियारों (व्हाट्सएप ग्रुप्स) में “तन-मन रोमांचित” होने की बात कही जा रही है। वहां किसी और ही नेतृत्व के भरोसे और प्रभाव को इस सफलता का कारण बताया जा रहा है।

आम जनता भ्रमित है कि आखिर एक ही रेल लाइन के लिए अलग-अलग खेमों में इतनी बधाइयां क्यों बंट रही हैं? क्या विकास सोशल मीडिया पोस्ट से होता है?

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दस्तावेजी हकीकत: मौन कर्मयोगी

जब शोर थम जाता है, तो कागज बोलते हैं। पूर्व मध्य रेलवे (ECR) का एक आधिकारिक पत्र (Letter No-ECR/CAO/CON/SEC/N/45) सोशल मीडिया के इन हवाई दावों से इतर एक अलग ही कहानी बयां करता है।

रेलवे के इस दस्तावेज में स्पष्ट लिखा है कि प्रोजेक्ट का यह लेटेस्ट स्टेटस अपडेट बिहार सरकार के ऊर्जा एवं योजना मंत्री श्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के साथ हुई “मौखिक चर्चा के अनुपालन” (In compliance of verbal discussion) में जारी किया गया है।

दस्तावेज बताते हैं कि इन तारीखों पर फाइलों को टेबल-दर-टेबल आगे बढ़ाने के पीछे निरंतर प्रशासनिक संवाद और दबाव मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव का था। असली काम खामोशी से फाइलों को आगे बढ़ाने में होता है, न कि सोशल मीडिया पर शोर मचाने में।

श्रेय नहीं, सत्य चाहिए

लोकतंत्र में जनता को यह जानने का हक है कि उनके लिए वास्तव में पसीना कौन बहा रहा है और कौन केवल बहती गंगा में हाथ धो रहा है।

सुपौल और कोसी की जनता के लिए यह समझना जरूरी है कि विकास ‘फेसबुक पोस्ट’ करने से नहीं, बल्कि ‘प्रयास’ करने से आता है। श्रेय लेने की होड़ में नेताओं को यह नहीं भूलना चाहिए कि पब्लिक सब जानती है—कागज पर क्या लिखा है और स्क्रीन पर क्या दिख रहा है। रेलवे का यह पत्र गवाह है कि विकास की गाड़ी को इंजन कौन दे रहा है, और कौन केवल प्लेटफार्म पर सीटी बजा रहा है।

प्रोजेक्ट: ललितग्राम-बीरपुर नई रेल लाइन (22 किमी)।

विवाद: सोशल मीडिया पर कई नेताओं द्वारा श्रेय लेने की होड़।

सच: रेलवे के आधिकारिक पत्र में केवल बिजेंद्र प्रसाद यादव के प्रयासों और चर्चा का उल्लेख है।

संदेश: विकास कार्यों का श्रेय सोशल मीडिया पोस्ट्स से नहीं, आधिकारिक दस्तावेजों से तय होना चाहिए।

कोसी के ‘विश्वकर्मा’ बिजेंद्र प्रसाद यादव: सुपौल में विकास की रफ्तार, मधुबनी के नेताओं के लिए आईना?

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बिहार की राजनीति में नेताओं की कमी नहीं है, लेकिन ‘काम करने वाले’ और ‘सिर्फ नाम करने वाले’ नेताओं के बीच का अंतर कोसी और मिथिलांचल के विकास को देखकर समझा जा सकता है। सुपौल के कद्दावर नेता और बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव (Bijendra Prasad Yadav) को लोग यूं ही ‘कोसी का विश्वकर्मा’ नहीं कहते।

हाल ही में 13 जनवरी 2026 को हुई बिहार कैबिनेट की बैठक ने यह साबित कर दिया है कि अगर नेता में इच्छाशक्ति हो, तो विकास फाइलों में नहीं अटकता। वहीं दूसरी तरफ, मधुबनी (मिथिलांचल) जैसे जिले हैं, जहां बड़े-बड़े दिग्गज नेता होने के बावजूद विकास की वह लकीर नहीं खींची जा सकी जो सुपौल में दिखती है।

एक पत्र और 45 दिनों में काम तमाम: विजेंद्र यादव का ‘सुपौल मॉडल’

बिजेंद्र यादव की कार्यशैली का सबसे बड़ा प्रमाण हमारे पास मौजूद दस्तावेज़ हैं। विकास कार्यों को लेकर उनकी तत्परता देखिए:

  1. दिसंबर 2025 में लिखा पत्र: 1 दिसंबर 2025 को मंत्री विजेंद्र यादव ने बिहार के पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन को दो अलग-अलग पत्र लिखे। उन्होंने सुपौल में मझारी चौक से कुनौली बाजार (नेपाल बॉर्डर) और थरबिटिया रेलवे स्टेशन से गणपतगंज तक की जर्जर सड़कों को पथ निर्माण विभाग द्वारा अधिग्रहित कर चौड़ीकरण करने का आग्रह किया ।
  2. जनवरी 2026 में कैबिनेट की मुहर: पत्र लिखे जाने के मात्र 43 दिनों के भीतर, 13 जनवरी 2026 की कैबिनेट बैठक में इन दोनों योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति मिल गई।

इसे कहते हैं राजनीतिक कद और काम करने का जज्बा। जिस फाइल को पटना के सचिवालय में सरकने में सालों लगते हैं, बिजेंद्र प्रसाद यादव के एक पत्र पर वह महीने भर में धरातल पर उतर आती है।

कैबिनेट से पास हुई 187 करोड़ की दो बड़ी सौगातें

13 जनवरी 2026 को कैबिनेट ने सुपौल के लिए खजाना खोल दिया:

  • प्रोजेक्ट 1: सुपौल पथ प्रमंडल के अंतर्गत मझारी चौक (NH-27) से कुनौली बाजार (नेपाल बॉर्डर) तक (लम्बाई 25.353 कि०मी०)। इसके चौड़ीकरण व मजबूतीकरण के लिए ₹126.23 करोड़ की मंजूरी मिली है । मंत्री जी ने अपने पत्र में इसे “राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण” बताया था ।
  • प्रोजेक्ट 2: थरबिटिया रेलवे स्टेशन से गणपतगंज वाया सिंगआवन, श्रीपुर पथ। इसके लिए ₹61.44 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है । इस सड़क से जाम की समस्या खत्म होगी और कनेक्टिविटी बेहतर होगी ।

मधुबनी और मिथिलांचल: बड़े नेता, लेकिन विकास कहां?

अब तस्वीर का दूसरा पहलू देखिए। कोसी नदी के उस पार सुपौल चमक रहा है, लेकिन इस पार मिथिलांचल का हृदय कहा जाने वाला मधुबनी (Madhubani) आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है।

मधुबनी जिले ने राज्य और केंद्र को कई बड़े कद्दावर नेता दिए हैं। लेकिन धरातल पर स्थिति यह है कि जर्जर सड़कें, जाम और जलजमाव यहां की नियति बन चुकी है। सुपौल में जहां “रेल-रोड कनेक्टिविटी” और “नेपाल बॉर्डर रोड” जैसे प्रोजेक्ट्स पर मिशन मोड में काम हो रहा है, वहीं मधुबनी में आज भी कई परियोजनाएं शिलान्यास के बाद दम तोड़ देती हैं।

सवाल जो जनता पूछ रही है:

  • क्या मधुबनी के नेताओं का कद पटना में इतना बड़ा नहीं है कि वे अपने क्षेत्र के लिए फंड ला सकें?
  • बिजेंद्र प्रसाद यादव जैसा ‘इच्छाशक्ति’ वाला नेतृत्व मिथिलांचल के अन्य जिलों में क्यों नदारद है?
  • सुपौल का रोड नेटवर्क आज बिहार के बेहतरीन नेटवर्क में से एक है, जबकि मधुबनी की सड़कें बदहाल क्यों हैं?

विकास के लिए चाहिए ‘विजेंद्र’ जैसी दृष्टि

सुपौल का विकास इस बात का गवाह है कि नेता अगर चाहे तो अपने क्षेत्र का कायाकल्प कर सकता है। मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने साबित किया है कि उम्र सिर्फ एक नंबर है, असली ऊर्जा काम करने की नीयत में होती है। कोसी क्षेत्र में हो रहा यह ऐतिहासिक कार्य यकीनन उन्हें ‘कोसी का विश्वकर्मा’ की उपाधि के योग्य बनाता है।

अब वक्त आ गया है कि मधुबनी और बाकी मिथिलांचल के नेता सुपौल मॉडल से सीख लें, वरना जनता अब “नाम” नहीं, “काम” का हिसाब मांगेगी।

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सुपौल: प्रेम प्रसंग मामले में 4 साल से फरार अभियुक्त गिरफ्तार, आंध्रामठ पुलिस ने देर रात छातापुर में मारा छापा

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सुपौल/मधुबनी: अंधरामठ थाना पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने करीब चार साल से फरार चल रहे एक वारंटी को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी प्रेम प्रसंग से जुड़े एक पुराने मामले में की गई है।

क्या है पूरा मामला..?

मिली जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान मिथिलेश कुमार दास (27 वर्ष), पिता- महेंद्र लाल दास के रूप में हुई है, जो सुपौल जिले के छातापुर थाना अंतर्गत छातापुर गांव का निवासी है।

थाना अध्यक्ष ने बताया कि वर्ष 2020 में मिथिलेश कुमार दास पर प्रेम प्रसंग के एक मामले में साधारण उपद्रव और अशांति फैलाने को लेकर प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी। मामला दर्ज होने के बाद से ही अभियुक्त गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार फरार चल रहा था।

देर रात हुई कार्रवाई

बीते कई सालों से पुलिस को चकमा दे रहे मिथिलेश की तलाश में आंध्रामठ पुलिस लगातार छापेमारी कर रही थी। अंततः कोर्ट द्वारा जारी आदेश के बाद, पुलिस की एक विशेष टीम ने अभियुक्त के पैतृक आवास (छातापुर, सुपौल) पर देर रात दबिश दी और उसे गिरफ्तार कर लिया।

न्यायिक हिरासत में भेजा गया जेल

पुलिस की कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद अभियुक्त को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। थाना अध्यक्ष ने पुष्टि की है कि अभियुक्त को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।