मधुबनी (लौकहा): बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू करने की दिशा में मधुबनी पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। लौकहा थाना पुलिस द्वारा विभिन्न छापों के दौरान जब्त की गई भारी मात्रा में देशी और विदेशी शराब को सोमवार को वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में नष्ट कर दिया गया।
प्रशासन की मौजूदगी में हुई कार्रवाई
लौकहा थाना परिसर में आयोजित इस विनष्टीकरण प्रक्रिया के दौरान स्थानीय अंचलाधिकारी (CO) और थानाध्यक्ष मुख्य रूप से उपस्थित रहे। पुलिस के अनुसार, शराब के 01 कांड से जुड़ी कुल 198 लीटर शराब को विनष्ट किया गया है। इसमें भारी मात्रा में टेट्रा पैक, बोतलें और देशी शराब के पाउच शामिल थे।
सार्वजनिक संदेश और पारदर्शिता
तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि पुलिस और प्रशासनिक टीम की निगरानी में शराब की बोतलों को जमीन पर फैलाकर नष्ट किया गया। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य शराब तस्करों के बीच कड़ा संदेश भेजना और पुलिस द्वारा जब्त माल के निपटारे में पारदर्शिता बनाए रखना है।
मधुबनी (फुलपरास): जैसे ही मार्च और अप्रैल का महीना आता है, अभिभावकों और सोशल मीडिया पर एक ही चर्चा सबसे ऊपर होती है—निजी स्कूलों की महंगी किताबें। सोशल मीडिया पर अक्सर दावे किए जाते हैं कि ₹50 की किताब ₹500 में बेची जा रही है। इस मुद्दे की गहराई को समझने के लिए ‘भूमि न्यूज़ लाइव’ के पत्रकार कार्तिक कुमार ने मिथिला क्षेत्र के तेजी से बढ़ते स्कूल ‘संस्कार भारती ग्लोबल स्कूल, फुलपरास’ के संस्थापक डॉ. विजय रंजन से खास बातचीत की।
NCERT की उपलब्धता और सिस्टम की चुनौती
चर्चा के दौरान डॉ. विजय रंजन ने स्पष्ट किया कि किताबों के खेल में केवल स्कूलों को दोषी ठहराना सही नहीं है। उन्होंने कुछ प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला:
उपलब्धता का संकट: डॉ. रंजन के अनुसार, NCERT की किताबें मांग के अनुपात में काफी कम छपती हैं। जब सरकारी तंत्र समय पर किताबें उपलब्ध नहीं करा पाता, तब स्कूलों को निजी प्रकाशकों की ओर रुख करना पड़ता है।
समय पर वितरण: उन्होंने याद दिलाया कि सीबीएसई ने पहले स्कूलों से छात्रों का डेटा मांगा था ताकि किताबें पहुंचाई जा सकें, लेकिन वह योजना धरातल पर सफल नहीं रही।
महंगाई या मुनाफाखोरी?
सोशल मीडिया पर वायरल दावों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 20 सालों में सुई से लेकर हवाई जहाज तक, हर चीज़ के दाम 10 गुना बढ़े हैं।
”जब सब्जी, बस किराया और बिजली की दरें बढ़ रही हैं, तो प्रिंटिंग कॉस्ट, मैनपावर और पेपर की कीमत भी बढ़ी है। ₹200 की किताब जिसे बच्चा 12 महीने पढ़ता है, वह मुद्दा बन जाती है, जबकि लोग अन्य शौक पर इससे कहीं ज्यादा खर्च कर देते हैं।”
प्रशासन और सनसनीखेज पत्रकारिता पर सवाल
डॉ. रंजन ने बिना किसी रिसर्च या सर्वे के ‘शिक्षा माफिया’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर बिना यह जांचे कि NCERT की कमी क्यों है, केवल स्कूलों को निशाना बनाना गलत है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को एक ठोस डेटाबेस तैयार करना चाहिए ताकि हर बच्चे तक सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंच सके।
भूमि न्यूज़ लाइव की इस रिपोर्ट से यह साफ है कि किताबों की कीमतों का मुद्दा जितना सरल दिखता है, उतना है नहीं। यह बढ़ती महंगाई, संसाधनों की कमी और सिस्टम की विफलता का एक मिला-जुला नतीजा है। ‘भूमि न्यूज़ लाइव’ प्रशासन से यह अपील करता है कि केवल सनसनी फैलाने के बजाय इस समस्या के बुनियादी कारणों पर ध्यान दिया जाए।
मधुबनी (बिहार): सोशल मीडिया के दौर में खबरें जितनी तेजी से फैलती हैं, उतनी ही तेजी से उनके गलत संदर्भ में पेश किए जाने का खतरा भी बना रहता है। हाल ही में घोघरडीहा थाना क्षेत्र का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसे लेकर पुलिस ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। पुलिस का कहना है कि वीडियो को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना 17 मार्च की है। गश्ती के दौरान पुलिस टीम को एक संदिग्ध वाहन की सूचना मिली थी। जब पुलिस ने कार चालक को रुकने का इशारा किया, तो चालक वाहन रोकने के बजाय उसे तेज गति से गांव की ओर भगा ले गया।
पुलिस टीम ने पीछा करते हुए वाहन को उसके घर तक ट्रेस कर लिया। जब पुलिसकर्मियों ने तलाशी लेने का प्रयास किया, तो वहां मौजूद कुछ स्थानीय लोग उग्र हो गए। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि भीड़ ने पुलिस टीम के साथ बदसलूकी की और तीन पुलिसकर्मियों को बंधक बना लिया।
थानाध्यक्ष की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा
घटना की सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष शुभम कुमार अतिरिक्त पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। भीड़ के गुस्से और तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए उन्होंने अत्यंत सूझबूझ का परिचय दिया।
रणनीतिक कदम: माहौल को शांत करने के लिए थानाध्यक्ष ने स्थानीय गणमान्य लोगों का सहयोग लिया।
मानवीय दृष्टिकोण: उन्होंने भीड़ के सामने स्पष्ट किया कि यदि पुलिस टीम की गलती पाई जाती है, तो जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी।
सफलता: इस बातचीत और शांतिपूर्ण रणनीति के कारण किसी भी बड़ी अप्रिय घटना को टाला जा सका और बंधक पुलिसकर्मियों को सुरक्षित छुड़ा लिया गया।
पुलिस की कार्रवाई और अपील
इस मामले में पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए सूरज कुमार यादव समेत पांच नामजद और पांच अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
थानाध्यक्ष शुभम कुमार ने कहा: “यह कदम पूरी तरह से मानवीय सुरक्षा और रणनीति का हिस्सा था ताकि किसी भी तरह की अनहोनी को रोका जा सके। हम आम लोगों से अपील करते हैं कि सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भ्रामक और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए वीडियो पर ध्यान न दें। केवल सत्यापित जानकारी पर ही विश्वास करें।”
ग्रामीणों का पक्ष
दूसरी ओर, ग्रामीण सूरज कुमार यादव द्वारा कोर्ट में नालसी (Complaint) दायर की गई है। इसमें पुलिस पर महिलाओं के साथ मारपीट और अभद्रता करने का आरोप लगाया गया है। फिलहाल पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है।
Bhoomi News Live निष्पक्ष पत्रकारिता के सिद्धांतों का पालन करता है। घोघरडीहा मामले में पूर्व में प्रसारित वीडियो केवल ग्रामीण पक्ष और मौके की परिस्थितियों पर आधारित था। अब इस मामले में पुलिस प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आया है, जिसे हम अपने पाठकों और दर्शकों के समक्ष पूरी पारदर्शिता के साथ रख रहे हैं। हमारा उद्देश्य किसी भी पक्ष को नीचा दिखाना नहीं, बल्कि घटना की पूरी और सच्ची तस्वीर जनता तक पहुँचाना है।
नोट:यह खबर पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक बयान जो अखबार में आए खबर के आधार पर तैयार की गई है। पूर्व में दिखाए गए ग्रामीण पक्ष के वीडियो और इस प्रशासनिक पक्ष के मिलान के बाद ही पाठक अपनी राय बनाएं। हम मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय का समर्थन करते हैं।
मधुबनी: जिले के खुटौना थाना क्षेत्र में हुए चर्चित अब्दुल मन्नान हत्याकांड में मधुबनी पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस के बढ़ते दबाव और घर पर इश्तहार (कुर्की-जब्ती की पूर्व प्रक्रिया) चस्पा होने के महज 24 घंटे के भीतर इस कांड के दो मुख्य नामजद अभियुक्तों ने माननीय न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
घटना 24 जनवरी 2026 की है, जब खुटौना थाना अंतर्गत बाघा कुसमार निवासी अब्दुल मन्नान (पिता- इसराफिल) की अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में खुटौना थाना कांड संख्या 14/26 दर्ज किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक (SP), मधुबनी ने अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO), फुलपरास के नेतृत्व में एक SIT (विशेष जांच टीम) का गठन किया था।
पुलिस की कार्रवाई और सरेंडर
फरार चल रहे आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए SIT लगातार छापेमारी कर रही थी। जब अपराधी हाथ नहीं आए, तो न्यायालय के आदेश पर उनके घरों पर इश्तहार चिपकाने की कानूनी कार्रवाई की गई। पुलिस की इस सख्त कार्रवाई और भविष्य में होने वाली कुर्की के डर से आरोपियों के पास सरेंडर के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।
सरेंडर करने वाले मुख्य आरोपी:
जयनारायण यादव, पिता- रामलोचन यादव (साकिन- सिसवा बरही, थाना- फुलपरास)
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस कांड का एक अन्य अभियुक्त पहले ही सरेंडर कर चुका है।
पुलिस की सक्रियता की चर्चा
मधुबनी पुलिस द्वारा इश्तहार तामिला के तुरंत बाद मुख्य अभियुक्तों का सरेंडर करना पुलिस की सक्रियता और कानूनी रणनीति की जीत मानी जा रही है। फुलपरास पुलिस अब इन आरोपियों को रिमांड पर लेकर आगे की पूछताछ कर सकती है ताकि हत्या के पीछे के सही कारणों और इसमें शामिल अन्य कड़ियों का पूरी तरह खुलासा हो सके।
मधुबनी: जिले के पंडौल थाना क्षेत्र के भगवतीपुर गांव में हुए सनसनीखेज रमनजी यादव हत्याकांड का पुलिस ने 24 घंटे के भीतर सफल उद्भेदन कर लिया है। पुलिस ने इस मामले में दो मुख्य अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से हत्या में प्रयुक्त हथियार और घटनास्थल से जुड़ी मोटरसाइकिलें भी बरामद की गई हैं।
प्रमुख बिंदु: एक नज़र में
मृतक: रमनजी यादव (निवासी: लोहना, भैरवस्थान)।
गिरफ्तार आरोपी: चंदन यादव और पिताम्बर यादव।
बरामदगी: 1 देशी पिस्टल और 2 मोटरसाइकिल।
जांच टीम: एसपी योगेंद्र कुमार के निर्देश पर गठित विशेष SIT।
कैसे सुलझी मर्डर मिस्ट्री?
घटना के बाद इलाके में व्याप्त तनाव और मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक (SP) योगेंद्र कुमार ने खुद घटनास्थल का जायजा लिया था। त्वरित कार्रवाई के लिए अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (सदर-01) के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।
SIT ने तकनीकी अनुसंधान और मानवीय इनपुट (Human Intelligence) का सहारा लेते हुए भैरवस्थान थाना क्षेत्र में छापेमारी की। पुलिस की सख्ती के आगे घुटने टेकते हुए दोनों आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।
बरामदगी और कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर निम्नलिखित सामान जब्त किया है:
02 मोटरसाइकिल: इसमें से एक बाइक अभियुक्तों की है और दूसरी मृतक रमनजी यादव की, जिसे घटना के बाद पुलिस ने बरामद किया।
01 देशी पिस्टल: जिससे रमनजी यादव पर गोली चलाई गई थी।
मधुबनी पुलिस अपराध नियंत्रण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। SIT की त्वरित कार्रवाई ने यह साबित किया है कि कानून तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।— पुलिस प्रशासन, मधुबनी
फिलहाल, गिरफ्तार चंदन यादव और पिताम्बर यादव को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब हत्या के पीछे के सटीक कारणों और किसी अन्य की संलिप्तता की गहराई से जांच कर रही है। इस सफल उद्भेदन से स्थानीय ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
मधुबनी: जिले में अपराधियों के विरुद्ध चलाई जा रही ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत मधुबनी पुलिस को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। लदनियां थाना क्षेत्र के मरनैया गांव में पुलिस ने छापेमारी कर डकैती की योजना बना रहे सात अपराधियों को अवैध हथियारों और नशीले पदार्थों के साथ गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई में एक विधि विरुद्ध बालक (नाबालिग) को भी हिरासत में लिया गया है।
गुप्त सूचना पर हुई त्वरित कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक (SP) योगेंद्र कुमार को मिली गुप्त सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की गई। सूचना मिली थी कि 10 अप्रैल 2026 की रात मरनैया गांव स्थित शंभु कामत के घर पर कुछ अपराधी इकट्ठा हुए हैं और किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में हैं। सूचना की गंभीरता को देखते हुए थानाध्यक्ष, लदनियां के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया और चिन्हित स्थान पर घेराबंदी कर छापेमारी की गई।
नशे की हालत में मिले अपराधी, बिछौने के नीचे छिपा था काल
जब पुलिस टीम ने शंभु कामत के घर पर दस्तक दी, तो वहां एक चौकी पर 8 लोग बैठकर नशा (ब्राउन शुगर) का सेवन कर रहे थे। पुलिस ने सभी को हिरासत में लेकर जब गहन तलाशी ली, तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। जिस चौकी पर अपराधी बैठे थे, उसी के पुआल के बिछौने के नीचे से पुलिस ने 01 देशी कट्टा, 02 जिंदा कारतूस और 08 तेज धारदार हथियार बरामद किए।
अपराधियों ने स्वीकार किया डकैती का प्लान
पुलिस की कड़ी पूछताछ में पकड़े गए अभियुक्तों ने स्वीकार किया कि वे सभी ब्राउन शुगर का सेवन करने के बाद इलाके में गृहभेदन और डकैती की बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। हालांकि, वारदात को अंजाम देने से पहले ही पुलिस ने उन्हें दबोच लिया।
गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए अपराधियों की पहचान इस प्रकार हुई है:
हथियार: 01 देशी कट्टा, 08 तेज धारदार चाकू/लोहे के हथियार।
कारतूस: 02 जिंदा कारतूस।
नशीला पदार्थ: ब्राउन शुगर जैसा पदार्थ।
अन्य: 02 मोबाइल फोन।
लदनियां थाना पुलिस ने इस मामले में NDPS एक्ट और आर्म्स एक्ट की सुसंगत धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। सभी गिरफ्तार अभियुक्तों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है, जबकि नाबालिग को बाल सुधार गृह भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
भारत और नेपाल के बीच का रिश्ता केवल दो देशों की सीमाओं का नहीं है, बल्कि यह सदियों पुराना रोटी-बेटी का संबंध है। लेकिन पिछले कुछ समय से नेपाल सरकार द्वारा भारतीय वाहनों पर लगाया गया भारी-भरकम प्रवेश शुल्क (Entry Fee) इस पवित्र रिश्ते और आपसी व्यापार की कमर तोड़ रहा है।
अन्यायपूर्ण शुल्क ढांचा
वर्तमान में नेपाल सरकार भारतीय वाहनों से जो शुल्क वसूल रही है, वह किसी भी दृष्टिकोण से संतुलित नहीं है:
दोपहिया वाहन (Bike): ₹200 प्रतिदिन
चार पहिया वाहन (Car): ₹600 प्रतिदिन
कल्पना कीजिए, यदि कोई भारतीय नागरिक अपने निजी वाहन से 5 दिनों के लिए नेपाल जाता है, तो उसे केवल प्रवेश शुल्क के रूप में ₹3000 तक चुकाने पड़ रहे हैं। यह एक मध्यमवर्गीय पर्यटक और सीमावर्ती व्यापारियों के लिए बहुत बड़ा आर्थिक बोझ है।
एकतरफा नियम: समानता कहाँ है?
अन्तर्राष्ट्रीय संबंधों का सबसे बुनियादी नियम होता है— पारस्परिकता (Reciprocity)।
जब भारत में नेपाली नंबर प्लेट के वाहनों को बिना किसी प्रतिदिन के शुल्क के आने-जाने की अनुमति है, तो नेपाल की तरफ से यह एकतरफा वसूली क्यों?
भारत ने हमेशा बड़े भाई की भूमिका निभाते हुए सीमाएं खुली रखी हैं, लेकिन नेपाल के इस नए वित्तीय नियमों से सीमावर्ती इलाकों (जैसे मधुबनी, रक्सौल, जोगबनी) के लोगों में भारी आक्रोश है।
पर्यटन और व्यापार पर संकट
धार्मिक पर्यटन: अयोध्या से पशुपतिनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह शुल्क एक बाधा बन गया है।
स्थानीय बाजार: सीमा के दोनों ओर के बाजार एक-दूसरे पर निर्भर हैं। भारी टैक्स के कारण छोटे व्यापारियों की आवाजाही कम हो गई है, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है।
पारिवारिक रिश्ते: सीमावर्ती क्षेत्रों में शादियां और रिश्तेदारियां आम हैं। अब रिश्तेदारों से मिलने जाने के लिए भी ‘टैक्स’ देना पड़ रहा है।
मांग: समाधान की जरूरत
स्थानीय लोगों का शासन और प्रशासन से दो मुख्य मांगें:
समान नियम लागू हों: या तो भारत सरकार भी नेपाली वाहनों पर समान शुल्क लागू करे, या फिर नेपाल इस शुल्क को तुरंत वापस ले।
टैक्स-फ्री कॉरिडोर: कम से कम 10-20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्थानीय निवासियों के लिए आवाजाही पूरी तरह टैक्स फ्री की जाए।
भारत-नेपाल संबंध केवल कागजी संधियों पर नहीं, बल्कि आपसी विश्वास पर टिके हैं। आर्थिक लाभ के लिए इस विश्वास को दांव पर लगाना उचित नहीं है। नेपाल सरकार को इस जनविरोधी फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए ताकि हमारी साझी संस्कृति और व्यापार फलता-फुलता रहे।
बिहार के मधुबनी जिले के बाबूबरही प्रखंड स्थित ऐतिहासिक पुरास्थल बलिराजगढ़ एक बार फिर चर्चा में है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा की जा रही खुदाई में यहाँ 2500 साल पुरानी सभ्यता के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। इस खोज ने मिथिला के प्राचीन और गौरवशाली इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।
मुख्य झलकियां
पुरास्थल का नाम: बलिराजगढ़ (बाबूबरही, मधुबनी)।
काल: शुंग-कुषाण काल (Sunga-Kushan Period) से जुड़े अवशेष।
प्रमुख खोज: ईंटों से बनी विशाल दीवारें, मिट्टी के बर्तन और प्राचीन किले के अवशेष।
क्षेत्रफल: 176 एकड़ में फैला हुआ है यह ऐतिहासिक स्थल।
क्या मिला खुदाई में?
ASI पटना सर्किल के अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. हरि ओम शरण के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम दो अलग-अलग स्थानों पर खुदाई कर रही है।
ऐतिहासिक खोज: इस स्थल की खोज अंग्रेज अधिकारी एसडीओ जॉर्ज ग्रियर्सन ने की थी। इसके ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए 1938 में ही इसे ‘राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्थल’ घोषित किया गया था।
किले के अवशेष: खुदाई के दौरान विशाल किले की बाहरी संरचना का हिस्सा और मजबूत दीवारें मिली हैं।
दैनिक जीवन की वस्तुएं: उत्तरी भाग में खुदाई के दौरान मिट्टी के बर्तन, मनके (Beads) और प्राचीन ईंटों की संरचनाएं प्राप्त हुई हैं।
पोर्ट यार्ड: खुदाई में 20 फीट चौड़ाई और 30 फीट लंबाई के पोर्ट यार्ड भी मिले हैं, जिनका अध्ययन बारीकी से किया जा रहा है।
पौराणिक संबंध: कहा जाता है कि भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार के समय, भक्त प्रह्लाद के पुत्र विरोचन और पौत्र दानवीर राजा बलि का यह गढ़ था।
लौकही/मधुबनी: बिहार की राजनीति और समाजवाद के एक समर्पित सिपाही, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के संस्थापक सदस्य और मधुबनी के प्रथम जिला अध्यक्ष विनोद कुमार गोईत (यादव) अब हमारे बीच नहीं रहे। शुक्रवार को पटना के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस लेने के बाद, कल उनका पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया। उनके निधन की खबर से पूरे मिथिलांचल में शोक की लहर दौड़ गई है।
दिग्गज नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
विनोद बाबू के निधन के बाद आज उनके पैतृक निवास लौकही प्रखंड अंतर्गत सोनवर्षा गांव में श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा।
पूर्व आपदा मंत्री लक्ष्मेश्वर राय: पूर्व मंत्री सह राजद नेता लक्ष्मेश्वर राय ने परिजनों से मिलकर शोक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विनोद बाबू का जाना राजद परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति है और ईश्वर परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति दें।
पूर्व विधायक भारत भूषण मंडल: लौकहा विधानसभा के पूर्व विधायक भारत भूषण मंडल भी अंतिम यात्रा में शामिल होने पहुँचे। उन्होंने विनोद बाबू को याद करते हुए भावुक स्वर में कहा, “विनोद गोईत जी राजद के एक सच्चे और निष्ठावान सिपाही थे। पार्टी चाहे कितने भी कठिन दौर से गुजरी हो या कितनी भी कमजोर स्थिति में रही हो, उन्होंने कभी पार्टी का दामन नहीं छोड़ा। उनका समर्पण नए कार्यकर्ताओं के लिए मिसाल रहेगा।”
संघर्षों से भरा रहा राजनीतिक सफर
2 अप्रैल 1956 को जन्मे विनोद कुमार गोईत एक प्रतिष्ठित जमींदार परिवार से थे। उनके पिता स्वर्गीय राजदेव गोईत थे और वे लौकहा के पूर्व विधायक कुलदेव गोईत के भतीजे थे।
शिक्षा: वे पटना साइंस कॉलेज के छात्र रहे और B.Sc. जूलॉजी ऑनर्स की डिग्री ली।
क्रांतिकारी जीवन: 1974 के जेपी आंदोलन के दौरान सक्रियता के कारण वे ‘मीसा’ के निशाने पर रहे और नेपाल में रहकर आंदोलन की लौ जलाए रखी।
लालू यादव के विश्वसनीय: राजद की स्थापना के समय से ही वे लालू प्रसाद यादव के बेहद करीब रहे। वर्तमान में वे प्रदेश राजकीय कार्यकारिणी सदस्य और ‘घोषिण मंच भारत-नेपाल‘ के मुख्य सभापति थे।
सोनबर्षा में हुआ अंतिम संस्कार
कल शाम 3:00 बजे मधुबनी के सोनबर्षा में हजारों की संख्या में समर्थकों, परिजनों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। उपस्थित जनसमूह ने नम आँखों से “विनोद बाबू अमर रहें” के नारों के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी।
Bihar Panchayat Election 2026: बिहार में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission, Bihar) ने प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए प्रपत्र-1 (Prapatra-1) के प्रकाशन के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश और समय-सारणी जारी कर दी है।
आयोग के सचिव मुकेश कुमार सिन्हा द्वारा सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को भेजे गए पत्र के अनुसार, वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की जनसंख्या और सीमा का निर्धारण किया जाएगा।
क्यों खास है इस बार का प्रपत्र-1?
नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा कई ग्रामीण क्षेत्रों को नगर निकायों (नगर परिषद/नगर पंचायत) में शामिल किया गया है। इसके कारण कई पंचायतों की जनसंख्या और भौगोलिक स्थिति में बदलाव आया है। इसी को ध्यान में रखते हुए आयोग ने नए सिरे से प्रपत्र-1 तैयार करने का निर्णय लिया है।
मुख्य बातें:
यह पूरी प्रक्रिया Digital माध्यम से संपन्न होगी।
जनसंख्या के आंकड़े वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर होंगे।
इसका मुख्य उद्देश्य आरक्षण (Reservation) का सही निर्धारण करना है।
प्रपत्र-1 के प्रकाशन की महत्वपूर्ण तिथियां (Schedule)
आयोग द्वारा जारी समय-सारणी के अनुसार, प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में पूरी होगी:
कार्यक्रम
निर्धारित तिथि
प्रपत्र-1 का प्रारूप प्रकाशन
27 अप्रैल 2026
आपत्तियां दर्ज करने की अवधि
27 अप्रैल से 11 मई 2026 तक
आपत्तियों का निष्पादन (Disposal)
27 अप्रैल से 14 मई 2026 तक
अपील वादों का निष्पादन
18 मई से 22 मई 2026 तक
प्रपत्र-1 का अंतिम प्रकाशन
25 मई 2026
जिला गजट में प्रकाशन
29 मई 2026
अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम
आयोग BSWAN के माध्यम से विभिन्न प्रमंडलों के अधिकारियों (DPRO, BDO, IT Manager आदि) को ऑनलाइन प्रशिक्षण देगा:
13 अप्रैल: पटना और तिरहुत प्रमंडल।
16 अप्रैल: मगध, भागलपुर और मुंगेर प्रमंडल।
17 अप्रैल: पूर्णिया, कोशी, दरभंगा और सारण प्रमंडल।
आम जनता की जानकारी के लिए प्रारूप का प्रकाशन निम्नलिखित स्थानों पर किया जाएगा:
ग्राम पंचायत/पंचायत समिति सदस्य के लिए: ग्राम पंचायत कार्यालय और प्रखंड (Block) कार्यालय।
जिला परिषद सदस्य के लिए: प्रखंड कार्यालय, अनुमंडल कार्यालय और जिला पदाधिकारी का कार्यालय।
ऑनलाइन: राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर।
आपत्ति कैसे दर्ज करें?
यदि किसी नागरिक को जनसंख्या के आंकड़ों या क्षेत्र निर्धारण पर कोई आपत्ति है, तो वे निर्धारित अवधि (27 अप्रैल से 11 मई) के भीतर संबंधित प्राधिकृत पदाधिकारी के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। आपत्तियों की जांच के बाद ही अंतिम सूची का प्रकाशन किया जाएगा।
बिहार पंचायत चुनाव 2026 की यह शुरुआती प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी के आधार पर भविष्य में सीटों का आरक्षण तय होगा। यदि आपकी पंचायत का कुछ हिस्सा शहर में शामिल हुआ है, तो आपको प्रपत्र-1 के प्रकाशन के समय अपने वार्ड की स्थिति की जांच जरूर करनी चाहिए।