झंझारपुर/मधुबनी: झंझारपुर की मिट्टी के तेजतर्रार पत्रकार और ‘भूमि न्यूज़ लाइव’ को अपनी मेहनत से सींचने वाले सुमित चौधरी की माता जी के आकस्मिक निधन से आज मानवता और पत्रकारिता जगत मर्माहत है। यह केवल एक परिवार की क्षति नहीं है, बल्कि उस प्रेरणापुंज का अंत है जिसने समाज को एक निर्भीक पत्रकार दिया।
संघर्षों की जननी और सफलता का आधार
सुमित चौधरी ने शून्य से शिखर तक का जो सफर तय किया, उसमें उनकी माता जी का योगदान किसी हिमालय से कम नहीं था। भूमि न्यूज़ लाइव को झंझारपुर में स्थापित करने और उसे जनता की आवाज़ बनाने के पीछे सुमित के जुनून के साथ-साथ उनकी माँ की दुआओं का पहरा था। उन्होंने न केवल अपने बेटे को संस्कार दिए, बल्कि विषम परिस्थितियों में भी ‘सत्य’ के मार्ग पर अडिग रहने का साहस प्रदान किया।
सुमित चौधरी जी की माता जी का जाना पत्रकारिता जगत के लिए एक व्यक्तिगत क्षति है। सुमित जी ने जिस ईमानदारी से ‘भूमि न्यूज़’ को आगे बढ़ाया, उसमें उनकी माता जी के संस्कारों की स्पष्ट झलक दिखती है। ईश्वर उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें।- कार्तिक कुमार, पत्रकार, भूमि न्यूज लाइव
भूमि न्यूज़ लाइव की पूरी टीम और समस्त पत्रकार साथी इस वज्रपात की घड़ी में सुमित चौधरी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।
मधुबनी (फुलपरास): बिहार के समाज में आज एक बहुत बड़ा और कड़वा सवाल खड़ा हो गया है—क्या किसी की जान बचाना या मदद के लिए आगे बढ़ना अपनी मौत को दावत देना है? अभी दो दिन पहले फारबिसगंज की उस वीडियो ने देशभर को झकझोर दिया था, जहाँ लोग एक युवक का सिर कटते हुए देख रहे थे और मोबाइल से वीडियो बना रहे थे। तब हर तरफ से आवाज आई कि इंसानियत मर चुकी है। लेकिन शनिवार शाम मधुबनी के फुलपरास में जो हुआ, उसने बता दिया कि अगर इंसानियत जिंदा रहती है, तो उसकी कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है।
क्या है सुगापट्टी की पूरी घटना?
मामला फुलपरास थाना क्षेत्र के सुगापट्टी का है। यहाँ के भारती चौक (ग्रामीण हाट) पर दो गुटों के बीच विवाद हो रहा था। माहौल गरमाता देख 40 वर्षीय जितेंद्र यादव ने एक जागरूक नागरिक और पड़ोसी का धर्म निभाने की सोची। वे बीच-बचाव करने पहुँचे ताकि झगड़ा शांत हो सके। लेकिन अपराधियों को उनकी यह इंसानियत रास नहीं आई।
आरोप है कि अपराधियों ने बीच-बचाव कर रहे जितेंद्र को ही निशाना बनाया और उनके मासूम बेटे के सामने ही उनकी कनपटी पर पिस्टल सटाकर गोली मार दी। जितेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई।
फारबिसगंज बनाम फुलपरास: समाज के सामने धर्मसंकट
यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि उस भरोसे का कत्ल है जो समाज को जोड़कर रखता है।
फारबिसगंज की घटना: लोग मूकदर्शक बने रहे क्योंकि उन्हें अपनी जान का डर था। पूरे देश ने उन्हें बुजदिल कहा।
फुलपरास की घटना: यहाँ जितेंद्र यादव ने हिम्मत दिखाई, बुजदिल नहीं बने और मदद के लिए आगे आए। नतीजा? उन्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।
ऐसे में सवाल उठता है कि आम आदमी क्या करे? अगर वह मदद न करे तो ‘पत्थर दिल’ और अगर मदद के लिए बढ़े तो अपराधियों का अगला शिकार।
अनाथ हुए चार बच्चे, कौन है जिम्मेदार?
दिल्ली में मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालने वाले जितेंद्र यादव अपने पीछे पत्नी और चार नाबालिग बच्चों को छोड़ गए हैं। परिजनों ने नीतीश और सरोज नामक व्यक्तियों पर इस जघन्य हत्याकांड का आरोप लगाया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और छापेमारी जारी है, लेकिन क्या पुलिस की ये कार्रवाई जितेंद्र के बच्चों को उनका पिता लौटा पाएगी?
दम तोड़ती व्यवस्था और बढ़ता डर
सुगापट्टी की इस वारदात ने अपराधियों के मन से कानून का खौफ पूरी तरह खत्म होने की पुष्टि कर दी है। जब बीच-बचाव करने वाले ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो समाज में मदद शब्द लुप्त हो जाएगा। यह घटना हमारे सिस्टम और पुलिस प्रशासन के लिए एक खुली चुनौती है
मधुबनी (बिहार): बिहार के मधुबनी जिले के बाबूबरही थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ एक 17 वर्षीय नाबालिग हिंदू लड़की के अपहरण को लेकर परिजनों ने स्थानीय थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई है। परिजनों का आरोप है कि लड़की को धर्म परिवर्तन की नीयत से अगवा किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
घटना 29 मार्च 2026 की है। आवेदन के अनुसार, पीड़िता (प्रीति कुमारी, काल्पनिक नाम) प्रतिदिन की तरह दोपहर करीब 2 बजे ‘DNA साइंस कोचिंग सेंटर, बरैल चौक’ पढ़ने के लिए घर से निकली थी। जब वह शाम 6 बजे तक घर वापस नहीं लौटी, तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की।
कोचिंग सेंटर में पूछताछ करने पर पता चला कि वह शाम 4 बजे ही वहां से निकल गई थी। खोजबीन के दौरान स्थानीय स्तर पर जानकारी मिली कि दो अज्ञात लड़कों ने उसे मोटरसाइकिल पर जबरन बैठाया और कहीं ले गए।
सोशल मीडिया और इंस्टाग्राम रील से मिला सुराग
परिजनों ने पुलिस को दिए आवेदन में बताया कि 03 अप्रैल 2026 को इंस्टाग्राम पर एक फोटो और रील देखी गई। यह इंस्टाग्राम आईडी ak_fashion_boy (अहसान अली) के नाम से बताई जा रही है। सोशल मीडिया पर मिले इन सुरागों के आधार पर परिजनों को विश्वास हो गया कि उनकी बेटी का अपहरण साजिश के तहत किया गया है।
इन लोगों पर लगा है आरोप
पीड़ित परिवार ने इस मामले में मो० चाँद, मो० निहाल (दोनों के पिता मो० मुस्तफा), मो० मुस्तफा (पिता मो० मंसूर) और यासमीन खातून के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई है। परिजनों का स्पष्ट आरोप है कि आरोपियों ने धर्म परिवर्तन कराने के उद्देश्य से उनकी नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर अगवा किया है और इस कृत्य में पूरा परिवार शामिल है।
पुलिस की कार्रवाई
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बाबूबरही पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए FIR No. 189/26 दर्ज कर ली है। पुलिस ने BNS (भारतीय न्याय संहिता) की विभिन्न धाराओं (137(2), 96, 3(5)) के तहत मामला पंजीकृत किया है।
जांच अधिकारी: S.I. लाल बाबू राय को इस केस की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
वर्तमान स्थिति: पुलिस तकनीकी साक्ष्यों और सोशल मीडिया इनपुट्स के आधार पर लड़की की बरामदगी के लिए छापेमारी कर रही है।
स्थानीय लोगों में आक्रोश
इस घटना के बाद से क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति देखी जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों और हिंदू संगठनों ने दोषियों की जल्द गिरफ्तारी और लड़की की सुरक्षित वापसी की मांग की है। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर काफी चर्चा हो रही है।
नोट: प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी भी सूचना को साझा न करें।
मधुबनी (फुलपरास): जैसे ही मार्च और अप्रैल का महीना आता है, अभिभावकों और सोशल मीडिया पर एक ही चर्चा सबसे ऊपर होती है—निजी स्कूलों की महंगी किताबें। सोशल मीडिया पर अक्सर दावे किए जाते हैं कि ₹50 की किताब ₹500 में बेची जा रही है। इस मुद्दे की गहराई को समझने के लिए ‘भूमि न्यूज़ लाइव’ के पत्रकार कार्तिक कुमार ने मिथिला क्षेत्र के तेजी से बढ़ते स्कूल ‘संस्कार भारती ग्लोबल स्कूल, फुलपरास’ के संस्थापक डॉ. विजय रंजन से खास बातचीत की।
NCERT की उपलब्धता और सिस्टम की चुनौती
चर्चा के दौरान डॉ. विजय रंजन ने स्पष्ट किया कि किताबों के खेल में केवल स्कूलों को दोषी ठहराना सही नहीं है। उन्होंने कुछ प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला:
उपलब्धता का संकट: डॉ. रंजन के अनुसार, NCERT की किताबें मांग के अनुपात में काफी कम छपती हैं। जब सरकारी तंत्र समय पर किताबें उपलब्ध नहीं करा पाता, तब स्कूलों को निजी प्रकाशकों की ओर रुख करना पड़ता है।
समय पर वितरण: उन्होंने याद दिलाया कि सीबीएसई ने पहले स्कूलों से छात्रों का डेटा मांगा था ताकि किताबें पहुंचाई जा सकें, लेकिन वह योजना धरातल पर सफल नहीं रही।
महंगाई या मुनाफाखोरी?
सोशल मीडिया पर वायरल दावों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 20 सालों में सुई से लेकर हवाई जहाज तक, हर चीज़ के दाम 10 गुना बढ़े हैं।
”जब सब्जी, बस किराया और बिजली की दरें बढ़ रही हैं, तो प्रिंटिंग कॉस्ट, मैनपावर और पेपर की कीमत भी बढ़ी है। ₹200 की किताब जिसे बच्चा 12 महीने पढ़ता है, वह मुद्दा बन जाती है, जबकि लोग अन्य शौक पर इससे कहीं ज्यादा खर्च कर देते हैं।”
प्रशासन और सनसनीखेज पत्रकारिता पर सवाल
डॉ. रंजन ने बिना किसी रिसर्च या सर्वे के ‘शिक्षा माफिया’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर बिना यह जांचे कि NCERT की कमी क्यों है, केवल स्कूलों को निशाना बनाना गलत है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को एक ठोस डेटाबेस तैयार करना चाहिए ताकि हर बच्चे तक सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंच सके।
भूमि न्यूज़ लाइव की इस रिपोर्ट से यह साफ है कि किताबों की कीमतों का मुद्दा जितना सरल दिखता है, उतना है नहीं। यह बढ़ती महंगाई, संसाधनों की कमी और सिस्टम की विफलता का एक मिला-जुला नतीजा है। ‘भूमि न्यूज़ लाइव’ प्रशासन से यह अपील करता है कि केवल सनसनी फैलाने के बजाय इस समस्या के बुनियादी कारणों पर ध्यान दिया जाए।
मधुबनी (बिहार): सोशल मीडिया के दौर में खबरें जितनी तेजी से फैलती हैं, उतनी ही तेजी से उनके गलत संदर्भ में पेश किए जाने का खतरा भी बना रहता है। हाल ही में घोघरडीहा थाना क्षेत्र का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसे लेकर पुलिस ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। पुलिस का कहना है कि वीडियो को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना 17 मार्च की है। गश्ती के दौरान पुलिस टीम को एक संदिग्ध वाहन की सूचना मिली थी। जब पुलिस ने कार चालक को रुकने का इशारा किया, तो चालक वाहन रोकने के बजाय उसे तेज गति से गांव की ओर भगा ले गया।
पुलिस टीम ने पीछा करते हुए वाहन को उसके घर तक ट्रेस कर लिया। जब पुलिसकर्मियों ने तलाशी लेने का प्रयास किया, तो वहां मौजूद कुछ स्थानीय लोग उग्र हो गए। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि भीड़ ने पुलिस टीम के साथ बदसलूकी की और तीन पुलिसकर्मियों को बंधक बना लिया।
थानाध्यक्ष की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा
घटना की सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष शुभम कुमार अतिरिक्त पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। भीड़ के गुस्से और तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए उन्होंने अत्यंत सूझबूझ का परिचय दिया।
रणनीतिक कदम: माहौल को शांत करने के लिए थानाध्यक्ष ने स्थानीय गणमान्य लोगों का सहयोग लिया।
मानवीय दृष्टिकोण: उन्होंने भीड़ के सामने स्पष्ट किया कि यदि पुलिस टीम की गलती पाई जाती है, तो जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी।
सफलता: इस बातचीत और शांतिपूर्ण रणनीति के कारण किसी भी बड़ी अप्रिय घटना को टाला जा सका और बंधक पुलिसकर्मियों को सुरक्षित छुड़ा लिया गया।
पुलिस की कार्रवाई और अपील
इस मामले में पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए सूरज कुमार यादव समेत पांच नामजद और पांच अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
थानाध्यक्ष शुभम कुमार ने कहा: “यह कदम पूरी तरह से मानवीय सुरक्षा और रणनीति का हिस्सा था ताकि किसी भी तरह की अनहोनी को रोका जा सके। हम आम लोगों से अपील करते हैं कि सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भ्रामक और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए वीडियो पर ध्यान न दें। केवल सत्यापित जानकारी पर ही विश्वास करें।”
ग्रामीणों का पक्ष
दूसरी ओर, ग्रामीण सूरज कुमार यादव द्वारा कोर्ट में नालसी (Complaint) दायर की गई है। इसमें पुलिस पर महिलाओं के साथ मारपीट और अभद्रता करने का आरोप लगाया गया है। फिलहाल पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है।
Bhoomi News Live निष्पक्ष पत्रकारिता के सिद्धांतों का पालन करता है। घोघरडीहा मामले में पूर्व में प्रसारित वीडियो केवल ग्रामीण पक्ष और मौके की परिस्थितियों पर आधारित था। अब इस मामले में पुलिस प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आया है, जिसे हम अपने पाठकों और दर्शकों के समक्ष पूरी पारदर्शिता के साथ रख रहे हैं। हमारा उद्देश्य किसी भी पक्ष को नीचा दिखाना नहीं, बल्कि घटना की पूरी और सच्ची तस्वीर जनता तक पहुँचाना है।
नोट:यह खबर पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक बयान जो अखबार में आए खबर के आधार पर तैयार की गई है। पूर्व में दिखाए गए ग्रामीण पक्ष के वीडियो और इस प्रशासनिक पक्ष के मिलान के बाद ही पाठक अपनी राय बनाएं। हम मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय का समर्थन करते हैं।
मधुबनी: जिले के पंडौल थाना क्षेत्र के भगवतीपुर गांव में हुए सनसनीखेज रमनजी यादव हत्याकांड का पुलिस ने 24 घंटे के भीतर सफल उद्भेदन कर लिया है। पुलिस ने इस मामले में दो मुख्य अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से हत्या में प्रयुक्त हथियार और घटनास्थल से जुड़ी मोटरसाइकिलें भी बरामद की गई हैं।
प्रमुख बिंदु: एक नज़र में
मृतक: रमनजी यादव (निवासी: लोहना, भैरवस्थान)।
गिरफ्तार आरोपी: चंदन यादव और पिताम्बर यादव।
बरामदगी: 1 देशी पिस्टल और 2 मोटरसाइकिल।
जांच टीम: एसपी योगेंद्र कुमार के निर्देश पर गठित विशेष SIT।
कैसे सुलझी मर्डर मिस्ट्री?
घटना के बाद इलाके में व्याप्त तनाव और मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक (SP) योगेंद्र कुमार ने खुद घटनास्थल का जायजा लिया था। त्वरित कार्रवाई के लिए अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (सदर-01) के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।
SIT ने तकनीकी अनुसंधान और मानवीय इनपुट (Human Intelligence) का सहारा लेते हुए भैरवस्थान थाना क्षेत्र में छापेमारी की। पुलिस की सख्ती के आगे घुटने टेकते हुए दोनों आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।
बरामदगी और कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर निम्नलिखित सामान जब्त किया है:
02 मोटरसाइकिल: इसमें से एक बाइक अभियुक्तों की है और दूसरी मृतक रमनजी यादव की, जिसे घटना के बाद पुलिस ने बरामद किया।
01 देशी पिस्टल: जिससे रमनजी यादव पर गोली चलाई गई थी।
मधुबनी पुलिस अपराध नियंत्रण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। SIT की त्वरित कार्रवाई ने यह साबित किया है कि कानून तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।— पुलिस प्रशासन, मधुबनी
फिलहाल, गिरफ्तार चंदन यादव और पिताम्बर यादव को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब हत्या के पीछे के सटीक कारणों और किसी अन्य की संलिप्तता की गहराई से जांच कर रही है। इस सफल उद्भेदन से स्थानीय ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
बिहार के मधुबनी जिले के बाबूबरही प्रखंड स्थित ऐतिहासिक पुरास्थल बलिराजगढ़ एक बार फिर चर्चा में है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा की जा रही खुदाई में यहाँ 2500 साल पुरानी सभ्यता के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। इस खोज ने मिथिला के प्राचीन और गौरवशाली इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।
मुख्य झलकियां
पुरास्थल का नाम: बलिराजगढ़ (बाबूबरही, मधुबनी)।
काल: शुंग-कुषाण काल (Sunga-Kushan Period) से जुड़े अवशेष।
प्रमुख खोज: ईंटों से बनी विशाल दीवारें, मिट्टी के बर्तन और प्राचीन किले के अवशेष।
क्षेत्रफल: 176 एकड़ में फैला हुआ है यह ऐतिहासिक स्थल।
क्या मिला खुदाई में?
ASI पटना सर्किल के अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. हरि ओम शरण के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम दो अलग-अलग स्थानों पर खुदाई कर रही है।
ऐतिहासिक खोज: इस स्थल की खोज अंग्रेज अधिकारी एसडीओ जॉर्ज ग्रियर्सन ने की थी। इसके ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए 1938 में ही इसे ‘राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्थल’ घोषित किया गया था।
किले के अवशेष: खुदाई के दौरान विशाल किले की बाहरी संरचना का हिस्सा और मजबूत दीवारें मिली हैं।
दैनिक जीवन की वस्तुएं: उत्तरी भाग में खुदाई के दौरान मिट्टी के बर्तन, मनके (Beads) और प्राचीन ईंटों की संरचनाएं प्राप्त हुई हैं।
पोर्ट यार्ड: खुदाई में 20 फीट चौड़ाई और 30 फीट लंबाई के पोर्ट यार्ड भी मिले हैं, जिनका अध्ययन बारीकी से किया जा रहा है।
पौराणिक संबंध: कहा जाता है कि भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार के समय, भक्त प्रह्लाद के पुत्र विरोचन और पौत्र दानवीर राजा बलि का यह गढ़ था।
मधुबनी (लौकही): मिथिला की धरती न सिर्फ अपनी संस्कृति के लिए, बल्कि यहाँ के ज़मींदारों द्वारा बनवाई गई भव्य इमारतों के लिए भी जानी जाती है। मधुबनी जिले के लौकही बाज़ार में स्थित एक ऐसी ही विशाल हवेली आज भी सिर उठाए खड़ी है, जिसे स्थानीय लोग गया प्रसाद की हवेली के नाम से जानते हैं। लगभग एक सदी पुरानी यह इमारत आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है।
ब्रिटिश और भारतीय कला का अनूठा संगम
इस हवेली का निर्माण 1920 से 1940 के बीच माना जाता है। उस समय के प्रतिष्ठित ज़मींदार और व्यापारी गया प्रसाद ने इसे बनवाया था। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी वास्तुकला है। इसमें भारतीय पारंपरिक शैली के साथ-साथ ब्रिटिश दौर की झलक भी साफ दिखती है। हवेली की दीवारों पर लगी विदेशी नीली टाइल्स और बारीक नक्काशी आज भी इसकी भव्यता की गवाही देती है।
क्षेत्र का ‘पावर सेंटर’ और रहस्यों की चर्चा
बुजुर्ग बताते हैं कि आज़ादी से पहले और उसके कुछ समय बाद तक, यह हवेली इस पूरे क्षेत्र का पावर सेंटर हुआ करती थी। इलाके के बड़े सामाजिक और व्यापारिक फैसले इसी हवेली के आंगन में लिए जाते थे। स्थानीय पुरानी कहानियों के अनुसार, इस हवेली के भीतर गुप्त गलियारे (Secret Passages) और भूलभुलैया जैसे कमरे भी हैं, जिनका उपयोग सुरक्षा या गुप्त कार्यों के लिए किया जाता था।
संरक्षण की दरकार: जीर्ण-शीर्ण हो रही है धरोहर
देख-रेख के अभाव में अब यह ऐतिहासिक इमारत कमज़ोर होती जा रही है। छत से पानी टपकना और दीवारों का दरकना शुरू हो गया है। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो लौकही के इतिहास का यह जीता-जागता पन्ना हमेशा के लिए बंद हो सकता है।
झंझारपुर (मधुबनी): अनुमंडल क्षेत्र में बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाने और कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए एसडीपीओ (SDPO) सुबोध कुमार सिन्हा ने सभी थानाध्यक्षों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में डीएसपी का सख्त तेवर देखने को मिला, जहाँ उन्होंने कर्तव्य में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों को सीधे तौर पर चेतावनी दी।
50 गंभीर मामलों की हुई गहन पड़ताल
बैठक के दौरान हत्या, लूट, बलात्कार, पॉक्सो (POCSO) और एससी-एसटी एक्ट जैसे 50 सबसे संवेदनशील और गंभीर मामलों की फाइलें खंगाली गईं। डीएसपी ने एक-एक केस की प्रगति रिपोर्ट ली और जांच में देरी पर नाराजगी जताई। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजने में कोई कोताही न बरती जाए।
अंधराठाढ़ी और भेजा थाना के प्रदर्शन पर नाराजगी
कार्यशैली के आधार पर थानों की रैंकिंग भी सामने आई। समीक्षा में पाया गया कि:
अव्वल: झंझारपुर और लखनौर थाना कांडों के निष्पादन (Disposal) में सबसे आगे रहे।
फिसड्डी: अंधराठाढ़ी और भेजा थाना का प्रदर्शन सबसे खराब रहा।
इन थानों के थानाध्यक्षों को कड़ी फटकार लगाते हुए डीएसपी ने कहा कि अगर जल्द ही सुधार नहीं दिखा, तो विभागीय कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
जेल से बाहर आए अपराधियों पर ‘स्पेशल नजर’
डीएसपी सुबोध कुमार सिन्हा ने बताया कि पुलिस ने क्षेत्र के 8-10 ऐसे अपराधियों को चिह्नित किया है जो लगातार वारदातों को अंजाम देते हैं। इसके अलावा, जो अपराधी हाल ही में जेल से छूटकर बाहर आए हैं, उनकी दैनिक गतिविधियों की निगरानी के लिए विशेष निर्देश दिए गए हैं।
मार्च महीने का रिपोर्ट कार्ड
कुल दर्ज मामले: 156
निष्पादित मामले: 186 (पुराने मामलों को मिलाकर)
रणनीति: वाहन जांच, रोको-टोको अभियान और रात में गश्त बढ़ाने के निर्देश।
बैठक में सर्किल इंस्पेक्टर बीके बृजेश समेत अररिया संग्राम, भैरवस्थान, झंझारपुर आरएस, लखनौर, रुद्रपुर, मधेपुर और भेजा के थानाध्यक्ष मुख्य रूप से उपस्थित थे।
मधेपुर (मधुबनी)। झंझारपुर-मधुबनी पुलिस ने मधेपुर थाना क्षेत्र के एक निजी आवासीय विद्यालय में हुई छात्र की संदिग्ध मौत के मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए स्कूल संचालक को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने यह कार्रवाई सीसीटीवी फुटेज और मृतक के परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर की है।
क्या है पूरा मामला?
बीते 4 अप्रैल 2026 को सुबह करीब 10:00 बजे पुलिस को सूचना मिली कि ‘ज्ञान ज्योति आवासीय विद्यालय’ में एक 12 वर्षीय छात्र, विकेश कुमार, की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। स्कूल प्रशासन छात्र को अस्पताल ले गया था, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की गंभीरता को देखते हुए मधेपुर थाना पुलिस और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी झंझारपुर ने तुरंत मौके पर पहुँचकर जांच शुरू की।
परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप
मृतक छात्र की माँ, सुनीता देवी (निवासी: सुंदरी, थाना: भेजा, मधुबनी), ने थाने में आवेदन देकर स्कूल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार, उनके 12 वर्षीय बेटे विकेश कुमार को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि एक सोची-समझी साजिश के तहत उनके बेटे की हत्या की गई है।
पुलिस जांच और गिरफ्तारी
पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार:
मामले में संलिप्त मुख्य आरोपी और स्कूल संचालक ऋषि कुमार कर्ण (पिता: बिनोद कुमार कर्ण) को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
घटनास्थल पर FSL की टीम को बुलाया गया और साक्ष्य जुटाए गए।
स्कूल परिसर में लगे CCTV कैमरों की सघन जांच की गई।
सीसीटीवी फुटेज में मिले साक्ष्यों और परिजनों के बयान के आधार पर पुलिस ने कांड संख्या 85/26 दर्ज की है।
धाराओं के तहत कार्रवाई
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1), 61(2) और 3(5) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस अन्य अज्ञात स्कूल कर्मियों की भूमिका की भी जांच कर रही है ताकि इस दुखद घटना के पीछे की पूरी सच्चाई सामने आ सके।