Satna Jail Love Story: जेलर साहिबा ने प्यार के लिए छोड़ी नौकरी, 1 पूर्व कैदी के लिए बनीं मुस्लिम से हिंदू!

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Satna Jail Love Story

Satna Jail Love Story: कहते हैं कि प्यार अंधा होता है, लेकिन मध्य प्रदेश से सामने आई यह प्रेम कहानी बताती है कि प्यार न केवल अंधा होता है, बल्कि यह करियर, समाज और धर्म की हर दीवार को ढहाने की ताकत भी रखता है। सतना जेल में तैनात रही एक महिला जेल प्रहरी और एक सजायाफ्ता कैदी की प्रेम कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर रियल लाइफ वीर-ज़ारा के नाम से सनसनी मचा रही है।

यह कहानी है फिरोजा खातून और धर्मेंद्र सिंह की, जिन्होंने तमाम बंदिशों को दरकिनार कर एक-दूसरे का हाथ थाम लिया है।

वारंट अनुभाग से शुरू हुई गुपचुप दास्तान: Satna Jail Love Story की वो अनसुनी कहानी

इस कहानी की शुरुआत सतना सेंट्रल जेल की उन ऊँची और सर्द दीवारों के बीच हुई, जहाँ अनुशासन ही एकमात्र धर्म होता है। फिरोजा खातून यहाँ जेल प्रहरी के पद पर तैनात थीं और वारंट इंचार्ज का काम देख रही थीं। वहीं, छतरपुर निवासी धर्मेंद्र सिंह हत्या के एक मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा था। अच्छे आचरण की वजह से धर्मेंद्र को कार्यालय के कागजी कामों में मदद के लिए लगाया गया।

यहीं से शुरू हुआ मुलाकातों और बातचीत का वह सिलसिला, जो ड्यूटी की मर्यादा को पार कर गया। जेल के भीतर जहाँ कैदियों पर नजर रखी जाती है, वहीं एक प्रहरी का दिल एक कैदी के लिए धड़कने लगा।

नौकरी गई, पर प्यार नहीं छूटा: Satna Jail Love Story के लिए फिरोजा ने दी वर्दी की कुर्बानी

एक सरकारी कर्मचारी और कैदी के बीच पनप रहे इस रिश्ते की खबर जब जेल प्रशासन को लगी, तो हड़कंप मच गया। जेल विभाग के सख्त नियमों के मुताबिक यह गंभीर अनुशासनहीनता थी। नतीजा यह हुआ कि फिरोजा खातून को अपनी सरकारी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। लेकिन फिरोजा ने हार नहीं मानी। उन्होंने साबित कर दिया कि उनके लिए वर्दी से ज्यादा कीमती वह रिश्ता था जो जेल की सलाखों के पीछे शुरू हुआ था।

रिहाई का इंतजार और फिर सनातन धर्म में विलय: Satna Jail Love Story का सबसे बड़ा मोड़

धर्मेंद्र सिंह अपनी 14 साल की सजा पूरी कर करीब 4 साल पहले जेल से बाहर आया। बाहर आने के बाद भी दोनों का प्रेम कम नहीं हुआ। फिरोजा ने एक बड़ा फैसला लेते हुए न केवल धर्मेंद्र से शादी करने की ठानी, बल्कि अपना धर्म परिवर्तन कर सनातन धर्म अपना लिया। उन्होंने मुस्लिम रीति-रिवाजों को छोड़ हिंदू पद्धति से विवाह करने का संकल्प लिया।

मंदिर में गूंजे मंत्र, संगठनों ने किया कन्यादान

बीते 5 मई को छतरपुर के लवकुशनगर स्थित एक मैरिज गार्डन में यह शादी बेहद फिल्मी अंदाज में संपन्न हुई। चूँकि यह शादी अंतरधार्मिक थी, इसलिए फिरोजा का परिवार उनके साथ नहीं था। ऐसे में समाज के लोगों और बजरंग दल व विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने मोर्चा संभाला। विहिप के जिला उपाध्यक्ष राजबहादुर मिश्रा ने पिता की भूमिका निभाई और अपनी पत्नी के साथ मिलकर फिरोजा का कन्यादान किया।

लाल जोड़े में सजी फिरोजा और दूल्हा बने धर्मेंद्र ने अग्नि के सात फेरे लिए और एक-दूसरे के गले में वरमाला डाली।

सोशल मीडिया पर क्यों है चर्चा?

सोशल मीडिया पर क्यों है चर्चा?

  • विपरीत ध्रुव: एक कानून की रक्षक रही महिला और एक पूर्व अपराधी का मिलन।
  • बलिदान: प्यार के लिए एक महिला का अपनी सरकारी नौकरी को ठुकरा देना।
  • धार्मिक एकता: मुस्लिम युवती का हिंदू रीति-रिवाज से विवाह और हिंदू संगठनों द्वारा सहयोग।

फिलहाल, यह जोड़ा छतरपुर में अपनी नई जिंदगी की शुरुआत कर चुका है। सोशल मीडिया पर जहाँ कुछ लोग इसे सच्चे प्रेम की जीत बता रहे हैं, वहीं कुछ इसे समाज और सिस्टम के लिए एक चुनौतीपूर्ण मिसाल भी मान रहे हैं। लेकिन इतना तो तय है कि सतना की गलियों से शुरू हुई यह दास्तान लंबे समय तक लोगों के जेहन में बनी रहेगी।

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