कपकपाती ठंड में बुजुर्गों को मिला सहारा: प्रो. रामदेव भंडारी की जयंती पर अमेरिका से आए सहयोग से बंटे कम्बल

झंझारपुर: पूर्व राज्यसभा सांसद और प्रकांड विद्वान प्रोफेसर रामदेव भंडारी की जयंती के अवसर पर झंझारपुर थाना चौक स्थित उनकी आदमकद प्रतिमा स्थल पर एक भव्य श्रद्धांजलि और सेवा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर जहां एक ओर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया गया, वहीं दूसरी ओर भीषण ठंड को देखते हुए समाज के जरूरतमंद और असहाय बुजुर्गों के बीच कम्बल का वितरण किया गया।

गरीबों के सच्चे रहनुमा थे प्रोफेसर भंडारी: दीपक कुमार शर्मा

कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे युवा सामाजिक कार्यकर्ता दीपक कुमार शर्मा ने प्रोफेसर भंडारी को याद करते हुए उन्हें पिछड़ा, अतिपिछड़ा, दलित, शोषित और वंचित समाज का सच्चा हितैषी बताया। दीपक शर्मा ने कहा, “प्रोफेसर रामदेव भंडारी भले ही आज हमारे बीच सशरीर उपस्थित नहीं हैं, लेकिन उनके विचार और आदर्श आज भी हम सभी को प्रेरित कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि समाज में एकता, समरसता और भाईचारा बनाए रखने के लिए प्रोफेसर भंडारी की विचारधारा पर चलना अत्यंत आवश्यक है। उनके विचारों को समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुँचाना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी, ताकि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सकें।

234284

अमेरिका से आया सहयोग, गांव में खिली मुस्कान

इस पुनीत कार्य के पीछे एक विशेष भावनात्मक पहलू भी जुड़ा है। बताया गया कि प्रोफेसर भंडारी के तीन पुत्र हैं, जिनमें से उनके सबसे छोटे पुत्र, जो अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी में रहते हैं, उनके द्वारा ही इस कम्बल वितरण कार्यक्रम का आयोजन करवाया गया। उनकी अनुपस्थिति में दीपक कुमार शर्मा के नेतृत्व में यह सेवा कार्य संपन्न हुआ।

प्रोफेसर भंडारी: एक नजर में

  • जन्म: 5 जनवरी 1940​
  • निधन: 21 सितंबर 2018
  • ​विशेष: उनकी प्रतिमा का अनावरण बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव के कर-कमलों द्वारा किया गया था। वे जीवन भर शोषितों और गरीबों की आवाज बनकर उभरे।

नागिन घर-घर के: नई मैथिली फिल्म यूट्यूब पर रिलीज, जानें स्टार कास्ट और पूरी जानकारी

234622

मैथिली सिनेमा के दर्शकों के लिए आज का दिन बेहद खास है। बहुप्रतीक्षित मैथिली फिल्म “नागिन घर-घर के” (Nagin Ghar Ghar Ke) अब आधिकारिक तौर पर यूट्यूब पर रिलीज हो गई है। यह फिल्म ‘ग्रीन लीफ मोशन पिक्चर्स’ के बैनर तले तैयार की गई है और इसे पारिवारिक ड्रामा श्रेणी में एक बड़ी फिल्म माना जा रहा है।

फिल्म की कहानी और मुख्य विषय

​”नागिन घर-घर के” महज एक फिल्म नहीं, बल्कि हर मध्यवर्गीय परिवार की एक झलक है। फिल्म की कहानी मुखिया महेश यादव के परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है। कहानी में मोड़ तब आता है जब घर की शांति संपत्ति के बंटवारे और आपसी कलह की भेंट चढ़ने लगती है।

फिल्म का शीर्षक ‘नागिन’ प्रतीकात्मक रूप से घर में पनपने वाली ईर्ष्या और नफरत को दर्शाता है, जो हंसते-खेलते परिवार को जहर की तरह डस लेती है।

फिल्म की मुख्य कास्ट और क्रू (Cast & Crew)

फिल्म की सफलता के पीछे एक बड़ी टीम का हाथ है, जिसकी पूरी जानकारी यहाँ दी गई है:

  • मुख्य कलाकार: फिल्म में सोनू राज, सोनू झा, सुधांशु सिंह, पूजा सिंह, तुलिका भारती, रूपा सिंह, रूपेश चंद यादव(पूर्व प्रखंड प्रमुख, फूलपुरास) और आरती जैसे कलाकारों ने मुख्य भूमिकाएँ निभाई हैं।
  • निर्देशक: अभिषेक रंजन।
  • निर्माता: राज कुमार राजा।
  • ​लेखक: भरत प्रसाद गुप्ता और राज कुमार राजा।
  • संगीत: ब्रजेश भारती और रोहित भास्कर।
  • ​गीतकार: देव कृष्ण यादव।
  • ​गायक: कुंज बिहारी मिश्र, सन्नू कुमार, राजीव रंजन, कल्पना मंडल, नेहा झा, टी प्रणव प्रियंक और देव कृष्ण यादव।

तकनीकी टीम

  • पटकथा और संवाद: सोनू राज और रवि रोशन।
  • ​संपादक: शिव थारू।
  • ​कोरियोग्राफर: विक्रांत कुमार।
  • ​बैकग्राउंड म्यूजिक: शिवम लाल यादव.​साउंड इंजीनियर: पीयूष प्रभाकर।

फिल्म की कहानी का सार

​”नागिन घर-घर के” एक सशक्त पारिवारिक कहानी है जो घर-घर की समस्याओं, रिश्तों में आती कड़वाहट और फिर उनके समाधान को दर्शाती है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे छोटे-छोटे विवाद एक खुशहाल परिवार के लिए ‘नागिन’ की तरह घातक साबित होते हैं और अंततः संस्कारों की जीत होती है।

फिल्म कहाँ देखें?

यह फिल्म अब ‘Bharti Series’ के यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध है। आप इसे मुफ्त में देख सकते हैं और मैथिली सिनेमा का समर्थन कर सकते हैं।

यह फिल्म अब ‘Bharti Series’ के यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध है। आप इसे मुफ्त में देख सकते हैं और मैथिली सिनेमा का समर्थन कर सकते हैं।

फिल्म देखने के लिए यहाँ क्लिक करें: नागिन घर-घर के – Full Movie

निर्भया कांड की 13वीं बरसी: 6 दरिंदे, एक चलती बस और वो चीखें जो आज भी दिल्ली की सड़कों पर गूँजती हैं!

227317

नई दिल्ली: 16 दिसंबर 2012—भारतीय इतिहास का वो काला दिन जिसे कोई भी देशवासी कभी नहीं भूल सकता। आज इस वीभत्स घटना को पूरे 13 साल बीत चुके हैं। दिल्ली की सड़कों पर एक चलती बस में जो दरिंदगी हुई थी, उसने न केवल एक बेटी की जान ली, बल्कि पूरे देश के सिस्टम और कानून को कटघरे में खड़ा कर दिया था। आज 13वीं बरसी पर देश एक बार फिर अपनी उस बेटी को याद कर रहा है और सवाल पूछ रहा है कि क्या वाकई महिलाएं अब सुरक्षित हैं?

वो खौफनाक रात: क्या हुआ था 16 दिसंबर को..?

13 साल पहले आज ही के दिन, एक पैरामेडिकल छात्रा अपने दोस्त के साथ फिल्म देखकर घर लौट रही थी। मुनिरका से बस लेने के बाद, बस में सवार 6 दरिंदों ने उसके साथ जो हैवानियत की, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। गंभीर हालत में उसे इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया, जहां 29 दिसंबर को उसने दम तोड़ दिया।

लंबी कानूनी लड़ाई और इंसाफ

निर्भया के माता-पिता ने अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। इस मामले में:

  • कुल आरोपी: 6 (राम सिंह, मुकेश सिंह, विनय शर्मा, अक्षय ठाकुर, पवन गुप्ता और एक नाबालिग)।
  • सजा: मुख्य आरोपी राम सिंह ने जेल में आत्महत्या कर ली थी। नाबालिग को 3 साल सुधार गृह में रखने के बाद रिहा कर दिया गया।
  • फांसी: 20 मार्च 2020 को तिहाड़ जेल में चारों दोषियों (मुकेश, विनय, अक्षय और पवन) को फांसी दी गई।

कानून में क्या हुए बदलाव..?

निर्भया कांड के बाद देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के कारण सरकार को ‘जस्टिस वर्मा कमेटी’ बनानी पड़ी। इसके बाद ‘क्रिमिनल लॉ (अमेंडमेंट) एक्ट 2013’ पास हुआ, जिसमें:

  • बलात्कार के लिए कड़ी सजा और कुछ मामलों में मृत्युदंड का प्रावधान किया गया।
  • ​’निर्भया फंड‘ की स्थापना की गई ताकि महिला सुरक्षा के प्रोजेक्ट्स को फंड मिल सके।
  • फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन हुआ।

आज की जमीनी हकीकत

13 साल बीत जाने के बाद भी क्या हालात बदले हैं? हाल ही में कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना हो या देश के अन्य हिस्सों से आने वाली खबरें, ये साबित करती हैं कि कानून सख्त होने के बावजूद अपराधी बेखौफ हैं। ‘निर्भया फंड’ के सही इस्तेमाल और पुलिस व्यवस्था में सुधार को लेकर आज भी विशेषज्ञ सवाल उठाते हैं।

निर्भया की 13वीं बरसी हमें याद दिलाती है कि न्याय केवल फांसी की सजा तक सीमित नहीं होना चाहिए। असली न्याय तब होगा जब देश की हर सड़क, हर दफ्तर और हर घर महिलाओं के लिए पूरी तरह सुरक्षित होगा। निर्भया आज एक नाम नहीं, बल्कि महिला सुरक्षा के लिए चल रही एक कभी न खत्म होने वाली जंग का प्रतीक बन चुकी है।

Note: This script is curated based on the reporting trends of Patrika and general news standards for digital platforms.