केंद्रीय विद्यालय झंझारपुर का पहला सत्र अप्रैल से शुरू, शिक्षा के क्षेत्र में खुलेगा नया अध्याय

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झंझारपुर: शिक्षा के क्षेत्र में झंझारपुर और आसपास के निवासियों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है। केंद्रीय विद्यालय झंझारपुर (Kendriya Vidyalaya Jhanjharpur) में शिक्षा का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। विद्यालय प्रशासन और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, विद्यालय का पहला शैक्षणिक सत्र (First Academic Session) इसी साल अप्रैल माह से शुरू होने जा रहा है।

इस घोषणा के बाद से ही क्षेत्र के अभिभावकों और छात्रों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। यह विद्यालय न केवल झंझारपुर बल्कि पूरे मिथिला क्षेत्र के लिए शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी सौगात साबित होगा।

उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा अब घर के पास

केंद्रीय विद्यालय अपने उच्च शैक्षणिक मानकों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पूरे देश में जाने जाते हैं। KV Jhanjharpur के खुलने से अब यहाँ के बच्चों को उच्च गुणवत्ता की केंद्रीय शिक्षा (Central Education) प्राप्त करने के लिए बड़े शहरों या दूर-दराज के इलाकों में नहीं जाना पड़ेगा।

अप्रैल से सत्र शुरू होने का सीधा मतलब है कि स्थानीय छात्र अब सीबीएसई (CBSE) पाठ्यक्रम आधारित आधुनिक शिक्षा अपने ही इलाके में प्राप्त कर सकेंगे।

अभिभावकों और छात्रों में भारी उत्साह

विद्यालय का सत्र अप्रैल से शुरू होने की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई है। अभिभावकों का कहना है कि यह उनके बच्चों के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

  • सस्ती और अच्छी शिक्षा: केंद्रीय विद्यालय में कम फीस में बेहतरीन सुविधाएं और शिक्षा मिलती है।
  • सर्वांगीण विकास: यहाँ पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद और अन्य गतिविधियों पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है।

झंझारपुर के लिए एक बड़ी उपलब्धि

  • विद्यालय का नाम: केंद्रीय विद्यालय झंझारपुर (KV Jhanjharpur)
  • सत्र शुरू होने का समय: अप्रैल (आगामी सत्र)
  • लाभ: स्थानीय छात्रों को गुणवत्तापूर्ण केंद्रीय शिक्षा
  • बोर्ड: सीबीएसई (CBSE)

जल्द ही नामांकन (Admission) से जुड़ी विस्तृत जानकारी और आधिकारिक अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है। अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे ताजा अपडेट के लिए आधिकारिक घोषणाओं पर नजर बनाए रखें।

मधुबनी: PMGSY की ‘हाई-टेक’ सड़क पर PHED का ‘हथौड़ा’, करोड़ों की सरकारी संपत्ति की बर्बादी पर कब जागेगा प्रशासन?

बिहार के मधुबनी जिले में विकास के नाम पर एक विभाग दूसरे विभाग की मेहनत और जनता की गाढ़ी कमाई पर पानी फेर रहा है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY-III) के तहत अत्याधुनिक ‘FDR Technology‘ से बनाई जा रही करोड़ों की सड़क को PHED विभाग द्वारा बिना किसी अनुमति (NOC) के बुरी तरह क्षतिग्रस्त किया जा रहा है। NKSP Infra Pvt. Ltd. और ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) की बार-बार चेतावनी के बावजूद PHED झांझरपुर प्रमंडल की मनमानी रुकने का नाम नहीं ले रही है।

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​क्या है पूरा मामला..?

मधुबनी के खुटौना प्रखंड के अंतर्गत T28- बेलहा से ललमनियां वाया खुटौना प्रखंड मुख्यालय तक सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है। इस सड़क का निर्माण FDR (Full Depth Reclamation) तकनीक से किया जा रहा है, जो बिहार की सबसे आधुनिक सड़क निर्माण तकनीकों में से एक है।

लेकिन, PHED विभाग द्वारा ‘सात निश्चय योजना’ के तहत पाइप लाइन बिछाने के लिए चैनेज 4600 से 4772 के बीच (गढ़िया गाँव के पास) सड़क को गैर-तकनीकी तरीके से काटा जा रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि इसके लिए PHED ने ग्रामीण कार्य विभाग से कोई अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) तक नहीं लिया।

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FDR तकनीक: एक बार टूटी तो मरम्मत नामुमकिन!

विशेषज्ञों और निर्माण कंपनी (NKSP Infra) के अनुसार, FDR तकनीक से बनी सड़क में जॉब मिक्स फॉर्मूला का उपयोग होता है। यदि एक बार यह सड़क बेस से क्षतिग्रस्त हो जाती है, तो इसे सामान्य तरीके से पैच वर्क कर के ठीक नहीं किया जा सकता। इसके पुनर्स्थापन (Restoration) के लिए उन्हीं करोड़ों की मशीनों की जरूरत पड़ती है, जो फिलहाल बिहार में उपलब्ध नहीं हैं। यानी PHED की एक छोटी सी लापरवाही सरकार को करोड़ों का चूना लगा रही है।

चेतावनी को किया गया अनसुना:

दस्तावेजों से पता चलता है कि:

  • 22 नवंबर 2025 को कार्यपालक अभियंता (RWD, फुलपरास) ने PHED को पत्र लिखकर काम रोकने को कहा था।
  • 18 दिसंबर 2025 को दोबारा चेतावनी दी गई कि बगैर NOC के काम करना विभागीय कार्रवाई का आधार बन सकता है।
  • 02 जनवरी 2026 को अभियंता प्रमुख-सह-अपर आयुक्त (बिहार सरकार) ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए काम को तत्काल स्थगित करने का निर्देश दिया है।

लापरवाही या भ्रष्टाचार?

पूर्व में Bhoomi News Live की रिपोर्ट में भी PHED झांझरपुर प्रमंडल द्वारा राजस्व की क्षति और बिजली चोरी जैसे गंभीर आरोप लग चुके हैं। अब नई सड़क को क्षतिग्रस्त करना यह दर्शाता है कि विभागों के बीच आपसी समन्वय (Coordination) की भारी कमी है, जिसका खामियाजा जनता भुगत रही है।

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मुख्य सवाल:

  • बिना NOC के PHED ने खुदाई कैसे शुरू की?​
  • क्या PHED के पास सड़क मरम्मत के लिए आधुनिक FDR मशीनें हैं? अगर नहीं, तो सड़क कौन ठीक करेगा?​
  • क्या दोषी अधिकारियों पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में कार्रवाई होगी?

निष्कर्ष: एक तरफ बिहार सरकार चमचमाती सड़कों का जाल बिछा रही है, वहीं दूसरी तरफ अधिकारियों की आपसी खींचतान और तानाशाही रवैया विकास को गड्ढे में धकेल रहा है। अगर समय रहते प्रशासन नहीं जागा, तो खुटौना की यह ‘मॉडल रोड’ बनने से पहले ही खंडहर में तब्दील हो जाएगी।