बिहार की सियासत में ‘दही-चूड़ा’ डिप्लोमेसी: तेज प्रताप यादव का बड़ा दांव, तेजस्वी और नीतीश कुमार को भेजा न्योता

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Tej Pratap Yadav dahi chura plan thumbnail with Tejashwi Yadav Nitish Kumar Samrat Chaudhary and Vijay Sinha on one stage

पटना: बिहार में मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सियासी समीकरणों को साधने का एक बड़ा मौका होता है। इस बार जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है।

तेज प्रताप यादव ने घोषणा की है कि वे 14 जनवरी (मकर संक्रांति) के अवसर पर अपने आवास पर भव्य ‘दही-चूड़ा भोज’ का आयोजन करेंगे। खास बात यह है कि इस भोज में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के दिग्गजों को एक मंच पर लाने की तैयारी है।

छोटे भाई तेजस्वी को खास निमंत्रण

राजनीतिक मतभेदों और अलग राह चुनने के बाद यह पहला मौका होगा जब तेज प्रताप यादव अपने छोटे भाई और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को औपचारिक रूप से आमंत्रित कर रहे हैं। तेज प्रताप ने स्पष्ट किया है कि वे खुद तेजस्वी को न्योता देंगे। सियासी जानकारों का मानना है कि यह आयोजन दोनों भाइयों के बीच जमी बर्फ को पिघलाने की एक कोशिश हो सकता है।

इन दिग्गजों को भेजा जाएगा बुलावा

तेज प्रताप यादव ने अपनी पार्टी की ओर से आयोजित इस भोज को ‘सर्वदलीय’ रूप देने की कोशिश की है। उन्होंने जिन प्रमुख चेहरों को आमंत्रित करने की बात कही है, उनमें शामिल हैं:

  • नीतीश कुमार (मुख्यमंत्री, बिहार)
  • सम्राट चौधरी (उपमुख्यमंत्री)
  • विजय कुमार सिन्हा (उपमुख्यमंत्री)
  • आरिफ मोहम्मद खान (राज्यपाल)

लालू यादव की परंपरा को आगे बढ़ाने की कोशिश?

गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव में राजद (RJD) की हार के बाद, राबड़ी आवास पर लालू प्रसाद यादव की पारंपरिक और मशहूर ‘दही-चूड़ा पार्टी’ को लेकर संशय बना हुआ है। ऐसे में तेज प्रताप का यह कदम उस सियासी शून्य को भरने की कोशिश माना जा रहा है।

सियासी मायने: सत्ता और विपक्ष के बीच सेतु?

राजनीतिक विश्लेषक इस आयोजन को केवल एक भोज नहीं मान रहे। विश्लेषकों का कहना है कि तेज प्रताप यादव इस आयोजन के जरिए खुद को एक परिपक्व नेता के रूप में स्थापित करना चाहते हैं जो दलगत राजनीति से ऊपर उठकर संवाद (Communication) में विश्वास रखता है। सत्ता पक्ष के शीर्ष नेताओं को बुलाकर वे यह संदेश देना चाहते हैं कि विरोध अपनी जगह है, लेकिन शिष्टाचार और संवाद अपनी जगह।

अब देखना दिलचस्प होगा कि 14 जनवरी को तेज प्रताप के आवास पर कौन-कौन से दिग्गज जुटते हैं और क्या बिहार की राजनीति में ‘दही-चूड़ा’ की मिठास नए समीकरणों को जन्म देती है?

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