बड़ी खबर: सुपौल के मरौना प्रखंड में होगा सड़कों और पुलों का जाल, उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने दी हरी झंडी

510071

सुपौल/पटना: बिहार के उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने सुपौल जिले के मरौना प्रखंड की जनता को एक बड़ी सौगात दी है। उपमुख्यमंत्री के निर्देश पर उनके आप्त सचिव वीरेंद्र कुमार ने ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) को मरौना प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में 11 महत्वपूर्ण सड़कों और पुलों के निर्माण के लिए पत्र जारी कर त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

इन प्रमुख योजनाओं को मिली मंजूरी:

​जारी किए गए आधिकारिक पत्र (पत्रांक 172, दिनांक 27/04/2026) के अनुसार, जनहित में निम्नलिखित कार्यों को अति आवश्यक बताया गया है:

  1. तिलयुगा बलान नदी पर पुल: मरौना-निर्मली पथ के योदराही वार्ड नंबर-02 से उत्तर तिलयुगा बलान नदी पर एच.एल. ब्रिज (HL Bridge) और पहुंच पथ का निर्माण।
  2. भलुआही सुरक्षा बांध से कुसगौल: भलुआही सुरक्षा बांध से कुसगौल होते हुए कबरी बांध तक सड़क और पुल का निर्माण।
  3. 8 किलोमीटर लंबी सड़क: मरौना उत्तर के कारारही वार्ड नंबर 10 से मुख्य सड़क राम विलास सिंह के घर से होते हुए कमरैल सीमा तक सड़क निर्माण।
  4. लालपुर से सोहनपुर मार्ग: निर्मली-मरौना मुख्य मार्ग पर लालपुर से सोहनपुर को जोड़ने वाली सड़क में तिलयुगा नदी पर पुल का निर्माण।
  5. महादलित टोलों का जुड़ाव: परसौनी वार्ड नंबर 0-10 महादलित टोला से पंचायत सरकार भवन होते हुए मंगासिहौल वार्ड नंबर 12 तक सड़क निर्माण।
  6. गंनौरा और मधुबनी सीमा: गंनौरा कोरयानी टोला वाया मधुबनी सीमा सड़क में बलान नदी पर पुल का निर्माण।
  7. गंनौरा से महोलिया टोला: गंनौरा वार्ड 04 मुख्य सड़क से महादलित बस्ती और IOCL गैस गोदाम होते हुए महोलिया टोला तक पक्की सड़क।
508532

विकास की ओर बढ़ते कदम

​इस पत्र के माध्यम से उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण इलाकों में कनेक्टिविटी सुधारना सरकार की प्राथमिकता है। इन पुलों और सड़कों के बन जाने से मरौना प्रखंड के हजारों ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा होगी, खासकर बरसात के समय में तिलयुगा और बलान नदी के कारण होने वाली परेशानियां खत्म होंगी।

​ग्रामीण कार्य विभाग के नोडल ऑफिसर ने भी इस पर अपनी मुहर लगा दी है और संबंधित कार्यपालक अभियंता को आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रेषित कर दिया गया है।

बिहार में पोर्टफोलियो का बंटवारा: सम्राट चौधरी सुपर सीएम की भूमिका में, विजय चौधरी और बिजेन्द्र यादव को मिली बड़ी जिम्मेदारी

478906

पटना: बिहार सरकार ने नई कैबिनेट के बीच विभागों का बँटवारा कर दिया है। बुधवार, 15 अप्रैल 2026 को जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शासन पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखते हुए गृह, सामान्य प्रशासन और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों सहित कुल 29 मंत्रालयों की जिम्मेदारी अपने पास रखी है।

​राज्य में दो उप-मुख्यमंत्री बनाए गए हैं— विजय कुमार चौधरी और बिजेन्द्र प्रसाद यादव। राज्यपाल के आदेश से जारी इस अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि वे सभी विभाग जो किसी अन्य मंत्री को आवंटित नहीं हैं, वे मुख्यमंत्री के अधीन रहेंगे।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास भारी-भरकम पोर्टफोलियो

​मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सबसे अधिक विभागों की जिम्मेदारी संभाली है। उनके पास गृह, सामान्य प्रशासन, मंत्रिमंडल सचिवालय, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, पथ निर्माण, नगर विकास एवं आवास, पंचायती राज, और राजस्व एवं भूमि सुधार जैसे जनता से सीधे जुड़े विभाग रहेंगे। इसके अलावा उद्योग, खान एवं भूतत्व, और पर्यटन जैसे विभाग भी उन्हीं के पास हैं।

478890

उप-मुख्यमंत्रियों को मिली अहम जिम्मेदारी

​कैबिनेट में शक्ति संतुलन बनाए रखते हुए दोनों उप-मुख्यमंत्रियों को भी महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो दिए गए हैं:

  • विजय कुमार चौधरी (उप-मुख्यमंत्री): इन्हें जल संसाधन, संसदीय कार्य, भवन निर्माण, परिवहन, ग्रामीण विकास और उच्च शिक्षा जैसे 10 विभागों की कमान सौंपी गई है।
  • बिजेन्द्र प्रसाद यादव (उप-मुख्यमंत्री): इन्हें वित्त, ऊर्जा, योजना एवं विकास, मद्य निषेध, और समाज कल्याण सहित कुल 8 विभागों का जिम्मा मिला है।

प्रशासनिक आदेश जारी

​यह आदेश भारत के संविधान के अनुच्छेद 166(3) के तहत राज्यपाल की सहमति के बाद मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत द्वारा जारी किया गया है। सरकार के इस कदम से स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी विकास और कानून-व्यवस्था से जुड़े प्रमुख मोर्चों का नेतृत्व स्वयं करेंगे, जबकि अनुभवी साथियों को बुनियादी ढांचे और आर्थिक नियोजन की जिम्मेदारी दी गई है।

राजभवन में जब जय-वीरू की जोड़ी ने बटोरी सुर्खियां, बिजय चौधरी बने गूगल मैप और मिल गई नजरें

Bijendra Yadav and Nitish Kumar smiling at Raj Bhavan Patna

पटना। बिहार की राजनीति में 14 अप्रैल 2026 का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। एक तरफ नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर सबको चौंकाया, तो दूसरी तरफ राजभवन में हुए शपथ ग्रहण समारोह में दोस्ती और भरोसे का एक ऐसा वीडियो सामने आया जिसने सबका दिल जीत लिया। यह कहानी है बिजेंद्र प्रसाद यादव और नीतीश कुमार की, जिसमें विजय कुमार चौधरी ने तड़का लगा दिया।

शपथ ली, हस्ताक्षर किए… फिर शुरू हुई तलाश

सफेद कुर्ते-पाजामे में सजे बिजेंद्र प्रसाद यादव जैसे ही मंच पर शपथ लेने पहुंचे, पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। शपथ पूरी हुई, उन्होंने कागजों पर दस्तखत किए और फिर जो हुआ वह किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था। विजेंद्र बाबू अपनी जगह पर ठिठक गए। वे अपनी गर्दन घुमाकर इधर-उधर देखने लगे। प्रोटोकॉल कहता है कि शपथ के बाद मुख्यमंत्री का अभिवादन करना होता है, लेकिन विजेंद्र यादव को भीड़ में अपने पुराने दोस्त नीतीश कुमार नजर नहीं आ रहे थे।

विजय चौधरी का ‘इशारा’ और खिलखिला उठे नीतीश

बिजेंद्र यादव की यह बेचैनी वहां पास ही बैठे विजय कुमार चौधरी की नजरों से नहीं छुपी। विजय चौधरी ने तुरंत मोर्चा संभाला और मुस्कुराते हुए इशारों-इशारों में बिजेंद्र बाबू को रास्ता दिखाया। उन्होंने हाथ से इशारा किया— “साहब वहां बैठे हैं!”

विजय चौधरी का इशारा मिलते ही बिजेंद्र यादव की नजरें नीतीश कुमार से जा टकराईं। जैसे ही नजर से नजर मिली, दोनों नेताओं के चेहरे पर एक ऐसी चमक और मुस्कान आई जैसे सालों बाद दो बिछड़े दोस्त मिले हों। बिजेंद्र यादव ने प्रणाम किया और नीतीश कुमार ने भी बड़े प्यार से उनका अभिवादन स्वीकार किया।

दोस्ती की वो केमिस्ट्री, जो कुर्सी से ऊपर है

बिहार की राजनीति में नीतीश, बिजेंद्र और विजय चौधरी की यह तिकड़ी दशकों पुरानी है। सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि:

  • बिजेंद्र यादव: वो अटूट विश्वास जो नीतीश के साथ हर तूफान में खड़ा रहा।
  • विजय चौधरी: वो संकटमोचक जो हमेशा पुल का काम करते हैं।

क्यों वायरल हो रहा है यह पल?

राजनीति अक्सर कड़वाहट और दांव-पेंच के लिए जानी जाती है। ऐसे में राजभवन के गंभीर माहौल के बीच यह अजब-गजब वाकया बताता है कि पद आते-जाते रहते हैं, लेकिन जो साथ संघर्षों में बना रहता है, वही असली दौलत है।

​Elected बनाम Selected: तेजस्वी यादव का सम्राट चौधरी पर तीखा हमला, विकास के आंकड़ों पर घेरा

478485

पटना: बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के साथ ही वार-पलटवार का दौर तेज हो गया है। बीजेपी नेता सम्रट चौधरी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक बेहद तल्ख और कटाक्षपूर्ण पोस्ट साझा की है। तेजस्वी ने सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनने पर बधाई तो दी, लेकिन उनके कार्यकाल की चुनौतियों और बिहार की मौजूदा स्थिति को लेकर सरकार को आईना दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

निर्वाचित और चयनित का राजनीतिक खेल

​तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट की शुरुआत में ही नीतीश कुमार को Elected (निर्वाचित) और सम्राट चौधरी को Selected (चयनित) मुख्यमंत्री बताकर बड़ा राजनीतिक कटाक्ष किया। उन्होंने सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार को गद्दी से उतारने की उनकी प्रतिज्ञा पूर्ण करने पर बधाई दी, लेकिन साथ ही यह भी संकेत दिया कि वे जनता के सीधे जनादेश से नहीं बल्कि गठबंधन की जोड़-तोड़ से इस कुर्सी तक पहुँचे हैं।

478471

नीति आयोग के आंकड़ों से सरकार को घेरा

​तेजस्वी ने बिहार के पिछड़ेपन का मुद्दा उठाते हुए 21 वर्षों के NDA शासन पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने नए मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि बिहार आज भी कई राष्ट्रीय मानकों पर सबसे निचले पायदान पर है। तेजस्वी ने अपने पोस्ट में निम्नलिखित प्रमुख मुद्दों का जिक्र किया:

  • शिक्षा और स्वास्थ्य: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था का भारी अभाव।
  • अर्थव्यवस्था: निवेश की कमी, आय में गिरावट और खपत के घटते आंकड़े।
  • बेरोजगारी और पलायन: युवाओं को नौकरी न मिलना और राज्य से लगातार होता पलायन।
  • विधि व्यवस्था: राज्य में ध्वस्त हो चुकी कानून व्यवस्था और असुरक्षा का माहौल।

‘बिहारी स्वाभिमान’ को बताया सर्वोच्च

​तेजस्वी यादव ने सम्राट चौधरी को सचेत करते हुए कहा कि वे “बाहरियों के दिशा-निर्देशों” के आगे बिहारियों के स्वाभिमान को गिरवी न रखें। उनका इशारा स्पष्ट रूप से केंद्र सरकार के हस्तक्षेप की ओर था। उन्होंने आशा व्यक्त की कि मुख्यमंत्री बिहार की उन्नति और शांति के लिए सशक्त तरीके से काम करेंगे।

प्रादुर्भाव से समाजवादी श्री सम्राट चौधरी जी को पुनः हार्दिक शुभकामनाएं।तेजस्वी यादव

सियासी गलियारों में हलचल

​सम्राट चौधरी, जिन्होंने कभी नीतीश कुमार को सत्ता से हटाने तक अपना साफा (मुरेठा) न खोलने की कसम खाई थी, अब खुद मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन हैं। ऐसे में तेजस्वी यादव का यह पोस्ट न केवल एक चुनौती है, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए विपक्ष के एजेंडे की एक झलक भी है। अब देखना यह होगा कि नई सरकार इन तीखे सवालों का जवाब अपने काम से किस तरह देती है।

बिजली क्षेत्र के भीष्म पितामह बिजेंद्र यादव का कद बढ़ा, आज सम्राट कैबिनेट में लेंगे डिप्टी सीएम पद की शपथ

477752

पटना: बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बनी नई सरकार में, बिहार को अंधेरे से उजाले की ओर ले जाने वाले बिजेंद्र प्रसाद यादव को उनके समर्पण का बड़ा इनाम मिलने जा रहा है। आज सुबह 10:50 बजे, वे सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली कैबिनेट में उपमुख्यमंत्री (Deputy CM) पद की शपथ लेंगे।

बिहार के ऊर्जा पुरुष का नया सफर

​बिजेंद्र प्रसाद यादव को बिहार में बिजली सुधारों का जनक माना जाता है। एक दौर था जब बिहार में बिजली के दर्शन दुर्लभ थे, लेकिन बिजेंद्र यादव के ऊर्जा मंत्री रहते बिहार ने लालटेन युग को पीछे छोड़कर LED युग में कदम रखा। गांव-गांव तक बिजली पहुँचाने और जर्जर तारों को बदलने की उनकी मुहिम ने उन्हें राज्य का सबसे भरोसेमंद चेहरा बना दिया है।

36 वर्षों का अटूट विश्वास

  • लगातार प्रतिनिधित्व: बिजेंद्र यादव 1990 से लगातार सुपौल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतते आ रहे हैं।
  • अनुभव का खजाना: करीब 36 वर्षों से सत्ता के शीर्ष पर रहने वाले यादव ने ऊर्जा, वित्त, और वाणिज्य कर जैसे भारी-भरकम विभागों को बखूबी संभाला है।
  • साफ-सुथरी छवि: अपनी कर्मठता और ईमानदार छवि के कारण वे हर गुट और गठबंधन में स्वीकार्य रहे हैं।

आज होगा शपथ ग्रहण

​सुपौल की जनता और बिहार के प्रशासनिक हल्कों में इस खबर से भारी उत्साह है। सम्राट चौधरी के साथ उपमुख्यमंत्री के रूप में उनकी ताजपोशी यह संकेत देती है कि नई सरकार उनके प्रशासनिक अनुभव का लाभ उठाकर बिहार के विकास की गति को और तेज करना चाहती है।

बिहार के हर घर को रोशन करने वाले दिग्गज नेता अब सरकार के सारथी की भूमिका में नजर आएंगे।

बिहार की सियासत में सम्राट का राज: RJD से सफर शुरू कर कैसे बिहार के 24वें मुख्यमंत्री बने सम्राट चौधरी?

476032

पटना: बिहार की राजनीति में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। कद्दावर नेता और भाजपा के फायरब्रैंड चेहरे सम्राट चौधरी अब बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की कमान संभालने जा रहे हैं। एक समय लालू यादव की ‘पाठशाला’ से राजनीति का ककहरा सीखने वाले सम्राट का मुख्यमंत्री की कुर्सी तक का सफर बेहद दिलचस्प और संघर्षपूर्ण रहा है।

1. विरासत में मिली सियासत, पिता रहे दिग्गज नेता

​सम्राट चौधरी का जन्म 16 नवंबर 1968 को हुआ। उन्हें राजनीति विरासत में मिली है। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार की राजनीति के वह दिग्गज नाम हैं, जिनकी गिनती कभी लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के बेहद करीबियों में होती थी। सम्राट ने अपने पिता के सानिध्य में ही राजनीति की बारीकियां सीखीं, लेकिन आज वे उसी लालू परिवार के सबसे प्रखर विरोधी माने जाते हैं।

2. 19 की उम्र में मंत्री और फिर बर्खास्तगी का वो चर्चित विवाद

​सम्राट चौधरी के नाम एक ऐसा रिकॉर्ड दर्ज है जो शायद ही किसी और के पास हो। 1999 में राबड़ी देवी की सरकार में उन्हें कृषि राज्य मंत्री बनाया गया था। उस समय उनकी उम्र महज 19 साल बताई गई थी।

  • विवाद: कम उम्र में मंत्री बनने पर संवैधानिक संकट खड़ा हो गया।
  • कार्रवाई: तत्कालीन राज्यपाल सूरजभान ने उम्र के दस्तावेजों में विसंगति (फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी) पाए जाने पर उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने का आदेश दिया था। स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट और सरकारी कागजों में उम्र को लेकर भारी अंतर पाया गया था।

3. विचारधाराओं का सफर: RJD से JDU और फिर भाजपा

​सम्राट चौधरी ने सत्ता के शीर्ष तक पहुँचने के लिए एक लंबी दूरी तय की है:

  • आरजेडी: राजनीति की शुरुआत लालू प्रसाद यादव की पार्टी से की।
  • जेडीयू: बाद में नीतीश कुमार के साथ आए और 2014 में जीतन राम मांझी की सरकार में मंत्री रहे।
  • भाजपा: साल 2018 में उन्होंने भाजपा का दामन थामा, जहाँ उनकी आक्रामकता ने उन्हें जल्द ही प्रदेश अध्यक्ष और फिर उपमुख्यमंत्री के पद तक पहुँचाया।

4. कर्पूरी ठाकुर के बाद रचा नया इतिहास

​बिहार की राजनीति में एक मिथक रहा है कि उपमुख्यमंत्री कभी मुख्यमंत्री नहीं बन पाता। सम्राट चौधरी ने इस मिथक को तोड़ दिया है। जननायक कर्पूरी ठाकुर के बाद सम्राट चौधरी बिहार के दूसरे ऐसे नेता हैं, जो डिप्टी सीएम से सीधे सीएम की कुर्सी तक पहुँचे हैं। यह उपलब्धि उनके बढ़ते कद और भाजपा आलाकमान के उन पर भरोसे को दर्शाती है।

5. व्यक्तिगत जीवन पर एक नज़र

  • जन्म: 16 नवंबर 1968 (वर्तमान उम्र 57 वर्ष)
  • माता-पिता: माता पार्वती देवी और पिता शकुनी चौधरी।
  • परिवार: पत्नी ममता कुमारी, एक बेटा और एक बेटी।

​सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना बिहार में ‘लव-कुश’ समीकरण और पिछड़ों की राजनीति में भाजपा की एक बड़ी जीत माना जा रहा है। अपनी ‘मुरैठा’ (पगड़ी) की कसम को लेकर चर्चा में रहने वाले सम्राट अब बिहार की विकास यात्रा को किस दिशा में ले जाते हैं, इस पर पूरे देश की नज़र रहेगी।

नीतीश युग का ऐतिहासिक समापन: अंतिम कैबिनेट में दिखा दो महापुरुषों का आपसी सम्मान और विकास का अटूट संकल्प

475750

पटना: बिहार के राजनीतिक इतिहास में कुछ जोड़ियाँ ऐसी होती हैं जो सत्ता के लिए नहीं, बल्कि राज्य के नवनिर्माण के लिए बनी होती हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और ऊर्जा क्षेत्र के चाणक्य कहे जाने वाले बिजेंद्र प्रसाद यादव की जोड़ी उन्हीं में से एक है। मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए नीतीश कुमार की यह ‘अंतिम कैबिनेट बैठक’ न केवल एक औपचारिक विदाई थी, बल्कि बिहार को अंधेरे से उजाले की ओर ले जाने वाले दो महापुरुषों के सफर का गौरवशाली उत्सव भी थी।

बिजेंद्र यादव ने एक निष्ठावान साथी के रूप में हर मुश्किल समय में साथ निभाया। आज राजनीति में उनका कद और सम्मान दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है, जिसे देखते हुए नीतीश कुमार ने भी मुस्कुराते हुए कहा है— ‘बस, इसी तरह देखते रहिए’।

नीतीश का विजन और विजेंद्र का अनुभव: बिहार की प्रगति के दो पहिए

​आज जब कैबिनेट की बैठक समाप्त हुई, तो हर किसी की आँखें उन यादों से नम थीं, जिन्होंने पिछले दो दशकों में बिहार की सूरत बदली है।

  • बिजली क्रांति के नायक बिजेंद्र यादव: बिजेंद्र प्रसाद यादव का नाम बिहार के इतिहास में उस व्यक्ति के रूप में दर्ज होगा जिसने राज्य के कोने-कोने तक बिजली पहुँचाई। उनके कुशल प्रबंधन और कड़ी मेहनत का ही परिणाम है कि आज बिहार का कोई भी गाँव अंधेरे में नहीं है। ‘लालटेन’ से ‘एलईडी’ तक का यह सफर बिजेंद्र बाबू के अटूट परिश्रम के बिना संभव नहीं था।
  • सुशासन के पर्याय नीतीश कुमार: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जिस साहस के साथ बिहार में कानून का राज स्थापित किया और बुनियादी ढाँचे (सड़क, पुल, स्कूल) का जाल बिछाया, उसने राज्य को एक नई वैश्विक पहचान दी। महिला सशक्तिकरण और ‘न्याय के साथ विकास’ उनके शासन की मुख्य पहचान रही।
475771

सम्मान की एक अनूठी मिसाल

​आज के दौर में जहाँ राजनीति में केवल खींचतान दिखती है, वहीं नीतीश कुमार और बिजेंद्र यादव के बीच का आपसी सम्मान देखने लायक था। मुख्यमंत्री ने सदैव बिजेंद्र बाबू के अनुभव को प्राथमिकता दी, तो वहीं बिजेंद्र यादव ने एक निष्ठावान साथी के रूप में हर मुश्किल समय में नीतीश कुमार का साथ निभाया। यह तालमेल शायद ही अब भारतीय राजनीति में फिर कभी देखने को मिले।

बिहार करेगा सादर नमन

​यह केवल एक सरकार का अंत नहीं, बल्कि एक स्वर्णिम युग का ठहराव है। बिहार की जनता हमेशा याद रखेगी कि कैसे इन दो नेताओं ने अपने व्यक्तिगत हितों को पीछे छोड़कर राज्य के विकास को सर्वोपरि रखा।

नीतीश कुमार का संकल्प और विजेंद्र यादव का कर्म; बिहार हमेशा ऋणी रहेगा इन दो महापुरुषों का।

​मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार की इस अंतिम कैबिनेट बैठक के साथ ही एक अध्याय समाप्त हुआ है, लेकिन उनके द्वारा किए गए विकास कार्य आने वाली पीढ़ियों का मार्ग प्रशस्त करते रहेंगे। बिहार अपने इन दोनों सपूतों को उनके निस्वार्थ प्रयासों के लिए कोटि-कोटि नमन करता है!

बिहार का सियासी समीकरण बदला: खरमास खत्म होते ही नीतीश की विदाई, जानें कौन बनेगा नया CM?

474628

पटना: बिहार की राजनीति के लिए आज 14 अप्रैल, 2026 का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं, जिसके बाद राज्य में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली सरकार के गठन का रास्ता साफ हो जाएगा।

आज के घटनाक्रम का पूरा शेड्यूल

​बिहार सचिवालय और राजभवन के गलियारों में हलचल तेज है। आज के कार्यक्रम कुछ इस प्रकार हैं:

  • कैबिनेट की अंतिम बैठक: सुबह 11:00 बजे नीतीश कुमार अपनी आखिरी कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
  • इस्तीफे का समय: माना जा रहा है कि दोपहर 3:30 बजे नीतीश कुमार राजभवन जाकर राज्यपाल को अपना त्यागपत्र सौंप देंगे।
  • भाजपा विधायक दल की बैठक: दोपहर 2:00 बजे भाजपा विधायकों की अहम बैठक होगी, जिसमें नए नेता के नाम पर मुहर लगेगी।
  • एनडीए की संयुक्त बैठक: शाम 4:00 बजे NDA के सभी घटक दलों की बैठक होगी, जिसमें औपचारिक रूप से नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान किया जाएगा।

कौन होगा बिहार का अगला मुख्यमंत्री?

​सूत्रों के अनुसार, भाजपा ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पर्यवेक्षक बनाकर पटना भेजा है। मुख्यमंत्री पद की रेस में ये नाम सबसे आगे हैं:

  1. सम्राट चौधरी: वर्तमान उपमुख्यमंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता।
  2. नित्यानंद राय: केंद्रीय गृह राज्य मंत्री।
  3. निशांत कुमार: नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के भी नई सरकार में उपमुख्यमंत्री के रूप में शामिल होने की प्रबल संभावना है।

कल हो सकता है शपथ ग्रहण

​नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह कल, 15 अप्रैल को सुबह 11:00 बजे आयोजित होने की संभावना है। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।

विशेष नोट: नीतीश कुमार ने हाल ही में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली है। वे अब दिल्ली की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। आज अंबेडकर जयंती और खरमास की समाप्ति के अवसर पर इस बड़े बदलाव को अंजाम दिया जा रहा है।

मधुबनी: BDO की निजी दुश्मनी ने लोकतंत्र को किया शर्मसार! पैक्स चुनाव में रची गई हार की साजिश? मलखान सिंह का बड़ा धमाका

Malkhan Singh exposing PACS election rigging in Laukhahi

लौकही, मधुबनी: मधुबनी जिले के लौकही प्रखंड में पैक्स चुनाव अब सिर्फ एक चुनावी प्रक्रिया नहीं, बल्कि ‘बदले की राजनीति‘ का अखाड़ा बन गया है। जिला पार्षद सदस्य मलखान सिंह ने प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। मलखान सिंह का दावा है कि उनके पिता को हराने के लिए प्रशासन ने न केवल नियमों की धज्जियां उड़ाईं, बल्कि रंजिश निकालने के लिए पूरे तंत्र का दुरुपयोग किया।

1. एक वोटर, दो पंचायत: नियम-कानूनों की उड़ी धज्जियां

​मलखान सिंह ने दस्तावेजी सबूतों के साथ खुलासा किया है कि तीन ऐसे लोग पाए गए हैं जिनका नाम दो अलग-अलग पंचायतों की मतदाता सूची में शामिल है। इतना ही नहीं, एक व्यक्ति का नाम तो सहकारी समितियों के नरेंद्रपुर में भी दर्ज है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि एक व्यक्ति ने दो-दो पंचायतों में जाकर अपना वोट गिराया, जो सीधे तौर पर चुनावी प्रक्रिया की शुचिता का उल्लंघन है।

435823
435821 1

इन नामों ने खोली धांधली की पोल (सबूत के साथ)

हीरा देवी (पति: स्वर्गीय रामचंद्र यादव): इनका नाम भी अवैध तरीके से दो सूचियों में दर्ज पाया गया है।

विदेश्वर सहाय (पिता: लक्ष्मी सहाय): इनका नाम दो पंचायतों की मतदाता सूची में शामिल है।

अनीता देवी (पति: राधेश्याम यादव): इनका नाम भी दो जगह है और ये महिला सहकारी समिति, नरेंद्रपुर में सदस्य भी हैं।

Screenshot 20260328 145815 OneDrive
435817

2. 18 साल से कम उम्र के बच्चों से डलवाए वोट!

अनियमितता की हद तो तब पार हो गई जब मतदाता सूची में नाबालिगों के नाम भी सामने आए। मलखान सिंह ने दो विशिष्ट नाम सार्वजनिक किए हैं:

गुंजा कुमारी (पिता: जितेंद्र कुमार सिंह): जन्मतिथि 02/05/2010 (उम्र 18 से कम)।

अनिकेत कुमार सिंह (पिता: जितेंद्र कुमार सिंह): जन्मतिथि 05/05/2013 (मात्र 12-13 साल की उम्र)।

क्यों निशाने पर आए मलखान सिंह? ‘आवास योजना’ का सच

जब पत्रकारों ने मलखान सिंह से पूछा कि आखिर BDO साहब ने उनके साथ ही ऐसा क्यों किया, तो उन्होंने जो जवाब दिया उसने प्रखंड कार्यालय में चल रहे भ्रष्टाचार की परतें खोल दीं। मलखान सिंह ने बताया:

पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर भारी लूट मची थी। गरीब जनता से 5,000 से लेकर 15,000 रुपये तक की अवैध उगाही की जा रही थी। मैंने एक जनप्रतिनिधि होने के नाते इसका खुलकर विरोध किया और भ्रष्टाचार को रोका। इसी का बदला लेने के लिए BDO साहब ने मेरे पिता को चुनाव हराने की साजिश रची और लोकतंत्र को तार-तार कर दिया।

लोकतंत्र की हत्या या प्रशासनिक तानाशाही?

मलखान सिंह का आरोप है कि एक प्रत्याशी को जबरन हराने के लिए BDO ने अपने पद का दुरुपयोग किया और बल प्रयोग कर चुनाव को प्रभावित किया। यह मामला अब केवल एक पंचायत का नहीं रह गया है, बल्कि पूरे मधुबनी जिले में चर्चा का विषय बन गया है कि क्या एक ईमानदार विरोध की कीमत चुनाव में धांधली सहकर चुकानी पड़ेगी?

क्या होगा आगे?

इन ठोस सबूतों के पेश होने के बाद अब जनता और विपक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। क्या जिला प्रशासन इन अधिकारियों और फर्जी वोटरों पर कार्रवाई करेगा? या फिर लोकतंत्र के इस उत्सव में हुई धांधली को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

Disclaimer: उपरोक्त खबर जिला पार्षद सदस्य मलखान सिंह द्वारा मीडिया के सामने दिए गए बयानों और पेश किए गए दस्तावेजों पर आधारित है। ‘भूमि न्यूज लाइव’ इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। हमारा उद्देश्य केवल जनप्रतिनिधियों के पक्ष को जनता तक पहुँचाना है। इस मामले में संबंधित अधिकारी (BDO) या प्रशासन का पक्ष आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

JDU के निर्विरोध अध्यक्ष बने नीतीश कुमार; बिजेंद्र यादव बोले- आपका नेतृत्व ही हमारी ताकत

427471 edited

पटना: बिहार की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) एक बार फिर निर्विरोध जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिए गए हैं। मंगलवार, 24 मार्च 2026 को नामांकन वापसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद निर्वाचन पदाधिकारी ने औपचारिक रूप से उनके नाम की घोषणा की।

​नीतीश कुमार के फिर से पार्टी की कमान संभालने पर बिहार के ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव (Bijendra Prasad Yadav) ने उन्हें हार्दिक बधाई दी है और इसे पार्टी के लिए एक मील का पत्थर बताया है।

ऊर्जा मंत्री ने क्या कहा?

​नीतीश कुमार के करीबी और वरिष्ठ नेता बिजेंद्र प्रसाद यादव ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उन्हें पुष्पगुच्छ भेंट किया। उन्होंने कहा:

​”नीतीश कुमार जी का नेतृत्व केवल JDU के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार के विकास के लिए अनिवार्य है। उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी और आगामी चुनावों में पार्टी और भी मज़बूती के साथ उभरेगी।”

निर्विरोध चुने गए नीतीश कुमार

​पार्टी सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए केवल नीतीश कुमार का ही नामांकन प्राप्त हुआ था। 24 मार्च सुबह 11 बजे तक नाम वापसी का समय था, जिसके बाद रिटर्निंग ऑफिसर अनिल हेगड़े ने उन्हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया। बता दें कि नीतीश कुमार अब दिल्ली की राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाने जा रहे हैं, क्योंकि हाल ही में वे राज्यसभा के लिए भी निर्वाचित हुए हैं।

पार्टी में जश्न का माहौल

​नीतीश कुमार के अध्यक्ष बनते ही पटना स्थित JDU प्रदेश कार्यालय में जश्न शुरू हो गया। ढोल-नगाड़ों और मिठाइयों के साथ कार्यकर्ताओं ने खुशी ज़ाहिर की। ऊर्जा मंत्री के अलावा संजय झा, श्रवण कुमार और ललन सिंह जैसे दिग्गज नेताओं ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है।

भविष्य की रणनीति पर ज़ोर

​राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नीतीश कुमार का फिर से अध्यक्ष बनना यह दर्शाता है कि पार्टी पर उनकी पकड़ बेहद मज़बूत है। अब जबकि वे राज्यसभा सांसद के रूप में दिल्ली जा रहे हैं, राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर वे देशभर में पार्टी के विस्तार और 2029 के लोकसभा चुनावों की रणनीति तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।