सुपौल रेलवे लाइन: विकास की हकीकत बनाम क्रेडिट की सियासत – एक दस्तावेजी पड़ताल

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विकास, विश्वास और ‘क्रेडिट’ का प्रयास: सोशल मीडिया के शोर में गुम होती हकीकत

“विकास होना, विकास के लिये कार्य करना एवं विकास के लिये सतत प्रयास करना सराहनीय, प्रशंसनीय एवं अनुकरणीय कार्य है। परन्तु कुछ लोगों की विशेषता है, उस कार्य को अपने नाम पर घोषित कराने का…”

बिहार के कोसी क्षेत्र, विशेषकर सुपौल में ललितग्राम-बीरपुर नई रेल लाइन (22 किमी) की स्वीकृति के बाद उपजा ताजा राजनीतिक परिदृश्य इन पंक्तियों को अक्षरशः चरितार्थ करता है। विकास एक सतत प्रक्रिया है, लेकिन विडंबना यह है कि आज यह ‘सतत प्रयास’ के बजाय ‘तत्काल श्रेय’ लेने की होड़ में बदल गया है।

सोशल मीडिया: दावों का बाजार

जैसे ही रेलवे बोर्ड से इस बहुप्रतीक्षित परियोजना की फाइल आगे बढ़ी, सोशल मीडिया पर ‘क्रेडिट’ लेने की एक वर्चुअल दौड़ शुरू हो गई। यह दौड़ दिलचस्प है क्योंकि इसमें एक ही काम के कई ‘पिता’ सामने आ रहे हैं। बिना किसी का नाम लिए, अगर हम सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पोस्ट्स पर नज़र डालें, तो स्थिति हास्यास्पद लगती है:

  • दावा नंबर 1: सोशल मीडिया के एक कोने में पोस्ट तैर रही है— “जो कहा, वो कर के दिखाया!”। दावा किया जा रहा है कि यह व्यक्तिगत प्रयासों का फल है और वर्षों के संघर्ष का परिणाम है।
  • दावा नंबर 2: वहीं, दूसरे डिजिटल गलियारों (व्हाट्सएप ग्रुप्स) में “तन-मन रोमांचित” होने की बात कही जा रही है। वहां किसी और ही नेतृत्व के भरोसे और प्रभाव को इस सफलता का कारण बताया जा रहा है।

आम जनता भ्रमित है कि आखिर एक ही रेल लाइन के लिए अलग-अलग खेमों में इतनी बधाइयां क्यों बंट रही हैं? क्या विकास सोशल मीडिया पोस्ट से होता है?

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दस्तावेजी हकीकत: मौन कर्मयोगी

जब शोर थम जाता है, तो कागज बोलते हैं। पूर्व मध्य रेलवे (ECR) का एक आधिकारिक पत्र (Letter No-ECR/CAO/CON/SEC/N/45) सोशल मीडिया के इन हवाई दावों से इतर एक अलग ही कहानी बयां करता है।

रेलवे के इस दस्तावेज में स्पष्ट लिखा है कि प्रोजेक्ट का यह लेटेस्ट स्टेटस अपडेट बिहार सरकार के ऊर्जा एवं योजना मंत्री श्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के साथ हुई “मौखिक चर्चा के अनुपालन” (In compliance of verbal discussion) में जारी किया गया है।

दस्तावेज बताते हैं कि इन तारीखों पर फाइलों को टेबल-दर-टेबल आगे बढ़ाने के पीछे निरंतर प्रशासनिक संवाद और दबाव मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव का था। असली काम खामोशी से फाइलों को आगे बढ़ाने में होता है, न कि सोशल मीडिया पर शोर मचाने में।

श्रेय नहीं, सत्य चाहिए

लोकतंत्र में जनता को यह जानने का हक है कि उनके लिए वास्तव में पसीना कौन बहा रहा है और कौन केवल बहती गंगा में हाथ धो रहा है।

सुपौल और कोसी की जनता के लिए यह समझना जरूरी है कि विकास ‘फेसबुक पोस्ट’ करने से नहीं, बल्कि ‘प्रयास’ करने से आता है। श्रेय लेने की होड़ में नेताओं को यह नहीं भूलना चाहिए कि पब्लिक सब जानती है—कागज पर क्या लिखा है और स्क्रीन पर क्या दिख रहा है। रेलवे का यह पत्र गवाह है कि विकास की गाड़ी को इंजन कौन दे रहा है, और कौन केवल प्लेटफार्म पर सीटी बजा रहा है।

प्रोजेक्ट: ललितग्राम-बीरपुर नई रेल लाइन (22 किमी)।

विवाद: सोशल मीडिया पर कई नेताओं द्वारा श्रेय लेने की होड़।

सच: रेलवे के आधिकारिक पत्र में केवल बिजेंद्र प्रसाद यादव के प्रयासों और चर्चा का उल्लेख है।

संदेश: विकास कार्यों का श्रेय सोशल मीडिया पोस्ट्स से नहीं, आधिकारिक दस्तावेजों से तय होना चाहिए।

मंत्री बिजेंद्र यादव की कोसी-मिथिला को बड़ी सौगात: 126 करोड़ से चमकेगी नेपाल बॉर्डर की सड़क, शक्तिपीठों को जोड़ने का सपना हुआ साकार

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खबर एक नज़र में:

  • प्रयास: माननीय मंत्री श्री बिजेंद्र प्रसाद यादव की दूरदर्शी सोच का परिणाम।
  • प्रोजेक्ट: मझारी चौक (NH-27) से कुनौली बाजार (नेपाल बॉर्डर) वाया डगमरा।
  • लागत: 126 करोड़ 23 लाख रुपये (प्रशासनिक स्वीकृति मिली)।
  • विशेषता: सखरा भगवती और कंकाली भगवती जैसे ऐतिहासिक शक्तिपीठों का होगा सीधा जुड़ाव।

पटना/मधुबनी: बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री और कोसी क्षेत्र के विकास पुरुष कहे जाने वाले श्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने एक बार फिर कोसी और मिथिलांचल के लोगों को बड़ी खुशखबरी दी है। मंत्री जी के अथक प्रयासों और क्षेत्र के विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के चलते इंडो-नेपाल सीमा (Indo-Nepal Border) तक जाने वाली अतिमहत्वपूर्ण सड़क परियोजना को प्रशासनिक स्वीकृति मिल गई है।

मंत्री बिजेंद्र यादव का विजन:

सड़क ही नहीं, संस्कृति का जुड़ाव के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण”

यह परियोजना केवल डामर और गिट्टी की सड़क नहीं है, बल्कि यह मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के उस विजन का हिस्सा है, जिसके तहत वे सीमावर्ती क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ना चाहते हैं। मधुबनी के लौकहा एवं फुलपरास विधानसभा और सुपौल के सीमावर्ती इलाकों के लिए यह सड़क जीवन रेखा साबित होगी।

मंत्री जी ने लगातार इस बात पर जोर दिया था कि नेपाल बॉर्डर तक की कनेक्टिविटी सुदृढ़ होनी चाहिए ताकि भारत-नेपाल के ‘रोटी-बेटी’ के रिश्तों को और मजबूती मिले और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आए।

इन दो प्रसिद्ध मंदिरों को मिलेगी नई पहचान

इस सड़क की सबसे खास बात इसका धार्मिक महत्व है। स्थानीय लोगों की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करते हुए, मंत्री जी ने यह सुनिश्चित किया कि इस रूट का कायाकल्प हो। यह सड़क क्षेत्र के दो सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों—सखरा भगवती और कंकाली भगवती मंदिर—को आपस में जोड़ती है।

अब श्रद्धालुओं को इन शक्तिपीठों के दर्शन के लिए हिचकोले नहीं खाने पड़ेंगे। माना जा रहा है कि सड़क बनने के बाद यहाँ धार्मिक पर्यटन (Religious Tourism) में भारी उछाल आएगा, जिसका सीधा श्रेय मंत्री बिजेंद्र यादव की पहल को जाता है।

क्या है पूरी परियोजना? (सरकारी आंकड़े)

पथ निर्माण विभाग द्वारा जारी अधिसूचना (क्रम संख्या 36) के अनुसार:

  • रूट: पथ प्रमंडल सुपौल अंतर्गत मझारी चौक (NH-27) से कुनौली बाजार (नेपाल बॉर्डर) वाया डगमरा।
  • लंबाई: कुल 25.353 किलोमीटर।
  • स्वीकृत राशि: ₹12623.994 लाख (लगभग 126 करोड़ 23 लाख रुपये)।
  • कार्य: सड़क का चौड़ीकरण (Widening) एवं मजबूतीकरण।

क्षेत्र में खुशी की लहर 126 करोड़ की इस भारी-भरकम राशि की स्वीकृति मिलने के बाद मधुबनी और सुपौल के सीमावर्ती इलाकों में खुशी का माहौल है। स्थानीय नागरिकों और कार्यकर्ताओं ने इसके लिए माननीय मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव का आभार व्यक्त किया है। लोगों का कहना है कि मंत्री जी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि क्षेत्र का विकास उनकी पहली प्राथमिकता है।

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कोसी के ‘विश्वकर्मा’ बिजेंद्र प्रसाद यादव: सुपौल में विकास की रफ्तार, मधुबनी के नेताओं के लिए आईना?

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बिहार की राजनीति में नेताओं की कमी नहीं है, लेकिन ‘काम करने वाले’ और ‘सिर्फ नाम करने वाले’ नेताओं के बीच का अंतर कोसी और मिथिलांचल के विकास को देखकर समझा जा सकता है। सुपौल के कद्दावर नेता और बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव (Bijendra Prasad Yadav) को लोग यूं ही ‘कोसी का विश्वकर्मा’ नहीं कहते।

हाल ही में 13 जनवरी 2026 को हुई बिहार कैबिनेट की बैठक ने यह साबित कर दिया है कि अगर नेता में इच्छाशक्ति हो, तो विकास फाइलों में नहीं अटकता। वहीं दूसरी तरफ, मधुबनी (मिथिलांचल) जैसे जिले हैं, जहां बड़े-बड़े दिग्गज नेता होने के बावजूद विकास की वह लकीर नहीं खींची जा सकी जो सुपौल में दिखती है।

एक पत्र और 45 दिनों में काम तमाम: विजेंद्र यादव का ‘सुपौल मॉडल’

बिजेंद्र यादव की कार्यशैली का सबसे बड़ा प्रमाण हमारे पास मौजूद दस्तावेज़ हैं। विकास कार्यों को लेकर उनकी तत्परता देखिए:

  1. दिसंबर 2025 में लिखा पत्र: 1 दिसंबर 2025 को मंत्री विजेंद्र यादव ने बिहार के पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन को दो अलग-अलग पत्र लिखे। उन्होंने सुपौल में मझारी चौक से कुनौली बाजार (नेपाल बॉर्डर) और थरबिटिया रेलवे स्टेशन से गणपतगंज तक की जर्जर सड़कों को पथ निर्माण विभाग द्वारा अधिग्रहित कर चौड़ीकरण करने का आग्रह किया ।
  2. जनवरी 2026 में कैबिनेट की मुहर: पत्र लिखे जाने के मात्र 43 दिनों के भीतर, 13 जनवरी 2026 की कैबिनेट बैठक में इन दोनों योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति मिल गई।

इसे कहते हैं राजनीतिक कद और काम करने का जज्बा। जिस फाइल को पटना के सचिवालय में सरकने में सालों लगते हैं, बिजेंद्र प्रसाद यादव के एक पत्र पर वह महीने भर में धरातल पर उतर आती है।

कैबिनेट से पास हुई 187 करोड़ की दो बड़ी सौगातें

13 जनवरी 2026 को कैबिनेट ने सुपौल के लिए खजाना खोल दिया:

  • प्रोजेक्ट 1: सुपौल पथ प्रमंडल के अंतर्गत मझारी चौक (NH-27) से कुनौली बाजार (नेपाल बॉर्डर) तक (लम्बाई 25.353 कि०मी०)। इसके चौड़ीकरण व मजबूतीकरण के लिए ₹126.23 करोड़ की मंजूरी मिली है । मंत्री जी ने अपने पत्र में इसे “राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण” बताया था ।
  • प्रोजेक्ट 2: थरबिटिया रेलवे स्टेशन से गणपतगंज वाया सिंगआवन, श्रीपुर पथ। इसके लिए ₹61.44 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है । इस सड़क से जाम की समस्या खत्म होगी और कनेक्टिविटी बेहतर होगी ।

मधुबनी और मिथिलांचल: बड़े नेता, लेकिन विकास कहां?

अब तस्वीर का दूसरा पहलू देखिए। कोसी नदी के उस पार सुपौल चमक रहा है, लेकिन इस पार मिथिलांचल का हृदय कहा जाने वाला मधुबनी (Madhubani) आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है।

मधुबनी जिले ने राज्य और केंद्र को कई बड़े कद्दावर नेता दिए हैं। लेकिन धरातल पर स्थिति यह है कि जर्जर सड़कें, जाम और जलजमाव यहां की नियति बन चुकी है। सुपौल में जहां “रेल-रोड कनेक्टिविटी” और “नेपाल बॉर्डर रोड” जैसे प्रोजेक्ट्स पर मिशन मोड में काम हो रहा है, वहीं मधुबनी में आज भी कई परियोजनाएं शिलान्यास के बाद दम तोड़ देती हैं।

सवाल जो जनता पूछ रही है:

  • क्या मधुबनी के नेताओं का कद पटना में इतना बड़ा नहीं है कि वे अपने क्षेत्र के लिए फंड ला सकें?
  • बिजेंद्र प्रसाद यादव जैसा ‘इच्छाशक्ति’ वाला नेतृत्व मिथिलांचल के अन्य जिलों में क्यों नदारद है?
  • सुपौल का रोड नेटवर्क आज बिहार के बेहतरीन नेटवर्क में से एक है, जबकि मधुबनी की सड़कें बदहाल क्यों हैं?

विकास के लिए चाहिए ‘विजेंद्र’ जैसी दृष्टि

सुपौल का विकास इस बात का गवाह है कि नेता अगर चाहे तो अपने क्षेत्र का कायाकल्प कर सकता है। मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने साबित किया है कि उम्र सिर्फ एक नंबर है, असली ऊर्जा काम करने की नीयत में होती है। कोसी क्षेत्र में हो रहा यह ऐतिहासिक कार्य यकीनन उन्हें ‘कोसी का विश्वकर्मा’ की उपाधि के योग्य बनाता है।

अब वक्त आ गया है कि मधुबनी और बाकी मिथिलांचल के नेता सुपौल मॉडल से सीख लें, वरना जनता अब “नाम” नहीं, “काम” का हिसाब मांगेगी।

जुड़े रहें भूमि न्यूज़ लाइव (Bhoomi News Live) के साथ, बेबाक खबरों के लिए।

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गर्भवती करो और 13 लाख ले जाओ- बिहार में ऑल इंडिया प्रेग्नेंट जॉब के नाम पर चल रहे गंदे खेल का भंडाफोड़

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नवादा: बिहार के नवादा जिले में पुलिस ने साइबर ठगी के एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसका तरीका सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे। ‘ऑल इंडिया प्रेग्नेंट जॉब सर्विस’ (All India Pregnant Job Service) के नाम पर यह गिरोह बेरोजगार युवाओं को अमीर महिलाओं को गर्भवती करने का ऑफर देता था और बदले में लाखों रुपये का लालच देकर ठगी करता था। पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर दो लोगों को गिरफ्तार किया है।

क्या है पूरा मामला?

साइबर अपराधी अब ठगी के लिए शर्मनाक तरीके अपना रहे हैं। सोशल मीडिया पर एक विज्ञापन तेजी से वायरल हो रहा था, जिसमें दावा किया गया था कि “अगर आप निःसंतान महिलाओं को गर्भवती करते हैं, तो आपको 10 लाख से 13 लाख रुपये तक मिलेंगे।”

इस विज्ञापन को ‘बेबी बर्थ सर्विस’ या ‘प्रेग्नेंट जॉब’ का नाम दिया गया था। इसमें कहा जाता था कि कई अमीर घरों की महिलाएं बच्चे की चाहत रखती हैं और जो पुरुष उनकी मदद करेंगे, उन्हें मुंहमांगी रकम दी जाएगी।

कैसे बनाते थे शिकार? (Modus Operandi)

  • रजिस्ट्रेशन का झांसा: जैसे ही कोई व्यक्ति लालच में आकर दिए गए नंबर पर कॉल या मैसेज करता, उसे सबसे पहले 799 रुपये की रजिस्ट्रेशन फीस जमा करने को कहा जाता था।
  • सिक्योरिटी मनी: रजिस्ट्रेशन के बाद ठग भरोसे में लेने के लिए फर्जी आईडी कार्ड और एग्रीमेंट भेजते थे। फिर ‘सिक्योरिटी मनी’, ‘मेडिकल चेकअप’ और ‘होटल चार्ज’ के नाम पर 5,000 से 20,000 रुपये तक वसूल लिए जाते थे।
  • नंबर ब्लॉक: पैसे ट्रांसफर होते ही ठग अपना मोबाइल नंबर बंद कर देते थे या पीड़ित को ब्लॉक कर देते थे।

नवादा पुलिस की बड़ी कार्रवाई

नवादा के पुलिस अधीक्षक (SP) अभिनव धीमान को इस गिरोह के बारे में गुप्त सूचना मिली थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।

तकनीकी सर्विलांस की मदद से पुलिस ने हिसुआ थाना क्षेत्र के मनवां गांव में छापेमारी की। वहां से पुलिस ने दो साइबर अपराधियों को रंगे हाथों पकड़ा। इनके पास से पुलिस ने कई एंड्रॉइड मोबाइल फोन, प्रिंटर और ठगी में इस्तेमाल होने वाले डेटा बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह बिहार के अलावा अन्य राज्यों के लोगों को भी अपना शिकार बना रहा था।

सावधान: ऐसी कोई ‘जॉब’ नहीं होती

पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे ऐसे लुभावने विज्ञापनों के चक्कर में न पड़ें। ‘प्रेग्नेंट जॉब सर्विस’ पूरी तरह से एक फ्रॉड है। इंटरनेट पर पैसे कमाने का शॉर्टकट ढूंढना आपको भारी पड़ सकता है। अगर आपको ऐसा कोई विज्ञापन दिखे, तो तुरंत साइबर सेल या नजदीकी थाने में इसकी सूचना दें।

Good News: 5 साल बाद बांका के 30 हजार सरकारी स्कूली छात्र करेंगे बिहार दर्शन, स्कूलों को मिले 20-20 हजार रुपये

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बांका (Banka News): बांका जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। करीब 5 साल के लंबे इंतजार के बाद, अब छात्रों को किताबों की दुनिया से निकलकर बिहार के ऐतिहासिक और पौराणिक स्थलों को करीब से देखने का मौका मिलेगा।

शिक्षा विभाग ने ‘मुख्यमंत्री बिहार दर्शन योजना’ (Mukhyamantri Bihar Darshan Yojana) के तहत जिले के स्कूलों के लिए राशि जारी कर दी है। कोरोना काल के बाद यह पहला मौका है जब इतने बड़े स्तर पर बच्चों को शैक्षणिक भ्रमण पर ले जाने की तैयारी की जा रही है।

509 स्कूलों को मिली राशि, जनवरी अंत तक करना होगा भ्रमण

शिक्षा विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए यह राशि आवंटित की गई है। बांका जिले के कुल 509 मध्य और उच्च विद्यालयों को इस योजना के लिए चुना गया है। विभाग ने प्रत्येक विद्यालय के खाते में 20,000 रुपये की राशि भेज दी है।

विभागीय निर्देश के अनुसार, सभी स्कूलों को जनवरी के अंतिम सप्ताह तक छात्रों का परिभ्रमण पूरा करना अनिवार्य होगा। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को बिहार की समृद्ध विरासत, इतिहास और संस्कृति से रूबरू कराना है।

एक नजर आंकड़ों पर:

  • कुल लाभार्थी छात्र: 30,000 से अधिक
  • कुल विद्यालय: 509 (336 मध्य विद्यालय + 173 उच्च विद्यालय)
  • आवंटित राशि: 20,000 रुपये प्रति विद्यालय
  • समय सीमा: जनवरी 2026 के अंत तक

कोरोना के कारण 5 साल से बंद थी योजना

गौरतलब है कि कोरोना महामारी (COVID-19) के कारण पिछले पांच वर्षों से सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम पूरी तरह से ठप था। छात्र केवल कक्षाओं तक ही सीमित रह गए थे। अब स्थिति सामान्य होने के बाद, शिक्षा विभाग ने फिर से इस योजना को सक्रिय किया है।

इस योजना के तहत छात्रों को बिहार के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों, संग्रहालयों, और पर्यटन स्थलों का दौरा कराया जाएगा। इससे न केवल उनका मनोरंजन होगा, बल्कि उन्हें अपने राज्य के इतिहास को समझने में व्यावहारिक मदद भी मिलेगी।

शिक्षकों और छात्रों में उत्साह

राशि जारी होने की खबर से बांका जिले के शिक्षकों और छात्रों में खुशी की लहर है। स्कूल प्रशासन ने भ्रमण के लिए स्थानों का चयन और रूट चार्ट तैयार करना शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि बांका के मंदार पर्वत, ओढनी डैम के अलावा नालंदा, राजगीर और बोधगया जैसे स्थलों को प्राथमिकता दी जा सकती है।

बिहार प्रशासनिक लिस्ट: 38 जिले, 101 अनुमंडल और 534 प्रखंड – जानिए अपने जिले का पूरा हाल

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बिहार में प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए राज्य को 9 प्रमंडलों (Divisions), 38 जिलों (Districts), 101 अनुमंडलों (Sub-divisions) और 534 प्रखंडों (Blocks) में बांटा गया है।

अक्सर हमें यह तो पता होता है कि हम किस जिले में हैं, लेकिन यह नहीं पता होता कि हमारे जिले में कुल कितने अनुमंडल हैं या कौन सा ब्लॉक किस अनुमंडल के अधीन आता है।

आज Bhoomi News Live आपके लिए लाया है बिहार का ‘मास्टर प्रशासनिक चार्ट’। इस लिस्ट में आप एक नजर में अपने जिले का पूरा ढांचा देख सकते हैं।

बिहार प्रशासनिक संरचना (एक नजर में)

  • राज्य: बिहार
  • कुल प्रमंडल: 09
  • कुल जिले: 38
  • कुल अनुमंडल: 101
  • कुल प्रखंड (अंचल): 534
  • कुल पंचायत: 8,000+ (लगभग)
  • कुल राजस्व गांव: 45,000+ (लगभग)

📂 बिहार के सभी जिलों और अनुमंडलों की लिस्ट (District & Sub-division Wise List)

नीचे दी गई टेबल में प्रमंडल के अनुसार जिलों और उनके अनुमंडलों का विवरण है।

1. पटना प्रमंडल (Patna Division)

(मुख्यालय: पटना)

क्र.जिला (District)कुल अनुमंडलअनुमंडल के नाम (Sub-divisions)कुल प्रखंड
1.पटना06पटना सदर, पटना सिटी, दानापुर, बाढ़, मसौढ़ी, पालीगंज23
2.नालंदा03बिहार शरीफ, राजगीर, हिलसा20
3.भोजपुर (आरा)03आरा सदर, पीरो, जगदीशपुर14
4.बक्सर02बक्सर सदर, डुमरांव11
5.रोहतास03सासाराम, बिक्रमगंज, डेहरी19
6.कैमूर (भभुआ)02भभुआ, मोहनिया11

2. तिरहुत प्रमंडल (Tirhut Division)

(मुख्यालय: मुजफ्फरपुर)

क्र.जिला (District)कुल अनुमंडलअनुमंडल के नाम (Sub-divisions)कुल प्रखंड
7.मुजफ्फरपुर02मुजफ्फरपुर पूर्वी, मुजफ्फरपुर पश्चिमी16
8.पूर्वी चंपारण06मोतिहारी सदर, अरेराज, चकिया, रक्सौल, सिकरहना, पकड़ीदयाल27
9.पश्चिमी चंपारण03बेतिया सदर, नरकटियागंज, बगहा18
10.सीतामढ़ी03सीतामढ़ी सदर, पुपरी, बेलसंड17
11.वैशाली03हाजीपुर, महुआ, महनार16
12.शिवहर01शिवहर सदर05

3. सारण प्रमंडल (Saran Division)

(मुख्यालय: छपरा)

क्र.जिला (District)कुल अनुमंडलअनुमंडल के नाम (Sub-divisions)कुल प्रखंड
13.सारण (छपरा)03छपरा सदर, मढ़ौरा, सोनपुर20
14.सीवान02सीवान सदर, महाराजगंज19
15.गोपालगंज02गोपालगंज सदर, हथुआ14

4. दरभंगा प्रमंडल (Darbhanga Division)

(मुख्यालय: दरभंगा)

क्र.जिला (District)कुल अनुमंडलअनुमंडल के नाम (Sub-divisions)कुल प्रखंड
16.दरभंगा03दरभंगा सदर, बेनीपुर, बिरौल18
17.मधुबनी05मधुबनी सदर, झंझारपुर, बेनीपट्टी, जयनगर, फुलपरास21
18.समस्तीपुर04समस्तीपुर सदर, रोसड़ा, दलसिंहसराय, पटोरी20

5. कोसी प्रमंडल (Kosi Division)

(मुख्यालय: सहरसा)

क्र.जिला (District)कुल अनुमंडलअनुमंडल के नाम (Sub-divisions)कुल प्रखंड
19.सहरसा02सहरसा सदर, सिमरी बख्तियारपुर10
20.मधेपुरा02मधेपुरा सदर, उदाकिशुनगंज13
21.सुपौल04सुपौल सदर, बीरपुर, त्रिवेणीगंज, निर्मली11

6. पूर्णिया प्रमंडल (Purnia Division)

(मुख्यालय: पूर्णिया)

क्र.जिला (District)कुल अनुमंडलअनुमंडल के नाम (Sub-divisions)कुल प्रखंड
22.पूर्णिया04पूर्णिया सदर, बनमनखी, धमदाहा, बायसी14
23.कटिहार03कटिहार सदर, बारसोई, मनिहारी16
24.अररिया02अररिया सदर, फारबिसगंज09
25.किशनगंज01किशनगंज सदर07

7. भागलपुर प्रमंडल (Bhagalpur Division)

(मुख्यालय: भागलपुर)

क्र.जिला (District)कुल अनुमंडलअनुमंडल के नाम (Sub-divisions)कुल प्रखंड
26.भागलपुर03भागलपुर सदर, कहलगांव, नौगछिया16
27.बांका01बांका सदर11

8. मुंगेर प्रमंडल (Munger Division)

(मुख्यालय: मुंगेर)

क्र.जिला (District)कुल अनुमंडलअनुमंडल के नाम (Sub-divisions)कुल प्रखंड
28.मुंगेर03मुंगेर सदर, खड़गपुर, तारापुर09
29.बेगूसराय05बेगूसराय, मंझौल, तेघड़ा, बलिया, बखरी18
30.खगड़िया02खगड़िया सदर, गोगरी07
31.जमुई01जमुई सदर10
32.लखीसराय01लखीसराय सदर07
33.शेखपुरा01शेखपुरा सदर06

9. मगध प्रमंडल (Magadh Division)

(मुख्यालय: गया)

क्र.जिला (District)कुल अनुमंडलअनुमंडल के नाम (Sub-divisions)कुल प्रखंड
34.गया04गया सदर, शेरघाटी, टेकारी, नीमचक बथानी24
35.औरंगाबाद02औरंगाबाद सदर, दाउदनगर11
36.नवादा02नवादा सदर, रजौली14
37.जहानाबाद01जहानाबाद सदर07
38.अरवल01अरवल सदर05

📝 नोट: विस्तृत प्रखंड लिस्ट (Block List)

ऊपर दी गई लिस्ट में अनुमंडलों के नाम दिए गए हैं। यदि आप यह जानना चाहते हैं कि किस अनुमंडल में कौन-कौन से प्रखंड (Blocks) आते हैं, तो कृपया हमारी वेबसाइट पर उस विशेष “प्रमंडल” (Division) के आर्टिकल को पढ़ें। वहां आपको हर गांव और पंचायत स्तर की जानकारी मिल जाएगी।

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अफसरों की नाक के नीचे ‘गायब’ हो गई 21 एकड़ जमीन, सच्चाई जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे

मुजफ्फरपुर (बिहार): बिहार में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और भू-माफियाओं की सक्रियता का एक बड़ा मामला सामने आया है। मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर अंचल में प्रशासन की नाक के नीचे 21 एकड़ सरकारी जमीन को कागजों में हेरफेर कर निजी (रैयती) घोषित कर दिया गया। ताज्जुब की बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारी ‘सोते’ रहे।

21 acres government land scam in Muzaffarpur Meenapur block Bhomi News Live

क्या है पूरा मामला?

मामला मीनापुर अंचल के मदारीपुर कर्ण मौजे का है। यहाँ करीब 21 एकड़ सरकारी जमीन, जो कभी खतियान में दर्ज थी, उसे धीरे-धीरे 150 से अधिक लोगों के नाम पर दर्ज (जमाबंदी) कर दिया गया। शुरुआत एक-दो नामों से हुई और देखते ही देखते करोड़ों की सरकारी जमीन पर निजी मालिकाना हक जता दिया गया। यहाँ तक कि इस जमीन पर कई मकान भी बन चुके हैं।

एक युवक की सजगता ने खोली पोल

इस बड़े भूमि घोटाले का खुलासा गांव के ही एक युवक अमरेंद्र कुमार ने किया। अमरेंद्र ने खुद अनजाने में इसी जमीन का एक हिस्सा (29 डिसमिल) खरीदा था। जब उन्हें पता चला कि यह जमीन सरकारी है, तो उन्होंने पीछे हटने के बजाय व्यवस्था को सुधारने की ठानी।

उन्होंने लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम (Public Grievance Redressal Act) का सहारा लिया और लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी।

DM का सख्त एक्शन

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी (DM) प्रणव कुमार ने सख्त रुख अपनाया है।

  • BLDR एक्ट के तहत कार्रवाई: DM ने करोड़ों की इस जमीन को वापस सरकारी खाते में लाने के लिए डीसीएलआर (DCLR) पूर्वी को बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम (BLDR Act) के तहत कार्रवाई का आदेश दिया है।
  • रिपोर्ट में खुलासा: अपर समाहर्ता की जांच में पाया गया कि कैडस्ट्रल सर्वे में यह जमीन सरकारी थी, लेकिन रिविजनल सर्वे के बाद भू-माफियाओं और भ्रष्ट कर्मचारियों की मिलीभगत से इसे निजी व्यक्तियों के नाम कर दिया गया।

मुख्य बिंदु:

  • स्थान: मदारीपुर कर्ण, मीनापुर अंचल, मुजफ्फरपुर।
  • कुल जमीन: 21 एकड़।
  • प्रभावित पक्ष: 150 से अधिक अवैध जमाबंदी।
  • कानूनी जरिया: लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत द्वितीय अपील।

निष्कर्ष: यह मामला दर्शाता है कि यदि आम नागरिक जागरूक हो और सूचना के अधिकार या लोक शिकायत जैसे कानूनों का सही इस्तेमाल करे, तो बड़े से बड़े भ्रष्टाचार को उजागर किया जा सकता है। अब देखना यह है कि प्रशासन कितनी जल्दी इस जमीन को वापस सरकारी कब्जे में लेता है और दोषी अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है।

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