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बिहार की सियासत में बड़ा बदलाव: नीतीश के बेटे निशांत कुमार की पॉलिटिक्स में एंट्री, कल संभालेंगे JDU की कमान!

बिहार की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत कुमार अब औपचारिक रूप से सक्रिय राजनीति में कदम रख रहे हैं। शनिवार, 7 मार्च को निशांत कुमार जनता दल यूनाइटेड (JDU) की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण करेंगे।

​यह फैसला मुख्यमंत्री आवास पर हुई जेडीयू विधानमंडल दल की एक हाई-प्रोफाइल बैठक में लिया गया, जिसने बिहार के सियासी भविष्य की नई पटकथा लिख दी है।

​सदस्यता लेते ही शुरू होगी ‘बिहार यात्रा’

​निशांत कुमार केवल पार्टी में शामिल ही नहीं हो रहे हैं, बल्कि वे तुरंत एक्शन मोड में नजर आएंगे। जेडीयू जॉइन करने के साथ ही वे बिहारव्यापी बिहार यात्रा पर निकलेंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य राज्य के युवाओं से जुड़ना और पार्टी के आधार को और मजबूत करना माना जा रहा है।

​बैठक में भावुक हुए नेता: नीतीश जाएंगे राज्यसभा

​जेडीयू विधानमंडल दल की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए और कुछ भावुक पल भी देखने को मिले:

  • विधायकों की मांग: पार्टी के विधायकों ने स्वयं नीतीश कुमार से निशांत को राजनीति में लाने का आग्रह किया था।
  • आधिकारिक घोषणा: कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने इस मांग पर मुहर लगाते हुए कल निशांत के पार्टी में शामिल होने का ऐलान किया।
  • नीतीश का दिल्ली सफर: नीतीश कुमार ने हाल ही में राज्यसभा के लिए नामांकन किया है। उनके दिल्ली जाने की खबर से बैठक में मौजूद कई मंत्री और विधायक भावुक हो उठे।
  • नीतीश का भरोसा: सीएम ने कार्यकर्ताओं को आश्वस्त किया कि, “मैं दिल्ली जरूर जा रहा हूँ, लेकिन मेरा दिल बिहार में ही रहेगा। मैं हर कदम पर पार्टी और कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा रहूँगा।”

​कौन होगा बिहार का अगला मुख्यमंत्री?

​नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार में नई सरकार का गठन होगा। प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री को लेकर सस्पेंस बरकरार है, लेकिन ललन सिंह ने साफ़ कर दिया है कि:

​”अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका अंतिम फैसला खुद नीतीश कुमार ही करेंगे।”

मुख्य बिंदु: एक नजर में

घटनाविवरण
नामनिशांत कुमार (नीतीश कुमार के पुत्र)
दिनांक7 मार्च (जेडीयू सदस्यता ग्रहण)
पहला बड़ा कदमबिहारव्यापी बिहार यात्रा
नीतीश कुमार की नई भूमिकाराज्यसभा सदस्य (प्रस्तावित)
चर्चा का विषयबिहार का अगला मुख्यमंत्री

बिहार की राजनीति में ‘निशांत युग’ की शुरुआत और नीतीश कुमार का केंद्र की राजनीति में जाना, आने वाले चुनावों के लिए बड़े संकेत दे रहा है। क्या निशांत कुमार अपने पिता की विरासत को उसी मजबूती से संभाल पाएंगे? यह देखना दिलचस्प होगा।

सोशल मीडिया पर कट्टा लहराना पड़ा भारी! मधुबनी के अंधराठाढ़ी में पुलिस ने दो युवकों को भेजा जेल

अंधराठाढ़ी थाना पुलिस कार्रवाई: अवैध हथियार के साथ गिरफ्तारी

मधुबनी (बिहार): सोशल मीडिया पर हथियार लहराकर दहशत फैलाना अब अपराधियों के लिए गले की फांस बनता जा रहा है। ताज़ा मामला मधुबनी जिले के अंधराठाढ़ी थाना क्षेत्र का है, जहाँ पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए महज 4 घंटे के भीतर दो युवकों को गिरफ्तार कर लिया है।

क्या है पूरा मामला?

​मिली जानकारी के अनुसार, 03 मार्च 2026 को सुबह लगभग 10:00 बजे पुलिस को एक वीडियो प्राप्त हुआ था। इस वीडियो में दो युवक अवैध हथियार लहराते हुए दिखाई दे रहे थे। वीडियो के संज्ञान में आते ही पुलिस अधीक्षक (SP) मधुबनी ने इसे गंभीरता से लिया और संबंधित थाना को तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई और गिरफ्तारी

​अंधराठाढ़ी पुलिस ने मानवीय और तकनीकी सूचना के आधार पर त्वरित छापेमारी की। पुलिस ने वीडियो में दिख रहे दोनों युवकों की पहचान कर उन्हें हिरासत में ले लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:

  1. नीरज कुमार चौधरी, पिता- धर्मेन्द्र चौधरी
  2. राहुल कुमार चौधरी, पिता- स्व. विक्रम चौधरी

​दोनों आरोपी ग्राम-सिजौल, थाना-अंधराठाढ़ी, जिला-मधुबनी के निवासी बताए जा रहे हैं।

सरस्वती पूजा के दौरान बनाया गया था वीडियो

​पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि वायरल वीडियो सरस्वती पूजा के विसर्जन के समय का है। पुलिस द्वारा कड़ाई से पूछताछ करने पर आरोपियों की निशानदेही पर गंगद्वार ढाला के पास से 01 देसी कट्टा बरामद किया गया है।

पुलिस का बयान: “ये युवक हथियार दिखाकर आम जनता को डराने-धमकाने का काम करते थे और पूर्व में भी जेल जा चुके हैं। गांव में दहशत पैदा करने के उद्देश्य से ये हथियारों के साथ फोटो और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करते थे।”

अवैध हथियार बरामद और कानूनी कार्रवाई

​पुलिस ने आरोपियों के पास से एक देसी कट्टा बरामद किया है। अंधराठाढ़ी थाना द्वारा इस संबंध में आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। दोनों अभियुक्तों को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा रहा है और पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई में जुट गई है।

मधुबनी पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने अपराधियों को सख्त संदेश दिया है कि सोशल मीडिया पर हथियारों का प्रदर्शन करना कानूनन अपराध है और पुलिस ऐसी गतिविधियों पर पैनी नजर रखे हुए है।

खामेनेई की मौत और भारत में विधवा विलाप: क्या यह केवल शोक है या कुछ और?

खामेनेई की मौत और भारत में 'विधवा विलाप': क्या यह केवल शोक है या कुछ और?

हाल ही में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद भारत के कुछ हिस्सों और सोशल मीडिया के गलियारों में शोक की एक अजीब लहर देखी गई। दुःख व्यक्त करना मानवीय स्वभाव है, लेकिन जब यह दुःख उन लोगों की तरफ से आता है जिन्होंने हमेशा भारत के हितों के विरुद्ध रुख अपनाया हो, तो सवाल उठना लाजिमी है।

भारत विरोध का पुराना इतिहास

खामेनेई और ईरान के नेतृत्व ने समय-समय पर भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने की कोशिश की है। अगर हम इतिहास के पन्ने पलटें, तो कड़वी यादें साफ दिखाई देती हैं:

  • कश्मीर और पाकिस्तान का राग: 2017 में खामेनेई ने कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का खुलकर साथ दिया और दुनिया भर के मुस्लिम नेताओं को भारत के खिलाफ एकजुट होने की अपील की।
  • अनुच्छेद 370 पर बयानबाजी: 2019 में जब भारत ने अपनी संप्रभुता का इस्तेमाल करते हुए धारा 370 को हटाया, तो ईरान ने इसके खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया दी।
  • दिल्ली दंगे और CAA: 2020 में दिल्ली दंगों के दौरान उकसावे वाले बयान हों या CAA को ‘मुस्लिम विरोधी’ बताना, खामेनेई प्रशासन ने हमेशा भारत के आंतरिक फैसलों पर उंगली उठाई।

आश्चर्य की बात यह है कि जो ईरान खुद को मुस्लिमों का मसीहा बताता था, उसने अपनी सत्ता बचाने के लिए सऊदी अरब और UAE जैसे मुस्लिम देशों पर ही ड्रोन हमले करने से परहेज नहीं किया।

‘बहादुरी’ के तमगे और भारतीय राजनीति

सबसे विचलित करने वाली बात यह है कि खामेनेई को ‘शेर’ और ‘महान योद्धा’ जैसे विशेषण केवल कुछ कट्टरपंथियों द्वारा नहीं, बल्कि भारत की मुख्यधारा की राजनीति के पढ़े-लिखे नेताओं द्वारा दिए जा रहे हैं। यह वही नेतृत्व है जो भारत के अपने वीरों पर तो मौन रहता है, लेकिन विदेशी ताकतों के लिए पलकें बिछाए खड़ा रहता है।

गाँव की वो कहानी और आज का मंजर

भारत में खामनेई के लिए इस तरह का “विधवा विलाप” देखकर मुझे मेरे गाँव की एक पुरानी घटना याद आती है।

गाँव में एक युवक की अचानक मृत्यु हो गई। पूरा परिवार सदमे में था। तभी अचानक दूसरे गाँव की एक लड़की आई और शव के पास बैठकर ऐसी दहाड़ें मारकर रोने लगी कि खुद घरवाले भी हैरान रह गए। कोई नहीं जानता था कि उसका रिश्ता क्या है। बाद में पता चला कि उस रुदन के पीछे ‘अवैध प्रेम’ और ‘गर्भवती’ होने का रहस्य छिपा था। उसका रोना तो समझ आता था क्योंकि उसका निजी स्वार्थ और भविष्य उस युवक से जुड़ा था।

लेकिन सवाल यह है… भारत में जो लोग झुंड के झुंड बनाकर छाती पीट रहे हैं, उनका खामेनेई से क्या रिश्ता है? क्या यह केवल धार्मिक सहानुभूति है, या फिर इसके पीछे भी वही ‘गाँव वाली कहानी’ की तरह कोई गहरा वैचारिक और राजनीतिक स्वार्थ छिपा है?

किसी की मृत्यु पर संवेदना व्यक्त करना शिष्टाचार हो सकता है, लेकिन जिस व्यक्ति ने हमेशा आपके देश की अखंडता और निर्णयों को चुनौती दी हो, उसे अपना ‘नायक’ बनाना आत्म-सम्मान पर चोट है। यह “रुदन” श्रद्धा कम और राजनीतिक एजेंडा ज्यादा नजर आता है।

मधुबनी: संदीप यूनिवर्सिटी में हथियार लहराने वाला छात्र गिरफ्तार, पुलिस ने भेजा जेल

मधुबनी (बिहार): जिले में अवैध हथियारों के प्रदर्शन और अपराध पर लगाम लगाने के लिए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर लगातार कार्रवाई जारी है। इसी कड़ी में अंधराठाढ़ी थाना क्षेत्र स्थित संदीप यूनिवर्सिटी में पिस्टल लहराकर दहशत फैलाने वाले एक युवक को पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार कर लिया है।

क्या है पूरा मामला?

​घटना बीते शुक्रवार (27 फरवरी 2026) की रात करीब 7:30 बजे की है। जानकारी के अनुसार, संदीप यूनिवर्सिटी के सुरक्षा प्रभारी (Security Incharge) रूटीन गश्त पर थे। इसी दौरान उन्होंने एक छात्र को हाथ में हथियार लहराते हुए देखा। सुरक्षाकर्मियों को देखते ही युवक हथियार फेंककर बाउंड्री फांदकर अंधेरे का फायदा उठाते हुए भाग निकला।

​सुरक्षाकर्मियों ने तत्काल इसकी सूचना अंधराठाढ़ी थाना को दी और फेंके गए हथियार को अपनी अभिरक्षा में ले लिया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई और गिरफ्तारी

​मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने मानवीय आसूचना (Human Intelligence) और तकनीकी इनपुट का सहारा लिया। अंधराठाढ़ी थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी युवक को भैरवस्थान थाना क्षेत्र के काको ग्राम से धर दबोचा।

पुलिस पूछताछ में खुलासा: गिरफ्तार युवक ने पूछताछ के दौरान यूनिवर्सिटी कैंपस में हथियार लहराने की बात स्वीकार कर ली है। पुलिस ने उसके पास से 01 अवैध देशी कट्टा बरामद किया है।

अभियुक्त का विवरण

​गिरफ्तार किए गए युवक की पहचान निम्नलिखित रूप में हुई है:

  • नाम: विकाश सिंह
  • पिता: चंद्रप्रकाश सिंह
  • निवासी: ग्राम- सिजौल, थाना- अंधराठाढ़ी, जिला- मधुबनी।

कानूनी कार्रवाई

​मधुबनी पुलिस के अनुसार, आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा रहा है। पुलिस इस मामले में अन्य कानूनी पहलुओं की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि युवक के पास अवैध हथियार कहाँ से आया।

मधुबनी पुलिस का संदेश: “पुलिस आपकी सेवा में सदैव तत्पर है और अवैध हथियारों या अपराध में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।”

पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव: छात्र राजद के उपाध्यक्ष उम्मीदवार सुमन शेखर का बड़ा विजन, बुनियादी सुविधाओं और प्लेसमेंट पर जोर

इस तस्वीर में सुमन शेखर विश्वविद्यालय की समस्याओं और अपने विज़न पर चर्चा कर रहे हैं।

पटना विश्वविद्यालय, जिसे कभी ‘पूर्व में ऑक्सफोर्ड’ कहा जाता था, इन दिनों छात्र संघ चुनाव की सरगर्मियों से सराबोर है। छात्र राजनीति के इस गढ़ में हर उम्मीदवार अपनी धाक जमाने की कोशिश कर रहा है। इसी कड़ी में छात्र राजद (CRJD) के उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार सुमन शेखर ने ‘भूमि न्यूज़’ के साथ विशेष बातचीत में विश्वविद्यालय की बुनियादी समस्याओं और अपने भविष्य के लक्ष्यों पर चर्चा की।

बुनियादी सुविधाओं और प्लेसमेंट सेल पर ज़ोर

सुमन शेखर ने साक्षात्कार के दौरान इस बात पर बल दिया कि उनका मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय में बुनियादी सुविधाओं (Basic Facilities) में सुधार करना है। उन्होंने अपने घोषणापत्र की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी ‘प्लेसमेंट सेल’ की स्थापना को बताया।

शेखर ने कहा, “पटना विश्वविद्यालय का इतिहास बहुत गौरवशाली रहा है। यहाँ के पूर्व छात्र (Alumni) देश-दुनिया के ऊँचे पदों पर आसीन हैं। यदि हम अपने पूर्व छात्रों के नेटवर्क का सही उपयोग करें, तो विश्वविद्यालय में एक बेहतरीन प्लेसमेंट सेल का निर्माण संभव है, जो छात्रों के भविष्य के लिए क्रांतिकारी साबित होगा।”

महिला कॉलेजों में स्वास्थ्य और स्वच्छता का मुद्दा

सुमन ने छात्राओं की समस्याओं, विशेषकर स्वास्थ्य और स्वच्छता (Hygiene) पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने मगध महिला कॉलेज का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां हॉस्टल में रहने वाली बड़ी संख्या में छात्राओं के बावजूद एक मेडिकल शॉप की अनुपस्थिति चिंताजनक है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि छात्राओं की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को प्राथमिकता दी जाए।

विश्वविद्यालय की चुनौतियों पर बेबाक राय

साक्षात्कार में उन्होंने विश्वविद्यालय के पिछड़ते सत्रों (Late Sessions) और शिक्षकों की कमी पर भी चिंता व्यक्त की। सुमन शेखर ने सुझाव दिया कि:

  • वरिष्ठ प्रोफेसरों को प्रशासनिक कार्यों के बजाय क्लास वर्क और रिसर्च में अधिक शामिल किया जाना चाहिए।
  • नए प्रोफेसरों को प्रशासनिक जिम्मेदारी दी जानी चाहिए ताकि वे काम को गति दे सकें।
  • विश्वविद्यालय को भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी बनाने की आवश्यकता है।

छात्र संघ चुनाव सिर्फ राजनीति नहीं, व्यक्तित्व विकास का माध्यम है

छात्र राजनीति को अक्सर मुख्यधारा की राजनीति की पहली सीढ़ी माना जाता है, लेकिन सुमन शेखर का नज़रिया कुछ अलग है। उनका मानना है कि छात्र संघ चुनाव लड़ने से छात्रों में तनाव प्रबंधन (Stress Management) और निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है। यह ज़रूरी नहीं कि हर छात्र नेता भविष्य में राजनेता ही बने; वे अच्छे ब्यूरोक्रेट्स, लेखक या समाज के ज़िम्मेदार नागरिक भी बन सकते हैं।

छात्रों से अपील

अंत में, सुमन शेखर ने पटना विश्वविद्यालय के सभी छात्र-छात्राओं से अपील की कि वे अपने मत का प्रयोग अवश्य करें। उन्होंने आग्रह किया कि छात्र जाति, धर्म और किसी के प्रभाव में आए बिना उम्मीदवार के विजन (Vision) और ब्लूप्रिंट को देखकर अपना नेता चुनें।

सुमन शेखर का आत्मविश्वास और विश्वविद्यालय की समस्याओं के प्रति उनकी गहरी समझ यह दर्शाती है कि इस बार का चुनाव केवल नारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ठोस बदलाव की उम्मीद भी लेकर आया है। अब देखना यह होगा कि विश्वविद्यालय के छात्र उनके विज़न पर कितना भरोसा जताते हैं।

क्या आप पटना विश्वविद्यालय के छात्र हैं? सुमन शेखर के इन वादों पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट में ज़रूर बताएं!

मधुबनी जिला परिषद विवाद: डाक बंगला की जगह सभा भवन निर्माण पर रोक की मांग

मधुबनी: जिले की राजनीति में इन दिनों विकास कार्यों और सरकारी धन के उपयोग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जिला परिषद सदस्य ललिता देवी ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए ‘डाक बंगला’ की जगह ‘नूतन सभा भवन’ (नया मीटिंग हॉल) के निर्माण को जनता के पैसों की बर्बादी बताया है।

ललिता देवी ने इस संबंध में उप विकास आयुक्त (DDC) सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी को पत्र लिखकर इस निर्माण पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है।

क्या है पूरा मामला?

जिला परिषद सदस्य का कहना है कि मधुबनी जिला परिषद परिसर में पहले से मौजूद डाक बंगला को तोड़कर वहां एक नया सभा भवन बनाने की योजना बनाई गई है। उनका आरोप है कि यह निर्माण अनावश्यक है और यह आम जनता के टैक्स से आए पैसों का दुरुपयोग करने की एक ‘साजिश’ है।

विरोध के मुख्य कारण

पत्र में ललिता देवी ने इस निर्माण को गलत ठहराने के लिए कई महत्वपूर्ण तर्क दिए हैं:

  • पहले से उपलब्ध हैं सभा भवन: जिला परिषद परिसर में ‘विकास भवन’ और ‘जिला परिषद भवन’ दोनों में पहले से ही सुसज्जित सभा भवन मौजूद हैं।
  • अधूरे प्रोजेक्ट्स की अनदेखी: परिसर में ही एक पांच मंजिला मल्टीपर्पस भवन पिछले 8 वर्षों से अधूरा पड़ा है। उस पर ध्यान देने के बजाय नए प्रोजेक्ट पर पैसा खर्च किया जा रहा है।
  • नए भवनों की मंजूरी: परिसर में पहले से ही एक D.P.R.C. भवन के निर्माण की मंजूरी मिल चुकी है। ऐसे में एक और सभा भवन की कोई आवश्यकता नहीं है।

‘शीत भंडारण गृह’ (Cold Storage) बनाने का सुझाव

ललिता देवी ने प्रशासन को एक वैकल्पिक और जनहितकारी सुझाव भी दिया है। उन्होंने मांग की है कि सभा भवन पर पैसे बर्बाद करने के बजाय:

लदनियां प्रखण्ड के बौरहा गाँव में स्थित जिला परिषद की भूमि पर एक शीत भंडारण गृह (Cold Storage) का निर्माण कराया जाए। इससे क्षेत्र के किसानों को सीधा लाभ होगा और उनकी फसलें बर्बाद होने से बचेंगी।

जिला परिषद सदस्य ने प्रशासन से अपील की है कि व्यापक लोकहित को देखते हुए अनावश्यक सभा भवन के निर्माण की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए और जनता के पैसे को वहां खर्च किया जाए जहां उसकी असल जरूरत है।

अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस पत्र पर क्या संज्ञान लेता है और क्या इस निर्माण कार्य को रोककर जनहित के अन्य कार्यों को प्राथमिकता दी जाती है।

बिहार पुलिस सप्ताह 2026: फुलपरास प्रखंड के बथनाहा में पुलिस और जनप्रतिनिधियों के बीच सजेगा क्रिकेट का मैदान

बिहार पुलिस सप्ताह 2026 के शुभ अवसर पर मधुबनी जिले के फुलपरास (बथनाहा) में एक अनोखा और रोमांचक मुकाबला होने जा रहा है। खेल के मैदान पर इस बार ‘पुलिस प्रशासन’ और ‘जनप्रतिनिधि’ एक-दूसरे के आमने-सामने होंगे। यह ‘फुलपरास दोस्ताना क्रिकेट मैच’ न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि समाज में भाईचारे और खेल भावना को बढ़ावा देने की एक अनूठी पहल है।

मैच का विवरण (Match Details)

​इस टी-20 (T-20) क्रिकेट मैच का आयोजन ग्राम पंचायत राज बथनाहा स्थित ऐतिहासिक खेल मैदान पर किया जा रहा है।

  • तारीख: 26 फरवरी 2026 (गुरुवार)
  • स्थान: किसान +2 हाई स्कूल क्रिकेट मैदान, बथनाहा, फुलपरास
  • टीमें: पुलिस प्रशासन बनाम जनप्रतिनिधि

प्रशासन की टीम में दिग्गज खिलाड़ी

​इस मैच में प्रशासन की ओर से कमान संभालते हुए SDM सर, प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) और अंचलाधिकारी (CO) जैसे वरिष्ठ अधिकारी अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। अधिकारियों का मैदान पर उतरना क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

आयोजन का मुख्य उद्देश्य

​इस दोस्ताना मैच का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित है:

कार्यक्रम पार्टनर: पी.एन.बी. एवं एस.बी.आई.

युवाओं में जागरूकता: ग्रामीण युवाओं को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करना।

खेल संस्कृति: पंचायत और गांव स्तर पर खेल संस्कृति को मजबूती देना।

आपसी भाईचारा: प्रशासन और जनता के प्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय और भाईचारे को बढ़ावा देना।

संयोजक: पुलिस प्रशासन, फुलपरास

प्रेषक: श्रीमती नूतन कुमारी (मुखिया, ग्राम पंचायत राज बथनाहा)

क्या भारत भी जिम्बाब्वे की राह पर है? मुफ्त की राजनीति और आर्थिक तबाही का सच

कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया और विदेशी चैनलों पर एक वीडियो खूब वायरल हुआ था, जिसे देखकर हंसी भी आती है और डर भी लगता है। वीडियो में जिम्बाब्वे का एक लड़का बोरी भर के नोट लेकर दुकान पर सिर्फ एक चॉकलेट खरीदने पहुँचा है।

यह सुनने में किसी कॉमेडी फिल्म का सीन लग सकता है, लेकिन यह एक देश की बर्बादी की वो दास्तान है जिसे ‘मुफ्तखोरी की राजनीति’ ने लिखा है।

सत्ता का लालच और जिम्बाब्वे का पतन

जिम्बाब्वे के शासकों ने सोचा कि सत्ता में बने रहने का सबसे आसान तरीका है—जनता को सब कुछ मुफ्त दे दो। उन्होंने लोकलुभावन वादों की झड़ी लगा दी:

  • हर नागरिक को हर महीने 10,000 जिम्बाब्वे करेंसी बांटना।
  • किसानों को एमएसपी (MSP) की अंधी गारंटी।
  • मजदूरों को बिना किसी बजट प्रावधान के भारी-भरकम पेंशन।

नतीजा?

शुरुआती तीन महीने तो जनता को लगा कि स्वर्ग धरती पर आ गया है। लेकिन चौथे महीने से हकीकत सामने आने लगी। जब बाजार में सामान कम और नोटों की बाढ़ ज्यादा हो गई, तो मुद्रा (Currency) की कीमत कौड़ियों के बराबर रह गई। आज वहां सड़कों पर नोट कचरे की तरह बिखरे मिलते हैं।

₹5 की चॉकलेट और दो बोरी नोट

आज जिम्बाब्वे की महंगाई (Hyperinflation) का आलम यह है कि यदि आप भारत में मिलने वाली मामूली ₹5 वाली कैडबरी चॉकलेट खरीदना चाहें, तो आपको दो बोरों में भरकर वहां की करेंसी ले जानी पड़ेगी। स्थिति इतनी भयावह हो गई कि सरकार को 10 मिलियन और 50 मिलियन जैसे बड़े नोट छापने पड़े, जिनकी असल कीमत एक ब्रेड के टुकड़े से भी कम है।

चेतावनी: जब अर्थव्यवस्था उत्पादन (Production) के बजाय सिर्फ नोट छापने और बांटने पर टिकी होती है, तो वह ताश के पत्तों की तरह ढह जाती है।

भारत के संदर्भ में एक गंभीर सबक

आज भारत में भी कुछ ऐसी ही ताकतें सक्रिय हैं जो देश को इसी ‘जिम्बाब्वे मॉडल’ पर धकेलना चाहती हैं। जॉर्ज सोरोस जैसे विदेशी एजेंडे से प्रेरित कुछ तत्व और ‘फर्जी किसान’ आंदोलन के नाम पर देश की अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ डालने की मांग कर रहे हैं।

मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी और बिना सोचे-समझे दी जाने वाली गारंटियों का लालच सुनने में मीठा लगता है, लेकिन इसका अंत जिम्बाब्वे जैसा ही होता है। यदि हम आज नहीं संभले और आर्थिक अनुशासन (Economic Discipline) को महत्व नहीं दिया, तो अगली पीढ़ी को चॉकलेट खरीदने के लिए भी बोरियों की जरूरत पड़ सकती है।

हमें यह तय करना होगा कि हमें एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत चाहिए, या ‘रेवड़ी संस्कृति’ वाला कंगाल देश।

क्या आपको लगता है कि भारत में बढ़ती ‘फ्रीबीज’ की राजनीति हमारे भविष्य के लिए खतरा है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

मधुबनी: झंझारपुर में ग्रामीणों का गुस्सा फूटा, आवास सहायक को बनाया बंधक; अवैध उगाही का संगीन आरोप

​​झंझारपुर (मधुबनी): बिहार के मधुबनी जिले के झंझारपुर प्रखंड अंतर्गत संतनगर पंचायत में शनिवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब ग्रामीणों ने भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर पंचायत आवास सहायक और एक अन्य कर्मी को घंटों बंधक बनाए रखा। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के नाम पर पंचायत में बड़े पैमाने पर अवैध वसूली का खेल चल रहा है।

​क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, आवास सहायक प्रमोद कुमार महतो एक पूर्व कर्मी राजकुमार चौधरी के साथ संतनगर पंचायत के इमादपट्टी गांव में जांच के लिए पहुंचे थे। ग्रामीणों का दावा है कि जांच के नाम पर लाभुकों को डराया जा रहा था कि सर्वेक्षण सूची से करीब 800 लोगों के नाम काटे जा रहे हैं। सूची में नाम बरकरार रखने के एवज में प्रति लाभुक 700 रुपये की मांग की जा रही थी।

25 से 30 लाख की वसूली का आरोप

ग्रामीणों ने तंत्र पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह भ्रष्टाचार की पहली किस्त नहीं है। उनके अनुसार:

  • ​​सूची निर्माण: शुरुआत में 1,000 रुपये लिए गए।
  • सर्वेक्षण: पंचायत सचिव राम नारायण राम द्वारा 500 रुपये की कथित वसूली।
  • वर्तमान मांग: आवास सहायक द्वारा फिर से 700 रुपये की मांग।

ग्रामीणों का कहना है कि अब तक पूरे पंचायत से आवास योजना के नाम पर 25 से 30 लाख रुपये की अवैध उगाही की जा चुकी है।

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

​​स्थिति बिगड़ती देख स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि ने पुलिस को सूचना दी। भैरवस्थान थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को शांत कराया और लिखित आवेदन लेने के बाद बंधक बनाए गए कर्मियों को अपनी सुरक्षा में लेकर थाना पहुंचाया।

​दो पक्षों में बंटा मामला: आरोप बनाम अपहरण

इस घटना के बाद प्रशासन और कर्मियों का रुख ग्रामीणों के आरोपों से बिल्कुल अलग है:

पक्षमुख्य तर्क / बयान
ग्रामीणजांच के नाम पर अवैध वसूली हो रही है, इसलिए बीडीओ को मौके पर बुलाने की मांग की गई।
BDO (प्रखंड विकास पदाधिकारी)वसूली के आरोप निराधार हैं। असामाजिक तत्वों ने सरकारी कर्मी को अगवा कर बंधक बनाया और मारपीट की।
आवास सहायक (पीड़ित)मुझे जबरन मोटरसाइकिल पर बैठाकर अगवा किया गया और जान से मारने की कोशिश की गई।

आवास सहायकों ने दी कार्य बहिष्कार की चेतावनी

इस घटना के विरोध में प्रखंड के अन्य आवास सहायकों ने नाराजगी जताई है। उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई न होने पर कार्य बहिष्कार का अल्टीमेटम दिया है। पीड़ित आवास सहायक प्रमोद कुमार महतो ने स्थानीय थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई है।

नोट: फिलहाल पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। एक तरफ जहां भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच होनी है, वहीं दूसरी ओर सरकारी कर्मी के साथ हुई मारपीट पर कानूनी शिकंजा कसना तय है।

प्रशांत किशोर का बड़ा बयान: सही तरीके से चुनाव लड़ना कठिन, पर बिहार की सूरत बदलने के लिए हम 10 साल संघर्ष को तैयार

झंझारपुर, 21 फ़रवरी 2026: जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर (PK) अपनी ‘बिहार नवनिर्माण यात्रा’ के क्रम में आज झंझारपुर पहुंचे। यहाँ मीडिया से बात करते हुए उन्होंने संगठन की भविष्य की रणनीति और हालिया चुनावी अनुभवों पर बेबाकी से अपनी राय रखी।

संगठन का पुनर्गठन: पंचायत स्तर तक पहुँचेगी जन सुराज

प्रशांत किशोर ने बताया कि जन सुराज इस समय अपने संगठन को पुनर्गठित करने के मिशन पर है। यह केवल ऊपरी ढांचे में बदलाव नहीं है, बल्कि उन पुराने साथियों को फिर से एकजुट करने की मुहिम है जो विचारधारा की नींव से जुड़े रहे हैं।

  • उद्देश्य: प्रत्येक प्रखंड और पंचायत स्तर तक पार्टी के सिद्धांतों को पहुँचाना।
  • रणनीति: पदाधिकारियों के चयन के साथ-साथ जमीनी कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाना।

चुनाव परिणामों पर PK की खरी-खरी

हालिया चुनाव परिणामों के सवाल पर प्रशांत किशोर ने एक गंभीर और ईमानदार विश्लेषण पेश किया। उन्होंने स्वीकार किया कि बिहार में बिना जाति, धर्म या गठबंधन के सहारे चुनाव लड़ना एक चुनौतीपूर्ण मार्ग है।

सही तरीके से चुनाव लड़कर जीत हासिल करना हमेशा से कठिन रहा है। हमने न तो किसी से गठबंधन किया और न ही जाति-धर्म के समीकरण साधे। यह एक लंबी लड़ाई है, और हम इसके लिए 5 से 10 साल तक संघर्ष करने को तैयार हैं।- प्रशांत किशोर

केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, व्यवस्था परिवर्तन लक्ष्य

PK ने झंझारपुर की जनता और कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि जन सुराज का लक्ष्य केवल चुनाव जीतना या हारना नहीं है। उनकी लड़ाई बिहार के हर जिले में:

  • रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए है।
  • ​राज्य में उद्योगों की स्थापना सुनिश्चित करने के लिए है।
  • ​बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जन सुराज केवल उन लोगों का समूह नहीं है जो वर्तमान सरकार से असंतुष्ट हैं, बल्कि यह उन लोगों का मंच है जो बिहार में वास्तविक बदलाव देखना चाहते हैं।

स्थानीय कार्यकर्ताओं में उत्साह

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्थानीय पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं की भारी मौजूदगी रही। सभी ने संगठन की आगामी कार्ययोजना पर चर्चा की और संकल्प लिया कि वे गाँव-गाँव जाकर ‘जन सुराज’ की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाएंगे।

प्रशांत किशोर के इस दौरे ने साफ कर दिया है कि चुनावी हार-जीत से बेफिक्र होकर वे एक लंबी पारी की तैयारी कर रहे हैं। बिहार की राजनीति में यह ‘शुद्धतावादी’ प्रयोग कितना सफल होगा, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन उनके इरादे स्पष्ट हैं।