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खुटौना में जदयू का सदस्यता अभियान: विधायक ने कार्यकर्ताओं के साथ भरी हुंकार, बड़ी संख्या में लोगों ने ली पार्टी की सदस्यता

खुटौना (मधुबनी): मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल (यूनाइटेड) की जड़ें मजबूत करने के लिए खुटौना प्रखंड में विशाल सदस्यता अभियान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में स्थानीय विधायक ने शिरकत की और बड़ी संख्या में स्थानीय युवाओं व ग्रामीणों को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता दिलाई।

कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह

कार्यक्रम के दौरान प्रखंड के विभिन्न पंचायतों से आए लोगों ने जदयू की नीतियों और बिहार में हो रहे विकास कार्यों में अपनी आस्था जताई। विधायक ने नए सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि जदयू सिर्फ एक पार्टी नहीं, बल्कि समावेशी विकास का एक विचार है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे सरकार की लोक-कल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाएँ।

दिग्गज नेताओं की रही मौजूदगी

इस अवसर पर पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने संगठन की मजबूती पर जोर दिया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से निम्नलिखित गणमान्य उपस्थित थे:

  • सत्येंद्र सिंह: प्रदेश उपाध्यक्ष, किसान सह सहकारिता प्रकोष्ठ (जदयू)​
  • चंद्रभूषण साह: जिला परिषद सदस्य
  • ​देवदत्त साह: प्रखंड अध्यक्ष​
  • पार्टी कार्यकर्ता: बड़ी संख्या में स्थानीय कार्यकर्ता और ग्रामीण जनता।

विकास के मुद्दे पर एकजुटता

बैठक को संबोधित करते हुए सत्येंद्र सिंह ने कहा कि किसान और सहकारिता के क्षेत्र में बिहार ने नए आयाम स्थापित किए हैं। वहीं, जिला परिषद सदस्य चंद्रभूषण साह और प्रखंड अध्यक्ष देवदत्त साह ने स्थानीय स्तर पर संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने की रणनीति साझा की।​कार्यक्रम के अंत में विधायक ने नए सदस्यों को सदस्यता रसीद सौंपी और उन्हें पार्टी के सिद्धांतों पर चलने का संकल्प दिलाया।

संस्कार भारती ग्लोबल स्कूल में ‘संस्कारियंस चिल्ड्रेन्स डे’ और ग्रेजुएशन फीस्ट की धूम; महा-रक्तदान शिविर का भी हुआ आयोजन

स्थानीय डेस्क: स्थानीय संस्कार भारती ग्लोबल स्कूल ने एक बार फिर अपनी गौरवशाली और स्वस्थ परंपरा को जीवंत करते हुए एक भव्य समारोह का आयोजन किया। विद्यालय के संस्थापक निदेशक डॉ. विजय रंजन के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में ‘संस्कारियंस चिल्ड्रेन्स डे’ को बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

125 पाउंड का केक और भव्य महाभोज

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 125 पाउंड का विशाल केक रहा, जिसे काटकर डॉ. विजय रंजन के जन्मदिवस और चिल्ड्रेन्स डे की खुशियां मनाई गईं। इस अवसर पर दसवीं और बारहवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं के सम्मान में ‘ग्रेजुएशन फीस्ट-सह-महाभोज’ का आयोजन भी किया गया।

​इस महाभोज में न केवल विद्यालय के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और कर्मचारियों ने हिस्सा लिया, बल्कि शिक्षा जगत, समाज सेवा और मीडिया जगत के सैकड़ों गणमान्य लोगों ने भी शिरकत की।

सेवा का संकल्प: महा-रक्तदान शिविर

उत्सव के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए संस्कार नव निर्माण सेवा संस्थान के तत्वावधान में एक महा-रक्तदान शिविर आयोजित किया गया।

  • प्रतिभागी: विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं के साथ-साथ कई समाजसेवियों और डॉ. रंजन के मित्रमंडली ने सेवाभाव से रक्तदान किया।​
  • प्रमुख उपस्थिति: संस्था अध्यक्ष उपेन्द्र यादव, पोल स्टार मधुबनी के निदेशक श्री कैलाश भारद्वाज और प्रो. डॉ. विजया सिंह जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तित्व इस अवसर पर मौजूद रहे।

निदेशक का संदेश: शिक्षा और स्वास्थ्य पर जोर

विद्यालय के निदेशक डॉ. विजय रंजन ने अपने संबोधन में संस्थान के विजन को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा:

हमारा संस्थान समाज के अंतिम और वंचित व्यक्ति के शैक्षिक व सामाजिक उत्थान के लिए कृत संकल्पित है। हम इस दिशा में निरंतर प्रयास जारी रखेंगे।

रक्तदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने आगे कहा कि एक स्वस्थ व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार रक्तदान जरूर करना चाहिए। यह न केवल दूसरों का जीवन बचाता है, बल्कि स्वयं रक्तदाता के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है।

कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं (Highlights)

गतिविधिविवरण
अवसर डॉ. विजय रंजन का जन्मदिन व चिल्ड्रेन्स डे
मुख्य आकर्षण125 पाउंड का केक
विशेष आयोजनकक्षा 10वीं व 12वीं के लिए ग्रेजुएशन फीस्ट
सामाजिक कार्यस्वैच्छिक रक्तदान शिविर
सहयोगसंस्कार नव निर्माण सेवा संस्थान

निष्कर्ष: संस्कार भारती ग्लोबल स्कूल का यह आयोजन शिक्षा, संस्कार और सामाजिक सेवा का एक अनूठा संगम रहा। विद्यालय की यह पहल समाज के प्रति उनकी संवेदनशीलता और छात्रों के उज्ज्वल भविष्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

निर्भया कांड की 13वीं बरसी: 6 दरिंदे, एक चलती बस और वो चीखें जो आज भी दिल्ली की सड़कों पर गूँजती हैं!

नई दिल्ली: 16 दिसंबर 2012—भारतीय इतिहास का वो काला दिन जिसे कोई भी देशवासी कभी नहीं भूल सकता। आज इस वीभत्स घटना को पूरे 13 साल बीत चुके हैं। दिल्ली की सड़कों पर एक चलती बस में जो दरिंदगी हुई थी, उसने न केवल एक बेटी की जान ली, बल्कि पूरे देश के सिस्टम और कानून को कटघरे में खड़ा कर दिया था। आज 13वीं बरसी पर देश एक बार फिर अपनी उस बेटी को याद कर रहा है और सवाल पूछ रहा है कि क्या वाकई महिलाएं अब सुरक्षित हैं?

वो खौफनाक रात: क्या हुआ था 16 दिसंबर को..?

13 साल पहले आज ही के दिन, एक पैरामेडिकल छात्रा अपने दोस्त के साथ फिल्म देखकर घर लौट रही थी। मुनिरका से बस लेने के बाद, बस में सवार 6 दरिंदों ने उसके साथ जो हैवानियत की, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। गंभीर हालत में उसे इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया, जहां 29 दिसंबर को उसने दम तोड़ दिया।

लंबी कानूनी लड़ाई और इंसाफ

निर्भया के माता-पिता ने अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। इस मामले में:

  • कुल आरोपी: 6 (राम सिंह, मुकेश सिंह, विनय शर्मा, अक्षय ठाकुर, पवन गुप्ता और एक नाबालिग)।
  • सजा: मुख्य आरोपी राम सिंह ने जेल में आत्महत्या कर ली थी। नाबालिग को 3 साल सुधार गृह में रखने के बाद रिहा कर दिया गया।
  • फांसी: 20 मार्च 2020 को तिहाड़ जेल में चारों दोषियों (मुकेश, विनय, अक्षय और पवन) को फांसी दी गई।

कानून में क्या हुए बदलाव..?

निर्भया कांड के बाद देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के कारण सरकार को ‘जस्टिस वर्मा कमेटी’ बनानी पड़ी। इसके बाद ‘क्रिमिनल लॉ (अमेंडमेंट) एक्ट 2013’ पास हुआ, जिसमें:

  • बलात्कार के लिए कड़ी सजा और कुछ मामलों में मृत्युदंड का प्रावधान किया गया।
  • ​’निर्भया फंड‘ की स्थापना की गई ताकि महिला सुरक्षा के प्रोजेक्ट्स को फंड मिल सके।
  • फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन हुआ।

आज की जमीनी हकीकत

13 साल बीत जाने के बाद भी क्या हालात बदले हैं? हाल ही में कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना हो या देश के अन्य हिस्सों से आने वाली खबरें, ये साबित करती हैं कि कानून सख्त होने के बावजूद अपराधी बेखौफ हैं। ‘निर्भया फंड’ के सही इस्तेमाल और पुलिस व्यवस्था में सुधार को लेकर आज भी विशेषज्ञ सवाल उठाते हैं।

निर्भया की 13वीं बरसी हमें याद दिलाती है कि न्याय केवल फांसी की सजा तक सीमित नहीं होना चाहिए। असली न्याय तब होगा जब देश की हर सड़क, हर दफ्तर और हर घर महिलाओं के लिए पूरी तरह सुरक्षित होगा। निर्भया आज एक नाम नहीं, बल्कि महिला सुरक्षा के लिए चल रही एक कभी न खत्म होने वाली जंग का प्रतीक बन चुकी है।

Note: This script is curated based on the reporting trends of Patrika and general news standards for digital platforms.

मधुबनी: PMGSY की ‘हाई-टेक’ सड़क पर PHED का ‘हथौड़ा’, करोड़ों की सरकारी संपत्ति की बर्बादी पर कब जागेगा प्रशासन?

बिहार के मधुबनी जिले में विकास के नाम पर एक विभाग दूसरे विभाग की मेहनत और जनता की गाढ़ी कमाई पर पानी फेर रहा है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY-III) के तहत अत्याधुनिक ‘FDR Technology‘ से बनाई जा रही करोड़ों की सड़क को PHED विभाग द्वारा बिना किसी अनुमति (NOC) के बुरी तरह क्षतिग्रस्त किया जा रहा है। NKSP Infra Pvt. Ltd. और ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) की बार-बार चेतावनी के बावजूद PHED झांझरपुर प्रमंडल की मनमानी रुकने का नाम नहीं ले रही है।

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​क्या है पूरा मामला..?

मधुबनी के खुटौना प्रखंड के अंतर्गत T28- बेलहा से ललमनियां वाया खुटौना प्रखंड मुख्यालय तक सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है। इस सड़क का निर्माण FDR (Full Depth Reclamation) तकनीक से किया जा रहा है, जो बिहार की सबसे आधुनिक सड़क निर्माण तकनीकों में से एक है।

लेकिन, PHED विभाग द्वारा ‘सात निश्चय योजना’ के तहत पाइप लाइन बिछाने के लिए चैनेज 4600 से 4772 के बीच (गढ़िया गाँव के पास) सड़क को गैर-तकनीकी तरीके से काटा जा रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि इसके लिए PHED ने ग्रामीण कार्य विभाग से कोई अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) तक नहीं लिया।

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FDR तकनीक: एक बार टूटी तो मरम्मत नामुमकिन!

विशेषज्ञों और निर्माण कंपनी (NKSP Infra) के अनुसार, FDR तकनीक से बनी सड़क में जॉब मिक्स फॉर्मूला का उपयोग होता है। यदि एक बार यह सड़क बेस से क्षतिग्रस्त हो जाती है, तो इसे सामान्य तरीके से पैच वर्क कर के ठीक नहीं किया जा सकता। इसके पुनर्स्थापन (Restoration) के लिए उन्हीं करोड़ों की मशीनों की जरूरत पड़ती है, जो फिलहाल बिहार में उपलब्ध नहीं हैं। यानी PHED की एक छोटी सी लापरवाही सरकार को करोड़ों का चूना लगा रही है।

चेतावनी को किया गया अनसुना:

दस्तावेजों से पता चलता है कि:

  • 22 नवंबर 2025 को कार्यपालक अभियंता (RWD, फुलपरास) ने PHED को पत्र लिखकर काम रोकने को कहा था।
  • 18 दिसंबर 2025 को दोबारा चेतावनी दी गई कि बगैर NOC के काम करना विभागीय कार्रवाई का आधार बन सकता है।
  • 02 जनवरी 2026 को अभियंता प्रमुख-सह-अपर आयुक्त (बिहार सरकार) ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए काम को तत्काल स्थगित करने का निर्देश दिया है।

लापरवाही या भ्रष्टाचार?

पूर्व में Bhoomi News Live की रिपोर्ट में भी PHED झांझरपुर प्रमंडल द्वारा राजस्व की क्षति और बिजली चोरी जैसे गंभीर आरोप लग चुके हैं। अब नई सड़क को क्षतिग्रस्त करना यह दर्शाता है कि विभागों के बीच आपसी समन्वय (Coordination) की भारी कमी है, जिसका खामियाजा जनता भुगत रही है।

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मुख्य सवाल:

  • बिना NOC के PHED ने खुदाई कैसे शुरू की?​
  • क्या PHED के पास सड़क मरम्मत के लिए आधुनिक FDR मशीनें हैं? अगर नहीं, तो सड़क कौन ठीक करेगा?​
  • क्या दोषी अधिकारियों पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में कार्रवाई होगी?

निष्कर्ष: एक तरफ बिहार सरकार चमचमाती सड़कों का जाल बिछा रही है, वहीं दूसरी तरफ अधिकारियों की आपसी खींचतान और तानाशाही रवैया विकास को गड्ढे में धकेल रहा है। अगर समय रहते प्रशासन नहीं जागा, तो खुटौना की यह ‘मॉडल रोड’ बनने से पहले ही खंडहर में तब्दील हो जाएगी।

अफसरों की नाक के नीचे ‘गायब’ हो गई 21 एकड़ जमीन, सच्चाई जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे

मुजफ्फरपुर (बिहार): बिहार में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और भू-माफियाओं की सक्रियता का एक बड़ा मामला सामने आया है। मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर अंचल में प्रशासन की नाक के नीचे 21 एकड़ सरकारी जमीन को कागजों में हेरफेर कर निजी (रैयती) घोषित कर दिया गया। ताज्जुब की बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारी ‘सोते’ रहे।

21 acres government land scam in Muzaffarpur Meenapur block Bhomi News Live

क्या है पूरा मामला?

मामला मीनापुर अंचल के मदारीपुर कर्ण मौजे का है। यहाँ करीब 21 एकड़ सरकारी जमीन, जो कभी खतियान में दर्ज थी, उसे धीरे-धीरे 150 से अधिक लोगों के नाम पर दर्ज (जमाबंदी) कर दिया गया। शुरुआत एक-दो नामों से हुई और देखते ही देखते करोड़ों की सरकारी जमीन पर निजी मालिकाना हक जता दिया गया। यहाँ तक कि इस जमीन पर कई मकान भी बन चुके हैं।

एक युवक की सजगता ने खोली पोल

इस बड़े भूमि घोटाले का खुलासा गांव के ही एक युवक अमरेंद्र कुमार ने किया। अमरेंद्र ने खुद अनजाने में इसी जमीन का एक हिस्सा (29 डिसमिल) खरीदा था। जब उन्हें पता चला कि यह जमीन सरकारी है, तो उन्होंने पीछे हटने के बजाय व्यवस्था को सुधारने की ठानी।

उन्होंने लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम (Public Grievance Redressal Act) का सहारा लिया और लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी।

DM का सख्त एक्शन

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी (DM) प्रणव कुमार ने सख्त रुख अपनाया है।

  • BLDR एक्ट के तहत कार्रवाई: DM ने करोड़ों की इस जमीन को वापस सरकारी खाते में लाने के लिए डीसीएलआर (DCLR) पूर्वी को बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम (BLDR Act) के तहत कार्रवाई का आदेश दिया है।
  • रिपोर्ट में खुलासा: अपर समाहर्ता की जांच में पाया गया कि कैडस्ट्रल सर्वे में यह जमीन सरकारी थी, लेकिन रिविजनल सर्वे के बाद भू-माफियाओं और भ्रष्ट कर्मचारियों की मिलीभगत से इसे निजी व्यक्तियों के नाम कर दिया गया।

मुख्य बिंदु:

  • स्थान: मदारीपुर कर्ण, मीनापुर अंचल, मुजफ्फरपुर।
  • कुल जमीन: 21 एकड़।
  • प्रभावित पक्ष: 150 से अधिक अवैध जमाबंदी।
  • कानूनी जरिया: लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत द्वितीय अपील।

निष्कर्ष: यह मामला दर्शाता है कि यदि आम नागरिक जागरूक हो और सूचना के अधिकार या लोक शिकायत जैसे कानूनों का सही इस्तेमाल करे, तो बड़े से बड़े भ्रष्टाचार को उजागर किया जा सकता है। अब देखना यह है कि प्रशासन कितनी जल्दी इस जमीन को वापस सरकारी कब्जे में लेता है और दोषी अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है।

पटना पुलिस का बड़ा एक्शन: पूर्व DGP के दामाद से रंगदारी मांगने वाला कुख्यात मैनेजर राय एनकाउंटर में घायल

पटना: बिहार की राजधानी पटना में बेखौफ अपराधियों के खिलाफ पुलिस ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को पटना के खगौल इलाके में पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ में कुख्यात अपराधी मैनेजर राय गोली लगने से घायल हो गया। मैनेजर राय वही अपराधी है जिसने हाल ही में बिहार के पूर्व डीजीपी (DGP) गुप्तेश्वर पांडेय के दामाद से रंगदारी की मांग की थी।

पटना के खगौल में पुलिस और अपराधी मैनेजर राय के बीच मुठभेड़ का दृश्य - Bhoomi News Live

मुठभेड़ की पूरी जानकारी

यह घटना खगौल थाना क्षेत्र के खगौल लख के पास की है। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि मैनेजर राय किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में इलाके में मौजूद है। जब पुलिस ने उसे घेरने की कोशिश की, तो उसने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोलियां चलाईं।

  • कुल फायरिंग: पुलिस और अपराधी के बीच लगभग 6 राउंड गोलियां चलीं।
  • घायल: पुलिस की एक गोली मैनेजर राय के पैर में लगी, जिससे वह मौके पर ही गिर पड़ा।
  • बरामदगी: पुलिस ने घटनास्थल से एक देसी कट्टा और दो जिंदा कारतूस बरामद किए हैं।

एम्स में कराया गया भर्ती

एनकाउंटर के तुरंत बाद पुलिस ने घायल अपराधी को इलाज के लिए पटना एम्स (AIIMS) में भर्ती कराया है, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है। पुलिस ने अस्पताल के चारों ओर सुरक्षा कड़ी कर दी है।

मैनेजर राय का क्राइम रिकॉर्ड

मैनेजर राय इलाके का जाना-माना कुख्यात अपराधी है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार:

  1. उस पर हत्या, लूट, और रंगदारी के करीब 20 से ज्यादा मामले दर्ज हैं।
  2. वह काफी समय से पुलिस की हिट लिस्ट में था।
  3. पूर्व डीजीपी के दामाद को धमकी देने के बाद से पुलिस उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही थी।

निष्कर्ष:

पटना पुलिस की इस कार्रवाई से अपराधियों में हड़कंप मच गया है। स्थानीय लोगों ने पुलिस के इस त्वरित एक्शन की सराहना की है। पुलिस अब मैनेजर राय के अन्य साथियों और उसके नेटवर्क को खंगालने में जुटी है ताकि गिरोह का पूरी तरह सफाया किया जा सके।

मधुबनी: दोस्तों की जांबाजी! CCTV की मदद से खुद खोज निकाली चोरी हुई बाइक, चोर को पकड़कर किया पुलिस के हवाले

मधुबनी, बिहार: आज के दौर में जहाँ लोग अक्सर सामान चोरी होने के बाद उम्मीद छोड़ देते हैं, वहीं मधुबनी के कुछ युवाओं ने अपनी सूझबूझ और एकता से एक मिसाल पेश की है। 12 दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद, पीड़ित और उसके दोस्तों ने न केवल चोरी हुई बाइक का सुराग लगाया, बल्कि चोर को रंगे हाथों पकड़कर सलाखों के पीछे पहुँचाया।

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क्या है पूरा मामला?

घटना की शुरुआत 17 दिसंबर 2025 को हुई थी। बाबुबरही थाना क्षेत्र के बेरल निवासी पप्पू कुमार सिंह अपने निजी काम से मधुबनी मुख्य डाकघर (Head Post Office) आए थे। उन्होंने अपनी सफेद रंग की अपाचे बाइक (नंबर: BR 32 AF 8473) बैंक के बाहर खड़ी की थी। दोपहर करीब 12:45 बजे जब वे वापस लौटे, तो उनकी बाइक वहां से गायब थी।

CCTV फुटेज बना सबसे बड़ा हथियार

बाइक चोरी होने के बाद पप्पू कुमार सिंह ने तुरंत नगर थाना, मधुबनी में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कांड संख्या 598/25 दर्ज की और एसआई (SI) राजकिशोर राम को जांच सौंपी।

इस बीच, पीड़ित ने हार नहीं मानी और घटनास्थल के आसपास के CCTV फुटेज खंगाले। फुटेज में चोर का चेहरा और चोरी करने का तरीका साफ नजर आ रहा था। पप्पू ने यह फुटेज अपने दोस्तों के साथ साझा की और खुद भी चोर की तलाश में जुट गए।

बीच सड़क पर फिल्मी अंदाज में पकड़ा गया चोर

ठीक 12 दिन बाद, यानी 29 दिसंबर 2025 को पप्पू और उनके करीब 8 दोस्तों की मेहनत रंग लाई। मधुबनी के V-Mart और पोस्ट ऑफिस के बीच उन्होंने उसी युवक को देखा जो CCTV फुटेज में नजर आया था। दोस्तों ने बिना देर किए उसे चारों तरफ से घेर लिया और पकड़ लिया।

घटना की सूचना तुरंत नगर थाना पुलिस को दी गई। थाना प्रभारी मनोज कुमार सिंह की उपस्थिति में चोर को पुलिस के सुपुर्द किया गया।

कड़ी सजा की मांग

पप्पू कुमार सिंह ने पुलिस को एक ताजा आवेदन देकर मांग की है कि पकड़े गए आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए और उनकी बाइक जल्द से जल्द बरामद कराई जाए। इस साहसी कार्य में पप्पू के साथ चंदन कुमार, रंजीत सिंह, राधे कुमार और अन्य दोस्तों ने अहम भूमिका निभाई।

मधुबनी पुलिस की बड़ी कार्रवाई: पीतल के बर्तनों के शौकीन चोर गिरोह का पर्दाफाश, 7 शातिर दबोचे गए; भारी मात्रा में सामान बरामद

मधुबनी: जिले की पुलिस को अपराध नियंत्रण की दिशा में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने अंधराठाढ़ी और बाबूबरही थाना क्षेत्रों में सक्रिय एक शातिर चोर गिरोह (Madhubani thief gang arrested) का भंडाफोड़ करते हुए कुल 7 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह के पास से पुलिस ने न केवल चोरी के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बल्कि भारी मात्रा में पीतल के कीमती बर्तन भी बरामद किए हैं।

गृहभेदन की घटनाओं से दहशत में थे ग्रामीण:

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मधुबनी के झंझारपुर अनुमंडल अंतर्गत अंधराठाढ़ी थाना क्षेत्र में पिछले कुछ महीनों से लगातार चोरी और गृहभेदन (घर में घुसकर चोरी) की घटनाएं हो रही थीं। विशेष रूप से 14 दिसंबर और 17 दिसंबर 2025 को बाबूबरही थाना क्षेत्र के ग्राम-बेला और ग्राम-पिपरा रामपुर टोल में हुई बड़ी चोरियों ने पुलिस की चुनौती बढ़ा दी थी। इन घटनाओं में चोरों ने घर का ताला तोड़कर लाखों के जेवरात और नकदी पर हाथ साफ किया था।

विशेष टीम ने बिछाया जाल, ऐसे हत्थे चढ़े अपराधी:

बढ़ती वारदातों को देखते हुए पुलिस अधीक्षक, मधुबनी के निर्देशानुसार झंझारपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। गुप्त सूचना और तकनीकी अनुसंधान के आधार पर टीम ने अंधराठाढ़ी थाना क्षेत्र के अलग-अलग स्थानों से 7 अभियुक्तों को चोरी के सामान के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान सभी ने स्वीकार किया कि वे एक संगठित गिरोह के रूप में अंधराठाढ़ी और बाबूबरही क्षेत्र में चोरी की घटनाओं को अंजाम देते थे।

बरामद सामान की सूची (मुख्य अंश):

पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर निम्नलिखित सामान बरामद किया है:

  • इलेक्ट्रॉनिक सामान: 1 बैटरी (टेम्पो की), 4 माइक, 1 यूनिट स्पीकर, 3 माइक वायर, 3 बाजा बजाने वाली मशीन और 1 पानी का मोटर।
  • पीतल के बर्तन (करीब 50 पीस): 12 पीतल के लोटा, 10 थाली, 6 कटोरा, 5 तशला, 5 कठौत, 3 गिलास, 3 कराही, 2 करछुल और 2 छोलनी।

गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण:

  1. अनुज कुमार झा (पिता- शैलेंद्र झा, गनौली, अंधराठाढ़ी)
  2. शिवम कुमार (पिता- शुभनारायण मिश्र, नवनगर, बाबूबरही)
  3.  शिवशंकर यादव (पिता- कपिलदेव यादव, बाड़ाघात, खुटौना)
  4.  दिपक साह (पिता- विनोद साह, बाबूबरही)
  5.  मुकेश कुमार (पिता- विनोद साह, बाबूबरही)
  6.  अखलाकुर रहमान (पिता- जियाउर रहमान, अंधरा, अंधराठाढ़ी)
  7.  गोपाल कुमार गोसाई (पिता- स्व० बहादुर गोसाई, बाबूबरही)
पुलिस की आगे की कार्रवाई:

मधुबनी पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्तों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जा रहा है। विशेष टीम अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों और इनके द्वारा बेचे गए अन्य चोरी के सामानों की बरामदगी के लिए पूछताछ कर रही है। पुलिस का दावा है कि इस गिरफ्तारी से क्षेत्र में चोरी की घटनाओं पर लगाम लगेगी

मधुबनी: झंझारपुर के बेहट गांव में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, देसी पिस्टल और कारतूस के साथ आरोपी गिरफ्तार

मधुबनी के झंझारपुर में आर.एस. शिविर थाना पुलिस ने बेहट गांव से सुनील मुखिया को अवैध देसी पिस्टल और जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया। पुलिस की इस कार्रवाई से इलाके में हड़कंप।

मधुबनी (बिहार): जिले की झंझारपुर पुलिस को अपराध नियंत्रण की दिशा में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। मधुबनी पुलिस अधीक्षक के निर्देशानुसार चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत, आर.एस. शिविर थाना की पुलिस टीम ने बेहट गांव में छापेमारी कर एक आरोपी को अवैध हथियार और जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया है।

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिनांक 25 दिसंबर 2025 को कांड संख्या 120/25 के अनुसंधान के दौरान पुलिस टीम बेहट गांव पहुंची थी। वहां एक महिला ने पुलिस को सूचना दी कि सुनील मुखिया नाम के व्यक्ति ने पूर्व में फायरिंग की थी जिसमें वह घायल हो गई थी। महिला ने यह भी बताया कि घर में हुई एक संदिग्ध मौत के बाद से आरोपी और भी हिंसक हो गया है, जिससे ग्रामीणों में डर का माहौल था।

सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सुनील मुखिया के घर पर छापेमारी की। शुरुआत में पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की गई, लेकिन कड़ाई से पूछताछ करने पर आरोपी ने हथियार छिपाने की बात स्वीकार कर ली।

बरामदगी और गिरफ्तारी

पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर घर की तलाशी ली, जहां से निम्नलिखित अवैध सामान बरामद किया गया:

  • देसी पिस्टल: 01
  • जिंदा कारतूस: 02 (मैगजीन के अंदर)

गिरफ्तार आरोपी की पहचान सुनील मुखिया (पिता- रामप्रसाद मुखिया), साकिन- बेहट, थाना- आर.एस. शिविर, जिला- मधुबनी के रूप में हुई है।

कानूनी कार्रवाई

पुलिस ने मौके पर गवाहों की उपस्थिति में हथियार को जब्त कर लिया है। आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट (Arms Act) की सुसंगत धाराओं (25(1-बी)ए/26/35/27) के तहत मामला दर्ज कर उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। थाना प्रभारी ने बताया कि मामले में विधि-सम्मत अग्रिम कार्रवाई की जा रही है।

विशेष रिपोर्ट: खुटौना में PHED और बिजली विभाग की ‘जुगलबंदी’ से सरकार को करोड़ों का चूना..?

टोका फंसाकर चल रहा नल-जल: खुटौना में PHED विभाग की सरेआम डकैती, क्या सो रहा है प्रशासन?

खुटौना, मधुबनी। बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं भ्रष्टाचार और विभागीय सांठगांठ की भेंट कैसे चढ़ती हैं, इसका ज्वलंत उदाहरण मधुबनी जिले के खुटौना प्रखंड में देखने को मिल रहा है। ताज़ा मामला PHED विभाग (झंझारपुर प्रमंडल) द्वारा पंचायतों में नल-जल योजना के संचालन के लिए खुलेआम की जा रही बिजली चोरी का है।

क्या है पूरा मामला?

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सुबोध कुमार के दावों ने विभाग में खलबली मचा दी है। प्रखंड के चतुर्भुज पिपराही गाँव सहित कई पंचायतों में PHED विभाग द्वारा बिना किसी वैध बिजली कनेक्शन के “टोका” फंसाकर मोटरों का संचालन किया जा रहा है।

वीडियो में PHED के कामगारों को यह स्वीकार करते सुना जा सकता है कि वे कनीय अभियंता (JE), PHED खुटौना के निर्देश पर अवैध तरीके से बिजली का उपयोग कर रहे हैं। हैरत की बात यह है कि इसी वीडियो में बिजली विभाग के JE भी PHED के मुंशी को बिजली चोरी की बात कहते सुने जा रहे हैं, लेकिन कोई कानूनी कार्रवाई करने के बजाय मामला आपसी “समझौते” जैसा प्रतीत होता है।

राजस्व क्षति का बड़ा खेल

जानकारों का मानना है कि यह केवल एक प्रखंड का मामला नहीं बल्कि पूरे प्रमंडल में फैला एक बड़ा सिंडिकेट हो सकता है।

  • करोड़ों की चपत: नल-जल योजनाओं के लिए आवंटित बिजली बजट का पैसा आखिर किसकी जेब में जा रहा है?
  • सड़कों की बर्बादी: कामगारों का कहना है कि वे बिजली चोरी के साथ-साथ सड़क तोड़ने का काम भी विभागीय निर्देश पर कर रहे हैं।
  • विभागीय मिलीभगत: बिजली विभाग के अधिकारी चोरी पकड़ने के बावजूद प्राथमिकी (FIR) दर्ज क्यों नहीं कर रहे? क्या यह करोड़ों के राजस्व की बंदरबांट का हिस्सा है?

जनता की गाढ़ी कमाई पर डाका

एक तरफ बिजली विभाग आम जनता पर बकाया होने पर तुरंत कनेक्शन काट देता है और “टोका” फंसाने पर भारी जुर्माना लगाता है। वहीं दूसरी ओर, एक सरकारी विभाग (PHED) द्वारा खुलेआम बिजली चोरी करना सुशासन के दावों पर सवालिया निशान खड़ा करता है।

यह गंभीर जांच का विषय है। अगर सरकारी विभाग ही बिजली चोरी करेंगे, तो आम जनता से ईमानदारी की उम्मीद कैसे की जा सकती है? हम इस मामले को जिलाधिकारी और सतर्कता विभाग तक ले जाएंगे। — सुबोध कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता

निष्कर्ष और मांग: यह मामला जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। क्या जिलाधिकारी मधुबनी और PHED के उच्च अधिकारी इस ‘करोड़ों के खेल‘ पर संज्ञान लेंगे? जनता की मांग है कि:

  • खुटौना की सभी पंचायतों में PHED कनेक्शनों की उच्च स्तरीय जांच हो।
  • दोषी अधिकारियों और बिचौलियों पर अविलंब प्राथमिकी दर्ज की जाए।
  • राजस्व की हुई क्षति का आकलन कर संबंधित अधिकारियों के वेतन से इसकी वसूली हो।