प्रशांत किशोर का बड़ा बयान: सही तरीके से चुनाव लड़ना कठिन, पर बिहार की सूरत बदलने के लिए हम 10 साल संघर्ष को तैयार

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झंझारपुर, 21 फ़रवरी 2026: जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर (PK) अपनी ‘बिहार नवनिर्माण यात्रा’ के क्रम में आज झंझारपुर पहुंचे। यहाँ मीडिया से बात करते हुए उन्होंने संगठन की भविष्य की रणनीति और हालिया चुनावी अनुभवों पर बेबाकी से अपनी राय रखी।

संगठन का पुनर्गठन: पंचायत स्तर तक पहुँचेगी जन सुराज

प्रशांत किशोर ने बताया कि जन सुराज इस समय अपने संगठन को पुनर्गठित करने के मिशन पर है। यह केवल ऊपरी ढांचे में बदलाव नहीं है, बल्कि उन पुराने साथियों को फिर से एकजुट करने की मुहिम है जो विचारधारा की नींव से जुड़े रहे हैं।

  • उद्देश्य: प्रत्येक प्रखंड और पंचायत स्तर तक पार्टी के सिद्धांतों को पहुँचाना।
  • रणनीति: पदाधिकारियों के चयन के साथ-साथ जमीनी कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाना।

चुनाव परिणामों पर PK की खरी-खरी

हालिया चुनाव परिणामों के सवाल पर प्रशांत किशोर ने एक गंभीर और ईमानदार विश्लेषण पेश किया। उन्होंने स्वीकार किया कि बिहार में बिना जाति, धर्म या गठबंधन के सहारे चुनाव लड़ना एक चुनौतीपूर्ण मार्ग है।

सही तरीके से चुनाव लड़कर जीत हासिल करना हमेशा से कठिन रहा है। हमने न तो किसी से गठबंधन किया और न ही जाति-धर्म के समीकरण साधे। यह एक लंबी लड़ाई है, और हम इसके लिए 5 से 10 साल तक संघर्ष करने को तैयार हैं।- प्रशांत किशोर

केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, व्यवस्था परिवर्तन लक्ष्य

PK ने झंझारपुर की जनता और कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि जन सुराज का लक्ष्य केवल चुनाव जीतना या हारना नहीं है। उनकी लड़ाई बिहार के हर जिले में:

  • रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए है।
  • ​राज्य में उद्योगों की स्थापना सुनिश्चित करने के लिए है।
  • ​बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जन सुराज केवल उन लोगों का समूह नहीं है जो वर्तमान सरकार से असंतुष्ट हैं, बल्कि यह उन लोगों का मंच है जो बिहार में वास्तविक बदलाव देखना चाहते हैं।

स्थानीय कार्यकर्ताओं में उत्साह

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्थानीय पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं की भारी मौजूदगी रही। सभी ने संगठन की आगामी कार्ययोजना पर चर्चा की और संकल्प लिया कि वे गाँव-गाँव जाकर ‘जन सुराज’ की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाएंगे।

प्रशांत किशोर के इस दौरे ने साफ कर दिया है कि चुनावी हार-जीत से बेफिक्र होकर वे एक लंबी पारी की तैयारी कर रहे हैं। बिहार की राजनीति में यह ‘शुद्धतावादी’ प्रयोग कितना सफल होगा, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन उनके इरादे स्पष्ट हैं।

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