पटना: बापू सभागार में तेजस्वी यादव ने भरा हुंकार, कहा- पान समाज के हक और अधिकार के लिए लड़ते रहेंगे

तेजस्वी यादव पटना के बापू सभागार में पान सम्मान सह IIP स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान मंच से जनता को संबोधित करते हुए।

पटना। बिहार की राजधानी पटना के बापू सभागार में आज पान सम्मान सह IIP स्थापना दिवस कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव शामिल हुए। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए आयोजक आईपी गुप्ता को बधाई और शुभकामनाएँ दीं।

डबल इंजन सरकार पर बोला हमला

​कार्यक्रम को संबोधित करते हुए तेजस्वी यादव ने सत्ताधारी बीजेपी-जेडीयू सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि “बिहार की डबल इंजन सरकार अपने अहंकार में डूबी हुई है और पान समाज के संवैधानिक अधिकारों का हनन कर रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार वंचितों की आवाज़ दबाने का काम कर रही है।

लालू प्रसाद यादव के संघर्षों को किया याद

​तेजस्वी यादव ने राष्ट्रीय जनता दल की विचारधारा को रेखांकित करते हुए कहा कि आदरणीय लालू प्रसाद यादव जी ने हमेशा से वंचित, उपेक्षित, गरीब और उत्पीड़ित समुदायों के लिए न्याय, समता और उत्थान की लड़ाई लड़ी है। आरजेडी हमेशा से पिछड़ों और दलितों की ढाल रही है।

तांती-ततवा और पान समाज की एकजुटता पर जोर

​कार्यक्रम के दौरान तेजस्वी यादव ने पान समाज के सर्वांगीण विकास का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा:

​”हम सभी एकजुट होकर तांती-ततवा और पान समाज की उन्नति, समृद्धि और हक की लड़ाई लड़ते रहेंगे। जब तक इस समाज को उनका पूरा अधिकार नहीं मिल जाता, हमारा संघर्ष जारी रहेगा।”

प्रमुख बिंदु:

  • आयोजन: पान सम्मान सह IIP स्थापना दिवस।
  • स्थान: बापू सभागार, पटना।
  • मुख्य संदेश: पान समाज की एकजुटता और अधिकारों की रक्षा।
  • राजनीतिक संदेश: वंचितों के विकास के लिए आरजेडी प्रतिबद्ध।

​बापू सभागार में मौजूद हजारों की भीड़ ने तेजस्वी यादव के संबोधन का तालियों के साथ स्वागत किया, जो पान समाज के बीच आरजेडी की बढ़ती पैठ को दर्शाता है।

तेजप्रताप यादव का दिखा अलग अंदाज: यादव जी के माल गाने पर भड़के, मंच से ही लगवाई क्लास

पटना: मकर संक्रांति के अवसर पर पटना में सियासी गलियारों में दही-चूड़ा भोज की धूम रही। लेकिन, जजद नेता और लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव के आवास पर आयोजित भोज चर्चा का विषय बन गया है। चर्चा का कारण राजनीति नहीं, बल्कि तेजप्रताप यादव द्वारा दिखाई गई ‘सांस्कृतिक मर्यादा’ है।

दरअसल, कार्यक्रम के दौरान एक लोक गायिका ने जजद समर्थकों के बीच लोकप्रिय गाना “हम त यादव जी के माल हईं रे…” गाना शुरू कर दिया। जैसे ही यह गाना तेजप्रताप के कानों तक पहुंचा, वह तुरंत अपनी कुर्सी से उठे और मंच पर जाकर गाना रुकवा दिया।

क्या है पूरा मामला?

तेजप्रताप यादव ने अपने आवास पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया था, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और लोग पहुंचे थे। मनोरंजन के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम भी चल रहा था। इसी बीच, गायिका ने भोजपुरी का एक चर्चित गाना गाना शुरू किया, जिसके बोल थे:

“ना ही गोले वाला दाल हईं रे… हम त यादव जी के माल हईं रे…”

यह सुनते ही तेजप्रताप यादव असहज हो गए। वह भीड़ के बीच से निकलते हुए सीधे मंच के पास पहुंचे और माइक लेकर गायिका को बीच में ही रोक दिया।

तेजप्रताप की दो टूक: ‘यह सब यहां नहीं चलेगा’

तेजप्रताप यादव ने न केवल गाना बंद करवाया, बल्कि नसीहत भी दी। उन्होंने सख्त लहजे में कहा:

“ए रुकिए… ये सब वल्गर (अश्लील) गाना मत गाइए यहां। यह एक कार्यक्रम है। यहां भगवान का भजन गाइए, कृष्ण भगवान का भजन सुनाइए। यह सब गाना यहां नहीं चलेगा।”

तेजप्रताप के इस कदम के बाद वहां मौजूद माहौल पूरी तरह बदल गया और कार्यक्रम में भक्ति गीत गाए जाने लगे।

मर्यादा और संस्कार की हो रही तारीफ

अक्सर अपने बयानों और अलग अंदाज के लिए सुर्खियों में रहने वाले तेजप्रताप यादव का यह रूप लोगों को खूब भा रहा है। सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इसे तेजप्रताप के संस्कार और सांस्कृतिक सोच से जोड़कर देख रहे हैं।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि राजद (RJD) के कार्यक्रमों में अक्सर ऐसे गानों का चलन रहा है, जिन्हें लेकर विपक्ष भी निशाना साधता रहा है। ऐसे में तेजप्रताप यादव का यह कदम एक नई लकीर खींचने जैसा है। उन्होंने साफ संदेश दिया है कि सार्वजनिक मंचों पर फूहड़ता की जगह नहीं होनी चाहिए, भले ही वह उनकी पार्टी के समर्थकों को पसंद आने वाला गाना ही क्यों न हो।

तेजप्रताप यादव खुद को कृष्ण भक्त बताते हैं और अक्सर धार्मिक यात्राओं पर रहते हैं। दही-चूड़ा भोज में अश्लील गाने पर रोक लगाकर उन्होंने साबित कर दिया है कि वे अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक छवि को लेकर कितने गंभीर हैं। उनके इस फैसले ने न केवल वहां मौजूद लोगों का दिल जीता, बल्कि यह भी संदेश दिया कि मनोरंजन के नाम पर मर्यादा नहीं लांघी जानी चाहिए।