झंझारपुर पुलिस का बड़ा खुलासा: ऑनर किलिंग निकला ओम प्रकाश हत्याकांड, चाची से अवैध संबंध और प्रेम प्रसंग बनी मौत की वजह

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झंझारपुर (मधुबनी): झंझारपुर थाना क्षेत्र के चर्चित चनौरा गोठ निवासी ओम प्रकाश ठाकुर हत्याकांड की गुत्थी को पुलिस ने महज एक सप्ताह के भीतर सुलझा लिया है। यह मामला न केवल सनसनीखेज निकला, बल्कि रिश्तों को शर्मसार करने वाली कहानी भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, यह पूरी वारदात अवैध संबंध और प्रेम प्रसंग के कारण अंजाम दी गई, जिसे ‘ऑनर किलिंग‘ का रूप दिया गया।

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सड़क दुर्घटना दिखाने की थी साजिश

बीते दिनों चनौरागंज फुट ओवर ब्रिज के पास एनएच 27 के किनारे से 20 वर्षीय ओम प्रकाश ठाकुर (पिता- शंकर ठाकुर) का शव बरामद हुआ था। हत्यारों ने युवक की गला रेतकर हत्या करने के बाद शव को घटनास्थल से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर फेंक दिया था। उनकी योजना शव को किसी भारी वाहन से कुचलवाने की थी ताकि इसे एक साधारण सड़क दुर्घटना का रूप दिया जा सके। लेकिन रात 11 बजे ही पुलिस द्वारा शव बरामद कर लिए जाने के कारण उनकी यह साजिश नाकाम रही।

​कैसे खुला राज? (जांच के अहम पड़ाव)

झंझारपुर एसडीपीओ सुबोध कुमार सिन्हा ने बताया कि शुरुआत में अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था, लेकिन पुलिस की वैज्ञानिक जांच ने केस का रुख मोड़ दिया:

  • बगीचे में खून के धब्बे: डॉग स्क्वाड और एफएसएल (FSL) की टीम को जांच के दौरान मृतक के घर के पास एक बगीचे में खून के धब्बे मिले। इससे स्पष्ट हो गया कि हत्या घर के पास ही हुई थी।
  • तकनीकी टीम की मदद: वैज्ञानिक प्रयोगशाला, डॉग स्क्वाड और तकनीकी शाखा की रिपोर्ट के आधार पर संदिग्धों को घेरा गया।
  • मानवीय साक्ष्य: स्थानीय लोगों और परिजनों के बयानों में आए विरोधाभास ने पुलिस को हत्यारों तक पहुँचाया।

​सगे संबंधी ही निकले कातिल: 4 गिरफ्तार

पुलिस ने इस हत्याकांड में शामिल पांच आरोपियों में से चार को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपी मृतक के करीबी रिश्तेदार और पड़ोसी ही हैं:

आरोपी का नाममृतक से सम्बन्ध
कैलाश ठाकुरसगा चाचा
जयशंकर ठाकुरचचेरा
अनमोल ठाकुरदूर का रिश्तेदार
मुरारी ठाकुरपड़ोसी (वार्ड सदस्य)

नोट: एक अन्य आरोपी राजा ठाकुर फिलहाल फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।

हत्या की वजह: अवैध संबंध और ऑनर किलिंग

अनुसंधान में यह बात सामने आई है कि मृतक ओम प्रकाश का अपनी ही सगी चाची के साथ अवैध संबंध था, जिसे लेकर कुछ समय पहले मोहल्ले में विवाद भी हुआ था। इसके अलावा, चचेरे चाचा जयशंकर ठाकुर के परिवार की एक लड़की के साथ भी उसका प्रेम प्रसंग चल रहा था।

परिवार की बदनामी और आपसी रंजिश के कारण इन रिश्तेदारों ने मिलकर हत्या की साजिश रची। पहले उसे बगीचे में ले जाकर धारदार चाकू से गला रेता गया और फिर साक्ष्य छुपाने के लिए शव को हाईवे किनारे फेंक दिया गया।

पुलिस की बरामदगी

डीएसपी सुबोध कुमार सिन्हा ने पुष्टि की है कि गिरफ्तार आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। पुलिस ने घटनास्थल और आरोपियों के पास से निम्नलिखित चीजें बरामद की हैं:

  • घटना में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल
  • 4 मोबाइल फोन
  • ​अपराधी का खून लगा हुआ जूता

अपील: इस घटना ने एक बार फिर सामाजिक रिश्तों और अपराध के बढ़ते ग्राफ पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस प्रशासन फरार अपराधी की तलाश में मुस्तैद है।

झंझारपुर: एसडीपीओ सुबोध कुमार सिंह ने की मासिक अपराध समीक्षा बैठक, अपराधियों पर नकेल कसने के सख्त निर्देश

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झंझारपुर। स्थानीय अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) कार्यालय में शुक्रवार को मासिक अपराध समीक्षा बैठक आयोजित की गई। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सुबोध कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में क्षेत्र की कानून व्यवस्था, लंबित कांडों के निष्पादन और आगामी सुरक्षा चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में अनुमंडल के सभी थाना प्रभारी और अंचल निरीक्षक मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

बैठक के मुख्य बिंदु:

एसडीपीओ सुबोध कुमार सिंह ने अपराध नियंत्रण को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए कई कड़े दिशा-निर्देश जारी किए:

  • अपराध नियंत्रण और गश्ती: क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए रात्रि गश्ती को और अधिक प्रभावी बनाने का निर्देश दिया गया। उन्होंने कहा कि पुलिस की उपस्थिति सड़कों पर दिखनी चाहिए ताकि आमजन सुरक्षित महसूस करें।
  • एंटी क्राइम व्हीकल चेकिंग: संदिग्ध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए सभी थाना क्षेत्रों में सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाने का निर्देश दिया गया। विशेष रूप से बिना नंबर प्लेट और तेज रफ्तार बाइक चलाने वालों पर कड़ी नजर रखने को कहा गया है।
  • केस डिस्पोजल (कांडों का निष्पादन): थानों में लंबित पड़े पुराने मामलों को जल्द से जल्द निपटाने और चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया में तेजी लाने का आदेश दिया गया।
  • सक्रिय अपराधियों पर निगरानी: जेल से छूटे और क्षेत्र के सक्रिय अपराधियों की गतिविधियों की नियमित मॉनिटरिंग करने का निर्देश दिया गया। अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए खुफिया तंत्र को मजबूत करने पर बल दिया गया।
  • त्वरित गिरफ्तारी: वारंटी और फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया गया, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आ सके।

​”जनता की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। अपराध पर नियंत्रण के लिए पुलिस मुस्तैदी से काम कर रही है। लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर जवाबदेही तय की जाएगी।”— सुबोध कुमार सिंह, एसडीपीओ, झंझारपुर

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस अलर्ट

बैठक के समापन पर एसडीपीओ ने सभी थाना प्रभारियों को जनता के साथ बेहतर समन्वय बनाने और सामुदायिक पुलिसिंग को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराध पर लगाम लगाने के लिए पुलिस तकनीकी और मानवीय दोनों स्तरों पर काम कर रही है।

नरहिया गोलीबारी कांड: मुख्य आरोपी अंशु राय गिरफ्तार, पुलिस ने देशी पिस्टल भी की बरामद

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फुलपरास (मधुबनी): अनुमंडल अंतर्गत नरहिया थाना क्षेत्र में सरस्वती पूजा विसर्जन के दौरान हुई सनसनीखेज गोलीबारी मामले में पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी अंशु राय को गिरफ्तार कर लिया है।

गुप्त सूचना पर हुई कार्रवाई

अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) अमित कुमार ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि पुलिस को आरोपी के ठिकाने के बारे में गुप्त सूचना मिली थी। इसी आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए भपटियाहीं गांव में छापेमारी की गई, जहाँ से अंशु राय को दबोच लिया गया।

अवैध हथियार बरामद

गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की, तो आरोपी की निशानदेही पर उसके घर के पीछे छिपाकर रखी गई एक अवैध देशी पिस्टल बरामद की गई। पुलिस इस हथियार की जांच कर रही है कि क्या इसी से विसर्जन के दौरान फायरिंग की गई थी।

​क्या था पूरा मामला?

​​बीती 24 जनवरी को सरस्वती पूजा प्रतिमा विसर्जन के लिए जुलूस निकाला गया था। आरोप है कि जुलूस के दौरान नशे में धुत एक युवक ने अचानक फायरिंग कर दी। इस गोलीबारी में प्रहलाद कुमार नामक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था।

घटना के बाद से ही क्षेत्र में तनाव का माहौल था और पुलिस लगातार आरोपियों की धरपकड़ के लिए छापेमारी कर रही थी।

पुलिस अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। गिरफ्तार अभियुक्त से पूछताछ की जा रही है ताकि गिरोह के अन्य संपर्कों का पता लगाया जा सके। आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।- SDPO, फूलपरास

इस गिरफ्तारी से स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। पुलिस अब इस मामले में अन्य शामिल तत्वों और अवैध शराब व हथियार के नेटवर्क को खंगालने में जुटी है।

दरभंगा में भूचाल: 70 ब्राह्मणों पर लगा ‘हरिजन एक्ट’! मजदूरी मांगने पर दलित परिवार के साथ जो हुआ, कांप जाएगी रूह!

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दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र के हरिनगर गांव में एक बड़ी घटना सामने आई है। मजदूरी का बकाया पैसा मांगने को लेकर हुए विवाद ने जातीय हिंसा का रूप ले लिया। पीड़ित दलित परिवार का आरोप है कि गांव के 70 नामजद ब्राह्मणों और सैकड़ों अज्ञात लोगों ने उनके घर पर धावा बोल दिया। भीड़ पर घर की महिलाओं के साथ बदसलूकी, मारपीट और लाखों की संपत्ति लूटने का आरोप लगाया गया है।

इस मामले में पीड़ित असर्फी पासवान (पिता स्व. सरयुग पासवान) के बयान पर कुशेश्वरस्थान थाने में 70 नामजद (ज्यादातर झा और मिश्र उपनाम वाले) और 100-150 अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और SC/ST एक्ट की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

क्या है पूरा मामला?

पीड़ित असर्फी पासवान द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार, विवाद की जड़ 5 साल पुरानी मजदूरी का बकाया है। पीड़ित के बेटे ने आरोपी हेमकांत झा के यहां मजदूरी की थी, जिसका भुगतान नहीं किया गया था।

  • 30/01/2026: इसी बकाये को लेकर गांव में पंचायत बुलाई गई थी, जिसमें दोनों पक्षों के बीच कहा-सुनी हुई।
  • 31/01/2026 (घटना का दिन): अगली सुबह करीब 7:00 बजे, जब पीड़ित का लड़का विक्रम पासवान सब्जी खरीदकर घर लौट रहा था, तभी आरोपियों ने उसे घेर लिया।

लाठी-डंडे और लोहे की रॉड से हमला

आवेदन में कहा गया है कि हेमकांत झा, शिवजी झा, श्रीनाथ झा, फुलकांत झा, मनोज मिश्र समेत करीब 70 नामजद लोग लाठी, डंडा, लोहे की रॉड, खंती, फरसा और ईंट-पत्थर से लैस होकर आए। आरोप है कि जाति सूचक गालियां देते हुए उन्होंने विक्रम पासवान को दौड़ाया और घर में घुसकर उसे खींच लिया। भीड़ ने विक्रम को अधमरा कर दिया। जब उसके भाई राजगीर पासवान, अविनाश पासवान और अन्य बचाने आए, तो उन्हें भी पत्थरों और रॉड से मारकर घायल कर दिया गया।

महिलाओं से अभद्रता और लूटपाट का आरोप

  • महिलाओं पर हमला: जब घर की महिलाएं (रामतारा देवी और पोती कोमल कुमारी) बीच-बचाव करने आईं, तो उनके साथ मारपीट की गई और कपड़े फाड़ दिए गए। आरोप है कि कोमल कुमारी की कमर पर लाठी मारकर हड्डी तोड़ दी गई।
  • लूटपाट: भीड़ ने घर में रखा 2 लाख रुपये नकद (जो पोती की शादी के लिए रखे थे), सोने-चांदी के जेवर, एलसीडी, फ्रिज और मोबाइल लूट लिए।
  • तोड़फोड़: घर के बाहर खड़ी 4 मोटरसाइकिलों को चकनाचूर कर दिया गया और पीड़ित के “मिथिलांचल ढाबा” (होटल) में भी तोड़फोड़ और लूटपाट की गई।

जाते वक्त आरोपियों ने धमकी दी कि अगर वे गांव में रहे, तो पूरे परिवार को जान से मार दिया जाएगा।

पुलिस कार्रवाई

कुशेश्वरस्थान पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की है। थाना अध्यक्ष को दिए गए आवेदन पर SI अंकित चौधरी ने मामला दर्ज कर लिया है और वे स्वयं इसकी जांच कर रहे हैं।

दर्ज किए गए केस का विवरण:

  • केस नंबर: Kusheshwarsthan PS Case No. 22/26
  • दिनांक: 31/01/2026
  • धाराएं (BNS): 126(2), 115(2), 109(1), 118(2), 117(2), 74, 303(2), 324(5), 329(4), 191(1)(3), 190, 61(2)
  • SC/ST (POA) Act: 3(1)(r), 3(1)(s), 3(2)

पुलिस ने घायलों को इलाज के लिए भेज दिया है और मामले की छानबीन शुरू कर दी है।

क्राइम अपडेट: ओझौल में हुई लूट का खुलासा, पुलिस ने लूटी गई बाइक और मोबाइल के साथ 3 को दबोचा

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मधुबनी (भैरवस्थान): जिले की भैरवस्थान थाना पुलिस ने 19 जनवरी को HDFC बैंक के सेल्स ऑफिसर के साथ हुई लूट की घटना का सफल उद्भेदन कर लिया है। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और गुप्त सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए घटना में शामिल तीन अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से लूटी गई मोटरसाइकिल, मोबाइल और घटना में प्रयुक्त बाइक भी बरामद कर ली गई है।

क्या थी पूरी घटना?

​घटना 19 जनवरी 2026 की है। वादी ब्रजेश कुमार (25 वर्ष), जो HDFC बैंक झंझारपुर में सेल्स ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं, अपनी पल्सर 220cc बाइक (MP04AM-8214) से क्षेत्र भ्रमण पर थे। दोपहर करीब 1:00 बजे जब वे रामखेतारी गांव से ग्राहक से मिलकर कमला तटबंध होते हुए झंझारपुर लौट रहे थे, तभी ओझौल के पीछे पानी टंकी के पास एक बाइक पर सवार तीन अपराधियों ने उन्हें ओवरटेक किया।

​अपराधियों ने हथियार का भय दिखाकर ब्रजेश कुमार को रोका और उनकी बाइक सहित मोबाइल (जिसमें दो सिम कार्ड लगे थे) छीनकर फरार हो गए। इस संबंध में भैरवस्थान थाना में काण्ड संख्या- 13/26 दर्ज किया गया था।

​पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी

​घटना के बाद पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और मुखबिरों के नेटवर्क को सक्रिय किया। 31 जनवरी 2026 को पुलिस को सूचना मिली कि अपराधी पश्चिमी कमला तटबंध पर ग्राम गढ़िया के पास मौजूद हैं। पुलिस टीम ने घेराबंदी कर तीनों अपराधियों को धर दबोचा।

​पूछताछ के दौरान गिरफ्तार अभियुक्तों ने घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है। पुलिस ने उनकी निशानदेही पर लूटी गई बाइक और मोबाइल बरामद कर लिया है।

गिरफ्तार अपराधियों का विवरण

​गिरफ्तार किए गए अपराधियों की पहचान निम्नलिखित रूप में हुई है:

  • ​विक्रम कुमार (19 वर्ष): पिता- गौरी चौधरी, सा०- झंझारपुर, वार्ड नं०- [वार्ड नंबर], थाना- झंझारपुर।
  • ​धीरज कुमार पाठक उर्फ नटवर (21 वर्ष): पिता- दयानंद पाठक, सा०- जलसैन, थाना- रूद्रपुर।
  • ​राकेश कुमार (19 वर्ष): पिता- शिवनाथ राय, सा०- झंझारपुर (राय जी टोला), वार्ड नं० 04।

​आपराधिक इतिहास:

गिरफ्तार अभियुक्त राकेश कुमार का पूर्व में भी आपराधिक इतिहास रहा है। वह झंझारपुर थाना काण्ड संख्या- 55/25 (धारा- 126(2)/115(2)/109/351(2)/352 BNS 2023) में भी आरोपी रहा है। पुलिस अन्य अभियुक्तों के आपराधिक इतिहास को खंगाल रही है।

​बरामद सामान की सूची

​पुलिस ने अपराधियों के पास से निम्नलिखित सामान जब्त किया है:

  • ​लूटी गई मोटरसाइकिल (Pulsar 220 cc) – 01
  • ​घटना को अंजाम देने में प्रयुक्त मोटरसाइकिल – 01
  • ​मोबाइल फोन – 03

आगे की कार्रवाई

​पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों और संपर्कों का पता लगाने में जुटी है। सभी गिरफ्तार अभियुक्तों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जा रहा है।

बाघा कुसमार में अपराधियों का तांडव, मास्टर इसराफिल के पुत्र मो० मन्नान की गोली मारकर हत्या; इलाके में तनाव

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मधुबनी: जिले में अपराधियों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ताजा मामला बाघा कुसमार (Bagha Kusmar) इलाके का है, जहाँ बेखौफ अपराधियों ने एक दिल दहला देने वाली घटना को अंजाम दिया है। अपराधियों ने एक युवक को पेट में दो गोलियां मारकर मौत की नींद सुला दिया।

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​इस नृशंस हत्या के बाद से पूरे इलाके में मातम और डर का माहौल है, वहीं स्थानीय लोगों में पुलिस-प्रशासन की सुस्त रवैये को लेकर भारी गुस्सा देखा जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना बाघा कुसमार की है। यहाँ के प्रतिष्ठित मास्टर इसराफिल जी (Master Israfil Ji) के पुत्र मो० मन्नान (Md. Mannan) को अपराधियों ने अपना निशाना बनाया। सूत्रों के मुताबिक, हमलावरों ने मन्नान के पेट में दो गोलियां (Two bullets in the stomach) दाग दीं।

गोली लगते ही मन्नान लहूलुहान होकर गिर पड़े। परिजनों और स्थानीय लोगों ने आनन-फानन में उन्हें उठाया और बेहतर इलाज के लिए दरभंगा (Darbhanga) की ओर दौड़े। लेकिन जख्म इतने गहरे थे कि जिंदगी ने साथ छोड़ दिया और दरभंगा ले जाने के क्रम में रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

“बेलगाम अपराधियों का तांडव” – सोशल मीडिया पर गुस्सा

​घटना की खबर फैलते ही सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। लोग इसे जघन्य अपराध बताते हुए इंसाफ की मांग कर रहे हैं।

स्थानीय नागरिक विमल प्रकाश ने सोशल मीडिया पर लिखा:

मन विचलित और व्यथित है… मो० मन्नान को अपराधियों ने गोली मार दिया है। यह बहुत ही जघन्य अपराध है। ये बेलगाम अपराधियों का तांडव है, प्रशासन को कड़ी कार्रवाई करनी होगी।

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वहीं, मो० इजहार ने भी घटना पर दुख जताते हुए पुष्टि की है कि गोली लगने के बाद दरभंगा में मौत हुई है।

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जांच में जुटी पुलिस

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मामले की छानबीन में जुट गई है। हालांकि, अपराधियों ने इस घटना को क्यों अंजाम दिया और इसमें कौन लोग शामिल हैं, इसका खुलासा अभी नहीं हो पाया है। स्थानीय लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि हत्यारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।

अब्दुल अली, एक-एक करके करो, नहीं तो मेरी बेटी मर जाएगी– बांग्लादेश की वो काली रात जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया

Purnima Rani Shil Case 2001 Bangladesh Violence against Hindus

इतिहास में कुछ तारीखें ऐसी होती हैं जो कैलेंडर के पन्नों पर नहीं, बल्कि पीड़ितों की रूह पर लिखी जाती हैं। 8 अक्टूबर 2001 की रात बांग्लादेश के सिराजगंज में जो हुआ, वह केवल एक परिवार के साथ हुआ अपराध नहीं था, बल्कि पूरी मानवता के माथे पर लगा एक कलंक था। यह कहानी है उस माँ की बेबसी की, जिसने अपनी 14 साल की बेटी की जान बचाने के लिए बलात्कारियों से ऐसी भीख मांगी, जिसे सुनकर पत्थर भी पिघल जाए।

वो काली रात: 8 अक्टूबर 2001 बांग्लादेश में चुनाव परिणाम आने के बाद अल्पसंख्यकों (विशेषकर हिंदुओं) पर अत्याचारों का दौर शुरू हो चुका था। सिराजगंज के उल्लापाड़ा में अनिल चंद्र शील अपने परिवार, पत्नी और दो बेटियों (पूर्णिमा और 6 वर्षीय छोटी बेटी) के साथ रहते थे। उनका एकमात्र “गुनाह” यह था कि वे एक हिंदू परिवार थे और अपनी पुश्तैनी जमीन पर रह रहे थे।

उस रात, अब्दुल अली, अल्ताफ हुसैन, हुसैन अली और उनके साथियों सहित लगभग 10-12 उन्मादी भीड़ ने अनिल चंद्र के घर पर धावा बोल दिया। यह भीड़ राजनीतिक संरक्षण में थी और उनका मकसद सिर्फ जमीन हड़पना नहीं, बल्कि “काफिरों” को सबक सिखाना था।

माँ की वो चीख: “एक-एक करके करो…” दरिंदों ने घर में घुसते ही अनिल चंद्र को बुरी तरह पीटा और रस्सियों से बांध दिया। इसके बाद उनकी नज़र 14 साल की मासूम पूर्णिमा पर पड़ी। जब इन वहशी भेड़ियों ने बच्ची को नोचना शुरू किया, तो सामने खड़ी बेबस माँ की ममता तड़प उठी।

उसे एहसास हो गया था कि इन राक्षसों को रोका नहीं जा सकता। अपनी बेटी को मौत से बचाने के लिए, उस माँ ने अपनी आत्मा को मारते हुए वो शब्द कहे जो आज भी दुनिया को झकझोर देते हैं:

“अब्दुल अली, मेरी बच्ची छोटी है… एक-एक करके करो, वरना वो मर जाएगी।”

यह वाक्य किसी भी सभ्य समाज के मुंह पर एक तमाचा है। लेकिन हवस में अंधे उन दरिंदों पर इसका कोई असर नहीं हुआ। उन्होंने माँ-बाप के सामने ही बच्चियों की अस्मत को तार-तार कर दिया।

नफरत की राजनीति और न्याय की लड़ाई इस घटना के पीछे की मानसिकता केवल व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं थी, बल्कि सांप्रदायिक नफरत थी। हमलावरों ने जाते समय धमकी दी कि कोई उनकी मदद नहीं करेगा। यह घटना 2001 के बांग्लादेशी चुनावों के बाद हिंदुओं पर हुए सुनियोजित हमलों का सबसे भयानक चेहरा बन गई।

फैसला और हकीकत इस अमानवीय कृत्य के बाद पूर्णिमा और उनका परिवार टूटा नहीं, बल्कि न्याय के लिए लड़ा। हालांकि न्याय मिलने में एक दशक लग गया, लेकिन 4 मई 2011 को बांग्लादेश के एक ट्रिब्यूनल ने इस मामले में 11 आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

अनिल चंद्र के परिवार के साथ जो हुआ, वह हमें याद दिलाता है कि जब राजनीति और धर्म का गलत इस्तेमाल होता है, तो इंसान जानवर बन जाता है। पूर्णिमा रानी शील का मामला आज भी एक दस्तावेज है—अत्याचार का, लेकिन साथ ही साथ उस साहस का भी, जिसने अन्याय के खिलाफ हार नहीं मानी।

L.N.J. कॉलेज झंझारपुर: खेल सामग्री आवंटन में भेदभाव का आरोप, MSU छात्र नेताओं के साथ धक्का-मुक्की, 13 से भूख हड़ताल की चेतावनी

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झंझारपुर: स्थानीय ललित नारायण जनता (L.N.J.) महाविद्यालय में 8 जनवरी को खेल सामग्री के वितरण को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। महाविद्यालय प्रशासन और खेल विभाग के कर्मचारियों पर छात्रों के साथ भेदभाव और अभद्रता करने का गंभीर आरोप लगा है। इस घटना के बाद कैंपस का माहौल तनावपूर्ण हो गया है।

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना उस वक्त हुई जब महाविद्यालय के कुछ छात्र खेलने के लिए खेल विभाग में सामग्री (Sports Kit) लेने पहुंचे। छात्रों का आरोप है कि खेल विभाग के कर्मचारियों ने नियम का हवाला देते हुए उनसे सामग्री के बदले 10 छात्रों का आईडेंटिटी कार्ड (ID Card) जमा करने की मांग की।

विवाद तब गहरा गया जब छात्रों ने देखा कि उसी समय महाविद्यालय के कुछ प्रोफेसरों के निजी बच्चों को बिना किसी कड़े नियम के खेल सामग्री दे दी गई और वे उसे लेकर घर जा रहे थे।

स्टाफ पर अभद्रता और धमकी देने का आरोप

जब छात्रों ने इस दोहरे रवैये पर सवाल उठाया, तो आरोप है कि खेल विभाग के स्टाफ ने जवाब देने के बजाय छात्र नेताओं के साथ बदसलूकी शुरू कर दी। मिथिला स्टूडेंट यूनियन (MSU) का कहना है कि स्टाफ ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया और कहा, “जहाँ जाना है जाओ, गला पकड़ के बाहर फेंक देंगे।”

वायरल हो रहे वीडियो में भी तीखी नोकझोंक देखी जा सकती है। आरोप है कि इस दौरान महाविद्यालय प्रभारी कुंदन भारती के साथ भी धक्का-मुक्की की गई। MSU ने इसे शिक्षक मर्यादा और शैक्षणिक वातावरण पर गहरा आघात बताया है।

MSU ने दिया 3 दिन का अल्टीमेटम

इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए मिथिला स्टूडेंट यूनियन ने कॉलेज प्रशासन को चेतावनी दी है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि छात्रों के साथ भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

यूनियन ने मांग की है कि:

  • ​पूरे मामले की 3 दिनों के भीतर निष्पक्ष जाँच हो।
  • ​दोषी प्रोफेसर और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की चेतावनी

MSU ने ऐलान किया है कि यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो वे 13 जनवरी से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने के लिए बाध्य होंगे। संगठन ने कहा है कि इसकी पूरी जिम्मेदारी महाविद्यालय प्रशासन की होगी और छात्रों के सम्मान की लड़ाई आखिरी दम तक लड़ी जाएगी।

गर्भवती करो और 13 लाख ले जाओ- बिहार में ऑल इंडिया प्रेग्नेंट जॉब के नाम पर चल रहे गंदे खेल का भंडाफोड़

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नवादा: बिहार के नवादा जिले में पुलिस ने साइबर ठगी के एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसका तरीका सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे। ‘ऑल इंडिया प्रेग्नेंट जॉब सर्विस’ (All India Pregnant Job Service) के नाम पर यह गिरोह बेरोजगार युवाओं को अमीर महिलाओं को गर्भवती करने का ऑफर देता था और बदले में लाखों रुपये का लालच देकर ठगी करता था। पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर दो लोगों को गिरफ्तार किया है।

क्या है पूरा मामला?

साइबर अपराधी अब ठगी के लिए शर्मनाक तरीके अपना रहे हैं। सोशल मीडिया पर एक विज्ञापन तेजी से वायरल हो रहा था, जिसमें दावा किया गया था कि “अगर आप निःसंतान महिलाओं को गर्भवती करते हैं, तो आपको 10 लाख से 13 लाख रुपये तक मिलेंगे।”

इस विज्ञापन को ‘बेबी बर्थ सर्विस’ या ‘प्रेग्नेंट जॉब’ का नाम दिया गया था। इसमें कहा जाता था कि कई अमीर घरों की महिलाएं बच्चे की चाहत रखती हैं और जो पुरुष उनकी मदद करेंगे, उन्हें मुंहमांगी रकम दी जाएगी।

कैसे बनाते थे शिकार? (Modus Operandi)

  • रजिस्ट्रेशन का झांसा: जैसे ही कोई व्यक्ति लालच में आकर दिए गए नंबर पर कॉल या मैसेज करता, उसे सबसे पहले 799 रुपये की रजिस्ट्रेशन फीस जमा करने को कहा जाता था।
  • सिक्योरिटी मनी: रजिस्ट्रेशन के बाद ठग भरोसे में लेने के लिए फर्जी आईडी कार्ड और एग्रीमेंट भेजते थे। फिर ‘सिक्योरिटी मनी’, ‘मेडिकल चेकअप’ और ‘होटल चार्ज’ के नाम पर 5,000 से 20,000 रुपये तक वसूल लिए जाते थे।
  • नंबर ब्लॉक: पैसे ट्रांसफर होते ही ठग अपना मोबाइल नंबर बंद कर देते थे या पीड़ित को ब्लॉक कर देते थे।

नवादा पुलिस की बड़ी कार्रवाई

नवादा के पुलिस अधीक्षक (SP) अभिनव धीमान को इस गिरोह के बारे में गुप्त सूचना मिली थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।

तकनीकी सर्विलांस की मदद से पुलिस ने हिसुआ थाना क्षेत्र के मनवां गांव में छापेमारी की। वहां से पुलिस ने दो साइबर अपराधियों को रंगे हाथों पकड़ा। इनके पास से पुलिस ने कई एंड्रॉइड मोबाइल फोन, प्रिंटर और ठगी में इस्तेमाल होने वाले डेटा बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह बिहार के अलावा अन्य राज्यों के लोगों को भी अपना शिकार बना रहा था।

सावधान: ऐसी कोई ‘जॉब’ नहीं होती

पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे ऐसे लुभावने विज्ञापनों के चक्कर में न पड़ें। ‘प्रेग्नेंट जॉब सर्विस’ पूरी तरह से एक फ्रॉड है। इंटरनेट पर पैसे कमाने का शॉर्टकट ढूंढना आपको भारी पड़ सकता है। अगर आपको ऐसा कोई विज्ञापन दिखे, तो तुरंत साइबर सेल या नजदीकी थाने में इसकी सूचना दें।

Madhubani Court Bomb Threat: मधुबनी कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी, पुलिस छावनी में तब्दील हुआ परिसर, मची अफरा-तफरी

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मधुबनी (Madhubani News): बिहार में कानून व्यवस्था को लेकर आज एक बड़ी खबर सामने आई है। मधुबनी व्यवहार न्यायालय (Civil Court) को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। इस धमकी भरी खबर के बाद कोर्ट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार को मधुबनी कोर्ट समेत बिहार के कई अन्य जिलों के कोर्ट को भी बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। यह धमकी कथित तौर पर ईमेल के जरिए भेजी गई है, जिसमें कोर्ट परिसर में बम प्लांट करने की बात कही गई थी।

जैसे ही यह खबर मधुबनी पुलिस प्रशासन को मिली, आनना-फानन में कोर्ट परिसर को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया। स्थानीय पुलिस और वरीय अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं और सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है।

पुलिस छावनी में तब्दील हुआ कोर्ट परिसर

धमकी की गंभीरता को देखते हुए मधुबनी कोर्ट कैंपस में भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। आने-जाने वाले हर व्यक्ति की गहन तलाशी ली जा रही है। संदिग्ध वस्तुओं की जांच की जा रही है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके।

  • कोर्ट के मुख्य द्वारों पर सुरक्षा बढ़ाई गई।
  • ​परिसर के अंदर संदिग्धों पर नजर रखी जा रही है।
  • ​वकीलों और आम लोगों के बीच थोड़ी देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

बिहार के अन्य जिलों में भी मिली धमकी

यह घटना केवल मधुबनी तक सीमित नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, आज ही के दिन पटना (Patna), गया (Gaya) और किशनगंज (Kishanganj) सिविल कोर्ट को भी इसी तरह की धमकी भरे ईमेल मिले हैं। पटना सिविल कोर्ट में तो डॉग स्क्वायड और बम निरोधक दस्ते ने पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।