आंखों की रोशनी कैसे बढ़ाएं? कारण, लक्षण और सुरक्षित घरेलू उपाय (पूरा गाइड)

आंखों की रोशनी कैसे बढ़ाएं कारण लक्षण और सुरक्षित घरेलू उपाय

आज की आधुनिक जीवनशैली में आँखों की रोशनी कम होना एक आम समस्या बन गई है। घंटों कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठना, मोबाइल का अत्यधिक उपयोग, पोषक तत्वों की कमी और तनाव इसके मुख्य कारण हैं। विटामिन A की कमी और आनुवंशिकता (Genetics) भी कम उम्र में चश्मा लगने की बड़ी वजह हैं।

यदि आप भी आँखों की कमजोरी या बढ़ते हुए चश्मे के नंबर से परेशान हैं, तो यहाँ कुछ प्रभावी घरेलू उपचार दिए जा रहे हैं जो आपकी दृष्टि (Eyesight) को सुधारने में मदद कर सकते हैं।

आँखों की रोशनी कम होने के मुख्य कारण

  • पोषक तत्वों का अभाव: आहार में विटामिन A की कमी।
  • डिजिटल स्ट्रेन: घंटों कंप्यूटर, टीवी या मोबाइल का उपयोग।
  • जीवनशैली: तनाव, काम का दबाव और नींद की कमी।
  • अन्य कारक: प्रदूषण, धूल, संक्रमण और केमिकल युक्त हेयर डाई का उपयोग।

आँखों की ज्योति बढ़ाने के रामबाण घरेलू नुस्खे

1. बादाम, सौंफ और मिश्री का मिश्रण

यह नुस्खा आँखों के लिए सबसे प्रसिद्ध माना जाता है।

  • विधि: 7 बादाम, 5 ग्राम मिश्री और 5 ग्राम सौंफ को मिलाकर चूर्ण बना लें। रात को सोने से पहले इसे गुनगुने दूध के साथ लें।
2. देसी घी का प्रयोग

आयुर्वेद में गाय का घी आँखों के लिए अमृत समान है।

  • विधि: रात को सोने से पहले पैर के तलवों और कनपटी पर गाय के घी से मालिश करें। नियमित रूप से जलनेति करना भी अत्यंत लाभकारी है।

3. तांबे के बर्तन का पानी

  • विधि: एक लीटर पानी को तांबे के जग में रात भर रखें और सुबह खाली पेट इस पानी को पिएं। यह शरीर के साथ-साथ आँखों की नसों को भी शक्ति देता है।

4. फिटकरी और गुलाब जल

  • विधि: चने के दाने जितनी फिटकरी को भूनकर (सेंककर) 100 ग्राम गुलाब जल में डालें। रात को सोते समय इसकी 4-5 बूंदें आँखों में डालें और पुतलियों को घुमाएं। यह मोतियाबिंद में भी राहत देता है।

आँखों के लिए कुछ अन्य महत्वपूर्ण टिप्स

  • आंवले का सेवन: आंवले का मुरब्बा दिन में दो बार खाएं या आंवले के पानी से आँखें धोएं।
  • हथेलियों की सिकाई (Palming): तनाव दूर करने के लिए हथेलियों को आपस में रगड़कर आँखों पर रखें।
  • मुँह की लार (Saliva): सुबह उठकर बिना कुल्ला किए मुँह की लार को आँखों में काजल की तरह लगाएं। (यह 6 महीने तक नियमित करने पर लाभ देता है)।
  • अखरोट का तेल: आँखों के आसपास अखरोट के तेल की मालिश करने से चश्मा हटाने में मदद मिलती है।
  • आई एक्सरसाइज: आँखों को क्लॉकवाइज (Clockwise) और एंटी-क्लॉकवाइज घुमाएं।

क्या खाएं और किनसे बचें..?

क्या करें/खाएंकिनसे बचें
अंगूर, केला और गन्ने का रस लें।केमिकल युक्त हेयर डाई और शैम्पू।
7 से 9 घंटे की गहरी नींद लें।देर रात तक जागना।
रोजाना पर्याप्त पानी पिएं।धूल और सीधे तेज धूप।

नोट: आंखों की रोशनी कमजोर होना आज एक सामान्य समस्या बन चुकी है। सही आदतें, संतुलित आहार और नियमित जांच से हम आंखों को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकते हैं। किसी भी गंभीर समस्या में तुरंत नेत्र चिकित्सक से संपर्क करें।

अस्वीकरण (Disclaimer):

महत्वपूर्ण सूचना: इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और सामान्य ज्ञान के उद्देश्य से है। यह किसी भी पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। यहाँ बताए गए घरेलू नुस्खे और तरीके पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। आँखों जैसी संवेदनशील इंद्रिय के मामले में, कोई भी प्रयोग करने से पहले या अपनी स्थिति के अनुसार किसी योग्य नेत्र रोग विशेषज्ञ (Ophthalmologist) या आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। किसी भी उपाय से होने वाले लाभ या हानि के लिए यह वेबसाइट या लेखक जिम्मेदार नहीं होंगे।

रोमांचक फाइनल में झंझारपुर को हराकर बेनीपट्टी बनी लौकहा चैम्पियंस ट्रॉफी (LCC) की विजेता

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लौकहा (मधुबनी): खेल और उत्साह के महाकुंभ ‘लौकहा चैम्पियंस ट्रॉफी’ का आज भव्य समापन हो गया। फाइनल मुकाबले में बेनीपट्टी की टीम ने अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर झंझारपुर को हराकर विजेता ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। रोमांच से भरे इस मैच में दर्शकों को क्रिकेट का बेहतरीन रोमांच देखने को मिला।

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मैच का लेखा-जोखा: बेनीपट्टी का दबदबा

फाइनल मुकाबले में बेनीपट्टी ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया। निर्धारित 20 ओवरों में बेनीपट्टी की टीम ने 9 विकेट खोकर 201 रनों का विशाल लक्ष्य झंझारपुर के सामने रखा।

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जवाब में लक्ष्य का पीछा करने उतरी झंझारपुर की टीम शुरुआत से ही दबाव में दिखी। हालांकि टीम ने संघर्ष किया, लेकिन बेनीपट्टी की सटीक गेंदबाजी के आगे झंझारपुर की पूरी टीम 18.4 ओवर में 168 रन बनाकर ऑलआउट हो गई। इस तरह बेनीपट्टी ने एक शानदार जीत दर्ज कर खिताब अपने नाम किया।

निशांत मिश्रा के बल्ले ने उगली आग

​पूरे टूर्नामेंट में बेजोड़ प्रदर्शन करने वाले निशांत मिश्रा को ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट‘ चुना गया। उन्होंने मात्र तीन मैचों में शानदार बल्लेबाजी करते हुए 210 रन बनाए, जो उनकी टीम की जीत में निर्णायक साबित हुए।

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दिग्गजों ने बढ़ाया खिलाड़ियों का उत्साह

समापन समारोह के दौरान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित स्थानीय मुखिया संजीव साह और जिला परिषद सदस्य चंद्र भूषण साह ने विजेता टीम को कप और पुरस्कार राशि प्रदान की। वहीं, उपविजेता टीम को पुरस्कार राशि और कप के प्रायोजक प्रमोद कुमार पंजीयार के हाथों सम्मानित किया गया। टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी (प्लेयर ऑफ द सीरीज) का पुरस्कार खुटौना निवासी सोनू के सौजन्य से दिया गया।

हम उन सभी सात प्रायोजकों का विशेष आभार व्यक्त करते हैं जिन्होंने टूर्नामेंट के सातों मैचों को सफल बनाने में अपना सहयोग दिया। साथ ही, आयोजन समिति के सदस्यों, अंपायरों, कमेंटेटरों और स्कोररों की मेहनत ने ही इस आयोजन को यादगार बनाया है।— दिनेश गुप्ता, अध्यक्ष, लौकहा क्रिकेट क्लब (LCC)

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दिनेश गुप्ता

LCC ने जताया सबका आभार

टूर्नामेंट की सफलता पर LCC के अध्यक्ष दिनेश गुप्ता ने मैनेजमेंट कमेटी के सभी पदाधिकारियों, सदस्यों और खिलाड़ियों को बधाई दी। उन्होंने स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ प्रिंट और सोशल मीडिया के साथियों का भी शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने इस खेल महोत्सव को जन-जन तक पहुँचाया।

51 संदूक, 10 जनपथ और दबी हुई फाइलें — आज़ादी के इतिहास पर सबसे बड़ा सवाल

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भूमिका: जब सत्ता, सेवा नहीं रह जाती

इतिहास गवाह है कि जब सत्ता सेवा के बजाय स्वामित्व का भाव ओढ़ लेती है, तो राष्ट्र की धरोहरें ‘निजी जागीर’ बनने लगती हैं। पंडित नेहरू के कार्यकाल से जुड़े 51 संदूक दस्तावेजों का सोनिया गांधी के आवास से बरामद होना या उनका अस्तित्व स्वीकार किया जाना, भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक शर्मनाक अध्याय है। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि देश की जनता के साथ विश्वासघात भी है।

सत्ता का रसूख और दरबारियों की भूमिका

वर्ष 2008 में जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री की कुर्सी पर थे, तब सत्ता का असली रिमोट कंट्रोल 10 जनपथ के पास था। उस दौर के कद्दावर नेताओं—अहमद पटेल, मोतीलाल वोरा, और तारिक अनवर जैसे रणनीतिकारों की चौकड़ी ने शायद यह तय कर लिया था कि ‘नेहरू’ मतलब सिर्फ ‘गांधी परिवार’। राष्ट्रीय संग्रहालय से 51 बक्से उठवाकर मैडम के घर पहुँचा दिए गए और किसी ने चूँ तक नहीं की। अगर सोनिया गांधी आज इस सच को न मानतीं, तो क्या होता? दोषी तो उन बेचारे अधिकारियों को बना दिया जाता जिन्होंने मजबूरी में ‘राजकुमारी’ और ‘राजकुमार’ के दरबार के आदेशों का पालन किया था।

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दस्तावेजों में दफन इतिहास

इन संदूकों में बंद दस्तावेज कोई साधारण कागज नहीं हैं। इनमें 1947 के सत्ता हस्तांतरण के वे महत्वपूर्ण पत्र हैं, जो भारत के विभाजन और आजादी की असली कहानी बयां करते हैं। लेडी एडविना और माउंटबेटन के साथ नेहरू का पत्राचार निजी संपत्ति कैसे हो सकता है? अन्य राष्ट्रध्यक्षों के साथ हुआ शासकीय संवाद देश की संपत्ति है, किसी परिवार की विरासत नहीं। इन्हें सरकारी इमारत से निकालकर घर ले जाने की हिम्मत वही कर सकता है जिसे संविधान से ऊपर अपने ‘वंश’ पर भरोसा हो।

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जयपुर का खजाना: एक अनसुलझा जख्म

इतिहास की बात चली है तो आपातकाल का वह काला दौर भी याद आता है। महारानी गायत्री देवी का वह अकूत खजाना, जिसे खोजने के लिए जयगढ़ किले में सेना उतार दी गई थी। दिल्ली-जयपुर मार्ग को बंद कर दिया गया और ट्रकों के काफिले कहाँ गायब हो गए, इसका जवाब आज तक किसी फाइल में नहीं मिला। वह खजाना कहाँ गया? क्या वह भी उसी राजनीति की भेंट चढ़ गया जिसके महल आज भ्रष्टाचार और व्यक्तिवाद की नींव पर खड़े हैं?

समय बदला है, देश जागा है

यह संतोष का विषय है कि मोदी सरकार के 12वें वर्ष में ही सही, इन गुमनाम बक्सों की सुध ली गई। आज समय बदल चुका है। अब देश छोटे-बड़े, अमीर-गरीब और जात-पात की बंदिशों को तोड़कर राष्ट्रवाद की राह पर चल पड़ा है। सीमा पर अपनी जान देने वाला जवान अब यह सवाल पूछने लगा है कि उसकी मातृभूमि की ऐतिहासिक धरोहरें किसी के घर की शोभा क्यों बनी हुई थीं?

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निष्कर्ष: इतिहास जनता का होता है

दस्तावेजों का सरकारी संस्थान (PMML) में वापस पहुँचना इस बात का प्रतीक है कि अब ‘राजा-रानी’ का जमाना लद चुका है। हिंदुस्तान तब मुस्कुराता है जब देश का इतिहास सुरक्षित हाथों में होता है, न कि किसी शक्तिशाली परिवार की तिजोरियों में। उम्मीद है कि ये 51 संदूक अब देश के सामने वो सच लाएंगे जो दशकों से छिपाकर रखा गया था।

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नेपाल के वीरगंज में विरोध की आग: बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपु चंद्र दास की हत्या पर भड़के छात्र!

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वीरगंज (नेपाल): पड़ोसी देश बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों और हिंसा की लहर अब नेपाल तक पहुँच गई है। हाल ही में बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले में एक हिंदू युवक, दीपु चंद्र दास, की नृशंस हत्या के विरोध में नेपाल के वीरगंज में छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया।पड़ोसी देश बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों और हिंसा की लहर अब नेपाल तक पहुँच गई है। हाल ही में बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले में एक हिंदू युवक, दीपु चंद्र दास, की नृशंस हत्या के विरोध में नेपाल के वीरगंज में छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया।

चराचर खबर (Charachar Khabar) की रिपोर्ट: प्रदर्शन की मुख्य बातें

नेपाल के प्रमुख डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘चराचर खबर’ (Charachar Khabar) द्वारा साझा किए गए वीडियो के अनुसार, वीरगंज स्थित ठाकुरराम बहुमुखी कैंपस के छात्र सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारी छात्रों ने हाथों में तख्तियां और बांग्लादेशी झंडे पर क्रॉस के निशान वाले पोस्टर लेकर अपना विरोध दर्ज कराया।

प्रदर्शन के दौरान लगे प्रमुख नारे:

  • बांग्लादेशी जिहादी मुर्दाबाद!
  • हिंदुओं को मारना बंद करो!
  • Human Rights मुर्दाबाद! (मानवाधिकार संगठनों की चुप्पी पर सवाल)
  • Justice for Bangladesh Hindus

क्या है पूरा मामला?

घटना बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले के भालुका की है। मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर वायरल जानकारी के अनुसार, दीपु चंद्र दास पर धर्म के अपमान का आरोप लगाकर एक उग्र भीड़ ने उनकी पीट-पीट कर हत्या कर दी। इतना ही नहीं, मानवता को शर्मसार करते हुए हत्या के बाद उनके शव को पेड़ से बाँधकर आग लगा दी गई।

इस घटना की वीभत्सता ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। नेपाल के छात्र समुदाय ने इस घटना को “नरसंहार” करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से दखल देने की मांग की है।

सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया:

चराचर खबर की रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटना के बाद चौतरफा दबाव को देखते हुए बांग्लादेश सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने घटना की निंदा की है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि सिर्फ बयानों से काम नहीं चलेगा; जमीन पर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।

निष्कर्ष: वीरगंज में हुआ यह विरोध प्रदर्शन यह दर्शाता है कि मानवाधिकारों का हनन और सांप्रदायिक हिंसा किसी एक देश की सीमा तक सीमित नहीं रहती। नेपाल के युवाओं ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वे अपने पड़ोसी देश में हो रहे अन्याय के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे।

स्रोत: चराचर खबर (Charachar Khabar), नेपाल।

शहीद परमेश्वर की 70वीं जयंती: वीरता और बलिदान की अमर गाथा

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फुलपरास (मधुबनी): “शहीद परमेश्वर जी वीरता, त्याग और साहस की अद्वितीय प्रतिमूर्ति थे। उनका जीवन केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि संघर्ष और बलिदान की एक जीवंत गाथा है।” यह विचार बिहार सरकार के पूर्व मंत्री लक्ष्मेश्वर राय ने शहीद परमेश्वर जी की 70वीं जयंती के अवसर पर व्यक्त किए।​शनिवार को मधुबनी जिले के फुलपरास स्थित ‘शहीद परमेश्वर चौक’ पर शहीद परमेश्वर स्मारक समिति के तत्वावधान में एक भव्य जयंती समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्धजीवियों ने हिस्सा लेकर शहीद को नमन किया।

कार्यक्रम की मुख्य बातें:

  • पुष्पांजलि अर्पित: समारोह की शुरुआत शहीद परमेश्वर जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि के साथ हुई।​
  • प्रेरणास्रोत जीवन: वक्ताओं ने उनके संघर्षमय जीवन और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण पर विस्तार से प्रकाश डाला।​
  • युवाओं को संदेश: पूर्व मंत्री लक्ष्मेश्वर राय ने कहा कि सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब आज की युवा पीढ़ी उनके विचारों को अपनाकर सामाजिक न्याय और राष्ट्रहित के मार्ग पर चले।

​”एक महान व्यक्तित्व” पुस्तक का जिक्र

समारोह के दौरान हरियाणा के पूर्व राज्यपाल श्रद्धेय धनिक लाल मंडल द्वारा शहीद परमेश्वर के जीवन पर आधारित लिखित पुस्तक ‘एक महान व्यक्तित्व‘ की चर्चा की गई। यह पुस्तक उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को गहराई से समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

सामाजिक न्याय का संकल्प

बुद्धिजीवियों और उपस्थित अतिथियों ने शहीद के सपनों का भारत बनाने और समाज में समानता, न्याय एवं भाईचारे को मजबूत करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में दो मिनट का मौन रखकर शांति की प्रार्थना की गई।

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उपस्थित गणमान्य व्यक्ति:

समारोह में मुख्य रूप से निम्नलिखित हस्तियां मौजूद रहीं:

  • लक्ष्मेश्वर राय (पूर्व मंत्री, बिहार सरकार)​
  • रामसुंदर यादव (वरिष्ठ भाजपा नेता)​
  • अनिल मंडल (मुख्य पार्षद, नगर पंचायत घोघरडीहा)
  • ​राम पुकार यादव (प्रखंड प्रमुख)​
  • सुशील कामत (पंसस)
  • रूपेश कुमार, रोहित नारायण यादव, देवकृष्ण यादव एवं अन्य।

​I Support Bihar: बिहार की आवाज़, आपकी अपनी पहचान

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​​I Support Bihar एक स्वतंत्र और जिम्मेदार डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जिसका मुख्य उद्देश्य बिहार की आवाज़ को मजबूती देना और यहाँ के लोगों का समर्थन करना है। हम बिहार से जुड़ी हर अहम खबर, मुद्दा और उपलब्धि को पूरी ईमानदारी और सच्चाई के साथ जनता तक पहुँचाते हैं।

हमारा मिशन: ज़मीनी हकीकत से रूबरू कराना

हमारा चैनल केवल खबरें ही नहीं दिखाता, बल्कि बिहार की ज़मीनी हकीकत को सामने लाता है। हम प्राथमिकता के साथ निम्नलिखित वर्गों की आवाज़ बुलंद करते हैं:

  • आम लोगों की समस्याएँ: रोज़मर्रा की चुनौतियों को प्रशासन तक पहुँचाना।​
  • युवाओं की उम्मीदें: करियर और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा।​
  • किसान और श्रमिक: खेत-खलिहान से लेकर मजदूरों के हक की बात।
  • ​छात्र: उनकी शिक्षा और भविष्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ।

इसके साथ-साथ, हम देश-विदेश की ट्रेंडिंग और विश्वसनीय खबरें भी अत्यंत सरल और समझने योग्य भाषा में प्रस्तुत करते हैं ताकि आप हमेशा अपडेट रहें।

सिर्फ खबर नहीं, एक बदलाव का मंच

​I Support Bihar केवल समाचार दिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मंच है जो:

  • सकारात्मक छवि: बिहार की गौरवशाली संस्कृति और सकारात्मक छवि को दुनिया के सामने बढ़ाता है।​
  • निष्पक्ष पत्रकारिता: सच, निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता को बढ़ावा देता है।
  • ​सेतु का कार्य: जनता और प्रशासन के बीच एक मजबूत पुल (Setu) बनने का काम करता है ताकि समस्याओं का समाधान हो सके।

आपका भरोसा, हमारी ताकत

हमारा मानना है कि एक जागरूक नागरिक ही समाज को बदल सकता है। आपका भरोसा और समर्थन ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। हम भविष्य में भी इसी निष्ठा के साथ बिहार की सेवा करते रहेंगे।​

मधुबनी: पेड़ से लटका मिला 19 वर्षीय युवक का शव, क्षेत्र में फैली सनसनी

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मधुबनी / लौकही (बिहार): मधुबनी जिले के लौकही प्रखंड अंतर्गत अंधरामठ थाना क्षेत्र के महादेवमठ पंचायत स्थित महथोर वार्ड संख्या 05 से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ 19 वर्षीय युवक कुलदीप साह का शव पेड़ से लटका हुआ मिला, जिससे पूरे इलाके में दहशत और सनसनी फैल गई।

मृतक की पहचान

मृतक की पहचान भगवानी साह के 19 वर्षीय पुत्र कुलदीप साह के रूप में हुई है, जो महथोर वार्ड 05 का निवासी था।

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खुटौना में जदयू का सदस्यता अभियान: विधायक ने कार्यकर्ताओं के साथ भरी हुंकार, बड़ी संख्या में लोगों ने ली पार्टी की सदस्यता

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खुटौना (मधुबनी): मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल (यूनाइटेड) की जड़ें मजबूत करने के लिए खुटौना प्रखंड में विशाल सदस्यता अभियान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में स्थानीय विधायक ने शिरकत की और बड़ी संख्या में स्थानीय युवाओं व ग्रामीणों को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता दिलाई।

कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह

कार्यक्रम के दौरान प्रखंड के विभिन्न पंचायतों से आए लोगों ने जदयू की नीतियों और बिहार में हो रहे विकास कार्यों में अपनी आस्था जताई। विधायक ने नए सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि जदयू सिर्फ एक पार्टी नहीं, बल्कि समावेशी विकास का एक विचार है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे सरकार की लोक-कल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाएँ।

दिग्गज नेताओं की रही मौजूदगी

इस अवसर पर पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने संगठन की मजबूती पर जोर दिया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से निम्नलिखित गणमान्य उपस्थित थे:

  • सत्येंद्र सिंह: प्रदेश उपाध्यक्ष, किसान सह सहकारिता प्रकोष्ठ (जदयू)​
  • चंद्रभूषण साह: जिला परिषद सदस्य
  • ​देवदत्त साह: प्रखंड अध्यक्ष​
  • पार्टी कार्यकर्ता: बड़ी संख्या में स्थानीय कार्यकर्ता और ग्रामीण जनता।

विकास के मुद्दे पर एकजुटता

बैठक को संबोधित करते हुए सत्येंद्र सिंह ने कहा कि किसान और सहकारिता के क्षेत्र में बिहार ने नए आयाम स्थापित किए हैं। वहीं, जिला परिषद सदस्य चंद्रभूषण साह और प्रखंड अध्यक्ष देवदत्त साह ने स्थानीय स्तर पर संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने की रणनीति साझा की।​कार्यक्रम के अंत में विधायक ने नए सदस्यों को सदस्यता रसीद सौंपी और उन्हें पार्टी के सिद्धांतों पर चलने का संकल्प दिलाया।

निर्भया कांड की 13वीं बरसी: 6 दरिंदे, एक चलती बस और वो चीखें जो आज भी दिल्ली की सड़कों पर गूँजती हैं!

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नई दिल्ली: 16 दिसंबर 2012—भारतीय इतिहास का वो काला दिन जिसे कोई भी देशवासी कभी नहीं भूल सकता। आज इस वीभत्स घटना को पूरे 13 साल बीत चुके हैं। दिल्ली की सड़कों पर एक चलती बस में जो दरिंदगी हुई थी, उसने न केवल एक बेटी की जान ली, बल्कि पूरे देश के सिस्टम और कानून को कटघरे में खड़ा कर दिया था। आज 13वीं बरसी पर देश एक बार फिर अपनी उस बेटी को याद कर रहा है और सवाल पूछ रहा है कि क्या वाकई महिलाएं अब सुरक्षित हैं?

वो खौफनाक रात: क्या हुआ था 16 दिसंबर को..?

13 साल पहले आज ही के दिन, एक पैरामेडिकल छात्रा अपने दोस्त के साथ फिल्म देखकर घर लौट रही थी। मुनिरका से बस लेने के बाद, बस में सवार 6 दरिंदों ने उसके साथ जो हैवानियत की, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। गंभीर हालत में उसे इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया, जहां 29 दिसंबर को उसने दम तोड़ दिया।

लंबी कानूनी लड़ाई और इंसाफ

निर्भया के माता-पिता ने अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। इस मामले में:

  • कुल आरोपी: 6 (राम सिंह, मुकेश सिंह, विनय शर्मा, अक्षय ठाकुर, पवन गुप्ता और एक नाबालिग)।
  • सजा: मुख्य आरोपी राम सिंह ने जेल में आत्महत्या कर ली थी। नाबालिग को 3 साल सुधार गृह में रखने के बाद रिहा कर दिया गया।
  • फांसी: 20 मार्च 2020 को तिहाड़ जेल में चारों दोषियों (मुकेश, विनय, अक्षय और पवन) को फांसी दी गई।

कानून में क्या हुए बदलाव..?

निर्भया कांड के बाद देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के कारण सरकार को ‘जस्टिस वर्मा कमेटी’ बनानी पड़ी। इसके बाद ‘क्रिमिनल लॉ (अमेंडमेंट) एक्ट 2013’ पास हुआ, जिसमें:

  • बलात्कार के लिए कड़ी सजा और कुछ मामलों में मृत्युदंड का प्रावधान किया गया।
  • ​’निर्भया फंड‘ की स्थापना की गई ताकि महिला सुरक्षा के प्रोजेक्ट्स को फंड मिल सके।
  • फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन हुआ।

आज की जमीनी हकीकत

13 साल बीत जाने के बाद भी क्या हालात बदले हैं? हाल ही में कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना हो या देश के अन्य हिस्सों से आने वाली खबरें, ये साबित करती हैं कि कानून सख्त होने के बावजूद अपराधी बेखौफ हैं। ‘निर्भया फंड’ के सही इस्तेमाल और पुलिस व्यवस्था में सुधार को लेकर आज भी विशेषज्ञ सवाल उठाते हैं।

निर्भया की 13वीं बरसी हमें याद दिलाती है कि न्याय केवल फांसी की सजा तक सीमित नहीं होना चाहिए। असली न्याय तब होगा जब देश की हर सड़क, हर दफ्तर और हर घर महिलाओं के लिए पूरी तरह सुरक्षित होगा। निर्भया आज एक नाम नहीं, बल्कि महिला सुरक्षा के लिए चल रही एक कभी न खत्म होने वाली जंग का प्रतीक बन चुकी है।

Note: This script is curated based on the reporting trends of Patrika and general news standards for digital platforms.

पटना पुलिस का बड़ा एक्शन: पूर्व DGP के दामाद से रंगदारी मांगने वाला कुख्यात मैनेजर राय एनकाउंटर में घायल

पटना: बिहार की राजधानी पटना में बेखौफ अपराधियों के खिलाफ पुलिस ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को पटना के खगौल इलाके में पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ में कुख्यात अपराधी मैनेजर राय गोली लगने से घायल हो गया। मैनेजर राय वही अपराधी है जिसने हाल ही में बिहार के पूर्व डीजीपी (DGP) गुप्तेश्वर पांडेय के दामाद से रंगदारी की मांग की थी।

पटना के खगौल में पुलिस और अपराधी मैनेजर राय के बीच मुठभेड़ का दृश्य - Bhoomi News Live

मुठभेड़ की पूरी जानकारी

यह घटना खगौल थाना क्षेत्र के खगौल लख के पास की है। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि मैनेजर राय किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में इलाके में मौजूद है। जब पुलिस ने उसे घेरने की कोशिश की, तो उसने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोलियां चलाईं।

  • कुल फायरिंग: पुलिस और अपराधी के बीच लगभग 6 राउंड गोलियां चलीं।
  • घायल: पुलिस की एक गोली मैनेजर राय के पैर में लगी, जिससे वह मौके पर ही गिर पड़ा।
  • बरामदगी: पुलिस ने घटनास्थल से एक देसी कट्टा और दो जिंदा कारतूस बरामद किए हैं।

एम्स में कराया गया भर्ती

एनकाउंटर के तुरंत बाद पुलिस ने घायल अपराधी को इलाज के लिए पटना एम्स (AIIMS) में भर्ती कराया है, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है। पुलिस ने अस्पताल के चारों ओर सुरक्षा कड़ी कर दी है।

मैनेजर राय का क्राइम रिकॉर्ड

मैनेजर राय इलाके का जाना-माना कुख्यात अपराधी है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार:

  1. उस पर हत्या, लूट, और रंगदारी के करीब 20 से ज्यादा मामले दर्ज हैं।
  2. वह काफी समय से पुलिस की हिट लिस्ट में था।
  3. पूर्व डीजीपी के दामाद को धमकी देने के बाद से पुलिस उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही थी।

निष्कर्ष:

पटना पुलिस की इस कार्रवाई से अपराधियों में हड़कंप मच गया है। स्थानीय लोगों ने पुलिस के इस त्वरित एक्शन की सराहना की है। पुलिस अब मैनेजर राय के अन्य साथियों और उसके नेटवर्क को खंगालने में जुटी है ताकि गिरोह का पूरी तरह सफाया किया जा सके।