मधुबनी: डकैती की बड़ी साजिश नाकाम, हथियार और नशीले पदार्थों के साथ 7 अपराधी गिरफ्तार, एक नाबालिग भी निरुद्ध

Madhubani Police Arrest Criminals

मधुबनी: जिले में अपराधियों के विरुद्ध चलाई जा रही ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत मधुबनी पुलिस को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। लदनियां थाना क्षेत्र के मरनैया गांव में पुलिस ने छापेमारी कर डकैती की योजना बना रहे सात अपराधियों को अवैध हथियारों और नशीले पदार्थों के साथ गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई में एक विधि विरुद्ध बालक (नाबालिग) को भी हिरासत में लिया गया है।

गुप्त सूचना पर हुई त्वरित कार्रवाई

​पुलिस अधीक्षक (SP) योगेंद्र कुमार को मिली गुप्त सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की गई। सूचना मिली थी कि 10 अप्रैल 2026 की रात मरनैया गांव स्थित शंभु कामत के घर पर कुछ अपराधी इकट्ठा हुए हैं और किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में हैं। सूचना की गंभीरता को देखते हुए थानाध्यक्ष, लदनियां के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया और चिन्हित स्थान पर घेराबंदी कर छापेमारी की गई।

नशे की हालत में मिले अपराधी, बिछौने के नीचे छिपा था काल

​जब पुलिस टीम ने शंभु कामत के घर पर दस्तक दी, तो वहां एक चौकी पर 8 लोग बैठकर नशा (ब्राउन शुगर) का सेवन कर रहे थे। पुलिस ने सभी को हिरासत में लेकर जब गहन तलाशी ली, तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। जिस चौकी पर अपराधी बैठे थे, उसी के पुआल के बिछौने के नीचे से पुलिस ने 01 देशी कट्टा, 02 जिंदा कारतूस और 08 तेज धारदार हथियार बरामद किए।

अपराधियों ने स्वीकार किया डकैती का प्लान

​पुलिस की कड़ी पूछताछ में पकड़े गए अभियुक्तों ने स्वीकार किया कि वे सभी ब्राउन शुगर का सेवन करने के बाद इलाके में गृहभेदन और डकैती की बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। हालांकि, वारदात को अंजाम देने से पहले ही पुलिस ने उन्हें दबोच लिया।

Madhubani Police Arrest Criminals

गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण

​पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए अपराधियों की पहचान इस प्रकार हुई है:

  1. शम्भु कुमार कामत (पिता- बिनोद कामत)
  2. लक्ष्मण साफी (पिता- रामप्रसाद साफी)
  3. परशुराम कामत (पिता- लालबाबू कामत)
  4. सर्जुन कुमार कामत (पिता- स्व० फेकन कामत)
  5. मधुसुधन कुमार कामत (पिता- स्व० कृष्णदेव कामत)
  6. अजय कुमार कामत (पिता- स्व० राजेंद्र कामत)
  7. अतुल कुमार कामत (पिता- दिलीप कामत) (सभी निवासी: मरनैया/मरनैया नवटोली, थाना- लदनिया, जिला- मधुबनी)

पुलिस की बरामदगी एक नजर में

  • हथियार: 01 देशी कट्टा, 08 तेज धारदार चाकू/लोहे के हथियार।
  • कारतूस: 02 जिंदा कारतूस।
  • नशीला पदार्थ: ब्राउन शुगर जैसा पदार्थ।
  • अन्य: 02 मोबाइल फोन।

​लदनियां थाना पुलिस ने इस मामले में NDPS एक्ट और आर्म्स एक्ट की सुसंगत धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। सभी गिरफ्तार अभियुक्तों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है, जबकि नाबालिग को बाल सुधार गृह भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

मधुबनी से सुमित चौधरी की रिपोर्ट Bhoomi News Live

झंझारपुर क्राइम मीटिंग: 50 बड़े कांडों की फाइल खुली, लखनौर और झंझारपुर थाना निकले सबसे आगे

एसडीपीओ सुबोध कुमार सिन्हा

झंझारपुर (मधुबनी): अनुमंडल क्षेत्र में बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाने और कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए एसडीपीओ (SDPO) सुबोध कुमार सिन्हा ने सभी थानाध्यक्षों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में डीएसपी का सख्त तेवर देखने को मिला, जहाँ उन्होंने कर्तव्य में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों को सीधे तौर पर चेतावनी दी।

50 गंभीर मामलों की हुई गहन पड़ताल

बैठक के दौरान हत्या, लूट, बलात्कार, पॉक्सो (POCSO) और एससी-एसटी एक्ट जैसे 50 सबसे संवेदनशील और गंभीर मामलों की फाइलें खंगाली गईं। डीएसपी ने एक-एक केस की प्रगति रिपोर्ट ली और जांच में देरी पर नाराजगी जताई। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजने में कोई कोताही न बरती जाए।

अंधराठाढ़ी और भेजा थाना के प्रदर्शन पर नाराजगी

कार्यशैली के आधार पर थानों की रैंकिंग भी सामने आई। समीक्षा में पाया गया कि:

  • अव्वल: झंझारपुर और लखनौर थाना कांडों के निष्पादन (Disposal) में सबसे आगे रहे।
  • फिसड्डी: अंधराठाढ़ी और भेजा थाना का प्रदर्शन सबसे खराब रहा।

इन थानों के थानाध्यक्षों को कड़ी फटकार लगाते हुए डीएसपी ने कहा कि अगर जल्द ही सुधार नहीं दिखा, तो विभागीय कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

जेल से बाहर आए अपराधियों पर ‘स्पेशल नजर’

डीएसपी सुबोध कुमार सिन्हा ने बताया कि पुलिस ने क्षेत्र के 8-10 ऐसे अपराधियों को चिह्नित किया है जो लगातार वारदातों को अंजाम देते हैं। इसके अलावा, जो अपराधी हाल ही में जेल से छूटकर बाहर आए हैं, उनकी दैनिक गतिविधियों की निगरानी के लिए विशेष निर्देश दिए गए हैं।

मार्च महीने का रिपोर्ट कार्ड

  • कुल दर्ज मामले: 156
  • निष्पादित मामले: 186 (पुराने मामलों को मिलाकर)
  • रणनीति: वाहन जांच, रोको-टोको अभियान और रात में गश्त बढ़ाने के निर्देश।

बैठक में सर्किल इंस्पेक्टर बीके बृजेश समेत अररिया संग्राम, भैरवस्थान, झंझारपुर आरएस, लखनौर, रुद्रपुर, मधेपुर और भेजा के थानाध्यक्ष मुख्य रूप से उपस्थित थे।

खुटौना: पारिवारिक विवाद में दामाद ने ससुर पर तानी पिस्टल, तीन गिरफ्तार

टौना थाना क्षेत्र के सिरसिया गांव से बरामद देशी पिस्टल, जिंदा कारतूस और मोबाइल फोन।

खुटौना (मधुबनी): मधुबनी जिले के खुटौना थाना क्षेत्र अंतर्गत सिरसिया गांव में सोमवार की देर रात पारिवारिक विवाद ने उस समय हिंसक रूप ले लिया, जब एक दामाद ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर ससुर के घर पर हमला बोल दिया। हालांकि, ग्रामीणों की तत्परता और पुलिस की त्वरित कार्रवाई से एक बड़ी घटना टल गई।

घटना का विवरण

मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार (06 अप्रैल) की रात करीब 1:30 बजे रामदेव महतो के घर पर उनके दामाद अपने दो सहयोगियों के साथ पहुंचे। वहां गाली-गलौज करते हुए आरोपियों ने जानलेवा हमले का प्रयास किया। विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने देशी पिस्टल निकालकर रामदेव महतो को जान से मारने की धमकी दी।

ग्रामीणों ने दिखाया साहस

देर रात शोर-शराबा सुनकर आसपास के ग्रामीण एकत्रित हो गए। ग्रामीणों ने साहस का परिचय देते हुए घेराबंदी कर तीनों आरोपियों को मौके पर ही दबोच लिया। इसके तुरंत बाद घटना की सूचना डायल-112 को दी गई।

पुलिस की कार्रवाई और बरामदगी

सूचना मिलते ही खुटौना थाना पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों को हिरासत में ले लिया। तलाशी के दौरान पुलिस ने अपराधियों के पास से निम्नलिखित सामान बरामद किया है:

  • हथियार: एक देशी पिस्टल और एक जिंदा कारतूस।
  • वाहन: दो मोटरसाइकिल।
  • अन्य: तीन मोबाइल फोन।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

पकड़े गए आरोपियों की पहचान निम्नलिखित रूप में हुई है:

  1. दिनेश महतो
  2. रमेश महतो
  3. राहुल कुमार

ये सभी आरोपी किशनपुर थाना (जिला सुपौल) के निवासी बताए जा रहे हैं।

वर्तमान स्थिति

पुलिस ने इस मामले में संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है और तीनों अभियुक्तों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस मामले के अन्य पहलुओं की भी गहनता से जांच कर रही है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से गांव में तनावपूर्ण स्थिति अब नियंत्रण में है।

मधेपुर: ज्ञान ज्योति आवासीय विद्यालय के छात्र की संदिग्ध मौत, स्कूल संचालक ऋषि कर्ण गिरफ्तार

मधेपुर पुलिस द्वारा छात्र की संदिग्ध मौत मामले में जारी प्रेस विज्ञप्ति और गिरफ्तार आरोपी का विवरण

मधेपुर (मधुबनी)। झंझारपुर-मधुबनी पुलिस ने मधेपुर थाना क्षेत्र के एक निजी आवासीय विद्यालय में हुई छात्र की संदिग्ध मौत के मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए स्कूल संचालक को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने यह कार्रवाई सीसीटीवी फुटेज और मृतक के परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर की है।

क्या है पूरा मामला?

​बीते 4 अप्रैल 2026 को सुबह करीब 10:00 बजे पुलिस को सूचना मिली कि ‘ज्ञान ज्योति आवासीय विद्यालय’ में एक 12 वर्षीय छात्र, विकेश कुमार, की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। स्कूल प्रशासन छात्र को अस्पताल ले गया था, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की गंभीरता को देखते हुए मधेपुर थाना पुलिस और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी झंझारपुर ने तुरंत मौके पर पहुँचकर जांच शुरू की।

परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप

​मृतक छात्र की माँ, सुनीता देवी (निवासी: सुंदरी, थाना: भेजा, मधुबनी), ने थाने में आवेदन देकर स्कूल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार, उनके 12 वर्षीय बेटे विकेश कुमार को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि एक सोची-समझी साजिश के तहत उनके बेटे की हत्या की गई है।

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पुलिस जांच और गिरफ्तारी

​पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार:

​मामले में संलिप्त मुख्य आरोपी और स्कूल संचालक ऋषि कुमार कर्ण (पिता: बिनोद कुमार कर्ण) को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

​घटनास्थल पर FSL की टीम को बुलाया गया और साक्ष्य जुटाए गए।

​स्कूल परिसर में लगे CCTV कैमरों की सघन जांच की गई।

​सीसीटीवी फुटेज में मिले साक्ष्यों और परिजनों के बयान के आधार पर पुलिस ने कांड संख्या 85/26 दर्ज की है।

धाराओं के तहत कार्रवाई

​पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1), 61(2) और 3(5) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस अन्य अज्ञात स्कूल कर्मियों की भूमिका की भी जांच कर रही है ताकि इस दुखद घटना के पीछे की पूरी सच्चाई सामने आ सके।

न्याय का चीरहरण: थाने में अनसुनी हुई चीखें, वायरल ऑडियो ने खोली सिस्टम की पोल

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मधुबनी (बिहार): जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और सत्ता की हनक मानवीय संवेदनाओं पर हावी हो जाए, तो लोकतंत्र का चौथा स्तंभ ही अंतिम उम्मीद बचता है। बिहार के मधुबनी जिले के ललमनियां थाना क्षेत्र से आई खबर सभ्य समाज को शर्मसार करने वाली है। यहाँ एक 43 वर्षीय दलित महिला, ललिता देवी को न केवल खंभे से बांधकर पीटा गया, बल्कि सार्वजनिक रूप से उनके कपड़े फाड़कर उनका मान-मर्दन किया गया।

​घटना का क्रम: भूमि विवाद और ‘दबंगई’ का नंगा नाच

​15 मार्च 2026 की दोपहर, जब ललिता देवी अपने ससुर की खतियानी जमीन पर फूस का घर बनवा रही थीं, तब गांव के ही दबंगों (अविनाश पंडित व अन्य) ने उन पर हमला बोल दिया। पीड़िता का आरोप है कि:

  • ​उन्हें जातिसूचक गालियां दी गईं।
  • ​खंभे से बांधकर बेरहमी से पिटाई की गई।
  • ​भीड़ के सामने उनकी साड़ी और ब्लाउज फाड़ दिए गए, जो किसी भी स्त्री की गरिमा पर सबसे गहरा प्रहार है।

​सबसे दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह है कि ग्राम कचहरी पहले ही इस भूमि पर पीड़िता के पक्ष में फैसला सुना चुकी है। इसके बावजूद, न्यायिक आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए इस बर्बरता को अंजाम दिया गया।

​पुलिस की भूमिका: फरियादी ही बना अपराधी?

​इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठे। पीड़िता के अनुसार:

  1. प्राथमिकी दर्ज करने में आनाकानी: थाने पहुंचने पर न्याय देने के बजाय उन्हें टालमटोल का सामना करना पड़ा।
  2. पक्षपात का आरोप: पुलिस ने कथित तौर पर आरोपियों को हिरासत से छोड़ दिया, जबकि पीड़िता पक्ष को ही थाने में रोके रखा।
  3. वायरल ऑडियो: थानाध्यक्ष और पीड़िता के बीच की कथित बातचीत का ऑडियो पुलिसिया संवेदनहीनता की पुष्टि करता है, जिसमें न्याय की गुहार लगाती महिला को प्रशासनिक दुत्कार मिल रही है।

​प्रेस का दृष्टिकोण: क्या यह सिर्फ जमीन का विवाद है?

​यह मामला महज दो गुटों के बीच जमीन की लड़ाई नहीं है। यह जातिगत वर्चस्व और पितृसत्तात्मक दमन का मिश्रण है। दलित समुदाय की महिलाओं को सॉफ्ट टारगेट बनाना और उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित करना, सामाजिक पदानुक्रम को बनाए रखने का एक पुराना और क्रूर हथियार रहा है।

​”जब पुलिस प्रशासन ‘शक्ति’ के आगे नतमस्तक हो जाता है, तो कानून की धाराएं सिर्फ कागजों का हिस्सा बनकर रह जाती हैं।”

​मुख्य सवाल जो जवाब मांगते हैं:

​वायरल ऑडियो में दिख रही संवेदनहीनता पर क्या उच्चाधिकारियों ने संज्ञान लिया है?

​क्या बिहार में SC/ST एक्ट और महिलाओं की सुरक्षा के दावे केवल कागजी हैं?

​ग्राम कचहरी के फैसले के बावजूद पुलिस ने पीड़िता को सुरक्षा क्यों नहीं मुहैया कराई?

मधुबनी: BDO की निजी दुश्मनी ने लोकतंत्र को किया शर्मसार! पैक्स चुनाव में रची गई हार की साजिश? मलखान सिंह का बड़ा धमाका

Malkhan Singh exposing PACS election rigging in Laukhahi

लौकही, मधुबनी: मधुबनी जिले के लौकही प्रखंड में पैक्स चुनाव अब सिर्फ एक चुनावी प्रक्रिया नहीं, बल्कि ‘बदले की राजनीति‘ का अखाड़ा बन गया है। जिला पार्षद सदस्य मलखान सिंह ने प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। मलखान सिंह का दावा है कि उनके पिता को हराने के लिए प्रशासन ने न केवल नियमों की धज्जियां उड़ाईं, बल्कि रंजिश निकालने के लिए पूरे तंत्र का दुरुपयोग किया।

1. एक वोटर, दो पंचायत: नियम-कानूनों की उड़ी धज्जियां

​मलखान सिंह ने दस्तावेजी सबूतों के साथ खुलासा किया है कि तीन ऐसे लोग पाए गए हैं जिनका नाम दो अलग-अलग पंचायतों की मतदाता सूची में शामिल है। इतना ही नहीं, एक व्यक्ति का नाम तो सहकारी समितियों के नरेंद्रपुर में भी दर्ज है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि एक व्यक्ति ने दो-दो पंचायतों में जाकर अपना वोट गिराया, जो सीधे तौर पर चुनावी प्रक्रिया की शुचिता का उल्लंघन है।

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इन नामों ने खोली धांधली की पोल (सबूत के साथ)

हीरा देवी (पति: स्वर्गीय रामचंद्र यादव): इनका नाम भी अवैध तरीके से दो सूचियों में दर्ज पाया गया है।

विदेश्वर सहाय (पिता: लक्ष्मी सहाय): इनका नाम दो पंचायतों की मतदाता सूची में शामिल है।

अनीता देवी (पति: राधेश्याम यादव): इनका नाम भी दो जगह है और ये महिला सहकारी समिति, नरेंद्रपुर में सदस्य भी हैं।

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2. 18 साल से कम उम्र के बच्चों से डलवाए वोट!

अनियमितता की हद तो तब पार हो गई जब मतदाता सूची में नाबालिगों के नाम भी सामने आए। मलखान सिंह ने दो विशिष्ट नाम सार्वजनिक किए हैं:

गुंजा कुमारी (पिता: जितेंद्र कुमार सिंह): जन्मतिथि 02/05/2010 (उम्र 18 से कम)।

अनिकेत कुमार सिंह (पिता: जितेंद्र कुमार सिंह): जन्मतिथि 05/05/2013 (मात्र 12-13 साल की उम्र)।

क्यों निशाने पर आए मलखान सिंह? ‘आवास योजना’ का सच

जब पत्रकारों ने मलखान सिंह से पूछा कि आखिर BDO साहब ने उनके साथ ही ऐसा क्यों किया, तो उन्होंने जो जवाब दिया उसने प्रखंड कार्यालय में चल रहे भ्रष्टाचार की परतें खोल दीं। मलखान सिंह ने बताया:

पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर भारी लूट मची थी। गरीब जनता से 5,000 से लेकर 15,000 रुपये तक की अवैध उगाही की जा रही थी। मैंने एक जनप्रतिनिधि होने के नाते इसका खुलकर विरोध किया और भ्रष्टाचार को रोका। इसी का बदला लेने के लिए BDO साहब ने मेरे पिता को चुनाव हराने की साजिश रची और लोकतंत्र को तार-तार कर दिया।

लोकतंत्र की हत्या या प्रशासनिक तानाशाही?

मलखान सिंह का आरोप है कि एक प्रत्याशी को जबरन हराने के लिए BDO ने अपने पद का दुरुपयोग किया और बल प्रयोग कर चुनाव को प्रभावित किया। यह मामला अब केवल एक पंचायत का नहीं रह गया है, बल्कि पूरे मधुबनी जिले में चर्चा का विषय बन गया है कि क्या एक ईमानदार विरोध की कीमत चुनाव में धांधली सहकर चुकानी पड़ेगी?

क्या होगा आगे?

इन ठोस सबूतों के पेश होने के बाद अब जनता और विपक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। क्या जिला प्रशासन इन अधिकारियों और फर्जी वोटरों पर कार्रवाई करेगा? या फिर लोकतंत्र के इस उत्सव में हुई धांधली को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

Disclaimer: उपरोक्त खबर जिला पार्षद सदस्य मलखान सिंह द्वारा मीडिया के सामने दिए गए बयानों और पेश किए गए दस्तावेजों पर आधारित है। ‘भूमि न्यूज लाइव’ इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। हमारा उद्देश्य केवल जनप्रतिनिधियों के पक्ष को जनता तक पहुँचाना है। इस मामले में संबंधित अधिकारी (BDO) या प्रशासन का पक्ष आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

बड़ी खबर: लौकही पैक्स चुनाव में नेपाली नागरिकों की एंट्री! जिला पार्षद मलखान सिंह को BDO ने दी जेल भेजने की धमकी?

Laukahi Paxs Election Voter List Scam

लौकही, मधुबनी। बिहार के मधुबनी जिले के लौकही प्रखंड से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जीरोगा पंचायत में हुए पैक्स अध्यक्ष चुनाव की मतदाता सूची में दूसरे देश (नेपाल) के नागरिकों के नाम शामिल होने और उनसे मतदान कराने का गंभीर आरोप लगा है। लेकिन इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात वह है जो स्थानीय जिला परिषद सदस्य मलखान सिंह ने उजागर की है।

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ज्यादा उड़े तो जेल भेज देंगे – BDO पर गंभीर आरोप

​जिला परिषद क्षेत्र संख्या 42 के सदस्य मलखान सिंह ने इस पूरे मामले पर प्रखंड निर्वाचन पदाधिकारी सह प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) को फोन कर जानकारी दी थी। मलखान सिंह का आरोप है कि जब उन्होंने नेपाली नागरिकों द्वारा वोटिंग किए जाने की शिकायत की, तो BDO साहब ने समाधान करने के बजाय उन्हें ही धमका दिया।

​मलखान सिंह के अनुसार, BDO ने कहा– “वोटर लिस्ट में जिसका नाम है, वह वोट देगा। अगर ज्यादा इधर-उधर (विरोध) करोगे, तो सीधे गिरफ्तार करवाकर जेल भिजवा देंगे।” दूसरे देश के नागरिक कैसे बने पैक्स सदस्य?

यह मामला न केवल चुनावी धांधली का है, बल्कि देश की सुरक्षा से भी जुड़ा है।

  1. साजिश के तहत सदस्यता: आरोप है कि जानबूझकर नेपाली नागरिकों को चिन्हित कर उन्हें पैक्स का सदस्य बनाया गया।
  2. वोटिंग का खेल: चुनाव के दिन इन विदेशी नागरिकों को बुलाकर वोटिंग कराई गई, ताकि विशेष प्रत्याशी को जीत दिलाई जा सके।
  3. प्रशासनिक संज्ञान: सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मामला प्रखंड निर्वाचन पदाधिकारी के संज्ञान में लाया गया, तो उन्होंने जांच के बजाय शिकायतकर्ता को ही चुप कराने की कोशिश क्यों की?

सरकारी योजनाओं में लूट की मास्टर प्लानिंग

​स्थानीय सूत्रों का कहना है कि वोटर लिस्ट में इन नामों को शामिल करने का मकसद सिर्फ चुनाव जीतना नहीं है। इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के सहारे शौचालय योजना, आवास योजना और अन्य सरकारी अनुदान की राशि हड़पने की पूरी तैयारी है। यह सीधे तौर पर सरकारी खजाने और भारतीय करदाताओं के पैसे की लूट है।

लोकतंत्र के लिए काला दिन

​एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को अधिकारी द्वारा जेल भेजने की धमकी देना और विदेशी नागरिकों से भारतीय चुनाव में मतदान कराना लोकतंत्र की हत्या के समान है। यदि सीमावर्ती क्षेत्रों में इसी तरह प्रशासनिक संरक्षण में विदेशी नागरिक सरकारी तंत्र का हिस्सा बनते रहे, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा साबित होगा।

भूमि न्यूज़ लाइव की मांग

​इस मामले के उजागर होने के बाद भूमि न्यूज़ लाइव जिला प्रशासन, मधुबनी जिलाधिकारी (DM) और राज्य निर्वाचन आयोग से मांग करता है कि:

दोषियों पर FIR: विदेशी नागरिकों को सदस्य बनाने वाले और इसमें संलिप्त अधिकारियों पर अविलंब प्राथमिकी दर्ज की जाए।

BDO की भूमिका की जांच: जिस अधिकारी ने शिकायतकर्ता को धमकी दी, उनकी भूमिका की उच्चस्तरीय जांच हो।

वोटर लिस्ट का मिलान: जीरोगा पंचायत की पैक्स वोटर लिस्ट का मिलान नेपाली नागरिकता के दस्तावेजों से कराया जाए।

मधुबनी पुलिस मुस्तैद: रामनवमी पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए एसपी के नेतृत्व में निकला फ्लैग मार्च

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मधुबनी | आगामी रामनवमी पर्व को देखते हुए मधुबनी जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। जिले में शांति, सौहार्द और सुरक्षा का वातावरण बनाए रखने के लिए पुलिस अधीक्षक (SP), मधुबनी के नेतृत्व में जिले के विभिन्न संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले इलाकों में सघन फ्लैग मार्च निकाला गया।

सुरक्षा व्यवस्था का जायजा और पैदल गश्त

​इस फ्लैग मार्च के दौरान पुलिस अधीक्षक के साथ विभिन्न थानों के थानाध्यक्ष, पुलिस पदाधिकारी और भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहे। पुलिस की टीम ने सड़क पर उतरकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य त्योहार के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकना और आम जनता के बीच सुरक्षा का भाव पैदा करना है।

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फ्लैग मार्च के मुख्य केंद्र:

  • राजनगर थाना क्षेत्र: यहाँ पुलिस बल ने सड़कों पर पैदल गश्त की।
  • नगर थाना क्षेत्र: शहरी इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को परखा गया।
  • कोतवाली चौक: प्रमुख चौराहों पर पुलिस की तैनाती सुनिश्चित की गई।
  • जिला कंट्रोल रूम: सीसीटीवी के जरिए पूरे शहर की निगरानी की जा रही है।

अफवाहों से बचने की अपील

​फ्लैग मार्च के दौरान मधुबनी पुलिस ने आम नागरिकों से सीधा संवाद किया और उनसे अपील की कि:

  • पर्व को आपसी भाईचारे और शांतिपूर्ण ढंग से मनाएं।
  • ​सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैलने वाली किसी भी प्रकार की भ्रामक अफवाहों पर ध्यान न दें।
  • ​किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत नजदीकी थाना या कंट्रोल रूम को दें।

चेतावनी: पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था भंग करने वालों और शांति बिगाड़ने की कोशिश करने वाले असमाजिक तत्वों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

तकनीकी निगरानी और हाई अलर्ट

​जिला कंट्रोल रूम में बैठकर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पूरे जिले की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। जगह-जगह लगे सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के माध्यम से भीड़भाड़ वाले इलाकों की मॉनिटरिंग की जा रही है ताकि रामनवमी का जुलूस और अन्य धार्मिक कार्यक्रम सुरक्षित एवं व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सकें।

दबंगई या साजिश? मधुबनी में पत्रकार को फंसाने के लिए रंगदारी के केस का सहारा

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मधुबनी (बिहार): लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया और सत्ता के बीच का टकराव कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब यह टकराव निजी रंजिश और कानूनी दांव-पेच की शक्ल ले ले, तो सवाल उठना लाजिमी है। ताजा मामला बिहार के मधुबनी जिले के बाबूबरही से सामने आया है, जहां एक स्थानीय पत्रकार और मुखिया के बीच की जंग अब पुलिस की फाइलों और सचिवालय की दहलीज तक पहुंच गई है।

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​क्या है पूरा विवाद?

​मामले की शुरुआत तब हुई जब हिन्दुस्तान दैनिक के संवाददाता दीपेंद्र दीपम ने एक खबर प्रकाशित की। खबर का शीर्षक था— बाबूबरही: हत्या मामले में पति-पत्नी गिरफ्तार। इस खबर में उल्लेख था कि हत्या के एक पुराने मामले में सतघारा पंचायत के मुखिया का नाम भी आरोपियों में शामिल है। बस यही बात सतघारा पंचायत के मुखिया नंद कुमार यादव को चुभ गई।

​मुखिया नंद कुमार यादव ने पत्रकार दीपेंद्र दीपम के खिलाफ कांड संख्या 155/26 के तहत रंगदारी मांगने और छवि खराब करने की प्राथमिकी (FIR) दर्ज करा दी। मुखिया का आरोप है कि पत्रकार ने उनसे 10 हजार रुपये की मांग की और पैसे न देने पर झूठी खबर छापकर उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई।

घटनाक्रम

तारीख/समयघटनामुख्य बिंदु
14 नवंबर 2021बाबूबरही कांड सं. 263/21हत्या का मामला दर्ज, जिसमें रंजीत पासवान और अन्य आरोपी बने।
23 मार्च 2026खबर का प्रकाशन‘हिन्दुस्तान’ में दीपेंद्र दीपम द्वारा हत्या मामले में गिरफ्तारी की खबर छपी।
23 मार्च 2026FIR दर्ज (155/26)मुखिया नंद कुमार यादव ने पत्रकार पर रंगदारी का केस दर्ज कराया।
26 मार्च 2026पत्रकार की अपीलदीपेंद्र दीपम ने SP, DGP और मुख्यमंत्री को न्याय के लिए पत्र भेजा।

नोट: पहले जो रंगदारी या वसूली का मामला IPC की धाराओं में आता था, अब नए कानून के तहत BNS की धारा 308(3) जबरन वसूली (Extortion) से संबंधित है। इसमें डरा-धमका कर पैसे मांगना अपराध की श्रेणी में आता है। पत्रकार का दावा है कि उनके खिलाफ इस धारा का दुरुपयोग प्रतिशोध की भावना से किया गया है।

पत्रकार का पलटवार: यह सच को दबाने की कोशिश है

​इस एफआईआर के खिलाफ पत्रकार दीपेंद्र दीपम ने भी मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने मधुबनी के पुलिस अधीक्षक (SP) सहित मुख्यमंत्री, DGP और गृह सचिव को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। दीपेंद्र का पक्ष बेहद मजबूत और चौंकाने वाला है:

अपराधिक इतिहास का हवाला: पत्रकार ने अपने आवेदन में दावा किया है कि सूचक (मुखिया) नंद कुमार यादव का खुद का रिकॉर्ड संदेहास्पद है। उन पर बाबूबरही थाना और राजनगर थाना में हत्या से संबंधित कई मामले (जैसे कांड सं. 263/21, 219/22, 181/12) पहले से दर्ज हैं।

खबर का आधार: पत्रकार का कहना है कि उन्होंने जो खबर छापी, वह पुलिसिया कार्रवाई और कोर्ट में चल रहे मामलों पर आधारित थी।

साजिश का आरोप: दीपेंद्र दीपम का कहना है कि मुखिया अपनी दबंगई और रसूख के बल पर एक निर्भीक पत्रकार की आवाज को दबाना चाहते हैं ताकि उनके काले कारनामों पर कोई पर्दा न उठा सके।

“मैं कानून और न्याय में भरोसा रखता हूं। रंगदारी का आरोप पूरी तरह निराधार है। यह सिर्फ इसलिए किया गया है ताकि मैं इलाके की सच्चाई दिखाना बंद कर दूं।”दीपेंद्र दीपम, पत्रकार

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प्रशासनिक हलचल: न्याय की गुहार

​पत्रकार ने इस मामले को लेकर बिहार के शीर्ष अधिकारियों को रजिस्टर्ड डाक के जरिए शिकायत भेजी है। इनमें शामिल हैं:

  1. माननीय मुख्यमंत्री, बिहार
  2. पुलिस महानिदेशक (DGP), पटना
  3. ​गृह सचिव, बिहार सरकार
  4. ​आईजी (कमजोर वर्ग), पटना

बाबूबरही पुलिस अब इस मामले की जांच में जुटी है। लेकिन सवाल वही खड़ा है— क्या सच लिखना आज के दौर में इतना जोखिम भरा हो गया है कि पत्रकार को ही अपराधी बनाने की कोशिश की जाए?

जनता की राय क्या है?

​सोशल मीडिया और स्थानीय हलकों में इस खबर को लेकर तीखी बहस छिड़ी है। एक तरफ जनप्रतिनिधि की साख है, तो दूसरी तरफ पत्रकारिता की आजादी। अब देखना यह है कि मधुबनी पुलिस इस सुनियोजित षड्यंत्र की तह तक जाकर न्याय करती है या नहीं।

क्या आपको लगता है कि पत्रकारों पर झूठे केस दर्ज करना सत्ता का दुरुपयोग है? कमेंट में अपनी राय दें।

डिस्क्लेमर: इस लेख में प्रकाशित जानकारी प्राप्त दस्तावेजों, वायरल पत्र (Petition) और संबंधित पक्षों द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। यह लेख किसी भी व्यक्ति, जनप्रतिनिधि या पत्रकार की छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से नहीं लिखा गया है। चूंकि मामला वर्तमान में पुलिस जांच और न्यायालय के अधीन (Sub-judice) है, इसलिए हमारी वेबसाइट किसी भी आरोप की सत्यता की पुष्टि नहीं करती है। अंतिम निर्णय कानून सम्मत प्रक्रिया द्वारा ही मान्य होगा।

मधुबनी: गुप्त सूचना पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, अवैध देशी कट्टा और कारतूस के साथ एक गिरफ्तार

मधुबनी पुलिस द्वारा गिरफ्तार अभियुक्त और बरामद देशी कट्टा

मधुबनी (बिहार): अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत मधुबनी पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। कलुआही थाना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए एक अभियुक्त को अवैध हथियार और जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया है।

क्या है पूरा मामला?

​दिनांक 24 मार्च 2026 को कलुआही थाना के थानाध्यक्ष को गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी कि ग्राम हरिपुर मजरही टोल निवासी सिकंदर मंडल उर्फ सिंकू अपने घर में अवैध हथियार छिपाकर रखे हुए है।

​सूचना की गंभीरता को देखते हुए वरीय पदाधिकारियों को सूचित किया गया और उनके निर्देशानुसार पुलिस बल ने चिन्हित स्थान पर छापेमारी की। पुलिस टीम को देखते ही अभियुक्त ने भागने का प्रयास किया, लेकिन मुस्तैद पुलिस बल ने उसे घेराबंदी कर पकड़ लिया।

बरामदगी का विवरण

​गिरफ्तार व्यक्ति के घर की तलाशी लेने पर पुलिस ने निम्नलिखित सामग्री बरामद की:

  • 01 अवैध देशी कट्टा (लकड़ी के तख्ते पर कपड़े में बांधकर रखा हुआ)
  • 01 जिंदा कारतूस

गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान

​पकड़े गए व्यक्ति की पहचान सिकंदर मंडल उर्फ सिंकू (पिता- शुभचन्द्र मंडल उर्फ दुलाई मंडल) के रूप में हुई है, जो हरिपुर मजरही, थाना-कलुआही, जिला-मधुबनी का निवासी है। पूछताछ के दौरान वह भागने का कोई संतोषजनक कारण नहीं बता सका।

पुलिस की कानूनी कार्रवाई

​पुलिस ने बरामद हथियारों को जब्त कर लिया है और अभियुक्त को गिरफ्तार कर थाने लाया गया है। इस संदर्भ में कलुआही थाना में कांड संख्या- 66/26 दर्ज की गई है। अभियुक्त पर आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-बी)ए/26/35 के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।