अपूर्णीय क्षति: समाजसेवी और नहरी पंचायत के पूर्व मुखिया चंद्रकिशोर सल्हैता नहीं रहे, नम आंखों से दी गई विदाई

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खुटौना: मधुबनी जिले के खुटौना प्रखंड अंतर्गत नहरी पंचायत के पूर्व मुखिया और क्षेत्र के प्रतिष्ठित समाजसेवी चंद्रकिशोर सल्हैता का निधन हो गया है। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे पंचायत और आसपास के इलाकों में शोक की लहर दौड़ गई। वह एक कुशल जनप्रतिनिधि होने के साथ-साथ एक मिलनसार और मृदुभाषी व्यक्ति भी थे।

समाज सेवा को समर्पित रहा जीवन चंद्रकिशोर सल्हैता का पूरा जीवन समाज सेवा के लिए समर्पित रहा। नहरी पंचायत के मुखिया के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने पंचायत के विकास और जनहित के मुद्दों को लेकर कई महत्वपूर्ण कार्य किए। उनकी कार्यशैली और लोगों के प्रति उनके स्नेह ने उन्हें हर दिल अजीज बना दिया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने हमेशा दलगत राजनीति से ऊपर उठकर समाज के हर वर्ग की मदद की।

एक अपूर्णीय क्षति उनके निधन को क्षेत्र के लोगों ने एक व्यक्तिगत और सामाजिक क्षति बताया है। उनके निकटतम लोगों और शुभचिंतकों ने कहा कि “आदरणीय मुखिया जी” का जाना हम सभी के लिए अत्यंत दुखद है। उनका मार्गदर्शन और समाज के प्रति उनका योगदान सदैव याद किया जाएगा। उनका व्यक्तित्व ऐसा था कि वे लोगों के दिलों में अपनी एक अलग पहचान बनाने में सफल रहे।

श्रद्धांजलि और अंतिम प्रार्थना इस दु:खद घड़ी में क्षेत्र के गणमान्य लोगों और आम नागरिकों ने शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। सभी ने ईश्वर से प्रार्थना की है कि वे दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें।

उनके निधन से नहरी पंचायत ने अपना एक सच्चा हितेषी खो दिया है।

क्राइम अपडेट: ओझौल में हुई लूट का खुलासा, पुलिस ने लूटी गई बाइक और मोबाइल के साथ 3 को दबोचा

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मधुबनी (भैरवस्थान): जिले की भैरवस्थान थाना पुलिस ने 19 जनवरी को HDFC बैंक के सेल्स ऑफिसर के साथ हुई लूट की घटना का सफल उद्भेदन कर लिया है। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और गुप्त सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए घटना में शामिल तीन अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से लूटी गई मोटरसाइकिल, मोबाइल और घटना में प्रयुक्त बाइक भी बरामद कर ली गई है।

क्या थी पूरी घटना?

​घटना 19 जनवरी 2026 की है। वादी ब्रजेश कुमार (25 वर्ष), जो HDFC बैंक झंझारपुर में सेल्स ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं, अपनी पल्सर 220cc बाइक (MP04AM-8214) से क्षेत्र भ्रमण पर थे। दोपहर करीब 1:00 बजे जब वे रामखेतारी गांव से ग्राहक से मिलकर कमला तटबंध होते हुए झंझारपुर लौट रहे थे, तभी ओझौल के पीछे पानी टंकी के पास एक बाइक पर सवार तीन अपराधियों ने उन्हें ओवरटेक किया।

​अपराधियों ने हथियार का भय दिखाकर ब्रजेश कुमार को रोका और उनकी बाइक सहित मोबाइल (जिसमें दो सिम कार्ड लगे थे) छीनकर फरार हो गए। इस संबंध में भैरवस्थान थाना में काण्ड संख्या- 13/26 दर्ज किया गया था।

​पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी

​घटना के बाद पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और मुखबिरों के नेटवर्क को सक्रिय किया। 31 जनवरी 2026 को पुलिस को सूचना मिली कि अपराधी पश्चिमी कमला तटबंध पर ग्राम गढ़िया के पास मौजूद हैं। पुलिस टीम ने घेराबंदी कर तीनों अपराधियों को धर दबोचा।

​पूछताछ के दौरान गिरफ्तार अभियुक्तों ने घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है। पुलिस ने उनकी निशानदेही पर लूटी गई बाइक और मोबाइल बरामद कर लिया है।

गिरफ्तार अपराधियों का विवरण

​गिरफ्तार किए गए अपराधियों की पहचान निम्नलिखित रूप में हुई है:

  • ​विक्रम कुमार (19 वर्ष): पिता- गौरी चौधरी, सा०- झंझारपुर, वार्ड नं०- [वार्ड नंबर], थाना- झंझारपुर।
  • ​धीरज कुमार पाठक उर्फ नटवर (21 वर्ष): पिता- दयानंद पाठक, सा०- जलसैन, थाना- रूद्रपुर।
  • ​राकेश कुमार (19 वर्ष): पिता- शिवनाथ राय, सा०- झंझारपुर (राय जी टोला), वार्ड नं० 04।

​आपराधिक इतिहास:

गिरफ्तार अभियुक्त राकेश कुमार का पूर्व में भी आपराधिक इतिहास रहा है। वह झंझारपुर थाना काण्ड संख्या- 55/25 (धारा- 126(2)/115(2)/109/351(2)/352 BNS 2023) में भी आरोपी रहा है। पुलिस अन्य अभियुक्तों के आपराधिक इतिहास को खंगाल रही है।

​बरामद सामान की सूची

​पुलिस ने अपराधियों के पास से निम्नलिखित सामान जब्त किया है:

  • ​लूटी गई मोटरसाइकिल (Pulsar 220 cc) – 01
  • ​घटना को अंजाम देने में प्रयुक्त मोटरसाइकिल – 01
  • ​मोबाइल फोन – 03

आगे की कार्रवाई

​पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों और संपर्कों का पता लगाने में जुटी है। सभी गिरफ्तार अभियुक्तों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जा रहा है।

मधुबनी: विकास या विनाश? PHED विभाग द्वारा करोड़ों की नई सड़कों को तोड़ने पर बवाल, SP से सहयोग की गुहार, विजिलेंस जाँच की मांग

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​मधुबनी: जिले के खुटौना प्रखंड में विकास कार्यों के बीच आपसी समन्वय की भारी कमी और भ्रष्टाचार की बू आ रही है। मामला ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) और PHED (लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग) के बीच ठन गया है। आरोप है कि RWD द्वारा नई तकनीक से बनाई गई करोड़ों की सड़कों को PHED विभाग द्वारा अवैध रूप से तोड़ा जा रहा है, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुँच रहा है।

FIR दर्ज नहीं होने से बढ़ा मनोबल

जानकारी के मुताबिक, ग्रामीण कार्य विभाग ने अपनी सड़कों को बचाने के लिए स्थानीय थाने में FIR के लिए लिखित आवेदन भी दिया था। लेकिन पुलिस द्वारा मामला दर्ज नहीं किए जाने के कारण संवेदकों और PHED अधिकारियों का मनोबल बढ़ गया है। स्थिति यह है कि अब कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग (फुलपरास) ने पत्र के माध्यम से मधुबनी एसपी (SP Madhubani) से हस्तक्षेप करने और पुलिस बल का सहयोग मांगा है।

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रात के अंधेरे में चल रहा है ‘खेल’?

सामाजिक कार्यकर्ता सुबोध कुमार ने इस पूरे मामले में बड़े भ्रष्टाचार की आशंका जताई है। उनका कहना है, “विभाग द्वारा बार-बार पत्र लिखने और मीडिया में खबरें आने के बावजूद, PHED झंझारपुर के अधिकारी बाज नहीं आ रहे हैं। अब यह काम रात के अंधेरे में चोरी-छिपे किया जा रहा है, जो संदेह पैदा करता है।”

​सुबोध कुमार ने आरोप लगाया है कि यह सब कुछ एडवांस पेमेंट के खेल के कारण हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि PHED के इंजीनियर और संवेदक की मिलीभगत से करोड़ों का भुगतान पहले ही कर दिया गया है, जिसे सही ठहराने के लिए हड़बड़ी में सड़कों को तोड़ा जा रहा है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की निगरानी विभाग (Vigilance Inquiry) से जाँच कराने की मांग की है।

प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग

इस मामले में अब सबकी निगाहें मधुबनी के जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) पर टिकी हैं। क्या प्रशासन दो विभागों की इस लड़ाई में सरकारी संपत्ति को बर्बाद होने से बचा पाएगा?

अंधराठाढ़ी: विकास की नई रफ्तार, 10 करोड़ से अधिक की लागत से बनेंगी सड़कें, विधायक ने किया शिलान्यास

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अंधराठाढ़ी (मधुबनी): प्रखंड क्षेत्र में ग्रामीण विकास और यातायात सुगमता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। स्थानीय विधायक द्वारा मुख्यमंत्री ग्राम सम्पर्क योजना के तहत 10 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली विभिन्न सड़क परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया। इन सड़कों के बनने से क्षेत्र के हजारों लोगों को आवागमन में सुविधा होगी और कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

महरैल में मुख्य सड़क का शिलान्यास

इस शिलान्यास कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण महरैल आर.डब्ल्यू.डी. (RWD) सड़क रही। माननीय विधायक ने विधिवत पूजा-अर्चना के साथ नारियल फोड़कर इस कार्य का शुभारंभ किया।

यह महत्वपूर्ण सड़क महरैल आर.डब्ल्यू.डी. से शुरू होकर संस्कृत महाविद्यालय होते हुए महरैल स्टेशन के समीप मुख्य सड़क तक जाएगी। इस पथ के निर्माण से छात्रों, रेल यात्रियों और स्थानीय व्यापारियों को बड़ी राहत मिलेगी।

इन प्रमुख सड़कों की भी मिली सौगात

सिर्फ महरैल ही नहीं, बल्कि अंधराठाढ़ी प्रखंड के अन्य सुदूर क्षेत्रों को भी मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कई अन्य सड़कों का भी शिलान्यास किया गया। विधायक द्वारा जिन अन्य महत्वपूर्ण सड़कों की आधारशिला रखी गई, वे इस प्रकार हैं:

  • संस्कृत महाविद्यालय से राम टोल: अंधराठाढ़ी संस्कृत महाविद्यालय से राम टोल तक जाने वाली सड़क।
  • मुख्य सड़क से मरूकिया: मेन रोड से मरूकिया गांव को जोड़ने वाली संपर्क सड़क।
  • रूद्रपुर से भगवतीपुर: रूद्रपुर से भगवतीपुर के बीच नई सड़क का निर्माण।

10 करोड़ से अधिक की लागत से बदलेगी तस्वीर

मिली जानकारी के अनुसार, इन सभी योजनाओं की कुल लागत 10 करोड़ रुपये से अधिक है। यह राशि ‘मुख्यमंत्री ग्राम सम्पर्क योजना’ के अंतर्गत स्वीकृत की गई है।

समारोह के दौरान विधायक ने कहा कि क्षेत्र का विकास उनकी प्राथमिकता है। इन सड़कों के बन जाने से बरसात के दिनों में होने वाली कीचड़ और जलभराव की समस्या से ग्रामीणों को मुक्ति मिलेगी। साथ ही, स्कूल जाने वाले बच्चों और बीमार व्यक्तियों को अस्पताल ले जाने में भी आसानी होगी।

ग्रामीणों में खुशी की लहर

शिलान्यास समारोह के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि, पार्टी कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। वर्षों से जर्जर सड़कों का दंश झेल रहे ग्रामीणों ने इस पहल का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण और समय सीमा के भीतर पूरा होगा

BHU PhD Admission में ‘जातिगत’ खेल? JRF पास ST छात्र को मिले सिर्फ 3 नंबर, तो टॉपर को 100/100! इंटरव्यू के नाम पर भेदभाव का आरोप

वाराणसी/पटना: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU), जिसे शिक्षा का मंदिर कहा जाता है, एक बार फिर अपनी प्रवेश प्रक्रिया को लेकर सवालों के घेरे में है। सोशल मीडिया पर BHU के हिंदी विभाग की PhD प्रवेश परीक्षा (सत्र 2025-26) की एक लिस्ट वायरल हो रही है, जिसने पूरी एडमिशन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

इस लिस्ट में जो दिख रहा है, वह सिर्फ नंबरों का अंतर नहीं, बल्कि इंटरव्यू के नाम पर चल रहे संभावित ‘खेल’ और एक होनहार छात्र के भविष्य के साथ खिलवाड़ की कहानी बयां करता है।

क्या है पूरा मामला?

वायरल हो रही तस्वीर BHU के हिंदी विभाग के ‘JRF Mode’ में चयनित अभ्यर्थियों की सूची है। इसमें दो छात्रों के अंकों के बीच जमीन-आसमान का अंतर लोगों को हैरान कर रहा है:

  1. जनरल कैटेगरी (क्रम संख्या 1): विवेक कुमार को 100.000 इंडेक्स मार्क्स मिले हैं। यानी साक्षात्कार (Interview) में पूरे में पूरे अंक।
  2. ST कैटेगरी (क्रम संख्या 8): रवि कुमार राणा को मात्र 3.797 इंडेक्स मार्क्स मिले हैं।

JRF स्कॉलर को 100 में से सिर्फ 3 नंबर?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस छात्र (रवि कुमार राणा) ने भारत सरकार की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक JRF (Junior Research Fellowship) पास की हो, वह इंटरव्यू में इतना कमजोर कैसे हो सकता है कि उसे न्यूनतम अंक भी न मिलें?

पीड़ित पक्ष और सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों के अनुसार:

  • छात्र के पास केंद्रीय विश्वविद्यालय से मास्टर्स की डिग्री है।
  • उसने ऑल इंडिया लिखित परीक्षा पास करके मास्टर्स में दाखिला लिया था।
  • वह UGC द्वारा आयोजित JRF क्वालिफाइड है, जो उसकी अकादमिक योग्यता (Merit) का सबसे बड़ा प्रमाण है।
  • उसने फॉर्म भरने की न्यूनतम योग्यता (50% मार्क्स) भी पूरी की थी।

बावजूद इसके, इंटरव्यू पैनल ने उसे 3.797 अंक देकर रेस से बाहर कर दिया। वहीं, टॉपर को 100 में से 100 अंक मिलना किसी “चमत्कार” या “कृपा” से कम नहीं लग रहा। क्या किसी भी मौखिक परीक्षा में कोई 100% परफेक्ट हो सकता है?

इंटरव्यू बना भेदभाव का हथियार?

आरोप लगाया जा रहा है कि इंटरव्यू (साक्षात्कार) का इस्तेमाल अब सिर्फ ‘अपने लोगों’ को अंदर लाने और ‘वंचित वर्गों’ को बाहर करने के लिए किया जा रहा है।

वरिष्ठ पत्रकारों और बुद्धिजीवियों का कहना है, “जो 100 प्रतिशत दिख रहा है, हो सकता है वह किसी प्रोफेसर की वंश का चिराग हो। लेकिन सवाल यह है कि एक क्षणिक साक्षात्कार से उस शोधार्थी (ST छात्र) के साथ कम अंक देकर जो भेदभाव किया गया, उसका जिम्मेदार कौन है?”

आज भी काटे जा रहे हैं ‘एकलव्य’ के अंगूठे

इस घटना ने द्रोणाचार्य और एकलव्य की पौराणिक कथा की याद दिला दी है। अंतर बस इतना है कि अब अंगूठा नहीं मांगा जाता, बल्कि इंटरव्यू में कलम की नोक से 3 से 5 नंबर देकर भविष्य काट दिया जाता है।

अक्सर यह नैरेटिव (दुष्प्रचार) फैलाया जाता है कि आदिवासी या आरक्षित वर्ग के लोग पढ़ते नहीं हैं। लेकिन जब वे JRF निकालकर अपनी योग्यता साबित करते हैं, तो सिस्टम उन्हें इंटरव्यू रूम में हरा देता है।

UGC Act क्यों जरूरी है?

यह घटना बताती है कि UGC Act और रोस्टर नियमों का कड़ाई से पालन क्यों जरूरी है। अगर यूनिवर्सिटीज को इंटरव्यू में मनमानी करने की छूट मिलेगी, तो JRF जैसी कठिन परीक्षा पास करने वाले गरीब और आदिवासी छात्रों का प्रोफेसर बनने का सपना कभी पूरा नहीं होगा।

बड़ा सवाल: क्या BHU प्रशासन इस विसंगति (Discrepancy) की जांच करवाएगा? या फिर मेरिट की हत्या कर दी जाएगी?

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: UGC के नए भेदभाव विरोधी नियमों पर रोक, 2012 के नियम फिर से हुए लागू

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नई दिल्ली| सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के हाल ही में अधिसूचित नए नियमों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। ये नियम उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए बनाए गए थे, लेकिन कोर्ट ने इन्हें “अस्पष्ट” और “दुरुपयोग की संभावना वाला” माना है।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने आदेश दिया है कि जब तक इस मामले में अगला निर्णय नहीं आता, तब तक 2012 के पुराने नियम ही लागू रहेंगे

क्यों लगाई गई नए नियमों पर रोक?

यूजीसी ने 13 जनवरी, 2026 को ‘Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026’ जारी किए थे। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में तर्क दिया गया कि ये नियम संविधान के खिलाफ हैं।

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान निम्नलिखित प्रमुख कमियां पाईं:

  1. ‘रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन’ (Reverse Discrimination): नए नियमों में “जाति-आधारित भेदभाव” की परिभाषा को केवल SC, ST और OBC छात्रों तक सीमित रखा गया था। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि इससे सामान्य वर्ग (General Category) के छात्रों को भेदभाव के खिलाफ कोई कानूनी सुरक्षा नहीं मिल रही थी।
  2. दुरुपयोग का खतरा: कोर्ट ने टिप्पणी की कि नए नियम “बहुत व्यापक” (too sweeping) हैं और इनका इस्तेमाल निर्दोष लोगों को फंसाने या प्रशासनिक अराजकता फैलाने के लिए किया जा सकता है।
  3. अस्पष्टता: कोर्ट ने माना कि नियमों की भाषा स्पष्ट नहीं है, जिससे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।

2012 के नियम फिर से प्रभावी

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद, अब सभी कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज को ‘UGC (Promotion of Equity in Higher Educational Institutions) Regulations 2012’ का पालन करना होगा।

2012 के नियम भेदभाव को व्यापक रूप से परिभाषित करते हैं और इसमें किसी विशेष वर्ग को बाहर नहीं रखा गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक नए नियमों की समीक्षा पूरी नहीं होती, 2012 की व्यवस्था ही बनी रहेगी।

छात्रों और संस्थानों पर क्या असर होगा?

  • शिकायत निवारण: छात्र अब पुरानी व्यवस्था के तहत अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे।
  • प्रशासन: कॉलेज प्रशासन को अब नए दिशा-निर्देशों के बजाय पुराने ढांचे पर ही काम करना होगा।

यह फैसला उन छात्रों और संगठनों के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है, जिन्होंने तर्क दिया था कि भेदभाव विरोधी कानून सभी छात्रों के लिए समान होने चाहिए, चाहे उनकी जाति कोई भी हो।

झंझारपुर: गणतंत्र दिवस पर झंडोत्तोलन को लेकर विवाद, प्रमुख ने लगाया अनदेखी का आरोप, BDO ने दिया प्रोटोकॉल का हवाला

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झंझारपुर: पूरा देश जहां गणतंत्र दिवस के जश्न में डूबा था, वहीं झंझारपुर प्रखंड कार्यालय में झंडोत्तोलन (ध्वजारोहण) के समय और प्रोटोकॉल को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। यहां प्रखंड प्रमुख और प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) के बीच ‘समय’ और ‘सम्मान’ को लेकर ठन गई है।

क्या है प्रमुख का आरोप?

विवाद की शुरुआत तब हुई जब झंझारपुर प्रखंड प्रमुख और उनके पति (प्रतिनिधि) ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनके पहुंचने के बावजूद उनकी अनदेखी की और झंडोत्तोलन कर दिया।

प्रमुख पक्ष का कहना है कि झंडोत्तोलन का समय सुबह 9:50 बजे था। वे ठीक समय पर गेट पर पहुंच चुके थे, लेकिन रास्ते में गणतंत्र दिवस की झांकी (ट्रैक्टर) होने के कारण उनकी गाड़ी को अंदर आने में एक-दो मिनट की देरी हुई।

प्रमुख प्रतिनिधि ने कहा, “हम गेट पर आ गए थे। बीडीओ साहब ने हमारी गाड़ी को और हमें देख लिया था, इसके बावजूद उन्होंने झंडोत्तोलन करवा दिया। यह जनप्रतिनिधि का अपमान है।” उनका दावा है कि बीडीओ ने उन्हें देखते हुए भी कार्यक्रम आगे बढ़ा दिया।

बीडीओ की सफाई: “प्रोटोकॉल सबसे ऊपर है”

इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) ने मीडिया के सामने प्रशासनिक पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय पर्व पर भावनाओं से ज्यादा नियमों और समय का पालन जरूरी होता है।

बीडीओ ने बताया कि झंडोत्तोलन का कार्यक्रम बेहद व्यस्त और मिनट-टू-मिनट निर्धारित था:

  • 09:50 AM: प्रखंड कार्यालय
  • 09:55 AM: अंचल पदाधिकारी (CO) कार्यालय
  • 10:00 AM: कृषि कार्यालय
  • 10:05 AM: प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी
  • 10:10 AM: स्थानीय विद्यालय

बीडीओ द्वारा दिए गए मुख्य तर्क:

  • इंतजार किया गया: बीडीओ ने कहा कि 9:50 का समय तय था, लेकिन उन्होंने 9:54 बजे तक (4 मिनट अतिरिक्त) इंतजार किया।
  • कोई सूचना नहीं: उस समय तक न तो प्रमुख पहुंची थीं और न ही उनकी तरफ से देरी होने की कोई सूचना (Call) दी गई थी।
  • झंडे का सम्मान: बीडीओ ने तर्क दिया कि निर्धारित समय से ज्यादा विलंब करना राष्ट्रध्वज के प्रति असम्मान को दर्शाता है, इसलिए कार्यक्रम शुरू करना पड़ा।
  • किसने फहराया झंडा? बीडीओ ने इस बात का खंडन किया कि झंडा उन्होंने फहराया। उन्होंने बताया कि प्रमुख की अनुपस्थिति में वहां मौजूद पंचायत समिति सदस्य के हाथों झंडोत्तोलन कराया गया, जिसका वीडियो साक्ष्य मौजूद है।

समृद्धि यात्रा: सीएम नीतीश कुमार ने मधुबनी को दी 391 करोड़ की सौगात, मिथिला हाट और औद्योगिक क्षेत्र समेत 395 योजनाओं का किया शिलान्यास

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मधुबनी (27 जनवरी 2026): बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान आज मिथिला की सांस्कृतिक राजधानी मधुबनी को विकास की बड़ी सौगात दी है। मुख्यमंत्री ने जिले में कुल 391 करोड़ रुपये की लागत से 395 विकासात्मक योजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया।

अररिया संग्राम (झंझारपुर) में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सीएम ने न केवल विकास कार्यों का जायजा लिया, बल्कि अधिकारियों को समय सीमा के भीतर काम पूरा करने के कड़े निर्देश भी दिए।

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1. मिथिला हाट और औद्योगिक विकास पर जोर

मुख्यमंत्री ने झंझारपुर प्रखंड के अररिया संग्राम स्थित मिथिला हाट फेज-II (रिवर फ्रंट डेवलपमेंट) का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने सीएम को जिले के प्रमुख प्रोजेक्ट्स की प्रगति रिपोर्ट सौंपी, जिसमें शामिल हैं:

  • औद्योगिक क्षेत्र: लौकही प्रखंड के बनगामा में 450 एकड़ और झंझारपुर के लोहना में 250 एकड़ भूमि पर औद्योगिक केंद्र की स्थापना।
  • पर्यटन: मां सीता और प्रभु श्रीराम के प्रथम मिलन स्थल ‘फुलहर स्थान’ को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना।
  • इंफ्रास्ट्रक्चर: मधुबनी में अंतर्राज्यीय बस अड्डा, जयनगर शहीद चौक के पास आरओबी (ROB) और मधुबनी रिंग रोड का निर्माण।
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2. जीविका दीदियों और लाभुकों को मिली मदद

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने नवनिर्मित ‘जीविका भवन’ का उद्घाटन किया और इसकी चाबी जीविका दीदियों को सौंपी। महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देते हुए सीएम ने निम्नलिखित वितरण किए:

  • बैंक लिंकेज: 26,312 स्वयं सहायता समूहों को 301 करोड़ रुपये का सांकेतिक चेक।
  • सतत् जीविकोपार्जन योजना: 507 लाभार्थियों को 2 करोड़ 53 लाख रुपये की मदद।
  • ​इसके अलावा, दिव्यांगजनों को बैटरी चालित तिपहिया साइकिल, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड और आयुष्मान कार्ड भी वितरित किए गए।
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3. तालाब सौंदर्यीकरण पर सीएम का निर्देश

मुख्यमंत्री ने अररिया संग्राम के वार्ड-13 स्थित दुर्गा मंदिर के पास वाले तालाब का निरीक्षण किया और उसमें मछली का जीरा छोड़ा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया:

तालाब का सौंदर्यीकरण अच्छा है, लेकिन सीढ़ीनुमा घाट केवल दो तरफ बने हैं। इसे चारों तरफ बनवाया जाए ताकि छठ पूजा और अन्य कार्यों में लोगों को सहूलियत हो।

4. पंचायत ज्ञान केंद्र में संवर रहा भविष्य

मुख्यमंत्री ने रिमोट के माध्यम से जिन योजनाओं की शुरुआत की, उनका विवरण इस प्रकार है:

| श्रेणी | योजनाओं की संख्या | लागत (करोड़ में)

उद्घाटन | 294 | 93 करोड़

शिलान्यास | 101 | 298 करोड़

कुल | 395 | 391 करोड़ |

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ये गणमान्य रहे उपस्थित

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, प्रभारी मंत्री लेशी सिंह, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, डीजीपी विनय कुमार और डीएम आनंद शर्मा समेत कई विधायक और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

Bihar Budget 2026: 2 फरवरी से बजट सत्र, वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव पेश करेंगे NDA सरकार का ‘विजन डॉक्यूमेंट’ – जानिए क्या है खास

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बिहार की राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए फरवरी का महीना बेहद अहम होने जा रहा है। 2 फरवरी 2026 से बिहार विधानसभा का बजट सत्र शुरू हो रहा है, जो 25 फरवरी तक चलेगा। इस बार सभी की निगाहें वरिष्ठ मंत्री और वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव पर टिकी हैं, जो एनडीए (NDA) सरकार का पहला पूर्ण बजट पेश करेंगे।

कुल 19-20 कार्य दिवसों वाले इस सत्र में सरकार न केवल अपना लेखा-जोखा पेश करेगी, बल्कि राज्य के विकास का नया रोडमैप भी सामने रखेगी।

बजट का संभावित आकार: विकास की नई छलांग

वित्तीय वर्ष 2025-26: ₹3.17 लाख करोड़ (पिछला बजट)

वित्तीय वर्ष 2026-27 (अनुमानित): ₹3.20 लाख करोड़ से ₹3.24 लाख करोड़ के बीच।

बजट में यह वृद्धि स्पष्ट करती है कि सरकार विकास कार्यों की गति को धीमा नहीं पड़ने देना चाहती है।

किन क्षेत्रों पर रहेगा सरकार का ‘मेगा फोकस’?

1. बुनियादी ढांचा (Infrastructure)

​सड़क, बिजली और सिंचाई हमेशा से सरकार की प्राथमिकता रही है। चूंकि बिजेंद्र यादव लंबे समय तक ऊर्जा मंत्री रहे हैं, इसलिए बिजली क्षेत्र में सुधार और सौर ऊर्जा (Solar Energy) को लेकर नई घोषणाएं संभव हैं।

2. रोजगार और युवा (Employment & Youth)

​युवाओं के लिए यह बजट काफी अहम है।

  • स्किल डेवलपमेंट: शिक्षा को सीधे रोजगार से जोड़ने (Education-Employment Linkage) के लिए नई योजनाएं आ सकती हैं।
  • ​स्वरोजगार के लिए स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा।

3. महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment)

​’जीविका दीदियों’ की सफलता के बाद, सरकार महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता और उद्यमिता की नई/विस्तारित योजनाएं ला सकती है।

4. शिक्षा और स्वास्थ्य (Education & Health)

​हर बार की तरह, बजट का सबसे बड़ा हिस्सा शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र को जाने की संभावना है। अस्पतालों के आधुनिकीकरण और स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विशेष प्रावधान हो सकते हैं।

5. कृषि और बाढ़ प्रबंधन (Agriculture & Flood Management)

​बिहार के लिए बाढ़ और सूखा दो बड़ी चुनौतियां हैं। वित्त मंत्री ने हाल ही में केंद्र सरकार से जल संसाधन और बाढ़ प्रबंधन के लिए विशेष पैकेज की मांग की है। बजट में कोसी-मेची लिंक परियोजना जैसी योजनाओं के लिए राशि आवंटित की जा सकती है।

डेटा-ड्रिवन प्लानिंग: विकास का नया मंत्र

इस बार के बजट की एक खास बात ‘डेटा-ड्रिवन प्लानिंग’ (Data-Driven Planning) होगी। उद्योग स्थापना और आर्थिक विकास के लिए सरकार अब सिर्फ अनुमानों पर नहीं, बल्कि ठोस आंकड़ों के आधार पर नीतियां बनाएगी। इसका उद्देश्य राज्य में निवेश बढ़ाना और उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना है।

​2 फरवरी से शुरू होने वाला यह सत्र न केवल आंकड़ों का खेल होगा, बल्कि यह 2026 और उससे आगे के बिहार की तस्वीर तय करेगा। वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के अनुभव और केंद्र-राज्य के तालमेल से बिहार की जनता को एक संतुलित और विकासोन्मुखी बजट की उम्मीद है।​

नोट: बजट सत्र की पल-पल की अपडेट और वित्त मंत्री के भाषण के मुख्य अंशों के लिए हमारे साथ बने रहें।

ऐतिहासिक क्षण: मधुबनी बना देश का नंबर 1 – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने डीएम आनंद शर्मा को किया सम्मानित

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नई दिल्ली/मधुबनी: बिहार के मधुबनी जिले ने लोकतंत्र के महापर्व में अपनी उत्कृष्टता साबित करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर इतिहास रच दिया है। भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) द्वारा आयोजित 16वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर मधुबनी जिले को ‘प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण’ (Training & Capacity Building) की श्रेणी में देश भर में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है।

यह उपलब्धि न केवल मधुबनी प्रशासन की कार्यकुशलता को दर्शाती है, बल्कि यह समूचे बिहार राज्य के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण है।

राष्ट्रपति के हाथों मिला सम्मान

​नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में आयोजित एक भव्य समारोह में, भारत की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने मधुबनी के जिलाधिकारी सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी, श्री आनंद शर्मा को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया। इस दौरान भारतीय लोकतंत्र की मजबूती और निर्वाचन प्रक्रिया में उत्कृष्ट योगदान देने वाले अधिकारियों की सराहना की गई।

मधुबनी क्यों बना ‘नंबर 1’?

मधुबनी जिले को यह सम्मान अनायास ही नहीं मिला है। इसके पीछे जिला निर्वाचन तंत्र की कड़ी मेहनत और नवाचार शामिल हैं। इस पुरस्कार के मुख्य आधार रहे:

  • नवाचारपूर्ण प्रशिक्षण (Innovative Training): चुनाव कर्मियों और मतदाताओं को जागरूक करने के लिए नई तकनीकों और विधियों का प्रयोग।
  • सतत क्षमतावर्धन (Continuous Capacity Building): चुनावी प्रक्रिया को त्रुटिहीन बनाने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों का निरंतर कौशल विकास।
  • उत्कृष्ट टीमवर्क (Excellent Teamwork): जिला प्रशासन के हर विभाग का एक साथ मिलकर लोकतंत्र को मजबूत करने का प्रयास।

लोकतंत्र के लिए प्रेरणा

मधुबनी की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि सही योजना और समर्पण के साथ काम किया जाए, तो सुदूर स्थित जिले भी राष्ट्रीय पटल पर अपनी पहचान बना सकते हैं। जिला निर्वाचन पदाधिकारी श्री आनंद शर्मा के नेतृत्व में मधुबनी की टीम ने जो मानक स्थापित किए हैं, वे अब देश के अन्य जिलों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगे।

यह सम्मान मधुबनी जिला निर्वाचन तंत्र द्वारा किए गए नवाचारपूर्ण प्रशिक्षण, सतत क्षमतावर्धन एवं उत्कृष्ट टीमवर्क की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान है।

बिहार के लिए गर्व का दिन

इस पुरस्कार ने बिहार का मान पूरे देश में बढ़ाया है। यह जीत लोकतंत्र की जीत है और इस बात का संकेत है कि बिहार प्रशासनिक दक्षता और चुनावी प्रबंधन में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। मधुबनी वासियों के लिए आज का दिन उत्सव से कम नहीं है।

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