बिहार में पोर्टफोलियो का बंटवारा: सम्राट चौधरी सुपर सीएम की भूमिका में, विजय चौधरी और बिजेन्द्र यादव को मिली बड़ी जिम्मेदारी

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पटना: बिहार सरकार ने नई कैबिनेट के बीच विभागों का बँटवारा कर दिया है। बुधवार, 15 अप्रैल 2026 को जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शासन पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखते हुए गृह, सामान्य प्रशासन और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों सहित कुल 29 मंत्रालयों की जिम्मेदारी अपने पास रखी है।

​राज्य में दो उप-मुख्यमंत्री बनाए गए हैं— विजय कुमार चौधरी और बिजेन्द्र प्रसाद यादव। राज्यपाल के आदेश से जारी इस अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि वे सभी विभाग जो किसी अन्य मंत्री को आवंटित नहीं हैं, वे मुख्यमंत्री के अधीन रहेंगे।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास भारी-भरकम पोर्टफोलियो

​मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सबसे अधिक विभागों की जिम्मेदारी संभाली है। उनके पास गृह, सामान्य प्रशासन, मंत्रिमंडल सचिवालय, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, पथ निर्माण, नगर विकास एवं आवास, पंचायती राज, और राजस्व एवं भूमि सुधार जैसे जनता से सीधे जुड़े विभाग रहेंगे। इसके अलावा उद्योग, खान एवं भूतत्व, और पर्यटन जैसे विभाग भी उन्हीं के पास हैं।

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उप-मुख्यमंत्रियों को मिली अहम जिम्मेदारी

​कैबिनेट में शक्ति संतुलन बनाए रखते हुए दोनों उप-मुख्यमंत्रियों को भी महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो दिए गए हैं:

  • विजय कुमार चौधरी (उप-मुख्यमंत्री): इन्हें जल संसाधन, संसदीय कार्य, भवन निर्माण, परिवहन, ग्रामीण विकास और उच्च शिक्षा जैसे 10 विभागों की कमान सौंपी गई है।
  • बिजेन्द्र प्रसाद यादव (उप-मुख्यमंत्री): इन्हें वित्त, ऊर्जा, योजना एवं विकास, मद्य निषेध, और समाज कल्याण सहित कुल 8 विभागों का जिम्मा मिला है।

प्रशासनिक आदेश जारी

​यह आदेश भारत के संविधान के अनुच्छेद 166(3) के तहत राज्यपाल की सहमति के बाद मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत द्वारा जारी किया गया है। सरकार के इस कदम से स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी विकास और कानून-व्यवस्था से जुड़े प्रमुख मोर्चों का नेतृत्व स्वयं करेंगे, जबकि अनुभवी साथियों को बुनियादी ढांचे और आर्थिक नियोजन की जिम्मेदारी दी गई है।

​Elected बनाम Selected: तेजस्वी यादव का सम्राट चौधरी पर तीखा हमला, विकास के आंकड़ों पर घेरा

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पटना: बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के साथ ही वार-पलटवार का दौर तेज हो गया है। बीजेपी नेता सम्रट चौधरी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक बेहद तल्ख और कटाक्षपूर्ण पोस्ट साझा की है। तेजस्वी ने सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनने पर बधाई तो दी, लेकिन उनके कार्यकाल की चुनौतियों और बिहार की मौजूदा स्थिति को लेकर सरकार को आईना दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

निर्वाचित और चयनित का राजनीतिक खेल

​तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट की शुरुआत में ही नीतीश कुमार को Elected (निर्वाचित) और सम्राट चौधरी को Selected (चयनित) मुख्यमंत्री बताकर बड़ा राजनीतिक कटाक्ष किया। उन्होंने सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार को गद्दी से उतारने की उनकी प्रतिज्ञा पूर्ण करने पर बधाई दी, लेकिन साथ ही यह भी संकेत दिया कि वे जनता के सीधे जनादेश से नहीं बल्कि गठबंधन की जोड़-तोड़ से इस कुर्सी तक पहुँचे हैं।

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नीति आयोग के आंकड़ों से सरकार को घेरा

​तेजस्वी ने बिहार के पिछड़ेपन का मुद्दा उठाते हुए 21 वर्षों के NDA शासन पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने नए मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि बिहार आज भी कई राष्ट्रीय मानकों पर सबसे निचले पायदान पर है। तेजस्वी ने अपने पोस्ट में निम्नलिखित प्रमुख मुद्दों का जिक्र किया:

  • शिक्षा और स्वास्थ्य: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था का भारी अभाव।
  • अर्थव्यवस्था: निवेश की कमी, आय में गिरावट और खपत के घटते आंकड़े।
  • बेरोजगारी और पलायन: युवाओं को नौकरी न मिलना और राज्य से लगातार होता पलायन।
  • विधि व्यवस्था: राज्य में ध्वस्त हो चुकी कानून व्यवस्था और असुरक्षा का माहौल।

‘बिहारी स्वाभिमान’ को बताया सर्वोच्च

​तेजस्वी यादव ने सम्राट चौधरी को सचेत करते हुए कहा कि वे “बाहरियों के दिशा-निर्देशों” के आगे बिहारियों के स्वाभिमान को गिरवी न रखें। उनका इशारा स्पष्ट रूप से केंद्र सरकार के हस्तक्षेप की ओर था। उन्होंने आशा व्यक्त की कि मुख्यमंत्री बिहार की उन्नति और शांति के लिए सशक्त तरीके से काम करेंगे।

प्रादुर्भाव से समाजवादी श्री सम्राट चौधरी जी को पुनः हार्दिक शुभकामनाएं।तेजस्वी यादव

सियासी गलियारों में हलचल

​सम्राट चौधरी, जिन्होंने कभी नीतीश कुमार को सत्ता से हटाने तक अपना साफा (मुरेठा) न खोलने की कसम खाई थी, अब खुद मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन हैं। ऐसे में तेजस्वी यादव का यह पोस्ट न केवल एक चुनौती है, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए विपक्ष के एजेंडे की एक झलक भी है। अब देखना यह होगा कि नई सरकार इन तीखे सवालों का जवाब अपने काम से किस तरह देती है।

बिजली क्षेत्र के भीष्म पितामह बिजेंद्र यादव का कद बढ़ा, आज सम्राट कैबिनेट में लेंगे डिप्टी सीएम पद की शपथ

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पटना: बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बनी नई सरकार में, बिहार को अंधेरे से उजाले की ओर ले जाने वाले बिजेंद्र प्रसाद यादव को उनके समर्पण का बड़ा इनाम मिलने जा रहा है। आज सुबह 10:50 बजे, वे सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली कैबिनेट में उपमुख्यमंत्री (Deputy CM) पद की शपथ लेंगे।

बिहार के ऊर्जा पुरुष का नया सफर

​बिजेंद्र प्रसाद यादव को बिहार में बिजली सुधारों का जनक माना जाता है। एक दौर था जब बिहार में बिजली के दर्शन दुर्लभ थे, लेकिन बिजेंद्र यादव के ऊर्जा मंत्री रहते बिहार ने लालटेन युग को पीछे छोड़कर LED युग में कदम रखा। गांव-गांव तक बिजली पहुँचाने और जर्जर तारों को बदलने की उनकी मुहिम ने उन्हें राज्य का सबसे भरोसेमंद चेहरा बना दिया है।

36 वर्षों का अटूट विश्वास

  • लगातार प्रतिनिधित्व: बिजेंद्र यादव 1990 से लगातार सुपौल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतते आ रहे हैं।
  • अनुभव का खजाना: करीब 36 वर्षों से सत्ता के शीर्ष पर रहने वाले यादव ने ऊर्जा, वित्त, और वाणिज्य कर जैसे भारी-भरकम विभागों को बखूबी संभाला है।
  • साफ-सुथरी छवि: अपनी कर्मठता और ईमानदार छवि के कारण वे हर गुट और गठबंधन में स्वीकार्य रहे हैं।

आज होगा शपथ ग्रहण

​सुपौल की जनता और बिहार के प्रशासनिक हल्कों में इस खबर से भारी उत्साह है। सम्राट चौधरी के साथ उपमुख्यमंत्री के रूप में उनकी ताजपोशी यह संकेत देती है कि नई सरकार उनके प्रशासनिक अनुभव का लाभ उठाकर बिहार के विकास की गति को और तेज करना चाहती है।

बिहार के हर घर को रोशन करने वाले दिग्गज नेता अब सरकार के सारथी की भूमिका में नजर आएंगे।

नीतीश युग का ऐतिहासिक समापन: अंतिम कैबिनेट में दिखा दो महापुरुषों का आपसी सम्मान और विकास का अटूट संकल्प

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पटना: बिहार के राजनीतिक इतिहास में कुछ जोड़ियाँ ऐसी होती हैं जो सत्ता के लिए नहीं, बल्कि राज्य के नवनिर्माण के लिए बनी होती हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और ऊर्जा क्षेत्र के चाणक्य कहे जाने वाले बिजेंद्र प्रसाद यादव की जोड़ी उन्हीं में से एक है। मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए नीतीश कुमार की यह ‘अंतिम कैबिनेट बैठक’ न केवल एक औपचारिक विदाई थी, बल्कि बिहार को अंधेरे से उजाले की ओर ले जाने वाले दो महापुरुषों के सफर का गौरवशाली उत्सव भी थी।

बिजेंद्र यादव ने एक निष्ठावान साथी के रूप में हर मुश्किल समय में साथ निभाया। आज राजनीति में उनका कद और सम्मान दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है, जिसे देखते हुए नीतीश कुमार ने भी मुस्कुराते हुए कहा है— ‘बस, इसी तरह देखते रहिए’।

नीतीश का विजन और विजेंद्र का अनुभव: बिहार की प्रगति के दो पहिए

​आज जब कैबिनेट की बैठक समाप्त हुई, तो हर किसी की आँखें उन यादों से नम थीं, जिन्होंने पिछले दो दशकों में बिहार की सूरत बदली है।

  • बिजली क्रांति के नायक बिजेंद्र यादव: बिजेंद्र प्रसाद यादव का नाम बिहार के इतिहास में उस व्यक्ति के रूप में दर्ज होगा जिसने राज्य के कोने-कोने तक बिजली पहुँचाई। उनके कुशल प्रबंधन और कड़ी मेहनत का ही परिणाम है कि आज बिहार का कोई भी गाँव अंधेरे में नहीं है। ‘लालटेन’ से ‘एलईडी’ तक का यह सफर बिजेंद्र बाबू के अटूट परिश्रम के बिना संभव नहीं था।
  • सुशासन के पर्याय नीतीश कुमार: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जिस साहस के साथ बिहार में कानून का राज स्थापित किया और बुनियादी ढाँचे (सड़क, पुल, स्कूल) का जाल बिछाया, उसने राज्य को एक नई वैश्विक पहचान दी। महिला सशक्तिकरण और ‘न्याय के साथ विकास’ उनके शासन की मुख्य पहचान रही।
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सम्मान की एक अनूठी मिसाल

​आज के दौर में जहाँ राजनीति में केवल खींचतान दिखती है, वहीं नीतीश कुमार और बिजेंद्र यादव के बीच का आपसी सम्मान देखने लायक था। मुख्यमंत्री ने सदैव बिजेंद्र बाबू के अनुभव को प्राथमिकता दी, तो वहीं बिजेंद्र यादव ने एक निष्ठावान साथी के रूप में हर मुश्किल समय में नीतीश कुमार का साथ निभाया। यह तालमेल शायद ही अब भारतीय राजनीति में फिर कभी देखने को मिले।

बिहार करेगा सादर नमन

​यह केवल एक सरकार का अंत नहीं, बल्कि एक स्वर्णिम युग का ठहराव है। बिहार की जनता हमेशा याद रखेगी कि कैसे इन दो नेताओं ने अपने व्यक्तिगत हितों को पीछे छोड़कर राज्य के विकास को सर्वोपरि रखा।

नीतीश कुमार का संकल्प और विजेंद्र यादव का कर्म; बिहार हमेशा ऋणी रहेगा इन दो महापुरुषों का।

​मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार की इस अंतिम कैबिनेट बैठक के साथ ही एक अध्याय समाप्त हुआ है, लेकिन उनके द्वारा किए गए विकास कार्य आने वाली पीढ़ियों का मार्ग प्रशस्त करते रहेंगे। बिहार अपने इन दोनों सपूतों को उनके निस्वार्थ प्रयासों के लिए कोटि-कोटि नमन करता है!

बिहार में आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मियों के लिए न्याय का नया सवेरा: सुप्रीम कोर्ट और पटना हाईकोर्ट के 2025 के बड़े फैसले

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पटना | भूमि न्यूज़ लाइव: बिहार के लाखों संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए न्यायपालिका ने ऐतिहासिक बदलाव किए हैं। सुप्रीम कोर्ट और पटना हाईकोर्ट के 2025 के नवीनतम आदेशों ने अब सरकार और निजी एजेंसियों की मनमानी पर रोक लगा दी है।

1. समान काम, समान वेतन (Equal Pay for Equal Work)

केस: स्टेट ऑफ पंजाब बनाम जगजीत सिंह (विस्तारित आदेश 2025) कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि आउटसोर्स कर्मचारी नियमित स्टाफ जैसा ही काम कर रहे हैं, तो वे न्यूनतम वेतनमान (Basic + DA) के हकदार हैं। उन्हें केवल न्यूनतम मजदूरी देकर शोषण नहीं किया जा सकता।

2. स्थायी प्रकृति का काम (Perennial Nature of Work)

केस: सुप्रीम कोर्ट (अगस्त 2025 निर्देश) अदालत ने कहा कि जो काम ‘बारहमासी’ या स्थायी हैं (जैसे क्लर्क, ड्राइवर, डाटा एंट्री ऑपरेटर, सफाई कर्मी), उन्हें सालों-साल आउटसोर्सिंग पर नहीं रखा जा सकता। सरकार को इन पदों पर नियमित बहाली की दिशा में कदम उठाना होगा।

3. अनुभव को मान्यता और बोनस अंक

केस: पटना हाईकोर्ट (CWJC 1981/2025) बिहार के संदर्भ में यह सबसे बड़ा आदेश है। अब सरकारी बहाली में:

अनुभवी कर्मियों को उम्र सीमा (Age Relaxation) में विशेष छूट मिलेगी।

संविदा/आउटसोर्स कर्मियों को अनुभव का वेटेज (Bonus Marks) मिलेगा।

प्रति वर्ष अनुभव के लिए 5 अंक (अधिकतम 25 अंक) का लाभ दिया जाएगा।

4. नियमितीकरण (Regularisation) का नया आधार

केस: पटना हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट (2025 विश्लेषण) कोर्ट ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी थी और वह 10 वर्षों से अधिक सेवा दे चुका है, तो केवल ‘आउटसोर्स’ लेबल लगाकर उसे नियमितीकरण के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

  • वेतन: पद के न्यूनतम पे-स्केल की गारंटी।
  • अनुभव: नियमित बहाली में प्राथमिकता और बोनस अंक।
  • सुरक्षा: बिना ठोस कारण और नोटिस के काम से हटाने पर रोक।

बिहार में आउटसोर्सिंग व्यवस्था अक्सर भ्रष्टाचार और शोषण का अड्डा बनी रही है। लेकिन न्यायपालिका के इन कड़े फैसलों ने बेलट्रॉन (BELTRON) से लेकर स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य विभागो में कार्यरत लाखों युवाओं को एक नई ताकत दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बिहार सरकार इन फैसलों को जमीन पर कितनी तेजी से उतारती है।- कार्तिक कुमार

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मधुबनी: दोस्तों की जांबाजी! CCTV की मदद से खुद खोज निकाली चोरी हुई बाइक, चोर को पकड़कर किया पुलिस के हवाले

मधुबनी, बिहार: आज के दौर में जहाँ लोग अक्सर सामान चोरी होने के बाद उम्मीद छोड़ देते हैं, वहीं मधुबनी के कुछ युवाओं ने अपनी सूझबूझ और एकता से एक मिसाल पेश की है। 12 दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद, पीड़ित और उसके दोस्तों ने न केवल चोरी हुई बाइक का सुराग लगाया, बल्कि चोर को रंगे हाथों पकड़कर सलाखों के पीछे पहुँचाया।

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क्या है पूरा मामला?

घटना की शुरुआत 17 दिसंबर 2025 को हुई थी। बाबुबरही थाना क्षेत्र के बेरल निवासी पप्पू कुमार सिंह अपने निजी काम से मधुबनी मुख्य डाकघर (Head Post Office) आए थे। उन्होंने अपनी सफेद रंग की अपाचे बाइक (नंबर: BR 32 AF 8473) बैंक के बाहर खड़ी की थी। दोपहर करीब 12:45 बजे जब वे वापस लौटे, तो उनकी बाइक वहां से गायब थी।

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CCTV फुटेज बना सबसे बड़ा हथियार

बाइक चोरी होने के बाद पप्पू कुमार सिंह ने तुरंत नगर थाना, मधुबनी में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कांड संख्या 598/25 दर्ज की और एसआई (SI) राजकिशोर राम को जांच सौंपी।

इस बीच, पीड़ित ने हार नहीं मानी और घटनास्थल के आसपास के CCTV फुटेज खंगाले। फुटेज में चोर का चेहरा और चोरी करने का तरीका साफ नजर आ रहा था। पप्पू ने यह फुटेज अपने दोस्तों के साथ साझा की और खुद भी चोर की तलाश में जुट गए।

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बीच सड़क पर फिल्मी अंदाज में पकड़ा गया चोर

ठीक 12 दिन बाद, यानी 29 दिसंबर 2025 को पप्पू और उनके करीब 8 दोस्तों की मेहनत रंग लाई। मधुबनी के V-Mart और पोस्ट ऑफिस के बीच उन्होंने उसी युवक को देखा जो CCTV फुटेज में नजर आया था। दोस्तों ने बिना देर किए उसे चारों तरफ से घेर लिया और पकड़ लिया।

घटना की सूचना तुरंत नगर थाना पुलिस को दी गई। थाना प्रभारी मनोज कुमार सिंह की उपस्थिति में चोर को पुलिस के सुपुर्द किया गया।

कड़ी सजा की मांग

पप्पू कुमार सिंह ने पुलिस को एक ताजा आवेदन देकर मांग की है कि पकड़े गए आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए और उनकी बाइक जल्द से जल्द बरामद कराई जाए। इस साहसी कार्य में पप्पू के साथ चंदन कुमार, रंजीत सिंह, राधे कुमार और अन्य दोस्तों ने अहम भूमिका निभाई।

मधुबनी पुलिस की बड़ी कार्रवाई: पीतल के बर्तनों के शौकीन चोर गिरोह का पर्दाफाश, 7 शातिर दबोचे गए; भारी मात्रा में सामान बरामद

मधुबनी: जिले की पुलिस को अपराध नियंत्रण की दिशा में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने अंधराठाढ़ी और बाबूबरही थाना क्षेत्रों में सक्रिय एक शातिर चोर गिरोह (Madhubani thief gang arrested) का भंडाफोड़ करते हुए कुल 7 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह के पास से पुलिस ने न केवल चोरी के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बल्कि भारी मात्रा में पीतल के कीमती बर्तन भी बरामद किए हैं।

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गृहभेदन की घटनाओं से दहशत में थे ग्रामीण:

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मधुबनी के झंझारपुर अनुमंडल अंतर्गत अंधराठाढ़ी थाना क्षेत्र में पिछले कुछ महीनों से लगातार चोरी और गृहभेदन (घर में घुसकर चोरी) की घटनाएं हो रही थीं। विशेष रूप से 14 दिसंबर और 17 दिसंबर 2025 को बाबूबरही थाना क्षेत्र के ग्राम-बेला और ग्राम-पिपरा रामपुर टोल में हुई बड़ी चोरियों ने पुलिस की चुनौती बढ़ा दी थी। इन घटनाओं में चोरों ने घर का ताला तोड़कर लाखों के जेवरात और नकदी पर हाथ साफ किया था।

विशेष टीम ने बिछाया जाल, ऐसे हत्थे चढ़े अपराधी:

बढ़ती वारदातों को देखते हुए पुलिस अधीक्षक, मधुबनी के निर्देशानुसार झंझारपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। गुप्त सूचना और तकनीकी अनुसंधान के आधार पर टीम ने अंधराठाढ़ी थाना क्षेत्र के अलग-अलग स्थानों से 7 अभियुक्तों को चोरी के सामान के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान सभी ने स्वीकार किया कि वे एक संगठित गिरोह के रूप में अंधराठाढ़ी और बाबूबरही क्षेत्र में चोरी की घटनाओं को अंजाम देते थे।

बरामद सामान की सूची (मुख्य अंश):

पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर निम्नलिखित सामान बरामद किया है:

  • इलेक्ट्रॉनिक सामान: 1 बैटरी (टेम्पो की), 4 माइक, 1 यूनिट स्पीकर, 3 माइक वायर, 3 बाजा बजाने वाली मशीन और 1 पानी का मोटर।
  • पीतल के बर्तन (करीब 50 पीस): 12 पीतल के लोटा, 10 थाली, 6 कटोरा, 5 तशला, 5 कठौत, 3 गिलास, 3 कराही, 2 करछुल और 2 छोलनी।
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गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण:

  1. अनुज कुमार झा (पिता- शैलेंद्र झा, गनौली, अंधराठाढ़ी)
  2. शिवम कुमार (पिता- शुभनारायण मिश्र, नवनगर, बाबूबरही)
  3.  शिवशंकर यादव (पिता- कपिलदेव यादव, बाड़ाघात, खुटौना)
  4.  दिपक साह (पिता- विनोद साह, बाबूबरही)
  5.  मुकेश कुमार (पिता- विनोद साह, बाबूबरही)
  6.  अखलाकुर रहमान (पिता- जियाउर रहमान, अंधरा, अंधराठाढ़ी)
  7.  गोपाल कुमार गोसाई (पिता- स्व० बहादुर गोसाई, बाबूबरही)
पुलिस की आगे की कार्रवाई:

मधुबनी पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्तों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जा रहा है। विशेष टीम अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों और इनके द्वारा बेचे गए अन्य चोरी के सामानों की बरामदगी के लिए पूछताछ कर रही है। पुलिस का दावा है कि इस गिरफ्तारी से क्षेत्र में चोरी की घटनाओं पर लगाम लगेगी

मधुबनी: झंझारपुर के बेहट गांव में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, देसी पिस्टल और कारतूस के साथ आरोपी गिरफ्तार

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मधुबनी के झंझारपुर में आर.एस. शिविर थाना पुलिस ने बेहट गांव से सुनील मुखिया को अवैध देसी पिस्टल और जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया। पुलिस की इस कार्रवाई से इलाके में हड़कंप।

मधुबनी (बिहार): जिले की झंझारपुर पुलिस को अपराध नियंत्रण की दिशा में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। मधुबनी पुलिस अधीक्षक के निर्देशानुसार चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत, आर.एस. शिविर थाना की पुलिस टीम ने बेहट गांव में छापेमारी कर एक आरोपी को अवैध हथियार और जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया है।

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिनांक 25 दिसंबर 2025 को कांड संख्या 120/25 के अनुसंधान के दौरान पुलिस टीम बेहट गांव पहुंची थी। वहां एक महिला ने पुलिस को सूचना दी कि सुनील मुखिया नाम के व्यक्ति ने पूर्व में फायरिंग की थी जिसमें वह घायल हो गई थी। महिला ने यह भी बताया कि घर में हुई एक संदिग्ध मौत के बाद से आरोपी और भी हिंसक हो गया है, जिससे ग्रामीणों में डर का माहौल था।

सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सुनील मुखिया के घर पर छापेमारी की। शुरुआत में पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की गई, लेकिन कड़ाई से पूछताछ करने पर आरोपी ने हथियार छिपाने की बात स्वीकार कर ली।

बरामदगी और गिरफ्तारी

पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर घर की तलाशी ली, जहां से निम्नलिखित अवैध सामान बरामद किया गया:

  • देसी पिस्टल: 01
  • जिंदा कारतूस: 02 (मैगजीन के अंदर)

गिरफ्तार आरोपी की पहचान सुनील मुखिया (पिता- रामप्रसाद मुखिया), साकिन- बेहट, थाना- आर.एस. शिविर, जिला- मधुबनी के रूप में हुई है।

कानूनी कार्रवाई

पुलिस ने मौके पर गवाहों की उपस्थिति में हथियार को जब्त कर लिया है। आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट (Arms Act) की सुसंगत धाराओं (25(1-बी)ए/26/35/27) के तहत मामला दर्ज कर उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। थाना प्रभारी ने बताया कि मामले में विधि-सम्मत अग्रिम कार्रवाई की जा रही है।

विशेष रिपोर्ट: खुटौना में PHED और बिजली विभाग की ‘जुगलबंदी’ से सरकार को करोड़ों का चूना..?

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टोका फंसाकर चल रहा नल-जल: खुटौना में PHED विभाग की सरेआम डकैती, क्या सो रहा है प्रशासन?

खुटौना, मधुबनी। बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं भ्रष्टाचार और विभागीय सांठगांठ की भेंट कैसे चढ़ती हैं, इसका ज्वलंत उदाहरण मधुबनी जिले के खुटौना प्रखंड में देखने को मिल रहा है। ताज़ा मामला PHED विभाग (झंझारपुर प्रमंडल) द्वारा पंचायतों में नल-जल योजना के संचालन के लिए खुलेआम की जा रही बिजली चोरी का है।

क्या है पूरा मामला?

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सुबोध कुमार के दावों ने विभाग में खलबली मचा दी है। प्रखंड के चतुर्भुज पिपराही गाँव सहित कई पंचायतों में PHED विभाग द्वारा बिना किसी वैध बिजली कनेक्शन के “टोका” फंसाकर मोटरों का संचालन किया जा रहा है।

वीडियो में PHED के कामगारों को यह स्वीकार करते सुना जा सकता है कि वे कनीय अभियंता (JE), PHED खुटौना के निर्देश पर अवैध तरीके से बिजली का उपयोग कर रहे हैं। हैरत की बात यह है कि इसी वीडियो में बिजली विभाग के JE भी PHED के मुंशी को बिजली चोरी की बात कहते सुने जा रहे हैं, लेकिन कोई कानूनी कार्रवाई करने के बजाय मामला आपसी “समझौते” जैसा प्रतीत होता है।

राजस्व क्षति का बड़ा खेल

जानकारों का मानना है कि यह केवल एक प्रखंड का मामला नहीं बल्कि पूरे प्रमंडल में फैला एक बड़ा सिंडिकेट हो सकता है।

  • करोड़ों की चपत: नल-जल योजनाओं के लिए आवंटित बिजली बजट का पैसा आखिर किसकी जेब में जा रहा है?
  • सड़कों की बर्बादी: कामगारों का कहना है कि वे बिजली चोरी के साथ-साथ सड़क तोड़ने का काम भी विभागीय निर्देश पर कर रहे हैं।
  • विभागीय मिलीभगत: बिजली विभाग के अधिकारी चोरी पकड़ने के बावजूद प्राथमिकी (FIR) दर्ज क्यों नहीं कर रहे? क्या यह करोड़ों के राजस्व की बंदरबांट का हिस्सा है?

जनता की गाढ़ी कमाई पर डाका

एक तरफ बिजली विभाग आम जनता पर बकाया होने पर तुरंत कनेक्शन काट देता है और “टोका” फंसाने पर भारी जुर्माना लगाता है। वहीं दूसरी ओर, एक सरकारी विभाग (PHED) द्वारा खुलेआम बिजली चोरी करना सुशासन के दावों पर सवालिया निशान खड़ा करता है।

यह गंभीर जांच का विषय है। अगर सरकारी विभाग ही बिजली चोरी करेंगे, तो आम जनता से ईमानदारी की उम्मीद कैसे की जा सकती है? हम इस मामले को जिलाधिकारी और सतर्कता विभाग तक ले जाएंगे। — सुबोध कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता

निष्कर्ष और मांग: यह मामला जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। क्या जिलाधिकारी मधुबनी और PHED के उच्च अधिकारी इस ‘करोड़ों के खेल‘ पर संज्ञान लेंगे? जनता की मांग है कि:

  • खुटौना की सभी पंचायतों में PHED कनेक्शनों की उच्च स्तरीय जांच हो।
  • दोषी अधिकारियों और बिचौलियों पर अविलंब प्राथमिकी दर्ज की जाए।
  • राजस्व की हुई क्षति का आकलन कर संबंधित अधिकारियों के वेतन से इसकी वसूली हो।