बिहार पंचायत चुनाव: जिला परिषद क्षेत्र संख्या 43 से सरोज यादव ने ठोकी ताल, युवाओं से की खास अपील

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बिहार विधानसभा चुनाव के बाद अब सबकी नजरें ग्रामीण राजनीति और पंचायत चुनावों पर टिकी हैं। इसी चुनावी गहमागहमी के बीच लौकही प्रखंड के जिला परिषद क्षेत्र संख्या 43 से एक उभरता हुआ चेहरा सामने आया है। सामाजिक कार्यकर्ता सरोज यादव ने भूमि न्यूज़ लाइव (BHOOMI NEWS Live) के साथ एक विशेष साक्षात्कार में आधिकारिक तौर पर अपनी उम्मीदवारी की घोषणा कर दी है।

“पद नहीं, सेवा का संकल्प”: सरोज यादव

​आमतौर पर प्रत्याशी चुनाव के कुछ महीने पहले सक्रिय होते हैं, लेकिन सरोज यादव का दावा है कि वह पिछले 7-8 वर्षों से लगातार क्षेत्र की जनता के बीच रहकर उनकी सेवा कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनावी मैदान में उतरने का उनका उद्देश्य सत्ता सुख नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं को मजबूती से अधिकारियों के सामने रखना है।

​”जब तक आप किसी पद पर नहीं होते, ब्लॉक, अनुमंडल या जिला स्तर पर आपकी आवाज अनसुनी कर दी जाती है। जनता की बेहतर सेवा के लिए प्रतिनिधि बनना जरूरी है।” — सरोज यादव

जमीनी मुद्दों पर रहेगा फोकस

​एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले सरोज यादव ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी राजनीति “हवाई फायरिंग” (झूठे वादों) पर नहीं, बल्कि “जमीनी हकीकत” पर आधारित होगी। उनकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं:

  • किसानों की समस्याएं: खेती-किसानी से जुड़ी दिक्कतों का स्थानीय स्तर पर समाधान।
  • क्षेत्र का विकास: अपने क्षेत्र की 6 पंचायतों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना।
  • जवाबदेही: उन जनप्रतिनिधियों पर कटाक्ष करते हुए जो जीतने के बाद गायब हो जाते हैं, यादव ने हमेशा उपलब्ध रहने का वादा किया।

सोशल मीडिया नहीं, जमीन के ‘खिलाड़ी’

​इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि कई युवा सोशल मीडिया पर तो चुनाव लड़ने का दावा करते हैं लेकिन ऐन वक्त पर पीछे हट जाते हैं, तो यादव ने आत्मविश्वास के साथ कहा:

“मैं पिछले 8 सालों से तैयारी कर रहा हूँ। चुनाव तो अब आया है, लेकिन सेवा मैं तब से कर रहा हूँ जब मेरे पास कोई पद नहीं था। मैं नर्वस नहीं हूँ, क्योंकि मेरी ताकत मेरे क्षेत्र की जनता का आशीर्वाद है।”

युवाओं और मतदाताओं को संदेश

​साक्षात्कार के अंत में, सरोज यादव ने क्षेत्र संख्या 43 के युवाओं और समस्त जनता से अपील की कि वे इस बार ईमानदारी और काम के आधार पर अपना प्रतिनिधि चुनें। उन्होंने वादा किया कि अगर जनता उन्हें मौका देती है, तो वह वर्तमान प्रतिनिधियों से दोगुना काम करके दिखाएंगे।

​सरोज यादव की इस घोषणा ने लौकही प्रखंड की स्थानीय राजनीति में हलचल तेज कर दी है। अब देखना यह होगा कि क्षेत्र की जनता इस युवा और ऊर्जावान चेहरे पर कितना भरोसा जताती है।

बिहार पंचायत चुनाव और स्थानीय खबरों की विस्तृत कवरेज के लिए ‘भूमि लाइव’ के साथ जुड़े रहें।

बिहार राज्यसभा चुनाव 2026: NDA का क्लीन स्वीप, पांचों सीटों पर कब्ज़ा, विपक्ष के हाथ खाली

NDA Ka Clean Sweep or The NDA Wins it Cleanly,

Patna News: बिहार की राजनीति में आज का दिन ऐतिहासिक रहा। राज्यसभा की 5 सीटों के लिए हुए चुनाव में NDA (National Democratic Alliance) ने अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए सभी 5 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की है। विपक्षी गठबंधन महागठबंधन को इस चुनाव में करारी शिकस्त मिली है, जहाँ राजद (RJD) अपनी एक सीट भी बचाने में नाकाम रही।

विजेता उम्मीदवारों की लिस्ट (NDA Winners List)

इस चुनाव में NDA की ओर से उतारे गए सभी पांचों उम्मीदवारों ने जीत का परचम लहराया:

  1. नीतीश कुमार (जनता दल यूनाइटेड – JDU)
  2. नितिन नवीन (भारतीय जनता पार्टी – BJP)
  3. रामनाथ ठाकुर (जनता दल यूनाइटेड – JDU)
  4. शिवेश कुमार (भारतीय जनता पार्टी – BJP)
  5. उपेंद्र कुशवाहा (राष्ट्रीय लोक मोर्चा – RLM)

कैसा रहा जीत का समीकरण?

बिहार विधानसभा के मौजूदा संख्या बल (NDA के पास 202 विधायक) को देखते हुए यह जीत पहले से ही तय मानी जा रही थी। हालांकि, 5वीं सीट के लिए राजद के अमरेंद्र धारी सिंह ने मुकाबले को रोचक बनाने की कोशिश की थी, लेकिन एनडीए की एकजुटता के सामने विपक्ष पस्त हो गया।

  • वोटों का गणित: एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 41 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत थी।
  • महागठबंधन में सेंध: खबरों के मुताबिक, वोटिंग के दौरान विपक्ष के कुछ विधायकों की अनुपस्थिति और क्रॉस वोटिंग की चर्चाओं ने राजद की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
  • नीतीश कुमार की नई पारी: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना इस चुनाव का सबसे बड़ा ‘टर्निंग पॉइंट’ रहा, जो बिहार की भविष्य की राजनीति की ओर इशारा कर रहा है।

विपक्ष (RJD) को लगा बड़ा झटका

राजद के लिए यह परिणाम किसी झटके से कम नहीं है। प्रेमचंद गुप्ता और अमरेंद्र धारी सिंह जैसे दिग्गज नेताओं का कार्यकाल समाप्त होने के बाद पार्टी राज्यसभा में अपना प्रतिनिधित्व बढ़ाने की उम्मीद कर रही थी, लेकिन एनडीए के अभेद्य किले को नहीं तोड़ सकी।

इस जीत के साथ ही राज्यसभा में एनडीए की ताकत और बढ़ गई है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मिली प्रचंड जीत के बाद, राज्यसभा की इन 5 सीटों पर कब्ज़ा करना नीतीश-मोदी की जोड़ी के लिए एक बड़ी नैतिक और राजनीतिक जीत है।

बिहार प्रदेश जद(यू) सांगठनिक निर्वाचन 2026: नवनिर्वाचित जिलाध्यक्षों की सूची जारी

Nitish kumar

पटना: जनता दल (यूनाइटेड) में सांगठनिक मजबूती और भविष्य की रणनीतियों को देखते हुए एक बड़ा कदम उठाया गया है। बिहार प्रदेश जद(यू) सांगठनिक निर्वाचन-2026 के अंतर्गत, मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार की स्वीकृति के बाद राज्य निर्वाचन पदाधिकारी अशोक कुमार ने शेष सांगठनिक जिलाध्यक्षों की आधिकारिक सूची जारी कर दी है।

​इस सूची में पार्टी के समर्पित और अनुभवी कार्यकर्ताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं। यह नियुक्तियाँ पार्टी के निचले स्तर (Grassroot level) को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से की गई हैं।

नवनियुक्त जिलाध्यक्षों की सूची (प्रमुख जिले)

​कार्यालय आदेश संख्या 52/26 के अनुसार, निम्नलिखित प्रमुख नामों की घोषणा की गई है:

क्र०सं०जिला / नगर का नामनिर्वाचित अध्यक्ष का नाम
1मुजफ्फरपुरश्री अनुपम सिंह
2पटना नगरश्री राधेश्याम कुशवाहा
3गया (बेगूसराय)श्री नन्द लाल राय
4नालंदामो० मसरूर अहमद जुबैरी उर्फ मो० अरशद
5आरा नगरश्री जय प्रकाश चौधरी
6सीवानश्री विकास कुमार सिंह उर्फ जीसू सिंह

(पूरी सूची के लिए नीचे दिए गए आधिकारिक पत्र को देखें)

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संगठन को मिलेगी नई धार

​राज्य निर्वाचन पदाधिकारी अशोक कुमार द्वारा हस्ताक्षरित इस सूची में कुल 25 सांगठनिक क्षेत्रों के नामों की घोषणा की गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन नई नियुक्तियों से आगामी चुनावों और पार्टी के विस्तार कार्यों में नई ऊर्जा का संचार होगा।

​पार्टी नेतृत्व ने सभी नवनिर्वाचित जिलाध्यक्षों को उनके इस महत्वपूर्ण दायित्व के लिए हार्दिक बधाई और सफल कार्यकाल की शुभकामनाएँ दी हैं।

“संगठन की मजबूती ही हमारी असली ताकत है। नए पदाधिकारियों के चयन से पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है।”

क्या आप अपने जिले के नवनियुक्त अध्यक्ष के बारे में और जानकारी चाहते हैं? हमें कमेंट में बताएं!

जन सुराज ने मधुबनी जिला संगठन की घोषणा की: अनिल मिश्रा बने जिला अध्यक्ष, शमसुल हक़ को मिली महामंत्री की जिम्मेदारी

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मधुबनी, 11 मार्च 2026 – बिहार में बदलाव की राजनीति का संकल्प लेकर आगे बढ़ रही जन सुराज पार्टी ने अपने सांगठनिक ढांचे को मजबूती देते हुए मधुबनी जिला संगठन के पदाधिकारियों की सूची जारी कर दी है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस नई टीम का ऐलान किया।

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सांगठनिक मजबूती के लिए नई रणनीति

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने बताया कि जन सुराज के मूलभूत सिद्धांतों को जमीन पर उतारने के लिए पूरे राज्य को 44 सांगठनिक जिलों में बांटा गया है। इसी रणनीति के तहत मधुबनी जिले के लिए वरिष्ठ साथियों के साथ विचार-विमर्श कर एक सशक्त कमेटी का गठन किया गया है।

“यह जिला कमेटी क्षेत्रीय और राज्य नेतृत्व के बीच एक सेतु का काम करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य जिले के सभी प्रखंडों और पंचायतों में संगठन का पुनर्गठन करना और पार्टी की गतिविधियों को गति देना है।” – मनोज भारती, प्रदेश अध्यक्ष

मधुबनी जिला संगठन के मुख्य पदाधिकारी

घोषणा के अनुसार, मधुबनी जिले की कमान निम्नलिखित अनुभवी हाथों में सौंपी गई है:

  • जिला अध्यक्ष: श्री अनिल मिश्रा
  • जिला महामंत्री: श्री शमसुल हक़

यह टीम जिले के वरिष्ठ सदस्यों के साथ मिलकर पंचायत स्तर तक संगठन के विस्तार का कार्य करेगी।

कार्यक्रम में मौजूद प्रमुख नेतृत्व

संगठन की घोषणा के इस महत्वपूर्ण अवसर पर प्रदेश स्तर के कई दिग्गज नेता मौजूद रहे, जिनमें शामिल हैं:

  • सुभाष सिंह कुशवाहा (प्रदेश संगठन महामंत्री)
  • सरवर अली (प्रदेश महासचिव)
  • धरमवीर प्रसाद सिंह (कोषाध्यक्ष)
  • श्रीमती सरिता देवी (महिला अध्यक्ष)
  • दीपक कुमार भंडारी (युवा अध्यक्ष)

जन सुराज का विजन

जन सुराज पार्टी का उद्देश्य बिहार के हर जिले में एक ऐसी टीम तैयार करना है जो सीधे जनता से जुड़ी हो। मधुबनी जिला कमेटी की यह घोषणा इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सलाहकार समिति और अन्य पदाधिकारियों की विस्तृत सूची पार्टी के आधिकारिक पोर्टल पर भी उपलब्ध कराई गई है।

मधुबनी: नारी रत्न सम्मान समारोह में गूंजी महिला सशक्तिकरण की गूँज, 180 से अधिक कर्मयोगिनी महिलाएं सम्मानित

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मधुबनी (फुलपरास): अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के गौरवशाली अवसर पर आज इंजीनियर गंगा कुमार (समाजसेवी) के नेतृत्व में फुलपरास के जनता हाई स्कूल, बेल्हा (मधुबनी) में “नारी रत्न सम्मान समारोह” सह “समाज में महिलाओं की भूमिका” विषयक संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी अमूल्य सेवा देने वाली 180 से अधिक महिलाओं को सम्मानित कर उनके योगदान को सराहा गया।

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प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति

​कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व विधान परिषद सदस्य सुमन महासेठ एवं विशिष्ट अतिथियों में पूर्व विधायक (लौकहा) भारत भूषण मंडल, पूर्व जिला परिषद सदस्य दौरिक पूर्वे उपस्थित रहे। मंच की शोभा बढ़ाने के लिए राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र की कई दिग्गज महिलाएं भी शामिल हुईं, जिनमें:

  • रंजीता प्रभा (प्रमुख, बाबूबरही)
  • कुमारी आशा (प्रमुख, खजौली)
  • कल्पना सिंह (नेत्री, राजद)
  • काजोल पूर्वे (पूर्व मेयर प्रत्याशी, मधुबनी)
  • कामिनी जी (समाजसेवी, जयनगर)
  • कामिनी सिंह (MBK, जीविका)
  • जया प्रिया (शिक्षिका)

समाज की नींव हैं ये महिलाएं

​आयोजक इंजीनियर गंगा कुमार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि समाज के निर्माण में महिलाओं का योगदान अतुलनीय है। इस समारोह का मुख्य उद्देश्य उन महिलाओं को सम्मान देना है जो जमीन पर रहकर समाज को सशक्त बना रही हैं।

​समारोह में 180 से अधिक महिलाओं को सम्मानित किया गया, जिनमें मुख्य रूप से:

  • आशा कार्यकर्ता
  • जीविका दीदियाँ
  • आंगनवाड़ी सेविकाएं
  • शिक्षिकाएं और ANM

संगोष्ठी: समाज में महिला की भूमिका

​सम्मान समारोह के साथ-साथ आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने वर्तमान परिवेश में महिलाओं की बदलती भूमिका पर प्रकाश डाला। अतिथियों ने कहा कि आज की नारी सिर्फ घर तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और राजनीति जैसे हर क्षेत्र में नेतृत्व कर रही है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में ‘जीविका दीदियों’ और स्वास्थ्य सेवाओं में ‘आशा एवं ANM’ के योगदान को ‘समाज की रीढ़’ बताया गया।

यह कार्यक्रम न केवल सम्मान देने का एक जरिया था, बल्कि समाज को यह संदेश देने का प्रयास भी था कि जब हम अपनी नारी शक्ति का सम्मान करते हैं, तभी एक उन्नत राष्ट्र का निर्माण संभव है।

रिपोर्ट: हरे कृष्णा यादव (BHOOMI NEWS LIVE)

बिहार की राजनीति में बड़ा धमाका: JDU भी चल पड़ी राजद की राह पर..? निशांत कुमार की एंट्री के मायने

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बिहार की राजनीति में ‘परिवारवाद’ (Dynasty Politics) हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सार्वजनिक मंचों से अक्सर लालू यादव और कांग्रेस पर परिवार को आगे बढ़ाने का आरोप लगाते रहे हैं। लेकिन अब, निशांत कुमार (Nishant Kumar) के जनता दल यूनाइटेड (JDU) में सक्रिय होने की खबरों ने एक नई बहस छेड़ दी है।

​क्या जेडीयू भी अब उसी ‘परिवारवाद’ के अध्याय को लिखने जा रही है जिससे वह अब तक दूर होने का दावा करती थी?

​1. निशांत कुमार और जेडीयू: एक नया मोड़

​काफी समय से लो-प्रोफाइल रहने वाले नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार अब पार्टी के कार्यक्रमों और फीडबैक सिस्टम में सक्रिय दिख रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उन्हें जल्द ही पार्टी में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

  • बदलाव का संकेत: कार्यकर्ताओं की बढ़ती मांग और पार्टी के भीतर उत्तराधिकारी की तलाश निशांत को केंद्र में ला रही है।
  • युवा चेहरा: जेडीयू इसे एक युवा नेतृत्व के तौर पर पेश करने की कोशिश कर सकती है।

2. ‘परिवारवाद’ पर नीतीश कुमार का स्टैंड और वर्तमान स्थिति

​नीतीश कुमार ने हमेशा यह गर्व से कहा है कि उनके परिवार का कोई भी सदस्य राजनीति में नहीं है। उन्होंने कर्पूरी ठाकुर के सिद्धांतों का हवाला देते हुए खुद को वंशवाद की राजनीति से अलग रखा।

​”जेडीयू अभी तक बिहार की इकलौती बड़ी पार्टी मानी जाती थी जो परिवारवाद के साये से मुक्त थी। लेकिन निशांत कुमार के आने के बाद, विरोधियों को अब नीतीश कुमार पर हमला करने का एक बड़ा हथियार मिल गया है।”

​3. क्या JDU अब RJD की राह पर है?

​बिहार में राजद (RJD) पर हमेशा यह आरोप लगता है कि वह एक परिवार की पार्टी है। तेजस्वी यादव, तेज प्रताप और मीसा भारती का राजनीति में दबदबा इसका उदाहरण है।

​अब यदि निशांत कुमार जेडीयू की कमान संभालते हैं या अहम पद पर आते हैं, तो जेडीयू और राजद के बीच का वह ‘नैतिक अंतर’ (Moral Difference) खत्म हो जाएगा जो नीतीश कुमार की यूएसपी (USP) रही है।

तुलनात्मक नजरिया:

विशेषताआरजेडी (RJD)जेडीयू (JDU) – नया ट्रेंड
मुख्य नेतृत्वलालू यादव परिवारअब निशांत कुमार की चर्चा
दावासामाजिक न्यायसुशासन और परिवारवाद का विरोध
उत्तराधिकारीतेजस्वी यादवनिशांत कुमार (संभावित)

4. सोशल मीडिया और जनता की राय

​इंटरनेट पर इस खबर के आते ही लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ इसे पार्टी की मजबूती के लिए जरूरी बता रहे हैं, तो कुछ इसे नीतीश कुमार के सिद्धांतों के साथ ‘समझौता’ कह रहे हैं।

निशांत कुमार का राजनीति में आना जेडीयू के लिए अस्तित्व बचाने की मजबूरी है या नीतीश कुमार का हृदय परिवर्तन, यह तो वक्त बताएगा। लेकिन एक बात साफ है—बिहार की राजनीति में अब ‘परिवारवाद’ का मुद्दा एक नया मोड़ ले चुका है।

बिहार की सियासत में बड़ा बदलाव: नीतीश के बेटे निशांत कुमार की पॉलिटिक्स में एंट्री, कल संभालेंगे JDU की कमान!

Nitish kumar with nishant

बिहार की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत कुमार अब औपचारिक रूप से सक्रिय राजनीति में कदम रख रहे हैं। शनिवार, 7 मार्च को निशांत कुमार जनता दल यूनाइटेड (JDU) की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण करेंगे।

​यह फैसला मुख्यमंत्री आवास पर हुई जेडीयू विधानमंडल दल की एक हाई-प्रोफाइल बैठक में लिया गया, जिसने बिहार के सियासी भविष्य की नई पटकथा लिख दी है।

​सदस्यता लेते ही शुरू होगी ‘बिहार यात्रा’

​निशांत कुमार केवल पार्टी में शामिल ही नहीं हो रहे हैं, बल्कि वे तुरंत एक्शन मोड में नजर आएंगे। जेडीयू जॉइन करने के साथ ही वे बिहारव्यापी बिहार यात्रा पर निकलेंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य राज्य के युवाओं से जुड़ना और पार्टी के आधार को और मजबूत करना माना जा रहा है।

​बैठक में भावुक हुए नेता: नीतीश जाएंगे राज्यसभा

​जेडीयू विधानमंडल दल की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए और कुछ भावुक पल भी देखने को मिले:

  • विधायकों की मांग: पार्टी के विधायकों ने स्वयं नीतीश कुमार से निशांत को राजनीति में लाने का आग्रह किया था।
  • आधिकारिक घोषणा: कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने इस मांग पर मुहर लगाते हुए कल निशांत के पार्टी में शामिल होने का ऐलान किया।
  • नीतीश का दिल्ली सफर: नीतीश कुमार ने हाल ही में राज्यसभा के लिए नामांकन किया है। उनके दिल्ली जाने की खबर से बैठक में मौजूद कई मंत्री और विधायक भावुक हो उठे।
  • नीतीश का भरोसा: सीएम ने कार्यकर्ताओं को आश्वस्त किया कि, “मैं दिल्ली जरूर जा रहा हूँ, लेकिन मेरा दिल बिहार में ही रहेगा। मैं हर कदम पर पार्टी और कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा रहूँगा।”

​कौन होगा बिहार का अगला मुख्यमंत्री?

​नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार में नई सरकार का गठन होगा। प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री को लेकर सस्पेंस बरकरार है, लेकिन ललन सिंह ने साफ़ कर दिया है कि:

​”अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका अंतिम फैसला खुद नीतीश कुमार ही करेंगे।”

मुख्य बिंदु: एक नजर में

घटनाविवरण
नामनिशांत कुमार (नीतीश कुमार के पुत्र)
दिनांक7 मार्च (जेडीयू सदस्यता ग्रहण)
पहला बड़ा कदमबिहारव्यापी बिहार यात्रा
नीतीश कुमार की नई भूमिकाराज्यसभा सदस्य (प्रस्तावित)
चर्चा का विषयबिहार का अगला मुख्यमंत्री

बिहार की राजनीति में ‘निशांत युग’ की शुरुआत और नीतीश कुमार का केंद्र की राजनीति में जाना, आने वाले चुनावों के लिए बड़े संकेत दे रहा है। क्या निशांत कुमार अपने पिता की विरासत को उसी मजबूती से संभाल पाएंगे? यह देखना दिलचस्प होगा।

पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव: छात्र राजद के उपाध्यक्ष उम्मीदवार सुमन शेखर का बड़ा विजन, बुनियादी सुविधाओं और प्लेसमेंट पर जोर

इस तस्वीर में सुमन शेखर विश्वविद्यालय की समस्याओं और अपने विज़न पर चर्चा कर रहे हैं।

पटना विश्वविद्यालय, जिसे कभी ‘पूर्व में ऑक्सफोर्ड’ कहा जाता था, इन दिनों छात्र संघ चुनाव की सरगर्मियों से सराबोर है। छात्र राजनीति के इस गढ़ में हर उम्मीदवार अपनी धाक जमाने की कोशिश कर रहा है। इसी कड़ी में छात्र राजद (CRJD) के उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार सुमन शेखर ने ‘भूमि न्यूज़’ के साथ विशेष बातचीत में विश्वविद्यालय की बुनियादी समस्याओं और अपने भविष्य के लक्ष्यों पर चर्चा की।

बुनियादी सुविधाओं और प्लेसमेंट सेल पर ज़ोर

सुमन शेखर ने साक्षात्कार के दौरान इस बात पर बल दिया कि उनका मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय में बुनियादी सुविधाओं (Basic Facilities) में सुधार करना है। उन्होंने अपने घोषणापत्र की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी ‘प्लेसमेंट सेल’ की स्थापना को बताया।

शेखर ने कहा, “पटना विश्वविद्यालय का इतिहास बहुत गौरवशाली रहा है। यहाँ के पूर्व छात्र (Alumni) देश-दुनिया के ऊँचे पदों पर आसीन हैं। यदि हम अपने पूर्व छात्रों के नेटवर्क का सही उपयोग करें, तो विश्वविद्यालय में एक बेहतरीन प्लेसमेंट सेल का निर्माण संभव है, जो छात्रों के भविष्य के लिए क्रांतिकारी साबित होगा।”

महिला कॉलेजों में स्वास्थ्य और स्वच्छता का मुद्दा

सुमन ने छात्राओं की समस्याओं, विशेषकर स्वास्थ्य और स्वच्छता (Hygiene) पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने मगध महिला कॉलेज का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां हॉस्टल में रहने वाली बड़ी संख्या में छात्राओं के बावजूद एक मेडिकल शॉप की अनुपस्थिति चिंताजनक है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि छात्राओं की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को प्राथमिकता दी जाए।

विश्वविद्यालय की चुनौतियों पर बेबाक राय

साक्षात्कार में उन्होंने विश्वविद्यालय के पिछड़ते सत्रों (Late Sessions) और शिक्षकों की कमी पर भी चिंता व्यक्त की। सुमन शेखर ने सुझाव दिया कि:

  • वरिष्ठ प्रोफेसरों को प्रशासनिक कार्यों के बजाय क्लास वर्क और रिसर्च में अधिक शामिल किया जाना चाहिए।
  • नए प्रोफेसरों को प्रशासनिक जिम्मेदारी दी जानी चाहिए ताकि वे काम को गति दे सकें।
  • विश्वविद्यालय को भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी बनाने की आवश्यकता है।

छात्र संघ चुनाव सिर्फ राजनीति नहीं, व्यक्तित्व विकास का माध्यम है

छात्र राजनीति को अक्सर मुख्यधारा की राजनीति की पहली सीढ़ी माना जाता है, लेकिन सुमन शेखर का नज़रिया कुछ अलग है। उनका मानना है कि छात्र संघ चुनाव लड़ने से छात्रों में तनाव प्रबंधन (Stress Management) और निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है। यह ज़रूरी नहीं कि हर छात्र नेता भविष्य में राजनेता ही बने; वे अच्छे ब्यूरोक्रेट्स, लेखक या समाज के ज़िम्मेदार नागरिक भी बन सकते हैं।

छात्रों से अपील

अंत में, सुमन शेखर ने पटना विश्वविद्यालय के सभी छात्र-छात्राओं से अपील की कि वे अपने मत का प्रयोग अवश्य करें। उन्होंने आग्रह किया कि छात्र जाति, धर्म और किसी के प्रभाव में आए बिना उम्मीदवार के विजन (Vision) और ब्लूप्रिंट को देखकर अपना नेता चुनें।

सुमन शेखर का आत्मविश्वास और विश्वविद्यालय की समस्याओं के प्रति उनकी गहरी समझ यह दर्शाती है कि इस बार का चुनाव केवल नारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ठोस बदलाव की उम्मीद भी लेकर आया है। अब देखना यह होगा कि विश्वविद्यालय के छात्र उनके विज़न पर कितना भरोसा जताते हैं।

क्या आप पटना विश्वविद्यालय के छात्र हैं? सुमन शेखर के इन वादों पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट में ज़रूर बताएं!

मधुबनी जिला परिषद विवाद: डाक बंगला की जगह सभा भवन निर्माण पर रोक की मांग

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मधुबनी: जिले की राजनीति में इन दिनों विकास कार्यों और सरकारी धन के उपयोग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जिला परिषद सदस्य ललिता देवी ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए ‘डाक बंगला’ की जगह ‘नूतन सभा भवन’ (नया मीटिंग हॉल) के निर्माण को जनता के पैसों की बर्बादी बताया है।

ललिता देवी ने इस संबंध में उप विकास आयुक्त (DDC) सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी को पत्र लिखकर इस निर्माण पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है।

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क्या है पूरा मामला?

जिला परिषद सदस्य का कहना है कि मधुबनी जिला परिषद परिसर में पहले से मौजूद डाक बंगला को तोड़कर वहां एक नया सभा भवन बनाने की योजना बनाई गई है। उनका आरोप है कि यह निर्माण अनावश्यक है और यह आम जनता के टैक्स से आए पैसों का दुरुपयोग करने की एक ‘साजिश’ है।

विरोध के मुख्य कारण

पत्र में ललिता देवी ने इस निर्माण को गलत ठहराने के लिए कई महत्वपूर्ण तर्क दिए हैं:

  • पहले से उपलब्ध हैं सभा भवन: जिला परिषद परिसर में ‘विकास भवन’ और ‘जिला परिषद भवन’ दोनों में पहले से ही सुसज्जित सभा भवन मौजूद हैं।
  • अधूरे प्रोजेक्ट्स की अनदेखी: परिसर में ही एक पांच मंजिला मल्टीपर्पस भवन पिछले 8 वर्षों से अधूरा पड़ा है। उस पर ध्यान देने के बजाय नए प्रोजेक्ट पर पैसा खर्च किया जा रहा है।
  • नए भवनों की मंजूरी: परिसर में पहले से ही एक D.P.R.C. भवन के निर्माण की मंजूरी मिल चुकी है। ऐसे में एक और सभा भवन की कोई आवश्यकता नहीं है।

‘शीत भंडारण गृह’ (Cold Storage) बनाने का सुझाव

ललिता देवी ने प्रशासन को एक वैकल्पिक और जनहितकारी सुझाव भी दिया है। उन्होंने मांग की है कि सभा भवन पर पैसे बर्बाद करने के बजाय:

लदनियां प्रखण्ड के बौरहा गाँव में स्थित जिला परिषद की भूमि पर एक शीत भंडारण गृह (Cold Storage) का निर्माण कराया जाए। इससे क्षेत्र के किसानों को सीधा लाभ होगा और उनकी फसलें बर्बाद होने से बचेंगी।

जिला परिषद सदस्य ने प्रशासन से अपील की है कि व्यापक लोकहित को देखते हुए अनावश्यक सभा भवन के निर्माण की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए और जनता के पैसे को वहां खर्च किया जाए जहां उसकी असल जरूरत है।

अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस पत्र पर क्या संज्ञान लेता है और क्या इस निर्माण कार्य को रोककर जनहित के अन्य कार्यों को प्राथमिकता दी जाती है।

प्रशांत किशोर का बड़ा बयान: सही तरीके से चुनाव लड़ना कठिन, पर बिहार की सूरत बदलने के लिए हम 10 साल संघर्ष को तैयार

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झंझारपुर, 21 फ़रवरी 2026: जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर (PK) अपनी ‘बिहार नवनिर्माण यात्रा’ के क्रम में आज झंझारपुर पहुंचे। यहाँ मीडिया से बात करते हुए उन्होंने संगठन की भविष्य की रणनीति और हालिया चुनावी अनुभवों पर बेबाकी से अपनी राय रखी।

संगठन का पुनर्गठन: पंचायत स्तर तक पहुँचेगी जन सुराज

प्रशांत किशोर ने बताया कि जन सुराज इस समय अपने संगठन को पुनर्गठित करने के मिशन पर है। यह केवल ऊपरी ढांचे में बदलाव नहीं है, बल्कि उन पुराने साथियों को फिर से एकजुट करने की मुहिम है जो विचारधारा की नींव से जुड़े रहे हैं।

  • उद्देश्य: प्रत्येक प्रखंड और पंचायत स्तर तक पार्टी के सिद्धांतों को पहुँचाना।
  • रणनीति: पदाधिकारियों के चयन के साथ-साथ जमीनी कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाना।
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चुनाव परिणामों पर PK की खरी-खरी

हालिया चुनाव परिणामों के सवाल पर प्रशांत किशोर ने एक गंभीर और ईमानदार विश्लेषण पेश किया। उन्होंने स्वीकार किया कि बिहार में बिना जाति, धर्म या गठबंधन के सहारे चुनाव लड़ना एक चुनौतीपूर्ण मार्ग है।

सही तरीके से चुनाव लड़कर जीत हासिल करना हमेशा से कठिन रहा है। हमने न तो किसी से गठबंधन किया और न ही जाति-धर्म के समीकरण साधे। यह एक लंबी लड़ाई है, और हम इसके लिए 5 से 10 साल तक संघर्ष करने को तैयार हैं।- प्रशांत किशोर

केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, व्यवस्था परिवर्तन लक्ष्य

PK ने झंझारपुर की जनता और कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि जन सुराज का लक्ष्य केवल चुनाव जीतना या हारना नहीं है। उनकी लड़ाई बिहार के हर जिले में:

  • रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए है।
  • ​राज्य में उद्योगों की स्थापना सुनिश्चित करने के लिए है।
  • ​बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जन सुराज केवल उन लोगों का समूह नहीं है जो वर्तमान सरकार से असंतुष्ट हैं, बल्कि यह उन लोगों का मंच है जो बिहार में वास्तविक बदलाव देखना चाहते हैं।

स्थानीय कार्यकर्ताओं में उत्साह

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्थानीय पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं की भारी मौजूदगी रही। सभी ने संगठन की आगामी कार्ययोजना पर चर्चा की और संकल्प लिया कि वे गाँव-गाँव जाकर ‘जन सुराज’ की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाएंगे।

प्रशांत किशोर के इस दौरे ने साफ कर दिया है कि चुनावी हार-जीत से बेफिक्र होकर वे एक लंबी पारी की तैयारी कर रहे हैं। बिहार की राजनीति में यह ‘शुद्धतावादी’ प्रयोग कितना सफल होगा, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन उनके इरादे स्पष्ट हैं।