जन सुराज ने मधुबनी जिला संगठन की घोषणा की: अनिल मिश्रा बने जिला अध्यक्ष, शमसुल हक़ को मिली महामंत्री की जिम्मेदारी

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मधुबनी, 11 मार्च 2026 – बिहार में बदलाव की राजनीति का संकल्प लेकर आगे बढ़ रही जन सुराज पार्टी ने अपने सांगठनिक ढांचे को मजबूती देते हुए मधुबनी जिला संगठन के पदाधिकारियों की सूची जारी कर दी है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस नई टीम का ऐलान किया।

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सांगठनिक मजबूती के लिए नई रणनीति

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने बताया कि जन सुराज के मूलभूत सिद्धांतों को जमीन पर उतारने के लिए पूरे राज्य को 44 सांगठनिक जिलों में बांटा गया है। इसी रणनीति के तहत मधुबनी जिले के लिए वरिष्ठ साथियों के साथ विचार-विमर्श कर एक सशक्त कमेटी का गठन किया गया है।

“यह जिला कमेटी क्षेत्रीय और राज्य नेतृत्व के बीच एक सेतु का काम करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य जिले के सभी प्रखंडों और पंचायतों में संगठन का पुनर्गठन करना और पार्टी की गतिविधियों को गति देना है।” – मनोज भारती, प्रदेश अध्यक्ष

मधुबनी जिला संगठन के मुख्य पदाधिकारी

घोषणा के अनुसार, मधुबनी जिले की कमान निम्नलिखित अनुभवी हाथों में सौंपी गई है:

  • जिला अध्यक्ष: श्री अनिल मिश्रा
  • जिला महामंत्री: श्री शमसुल हक़

यह टीम जिले के वरिष्ठ सदस्यों के साथ मिलकर पंचायत स्तर तक संगठन के विस्तार का कार्य करेगी।

कार्यक्रम में मौजूद प्रमुख नेतृत्व

संगठन की घोषणा के इस महत्वपूर्ण अवसर पर प्रदेश स्तर के कई दिग्गज नेता मौजूद रहे, जिनमें शामिल हैं:

  • सुभाष सिंह कुशवाहा (प्रदेश संगठन महामंत्री)
  • सरवर अली (प्रदेश महासचिव)
  • धरमवीर प्रसाद सिंह (कोषाध्यक्ष)
  • श्रीमती सरिता देवी (महिला अध्यक्ष)
  • दीपक कुमार भंडारी (युवा अध्यक्ष)

जन सुराज का विजन

जन सुराज पार्टी का उद्देश्य बिहार के हर जिले में एक ऐसी टीम तैयार करना है जो सीधे जनता से जुड़ी हो। मधुबनी जिला कमेटी की यह घोषणा इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सलाहकार समिति और अन्य पदाधिकारियों की विस्तृत सूची पार्टी के आधिकारिक पोर्टल पर भी उपलब्ध कराई गई है।

मधुबनी: फुलपरास में मवेशी चोर गिरोह सक्रिय, ब्रह्मानंद यादव ने प्रशासन से की सख्त कार्रवाई की माँग

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मधुबनी (बिहार): फुलपरास नगर पंचायत में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब वे सरेआम मवेशियों की चोरी करने से भी नहीं हिचक रहे हैं। ताजा मामला परमेश्वर चौक का है, जहाँ मंगलवार तड़के तीन-चार अज्ञात चोरों ने एक सांड को जबरन पिकअप वैन में लादकर चोरी करने का प्रयास किया।

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घटना का विवरण

स्वतंत्र पत्रकार और पूर्व अध्यक्ष ब्रह्मानंद यादव द्वारा थाना अध्यक्ष को लिखे गए पत्र के अनुसार, यह घटना 10 मार्च 2026 की सुबह करीब 3 से 4 बजे के बीच की है। बताया जा रहा है कि चोरों ने सांड के गले में रस्सी बाँधकर उसे घसीटते हुए पिकअप वैन पर लादने की कोशिश की।

इसी बीच सांड गाड़ी से कूदकर भागने लगा। चोरों ने गाड़ी से उसका पीछा भी किया, लेकिन तभी वहाँ मौजूद एक सब्जी विक्रेता, मोहम्मद सोवराती, जाग गए। उनकी सजगता और शोर मचाने के कारण चोर घबरा गए और सांड को छोड़कर पिकअप वैन लेकर मौके से फरार हो गए।

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सीसीटीवी फुटेज से हो सकती है पहचान

ब्रह्मानंद यादव ने अपने पत्र में प्रशासन का ध्यान इस ओर खींचा है कि फुलपरास नगर पंचायत के विभिन्न गाँवों से लगातार सांड और पाड़ा (भैंस का बच्चा) चोरी होने की खबरें आ रही हैं। उन्होंने पुलिस से माँग की है कि:

  • परमेश्वर चौक, हटिया चौक और लोहिया चौक पर लगे सीसीटीवी कैमरों की जाँच की जाए।
  • संदिग्ध पिकअप वैन का नंबर निकालकर अपराधियों की पहचान की जाए।
  • क्षेत्र में गश्त बढ़ाई जाए ताकि ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके।

प्रशासन से न्यायोचित कार्रवाई की अपील

इस मामले की प्रतिलिपि कार्यपालक पदाधिकारी (नगर पंचायत फुलपरास) और अनुमंडल पदाधिकारी को भी भेजी गई है। स्थानीय निवासियों में इस घटना को लेकर काफी आक्रोश है और उन्होंने पुलिस प्रशासन से जल्द से जल्द दोषियों को गिरफ्तार करने की माँग की है।

बिहार के स्वर्णिम काल के रूप में याद किया जाएगा नीतीश कुमार का कार्यकाल: ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव

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सुपौल, बिहार: बिहार सरकार के कद्दावर नेता कोशी के विश्वकर्मा और ऊर्जा मंत्री श्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व की जमकर सराहना की है। सुपौल जिले के निर्मली में आयोजित ‘समृद्धि यात्रा 2026’ के दौरान एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने राज्य में हुए बुनियादी ढांचागत बदलावों को ऐतिहासिक बताया।

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आजाद बिहार का स्वर्णिम युग

​मंत्री बिजेंद्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि साल 2005 से 2025 तक का कालखंड बिहार के इतिहास में “स्वर्ण अक्षरों” में लिखा जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की तस्वीर बदलने का जो संकल्प लिया था, वह आज धरातल पर दिख रहा है।

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14 घंटे का सफर अब सिर्फ 40 मिनट में

​विकास का उदाहरण देते हुए उन्होंने पुराने दिनों की याद ताजा की। उन्होंने बताया:

  • अतीत की चुनौती: एक समय था जब सुपौल से निर्मली पहुंचने में लोगों को 14 घंटे का समय लग जाता था। यातायात की स्थिति अत्यंत दयनीय थी।
  • आज की उपलब्धि: नीतीश कुमार सरकार के रोड कनेक्टिविटी और पुल निर्माण कार्यों की बदौलत आज यही दूरी मात्र 40 मिनट में तय की जा रही है।
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विपक्ष पर तीखा तंज

​गठबंधन की राजनीति और विपक्ष के हमलों पर बोलते हुए बिजेंद्र यादव ने कहा कि जब मुख्यमंत्री ने एनडीए (NDA) के साथ जाने का निर्णय लिया, तो विपक्ष के कई बड़े नेताओं के फोन आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार हमारे सर्वमान्य नेता हैं और उनके निर्णय के साथ पूरी पार्टी और राज्य की जनता मजबूती से खड़ी है।

​”हमारे नेता जो कहते हैं, वह करके दिखाते हैं। कोसी क्षेत्र में रेल पुल से लेकर सड़कों के जाल तक, आज जो कायापलट हुआ है, वह नीतीश कुमार की दूरदर्शिता का परिणाम है।” — बिजेंद्र प्रसाद यादव

​समृद्धि यात्रा के माध्यम से सरकार अपनी उपलब्धियों को जनता के बीच ले जा रही है। बिजेंद्र यादव का यह बयान न केवल कोसी क्षेत्र के विकास को रेखांकित करता है, बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिए भी एक मजबूत संदेश देता है।

मधुबनी: नारी रत्न सम्मान समारोह में गूंजी महिला सशक्तिकरण की गूँज, 180 से अधिक कर्मयोगिनी महिलाएं सम्मानित

Nari Ratna Samman Samaroh Madhubani Er Ganga Kumar

मधुबनी (फुलपरास): अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के गौरवशाली अवसर पर आज इंजीनियर गंगा कुमार (समाजसेवी) के नेतृत्व में फुलपरास के जनता हाई स्कूल, बेल्हा (मधुबनी) में “नारी रत्न सम्मान समारोह” सह “समाज में महिलाओं की भूमिका” विषयक संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी अमूल्य सेवा देने वाली 180 से अधिक महिलाओं को सम्मानित कर उनके योगदान को सराहा गया।

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प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति

​कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व विधान परिषद सदस्य सुमन महासेठ एवं विशिष्ट अतिथियों में पूर्व विधायक (लौकहा) भारत भूषण मंडल, पूर्व जिला परिषद सदस्य दौरिक पूर्वे उपस्थित रहे। मंच की शोभा बढ़ाने के लिए राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र की कई दिग्गज महिलाएं भी शामिल हुईं, जिनमें:

  • रंजीता प्रभा (प्रमुख, बाबूबरही)
  • कुमारी आशा (प्रमुख, खजौली)
  • कल्पना सिंह (नेत्री, राजद)
  • काजोल पूर्वे (पूर्व मेयर प्रत्याशी, मधुबनी)
  • कामिनी जी (समाजसेवी, जयनगर)
  • कामिनी सिंह (MBK, जीविका)
  • जया प्रिया (शिक्षिका)

समाज की नींव हैं ये महिलाएं

​आयोजक इंजीनियर गंगा कुमार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि समाज के निर्माण में महिलाओं का योगदान अतुलनीय है। इस समारोह का मुख्य उद्देश्य उन महिलाओं को सम्मान देना है जो जमीन पर रहकर समाज को सशक्त बना रही हैं।

​समारोह में 180 से अधिक महिलाओं को सम्मानित किया गया, जिनमें मुख्य रूप से:

  • आशा कार्यकर्ता
  • जीविका दीदियाँ
  • आंगनवाड़ी सेविकाएं
  • शिक्षिकाएं और ANM

संगोष्ठी: समाज में महिला की भूमिका

​सम्मान समारोह के साथ-साथ आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने वर्तमान परिवेश में महिलाओं की बदलती भूमिका पर प्रकाश डाला। अतिथियों ने कहा कि आज की नारी सिर्फ घर तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और राजनीति जैसे हर क्षेत्र में नेतृत्व कर रही है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में ‘जीविका दीदियों’ और स्वास्थ्य सेवाओं में ‘आशा एवं ANM’ के योगदान को ‘समाज की रीढ़’ बताया गया।

यह कार्यक्रम न केवल सम्मान देने का एक जरिया था, बल्कि समाज को यह संदेश देने का प्रयास भी था कि जब हम अपनी नारी शक्ति का सम्मान करते हैं, तभी एक उन्नत राष्ट्र का निर्माण संभव है।

रिपोर्ट: हरे कृष्णा यादव (BHOOMI NEWS LIVE)

UPSC Result Controversy: एक रैंक, दो दावेदार और बारकोड ने खोला राज! गाजीपुर vs आरा की आकांक्षा

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यूपीएससी (UPSC) के नतीजे जितनी खुशियां लाते हैं, कभी-कभी उतनी ही उलझनें भी पैदा कर देते हैं। इस साल 301वीं रैंक को लेकर उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की डॉ. आकांक्षा सिंह और बिहार के आरा की आकांक्षा सिंह के बीच जो विवाद खड़ा हुआ, उसने इंटरनेट पर नई बहस छेड़ दी है।

​लेकिन कहते हैं न कि ‘डिजिटल युग में झूठ की उम्र कम होती है’। दस्तावेजों की गहराई से पड़ताल और एक छोटे से बारकोड ने इस पूरे सस्पेंस से पर्दा उठा दिया है।

📊 ‘आकांक्षा vs आकांक्षा’: सस्पेंस का पूरा विश्लेषण

​इस विवाद को समझने के लिए नीचे दी गई तालिका देखें, जो दोनों अभ्यर्थियों के दावों की हकीकत बयां करती है:

विवरण डॉ. आकांक्षा सिंह (गाजीपुर, UP) आकांक्षा सिंह (आरा, बिहार)
दावा (Rank) 301 (AIR) 301 (AIR)
रोल नंबर08567940856794
बैकग्राउंडगायनेकोलॉजिस्ट, एम्स पटना (MD)ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती
बारकोड रिपोर्टरोल नंबर से 100% मैचबारकोड और रोल नंबर में विसंगति
वर्तमान स्थिति दावा बेहद मजबूत (सबूत सार्वजनिक किए) फोन बंद, रैंक 454 होने की चर्चा

🔍 बारकोड: वो ‘छोटा सा निशान’ जिसने सच उजागर किया

​इस हाई-प्रोफाइल विवाद को सुलझाने में सबसे बड़ी भूमिका एडमिट कार्ड के बारकोड ने निभाई। यूपीएससी की परीक्षा में एडमिट कार्ड पर एक यूनिक बारकोड होता है, जिसे एडिट करना नामुमकिन है।

  1. डॉ. आकांक्षा का पक्ष: गाजीपुर की डॉ. आकांक्षा ने सार्वजनिक रूप से अपना एडमिट कार्ड दिखाया। जब उनके बारकोड को स्कैन किया गया, तो वह उनके लिखे हुए रोल नंबर (0856794) से पूरी तरह मेल खाया।
  2. बिहार की आकांक्षा का पक्ष: आरा की आकांक्षा के एडमिट कार्ड पर ऊपर तो वही रोल नंबर अंकित था, लेकिन डिजिटल स्कैनिंग के दौरान बारकोड से कोई दूसरा नंबर निकलकर सामने आया। यह तकनीकी विसंगति उनके दावे को पूरी तरह कमजोर करती है।

👩‍⚕️ कौन हैं डॉ. आकांक्षा सिंह (जमानियां, गाजीपुर)?

​विवादों से परे, डॉ. आकांक्षा की कहानी प्रेरणा और मेहनत की मिसाल है:

  • पेशेवर पहचान: वह केवल एक यूपीएससी अभ्यर्थी नहीं, बल्कि एक पेशेवर डॉक्टर हैं। उन्होंने AIIMS पटना से अपनी मेडिकल की पढ़ाई (MD) पूरी की है और एक कुशल गायनेकोलॉजिस्ट हैं।
  • पारिवारिक पृष्ठभूमि: उनके पिता रंजीत सिंह भारतीय वायु सेना (Airforce) में जूनियर वारंट ऑफिसर हैं।
  • दृढ़ निश्चय: दिल्ली में रहकर तैयारी कर रहीं डॉ. आकांक्षा ने विवाद सामने आते ही तुरंत यूपीएससी से संपर्क किया और अपने सभी मूल दस्तावेज साझा किए, जिससे उनकी सच्चाई दुनिया के सामने आ गई।

💡तकनीक ने रोका ‘धोखा’

​अक्सर देखा जाता है कि समान नाम होने के कारण रोल नंबर में हेरफेर कर लोकप्रियता बटोरने की कोशिश की जाती है। लेकिन इस मामले ने साफ कर दिया है कि यूपीएससी जैसी संस्था की सुरक्षा प्रणाली को भेदना संभव नहीं है। आरा की आकांक्षा का फोन फिलहाल बंद है और सूत्रों की मानें तो उनकी असल रैंक 454 हो सकती है।

नोट: उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे रिजल्ट के समय केवल आधिकारिक वेबसाइट और अपने यूनिक क्रेडेंशियल्स पर ही भरोसा करें।

बिहार की राजनीति में बड़ा धमाका: JDU भी चल पड़ी राजद की राह पर..? निशांत कुमार की एंट्री के मायने

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बिहार की राजनीति में ‘परिवारवाद’ (Dynasty Politics) हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सार्वजनिक मंचों से अक्सर लालू यादव और कांग्रेस पर परिवार को आगे बढ़ाने का आरोप लगाते रहे हैं। लेकिन अब, निशांत कुमार (Nishant Kumar) के जनता दल यूनाइटेड (JDU) में सक्रिय होने की खबरों ने एक नई बहस छेड़ दी है।

​क्या जेडीयू भी अब उसी ‘परिवारवाद’ के अध्याय को लिखने जा रही है जिससे वह अब तक दूर होने का दावा करती थी?

​1. निशांत कुमार और जेडीयू: एक नया मोड़

​काफी समय से लो-प्रोफाइल रहने वाले नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार अब पार्टी के कार्यक्रमों और फीडबैक सिस्टम में सक्रिय दिख रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उन्हें जल्द ही पार्टी में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

  • बदलाव का संकेत: कार्यकर्ताओं की बढ़ती मांग और पार्टी के भीतर उत्तराधिकारी की तलाश निशांत को केंद्र में ला रही है।
  • युवा चेहरा: जेडीयू इसे एक युवा नेतृत्व के तौर पर पेश करने की कोशिश कर सकती है।

2. ‘परिवारवाद’ पर नीतीश कुमार का स्टैंड और वर्तमान स्थिति

​नीतीश कुमार ने हमेशा यह गर्व से कहा है कि उनके परिवार का कोई भी सदस्य राजनीति में नहीं है। उन्होंने कर्पूरी ठाकुर के सिद्धांतों का हवाला देते हुए खुद को वंशवाद की राजनीति से अलग रखा।

​”जेडीयू अभी तक बिहार की इकलौती बड़ी पार्टी मानी जाती थी जो परिवारवाद के साये से मुक्त थी। लेकिन निशांत कुमार के आने के बाद, विरोधियों को अब नीतीश कुमार पर हमला करने का एक बड़ा हथियार मिल गया है।”

​3. क्या JDU अब RJD की राह पर है?

​बिहार में राजद (RJD) पर हमेशा यह आरोप लगता है कि वह एक परिवार की पार्टी है। तेजस्वी यादव, तेज प्रताप और मीसा भारती का राजनीति में दबदबा इसका उदाहरण है।

​अब यदि निशांत कुमार जेडीयू की कमान संभालते हैं या अहम पद पर आते हैं, तो जेडीयू और राजद के बीच का वह ‘नैतिक अंतर’ (Moral Difference) खत्म हो जाएगा जो नीतीश कुमार की यूएसपी (USP) रही है।

तुलनात्मक नजरिया:

विशेषताआरजेडी (RJD)जेडीयू (JDU) – नया ट्रेंड
मुख्य नेतृत्वलालू यादव परिवारअब निशांत कुमार की चर्चा
दावासामाजिक न्यायसुशासन और परिवारवाद का विरोध
उत्तराधिकारीतेजस्वी यादवनिशांत कुमार (संभावित)

4. सोशल मीडिया और जनता की राय

​इंटरनेट पर इस खबर के आते ही लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ इसे पार्टी की मजबूती के लिए जरूरी बता रहे हैं, तो कुछ इसे नीतीश कुमार के सिद्धांतों के साथ ‘समझौता’ कह रहे हैं।

निशांत कुमार का राजनीति में आना जेडीयू के लिए अस्तित्व बचाने की मजबूरी है या नीतीश कुमार का हृदय परिवर्तन, यह तो वक्त बताएगा। लेकिन एक बात साफ है—बिहार की राजनीति में अब ‘परिवारवाद’ का मुद्दा एक नया मोड़ ले चुका है।

UPSC 2025 Result: आरक्षण का फायदा लेकर EWS, OBC, SC, ST और जनरल से कितने अभ्यर्थियों ने बाजी मारी, देखें पूरी लिस्ट

आरक्षण का फायदा लेकर EWS, OBC, SC, ST और जनरल से कितने अभ्यर्थियों ने बाजी मारी, देखें पूरी लिस्ट

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित कर दिया है। इस साल भी देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में युवाओं ने अपनी मेहनत और लगन से सफलता का परचम लहराया है। रिजल्ट के साथ ही यह चर्चा भी तेज है कि किस श्रेणी (Category) से कितने उम्मीदवारों का चयन हुआ है।

​क्या आप जानते हैं कि इस साल कुल 958 उम्मीदवारों की सिफारिश की गई है? आइए जानते हैं जनरल, ईडब्ल्यूएस, ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के उम्मीदवारों के चयन का पूरा गणित।

कैटेगरी वाइज सिलेक्शन: किस वर्ग के कितने उम्मीदवार?

​यूपीएससी द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न श्रेणियों के तहत चयनित उम्मीदवारों का विवरण नीचे दी गई तालिका में देख सकते हैं:

श्रेणी (Category)चयनित उम्मीदवारों की संख्या
सामान्य (General)317
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)306
अनुसूचित जाति (SC)158
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS)104
अनुसूचित जनजाति (ST)73
कुल (Total)958

(नोट: कुल 1087 रिक्तियों के सापेक्ष फिलहाल 958 उम्मीदवारों की सिफारिश की गई है।)

UPSC 2025 के टॉपर्स की लिस्ट

​इस साल राजस्थान के अनुज अग्निहोत्री ने ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल कर पूरे देश में नाम रोशन किया है। टॉप 10 उम्मीदवारों की सूची इस प्रकार है:

  1. अनुज अग्निहोत्री (AIR 1)
  2. राजेश्वरी सुवे एम (AIR 2)
  3. आकांश ढुल (AIR 3)
  4. राघव झुनझुनवाला
  5. ईशान भटनागर
  6. ज़िनिया अरोड़ा
  7. ए आर राजाह मोहैदीन
  8. पक्षल सेकेट्री
  9. आस्था जैन
  10. उज्जवल प्रियंक

वैकेंसी और सर्विस का विवरण

​यूपीएससी ने इस बार भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय विदेश सेवा (IFS), और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) सहित अन्य केंद्रीय सेवाओं के लिए रिक्तियां निकाली थीं। पदों का विवरण कुछ इस प्रकार है:

  • IAS: 180 पद
  • IFS: 55 पद
  • IPS: 150 पद
  • Central Services (Group A): 507 पद
  • Group B Services: 195 पद

रिजर्व लिस्ट का प्रावधान

​आयोग ने मुख्य सूची के अलावा 258 उम्मीदवारों की एक समेकित आरक्षित सूची (Reserve List) भी तैयार की है। इसमें जनरल (129), ईडब्ल्यूएस (26), ओबीसी (86), एससी (08) और एसटी (06) के उम्मीदवार शामिल हैं। यदि मुख्य सूची से पद रिक्त रहते हैं, तो इन उम्मीदवारों को मौका मिल सकता है।

​यूपीएससी 2025 के परिणाम बताते हैं कि मेहनत और सही दिशा में प्रयास किया जाए, तो किसी भी पृष्ठभूमि से आने वाला अभ्यर्थी सफलता प्राप्त कर सकता है। आरक्षित वर्गों (OBC, SC, ST, EWS) के अभ्यर्थियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है, वहीं जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों ने भी कड़े मुकाबले में अपनी जगह बनाई है।

सिजौलिया के लाल शिवम नारायण झा ने रचा इतिहास: UPSC में 597वीं रैंक हासिल कर बढ़ाया मान

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फुलपरास (मधुबनी): कहते हैं कि अगर इरादे नेक हों और मेहनत में ईमानदारी हो, तो नियति भी आपका साथ देती है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है फुलपरास प्रखंड के सिजौलिया गांव के निवासी धर्म नारायण झा के ज्येष्ठ पुत्र शिवम नारायण झा ने। शिवम ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में 597वीं रैंक प्राप्त कर न केवल अपने माता-पिता का सपना पूरा किया है, बल्कि पूरे जिले और राज्य का नाम रोशन किया है।

संस्कारों और मेहनत की जीत

​शिवम की यह सफलता केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उनके पिता धर्म नारायण झा की ईमानदारी और उनकी माता के आशीर्वाद का प्रतिफल है। आज के दौर में जहाँ लोग शॉर्टकट की तलाश में रहते हैं, वहीं शिवम के परिवार ने यह साबित कर दिया कि धार्मिक कार्यों में जुड़ाव और ईमानदारी की राह पर चलते हुए भी शिखर तक पहुँचा जा सकता है।

कठिन परिस्थितियों में नहीं खोया धैर्य

​शिवम का इस मुकाम तक पहुँचने का सफर आसान नहीं था। उनके पिता धर्म नारायण ने कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपना धैर्य नहीं खोया। “जो ऊपर वाला चाहता है वही होता है”—इसी विश्वास के साथ परिवार ने संघर्ष किया और आज ‘ऊपर वाले’ ने उनकी मेहनत का फल शिवम की सफलता के रूप में दिया है।

समाज के लिए एक प्रेरणा

​शिवम की सफलता से आज पूरा फुलपरास अनुमंडल गौरवान्वित है। गांव में खुशी का माहौल है और लोग इसे आने वाली पीढ़ी के लिए एक बड़ी सीख मान रहे हैं। यह परिणाम उन लोगों के लिए एक कड़ा जवाब है जो ईमानदारी की शक्ति पर संदेह करते हैं।

“कठिन परिश्रम और ईश्वर पर अटूट विश्वास ही सफलता की असली कुंजी है। शिवम ने अपनी मेहनत से सिजौलिया गांव का नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज करा दिया है।”

​मुख्य बिंदु:

  • नाम: शिवम नारायण झा
  • निवासी: सिजौलिया, फुलपरास (मधुबनी)
  • उपलब्धि: UPSC सिविल सेवा परीक्षा में सफल (रैंक 597)
  • प्रेरणा: पिता की ईमानदारी और माता का आशीर्वाद

​हम शिवम के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं और उम्मीद करते हैं कि वे एक कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी बनकर समाज की सेवा करेंगे।

UPSC 2025 Result: ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती आकांक्षा सिंह ने लहराया परचम, हासिल की 301वीं रैंक

Akanksha Singh UPSC Rank 301 granddaughter of Brahmeshwar Mukhiya.

भोजपुर, बिहार: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा 2025 के परिणामों में बिहार की बेटियों ने एक बार फिर अपनी मेधा का लोहा मनवाया है। इसी कड़ी में भोजपुर जिले की आकांक्षा सिंह ने देशभर में 301वीं रैंक हासिल कर अपने परिवार और पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है।

​आकांक्षा सिंह की इस सफलता की चर्चा इसलिए भी अधिक है क्योंकि वह रणवीर सेना के पूर्व प्रमुख स्वर्गीय ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती हैं। उनकी इस उपलब्धि से न केवल उनके पैतृक गांव ‘खोपिरा’ (भोजपुर) में बल्कि पूरे बिहार के शैक्षणिक गलियारों में खुशी की लहर है।

मेहनत और लगन से तय किया सफर

​आकांक्षा सिंह ने यह मुकाम अपनी कड़ी मेहनत और अटूट संकल्प के बल पर हासिल किया है। अपनी प्रारंभिक शिक्षा और स्नातक की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का मन बना लिया था।

सफलता के कुछ प्रमुख बिंदु:

  • रैंक: 301 (UPSC CSE 2025)
  • प्रयास: यह आकांक्षा का दूसरा प्रयास था।
  • शिक्षा: आरा के एचडी जैन कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य (English Literature) में स्नातक।
  • लक्ष्य: हालांकि इस रैंक पर उन्हें IRS (भारतीय राजस्व सेवा) मिलने की संभावना है, लेकिन आकांक्षा का सपना IFS (विदेश सेवा) में जाने का है।

​”दादाजी का सपना किया पूरा”

​मीडिया से बातचीत के दौरान आकांक्षा के परिजनों ने बताया कि ब्रह्मेश्वर मुखिया हमेशा चाहते थे कि उनके परिवार का कोई सदस्य उच्च प्रशासनिक पद पर आसीन होकर समाज की सेवा करे। आकांक्षा ने अपनी इस जीत को अपने दादाजी और माता-पिता के आशीर्वाद को समर्पित किया है।

UPSC Success: झंझारपुर की बेटी श्रेया झा ने पहले ही प्रयास में लहराया परचम, UPSC में हासिल की 357वीं रैंक

UPSC Success: झंझारपुर की बेटी श्रेया झा ने पहले ही प्रयास में लहराया परचम

​मधुबनी जिले के झंझारपुर में आज उत्सव का माहौल है। प्रो. उग्रदेव झा ‘अमर’ के घर खुशियों की लहर तब दौड़ गई, जब उनकी नतनी श्रेया झा ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) 2025 की परीक्षा में अपने पहले ही प्रयास में 357वीं रैंक हासिल कर सफलता का परचम लहराया।

पारिवारिक पृष्ठभूमि और हर्ष का माहौल

​श्रेया की माँ, श्रीमती चेतना झा ने फोन पर जैसे ही इस गौरवपूर्ण उपलब्धि की जानकारी दी, पूरे परिवार में जश्न शुरू हो गया।

  • पिता: श्री अभय कुमार दीपक (सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, एक्सिस बैंक, नोएडा)
  • माता: श्रीमती चेतना झा (कुशल गृहणी)
  • नाना: प्रो. उग्रदेव झा ‘अमर’ (अवकाशप्राप्त विभागाध्यक्ष, अंग्रेजी, LN जनता महाविद्यालय, झंझारपुर)
  • नानी: श्रीमती मंजू झा (अवकाशप्राप्त प्रिंसिपल, पार्वती-लक्ष्मी कन्या उच्च विद्यालय, झंझारपुर)

​झंझारपुर स्थित उनके आवास पर सुबह से ही शुभचिंतकों और बधाई देने वालों का ताँता लगा हुआ है।

शिक्षा और शैक्षणिक सफर

​श्रेया शुरू से ही एक मेधावी छात्रा रही हैं। उनकी सफलता का सफर विभिन्न शहरों से होकर गुजरा है:

स्तरसंस्थान
10वीं (Matric)कारमेल स्कूल, धनबाद
12वीं (Intermediate)सेंट माइकल्स स्कूल, पटना
स्नातक (Graduation)B.A. LL.B., गुरु गोविन्द सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, नई दिल्ली

पहले प्रयास में ही मिली बड़ी कामयाबी

​श्रेया झा की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने न केवल अपनी पहली मुख्य परीक्षा (Mains) पास की, बल्कि अपने पहले ही इंटरव्यू में यूपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा को क्रैक कर दिखाया। उन्होंने साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प और सही दिशा में की गई मेहनत से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

​”श्रेया की सफलता से पूरे क्षेत्र का मान बढ़ा है। उनकी मेधा और कड़े परिश्रम ने आज उन्हें इस मुकाम पर पहुँचाया है।” – प्रो. उग्रदेव झा ‘अमर’

​श्रेया झा की इस शानदार सफलता ने न केवल उनके परिवार को गौरवान्वित किया है, बल्कि झंझारपुर और पूरे मधुबनी जिले के युवाओं के लिए वे एक प्रेरणा स्रोत बनकर उभरी हैं।