बिहार पंचायत चुनाव: जिला परिषद क्षेत्र संख्या 43 से सरोज यादव ने ठोकी ताल, युवाओं से की खास अपील

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बिहार विधानसभा चुनाव के बाद अब सबकी नजरें ग्रामीण राजनीति और पंचायत चुनावों पर टिकी हैं। इसी चुनावी गहमागहमी के बीच लौकही प्रखंड के जिला परिषद क्षेत्र संख्या 43 से एक उभरता हुआ चेहरा सामने आया है। सामाजिक कार्यकर्ता सरोज यादव ने भूमि न्यूज़ लाइव (BHOOMI NEWS Live) के साथ एक विशेष साक्षात्कार में आधिकारिक तौर पर अपनी उम्मीदवारी की घोषणा कर दी है।

“पद नहीं, सेवा का संकल्प”: सरोज यादव

​आमतौर पर प्रत्याशी चुनाव के कुछ महीने पहले सक्रिय होते हैं, लेकिन सरोज यादव का दावा है कि वह पिछले 7-8 वर्षों से लगातार क्षेत्र की जनता के बीच रहकर उनकी सेवा कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनावी मैदान में उतरने का उनका उद्देश्य सत्ता सुख नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं को मजबूती से अधिकारियों के सामने रखना है।

​”जब तक आप किसी पद पर नहीं होते, ब्लॉक, अनुमंडल या जिला स्तर पर आपकी आवाज अनसुनी कर दी जाती है। जनता की बेहतर सेवा के लिए प्रतिनिधि बनना जरूरी है।” — सरोज यादव

जमीनी मुद्दों पर रहेगा फोकस

​एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले सरोज यादव ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी राजनीति “हवाई फायरिंग” (झूठे वादों) पर नहीं, बल्कि “जमीनी हकीकत” पर आधारित होगी। उनकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं:

  • किसानों की समस्याएं: खेती-किसानी से जुड़ी दिक्कतों का स्थानीय स्तर पर समाधान।
  • क्षेत्र का विकास: अपने क्षेत्र की 6 पंचायतों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना।
  • जवाबदेही: उन जनप्रतिनिधियों पर कटाक्ष करते हुए जो जीतने के बाद गायब हो जाते हैं, यादव ने हमेशा उपलब्ध रहने का वादा किया।

सोशल मीडिया नहीं, जमीन के ‘खिलाड़ी’

​इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि कई युवा सोशल मीडिया पर तो चुनाव लड़ने का दावा करते हैं लेकिन ऐन वक्त पर पीछे हट जाते हैं, तो यादव ने आत्मविश्वास के साथ कहा:

“मैं पिछले 8 सालों से तैयारी कर रहा हूँ। चुनाव तो अब आया है, लेकिन सेवा मैं तब से कर रहा हूँ जब मेरे पास कोई पद नहीं था। मैं नर्वस नहीं हूँ, क्योंकि मेरी ताकत मेरे क्षेत्र की जनता का आशीर्वाद है।”

युवाओं और मतदाताओं को संदेश

​साक्षात्कार के अंत में, सरोज यादव ने क्षेत्र संख्या 43 के युवाओं और समस्त जनता से अपील की कि वे इस बार ईमानदारी और काम के आधार पर अपना प्रतिनिधि चुनें। उन्होंने वादा किया कि अगर जनता उन्हें मौका देती है, तो वह वर्तमान प्रतिनिधियों से दोगुना काम करके दिखाएंगे।

​सरोज यादव की इस घोषणा ने लौकही प्रखंड की स्थानीय राजनीति में हलचल तेज कर दी है। अब देखना यह होगा कि क्षेत्र की जनता इस युवा और ऊर्जावान चेहरे पर कितना भरोसा जताती है।

बिहार पंचायत चुनाव और स्थानीय खबरों की विस्तृत कवरेज के लिए ‘भूमि लाइव’ के साथ जुड़े रहें।

मधुबनी में LPG की किल्लत नहीं, अफवाह फैलाने और जमाखोरी करने वालों पर होगी जेल: DM आनंद शर्मा

DM Anand Sharma and SP Yogendra Kumar press conference Madhubani.

मधुबनी। जिले में पिछले कुछ दिनों से रसोई गैस (LPG) को लेकर फैल रही अफवाहों और उपभोक्ताओं के बीच मची अफरातफरी पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। आज जिलाधिकारी आनंद शर्मा एवं पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार ने संयुक्त रूप से प्रेस वार्ता कर जिले में गैस की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की वर्तमान स्थिति साझा की।

आपूर्ति सामान्य, घबराने की जरूरत नहीं

​जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने स्पष्ट किया कि मधुबनी जिले में लगभग 10 लाख एलपीजी उपभोक्ता हैं और उनके लिए पर्याप्त मात्रा में गैस का स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने कहा, आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। आम जनता अफवाहों पर ध्यान न दें और पैनिक होकर अनावश्यक बुकिंग न करें। घरों में सिलेंडर का भंडारण करना न केवल गैर-कानूनी है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी खतरनाक है।”

जमाखोरों पर प्रशासन का ‘हंटर’

​कालाबाजारी और अवैध भंडारण की शिकायतों पर पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार ने बताया कि:

  • ​अब तक जिले के विभिन्न क्षेत्रों में छापेमारी कर 3 प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई हैं।
  • ​दोषियों को पकड़कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा रहा है।
  • ​इन मामलों में स्पीडी ट्रायल चलाकर जल्द से जल्द सजा दिलाई जाएगी ताकि कालाबाजारी करने वालों को कड़ा संदेश मिले।

आमजन के लिए प्रशासन की अपील:

  1. अफवाहों से बचें: सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैल रही कमी की खबरों पर भरोसा न करें।
  2. सहयोग करें: गैस एजेंसियां सुचारू रूप से वितरण कर रही हैं, व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का साथ दें।
  3. भंडारण न करें: जरूरत से ज्यादा सिलेंडर घर में न रखें, ताकि वास्तविक जरूरतमंदों को परेशानी न हो।

प्रशासन का संदेश साफ है: आपूर्ति में कोई बाधा नहीं है, लेकिन यदि कोई वेंडर या व्यक्ति कालाबाजारी में संलिप्त पाया गया, तो उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई निश्चित है।

बिहार प्रदेश जद(यू) सांगठनिक निर्वाचन 2026: नवनिर्वाचित जिलाध्यक्षों की सूची जारी

Nitish kumar

पटना: जनता दल (यूनाइटेड) में सांगठनिक मजबूती और भविष्य की रणनीतियों को देखते हुए एक बड़ा कदम उठाया गया है। बिहार प्रदेश जद(यू) सांगठनिक निर्वाचन-2026 के अंतर्गत, मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार की स्वीकृति के बाद राज्य निर्वाचन पदाधिकारी अशोक कुमार ने शेष सांगठनिक जिलाध्यक्षों की आधिकारिक सूची जारी कर दी है।

​इस सूची में पार्टी के समर्पित और अनुभवी कार्यकर्ताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं। यह नियुक्तियाँ पार्टी के निचले स्तर (Grassroot level) को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से की गई हैं।

नवनियुक्त जिलाध्यक्षों की सूची (प्रमुख जिले)

​कार्यालय आदेश संख्या 52/26 के अनुसार, निम्नलिखित प्रमुख नामों की घोषणा की गई है:

क्र०सं०जिला / नगर का नामनिर्वाचित अध्यक्ष का नाम
1मुजफ्फरपुरश्री अनुपम सिंह
2पटना नगरश्री राधेश्याम कुशवाहा
3गया (बेगूसराय)श्री नन्द लाल राय
4नालंदामो० मसरूर अहमद जुबैरी उर्फ मो० अरशद
5आरा नगरश्री जय प्रकाश चौधरी
6सीवानश्री विकास कुमार सिंह उर्फ जीसू सिंह

(पूरी सूची के लिए नीचे दिए गए आधिकारिक पत्र को देखें)

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संगठन को मिलेगी नई धार

​राज्य निर्वाचन पदाधिकारी अशोक कुमार द्वारा हस्ताक्षरित इस सूची में कुल 25 सांगठनिक क्षेत्रों के नामों की घोषणा की गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन नई नियुक्तियों से आगामी चुनावों और पार्टी के विस्तार कार्यों में नई ऊर्जा का संचार होगा।

​पार्टी नेतृत्व ने सभी नवनिर्वाचित जिलाध्यक्षों को उनके इस महत्वपूर्ण दायित्व के लिए हार्दिक बधाई और सफल कार्यकाल की शुभकामनाएँ दी हैं।

“संगठन की मजबूती ही हमारी असली ताकत है। नए पदाधिकारियों के चयन से पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है।”

क्या आप अपने जिले के नवनियुक्त अध्यक्ष के बारे में और जानकारी चाहते हैं? हमें कमेंट में बताएं!

डिजिटल इंडिया में 16 वर्षों से बंद पड़ा है यह स्कूल, ग्रामीणों ने शुरू किया आमरण अनशन

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खुटौना (मधुबनी): शिक्षा के अधिकार की बातें कागजों पर भले ही सुनहरी लगें, लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ और ही बयां करती है। खुटौना प्रखंड के चतुर्भुज पिपराही पंचायत स्थित खिलही के नोनिया टोल में पिछले 16 वर्षों से बंद पड़े प्राथमिक विद्यालय को फिर से शुरू करवाने के लिए ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया है। प्रशासन की बेरुखी से नाराज ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।

प्रमुख के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू

​विद्यालय के अस्तित्व को बचाने और बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए खुटौना के पूर्व प्रमुख सह वर्तमान पंचायत समिति सदस्य संजीव भिंडवार के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू किया गया है। यह आंदोलन उसी बंद पड़े विद्यालय के परिसर में शुरू किया गया है, जो कभी बच्चों की खिलखिलाहट से गूंजता था।

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क्यों फूटा ग्रामीणों का आक्रोश?

​आंदोलनकारियों का कहना है कि विद्यालय बंद होने के कारण सबसे ज्यादा मार गरीब परिवारों और छोटे बच्चों पर पड़ रही है।

प्रशासनिक अनदेखी: ग्रामीणों के अनुसार, शिक्षा विभाग के अधिकारियों को बार-बार सूचित करने के बाद भी अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

दूरी की समस्या: बच्चों को प्राथमिक शिक्षा के लिए लंबी दूरी तय कर दूसरे गांवों में जाना पड़ता है।

सुरक्षा का डर: छोटे बच्चों को दूर भेजने में अभिभावक हमेशा आशंकित रहते हैं।

​जब तक विद्यालय को पुनः चालू करने के लिए विभाग की ओर से कोई ठोस लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक हमारा अनशन जारी रहेगा। यह बच्चों के भविष्य का सवाल है।

संजीव भिंडवार, आंदोलनकारी नेतृत्वकर्ता

अनशन पर बैठे 12 सत्याग्रही

​इस आंदोलन में संजीव भिंडवार के साथ कुल 12 लोग आमरण अनशन पर बैठे हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • ​रामेश्वर महतो, रामकृष्ण महतो, विष्णु देव महतो, यशोधर महतो।
  • ​रविंद्र महतो, शोभित महतो, सूर्य नारायण महतो, जुगत लाल महतो।
  • ​रामस्वरूप महतो, राम प्रकाश महतो और बलराम महतो।

क्षेत्र में चर्चा का विषय

​जैसे-जैसे अनशन का समय बढ़ रहा है, आस-पास के गांवों के लोगों का समर्थन भी बढ़ता जा रहा है। भारी संख्या में ग्रामीण अनशन स्थल पर पहुंचकर एकजुटता दिखा रहे हैं। अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया शिक्षा विभाग इस जन आक्रोश के बाद जागता है या नोनिया टोल के बच्चों का भविष्य अंधेरे में ही रहेगा।

एडमिट कार्ड बना मजाक! कैंडिडेट की फोटो की जगह छपी कुत्ते की तस्वीर, सोशल मीडिया पर वायरल

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बिहार की शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली अक्सर अपनी अजीबोगरीब गलतियों की वजह से सुर्खियों में रहती है। ताजा मामला एक बार फिर सिस्टम पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है, जहाँ एक छात्र के एडमिट कार्ड (Admit Card) पर उसकी तस्वीर की जगह एक कुत्ते की फोटो छाप दी गई।

यह मामला सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग विभाग की लापरवाही का जमकर मजाक उड़ा रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, यह घटना बिहार के एक प्रतिष्ठित संस्थान की परीक्षा से जुड़ी बताई जा रही है। एक अभ्यर्थी ने जब अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड किया, तो वह दंग रह गया। कार्ड पर छात्र के नाम, पिता का नाम और अन्य विवरण तो सही थे, लेकिन ‘प्रोफाइल फोटो’ वाले कॉलम में छात्र की जगह एक कुत्ते का चेहरा नजर आ रहा था।

हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर चूक पर किसी भी स्तर (डाटा एंट्री से लेकर वेरिफिकेशन तक) पर ध्यान नहीं दिया गया और एडमिट कार्ड जारी कर दिया गया।

सोशल मीडिया पर उड़ रहा मजाक

जैसे ही इस एडमिट कार्ड का स्क्रीनशॉट इंटरनेट पर आया, यूजर्स ने बिहार के परीक्षा बोर्ड और संबंधित विभाग को आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया।

  • मीम्स की बाढ़: लोग कमेंट्स में लिख रहे हैं कि “बिहार में कुछ भी मुमकिन है।”
  • सिस्टम पर सवाल: शिक्षाविदों का मानना है कि इस तरह की गलतियां न केवल छात्र का मनोबल गिराती हैं, बल्कि परीक्षा की गंभीरता को भी खत्म करती हैं।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे कारनामे

बिहार में एडमिट कार्ड पर किसी सेलेब्रिटी या जानवर की फोटो छपना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी कई बार एडमिट कार्ड्स पर:

  1. बॉलीवुड अभिनेत्रियों (सनी लियोन, प्रियंका चोपड़ा) की तस्वीरें।
  2. भगवान गणेश की फोटो।
  3. यहाँ तक कि राजनेताओं की फोटो भी देखी जा चुकी हैं।

विभाग की सफाई

मामला तूल पकड़ने के बाद संबंधित विभाग ने इसे तकनीकी खराबी या डाटा एंट्री ऑपरेटर की लापरवाही करार दिया है। हालांकि, छात्र के लिए यह किसी मानसिक परेशानी से कम नहीं है, क्योंकि एडमिट कार्ड में सुधार के लिए उसे अब दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहाँ हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बात कर रहे हैं, वहां इस तरह की मानवीय और तकनीकी गलतियां सिस्टम की जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती हैं।

क्या आपको लगता है कि इस तरह की गलतियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

महरैल में सजेगा प्रभु श्री राम का दरबार: 27 मार्च को निकलेगी जिला स्तरीय महाविशाल रामनवमी शोभायात्रा

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झंझारपुर (मधुबनी): मिथिला की पावन धरती पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मोत्सव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में मझौरा दुर्गा स्थान में मुरारी मण्डल की अध्यक्षता में ग्रामीणों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि रामनवमी शोभायात्रा समिति, महरैल के तत्वावधान में इस वर्ष जिला स्तरीय ‘महाविशाल रामनवमी शोभायात्रा’ और भव्य ‘संध्या मैथिली कार्यक्रम’ का आयोजन किया जाएगा।

शोभायात्रा का पूरा विवरण

यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक एकता को भी प्रदर्शित करेगा।

  • दिनांक: 27 मार्च 2026 (शुक्रवार)
  • समय: दोपहर 1:00 बजे से
  • प्रस्थान स्थल: महरैल रेलवे स्टेशन चौक स्थित हनुमान मंदिर

इन मार्गों से गुजरेगी भव्य यात्रा

आयोजकों के अनुसार, रामभक्ति से ओत-प्रोत यह शोभायात्रा हनुमान मंदिर प्रांगण से शुरू होकर क्षेत्र के विभिन्न प्रमुख मार्गों का भ्रमण करेगी। यात्रा के मुख्य पड़ाव इस प्रकार होंगे:

  • महरैल
  • कर्णपुर
  • हरना
  • हरड़ी
  • झंझारपुर-अंधराठाढ़ी के प्रमुख मार्ग

विशेष आकर्षण: झांकियां और मैथिली कार्यक्रम

शोभायात्रा को भव्य बनाने के लिए विशेष धार्मिक झांकियों की तैयारी की जा रही है। ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों की गूंज के साथ श्रद्धालु जयकारे लगाते हुए प्रभु श्री राम के आदर्शों का संदेश देंगे। यात्रा के समापन के पश्चात संध्या मैथिली कार्यक्रम का आयोजन होगा, जो क्षेत्रीय कला और संस्कृति को समर्पित रहेगा।

“रामनवमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सत्य, मर्यादा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा है। इस यात्रा का उद्देश्य समाज में आपसी सौहार्द, भाईचारा और सनातन संस्कृति के मूल्यों को सुदृढ़ करना है।” – आयोजन समिति

बैठक में उपस्थित गणमान्य

बैठक के दौरान आयोजन को सफल बनाने के लिए रूपरेखा तैयार की गई, जिसमें मुख्य रूप से मिहीर ठाकुर, अजय झा, अभिषेक चौधरी, मुरारी मण्डल, अनित, अजीत, सचिन, आमोद झा, दुर्गा नन्द, रोहन, भरत, मुकेश, दीपक, टुनटुन, हेमंत, भविष्य, अक्षय, आशीष, सूरज और बंटी सहित भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

श्रद्धालुओं से अपील

समिति ने समस्त धर्म प्रेमियों और ग्रामवासियों से आग्रह किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस महाविशाल यात्रा में शामिल होकर पुण्य के भागी बनें। साथ ही, श्रद्धालुओं से यात्रा के दौरान शांति, अनुशासन और स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की गई है।

बिहार के स्वर्णिम काल के रूप में याद किया जाएगा नीतीश कुमार का कार्यकाल: ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव

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सुपौल, बिहार: बिहार सरकार के कद्दावर नेता कोशी के विश्वकर्मा और ऊर्जा मंत्री श्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व की जमकर सराहना की है। सुपौल जिले के निर्मली में आयोजित ‘समृद्धि यात्रा 2026’ के दौरान एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने राज्य में हुए बुनियादी ढांचागत बदलावों को ऐतिहासिक बताया।

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आजाद बिहार का स्वर्णिम युग

​मंत्री बिजेंद्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि साल 2005 से 2025 तक का कालखंड बिहार के इतिहास में “स्वर्ण अक्षरों” में लिखा जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की तस्वीर बदलने का जो संकल्प लिया था, वह आज धरातल पर दिख रहा है।

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14 घंटे का सफर अब सिर्फ 40 मिनट में

​विकास का उदाहरण देते हुए उन्होंने पुराने दिनों की याद ताजा की। उन्होंने बताया:

  • अतीत की चुनौती: एक समय था जब सुपौल से निर्मली पहुंचने में लोगों को 14 घंटे का समय लग जाता था। यातायात की स्थिति अत्यंत दयनीय थी।
  • आज की उपलब्धि: नीतीश कुमार सरकार के रोड कनेक्टिविटी और पुल निर्माण कार्यों की बदौलत आज यही दूरी मात्र 40 मिनट में तय की जा रही है।
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विपक्ष पर तीखा तंज

​गठबंधन की राजनीति और विपक्ष के हमलों पर बोलते हुए बिजेंद्र यादव ने कहा कि जब मुख्यमंत्री ने एनडीए (NDA) के साथ जाने का निर्णय लिया, तो विपक्ष के कई बड़े नेताओं के फोन आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार हमारे सर्वमान्य नेता हैं और उनके निर्णय के साथ पूरी पार्टी और राज्य की जनता मजबूती से खड़ी है।

​”हमारे नेता जो कहते हैं, वह करके दिखाते हैं। कोसी क्षेत्र में रेल पुल से लेकर सड़कों के जाल तक, आज जो कायापलट हुआ है, वह नीतीश कुमार की दूरदर्शिता का परिणाम है।” — बिजेंद्र प्रसाद यादव

​समृद्धि यात्रा के माध्यम से सरकार अपनी उपलब्धियों को जनता के बीच ले जा रही है। बिजेंद्र यादव का यह बयान न केवल कोसी क्षेत्र के विकास को रेखांकित करता है, बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिए भी एक मजबूत संदेश देता है।

मधुबनी: नारी रत्न सम्मान समारोह में गूंजी महिला सशक्तिकरण की गूँज, 180 से अधिक कर्मयोगिनी महिलाएं सम्मानित

Nari Ratna Samman Samaroh Madhubani Er Ganga Kumar

मधुबनी (फुलपरास): अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के गौरवशाली अवसर पर आज इंजीनियर गंगा कुमार (समाजसेवी) के नेतृत्व में फुलपरास के जनता हाई स्कूल, बेल्हा (मधुबनी) में “नारी रत्न सम्मान समारोह” सह “समाज में महिलाओं की भूमिका” विषयक संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी अमूल्य सेवा देने वाली 180 से अधिक महिलाओं को सम्मानित कर उनके योगदान को सराहा गया।

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प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति

​कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व विधान परिषद सदस्य सुमन महासेठ एवं विशिष्ट अतिथियों में पूर्व विधायक (लौकहा) भारत भूषण मंडल, पूर्व जिला परिषद सदस्य दौरिक पूर्वे उपस्थित रहे। मंच की शोभा बढ़ाने के लिए राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र की कई दिग्गज महिलाएं भी शामिल हुईं, जिनमें:

  • रंजीता प्रभा (प्रमुख, बाबूबरही)
  • कुमारी आशा (प्रमुख, खजौली)
  • कल्पना सिंह (नेत्री, राजद)
  • काजोल पूर्वे (पूर्व मेयर प्रत्याशी, मधुबनी)
  • कामिनी जी (समाजसेवी, जयनगर)
  • कामिनी सिंह (MBK, जीविका)
  • जया प्रिया (शिक्षिका)

समाज की नींव हैं ये महिलाएं

​आयोजक इंजीनियर गंगा कुमार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि समाज के निर्माण में महिलाओं का योगदान अतुलनीय है। इस समारोह का मुख्य उद्देश्य उन महिलाओं को सम्मान देना है जो जमीन पर रहकर समाज को सशक्त बना रही हैं।

​समारोह में 180 से अधिक महिलाओं को सम्मानित किया गया, जिनमें मुख्य रूप से:

  • आशा कार्यकर्ता
  • जीविका दीदियाँ
  • आंगनवाड़ी सेविकाएं
  • शिक्षिकाएं और ANM

संगोष्ठी: समाज में महिला की भूमिका

​सम्मान समारोह के साथ-साथ आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने वर्तमान परिवेश में महिलाओं की बदलती भूमिका पर प्रकाश डाला। अतिथियों ने कहा कि आज की नारी सिर्फ घर तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और राजनीति जैसे हर क्षेत्र में नेतृत्व कर रही है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में ‘जीविका दीदियों’ और स्वास्थ्य सेवाओं में ‘आशा एवं ANM’ के योगदान को ‘समाज की रीढ़’ बताया गया।

यह कार्यक्रम न केवल सम्मान देने का एक जरिया था, बल्कि समाज को यह संदेश देने का प्रयास भी था कि जब हम अपनी नारी शक्ति का सम्मान करते हैं, तभी एक उन्नत राष्ट्र का निर्माण संभव है।

रिपोर्ट: हरे कृष्णा यादव (BHOOMI NEWS LIVE)

UPSC Result Controversy: एक रैंक, दो दावेदार और बारकोड ने खोला राज! गाजीपुर vs आरा की आकांक्षा

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यूपीएससी (UPSC) के नतीजे जितनी खुशियां लाते हैं, कभी-कभी उतनी ही उलझनें भी पैदा कर देते हैं। इस साल 301वीं रैंक को लेकर उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की डॉ. आकांक्षा सिंह और बिहार के आरा की आकांक्षा सिंह के बीच जो विवाद खड़ा हुआ, उसने इंटरनेट पर नई बहस छेड़ दी है।

​लेकिन कहते हैं न कि ‘डिजिटल युग में झूठ की उम्र कम होती है’। दस्तावेजों की गहराई से पड़ताल और एक छोटे से बारकोड ने इस पूरे सस्पेंस से पर्दा उठा दिया है।

📊 ‘आकांक्षा vs आकांक्षा’: सस्पेंस का पूरा विश्लेषण

​इस विवाद को समझने के लिए नीचे दी गई तालिका देखें, जो दोनों अभ्यर्थियों के दावों की हकीकत बयां करती है:

विवरण डॉ. आकांक्षा सिंह (गाजीपुर, UP) आकांक्षा सिंह (आरा, बिहार)
दावा (Rank) 301 (AIR) 301 (AIR)
रोल नंबर08567940856794
बैकग्राउंडगायनेकोलॉजिस्ट, एम्स पटना (MD)ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती
बारकोड रिपोर्टरोल नंबर से 100% मैचबारकोड और रोल नंबर में विसंगति
वर्तमान स्थिति दावा बेहद मजबूत (सबूत सार्वजनिक किए) फोन बंद, रैंक 454 होने की चर्चा

🔍 बारकोड: वो ‘छोटा सा निशान’ जिसने सच उजागर किया

​इस हाई-प्रोफाइल विवाद को सुलझाने में सबसे बड़ी भूमिका एडमिट कार्ड के बारकोड ने निभाई। यूपीएससी की परीक्षा में एडमिट कार्ड पर एक यूनिक बारकोड होता है, जिसे एडिट करना नामुमकिन है।

  1. डॉ. आकांक्षा का पक्ष: गाजीपुर की डॉ. आकांक्षा ने सार्वजनिक रूप से अपना एडमिट कार्ड दिखाया। जब उनके बारकोड को स्कैन किया गया, तो वह उनके लिखे हुए रोल नंबर (0856794) से पूरी तरह मेल खाया।
  2. बिहार की आकांक्षा का पक्ष: आरा की आकांक्षा के एडमिट कार्ड पर ऊपर तो वही रोल नंबर अंकित था, लेकिन डिजिटल स्कैनिंग के दौरान बारकोड से कोई दूसरा नंबर निकलकर सामने आया। यह तकनीकी विसंगति उनके दावे को पूरी तरह कमजोर करती है।

👩‍⚕️ कौन हैं डॉ. आकांक्षा सिंह (जमानियां, गाजीपुर)?

​विवादों से परे, डॉ. आकांक्षा की कहानी प्रेरणा और मेहनत की मिसाल है:

  • पेशेवर पहचान: वह केवल एक यूपीएससी अभ्यर्थी नहीं, बल्कि एक पेशेवर डॉक्टर हैं। उन्होंने AIIMS पटना से अपनी मेडिकल की पढ़ाई (MD) पूरी की है और एक कुशल गायनेकोलॉजिस्ट हैं।
  • पारिवारिक पृष्ठभूमि: उनके पिता रंजीत सिंह भारतीय वायु सेना (Airforce) में जूनियर वारंट ऑफिसर हैं।
  • दृढ़ निश्चय: दिल्ली में रहकर तैयारी कर रहीं डॉ. आकांक्षा ने विवाद सामने आते ही तुरंत यूपीएससी से संपर्क किया और अपने सभी मूल दस्तावेज साझा किए, जिससे उनकी सच्चाई दुनिया के सामने आ गई।

💡तकनीक ने रोका ‘धोखा’

​अक्सर देखा जाता है कि समान नाम होने के कारण रोल नंबर में हेरफेर कर लोकप्रियता बटोरने की कोशिश की जाती है। लेकिन इस मामले ने साफ कर दिया है कि यूपीएससी जैसी संस्था की सुरक्षा प्रणाली को भेदना संभव नहीं है। आरा की आकांक्षा का फोन फिलहाल बंद है और सूत्रों की मानें तो उनकी असल रैंक 454 हो सकती है।

नोट: उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे रिजल्ट के समय केवल आधिकारिक वेबसाइट और अपने यूनिक क्रेडेंशियल्स पर ही भरोसा करें।

बिहार की राजनीति में बड़ा धमाका: JDU भी चल पड़ी राजद की राह पर..? निशांत कुमार की एंट्री के मायने

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बिहार की राजनीति में ‘परिवारवाद’ (Dynasty Politics) हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सार्वजनिक मंचों से अक्सर लालू यादव और कांग्रेस पर परिवार को आगे बढ़ाने का आरोप लगाते रहे हैं। लेकिन अब, निशांत कुमार (Nishant Kumar) के जनता दल यूनाइटेड (JDU) में सक्रिय होने की खबरों ने एक नई बहस छेड़ दी है।

​क्या जेडीयू भी अब उसी ‘परिवारवाद’ के अध्याय को लिखने जा रही है जिससे वह अब तक दूर होने का दावा करती थी?

​1. निशांत कुमार और जेडीयू: एक नया मोड़

​काफी समय से लो-प्रोफाइल रहने वाले नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार अब पार्टी के कार्यक्रमों और फीडबैक सिस्टम में सक्रिय दिख रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उन्हें जल्द ही पार्टी में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

  • बदलाव का संकेत: कार्यकर्ताओं की बढ़ती मांग और पार्टी के भीतर उत्तराधिकारी की तलाश निशांत को केंद्र में ला रही है।
  • युवा चेहरा: जेडीयू इसे एक युवा नेतृत्व के तौर पर पेश करने की कोशिश कर सकती है।

2. ‘परिवारवाद’ पर नीतीश कुमार का स्टैंड और वर्तमान स्थिति

​नीतीश कुमार ने हमेशा यह गर्व से कहा है कि उनके परिवार का कोई भी सदस्य राजनीति में नहीं है। उन्होंने कर्पूरी ठाकुर के सिद्धांतों का हवाला देते हुए खुद को वंशवाद की राजनीति से अलग रखा।

​”जेडीयू अभी तक बिहार की इकलौती बड़ी पार्टी मानी जाती थी जो परिवारवाद के साये से मुक्त थी। लेकिन निशांत कुमार के आने के बाद, विरोधियों को अब नीतीश कुमार पर हमला करने का एक बड़ा हथियार मिल गया है।”

​3. क्या JDU अब RJD की राह पर है?

​बिहार में राजद (RJD) पर हमेशा यह आरोप लगता है कि वह एक परिवार की पार्टी है। तेजस्वी यादव, तेज प्रताप और मीसा भारती का राजनीति में दबदबा इसका उदाहरण है।

​अब यदि निशांत कुमार जेडीयू की कमान संभालते हैं या अहम पद पर आते हैं, तो जेडीयू और राजद के बीच का वह ‘नैतिक अंतर’ (Moral Difference) खत्म हो जाएगा जो नीतीश कुमार की यूएसपी (USP) रही है।

तुलनात्मक नजरिया:

विशेषताआरजेडी (RJD)जेडीयू (JDU) – नया ट्रेंड
मुख्य नेतृत्वलालू यादव परिवारअब निशांत कुमार की चर्चा
दावासामाजिक न्यायसुशासन और परिवारवाद का विरोध
उत्तराधिकारीतेजस्वी यादवनिशांत कुमार (संभावित)

4. सोशल मीडिया और जनता की राय

​इंटरनेट पर इस खबर के आते ही लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ इसे पार्टी की मजबूती के लिए जरूरी बता रहे हैं, तो कुछ इसे नीतीश कुमार के सिद्धांतों के साथ ‘समझौता’ कह रहे हैं।

निशांत कुमार का राजनीति में आना जेडीयू के लिए अस्तित्व बचाने की मजबूरी है या नीतीश कुमार का हृदय परिवर्तन, यह तो वक्त बताएगा। लेकिन एक बात साफ है—बिहार की राजनीति में अब ‘परिवारवाद’ का मुद्दा एक नया मोड़ ले चुका है।