भ्रष्टाचार का हाई वोल्टेज: लाइनमैन से बना करोड़पति, आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के रडार पर दरभंगा का ओम प्रकाश

दरभंगा करोड़पति लाइनमैन ओम प्रकाश आलीशान मकान जांच
प्रतीकात्मक चित्र (AI द्वारा निर्मित)

दरभंगा। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही ‘जीरो टॉलरेंस’ की मुहिम के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बिजली विभाग के बहादुरपुर सेक्शन में तैनात एक साधारण सा लाइनमैन, ओम प्रकाश, आज अपनी अकूत संपत्ति और आलीशान जीवनशैली के कारण आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के निशाने पर है। आरोप है कि लाइनमैन की वर्दी की आड़ में ओम प्रकाश ने लाइजनिंग और उगाही का ऐसा साम्राज्य खड़ा किया, जिसने उसे रातों-रात करोड़पति बना दिया।

लाइनमैन की आड़ में ‘सिंडिकेट’ का संचालन

सूत्रों के मुताबिक, ओम प्रकाश केवल बिजली के खंभों तक सीमित नहीं था। विभाग के भीतर उसकी पहचान एक ऐसे ‘लाइजनर’ के रूप में थी, जो बड़े अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच सेतु का काम करता था। आरोप है कि वह बिजली विभाग के बड़े पदाधिकारियों के लिए उगाही और लाइजनिंग (Liaisoning) का सारा खेल मैनेज करता था। इसी प्रभाव का इस्तेमाल कर उसने ठेकेदारी और अवैध वसूली के जरिए करोड़ों की काली कमाई जमा की है।

दोनार गंज का ‘सफेद महल’ चर्चा का केंद्र

दरभंगा शहर के दोनार गंज इलाके में स्थित ओम प्रकाश का आलीशान मकान इन दिनों पूरे शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक लाइनमैन के वेतन से इतना भव्य और कीमती मकान बनाना नामुमकिन माना जा रहा है। स्थानीय लोगों और विभागीय सूत्रों की मानें तो यह मकान भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ा है। EOU की टीम अब इस संपत्ति के साथ-साथ अन्य निवेशों का भी ब्योरा खंगाल रही है।

EOU की रडार पर बड़ा नेटवर्क

आर्थिक अपराध इकाई को शक है कि ओम प्रकाश महज एक मोहरा है। इसके पीछे बिजली विभाग के कई बड़े सफेदपोश अधिकारियों का हाथ हो सकता है। जांच के केंद्र में मुख्य रूप से ये बिंदु हैं:

  • अवैध ठेकेदारी: क्या सरकारी पद पर रहते हुए उसने अपने करीबियों के नाम पर ठेके लिए?
  • लाइजनिंग का खेल: किन-किन बड़े अधिकारियों तक उगाही की रकम पहुंचाई जाती थी?
  • बेनामी संपत्ति: दरभंगा और उसके आसपास अन्य कितनी संपत्तियां ओम प्रकाश और उसके परिजनों के नाम पर हैं?

जीरो टॉलरेंस के तहत होगी कार्रवाई

राज्य सरकार और विभाग ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। ओम प्रकाश के खिलाफ सबूत जुटाए जा रहे हैं और जल्द ही उसकी संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है। इस खुलासे के बाद बिजली विभाग के गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है, क्योंकि जांच की आंच कई वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच सकती है।

“साधारण वेतन पाने वाला एक लाइनमैन आखिर कैसे करोड़ों का मालिक बन गया? यह जांच का विषय है। आर्थिक अपराध इकाई इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचेगी।” – (विभागीय सूत्र)

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी प्राप्त सूत्रों और सोशल मीडिया पर प्रसारित सूचनाओं पर आधारित है। संबंधित विभाग या आर्थिक अपराध इकाई (EOU) द्वारा जांच अभी जारी है। किसी भी व्यक्ति पर लगे आरोपों की पुष्टि केवल कानूनी प्रक्रिया और अदालत के माध्यम से ही संभव है। हमारा उद्देश्य केवल सूचना साझा करना है, किसी की छवि को धूमिल करना नहीं।

बिहार राज्यसभा चुनाव 2026: NDA का क्लीन स्वीप, पांचों सीटों पर कब्ज़ा, विपक्ष के हाथ खाली

NDA Ka Clean Sweep or The NDA Wins it Cleanly,

Patna News: बिहार की राजनीति में आज का दिन ऐतिहासिक रहा। राज्यसभा की 5 सीटों के लिए हुए चुनाव में NDA (National Democratic Alliance) ने अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए सभी 5 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की है। विपक्षी गठबंधन महागठबंधन को इस चुनाव में करारी शिकस्त मिली है, जहाँ राजद (RJD) अपनी एक सीट भी बचाने में नाकाम रही।

विजेता उम्मीदवारों की लिस्ट (NDA Winners List)

इस चुनाव में NDA की ओर से उतारे गए सभी पांचों उम्मीदवारों ने जीत का परचम लहराया:

  1. नीतीश कुमार (जनता दल यूनाइटेड – JDU)
  2. नितिन नवीन (भारतीय जनता पार्टी – BJP)
  3. रामनाथ ठाकुर (जनता दल यूनाइटेड – JDU)
  4. शिवेश कुमार (भारतीय जनता पार्टी – BJP)
  5. उपेंद्र कुशवाहा (राष्ट्रीय लोक मोर्चा – RLM)

कैसा रहा जीत का समीकरण?

बिहार विधानसभा के मौजूदा संख्या बल (NDA के पास 202 विधायक) को देखते हुए यह जीत पहले से ही तय मानी जा रही थी। हालांकि, 5वीं सीट के लिए राजद के अमरेंद्र धारी सिंह ने मुकाबले को रोचक बनाने की कोशिश की थी, लेकिन एनडीए की एकजुटता के सामने विपक्ष पस्त हो गया।

  • वोटों का गणित: एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 41 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत थी।
  • महागठबंधन में सेंध: खबरों के मुताबिक, वोटिंग के दौरान विपक्ष के कुछ विधायकों की अनुपस्थिति और क्रॉस वोटिंग की चर्चाओं ने राजद की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
  • नीतीश कुमार की नई पारी: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना इस चुनाव का सबसे बड़ा ‘टर्निंग पॉइंट’ रहा, जो बिहार की भविष्य की राजनीति की ओर इशारा कर रहा है।

विपक्ष (RJD) को लगा बड़ा झटका

राजद के लिए यह परिणाम किसी झटके से कम नहीं है। प्रेमचंद गुप्ता और अमरेंद्र धारी सिंह जैसे दिग्गज नेताओं का कार्यकाल समाप्त होने के बाद पार्टी राज्यसभा में अपना प्रतिनिधित्व बढ़ाने की उम्मीद कर रही थी, लेकिन एनडीए के अभेद्य किले को नहीं तोड़ सकी।

इस जीत के साथ ही राज्यसभा में एनडीए की ताकत और बढ़ गई है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मिली प्रचंड जीत के बाद, राज्यसभा की इन 5 सीटों पर कब्ज़ा करना नीतीश-मोदी की जोड़ी के लिए एक बड़ी नैतिक और राजनीतिक जीत है।

बिहार प्रदेश जद(यू) सांगठनिक निर्वाचन 2026: नवनिर्वाचित जिलाध्यक्षों की सूची जारी

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पटना: जनता दल (यूनाइटेड) में सांगठनिक मजबूती और भविष्य की रणनीतियों को देखते हुए एक बड़ा कदम उठाया गया है। बिहार प्रदेश जद(यू) सांगठनिक निर्वाचन-2026 के अंतर्गत, मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार की स्वीकृति के बाद राज्य निर्वाचन पदाधिकारी अशोक कुमार ने शेष सांगठनिक जिलाध्यक्षों की आधिकारिक सूची जारी कर दी है।

​इस सूची में पार्टी के समर्पित और अनुभवी कार्यकर्ताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं। यह नियुक्तियाँ पार्टी के निचले स्तर (Grassroot level) को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से की गई हैं।

नवनियुक्त जिलाध्यक्षों की सूची (प्रमुख जिले)

​कार्यालय आदेश संख्या 52/26 के अनुसार, निम्नलिखित प्रमुख नामों की घोषणा की गई है:

क्र०सं०जिला / नगर का नामनिर्वाचित अध्यक्ष का नाम
1मुजफ्फरपुरश्री अनुपम सिंह
2पटना नगरश्री राधेश्याम कुशवाहा
3गया (बेगूसराय)श्री नन्द लाल राय
4नालंदामो० मसरूर अहमद जुबैरी उर्फ मो० अरशद
5आरा नगरश्री जय प्रकाश चौधरी
6सीवानश्री विकास कुमार सिंह उर्फ जीसू सिंह

(पूरी सूची के लिए नीचे दिए गए आधिकारिक पत्र को देखें)

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संगठन को मिलेगी नई धार

​राज्य निर्वाचन पदाधिकारी अशोक कुमार द्वारा हस्ताक्षरित इस सूची में कुल 25 सांगठनिक क्षेत्रों के नामों की घोषणा की गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन नई नियुक्तियों से आगामी चुनावों और पार्टी के विस्तार कार्यों में नई ऊर्जा का संचार होगा।

​पार्टी नेतृत्व ने सभी नवनिर्वाचित जिलाध्यक्षों को उनके इस महत्वपूर्ण दायित्व के लिए हार्दिक बधाई और सफल कार्यकाल की शुभकामनाएँ दी हैं।

“संगठन की मजबूती ही हमारी असली ताकत है। नए पदाधिकारियों के चयन से पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है।”

क्या आप अपने जिले के नवनियुक्त अध्यक्ष के बारे में और जानकारी चाहते हैं? हमें कमेंट में बताएं!

बिहार के स्वर्णिम काल के रूप में याद किया जाएगा नीतीश कुमार का कार्यकाल: ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव

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सुपौल, बिहार: बिहार सरकार के कद्दावर नेता कोशी के विश्वकर्मा और ऊर्जा मंत्री श्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व की जमकर सराहना की है। सुपौल जिले के निर्मली में आयोजित ‘समृद्धि यात्रा 2026’ के दौरान एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने राज्य में हुए बुनियादी ढांचागत बदलावों को ऐतिहासिक बताया।

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आजाद बिहार का स्वर्णिम युग

​मंत्री बिजेंद्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि साल 2005 से 2025 तक का कालखंड बिहार के इतिहास में “स्वर्ण अक्षरों” में लिखा जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की तस्वीर बदलने का जो संकल्प लिया था, वह आज धरातल पर दिख रहा है।

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14 घंटे का सफर अब सिर्फ 40 मिनट में

​विकास का उदाहरण देते हुए उन्होंने पुराने दिनों की याद ताजा की। उन्होंने बताया:

  • अतीत की चुनौती: एक समय था जब सुपौल से निर्मली पहुंचने में लोगों को 14 घंटे का समय लग जाता था। यातायात की स्थिति अत्यंत दयनीय थी।
  • आज की उपलब्धि: नीतीश कुमार सरकार के रोड कनेक्टिविटी और पुल निर्माण कार्यों की बदौलत आज यही दूरी मात्र 40 मिनट में तय की जा रही है।
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विपक्ष पर तीखा तंज

​गठबंधन की राजनीति और विपक्ष के हमलों पर बोलते हुए बिजेंद्र यादव ने कहा कि जब मुख्यमंत्री ने एनडीए (NDA) के साथ जाने का निर्णय लिया, तो विपक्ष के कई बड़े नेताओं के फोन आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार हमारे सर्वमान्य नेता हैं और उनके निर्णय के साथ पूरी पार्टी और राज्य की जनता मजबूती से खड़ी है।

​”हमारे नेता जो कहते हैं, वह करके दिखाते हैं। कोसी क्षेत्र में रेल पुल से लेकर सड़कों के जाल तक, आज जो कायापलट हुआ है, वह नीतीश कुमार की दूरदर्शिता का परिणाम है।” — बिजेंद्र प्रसाद यादव

​समृद्धि यात्रा के माध्यम से सरकार अपनी उपलब्धियों को जनता के बीच ले जा रही है। बिजेंद्र यादव का यह बयान न केवल कोसी क्षेत्र के विकास को रेखांकित करता है, बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिए भी एक मजबूत संदेश देता है।

बिहार की राजनीति में बड़ा धमाका: JDU भी चल पड़ी राजद की राह पर..? निशांत कुमार की एंट्री के मायने

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बिहार की राजनीति में ‘परिवारवाद’ (Dynasty Politics) हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सार्वजनिक मंचों से अक्सर लालू यादव और कांग्रेस पर परिवार को आगे बढ़ाने का आरोप लगाते रहे हैं। लेकिन अब, निशांत कुमार (Nishant Kumar) के जनता दल यूनाइटेड (JDU) में सक्रिय होने की खबरों ने एक नई बहस छेड़ दी है।

​क्या जेडीयू भी अब उसी ‘परिवारवाद’ के अध्याय को लिखने जा रही है जिससे वह अब तक दूर होने का दावा करती थी?

​1. निशांत कुमार और जेडीयू: एक नया मोड़

​काफी समय से लो-प्रोफाइल रहने वाले नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार अब पार्टी के कार्यक्रमों और फीडबैक सिस्टम में सक्रिय दिख रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उन्हें जल्द ही पार्टी में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

  • बदलाव का संकेत: कार्यकर्ताओं की बढ़ती मांग और पार्टी के भीतर उत्तराधिकारी की तलाश निशांत को केंद्र में ला रही है।
  • युवा चेहरा: जेडीयू इसे एक युवा नेतृत्व के तौर पर पेश करने की कोशिश कर सकती है।

2. ‘परिवारवाद’ पर नीतीश कुमार का स्टैंड और वर्तमान स्थिति

​नीतीश कुमार ने हमेशा यह गर्व से कहा है कि उनके परिवार का कोई भी सदस्य राजनीति में नहीं है। उन्होंने कर्पूरी ठाकुर के सिद्धांतों का हवाला देते हुए खुद को वंशवाद की राजनीति से अलग रखा।

​”जेडीयू अभी तक बिहार की इकलौती बड़ी पार्टी मानी जाती थी जो परिवारवाद के साये से मुक्त थी। लेकिन निशांत कुमार के आने के बाद, विरोधियों को अब नीतीश कुमार पर हमला करने का एक बड़ा हथियार मिल गया है।”

​3. क्या JDU अब RJD की राह पर है?

​बिहार में राजद (RJD) पर हमेशा यह आरोप लगता है कि वह एक परिवार की पार्टी है। तेजस्वी यादव, तेज प्रताप और मीसा भारती का राजनीति में दबदबा इसका उदाहरण है।

​अब यदि निशांत कुमार जेडीयू की कमान संभालते हैं या अहम पद पर आते हैं, तो जेडीयू और राजद के बीच का वह ‘नैतिक अंतर’ (Moral Difference) खत्म हो जाएगा जो नीतीश कुमार की यूएसपी (USP) रही है।

तुलनात्मक नजरिया:

विशेषताआरजेडी (RJD)जेडीयू (JDU) – नया ट्रेंड
मुख्य नेतृत्वलालू यादव परिवारअब निशांत कुमार की चर्चा
दावासामाजिक न्यायसुशासन और परिवारवाद का विरोध
उत्तराधिकारीतेजस्वी यादवनिशांत कुमार (संभावित)

4. सोशल मीडिया और जनता की राय

​इंटरनेट पर इस खबर के आते ही लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ इसे पार्टी की मजबूती के लिए जरूरी बता रहे हैं, तो कुछ इसे नीतीश कुमार के सिद्धांतों के साथ ‘समझौता’ कह रहे हैं।

निशांत कुमार का राजनीति में आना जेडीयू के लिए अस्तित्व बचाने की मजबूरी है या नीतीश कुमार का हृदय परिवर्तन, यह तो वक्त बताएगा। लेकिन एक बात साफ है—बिहार की राजनीति में अब ‘परिवारवाद’ का मुद्दा एक नया मोड़ ले चुका है।

मधुबनी: झंझारपुर में ग्रामीणों का गुस्सा फूटा, आवास सहायक को बनाया बंधक; अवैध उगाही का संगीन आरोप

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​​झंझारपुर (मधुबनी): बिहार के मधुबनी जिले के झंझारपुर प्रखंड अंतर्गत संतनगर पंचायत में शनिवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब ग्रामीणों ने भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर पंचायत आवास सहायक और एक अन्य कर्मी को घंटों बंधक बनाए रखा। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के नाम पर पंचायत में बड़े पैमाने पर अवैध वसूली का खेल चल रहा है।

​क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, आवास सहायक प्रमोद कुमार महतो एक पूर्व कर्मी राजकुमार चौधरी के साथ संतनगर पंचायत के इमादपट्टी गांव में जांच के लिए पहुंचे थे। ग्रामीणों का दावा है कि जांच के नाम पर लाभुकों को डराया जा रहा था कि सर्वेक्षण सूची से करीब 800 लोगों के नाम काटे जा रहे हैं। सूची में नाम बरकरार रखने के एवज में प्रति लाभुक 700 रुपये की मांग की जा रही थी।

25 से 30 लाख की वसूली का आरोप

ग्रामीणों ने तंत्र पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह भ्रष्टाचार की पहली किस्त नहीं है। उनके अनुसार:

  • ​​सूची निर्माण: शुरुआत में 1,000 रुपये लिए गए।
  • सर्वेक्षण: पंचायत सचिव राम नारायण राम द्वारा 500 रुपये की कथित वसूली।
  • वर्तमान मांग: आवास सहायक द्वारा फिर से 700 रुपये की मांग।

ग्रामीणों का कहना है कि अब तक पूरे पंचायत से आवास योजना के नाम पर 25 से 30 लाख रुपये की अवैध उगाही की जा चुकी है।

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

​​स्थिति बिगड़ती देख स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि ने पुलिस को सूचना दी। भैरवस्थान थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को शांत कराया और लिखित आवेदन लेने के बाद बंधक बनाए गए कर्मियों को अपनी सुरक्षा में लेकर थाना पहुंचाया।

​दो पक्षों में बंटा मामला: आरोप बनाम अपहरण

इस घटना के बाद प्रशासन और कर्मियों का रुख ग्रामीणों के आरोपों से बिल्कुल अलग है:

पक्षमुख्य तर्क / बयान
ग्रामीणजांच के नाम पर अवैध वसूली हो रही है, इसलिए बीडीओ को मौके पर बुलाने की मांग की गई।
BDO (प्रखंड विकास पदाधिकारी)वसूली के आरोप निराधार हैं। असामाजिक तत्वों ने सरकारी कर्मी को अगवा कर बंधक बनाया और मारपीट की।
आवास सहायक (पीड़ित)मुझे जबरन मोटरसाइकिल पर बैठाकर अगवा किया गया और जान से मारने की कोशिश की गई।

आवास सहायकों ने दी कार्य बहिष्कार की चेतावनी

इस घटना के विरोध में प्रखंड के अन्य आवास सहायकों ने नाराजगी जताई है। उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई न होने पर कार्य बहिष्कार का अल्टीमेटम दिया है। पीड़ित आवास सहायक प्रमोद कुमार महतो ने स्थानीय थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई है।

नोट: फिलहाल पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। एक तरफ जहां भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच होनी है, वहीं दूसरी ओर सरकारी कर्मी के साथ हुई मारपीट पर कानूनी शिकंजा कसना तय है।

मधुबनी में सड़क निर्माण की नई क्रांति: FDR तकनीक से PMGSY-3 की सड़कों का कायाकल्प

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बिहार के मधुबनी जिले में ग्रामीण बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूत करने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) फेज-3 के तहत जिले में पहली बार अत्याधुनिक FDR (Full Depth Restoration) तकनीक का उपयोग कर सड़कों का निर्माण किया जा रहा है।

यह तकनीक न केवल सड़कों को अधिक टिकाऊ बना रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम मानी जा रही है। आइए जानते हैं क्या है यह तकनीक और मधुबनी के ग्रामीणों को इससे क्या लाभ मिलने वाला है।

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​टी-28 बेलहा से खुटौना तक सड़क का

मधुबनी जिले के खुटौना प्रखंड में टी-28 बेलहा से ललमनियां होते हुए प्रखंड मुख्यालय तक जाने वाली 15.350 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इस परियोजना की खास बातें निम्नलिखित हैं:

  • कुल लंबाई: 15.350 किमी।
  • प्रगति: लगभग 6.450 किमी हिस्से में पीसीसी और पुल-पुलिया का कार्य पूर्ण।
  • शेष कार्य: 8.900 किमी में डामरीकरण (Blacktopping) का कार्य अत्याधुनिक मशीनों से जारी।
  • ट्रायल प्रोजेक्ट: यह दरभंगा-कोसी प्रमंडल का पहला ट्रायल प्रोजेक्ट है, जिसे भविष्य के लिए मॉडल माना जा रहा है।
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क्या है FDR (Full Depth Restoration) तकनीक?

साधारण भाषा में कहें तो FDR पुरानी सड़क को उखाड़कर फेंकने के बजाय उसे ‘रिसाइकिल’ करने की एक प्रक्रिया है।

  • पुरानी सामग्री का उपयोग: इसमें विशेष मशीनों द्वारा पुरानी सड़क की परतों को पीस दिया जाता है।
  • स्टेबलाइजेशन: पिसी हुई सामग्री में सीमेंट, चूना या अन्य स्टेबलाइजर मिलाए जाते हैं।
  • मजबूत आधार: इस मिश्रण को वापस बिछाकर भारी रोलरों से दबाया जाता है, जिससे एक बेहद मजबूत ‘बेस लेयर’ तैयार होती है।
  • अंतिम परत: इसके ऊपर डामर या कंक्रीट की अंतिम परत डाली जाती है।
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FDR तकनीक के फायदे (Benefits of FDR Technology)

  • अत्यधिक टिकाऊ: यह तकनीक सड़क की नींव को इतना मजबूत बना देती है कि भारी वाहनों का दबाव सहना आसान हो जाता है।
  • लागत में कमी: पुरानी निर्माण सामग्री का पुन: उपयोग होने के कारण नई सामग्री (गिट्टी, मिट्टी) की जरूरत कम पड़ती है, जिससे लागत घटती है।
  • पर्यावरण के अनुकूल: नई खदानों से पत्थर निकालने की जरूरत कम होती है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों की बचत होती है।
  • समय की बचत: पारंपरिक तरीकों की तुलना में इस तकनीक से सड़क निर्माण काफी तेजी से पूरा होता है।
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स्थानीय विकास को मिलेगी नई रफ्तार

खुटौना और आसपास के ग्रामीणों के लिए यह सड़क किसी लाइफलाइन से कम नहीं है। बेहतर कनेक्टिविटी से स्वास्थ्य, शिक्षा और व्यापारिक गतिविधियों में सुधार होगा। निर्माण एजेंसी NKSP Infra Pvt. Ltd. के निर्देशक फिरोज यादव के अनुसार, इस तकनीक से बनी सड़कें लंबे समय तक चलेंगी और इन्हें बार-बार मरम्मत की आवश्यकता नहीं होगी।

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मधुबनी में FDR तकनीक का यह सफल प्रयोग बिहार के अन्य जिलों के लिए एक मिसाल पेश करेगा। अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो आने वाले समय में राज्य की सभी ग्रामीण सड़कों को इसी आधुनिक और किफायती तकनीक से बनाया जा सकता है।

बिहार में आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मियों के लिए न्याय का नया सवेरा: सुप्रीम कोर्ट और पटना हाईकोर्ट के 2025 के बड़े फैसले

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पटना | भूमि न्यूज़ लाइव: बिहार के लाखों संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए न्यायपालिका ने ऐतिहासिक बदलाव किए हैं। सुप्रीम कोर्ट और पटना हाईकोर्ट के 2025 के नवीनतम आदेशों ने अब सरकार और निजी एजेंसियों की मनमानी पर रोक लगा दी है।

1. समान काम, समान वेतन (Equal Pay for Equal Work)

केस: स्टेट ऑफ पंजाब बनाम जगजीत सिंह (विस्तारित आदेश 2025) कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि आउटसोर्स कर्मचारी नियमित स्टाफ जैसा ही काम कर रहे हैं, तो वे न्यूनतम वेतनमान (Basic + DA) के हकदार हैं। उन्हें केवल न्यूनतम मजदूरी देकर शोषण नहीं किया जा सकता।

2. स्थायी प्रकृति का काम (Perennial Nature of Work)

केस: सुप्रीम कोर्ट (अगस्त 2025 निर्देश) अदालत ने कहा कि जो काम ‘बारहमासी’ या स्थायी हैं (जैसे क्लर्क, ड्राइवर, डाटा एंट्री ऑपरेटर, सफाई कर्मी), उन्हें सालों-साल आउटसोर्सिंग पर नहीं रखा जा सकता। सरकार को इन पदों पर नियमित बहाली की दिशा में कदम उठाना होगा।

3. अनुभव को मान्यता और बोनस अंक

केस: पटना हाईकोर्ट (CWJC 1981/2025) बिहार के संदर्भ में यह सबसे बड़ा आदेश है। अब सरकारी बहाली में:

अनुभवी कर्मियों को उम्र सीमा (Age Relaxation) में विशेष छूट मिलेगी।

संविदा/आउटसोर्स कर्मियों को अनुभव का वेटेज (Bonus Marks) मिलेगा।

प्रति वर्ष अनुभव के लिए 5 अंक (अधिकतम 25 अंक) का लाभ दिया जाएगा।

4. नियमितीकरण (Regularisation) का नया आधार

केस: पटना हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट (2025 विश्लेषण) कोर्ट ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी थी और वह 10 वर्षों से अधिक सेवा दे चुका है, तो केवल ‘आउटसोर्स’ लेबल लगाकर उसे नियमितीकरण के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

  • वेतन: पद के न्यूनतम पे-स्केल की गारंटी।
  • अनुभव: नियमित बहाली में प्राथमिकता और बोनस अंक।
  • सुरक्षा: बिना ठोस कारण और नोटिस के काम से हटाने पर रोक।

बिहार में आउटसोर्सिंग व्यवस्था अक्सर भ्रष्टाचार और शोषण का अड्डा बनी रही है। लेकिन न्यायपालिका के इन कड़े फैसलों ने बेलट्रॉन (BELTRON) से लेकर स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य विभागो में कार्यरत लाखों युवाओं को एक नई ताकत दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बिहार सरकार इन फैसलों को जमीन पर कितनी तेजी से उतारती है।- कार्तिक कुमार

बिहार की राजनीति: जदयू प्रवक्ता मनीष यादव का तेजस्वी पर तीखा प्रहार, ‘नैतिकता’ पर उठाए सवाल

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बिहार की राजनीति में जुबानी जंग कोई नई बात नहीं है, लेकिन हाल ही में जदयू (JDU) प्रवक्ता मनीष यादव ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर जो हमला बोला है, उसने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच की खाई को और गहरा कर दिया है। मनीष यादव ने तेजस्वी यादव की सदन में अनुपस्थिति को मुद्दा बनाते हुए उनके पद की नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

क्या है पूरा मामला ?

जदयू प्रवक्ता मनीष यादव ने एक बयान जारी करते हुए तेजस्वी यादव की कार्यशैली पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब तेजस्वी यादव सदन की कार्यवाही में हिस्सा ही नहीं लेते और सदन में मौजूद नहीं रहते, तो उन्हें ‘नेता प्रतिपक्ष’ की जिम्मेदारी और सुख-सुविधाओं का मोह क्यों है?

मनीष यादव के तीखे सवाल

मनीष यादव ने अपने बयान में मुख्य रूप से तीन बातें रेखांकित कीं:

  • जिम्मेदारी से भागने का आरोप: उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष का पद संवैधानिक जिम्मेदारी का होता है। अगर आप सदन में जनता की आवाज उठाने के लिए उपस्थित नहीं हो सकते, तो आपको पद पर बने रहने का कोई हक नहीं है।
  • पद छोड़ने की चुनौती: जदयू प्रवक्ता ने सीधे शब्दों में कहा, “जब आप सदन की कार्यवाही में नहीं आते, तो नैतिकता के आधार पर नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी क्यों नहीं छोड़ देते?”
  • जनता के साथ विश्वासघात: उन्होंने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव केवल ट्विटर और सोशल मीडिया की राजनीति करते हैं, जबकि असल मुद्दों पर सदन में चर्चा के समय वे नदारद रहते हैं।

विपक्ष का घेराव और राजनीतिक मायने

यह पहली बार नहीं है जब जदयू ने तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति को मुद्दा बनाया है। एनडीए के नेताओं का अक्सर यह तर्क रहता है कि तेजस्वी महत्वपूर्ण विधायी सत्रों के दौरान बिहार से बाहर रहते हैं।

मनीष यादव के इस हमले के पीछे की रणनीति स्पष्ट है: जनता के बीच तेजस्वी यादव को एक ‘पार्ट-टाइम’ राजनेता के रूप में पेश करना।

बिहार विधानसभा चुनाव की आहट जैसे-जैसे करीब आएगी, इस तरह के हमले और तेज होंगे। अब देखना यह है कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) मनीष यादव के इन आरोपों का क्या जवाब देती है और क्या तेजस्वी यादव अपनी सदन में उपस्थिति को लेकर कोई नई रणनीति अपनाते हैं।

फुलपरास: 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में वामपंथी नेताओं ने NH जाम कर किया प्रदर्शन

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मधुबनी (बिहार): केंद्र सरकार की ‘मजदूर और किसान विरोधी’ नीतियों के खिलाफ आज, 12 फरवरी 2026 को ट्रेड यूनियनों और वामपंथी दलों द्वारा बुलाए गए देशव्यापी हड़ताल का असर बिहार के मधुबनी जिले में भी देखने को मिला। इसी क्रम में फुलपरास के लोहिया चौक पर सीपीआई (एम) (CPI-M) और विभिन्न वामपंथी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) को जाम कर विरोध प्रदर्शन किया।

प्रमुख मांगें जिन पर रहा जोर:

प्रदर्शनकारियों ने हाथों में लाल झंडे और बैनर लेकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनके मुख्य एजेंडे में निम्नलिखित मांगें शामिल थीं:

  • चार लेबर कोड वापस लो: कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार श्रम कानूनों (Labour Codes) को वापस लेने की मांग की, जिसे वे मजदूर विरोधी बता रहे हैं।
  • किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी: कृषि उत्पादों के लिए कानूनी रूप से MSP की मांग दोहराई गई।
  • मनरेगा कानून में बदलाव वापस लो: मनरेगा के बजट में कटौती और इसके स्वरूप में बदलाव का विरोध करते हुए इसे पुराने स्वरूप में बहाल करने की मांग की गई।
  • निजीकरण पर रोक: सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के निजीकरण को रोकने की आवाज बुलंद की गई।

नेताओं का बयान

मौके पर मौजूद अंचल कमेटी, फुलपरास के नेताओं ने संबोधित करते हुए कहा कि जब तक सरकार इन ‘काले कानूनों’ को वापस नहीं लेती, तब तक यह आंदोलन और भी उग्र होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि विकसित भारत के नाम पर मजदूरों को बंधुआ बनाने की साजिश रची जा रही है।