मधुबनी में LPG की किल्लत नहीं, अफवाह फैलाने और जमाखोरी करने वालों पर होगी जेल: DM आनंद शर्मा

DM Anand Sharma and SP Yogendra Kumar press conference Madhubani.

मधुबनी। जिले में पिछले कुछ दिनों से रसोई गैस (LPG) को लेकर फैल रही अफवाहों और उपभोक्ताओं के बीच मची अफरातफरी पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। आज जिलाधिकारी आनंद शर्मा एवं पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार ने संयुक्त रूप से प्रेस वार्ता कर जिले में गैस की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की वर्तमान स्थिति साझा की।

आपूर्ति सामान्य, घबराने की जरूरत नहीं

​जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने स्पष्ट किया कि मधुबनी जिले में लगभग 10 लाख एलपीजी उपभोक्ता हैं और उनके लिए पर्याप्त मात्रा में गैस का स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने कहा, आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। आम जनता अफवाहों पर ध्यान न दें और पैनिक होकर अनावश्यक बुकिंग न करें। घरों में सिलेंडर का भंडारण करना न केवल गैर-कानूनी है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी खतरनाक है।”

जमाखोरों पर प्रशासन का ‘हंटर’

​कालाबाजारी और अवैध भंडारण की शिकायतों पर पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार ने बताया कि:

  • ​अब तक जिले के विभिन्न क्षेत्रों में छापेमारी कर 3 प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई हैं।
  • ​दोषियों को पकड़कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा रहा है।
  • ​इन मामलों में स्पीडी ट्रायल चलाकर जल्द से जल्द सजा दिलाई जाएगी ताकि कालाबाजारी करने वालों को कड़ा संदेश मिले।

आमजन के लिए प्रशासन की अपील:

  1. अफवाहों से बचें: सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैल रही कमी की खबरों पर भरोसा न करें।
  2. सहयोग करें: गैस एजेंसियां सुचारू रूप से वितरण कर रही हैं, व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का साथ दें।
  3. भंडारण न करें: जरूरत से ज्यादा सिलेंडर घर में न रखें, ताकि वास्तविक जरूरतमंदों को परेशानी न हो।

प्रशासन का संदेश साफ है: आपूर्ति में कोई बाधा नहीं है, लेकिन यदि कोई वेंडर या व्यक्ति कालाबाजारी में संलिप्त पाया गया, तो उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई निश्चित है।

बिहार राज्यसभा चुनाव 2026: NDA का क्लीन स्वीप, पांचों सीटों पर कब्ज़ा, विपक्ष के हाथ खाली

NDA Ka Clean Sweep or The NDA Wins it Cleanly,

Patna News: बिहार की राजनीति में आज का दिन ऐतिहासिक रहा। राज्यसभा की 5 सीटों के लिए हुए चुनाव में NDA (National Democratic Alliance) ने अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए सभी 5 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की है। विपक्षी गठबंधन महागठबंधन को इस चुनाव में करारी शिकस्त मिली है, जहाँ राजद (RJD) अपनी एक सीट भी बचाने में नाकाम रही।

विजेता उम्मीदवारों की लिस्ट (NDA Winners List)

इस चुनाव में NDA की ओर से उतारे गए सभी पांचों उम्मीदवारों ने जीत का परचम लहराया:

  1. नीतीश कुमार (जनता दल यूनाइटेड – JDU)
  2. नितिन नवीन (भारतीय जनता पार्टी – BJP)
  3. रामनाथ ठाकुर (जनता दल यूनाइटेड – JDU)
  4. शिवेश कुमार (भारतीय जनता पार्टी – BJP)
  5. उपेंद्र कुशवाहा (राष्ट्रीय लोक मोर्चा – RLM)

कैसा रहा जीत का समीकरण?

बिहार विधानसभा के मौजूदा संख्या बल (NDA के पास 202 विधायक) को देखते हुए यह जीत पहले से ही तय मानी जा रही थी। हालांकि, 5वीं सीट के लिए राजद के अमरेंद्र धारी सिंह ने मुकाबले को रोचक बनाने की कोशिश की थी, लेकिन एनडीए की एकजुटता के सामने विपक्ष पस्त हो गया।

  • वोटों का गणित: एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 41 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत थी।
  • महागठबंधन में सेंध: खबरों के मुताबिक, वोटिंग के दौरान विपक्ष के कुछ विधायकों की अनुपस्थिति और क्रॉस वोटिंग की चर्चाओं ने राजद की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
  • नीतीश कुमार की नई पारी: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना इस चुनाव का सबसे बड़ा ‘टर्निंग पॉइंट’ रहा, जो बिहार की भविष्य की राजनीति की ओर इशारा कर रहा है।

विपक्ष (RJD) को लगा बड़ा झटका

राजद के लिए यह परिणाम किसी झटके से कम नहीं है। प्रेमचंद गुप्ता और अमरेंद्र धारी सिंह जैसे दिग्गज नेताओं का कार्यकाल समाप्त होने के बाद पार्टी राज्यसभा में अपना प्रतिनिधित्व बढ़ाने की उम्मीद कर रही थी, लेकिन एनडीए के अभेद्य किले को नहीं तोड़ सकी।

इस जीत के साथ ही राज्यसभा में एनडीए की ताकत और बढ़ गई है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मिली प्रचंड जीत के बाद, राज्यसभा की इन 5 सीटों पर कब्ज़ा करना नीतीश-मोदी की जोड़ी के लिए एक बड़ी नैतिक और राजनीतिक जीत है।

मिडिल ईस्ट का बदलता भूगोल: क्या ग्रेटर इजराइल की नींव रखी जा रही है?

मिडिल ईस्ट का नक्शा जिसमें इजराइल, लेबनान और ईरान के बीच संघर्ष, The Blessing और The Curse के संकेतों के साथ 'ग्रेटर इजराइल' की अवधारणा को दर्शाया गया है।

मिडिल ईस्ट की आग अब बुझने के बजाय और फैलती जा रही है। एक तरफ ईरान के साथ सीधा टकराव है, तो दूसरी तरफ लेबनान में इजराइल की जमीनी कार्रवाई। महज कुछ ही दिनों में सैकड़ों मौतें और लेबनान की 20% जमीन का खाली होना इस बात की गवाही दे रहा है कि यह युद्ध अब केवल हमास या हिजबुल्लाह तक सीमित नहीं है।

क्या बेंजामिन नेतन्याहू अपने ‘अल्टीमेट गोल’ यानी ‘ग्रेटर इजराइल’ (Eretz Yisrael Hashlema) की ओर बढ़ रहे हैं?

📍 आखिर क्या है ‘ग्रेटर इजराइल’?

ग्रेटर इजराइल का विचार कोई नया नहीं है, बल्कि यह दशकों पुरानी एक विचारधारा है। इसके तहत इजराइल की सीमाओं को वर्तमान से कहीं अधिक विस्तार देने की कल्पना की गई है। कट्टरपंथी विचारधारा और ऐतिहासिक धार्मिक दावों के आधार पर, इसके दायरे में ये इलाके शामिल हो सकते हैं:

  • संपूर्ण फिलिस्तीन: वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी का पूर्ण विलय।
  • दक्षिणी लेबनान: जहाँ वर्तमान में इजराइली सेना बफर जोन बनाने के नाम पर आगे बढ़ रही है।
  • सीरिया का हिस्सा: गोलन हाइट्स से आगे का क्षेत्र।
  • जॉर्डन और मिस्र के कुछ हिस्से: ऐतिहासिक निल से फरात (Nile to Euphrates) की अवधारणा के तहत।

🚀 नेतन्याहू का ‘न्यू ऑर्डर’ और UN का नक्शा

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र (UN) में नेतन्याहू ने एक नक्शा दिखाया था, जिसमें उन्होंने मिडिल ईस्ट को दो हिस्सों में बांटा: The Blessing (आशीर्वाद) और The Curse (अभिशाप)। उनका यह न्यू ऑर्डर तीन मुख्य स्तंभों पर टिका है:

  1. प्रतिरोध का अंत: नेतन्याहू का मानना है कि जब तक हमास (गाजा), हिजबुल्लाह (लेबनान) और हूतियों (यमन) का अस्तित्व है, इजराइल कभी सुरक्षित नहीं रह सकता।
  2. स्थायी बफर जोन: लेबनान में जमीन खाली कराने का अर्थ है कि इजराइल अपनी उत्तरी सीमा पर एक ऐसी पट्टी बनाना चाहता है जहाँ केवल उसका नियंत्रण हो।
  3. ईरान को चुनौती: ग्रेटर इजराइल के रास्ते में ईरान सबसे बड़ी बाधा है। सीधे ईरान पर हमले करके नेतन्याहू उस प्रॉक्सी नेटवर्क को जड़ से खत्म करना चाहते हैं।

⚖️ दुनिया के लिए इसके क्या मायने हैं?

यदि युद्ध का दायरा इसी तरह बढ़ता रहा और नक्शे बदले गए, तो इसके परिणाम भयावह हो सकते हैं:

  • क्षेत्रीय संप्रभुता का संकट: लेबनान और सीरिया जैसे संप्रभु देशों के अस्तित्व पर सवाल खड़े हो जाएंगे।
  • मानवीय त्रासदी: लाखों लोगों का विस्थापन केवल मिडिल ईस्ट ही नहीं, बल्कि यूरोप और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी भारी दबाव डालेगा।
  • महाशक्तियों का टकराव: यदि ईरान इस युद्ध में पूरी तरह कूदता है, तो अमेरिका और रूस का परोक्ष या प्रत्यक्ष रूप से शामिल होना अनिवार्य हो जाएगा, जो विश्व युद्ध III की आहट हो सकती है।

लेबनान में इजराइल की बढ़ती ताकत और जमीनी कब्जा यह संकेत दे रहा है कि युद्ध अब सिर्फ आत्मरक्षा (Self-defense) तक सीमित नहीं रह गया है। यह नक्शे बदलने की जंग बनती जा रही है। नेतन्याहू का न्यू ऑर्डर सफल होगा या यह क्षेत्र को एक अनंत अंधकार में धकेल देगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।

आपकी क्या राय है? क्या बेंजामिन नेतन्याहू वाकई ग्रेटर इजराइल के सपने को हकीकत में बदल पाएंगे? या यह कदम इजराइल के लिए ही आत्मघाती साबित होगा? कमेंट्स में अपनी राय जरूर लिखें।

Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1: ‘ग्रेटर इजराइल’ (Eretz Yisrael Hashlema) का क्या अर्थ है?

A: यह एक विचारधारा है जो मानती है कि इजराइल की सीमाएं ऐतिहासिक और धार्मिक आधार पर वर्तमान से कहीं अधिक बड़ी होनी चाहिए, जिसमें फिलिस्तीन, दक्षिणी लेबनान और सीरिया के हिस्से शामिल हों।

Q2: बेंजामिन नेतन्याहू का ‘न्यू ऑर्डर’ (New Order) क्या है?

A: नेतन्याहू के ‘न्यू ऑर्डर’ का अर्थ है मिडिल ईस्ट से ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों (हमास, हिजबुल्लाह, हूती) का सफाया करना और इजराइल के पक्ष में एक नया सुरक्षा ढांचा तैयार करना।

Q3: लेबनान में इजराइल की जमीनी कार्रवाई का क्या प्रभाव पड़ा है?

A: इस कार्रवाई के कारण लेबनान की लगभग 20% भूमि खाली हो गई है, सैकड़ों लोगों की जान गई है और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं, जिससे एक बड़ा मानवीय संकट पैदा हो गया है।

Q4: क्या यह युद्ध विश्व युद्ध (World War III) का रूप ले सकता है?

A: विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान और इजराइल के बीच सीधा टकराव बढ़ता है और अमेरिका व रूस जैसे देश इसमें शामिल होते हैं, तो यह वैश्विक संघर्ष में बदल सकता है।

बिहार प्रदेश जद(यू) सांगठनिक निर्वाचन 2026: नवनिर्वाचित जिलाध्यक्षों की सूची जारी

Nitish kumar

पटना: जनता दल (यूनाइटेड) में सांगठनिक मजबूती और भविष्य की रणनीतियों को देखते हुए एक बड़ा कदम उठाया गया है। बिहार प्रदेश जद(यू) सांगठनिक निर्वाचन-2026 के अंतर्गत, मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार की स्वीकृति के बाद राज्य निर्वाचन पदाधिकारी अशोक कुमार ने शेष सांगठनिक जिलाध्यक्षों की आधिकारिक सूची जारी कर दी है।

​इस सूची में पार्टी के समर्पित और अनुभवी कार्यकर्ताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं। यह नियुक्तियाँ पार्टी के निचले स्तर (Grassroot level) को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से की गई हैं।

नवनियुक्त जिलाध्यक्षों की सूची (प्रमुख जिले)

​कार्यालय आदेश संख्या 52/26 के अनुसार, निम्नलिखित प्रमुख नामों की घोषणा की गई है:

क्र०सं०जिला / नगर का नामनिर्वाचित अध्यक्ष का नाम
1मुजफ्फरपुरश्री अनुपम सिंह
2पटना नगरश्री राधेश्याम कुशवाहा
3गया (बेगूसराय)श्री नन्द लाल राय
4नालंदामो० मसरूर अहमद जुबैरी उर्फ मो० अरशद
5आरा नगरश्री जय प्रकाश चौधरी
6सीवानश्री विकास कुमार सिंह उर्फ जीसू सिंह

(पूरी सूची के लिए नीचे दिए गए आधिकारिक पत्र को देखें)

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संगठन को मिलेगी नई धार

​राज्य निर्वाचन पदाधिकारी अशोक कुमार द्वारा हस्ताक्षरित इस सूची में कुल 25 सांगठनिक क्षेत्रों के नामों की घोषणा की गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन नई नियुक्तियों से आगामी चुनावों और पार्टी के विस्तार कार्यों में नई ऊर्जा का संचार होगा।

​पार्टी नेतृत्व ने सभी नवनिर्वाचित जिलाध्यक्षों को उनके इस महत्वपूर्ण दायित्व के लिए हार्दिक बधाई और सफल कार्यकाल की शुभकामनाएँ दी हैं।

“संगठन की मजबूती ही हमारी असली ताकत है। नए पदाधिकारियों के चयन से पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है।”

क्या आप अपने जिले के नवनियुक्त अध्यक्ष के बारे में और जानकारी चाहते हैं? हमें कमेंट में बताएं!

डिजिटल इंडिया में 16 वर्षों से बंद पड़ा है यह स्कूल, ग्रामीणों ने शुरू किया आमरण अनशन

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खुटौना (मधुबनी): शिक्षा के अधिकार की बातें कागजों पर भले ही सुनहरी लगें, लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ और ही बयां करती है। खुटौना प्रखंड के चतुर्भुज पिपराही पंचायत स्थित खिलही के नोनिया टोल में पिछले 16 वर्षों से बंद पड़े प्राथमिक विद्यालय को फिर से शुरू करवाने के लिए ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया है। प्रशासन की बेरुखी से नाराज ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।

प्रमुख के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू

​विद्यालय के अस्तित्व को बचाने और बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए खुटौना के पूर्व प्रमुख सह वर्तमान पंचायत समिति सदस्य संजीव भिंडवार के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू किया गया है। यह आंदोलन उसी बंद पड़े विद्यालय के परिसर में शुरू किया गया है, जो कभी बच्चों की खिलखिलाहट से गूंजता था।

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क्यों फूटा ग्रामीणों का आक्रोश?

​आंदोलनकारियों का कहना है कि विद्यालय बंद होने के कारण सबसे ज्यादा मार गरीब परिवारों और छोटे बच्चों पर पड़ रही है।

प्रशासनिक अनदेखी: ग्रामीणों के अनुसार, शिक्षा विभाग के अधिकारियों को बार-बार सूचित करने के बाद भी अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

दूरी की समस्या: बच्चों को प्राथमिक शिक्षा के लिए लंबी दूरी तय कर दूसरे गांवों में जाना पड़ता है।

सुरक्षा का डर: छोटे बच्चों को दूर भेजने में अभिभावक हमेशा आशंकित रहते हैं।

​जब तक विद्यालय को पुनः चालू करने के लिए विभाग की ओर से कोई ठोस लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक हमारा अनशन जारी रहेगा। यह बच्चों के भविष्य का सवाल है।

संजीव भिंडवार, आंदोलनकारी नेतृत्वकर्ता

अनशन पर बैठे 12 सत्याग्रही

​इस आंदोलन में संजीव भिंडवार के साथ कुल 12 लोग आमरण अनशन पर बैठे हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • ​रामेश्वर महतो, रामकृष्ण महतो, विष्णु देव महतो, यशोधर महतो।
  • ​रविंद्र महतो, शोभित महतो, सूर्य नारायण महतो, जुगत लाल महतो।
  • ​रामस्वरूप महतो, राम प्रकाश महतो और बलराम महतो।

क्षेत्र में चर्चा का विषय

​जैसे-जैसे अनशन का समय बढ़ रहा है, आस-पास के गांवों के लोगों का समर्थन भी बढ़ता जा रहा है। भारी संख्या में ग्रामीण अनशन स्थल पर पहुंचकर एकजुटता दिखा रहे हैं। अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया शिक्षा विभाग इस जन आक्रोश के बाद जागता है या नोनिया टोल के बच्चों का भविष्य अंधेरे में ही रहेगा।

एडमिट कार्ड बना मजाक! कैंडिडेट की फोटो की जगह छपी कुत्ते की तस्वीर, सोशल मीडिया पर वायरल

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बिहार की शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली अक्सर अपनी अजीबोगरीब गलतियों की वजह से सुर्खियों में रहती है। ताजा मामला एक बार फिर सिस्टम पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है, जहाँ एक छात्र के एडमिट कार्ड (Admit Card) पर उसकी तस्वीर की जगह एक कुत्ते की फोटो छाप दी गई।

यह मामला सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग विभाग की लापरवाही का जमकर मजाक उड़ा रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, यह घटना बिहार के एक प्रतिष्ठित संस्थान की परीक्षा से जुड़ी बताई जा रही है। एक अभ्यर्थी ने जब अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड किया, तो वह दंग रह गया। कार्ड पर छात्र के नाम, पिता का नाम और अन्य विवरण तो सही थे, लेकिन ‘प्रोफाइल फोटो’ वाले कॉलम में छात्र की जगह एक कुत्ते का चेहरा नजर आ रहा था।

हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर चूक पर किसी भी स्तर (डाटा एंट्री से लेकर वेरिफिकेशन तक) पर ध्यान नहीं दिया गया और एडमिट कार्ड जारी कर दिया गया।

सोशल मीडिया पर उड़ रहा मजाक

जैसे ही इस एडमिट कार्ड का स्क्रीनशॉट इंटरनेट पर आया, यूजर्स ने बिहार के परीक्षा बोर्ड और संबंधित विभाग को आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया।

  • मीम्स की बाढ़: लोग कमेंट्स में लिख रहे हैं कि “बिहार में कुछ भी मुमकिन है।”
  • सिस्टम पर सवाल: शिक्षाविदों का मानना है कि इस तरह की गलतियां न केवल छात्र का मनोबल गिराती हैं, बल्कि परीक्षा की गंभीरता को भी खत्म करती हैं।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे कारनामे

बिहार में एडमिट कार्ड पर किसी सेलेब्रिटी या जानवर की फोटो छपना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी कई बार एडमिट कार्ड्स पर:

  1. बॉलीवुड अभिनेत्रियों (सनी लियोन, प्रियंका चोपड़ा) की तस्वीरें।
  2. भगवान गणेश की फोटो।
  3. यहाँ तक कि राजनेताओं की फोटो भी देखी जा चुकी हैं।

विभाग की सफाई

मामला तूल पकड़ने के बाद संबंधित विभाग ने इसे तकनीकी खराबी या डाटा एंट्री ऑपरेटर की लापरवाही करार दिया है। हालांकि, छात्र के लिए यह किसी मानसिक परेशानी से कम नहीं है, क्योंकि एडमिट कार्ड में सुधार के लिए उसे अब दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहाँ हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बात कर रहे हैं, वहां इस तरह की मानवीय और तकनीकी गलतियां सिस्टम की जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती हैं।

क्या आपको लगता है कि इस तरह की गलतियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

महरैल में सजेगा प्रभु श्री राम का दरबार: 27 मार्च को निकलेगी जिला स्तरीय महाविशाल रामनवमी शोभायात्रा

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झंझारपुर (मधुबनी): मिथिला की पावन धरती पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मोत्सव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में मझौरा दुर्गा स्थान में मुरारी मण्डल की अध्यक्षता में ग्रामीणों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि रामनवमी शोभायात्रा समिति, महरैल के तत्वावधान में इस वर्ष जिला स्तरीय ‘महाविशाल रामनवमी शोभायात्रा’ और भव्य ‘संध्या मैथिली कार्यक्रम’ का आयोजन किया जाएगा।

शोभायात्रा का पूरा विवरण

यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक एकता को भी प्रदर्शित करेगा।

  • दिनांक: 27 मार्च 2026 (शुक्रवार)
  • समय: दोपहर 1:00 बजे से
  • प्रस्थान स्थल: महरैल रेलवे स्टेशन चौक स्थित हनुमान मंदिर

इन मार्गों से गुजरेगी भव्य यात्रा

आयोजकों के अनुसार, रामभक्ति से ओत-प्रोत यह शोभायात्रा हनुमान मंदिर प्रांगण से शुरू होकर क्षेत्र के विभिन्न प्रमुख मार्गों का भ्रमण करेगी। यात्रा के मुख्य पड़ाव इस प्रकार होंगे:

  • महरैल
  • कर्णपुर
  • हरना
  • हरड़ी
  • झंझारपुर-अंधराठाढ़ी के प्रमुख मार्ग

विशेष आकर्षण: झांकियां और मैथिली कार्यक्रम

शोभायात्रा को भव्य बनाने के लिए विशेष धार्मिक झांकियों की तैयारी की जा रही है। ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों की गूंज के साथ श्रद्धालु जयकारे लगाते हुए प्रभु श्री राम के आदर्शों का संदेश देंगे। यात्रा के समापन के पश्चात संध्या मैथिली कार्यक्रम का आयोजन होगा, जो क्षेत्रीय कला और संस्कृति को समर्पित रहेगा।

“रामनवमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सत्य, मर्यादा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा है। इस यात्रा का उद्देश्य समाज में आपसी सौहार्द, भाईचारा और सनातन संस्कृति के मूल्यों को सुदृढ़ करना है।” – आयोजन समिति

बैठक में उपस्थित गणमान्य

बैठक के दौरान आयोजन को सफल बनाने के लिए रूपरेखा तैयार की गई, जिसमें मुख्य रूप से मिहीर ठाकुर, अजय झा, अभिषेक चौधरी, मुरारी मण्डल, अनित, अजीत, सचिन, आमोद झा, दुर्गा नन्द, रोहन, भरत, मुकेश, दीपक, टुनटुन, हेमंत, भविष्य, अक्षय, आशीष, सूरज और बंटी सहित भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

श्रद्धालुओं से अपील

समिति ने समस्त धर्म प्रेमियों और ग्रामवासियों से आग्रह किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस महाविशाल यात्रा में शामिल होकर पुण्य के भागी बनें। साथ ही, श्रद्धालुओं से यात्रा के दौरान शांति, अनुशासन और स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की गई है।

ऐतिहासिक फैसला: भारत में पहली बार पैसिव यूथेनेशिया को मिली मंजूरी, जानें क्या है वह कानून जिसने दी मौत की इजाजत

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भारत के न्यायिक इतिहास में 11 मार्च 2026 की तारीख सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने 13 साल से कोमा (Persistent Vegetative State) में पड़े 32 वर्षीय हरीश राणा के मामले में वह फैसला सुनाया, जिसकी चर्चा दशकों से हो रही थी। कोर्ट ने हरीश की ‘जीवन रक्षक प्रणाली’ (Life Support) हटाने की अनुमति दे दी है।

यह पहला मौका है जब 2018 के ऐतिहासिक फैसले के बाद किसी ठोस मामले में कोर्ट ने इस प्रक्रिया को हरी झंडी दिखाई है।

किस कानून और अनुच्छेद के तहत हुआ यह फैसला?

सुप्रीम कोर्ट की बेंच (जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन) ने यह आदेश भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (Article 21) की व्यापक व्याख्या के आधार पर दिया है।

  • अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार): कोर्ट के अनुसार, ‘जीवन के अधिकार’ में केवल जीवित रहना ही नहीं, बल्कि ‘गरिमा के साथ मरने का अधिकार’ (Right to Die with Dignity) भी शामिल है।
  • कॉमन कॉज बनाम भारत संघ (2018): इसी ऐतिहासिक फैसले में 5 जजों की संवैधानिक बेंच ने पैसिव यूथेनेशिया को कानूनी मान्यता दी थी। 2023 में कोर्ट ने इसके नियमों को और सरल बनाया, जिसके तहत अब हरीश राणा को राहत मिली है।

इतिहास में पहली बार क्यों? (अरुणा शानबाग से हरीश राणा तक का सफर)

लोग अक्सर अरुणा शानबाग (2011) के मामले को याद करते हैं, लेकिन वह हरीश राणा के केस से अलग था:

  1. अरुणा शानबाग केस (2011): सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया को सैद्धांतिक मंजूरी तो दी थी, लेकिन अरुणा के मामले में उसे लागू करने से मना कर दिया था क्योंकि अस्पताल का स्टाफ उनकी देखभाल करना चाहता था।
  2. हरीश राणा केस (2026): यह पहला व्यावहारिक कार्यान्वयन (Practical Application) है जहाँ कोर्ट ने सभी मेडिकल रिपोर्ट और माता-पिता की सहमति के बाद खुद ‘जीवन रक्षक प्रणाली’ (जैसे कि Clinically Assisted Nutrition) हटाने का आदेश AIIMS को दिया है।

फैसले की मुख्य बातें और कानूनी प्रक्रिया

कोर्ट ने इस फैसले तक पहुँचने के लिए एक बेहद सख्त और पारदर्शी प्रक्रिया का पालन किया:

  • मेडिकल बोर्ड का गठन: कोर्ट ने AIIMS दिल्ली के विशेषज्ञों का एक ‘प्राइमरी’ और ‘सेकेंडरी’ मेडिकल बोर्ड बनाया। बोर्ड ने पुष्टि की कि हरीश के मस्तिष्क में सुधार की गुंजाइश 0% है।
  • मानवीय संवेदना: जस्टिस पारदीवाला ने शेक्सपियर के प्रसिद्ध वाक्य “To be or not to be” का जिक्र करते हुए कहा कि जब सुधार की कोई उम्मीद न हो, तो जीवन को मशीनों के जरिए खींचना मरीज के प्रति क्रूरता है।
  • अभिभावकों की भूमिका: कोर्ट ने हरीश के माता-पिता के 13 साल के संघर्ष की सराहना की और माना कि उनका अपने बेटे को गरिमापूर्ण विदाई देने का निर्णय ‘निस्वार्थ प्रेम’ का प्रतीक है।

पैसिव vs एक्टिव यूथेनेशिया: क्या है अंतर?

यह समझना जरूरी है कि भारत में केवल ‘पैसिव’ (Passive) यूथेनेशिया ही वैध है:

प्रकारविवरणकानूनी स्थिति
एक्टिव यूथेनेशियामरीज को जहर या इंजेक्शन देकर मारना।अवैध (इसे हत्या माना जाता है)
पैसिव यूथेनेशियाइलाज या जीवन रक्षक मशीनें हटा लेना ताकि प्राकृतिक मृत्यु हो सके।वैध (कठोर नियमों के साथ)

कानून का मानवीय चेहरा

हरीश राणा का मामला यह साबित करता है कि कानून केवल किताबों में लिखी धाराओं का नाम नहीं है, बल्कि यह समय आने पर संवेदना और मानवीय गरिमा की रक्षा के लिए भी खड़ा होता है। यह फैसला भविष्य में उन हजारों परिवारों के लिए एक नजीर (Precedent) बनेगा जो अपनों को ‘वेजिटेटिव स्टेट’ की अंतहीन पीड़ा में देख रहे हैं।

बिहार के स्वर्णिम काल के रूप में याद किया जाएगा नीतीश कुमार का कार्यकाल: ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव

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सुपौल, बिहार: बिहार सरकार के कद्दावर नेता कोशी के विश्वकर्मा और ऊर्जा मंत्री श्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व की जमकर सराहना की है। सुपौल जिले के निर्मली में आयोजित ‘समृद्धि यात्रा 2026’ के दौरान एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने राज्य में हुए बुनियादी ढांचागत बदलावों को ऐतिहासिक बताया।

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आजाद बिहार का स्वर्णिम युग

​मंत्री बिजेंद्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि साल 2005 से 2025 तक का कालखंड बिहार के इतिहास में “स्वर्ण अक्षरों” में लिखा जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की तस्वीर बदलने का जो संकल्प लिया था, वह आज धरातल पर दिख रहा है।

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14 घंटे का सफर अब सिर्फ 40 मिनट में

​विकास का उदाहरण देते हुए उन्होंने पुराने दिनों की याद ताजा की। उन्होंने बताया:

  • अतीत की चुनौती: एक समय था जब सुपौल से निर्मली पहुंचने में लोगों को 14 घंटे का समय लग जाता था। यातायात की स्थिति अत्यंत दयनीय थी।
  • आज की उपलब्धि: नीतीश कुमार सरकार के रोड कनेक्टिविटी और पुल निर्माण कार्यों की बदौलत आज यही दूरी मात्र 40 मिनट में तय की जा रही है।
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विपक्ष पर तीखा तंज

​गठबंधन की राजनीति और विपक्ष के हमलों पर बोलते हुए बिजेंद्र यादव ने कहा कि जब मुख्यमंत्री ने एनडीए (NDA) के साथ जाने का निर्णय लिया, तो विपक्ष के कई बड़े नेताओं के फोन आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार हमारे सर्वमान्य नेता हैं और उनके निर्णय के साथ पूरी पार्टी और राज्य की जनता मजबूती से खड़ी है।

​”हमारे नेता जो कहते हैं, वह करके दिखाते हैं। कोसी क्षेत्र में रेल पुल से लेकर सड़कों के जाल तक, आज जो कायापलट हुआ है, वह नीतीश कुमार की दूरदर्शिता का परिणाम है।” — बिजेंद्र प्रसाद यादव

​समृद्धि यात्रा के माध्यम से सरकार अपनी उपलब्धियों को जनता के बीच ले जा रही है। बिजेंद्र यादव का यह बयान न केवल कोसी क्षेत्र के विकास को रेखांकित करता है, बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिए भी एक मजबूत संदेश देता है।

ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करने वाले का बेटा बना IAS: रायबरेली के विमल कुमार ने रचा इतिहास, स्वागत में निकला 7 KM लंबा जुलूस

IAS Vimal Kumar Raebareli Success Celebration

रायबरेली, उत्तर प्रदेश: कहते हैं कि अगर इरादों में जान हो, तो गरीबी की बेड़ियाँ भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के एक छोटे से गाँव चांदेमऊ के रहने वाले विमल कुमार ने इस बात को सच कर दिखाया है। विमल ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में 107वीं रैंक हासिल कर न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन कर दिया है।

संघर्ष की नींव पर खड़ी हुई सफलता

​विमल की यह सफलता इसलिए खास है क्योंकि उनका सफर अभावों और चुनौतियों से भरा रहा। उनके पिता, रामदेव, एक ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करते हैं और परिवार के गुजारे के लिए दूसरों के खेतों में बंटाई पर खेती भी करते हैं।

​आर्थिक तंगी के बावजूद, रामदेव ने कभी अपनी मजबूरी को बच्चों की पढ़ाई के आड़े नहीं आने दिया। उन्होंने मेहनत की, पसीना बहाया, ताकि उनका बेटा कलम की ताकत से अपनी तकदीर बदल सके।

​”मजदूरी करके बच्चों को पढ़ाया… आज बेटे ने हमारी सारी मेहनत सफल कर दी।”

रामदेव (विमल के पिता)

गाँव में मना दीवाली जैसा जश्न

​विमल के IAS बनने की खबर जैसे ही गाँव पहुंची, पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर गाँव वालों ने ऐसा स्वागत किया जो अक्सर बड़े राजनेताओं के नसीब में भी नहीं होता:

  • 7 किलोमीटर लंबा जुलूस: विमल के स्वागत में करीब 7 किमी लंबा विजय जुलूस निकाला गया।
  • गाड़ियों का काफिला: जुलूस में 12 कारें, 50 से ज्यादा बाइकें और गूंजते हुए डीजे शामिल थे।
  • जगह-जगह स्वागत: रास्ते भर लोगों ने विमल को रोककर फूल-मालाओं से लाद दिया और मिठाई खिलाकर बधाई दी।

मेहनत और सपनों का मेल

​विमल कुमार की यह कहानी उन लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल है जो संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं। यह साबित करता है कि:

  1. कठिन परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है।
  2. माता-पिता का त्याग संतान की सबसे बड़ी शक्ति होता है।
  3. मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है।

​विमल कुमार अब प्रशासन का हिस्सा बनकर देश की सेवा करेंगे, लेकिन उनकी कहानी हमेशा रायबरेली की गलियों में गूंजती रहेगी। यह कहानी हमें सिखाती है कि हालात चाहे कितने भी विपरीत क्यों न हों, यदि आपमें लड़ने का जज्बा है, तो आप दुनिया जीत सकते हैं।

क्या आप भी विमल के इस संघर्ष को सलाम करते हैं? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में बताएं और इस प्रेरणादायक कहानी को शेयर करें!