जन सुराज ने मधुबनी जिला संगठन की घोषणा की: अनिल मिश्रा बने जिला अध्यक्ष, शमसुल हक़ को मिली महामंत्री की जिम्मेदारी

398250

मधुबनी, 11 मार्च 2026 – बिहार में बदलाव की राजनीति का संकल्प लेकर आगे बढ़ रही जन सुराज पार्टी ने अपने सांगठनिक ढांचे को मजबूती देते हुए मधुबनी जिला संगठन के पदाधिकारियों की सूची जारी कर दी है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस नई टीम का ऐलान किया।

398249

सांगठनिक मजबूती के लिए नई रणनीति

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने बताया कि जन सुराज के मूलभूत सिद्धांतों को जमीन पर उतारने के लिए पूरे राज्य को 44 सांगठनिक जिलों में बांटा गया है। इसी रणनीति के तहत मधुबनी जिले के लिए वरिष्ठ साथियों के साथ विचार-विमर्श कर एक सशक्त कमेटी का गठन किया गया है।

“यह जिला कमेटी क्षेत्रीय और राज्य नेतृत्व के बीच एक सेतु का काम करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य जिले के सभी प्रखंडों और पंचायतों में संगठन का पुनर्गठन करना और पार्टी की गतिविधियों को गति देना है।” – मनोज भारती, प्रदेश अध्यक्ष

मधुबनी जिला संगठन के मुख्य पदाधिकारी

घोषणा के अनुसार, मधुबनी जिले की कमान निम्नलिखित अनुभवी हाथों में सौंपी गई है:

  • जिला अध्यक्ष: श्री अनिल मिश्रा
  • जिला महामंत्री: श्री शमसुल हक़

यह टीम जिले के वरिष्ठ सदस्यों के साथ मिलकर पंचायत स्तर तक संगठन के विस्तार का कार्य करेगी।

कार्यक्रम में मौजूद प्रमुख नेतृत्व

संगठन की घोषणा के इस महत्वपूर्ण अवसर पर प्रदेश स्तर के कई दिग्गज नेता मौजूद रहे, जिनमें शामिल हैं:

  • सुभाष सिंह कुशवाहा (प्रदेश संगठन महामंत्री)
  • सरवर अली (प्रदेश महासचिव)
  • धरमवीर प्रसाद सिंह (कोषाध्यक्ष)
  • श्रीमती सरिता देवी (महिला अध्यक्ष)
  • दीपक कुमार भंडारी (युवा अध्यक्ष)

जन सुराज का विजन

जन सुराज पार्टी का उद्देश्य बिहार के हर जिले में एक ऐसी टीम तैयार करना है जो सीधे जनता से जुड़ी हो। मधुबनी जिला कमेटी की यह घोषणा इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सलाहकार समिति और अन्य पदाधिकारियों की विस्तृत सूची पार्टी के आधिकारिक पोर्टल पर भी उपलब्ध कराई गई है।

बिहार के स्वर्णिम काल के रूप में याद किया जाएगा नीतीश कुमार का कार्यकाल: ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव

396020

सुपौल, बिहार: बिहार सरकार के कद्दावर नेता कोशी के विश्वकर्मा और ऊर्जा मंत्री श्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व की जमकर सराहना की है। सुपौल जिले के निर्मली में आयोजित ‘समृद्धि यात्रा 2026’ के दौरान एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने राज्य में हुए बुनियादी ढांचागत बदलावों को ऐतिहासिक बताया।

396026

आजाद बिहार का स्वर्णिम युग

​मंत्री बिजेंद्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि साल 2005 से 2025 तक का कालखंड बिहार के इतिहास में “स्वर्ण अक्षरों” में लिखा जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की तस्वीर बदलने का जो संकल्प लिया था, वह आज धरातल पर दिख रहा है।

396019

14 घंटे का सफर अब सिर्फ 40 मिनट में

​विकास का उदाहरण देते हुए उन्होंने पुराने दिनों की याद ताजा की। उन्होंने बताया:

  • अतीत की चुनौती: एक समय था जब सुपौल से निर्मली पहुंचने में लोगों को 14 घंटे का समय लग जाता था। यातायात की स्थिति अत्यंत दयनीय थी।
  • आज की उपलब्धि: नीतीश कुमार सरकार के रोड कनेक्टिविटी और पुल निर्माण कार्यों की बदौलत आज यही दूरी मात्र 40 मिनट में तय की जा रही है।
396008

विपक्ष पर तीखा तंज

​गठबंधन की राजनीति और विपक्ष के हमलों पर बोलते हुए बिजेंद्र यादव ने कहा कि जब मुख्यमंत्री ने एनडीए (NDA) के साथ जाने का निर्णय लिया, तो विपक्ष के कई बड़े नेताओं के फोन आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार हमारे सर्वमान्य नेता हैं और उनके निर्णय के साथ पूरी पार्टी और राज्य की जनता मजबूती से खड़ी है।

​”हमारे नेता जो कहते हैं, वह करके दिखाते हैं। कोसी क्षेत्र में रेल पुल से लेकर सड़कों के जाल तक, आज जो कायापलट हुआ है, वह नीतीश कुमार की दूरदर्शिता का परिणाम है।” — बिजेंद्र प्रसाद यादव

​समृद्धि यात्रा के माध्यम से सरकार अपनी उपलब्धियों को जनता के बीच ले जा रही है। बिजेंद्र यादव का यह बयान न केवल कोसी क्षेत्र के विकास को रेखांकित करता है, बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिए भी एक मजबूत संदेश देता है।

मधुबनी: नारी रत्न सम्मान समारोह में गूंजी महिला सशक्तिकरण की गूँज, 180 से अधिक कर्मयोगिनी महिलाएं सम्मानित

Nari Ratna Samman Samaroh Madhubani Er Ganga Kumar

मधुबनी (फुलपरास): अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के गौरवशाली अवसर पर आज इंजीनियर गंगा कुमार (समाजसेवी) के नेतृत्व में फुलपरास के जनता हाई स्कूल, बेल्हा (मधुबनी) में “नारी रत्न सम्मान समारोह” सह “समाज में महिलाओं की भूमिका” विषयक संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी अमूल्य सेवा देने वाली 180 से अधिक महिलाओं को सम्मानित कर उनके योगदान को सराहा गया।

391315

प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति

​कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व विधान परिषद सदस्य सुमन महासेठ एवं विशिष्ट अतिथियों में पूर्व विधायक (लौकहा) भारत भूषण मंडल, पूर्व जिला परिषद सदस्य दौरिक पूर्वे उपस्थित रहे। मंच की शोभा बढ़ाने के लिए राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र की कई दिग्गज महिलाएं भी शामिल हुईं, जिनमें:

  • रंजीता प्रभा (प्रमुख, बाबूबरही)
  • कुमारी आशा (प्रमुख, खजौली)
  • कल्पना सिंह (नेत्री, राजद)
  • काजोल पूर्वे (पूर्व मेयर प्रत्याशी, मधुबनी)
  • कामिनी जी (समाजसेवी, जयनगर)
  • कामिनी सिंह (MBK, जीविका)
  • जया प्रिया (शिक्षिका)

समाज की नींव हैं ये महिलाएं

​आयोजक इंजीनियर गंगा कुमार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि समाज के निर्माण में महिलाओं का योगदान अतुलनीय है। इस समारोह का मुख्य उद्देश्य उन महिलाओं को सम्मान देना है जो जमीन पर रहकर समाज को सशक्त बना रही हैं।

​समारोह में 180 से अधिक महिलाओं को सम्मानित किया गया, जिनमें मुख्य रूप से:

  • आशा कार्यकर्ता
  • जीविका दीदियाँ
  • आंगनवाड़ी सेविकाएं
  • शिक्षिकाएं और ANM

संगोष्ठी: समाज में महिला की भूमिका

​सम्मान समारोह के साथ-साथ आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने वर्तमान परिवेश में महिलाओं की बदलती भूमिका पर प्रकाश डाला। अतिथियों ने कहा कि आज की नारी सिर्फ घर तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और राजनीति जैसे हर क्षेत्र में नेतृत्व कर रही है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में ‘जीविका दीदियों’ और स्वास्थ्य सेवाओं में ‘आशा एवं ANM’ के योगदान को ‘समाज की रीढ़’ बताया गया।

यह कार्यक्रम न केवल सम्मान देने का एक जरिया था, बल्कि समाज को यह संदेश देने का प्रयास भी था कि जब हम अपनी नारी शक्ति का सम्मान करते हैं, तभी एक उन्नत राष्ट्र का निर्माण संभव है।

रिपोर्ट: हरे कृष्णा यादव (BHOOMI NEWS LIVE)

बिहार की राजनीति में बड़ा धमाका: JDU भी चल पड़ी राजद की राह पर..? निशांत कुमार की एंट्री के मायने

390887

बिहार की राजनीति में ‘परिवारवाद’ (Dynasty Politics) हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सार्वजनिक मंचों से अक्सर लालू यादव और कांग्रेस पर परिवार को आगे बढ़ाने का आरोप लगाते रहे हैं। लेकिन अब, निशांत कुमार (Nishant Kumar) के जनता दल यूनाइटेड (JDU) में सक्रिय होने की खबरों ने एक नई बहस छेड़ दी है।

​क्या जेडीयू भी अब उसी ‘परिवारवाद’ के अध्याय को लिखने जा रही है जिससे वह अब तक दूर होने का दावा करती थी?

​1. निशांत कुमार और जेडीयू: एक नया मोड़

​काफी समय से लो-प्रोफाइल रहने वाले नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार अब पार्टी के कार्यक्रमों और फीडबैक सिस्टम में सक्रिय दिख रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उन्हें जल्द ही पार्टी में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

  • बदलाव का संकेत: कार्यकर्ताओं की बढ़ती मांग और पार्टी के भीतर उत्तराधिकारी की तलाश निशांत को केंद्र में ला रही है।
  • युवा चेहरा: जेडीयू इसे एक युवा नेतृत्व के तौर पर पेश करने की कोशिश कर सकती है।

2. ‘परिवारवाद’ पर नीतीश कुमार का स्टैंड और वर्तमान स्थिति

​नीतीश कुमार ने हमेशा यह गर्व से कहा है कि उनके परिवार का कोई भी सदस्य राजनीति में नहीं है। उन्होंने कर्पूरी ठाकुर के सिद्धांतों का हवाला देते हुए खुद को वंशवाद की राजनीति से अलग रखा।

​”जेडीयू अभी तक बिहार की इकलौती बड़ी पार्टी मानी जाती थी जो परिवारवाद के साये से मुक्त थी। लेकिन निशांत कुमार के आने के बाद, विरोधियों को अब नीतीश कुमार पर हमला करने का एक बड़ा हथियार मिल गया है।”

​3. क्या JDU अब RJD की राह पर है?

​बिहार में राजद (RJD) पर हमेशा यह आरोप लगता है कि वह एक परिवार की पार्टी है। तेजस्वी यादव, तेज प्रताप और मीसा भारती का राजनीति में दबदबा इसका उदाहरण है।

​अब यदि निशांत कुमार जेडीयू की कमान संभालते हैं या अहम पद पर आते हैं, तो जेडीयू और राजद के बीच का वह ‘नैतिक अंतर’ (Moral Difference) खत्म हो जाएगा जो नीतीश कुमार की यूएसपी (USP) रही है।

तुलनात्मक नजरिया:

विशेषताआरजेडी (RJD)जेडीयू (JDU) – नया ट्रेंड
मुख्य नेतृत्वलालू यादव परिवारअब निशांत कुमार की चर्चा
दावासामाजिक न्यायसुशासन और परिवारवाद का विरोध
उत्तराधिकारीतेजस्वी यादवनिशांत कुमार (संभावित)

4. सोशल मीडिया और जनता की राय

​इंटरनेट पर इस खबर के आते ही लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ इसे पार्टी की मजबूती के लिए जरूरी बता रहे हैं, तो कुछ इसे नीतीश कुमार के सिद्धांतों के साथ ‘समझौता’ कह रहे हैं।

निशांत कुमार का राजनीति में आना जेडीयू के लिए अस्तित्व बचाने की मजबूरी है या नीतीश कुमार का हृदय परिवर्तन, यह तो वक्त बताएगा। लेकिन एक बात साफ है—बिहार की राजनीति में अब ‘परिवारवाद’ का मुद्दा एक नया मोड़ ले चुका है।

बिहार की सियासत में बड़ा बदलाव: नीतीश के बेटे निशांत कुमार की पॉलिटिक्स में एंट्री, कल संभालेंगे JDU की कमान!

Nitish kumar with nishant

बिहार की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत कुमार अब औपचारिक रूप से सक्रिय राजनीति में कदम रख रहे हैं। शनिवार, 7 मार्च को निशांत कुमार जनता दल यूनाइटेड (JDU) की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण करेंगे।

​यह फैसला मुख्यमंत्री आवास पर हुई जेडीयू विधानमंडल दल की एक हाई-प्रोफाइल बैठक में लिया गया, जिसने बिहार के सियासी भविष्य की नई पटकथा लिख दी है।

​सदस्यता लेते ही शुरू होगी ‘बिहार यात्रा’

​निशांत कुमार केवल पार्टी में शामिल ही नहीं हो रहे हैं, बल्कि वे तुरंत एक्शन मोड में नजर आएंगे। जेडीयू जॉइन करने के साथ ही वे बिहारव्यापी बिहार यात्रा पर निकलेंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य राज्य के युवाओं से जुड़ना और पार्टी के आधार को और मजबूत करना माना जा रहा है।

​बैठक में भावुक हुए नेता: नीतीश जाएंगे राज्यसभा

​जेडीयू विधानमंडल दल की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए और कुछ भावुक पल भी देखने को मिले:

  • विधायकों की मांग: पार्टी के विधायकों ने स्वयं नीतीश कुमार से निशांत को राजनीति में लाने का आग्रह किया था।
  • आधिकारिक घोषणा: कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने इस मांग पर मुहर लगाते हुए कल निशांत के पार्टी में शामिल होने का ऐलान किया।
  • नीतीश का दिल्ली सफर: नीतीश कुमार ने हाल ही में राज्यसभा के लिए नामांकन किया है। उनके दिल्ली जाने की खबर से बैठक में मौजूद कई मंत्री और विधायक भावुक हो उठे।
  • नीतीश का भरोसा: सीएम ने कार्यकर्ताओं को आश्वस्त किया कि, “मैं दिल्ली जरूर जा रहा हूँ, लेकिन मेरा दिल बिहार में ही रहेगा। मैं हर कदम पर पार्टी और कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा रहूँगा।”

​कौन होगा बिहार का अगला मुख्यमंत्री?

​नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार में नई सरकार का गठन होगा। प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री को लेकर सस्पेंस बरकरार है, लेकिन ललन सिंह ने साफ़ कर दिया है कि:

​”अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका अंतिम फैसला खुद नीतीश कुमार ही करेंगे।”

मुख्य बिंदु: एक नजर में

घटनाविवरण
नामनिशांत कुमार (नीतीश कुमार के पुत्र)
दिनांक7 मार्च (जेडीयू सदस्यता ग्रहण)
पहला बड़ा कदमबिहारव्यापी बिहार यात्रा
नीतीश कुमार की नई भूमिकाराज्यसभा सदस्य (प्रस्तावित)
चर्चा का विषयबिहार का अगला मुख्यमंत्री

बिहार की राजनीति में ‘निशांत युग’ की शुरुआत और नीतीश कुमार का केंद्र की राजनीति में जाना, आने वाले चुनावों के लिए बड़े संकेत दे रहा है। क्या निशांत कुमार अपने पिता की विरासत को उसी मजबूती से संभाल पाएंगे? यह देखना दिलचस्प होगा।

पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव: छात्र राजद के उपाध्यक्ष उम्मीदवार सुमन शेखर का बड़ा विजन, बुनियादी सुविधाओं और प्लेसमेंट पर जोर

इस तस्वीर में सुमन शेखर विश्वविद्यालय की समस्याओं और अपने विज़न पर चर्चा कर रहे हैं।

पटना विश्वविद्यालय, जिसे कभी ‘पूर्व में ऑक्सफोर्ड’ कहा जाता था, इन दिनों छात्र संघ चुनाव की सरगर्मियों से सराबोर है। छात्र राजनीति के इस गढ़ में हर उम्मीदवार अपनी धाक जमाने की कोशिश कर रहा है। इसी कड़ी में छात्र राजद (CRJD) के उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार सुमन शेखर ने ‘भूमि न्यूज़’ के साथ विशेष बातचीत में विश्वविद्यालय की बुनियादी समस्याओं और अपने भविष्य के लक्ष्यों पर चर्चा की।

बुनियादी सुविधाओं और प्लेसमेंट सेल पर ज़ोर

सुमन शेखर ने साक्षात्कार के दौरान इस बात पर बल दिया कि उनका मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय में बुनियादी सुविधाओं (Basic Facilities) में सुधार करना है। उन्होंने अपने घोषणापत्र की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी ‘प्लेसमेंट सेल’ की स्थापना को बताया।

शेखर ने कहा, “पटना विश्वविद्यालय का इतिहास बहुत गौरवशाली रहा है। यहाँ के पूर्व छात्र (Alumni) देश-दुनिया के ऊँचे पदों पर आसीन हैं। यदि हम अपने पूर्व छात्रों के नेटवर्क का सही उपयोग करें, तो विश्वविद्यालय में एक बेहतरीन प्लेसमेंट सेल का निर्माण संभव है, जो छात्रों के भविष्य के लिए क्रांतिकारी साबित होगा।”

महिला कॉलेजों में स्वास्थ्य और स्वच्छता का मुद्दा

सुमन ने छात्राओं की समस्याओं, विशेषकर स्वास्थ्य और स्वच्छता (Hygiene) पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने मगध महिला कॉलेज का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां हॉस्टल में रहने वाली बड़ी संख्या में छात्राओं के बावजूद एक मेडिकल शॉप की अनुपस्थिति चिंताजनक है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि छात्राओं की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को प्राथमिकता दी जाए।

विश्वविद्यालय की चुनौतियों पर बेबाक राय

साक्षात्कार में उन्होंने विश्वविद्यालय के पिछड़ते सत्रों (Late Sessions) और शिक्षकों की कमी पर भी चिंता व्यक्त की। सुमन शेखर ने सुझाव दिया कि:

  • वरिष्ठ प्रोफेसरों को प्रशासनिक कार्यों के बजाय क्लास वर्क और रिसर्च में अधिक शामिल किया जाना चाहिए।
  • नए प्रोफेसरों को प्रशासनिक जिम्मेदारी दी जानी चाहिए ताकि वे काम को गति दे सकें।
  • विश्वविद्यालय को भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी बनाने की आवश्यकता है।

छात्र संघ चुनाव सिर्फ राजनीति नहीं, व्यक्तित्व विकास का माध्यम है

छात्र राजनीति को अक्सर मुख्यधारा की राजनीति की पहली सीढ़ी माना जाता है, लेकिन सुमन शेखर का नज़रिया कुछ अलग है। उनका मानना है कि छात्र संघ चुनाव लड़ने से छात्रों में तनाव प्रबंधन (Stress Management) और निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है। यह ज़रूरी नहीं कि हर छात्र नेता भविष्य में राजनेता ही बने; वे अच्छे ब्यूरोक्रेट्स, लेखक या समाज के ज़िम्मेदार नागरिक भी बन सकते हैं।

छात्रों से अपील

अंत में, सुमन शेखर ने पटना विश्वविद्यालय के सभी छात्र-छात्राओं से अपील की कि वे अपने मत का प्रयोग अवश्य करें। उन्होंने आग्रह किया कि छात्र जाति, धर्म और किसी के प्रभाव में आए बिना उम्मीदवार के विजन (Vision) और ब्लूप्रिंट को देखकर अपना नेता चुनें।

सुमन शेखर का आत्मविश्वास और विश्वविद्यालय की समस्याओं के प्रति उनकी गहरी समझ यह दर्शाती है कि इस बार का चुनाव केवल नारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ठोस बदलाव की उम्मीद भी लेकर आया है। अब देखना यह होगा कि विश्वविद्यालय के छात्र उनके विज़न पर कितना भरोसा जताते हैं।

क्या आप पटना विश्वविद्यालय के छात्र हैं? सुमन शेखर के इन वादों पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट में ज़रूर बताएं!

मधुबनी जिला परिषद विवाद: डाक बंगला की जगह सभा भवन निर्माण पर रोक की मांग

362022

मधुबनी: जिले की राजनीति में इन दिनों विकास कार्यों और सरकारी धन के उपयोग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जिला परिषद सदस्य ललिता देवी ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए ‘डाक बंगला’ की जगह ‘नूतन सभा भवन’ (नया मीटिंग हॉल) के निर्माण को जनता के पैसों की बर्बादी बताया है।

ललिता देवी ने इस संबंध में उप विकास आयुक्त (DDC) सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी को पत्र लिखकर इस निर्माण पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है।

361873

क्या है पूरा मामला?

जिला परिषद सदस्य का कहना है कि मधुबनी जिला परिषद परिसर में पहले से मौजूद डाक बंगला को तोड़कर वहां एक नया सभा भवन बनाने की योजना बनाई गई है। उनका आरोप है कि यह निर्माण अनावश्यक है और यह आम जनता के टैक्स से आए पैसों का दुरुपयोग करने की एक ‘साजिश’ है।

विरोध के मुख्य कारण

पत्र में ललिता देवी ने इस निर्माण को गलत ठहराने के लिए कई महत्वपूर्ण तर्क दिए हैं:

  • पहले से उपलब्ध हैं सभा भवन: जिला परिषद परिसर में ‘विकास भवन’ और ‘जिला परिषद भवन’ दोनों में पहले से ही सुसज्जित सभा भवन मौजूद हैं।
  • अधूरे प्रोजेक्ट्स की अनदेखी: परिसर में ही एक पांच मंजिला मल्टीपर्पस भवन पिछले 8 वर्षों से अधूरा पड़ा है। उस पर ध्यान देने के बजाय नए प्रोजेक्ट पर पैसा खर्च किया जा रहा है।
  • नए भवनों की मंजूरी: परिसर में पहले से ही एक D.P.R.C. भवन के निर्माण की मंजूरी मिल चुकी है। ऐसे में एक और सभा भवन की कोई आवश्यकता नहीं है।

‘शीत भंडारण गृह’ (Cold Storage) बनाने का सुझाव

ललिता देवी ने प्रशासन को एक वैकल्पिक और जनहितकारी सुझाव भी दिया है। उन्होंने मांग की है कि सभा भवन पर पैसे बर्बाद करने के बजाय:

लदनियां प्रखण्ड के बौरहा गाँव में स्थित जिला परिषद की भूमि पर एक शीत भंडारण गृह (Cold Storage) का निर्माण कराया जाए। इससे क्षेत्र के किसानों को सीधा लाभ होगा और उनकी फसलें बर्बाद होने से बचेंगी।

जिला परिषद सदस्य ने प्रशासन से अपील की है कि व्यापक लोकहित को देखते हुए अनावश्यक सभा भवन के निर्माण की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए और जनता के पैसे को वहां खर्च किया जाए जहां उसकी असल जरूरत है।

अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस पत्र पर क्या संज्ञान लेता है और क्या इस निर्माण कार्य को रोककर जनहित के अन्य कार्यों को प्राथमिकता दी जाती है।

क्या भारत भी जिम्बाब्वे की राह पर है? मुफ्त की राजनीति और आर्थिक तबाही का सच

359805

कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया और विदेशी चैनलों पर एक वीडियो खूब वायरल हुआ था, जिसे देखकर हंसी भी आती है और डर भी लगता है। वीडियो में जिम्बाब्वे का एक लड़का बोरी भर के नोट लेकर दुकान पर सिर्फ एक चॉकलेट खरीदने पहुँचा है।

यह सुनने में किसी कॉमेडी फिल्म का सीन लग सकता है, लेकिन यह एक देश की बर्बादी की वो दास्तान है जिसे ‘मुफ्तखोरी की राजनीति’ ने लिखा है।

359803

सत्ता का लालच और जिम्बाब्वे का पतन

जिम्बाब्वे के शासकों ने सोचा कि सत्ता में बने रहने का सबसे आसान तरीका है—जनता को सब कुछ मुफ्त दे दो। उन्होंने लोकलुभावन वादों की झड़ी लगा दी:

  • हर नागरिक को हर महीने 10,000 जिम्बाब्वे करेंसी बांटना।
  • किसानों को एमएसपी (MSP) की अंधी गारंटी।
  • मजदूरों को बिना किसी बजट प्रावधान के भारी-भरकम पेंशन।

नतीजा?

शुरुआती तीन महीने तो जनता को लगा कि स्वर्ग धरती पर आ गया है। लेकिन चौथे महीने से हकीकत सामने आने लगी। जब बाजार में सामान कम और नोटों की बाढ़ ज्यादा हो गई, तो मुद्रा (Currency) की कीमत कौड़ियों के बराबर रह गई। आज वहां सड़कों पर नोट कचरे की तरह बिखरे मिलते हैं।

₹5 की चॉकलेट और दो बोरी नोट

आज जिम्बाब्वे की महंगाई (Hyperinflation) का आलम यह है कि यदि आप भारत में मिलने वाली मामूली ₹5 वाली कैडबरी चॉकलेट खरीदना चाहें, तो आपको दो बोरों में भरकर वहां की करेंसी ले जानी पड़ेगी। स्थिति इतनी भयावह हो गई कि सरकार को 10 मिलियन और 50 मिलियन जैसे बड़े नोट छापने पड़े, जिनकी असल कीमत एक ब्रेड के टुकड़े से भी कम है।

चेतावनी: जब अर्थव्यवस्था उत्पादन (Production) के बजाय सिर्फ नोट छापने और बांटने पर टिकी होती है, तो वह ताश के पत्तों की तरह ढह जाती है।

भारत के संदर्भ में एक गंभीर सबक

आज भारत में भी कुछ ऐसी ही ताकतें सक्रिय हैं जो देश को इसी ‘जिम्बाब्वे मॉडल’ पर धकेलना चाहती हैं। जॉर्ज सोरोस जैसे विदेशी एजेंडे से प्रेरित कुछ तत्व और ‘फर्जी किसान’ आंदोलन के नाम पर देश की अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ डालने की मांग कर रहे हैं।

मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी और बिना सोचे-समझे दी जाने वाली गारंटियों का लालच सुनने में मीठा लगता है, लेकिन इसका अंत जिम्बाब्वे जैसा ही होता है। यदि हम आज नहीं संभले और आर्थिक अनुशासन (Economic Discipline) को महत्व नहीं दिया, तो अगली पीढ़ी को चॉकलेट खरीदने के लिए भी बोरियों की जरूरत पड़ सकती है।

हमें यह तय करना होगा कि हमें एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत चाहिए, या ‘रेवड़ी संस्कृति’ वाला कंगाल देश।

क्या आपको लगता है कि भारत में बढ़ती ‘फ्रीबीज’ की राजनीति हमारे भविष्य के लिए खतरा है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

प्रशांत किशोर का बड़ा बयान: सही तरीके से चुनाव लड़ना कठिन, पर बिहार की सूरत बदलने के लिए हम 10 साल संघर्ष को तैयार

351799

झंझारपुर, 21 फ़रवरी 2026: जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर (PK) अपनी ‘बिहार नवनिर्माण यात्रा’ के क्रम में आज झंझारपुर पहुंचे। यहाँ मीडिया से बात करते हुए उन्होंने संगठन की भविष्य की रणनीति और हालिया चुनावी अनुभवों पर बेबाकी से अपनी राय रखी।

संगठन का पुनर्गठन: पंचायत स्तर तक पहुँचेगी जन सुराज

प्रशांत किशोर ने बताया कि जन सुराज इस समय अपने संगठन को पुनर्गठित करने के मिशन पर है। यह केवल ऊपरी ढांचे में बदलाव नहीं है, बल्कि उन पुराने साथियों को फिर से एकजुट करने की मुहिम है जो विचारधारा की नींव से जुड़े रहे हैं।

  • उद्देश्य: प्रत्येक प्रखंड और पंचायत स्तर तक पार्टी के सिद्धांतों को पहुँचाना।
  • रणनीति: पदाधिकारियों के चयन के साथ-साथ जमीनी कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाना।
351796

चुनाव परिणामों पर PK की खरी-खरी

हालिया चुनाव परिणामों के सवाल पर प्रशांत किशोर ने एक गंभीर और ईमानदार विश्लेषण पेश किया। उन्होंने स्वीकार किया कि बिहार में बिना जाति, धर्म या गठबंधन के सहारे चुनाव लड़ना एक चुनौतीपूर्ण मार्ग है।

सही तरीके से चुनाव लड़कर जीत हासिल करना हमेशा से कठिन रहा है। हमने न तो किसी से गठबंधन किया और न ही जाति-धर्म के समीकरण साधे। यह एक लंबी लड़ाई है, और हम इसके लिए 5 से 10 साल तक संघर्ष करने को तैयार हैं।- प्रशांत किशोर

केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, व्यवस्था परिवर्तन लक्ष्य

PK ने झंझारपुर की जनता और कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि जन सुराज का लक्ष्य केवल चुनाव जीतना या हारना नहीं है। उनकी लड़ाई बिहार के हर जिले में:

  • रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए है।
  • ​राज्य में उद्योगों की स्थापना सुनिश्चित करने के लिए है।
  • ​बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जन सुराज केवल उन लोगों का समूह नहीं है जो वर्तमान सरकार से असंतुष्ट हैं, बल्कि यह उन लोगों का मंच है जो बिहार में वास्तविक बदलाव देखना चाहते हैं।

स्थानीय कार्यकर्ताओं में उत्साह

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्थानीय पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं की भारी मौजूदगी रही। सभी ने संगठन की आगामी कार्ययोजना पर चर्चा की और संकल्प लिया कि वे गाँव-गाँव जाकर ‘जन सुराज’ की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाएंगे।

प्रशांत किशोर के इस दौरे ने साफ कर दिया है कि चुनावी हार-जीत से बेफिक्र होकर वे एक लंबी पारी की तैयारी कर रहे हैं। बिहार की राजनीति में यह ‘शुद्धतावादी’ प्रयोग कितना सफल होगा, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन उनके इरादे स्पष्ट हैं।

बिहार की राजनीति: जदयू प्रवक्ता मनीष यादव का तेजस्वी पर तीखा प्रहार, ‘नैतिकता’ पर उठाए सवाल

342119

बिहार की राजनीति में जुबानी जंग कोई नई बात नहीं है, लेकिन हाल ही में जदयू (JDU) प्रवक्ता मनीष यादव ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर जो हमला बोला है, उसने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच की खाई को और गहरा कर दिया है। मनीष यादव ने तेजस्वी यादव की सदन में अनुपस्थिति को मुद्दा बनाते हुए उनके पद की नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

क्या है पूरा मामला ?

जदयू प्रवक्ता मनीष यादव ने एक बयान जारी करते हुए तेजस्वी यादव की कार्यशैली पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब तेजस्वी यादव सदन की कार्यवाही में हिस्सा ही नहीं लेते और सदन में मौजूद नहीं रहते, तो उन्हें ‘नेता प्रतिपक्ष’ की जिम्मेदारी और सुख-सुविधाओं का मोह क्यों है?

मनीष यादव के तीखे सवाल

मनीष यादव ने अपने बयान में मुख्य रूप से तीन बातें रेखांकित कीं:

  • जिम्मेदारी से भागने का आरोप: उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष का पद संवैधानिक जिम्मेदारी का होता है। अगर आप सदन में जनता की आवाज उठाने के लिए उपस्थित नहीं हो सकते, तो आपको पद पर बने रहने का कोई हक नहीं है।
  • पद छोड़ने की चुनौती: जदयू प्रवक्ता ने सीधे शब्दों में कहा, “जब आप सदन की कार्यवाही में नहीं आते, तो नैतिकता के आधार पर नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी क्यों नहीं छोड़ देते?”
  • जनता के साथ विश्वासघात: उन्होंने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव केवल ट्विटर और सोशल मीडिया की राजनीति करते हैं, जबकि असल मुद्दों पर सदन में चर्चा के समय वे नदारद रहते हैं।

विपक्ष का घेराव और राजनीतिक मायने

यह पहली बार नहीं है जब जदयू ने तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति को मुद्दा बनाया है। एनडीए के नेताओं का अक्सर यह तर्क रहता है कि तेजस्वी महत्वपूर्ण विधायी सत्रों के दौरान बिहार से बाहर रहते हैं।

मनीष यादव के इस हमले के पीछे की रणनीति स्पष्ट है: जनता के बीच तेजस्वी यादव को एक ‘पार्ट-टाइम’ राजनेता के रूप में पेश करना।

बिहार विधानसभा चुनाव की आहट जैसे-जैसे करीब आएगी, इस तरह के हमले और तेज होंगे। अब देखना यह है कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) मनीष यादव के इन आरोपों का क्या जवाब देती है और क्या तेजस्वी यादव अपनी सदन में उपस्थिति को लेकर कोई नई रणनीति अपनाते हैं।