फुलपरास: 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में वामपंथी नेताओं ने NH जाम कर किया प्रदर्शन

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मधुबनी (बिहार): केंद्र सरकार की ‘मजदूर और किसान विरोधी’ नीतियों के खिलाफ आज, 12 फरवरी 2026 को ट्रेड यूनियनों और वामपंथी दलों द्वारा बुलाए गए देशव्यापी हड़ताल का असर बिहार के मधुबनी जिले में भी देखने को मिला। इसी क्रम में फुलपरास के लोहिया चौक पर सीपीआई (एम) (CPI-M) और विभिन्न वामपंथी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) को जाम कर विरोध प्रदर्शन किया।

प्रमुख मांगें जिन पर रहा जोर:

प्रदर्शनकारियों ने हाथों में लाल झंडे और बैनर लेकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनके मुख्य एजेंडे में निम्नलिखित मांगें शामिल थीं:

  • चार लेबर कोड वापस लो: कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार श्रम कानूनों (Labour Codes) को वापस लेने की मांग की, जिसे वे मजदूर विरोधी बता रहे हैं।
  • किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी: कृषि उत्पादों के लिए कानूनी रूप से MSP की मांग दोहराई गई।
  • मनरेगा कानून में बदलाव वापस लो: मनरेगा के बजट में कटौती और इसके स्वरूप में बदलाव का विरोध करते हुए इसे पुराने स्वरूप में बहाल करने की मांग की गई।
  • निजीकरण पर रोक: सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के निजीकरण को रोकने की आवाज बुलंद की गई।

नेताओं का बयान

मौके पर मौजूद अंचल कमेटी, फुलपरास के नेताओं ने संबोधित करते हुए कहा कि जब तक सरकार इन ‘काले कानूनों’ को वापस नहीं लेती, तब तक यह आंदोलन और भी उग्र होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि विकसित भारत के नाम पर मजदूरों को बंधुआ बनाने की साजिश रची जा रही है।

Bihar Budget 2026-27: 1 करोड़ रोजगार, महिलाओं को तोहफा और विकसित बिहार का रोडमैप – जानें बजट की 10 बड़ी बातें

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बिहार के वित्त मंत्री श्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने आज विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया। लाल रंग के ब्रीफकेस में लाया गया यह बजट राज्य को ‘विकसित बिहार’ और ‘आत्मनिर्भर’ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया जा रहा है।

इस बजट का कुल आकार 3,47,589.76 करोड़ रुपये है, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक है। सरकार ने इस बजट में रोजगार, महिला सशक्तिकरण और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर सबसे ज्यादा जोर दिया है।

आइये जानते हैं इस बजट की मुख्य विशेषताएं और आम जनता के लिए इसमें क्या खास है।

1. बजट का आकार और आर्थिक विकास दर

वित्त मंत्री ने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए बिहार का कुल बजट 3.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक का है।

  • विकास दर: बिहार की अर्थव्यवस्था 2025-26 के लिए 14.9% की दर से आगे बढ़ने का अनुमान है, जो देश के कई बड़े राज्यों से अधिक है।
  • राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit): इसे सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) के 2.99% पर सीमित रखने का लक्ष्य रखा गया है, जो वित्तीय अनुशासन को दर्शाता है।

2. मुख्यमंत्री के नेतृत्व के “5 तत्व”

बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व की सराहना करते हुए 5 प्रमुख तत्वों का जिक्र किया जो बिहार के विकास का आधार बनेंगे:

  1. ज्ञान (Knowledge)
  2. ईमान (Integrity)
  3. विज्ञान (Science)
  4. अरमान (Aspirations)
  5. सम्मान (Respect)

3. रोजगार पर सबसे बड़ा वार: ‘सात निश्चय-3’ का आगाज

सरकार ने ‘सात निश्चय-3’ के संकल्प के साथ बिहार को विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने का लक्ष्य रखा है।

  • 1 करोड़ रोजगार: सरकार ने राज्य में 1 करोड़ रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य रखा है।
  • प्रति व्यक्ति आय: राज्य की प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) को दोगुना करने का संकल्प लिया गया है।

4. महिला सशक्तिकरण: लखपति दीदी और आर्थिक मदद

बिहार बजट 2026-27 में महिलाओं के लिए खजाना खोल दिया गया है:

  • आर्थिक सहायता: अब तक 1 करोड़ 56 लाख से अधिक महिला सदस्यों को 10-10 हजार रुपये की सहायता दी जा चुकी है।
  • बिजनेस के लिए मदद: महिलाओं को अपना व्यवसाय बढ़ाने के लिए 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी।

5. गरीबी उन्मूलन और लघु उद्यमी योजना

जाति आधारित गणना के आंकड़ों के आधार पर सरकार गरीबों की मदद के लिए प्रतिबद्ध है।

  • चिन्हित 94 लाख गरीब परिवारों को ‘लघु उद्यमी योजना’ के माध्यम से सशक्त बनाया जाएगा।
  • शहरी गरीबों के लिए सस्ते आवास उपलब्ध कराने का प्रावधान भी बजट में शामिल है।

6. केंद्र सरकार का सहयोग और बड़ी परियोजनाएं

वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के सहयोग की सराहना की। बजट में इन केंद्रीय परियोजनाओं का जिक्र किया गया:

  • बिहार में मखाना बोर्ड की स्थापना।
  • आईटीआई (ITI) पटना का विस्तार।
  • नए हवाई अड्डे और खाद्य प्रसंस्करण संस्थान।
  • प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं में विशेष वित्तीय मदद।

7. इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी

बिहार के बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय बनाने के लिए बजट में कई घोषणाएं की गई हैं:

  • राज्य में 5 नए एक्सप्रेस-वे (Expressways) का निर्माण।
  • सौर ऊर्जा (Solar Energy) का व्यापक विस्तार।
  • नदी जोड़ो परियोजनाओं पर काम।

8. कृषि और ग्रामीण विकास (चौथा कृषि रोडमैप)

किसानों की आय बढ़ाने के लिए चौथे कृषि रोडमैप पर जोर दिया गया है:

  • मखाना उत्पादन, डेयरी उद्योग और मत्स्य पालन को प्रोत्साहन।
  • हाट-बाजारों का विकास ताकि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिले।

9. शिक्षा और स्वास्थ्य

  • हर प्रखंड में आदर्श विद्यालय और डिग्री कॉलेज की स्थापना।
  • जिला अस्पतालों को सुपर स्पेशलिटी स्तर तक अपग्रेड करना।

10. ईज ऑफ लिविंग (Ease of Living)

बुजुर्गों और आम नागरिकों के लिए जीवन आसान बनाने की पहल:

  • वृद्धजनों के लिए घर पर ही स्वास्थ्य सुविधाएं।
  • संपत्ति पंजीकरण (Property Registration) की सुविधा घर पर ही उपलब्ध कराने का प्रस्ताव।

निष्कर्ष (Conclusion)

बिहार बजट 2026-27 स्पष्ट रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार पर केंद्रित बजट है। 14.9% की विकास दर का अनुमान और 1 करोड़ रोजगार का वादा बिहार के युवाओं के लिए नई उम्मीदें लेकर आया है। अब देखना यह होगा कि धरातल पर ये योजनाएं कितनी जल्दी लागू होती हैं।

आपका क्या मानना है?

क्या यह बजट बिहार की तकदीर बदल पाएगा? हमें कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दें।

तेजप्रताप यादव का दिखा अलग अंदाज: यादव जी के माल गाने पर भड़के, मंच से ही लगवाई क्लास

पटना: मकर संक्रांति के अवसर पर पटना में सियासी गलियारों में दही-चूड़ा भोज की धूम रही। लेकिन, जजद नेता और लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव के आवास पर आयोजित भोज चर्चा का विषय बन गया है। चर्चा का कारण राजनीति नहीं, बल्कि तेजप्रताप यादव द्वारा दिखाई गई ‘सांस्कृतिक मर्यादा’ है।

दरअसल, कार्यक्रम के दौरान एक लोक गायिका ने जजद समर्थकों के बीच लोकप्रिय गाना “हम त यादव जी के माल हईं रे…” गाना शुरू कर दिया। जैसे ही यह गाना तेजप्रताप के कानों तक पहुंचा, वह तुरंत अपनी कुर्सी से उठे और मंच पर जाकर गाना रुकवा दिया।

क्या है पूरा मामला?

तेजप्रताप यादव ने अपने आवास पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया था, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और लोग पहुंचे थे। मनोरंजन के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम भी चल रहा था। इसी बीच, गायिका ने भोजपुरी का एक चर्चित गाना गाना शुरू किया, जिसके बोल थे:

“ना ही गोले वाला दाल हईं रे… हम त यादव जी के माल हईं रे…”

यह सुनते ही तेजप्रताप यादव असहज हो गए। वह भीड़ के बीच से निकलते हुए सीधे मंच के पास पहुंचे और माइक लेकर गायिका को बीच में ही रोक दिया।

तेजप्रताप की दो टूक: ‘यह सब यहां नहीं चलेगा’

तेजप्रताप यादव ने न केवल गाना बंद करवाया, बल्कि नसीहत भी दी। उन्होंने सख्त लहजे में कहा:

“ए रुकिए… ये सब वल्गर (अश्लील) गाना मत गाइए यहां। यह एक कार्यक्रम है। यहां भगवान का भजन गाइए, कृष्ण भगवान का भजन सुनाइए। यह सब गाना यहां नहीं चलेगा।”

तेजप्रताप के इस कदम के बाद वहां मौजूद माहौल पूरी तरह बदल गया और कार्यक्रम में भक्ति गीत गाए जाने लगे।

मर्यादा और संस्कार की हो रही तारीफ

अक्सर अपने बयानों और अलग अंदाज के लिए सुर्खियों में रहने वाले तेजप्रताप यादव का यह रूप लोगों को खूब भा रहा है। सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इसे तेजप्रताप के संस्कार और सांस्कृतिक सोच से जोड़कर देख रहे हैं।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि राजद (RJD) के कार्यक्रमों में अक्सर ऐसे गानों का चलन रहा है, जिन्हें लेकर विपक्ष भी निशाना साधता रहा है। ऐसे में तेजप्रताप यादव का यह कदम एक नई लकीर खींचने जैसा है। उन्होंने साफ संदेश दिया है कि सार्वजनिक मंचों पर फूहड़ता की जगह नहीं होनी चाहिए, भले ही वह उनकी पार्टी के समर्थकों को पसंद आने वाला गाना ही क्यों न हो।

तेजप्रताप यादव खुद को कृष्ण भक्त बताते हैं और अक्सर धार्मिक यात्राओं पर रहते हैं। दही-चूड़ा भोज में अश्लील गाने पर रोक लगाकर उन्होंने साबित कर दिया है कि वे अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक छवि को लेकर कितने गंभीर हैं। उनके इस फैसले ने न केवल वहां मौजूद लोगों का दिल जीता, बल्कि यह भी संदेश दिया कि मनोरंजन के नाम पर मर्यादा नहीं लांघी जानी चाहिए।

सुपौल रेलवे लाइन: विकास की हकीकत बनाम क्रेडिट की सियासत – एक दस्तावेजी पड़ताल

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विकास, विश्वास और ‘क्रेडिट’ का प्रयास: सोशल मीडिया के शोर में गुम होती हकीकत

“विकास होना, विकास के लिये कार्य करना एवं विकास के लिये सतत प्रयास करना सराहनीय, प्रशंसनीय एवं अनुकरणीय कार्य है। परन्तु कुछ लोगों की विशेषता है, उस कार्य को अपने नाम पर घोषित कराने का…”

बिहार के कोसी क्षेत्र, विशेषकर सुपौल में ललितग्राम-बीरपुर नई रेल लाइन (22 किमी) की स्वीकृति के बाद उपजा ताजा राजनीतिक परिदृश्य इन पंक्तियों को अक्षरशः चरितार्थ करता है। विकास एक सतत प्रक्रिया है, लेकिन विडंबना यह है कि आज यह ‘सतत प्रयास’ के बजाय ‘तत्काल श्रेय’ लेने की होड़ में बदल गया है।

सोशल मीडिया: दावों का बाजार

जैसे ही रेलवे बोर्ड से इस बहुप्रतीक्षित परियोजना की फाइल आगे बढ़ी, सोशल मीडिया पर ‘क्रेडिट’ लेने की एक वर्चुअल दौड़ शुरू हो गई। यह दौड़ दिलचस्प है क्योंकि इसमें एक ही काम के कई ‘पिता’ सामने आ रहे हैं। बिना किसी का नाम लिए, अगर हम सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पोस्ट्स पर नज़र डालें, तो स्थिति हास्यास्पद लगती है:

  • दावा नंबर 1: सोशल मीडिया के एक कोने में पोस्ट तैर रही है— “जो कहा, वो कर के दिखाया!”। दावा किया जा रहा है कि यह व्यक्तिगत प्रयासों का फल है और वर्षों के संघर्ष का परिणाम है।
  • दावा नंबर 2: वहीं, दूसरे डिजिटल गलियारों (व्हाट्सएप ग्रुप्स) में “तन-मन रोमांचित” होने की बात कही जा रही है। वहां किसी और ही नेतृत्व के भरोसे और प्रभाव को इस सफलता का कारण बताया जा रहा है।

आम जनता भ्रमित है कि आखिर एक ही रेल लाइन के लिए अलग-अलग खेमों में इतनी बधाइयां क्यों बंट रही हैं? क्या विकास सोशल मीडिया पोस्ट से होता है?

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दस्तावेजी हकीकत: मौन कर्मयोगी

जब शोर थम जाता है, तो कागज बोलते हैं। पूर्व मध्य रेलवे (ECR) का एक आधिकारिक पत्र (Letter No-ECR/CAO/CON/SEC/N/45) सोशल मीडिया के इन हवाई दावों से इतर एक अलग ही कहानी बयां करता है।

रेलवे के इस दस्तावेज में स्पष्ट लिखा है कि प्रोजेक्ट का यह लेटेस्ट स्टेटस अपडेट बिहार सरकार के ऊर्जा एवं योजना मंत्री श्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के साथ हुई “मौखिक चर्चा के अनुपालन” (In compliance of verbal discussion) में जारी किया गया है।

दस्तावेज बताते हैं कि इन तारीखों पर फाइलों को टेबल-दर-टेबल आगे बढ़ाने के पीछे निरंतर प्रशासनिक संवाद और दबाव मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव का था। असली काम खामोशी से फाइलों को आगे बढ़ाने में होता है, न कि सोशल मीडिया पर शोर मचाने में।

श्रेय नहीं, सत्य चाहिए

लोकतंत्र में जनता को यह जानने का हक है कि उनके लिए वास्तव में पसीना कौन बहा रहा है और कौन केवल बहती गंगा में हाथ धो रहा है।

सुपौल और कोसी की जनता के लिए यह समझना जरूरी है कि विकास ‘फेसबुक पोस्ट’ करने से नहीं, बल्कि ‘प्रयास’ करने से आता है। श्रेय लेने की होड़ में नेताओं को यह नहीं भूलना चाहिए कि पब्लिक सब जानती है—कागज पर क्या लिखा है और स्क्रीन पर क्या दिख रहा है। रेलवे का यह पत्र गवाह है कि विकास की गाड़ी को इंजन कौन दे रहा है, और कौन केवल प्लेटफार्म पर सीटी बजा रहा है।

प्रोजेक्ट: ललितग्राम-बीरपुर नई रेल लाइन (22 किमी)।

विवाद: सोशल मीडिया पर कई नेताओं द्वारा श्रेय लेने की होड़।

सच: रेलवे के आधिकारिक पत्र में केवल बिजेंद्र प्रसाद यादव के प्रयासों और चर्चा का उल्लेख है।

संदेश: विकास कार्यों का श्रेय सोशल मीडिया पोस्ट्स से नहीं, आधिकारिक दस्तावेजों से तय होना चाहिए।

मंत्री बिजेंद्र यादव की कोसी-मिथिला को बड़ी सौगात: 126 करोड़ से चमकेगी नेपाल बॉर्डर की सड़क, शक्तिपीठों को जोड़ने का सपना हुआ साकार

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खबर एक नज़र में:

  • प्रयास: माननीय मंत्री श्री बिजेंद्र प्रसाद यादव की दूरदर्शी सोच का परिणाम।
  • प्रोजेक्ट: मझारी चौक (NH-27) से कुनौली बाजार (नेपाल बॉर्डर) वाया डगमरा।
  • लागत: 126 करोड़ 23 लाख रुपये (प्रशासनिक स्वीकृति मिली)।
  • विशेषता: सखरा भगवती और कंकाली भगवती जैसे ऐतिहासिक शक्तिपीठों का होगा सीधा जुड़ाव।

पटना/मधुबनी: बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री और कोसी क्षेत्र के विकास पुरुष कहे जाने वाले श्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने एक बार फिर कोसी और मिथिलांचल के लोगों को बड़ी खुशखबरी दी है। मंत्री जी के अथक प्रयासों और क्षेत्र के विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के चलते इंडो-नेपाल सीमा (Indo-Nepal Border) तक जाने वाली अतिमहत्वपूर्ण सड़क परियोजना को प्रशासनिक स्वीकृति मिल गई है।

मंत्री बिजेंद्र यादव का विजन:

सड़क ही नहीं, संस्कृति का जुड़ाव के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण”

यह परियोजना केवल डामर और गिट्टी की सड़क नहीं है, बल्कि यह मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के उस विजन का हिस्सा है, जिसके तहत वे सीमावर्ती क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ना चाहते हैं। मधुबनी के लौकहा एवं फुलपरास विधानसभा और सुपौल के सीमावर्ती इलाकों के लिए यह सड़क जीवन रेखा साबित होगी।

मंत्री जी ने लगातार इस बात पर जोर दिया था कि नेपाल बॉर्डर तक की कनेक्टिविटी सुदृढ़ होनी चाहिए ताकि भारत-नेपाल के ‘रोटी-बेटी’ के रिश्तों को और मजबूती मिले और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आए।

इन दो प्रसिद्ध मंदिरों को मिलेगी नई पहचान

इस सड़क की सबसे खास बात इसका धार्मिक महत्व है। स्थानीय लोगों की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करते हुए, मंत्री जी ने यह सुनिश्चित किया कि इस रूट का कायाकल्प हो। यह सड़क क्षेत्र के दो सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों—सखरा भगवती और कंकाली भगवती मंदिर—को आपस में जोड़ती है।

अब श्रद्धालुओं को इन शक्तिपीठों के दर्शन के लिए हिचकोले नहीं खाने पड़ेंगे। माना जा रहा है कि सड़क बनने के बाद यहाँ धार्मिक पर्यटन (Religious Tourism) में भारी उछाल आएगा, जिसका सीधा श्रेय मंत्री बिजेंद्र यादव की पहल को जाता है।

क्या है पूरी परियोजना? (सरकारी आंकड़े)

पथ निर्माण विभाग द्वारा जारी अधिसूचना (क्रम संख्या 36) के अनुसार:

  • रूट: पथ प्रमंडल सुपौल अंतर्गत मझारी चौक (NH-27) से कुनौली बाजार (नेपाल बॉर्डर) वाया डगमरा।
  • लंबाई: कुल 25.353 किलोमीटर।
  • स्वीकृत राशि: ₹12623.994 लाख (लगभग 126 करोड़ 23 लाख रुपये)।
  • कार्य: सड़क का चौड़ीकरण (Widening) एवं मजबूतीकरण।

क्षेत्र में खुशी की लहर 126 करोड़ की इस भारी-भरकम राशि की स्वीकृति मिलने के बाद मधुबनी और सुपौल के सीमावर्ती इलाकों में खुशी का माहौल है। स्थानीय नागरिकों और कार्यकर्ताओं ने इसके लिए माननीय मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव का आभार व्यक्त किया है। लोगों का कहना है कि मंत्री जी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि क्षेत्र का विकास उनकी पहली प्राथमिकता है।

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JDU में भीतरघात: बाबूबरही विधायक मीना कुमारी का लेटर बम, भारती मेहता और बासुदेव कुशवाहा समेत 4 बड़े नेताओं पर लगाए गंभीर आरोप

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पटना/मधुबनी: बिहार की राजनीति में विधानसभा चुनाव के बाद भी सरगर्मी कम नहीं हुई है। बाबूबरही विधानसभा क्षेत्र (Babubarhi Assembly Seat) से जदयू विधायक मीना कुमारी (Meena Kumari) ने अपनी ही पार्टी के बड़े नेताओं पर चुनाव में भीतरघात (Anti-party activities) करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है।

विधायक मीना कुमारी ने जनता दल यूनाइटेड (JDU) के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा को एक लिखित शिकायत भेजी है। दिनांक 26/11/25 को लिखे गए इस पत्र में उन्होंने पार्टी के चार प्रमुख नेताओं पर विपक्ष (RJD) के उम्मीदवार की मदद करने और उन्हें चुनाव हराने की साजिश रचने का दावा किया है।

इन 4 नेताओं पर लगाए गंभीर आरोप

विधायक मीना कुमारी ने अपने पत्र में जिन चार नेताओं का जिक्र किया है, वे पार्टी के कद्दावर पदों पर आसीन हैं। पत्र के अनुसार:

श्रीमती भारती मेहता (प्रदेश अध्यक्ष, जदयू महिला प्रकोष्ठ): विधायक ने आरोप लगाया है कि भारती मेहता ने उन्हें चुनाव हराने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी। पत्र में लिखा गया है कि भारती मेहता अपनी स्वजातीय लोगों से कह रही थीं कि “जब मीना कामत (कुमारी) हारेगी, तभी मुझे टिकट मिलेगा। अगर मीना कामत जीत जाएगी तो मुझे टिकट नहीं मिलेगा।” आरोप है कि इस स्वार्थ के चलते उन्होंने राजद प्रत्याशी के पक्ष में काम किया।

श्री बासुदेव कुशवाहा (प्रदेश महासचिव, जदयू): बासुदेव कुशवाहा, जो प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा के बेहद करीबी माने जाते हैं और मुख्यालय प्रभारी भी हैं, उन पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। मीना कुमारी का कहना है कि उनका घर बाबूबरही विधानसभा क्षेत्र में ही है, लेकिन उन्होंने राजद प्रत्याशी अरुण सिंह उर्फ अरुण कुशवाहा को जिताने के लिए पूरी ताकत झोंक दी।

श्रीनारायण भंडारी उर्फ फूले भंडारी (जदयू जिला अध्यक्ष, मधुबनी): मधुबनी जिला अध्यक्ष पर आरोप है कि उन्होंने चुनाव से ठीक पहले विधायक के अनुकूल बने बाबूबरही प्रखंड अध्यक्ष को हटा दिया और एक विरोधी को अध्यक्ष बना दिया। पत्र के मुताबिक, फूले भंडारी ने कामत समाज में राजद प्रत्याशी के पक्ष में वोट मांगे और जदयू समर्थकों को भड़काने का काम किया।

सत्यनारायण साफी (जिला बीस सूत्री सदस्य): चौथा नाम सत्यनारायण साफी का है, जो लदनियां के प्रमुख हैं। पत्र में दावा किया गया है कि उन्होंने चुनाव के दौरान राजद प्रत्याशी अरुण सिंह के समक्ष खुलकर राजद का दामन थाम लिया और उनके पक्ष में कार्य किया।

कार्यवाई की मांग

विधायक मीना कुमारी ने प्रदेश अध्यक्ष से आग्रह किया है कि पार्टी विरोधी कार्य करने वाले इन नेताओं पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। यह पत्र अब सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है और इससे मधुबनी जदयू के अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है।

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कोसी के ‘विश्वकर्मा’ बिजेंद्र प्रसाद यादव: सुपौल में विकास की रफ्तार, मधुबनी के नेताओं के लिए आईना?

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बिहार की राजनीति में नेताओं की कमी नहीं है, लेकिन ‘काम करने वाले’ और ‘सिर्फ नाम करने वाले’ नेताओं के बीच का अंतर कोसी और मिथिलांचल के विकास को देखकर समझा जा सकता है। सुपौल के कद्दावर नेता और बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव (Bijendra Prasad Yadav) को लोग यूं ही ‘कोसी का विश्वकर्मा’ नहीं कहते।

हाल ही में 13 जनवरी 2026 को हुई बिहार कैबिनेट की बैठक ने यह साबित कर दिया है कि अगर नेता में इच्छाशक्ति हो, तो विकास फाइलों में नहीं अटकता। वहीं दूसरी तरफ, मधुबनी (मिथिलांचल) जैसे जिले हैं, जहां बड़े-बड़े दिग्गज नेता होने के बावजूद विकास की वह लकीर नहीं खींची जा सकी जो सुपौल में दिखती है।

एक पत्र और 45 दिनों में काम तमाम: विजेंद्र यादव का ‘सुपौल मॉडल’

बिजेंद्र यादव की कार्यशैली का सबसे बड़ा प्रमाण हमारे पास मौजूद दस्तावेज़ हैं। विकास कार्यों को लेकर उनकी तत्परता देखिए:

  1. दिसंबर 2025 में लिखा पत्र: 1 दिसंबर 2025 को मंत्री विजेंद्र यादव ने बिहार के पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन को दो अलग-अलग पत्र लिखे। उन्होंने सुपौल में मझारी चौक से कुनौली बाजार (नेपाल बॉर्डर) और थरबिटिया रेलवे स्टेशन से गणपतगंज तक की जर्जर सड़कों को पथ निर्माण विभाग द्वारा अधिग्रहित कर चौड़ीकरण करने का आग्रह किया ।
  2. जनवरी 2026 में कैबिनेट की मुहर: पत्र लिखे जाने के मात्र 43 दिनों के भीतर, 13 जनवरी 2026 की कैबिनेट बैठक में इन दोनों योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति मिल गई।

इसे कहते हैं राजनीतिक कद और काम करने का जज्बा। जिस फाइल को पटना के सचिवालय में सरकने में सालों लगते हैं, बिजेंद्र प्रसाद यादव के एक पत्र पर वह महीने भर में धरातल पर उतर आती है।

कैबिनेट से पास हुई 187 करोड़ की दो बड़ी सौगातें

13 जनवरी 2026 को कैबिनेट ने सुपौल के लिए खजाना खोल दिया:

  • प्रोजेक्ट 1: सुपौल पथ प्रमंडल के अंतर्गत मझारी चौक (NH-27) से कुनौली बाजार (नेपाल बॉर्डर) तक (लम्बाई 25.353 कि०मी०)। इसके चौड़ीकरण व मजबूतीकरण के लिए ₹126.23 करोड़ की मंजूरी मिली है । मंत्री जी ने अपने पत्र में इसे “राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण” बताया था ।
  • प्रोजेक्ट 2: थरबिटिया रेलवे स्टेशन से गणपतगंज वाया सिंगआवन, श्रीपुर पथ। इसके लिए ₹61.44 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है । इस सड़क से जाम की समस्या खत्म होगी और कनेक्टिविटी बेहतर होगी ।

मधुबनी और मिथिलांचल: बड़े नेता, लेकिन विकास कहां?

अब तस्वीर का दूसरा पहलू देखिए। कोसी नदी के उस पार सुपौल चमक रहा है, लेकिन इस पार मिथिलांचल का हृदय कहा जाने वाला मधुबनी (Madhubani) आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है।

मधुबनी जिले ने राज्य और केंद्र को कई बड़े कद्दावर नेता दिए हैं। लेकिन धरातल पर स्थिति यह है कि जर्जर सड़कें, जाम और जलजमाव यहां की नियति बन चुकी है। सुपौल में जहां “रेल-रोड कनेक्टिविटी” और “नेपाल बॉर्डर रोड” जैसे प्रोजेक्ट्स पर मिशन मोड में काम हो रहा है, वहीं मधुबनी में आज भी कई परियोजनाएं शिलान्यास के बाद दम तोड़ देती हैं।

सवाल जो जनता पूछ रही है:

  • क्या मधुबनी के नेताओं का कद पटना में इतना बड़ा नहीं है कि वे अपने क्षेत्र के लिए फंड ला सकें?
  • बिजेंद्र प्रसाद यादव जैसा ‘इच्छाशक्ति’ वाला नेतृत्व मिथिलांचल के अन्य जिलों में क्यों नदारद है?
  • सुपौल का रोड नेटवर्क आज बिहार के बेहतरीन नेटवर्क में से एक है, जबकि मधुबनी की सड़कें बदहाल क्यों हैं?

विकास के लिए चाहिए ‘विजेंद्र’ जैसी दृष्टि

सुपौल का विकास इस बात का गवाह है कि नेता अगर चाहे तो अपने क्षेत्र का कायाकल्प कर सकता है। मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने साबित किया है कि उम्र सिर्फ एक नंबर है, असली ऊर्जा काम करने की नीयत में होती है। कोसी क्षेत्र में हो रहा यह ऐतिहासिक कार्य यकीनन उन्हें ‘कोसी का विश्वकर्मा’ की उपाधि के योग्य बनाता है।

अब वक्त आ गया है कि मधुबनी और बाकी मिथिलांचल के नेता सुपौल मॉडल से सीख लें, वरना जनता अब “नाम” नहीं, “काम” का हिसाब मांगेगी।

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सरदार पटेल पर वो जानलेवा हमला, जिसे इतिहास की किताबों ने भुला दिया: भावनगर 1939 की पूरी कहानी

Sardar Patel Bhavnagar Attack 1939

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। हम सभी जानते हैं कि उन्होंने 562 रियासतों का विलय कर अखंड भारत का निर्माण किया, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि राष्ट्र निर्माण के इस सफर में उन पर कई बार जानलेवा हमले भी हुए।

आज हम बात कर रहे हैं 14 मई 1939 की उस भयावह घटना की, जब भावनगर में सरदार पटेल की जान लेने की कोशिश की गई थी।

भावनगर की वो रक्तरंजित दोपहर

14 और 15 मई 1939 को भावनगर राज्य प्रजा परिषद का पाँचवाँ अधिवेशन आयोजित होना था। सरदार पटेल इस अधिवेशन की अध्यक्षता करने के लिए भावनगर पहुंचे थे। रेलवे स्टेशन से शहर तक एक विशाल शोभायात्रा निकाली गई। सरदार पटेल एक खुली जीप में सवार होकर जनता का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे।

जैसे ही जुलूस खार गेट चौक के पास स्थित नगीना मस्जिद के करीब पहुँचा, अचानक मस्जिद के भीतर से हथियारों से लैस एक भीड़ बाहर निकली। हमलावरों के हाथों में तलवारें, छुरे और भाले थे और उनका सीधा निशाना सरदार पटेल थे।

बच्छुभाई पटेल और जाधवभाई मोदी: दो ढाल, जिन्होंने खुद को कुर्बान कर दिया

जब हमलावर जीप की ओर लपके, तो वहां मौजूद दो बहादुर युवकों — बच्छुभाई पटेल और जाधवभाई मोदी — ने भांप लिया कि सरदार की जान खतरे में है। बिना एक पल की देरी किए, दोनों युवक सरदार पटेल के सामने ढाल बनकर खड़े हो गए।

  • बच्छुभाई पटेल: उन्होंने हमलावरों के वार सीधे अपने शरीर पर झेले और मौके पर ही शहीद हो गए।
  • जाधवभाई मोदी: वे गंभीर रूप से घायल हुए और अस्पताल में उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

इन दो वीरों के बलिदान के कारण ही सरदार पटेल सुरक्षित बच सके। आज भी भावनगर में उस स्थान पर इन दोनों शहीदों की प्रतिमाएं उनकी बहादुरी की याद दिलाती हैं।

अदालत का फैसला: किसे मिली फांसी और किसे उम्रकैद?

ब्रिटिश काल के दौरान इस घटना की गहन जांच हुई और विशेष न्यायालय का गठन किया गया। जांच में खुलासा हुआ कि यह हमला सरदार पटेल द्वारा कोलकाता में मुस्लिम लीग की नीतियों के खिलाफ दिए गए भाषणों का प्रतिशोध लेने के लिए किया गया था।

कुल 57 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से मुख्य अपराधियों को कड़ी सजा दी गई:

  1. आजाद अली – फांसी की सजा
  2. रुस्तम अली सिपाही – फांसी की सजा

इसके अलावा, 15 अन्य अपराधियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई गई, जिनमें कासिम दोसा घांची, लतीफ मियां काजी और मोहम्मद करीम सैनिक जैसे नाम शामिल थे।

इतिहास की किताबों से गायब क्यों है यह घटना?

अक्सर सवाल उठाया जाता है कि महात्मा गांधी की हत्या करने वाले का नाम तो हर बच्चा जानता है, लेकिन सरदार पटेल के हत्या के प्रयास और उनके लिए प्राण न्यौछावर करने वाले बच्छुभाई और जाधवभाई का नाम मुख्यधारा के इतिहास से क्यों गायब है?

आलोचकों का मानना है कि आजादी के बाद की सरकारों ने चुनिंदा घटनाओं को ही प्रमुखता दी, जिसके कारण सरदार पटेल जैसे राष्ट्रनायकों के संघर्ष के कई पन्ने धूल फांकते रह गए।

निष्कर्ष:

सरदार पटेल पर हुआ यह हमला केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं था, बल्कि भारत की अखंडता और एकता के विचार पर हमला था। बच्छुभाई और जाधवभाई का बलिदान हमें सिखाता है कि राष्ट्र के नायकों की रक्षा के लिए आम जनता ने भी कितनी बड़ी कीमतें चुकाई हैं।

यह हमारा कर्तव्य है कि हम इस सत्य को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाएं।

Lalu Yadav Bharat Ratna: लालू यादव को ‘भारत रत्न’ देने की मांग पर सियासी भूचाल, BJP नेता ने दिया अब तक का सबसे बड़ा बयान

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Patna | बिहार की राजनीति में एक बार फिर ‘भारत रत्न’ को लेकर घमासान छिड़ गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) द्वारा अपने सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) के लिए देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ की मांग करने के बाद एनडीए (NDA) और भाजपा (BJP) नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। इस मांग पर पलटवार करते हुए भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने इसे बिहार की जनता का अपमान बताया है।

क्या है पूरा मामला?

आरजेडी पूर्व विधायक सह JJD नेता तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) का कहना है कि लालू यादव ने गरीबों और पिछड़ों को आवाज दी है, इसलिए वे इस सम्मान के असली हकदार हैं।

BJP का तीखा हमला: ‘लूट रत्न’ मिलना चाहिए

आरजेडी की इस मांग पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। बिहार के उपमुख्यमंत्री और भाजपा नेता विजय कुमार सिन्हा (Vijay Kumar Sinha) ने इस मांग को सिरे से खारिज करते हुए बड़ा बयान दिया है।

भाजपा नेताओं ने कहा कि जिस व्यक्ति ने बिहार को अपराध, भ्रष्टाचार और नरसंहारों के लिए बदनाम किया, उनके लिए भारत रत्न की मांग करना हास्यास्पद है।

  • विजय कुमार सिन्हा का बयान: उन्होंने कहा, “भ्रष्टाचार के मामले में सजायाफ्ता व्यक्ति के लिए भारत रत्न की मांग करना संविधान और जनभावना का अपमान है। जिन्होंने बिहार को लूटा, उन्हें ‘भारत रत्न’ नहीं बल्कि ‘लूट रत्न’ या ‘भ्रष्टाचार रत्न’ मिलना चाहिए।”

JDU ने भी साधा निशाना

जेडीयू (JDU) के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने भी आरजेडी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि लालू यादव को कोर्ट ने चारा घोटाले में दोषी माना है। ऐसे में आरजेडी नेताओं द्वारा भारत रत्न की मांग करना “मानसिक दिवालियापन” को दर्शाता है। एनडीए नेताओं का कहना है कि यह मांग केवल राजनीतिक स्टंट है।

  • मेरे पिता जी गरीबों के मसीहा हैं। जिस तरह कर्पूरी ठाकुर जी को सम्मान मिला, उसी तरह लालू जी भी ‘भारत रत्न’ के असली हकदार हैं। उन्होंने बिहार को आवाज दी है। जो लोग आज विरोध कर रहे हैं, वो कल खुद ही उन्हें सम्मान देंगे।- तेज प्रताप यादव, लालू यादव के बड़े पुत्र

बिहार में आगामी चुनावों और सियासी समीकरणों को देखते हुए यह विवाद और बढ़ने की उम्मीद है। एक तरफ आरजेडी अपने ‘सामाजिक न्याय’ के एजेंडे को धार दे रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा ‘भ्रष्टाचार’ के मुद्दे पर लालू परिवार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है।

यह मांग ऐसे समय उठी है जब दिल्ली कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब केस में लालू परिवार पर आरोप तय करने का आदेश दिया है

Jhanjharpur News: वीबी जी राम जी योजना में राम के नाम से विपक्ष को लग रही मिर्ची NDA ने गिनाई खूबियां

भाजपा

झंझारपुर (मधुबनी): भाजपा जिला कार्यालय झंझारपुर में एनडीए (NDA) की ओर से आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्षी दलों पर जमकर निशाना साधा गया। भाजपा जिला अध्यक्ष बच्चा बाबू कामत ने कहा कि विपक्ष के पास अब कोई मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए उनका एकमात्र कार्य सिर्फ विरोध करना रह गया है।

प्रेस वार्ता के दौरान केंद्र सरकार की नई पहल ‘वीबी जी राम जी’ (विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण) कार्यक्रम पर चर्चा करते हुए एनडीए नेताओं ने इसे गेम चेंजर बताया।

​’राम’ के नाम से विपक्ष को परेशानी

भाजपा जिला अध्यक्ष बच्चा बाबू कामत ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि विपक्षी दल अब ‘वीबी जी राम जी’ कार्यक्रम का विरोध सिर्फ इसलिए कर रहे हैं क्योंकि इसमें भगवान ‘राम’ का नाम जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, “योजना के नाम में राम शब्द देखकर विपक्ष को मिर्ची लग रही है, जबकि यह योजना गरीबों के कल्याण के लिए है।”

मनरेगा से बेहतर: अब 125 दिन काम की गारंटी

योजना की खूबियों को गिनाते हुए श्री कामत ने बताया कि पहले मनरेगा के तहत 100 दिनों के रोजगार का प्रावधान था, लेकिन ‘वीबी जी राम जी’ के तहत अब इसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी को और मजबूत करेगा।

सप्ताहिक भुगतान और प्रशासनिक व्यय में वृद्धि

प्रेस कॉन्फ्रेंस में रालोमो (RLM) के जिला अध्यक्ष रंजीत कामत ने विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को दूर किया। उन्होंने कहा:

  • विपक्ष इस योजना का गलत प्रचार कर रहा है।
  • ​योजना में प्रशासनिक व्यय को 6% से बढ़ाकर 9% कर दिया गया है।
  • ​मजदूरों का साप्ताहिक भुगतान (Weekly Payment) अनिवार्य रूप से तय किया गया है, जिससे श्रमिकों को आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

विकसित भारत 2047 का लक्ष्य

भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अनुरंजन झा ने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य गांवों और गरीबों को सबल बनाना है। यह पहल भारत को 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी। वहीं, हम पार्टी (HAM) की जिला अध्यक्ष विमला देवी ने भी इस नए कानून का स्वागत किया।

ये रहे उपस्थित

इस मौके पर भाजपा जिला अध्यक्ष बच्चा बाबू कामत, रालोमो जिला अध्यक्ष रंजीत कामत, हम पार्टी जिला अध्यक्ष विमला कुमारी, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अनुरंजन झा एवं सत्यनारायण अग्रवाल, भाजपा महिला प्रकोष्ठ जिला अध्यक्ष कामिनी देवी, दीपक कुमार झा, संदीप दास, पंकज चौधरी, ललन कान्त मिश्रा, विप्लेश ठाकुर, कुमार राजा, बजरंगी दास, प्रदीप ठाकुर, संजय राय, ललन पासवान, वरुण ठाकुर और दीपु मंडल समेत एनडीए के कई वरिष्ठ कार्यकर्ता उपस्थित थे।